पंचक काल की शुरुआत, शनि की राशि में चंद्रमा का गोचर; इन राशियों को रहना होगा सतर्क


नई दिल्ली । 31 जुलाई 2026 की सुबह 6:37 बजे चंद्रमा ने शनि की राशि कुंभ में प्रवेश किया, जिसके साथ ही पंचक काल की शुरुआत हो गई। हिंदू ज्योतिष में पंचक को विशेष महत्व दिया जाता है और इसे कुछ कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। इस बार पंचक शुक्रवार से शुरू होने के कारण इसे चोर पंचक कहा जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह पंचक 2 अगस्त तक चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने के दौरान कुछ राशियों के लिए अधिक सतर्कता का संकेत दे रहा है।

धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरते हुए कुंभ और मीन राशि में रहता है, तब पंचक काल बनता है। यह अवधि लगभग पांच दिनों की होती है और हर महीने आती है। इस दौरान कई लोग शुभ कार्यों को टालने और विशेष सावधानी बरतने की परंपरा का पालन करते हैं।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पंचक के शुरुआती तीन दिन विशेष रूप से कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

कर्क राशि के लोगों को इस दौरान आर्थिक और व्यावसायिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। किसी भी नई डील या निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना बेहतर माना गया है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयमित व्यवहार रखने की जरूरत है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद या गुस्सा रिश्तों और काम दोनों को प्रभावित कर सकता है।

वृश्चिक राशि के जातकों को स्वास्थ्य और वित्तीय मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अनावश्यक खर्चों से बचने, निवेश सोच-समझकर करने और कार्यस्थल पर बहस या अहंकार से दूर रहने की आवश्यकता बताई जाती है। परिवार के साथ संतुलन बनाए रखना भी इस समय महत्वपूर्ण माना गया है।

मीन राशि के लोगों के लिए भी यह समय आर्थिक मामलों में सतर्कता बरतने का संकेत देता है। बड़े लेन-देन, उधार या किसी नए वित्तीय समझौते में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल पर गोपनीय जानकारी साझा करने में सावधानी बरतना और पारिवारिक जीवन में संवाद बनाए रखना लाभदायक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल में शुभ कार्यों, निर्माण कार्यों या कुछ विशेष मांगलिक गतिविधियों को टालने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराएं हैं तथा इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ज्योतिषीय योग या पंचक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात धैर्य, संयम और सोच-समझकर निर्णय लेना है। सकारात्मक सोच, नियमित पूजा-पाठ और अपने दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना हर परिस्थिति में लाभदायक माना जाता है।