ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछाल
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.69% यानी 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड में 3% से ज्यादा यानी 4.15 डॉलर की तेजी आई और यह 116.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।यह तेजी दिन के शुरुआती कारोबार में ही देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
कुछ ही दिनों में 60% से ज्यादा चढ़ा तेल
मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया, यानी करीब 60% की तेजी। साल 2026 में अब तक तेल की कीमतों में लगभग 90% तक उछाल देखा जा चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता
तेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया।ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो “तेहरान पर बड़ा हमला” किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है।”
होर्मुज स्ट्रेट: तेल सप्लाई की लाइफलाइन
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
ईरान का सख्त रुख, सीजफायर से इनकार
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
शेयर बाजार पर भी असर
तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका का वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।
आगे क्या? बाजार की नजर भू-राजनीति पर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं, किसी समझौते की स्थिति में कीमतों में राहत मिल सकती है।
मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल आया है। होर्मुज स्ट्रेट पर असर और ईरान के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
