12,000 KM अग्नि-6 से हिला रणनीतिक संतुलन! भारत की मिसाइल ताकत पर पाक प्रोफेसर की तीखी टिप्पणी



नई दिल्ली। भारत की रक्षा क्षमता को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो गई है, खासकर जब लंबी दूरी की अगली पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल Agni-VI missile को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के बयान के बाद यह साफ हुआ है कि अगर सरकार मंजूरी देती है तो अग्नि-6 का परीक्षण पूरी तरह तैयार है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता लगभग 12,000 किलोमीटर बताई जा रही है, जो इसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी में रखती है।

इस मुद्दे पर पाकिस्तान मूल के स्कॉटलैंड स्थित ग्लासगो यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर Zafar Khan ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और एक लेख में दावा किया कि पश्चिमी देश अक्सर पाकिस्तान की कथित लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं पर चर्चा करते हैं, जबकि भारत की बढ़ती रणनीतिक ताकत पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।

जफर खान का कहना है कि भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमता सिर्फ रक्षा जरूरत नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन और वैश्विक रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने का संकेत भी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के विकास से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ सकता है और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का मिसाइल विकास कार्यक्रम पूरी तरह रक्षा और निवारक रणनीति (deterrence) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत पहले ही Agni-V missile जैसे सिस्टम का सफल परीक्षण कर चुका है, जिसकी रेंज चीन के बड़े हिस्से तक पहुंचने में सक्षम है।

वहीं पाकिस्तान की ओर से आने वाली टिप्पणियों को रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिण एशिया में दोनों देशों के बीच रक्षा संतुलन लगातार संवेदनशील बना हुआ है।

कुल मिलाकर यह मामला केवल मिसाइल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति, शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति से जुड़ा हुआ बड़ा मुद्दा बन गया है।