कैंसर से पिता को खोने का दर्द आज भी है ताजा, अक्षय कुमार बोले- हर तीसरे पुरुष को है खतरा, टेस्ट कराने में न बरतें लापरवाही

नई दिल्ली : बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार अपनी फिटनेस और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में एक इवेंट के दौरान उनका एक बेहद भावुक और मानवीय पहलू सामने आया। अक्षय कुमार, जो अक्सर अपनी फिल्मों और विज्ञापनों के जरिए समाज को जागरूक करते रहते हैं, इस बार एक ऐसे मुद्दे पर खुलकर बोले जो सीधे तौर पर पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इंडिया टुडे के एक विशेष कार्यक्रम में पहुंचे अक्षय ने अपने पिता स्वर्गीय हरि ओम भाटिया को याद करते हुए प्रोस्टेट कैंसर के प्रति लोगों को सचेत किया। उन्होंने बेहद भावुक स्वर में स्वीकार किया कि उनके पिता को खोने की एक बड़ी वजह समय पर सही जानकारी का न होना था।

अक्षय कुमार ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि जब उनके पिता 50-55 वर्ष की आयु के थे, तब उन्हें और उनके परिवार को ‘PSA’ यानी प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन टेस्ट के महत्व के बारे में पता नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके पिता उनके लिए पूरी दुनिया थे, लेकिन महज 67 साल की उम्र में वे दुनिया छोड़कर चले गए। अक्षय के अनुसार, अगर उन्हें इस टेस्ट के बारे में पहले से पता होता, तो शायद बीमारी का शुरुआती दौर में ही पता चल जाता और उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी। इसी व्यक्तिगत क्षति को साझा करते हुए उन्होंने मंच से सभी पुरुषों और उनके परिवारों से एक खास अनुरोध किया।

अभिनेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रोस्टेट कैंसर आज के समय में बहुत आम हो गया है और हर तीसरे पुरुष को इसका खतरा रहता है। अक्षय ने जोर देकर कहा कि 50 साल की उम्र पार करने के बाद हर पुरुष को साल में कम से कम एक बार नियमित रूप से PSA टेस्ट जरूर कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट न केवल आपकी जान बचा सकता है, बल्कि आपके पूरे परिवार को एक बड़े संकट से भी बचा सकता है। अक्षय का मानना है कि बीमारी का समय पर पता चल जाना ही सबसे बड़ा इलाज है और जागरूकता ही इस जानलेवा बीमारी से लड़ने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, PSA टेस्ट रक्त में प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन की मात्रा को मापता है। हालांकि PSA का स्तर बढ़ना हमेशा कैंसर नहीं होता-यह प्रोस्टेट संक्रमण या बढ़े हुए प्रोस्टेट का संकेत भी हो सकता है-लेकिन इसकी जांच से खतरे को समय रहते पहचाना जा सकता है। साल 2000 में अपने पिता को खोने वाले अक्षय कुमार आज भी उस टीस को महसूस करते हैं और यही कारण है कि वे अब स्वास्थ्य के प्रति इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस संदेश की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है और इसे एक जरूरी हेल्थ अवेयरनेस कदम माना जा रहा है।