उमंग सिंघार का बड़ा आरोप सिंगरौली में AI फोटो से फर्जी मनरेगा मजदूर भुगतान मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग


सिंगरौली /विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले में मनरेगा योजना के तहत चल रहे फर्जीवाड़े को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर आरोप लगाया कि AI जनरेटेड फर्जी मजदूरों की तस्वीरें अपलोड कर उनके नाम पर भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें कमीशन की मांग भी शामिल है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

सिंघार ने कहा कि सिंगरौली में 120 से अधिक मजदूरों के नाम AI द्वारा बनाई गई फर्जी तस्वीरों के माध्यम से भुगतान किया गया है। इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जी-रामजी योजना का उद्देश्य मजदूरों के सम्मान और उनकी आर्थिक सुरक्षा होना चाहिए न कि सरकारी धन की लूट का साधन। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले का संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

सिंघार ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि भाजपा केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है जबकि योजनाओं के धरातलीय कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार हो रहा है और गरीब मजदूरों के हक को मारा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामले न केवल योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं बल्कि आम नागरिकों में सरकार और प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ाते हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने इस अवसर पर चंदेरी की घटना को भी लेकर सरकार पर निशाना साधा। अशोकनगर जिले के चंदेरी में भाजपा नेता और सरपंच द्वारा एक युवक की कथित पिटाई का वीडियो साझा करते हुए उन्होंने इसे कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताया। सिंघार ने कहा कि सत्ता से जुड़े लोग जब कानून हाथ में ले लेते हैं तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग और प्रशासन की विफलता करार दिया।

सिंघार ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह न केवल फर्जीवाड़ों की जांच करे बल्कि कानून के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया गया तो समाज में कानून और व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा और भ्रष्टाचार और गुंडाराज बढ़ेगा।

इस पूरे मामले ने प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यान्वयन और प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल लगातार ऐसे मामलों को उजागर कर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करती है या इन फर्जीवाड़ों और हिंसक घटनाओं को अनदेखा करती रहती है।