गालिबफ ने कहा कि अमेरिका पर ईरान का गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है और अमेरिका बार बार अपने कमिटमेंट्स का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान के 10 पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव के तीन हिस्सों का उल्लंघन हुआ है। इसमें शामिल है इजरायल का लेबनान पर लगातार हमला ईरानी एयरस्पेस में ड्रोन का प्रवेश और ईरानी यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नकारना।
अमेरिका और ईरान के बीच 10 पॉइंट्स पर बनी सहमति में सबसे पहला बिंदु दोनों पक्षों द्वारा गैर आक्रामकता की गारंटी देना और ईरान के यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करना था। दूसरा ईरान की सेना के साथ तालमेल बनाकर होर्मुज स्ट्रेट से नियंत्रित मार्ग सुनिश्चित करना। तीसरा लेबनान में हिज्बुल्लाह समूह के खिलाफ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना। चौथा इलाके के सभी बेस और डिप्लॉयमेंट पॉइंट से अमेरिकी सुरक्षा बलों को हटाना।
साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना होर्मुज स्ट्रेट में एक सुरक्षित ट्रांजिट प्रोटोकॉल बनाना जो तय शर्तों के तहत ईरानी दबदबे की गारंटी दे संघर्ष के दौरान ईरान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई करना और ईरान के खिलाफ सभी मुख्य और द्वितीयक प्रतिबंध हटाना भी शामिल है। इसके अलावा विदेश में सभी ब्लॉक ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना और इन सभी शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाइंडिंग प्रस्ताव के जरिए मंजूरी देना तय किया गया था।
ईरान के डेलीगेशन ने इस विवाद के बीच अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के लिए गुरुवार रात इस्लामाबाद में पहुंचने की तैयारी की है। पाकिस्तान में ईरानी राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमैटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायली सरकार द्वारा बार बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित गंभीर बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद पहुंच रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद की यह पहल दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाने और सीजफायर के उल्लंघनों पर स्पष्ट समाधान निकालने में अहम साबित हो सकती है। आने वाली बैठक में इन 10 पॉइंट्स और उल्लंघनों पर चर्चा होगी जो इस क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
