नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर सुरक्षा और स्थिति सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने कड़े कदम उठाए हैं। यह नियम विशेष रूप से 152 क्षेत्रों में लागू होता है, जहां 23 अप्रैल को मतदान होना है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या अवैध प्रवेश को भी शामिल करना है। अधिकारियों के अनुसार इस समूह के बाहरी बूथ स्तर के अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे जो कंपनियों के दस्तावेजों की प्राथमिक जांच करेंगे।
इसके अलावा मतदान केंद्रों में प्रवेश से पहले दो अलग-अलग जगहों पर पहचान सत्यापन की व्यवस्था की गई है, यानी कि लेक में दो अलग-अलग स्थानों पर अपने दस्तावेज की पुष्टि करानी होगी, इसके बाद ही उन्हें वोट की मंजूरी पर वोट दिया जाएगा, इस बहुसांस्कृतिक जांच प्रणाली का उद्देश्य फर्जी मतदान पूरी तरह से तरह की पुष्टि करना है, ताकि केवल वास्तविक सामग्री ही अपने अधिकार का उद्देश्य कर सके। अभिलेख वितरण को लेकर भी आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
अगर किसी मतदाता सूची में मौजूद अधिकारी सूची में नाम और फोटो का मिलान करके उसकी पहचान सुनिश्चित की जाएगी और सही पाए जाने पर उसे वोट की अनुमति दी जाएगी।इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने अधिकारियों के खिलाफ स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की अनियमितता को लेकर उन्हें चेतावनी दी गई है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरा सी भी आपत्ति सामने आ सकती है, संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें निलंबन तक शामिल हो सकता है।
सभी जिला अधिकारियों के माध्यम से ऑनलाइन बैठकों की तैयारी में रहने के निर्देश दिए गए हैं और किसी भी भव्य घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।कुल नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग इस रणनीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि वह पश्चिम बंगाल में चुनाव में पूरी तरह से स्वतंत्र पद और पद के पदों के लिए अधिकार प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।