भगवान कृष्ण को ही क्‍यों लगाते हैं 56 भोग? इसके पीछे हैं 3 पौराणिक मान्यताएं


नई दिल्ली। जन्माष्टमी हो या दिवाली के बाद मनाया जाने वाला अन्नकूट पर्व, भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। खास बात यह है कि छप्पन भोग में सिर्फ मिठाइयां ही शामिल नहीं होतीं, बल्कि मीठे-नमकीन व्यंजन, फल, पेय और कई तरह के पारंपरिक पकवान भी शामिल किए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर भगवान कृष्ण को 56 तरह के भोग ही क्यों लगाए जाते हैं? इस संख्या के पीछे तीन प्रमुख पौराणिक मान्यताएं बताई जाती हैं।

पहली मान्यता : 7 दिन और 8 प्रहर से बना 56 का आंकड़ा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता यशोदा बाल स्वरूप भगवान कृष्ण को दिन में 8 प्रहर में 8 बार भोजन कराती थीं। जब भगवान कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया, तब वे लगातार 7 दिन तक अन्न-जल ग्रहण नहीं कर सके।

कथा के अनुसार, आठवें दिन जब बारिश थमी और भगवान ने गोवर्धन पर्वत नीचे रखा, तब ब्रजवासियों और माता यशोदा ने सात दिनों के दौरान भगवान के लिए तय किए गए आठों प्रहर के भोजन को एक साथ परोसा। यानी 7 दिन × 8 प्रहर = 56। तभी से कृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा शुरू होने की मान्यता है।

दूसरी मान्यता : दिव्य कमल की 56 पंखुड़ियां

एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, गोलोक में भगवान कृष्ण राधा जी के साथ जिस दिव्य कमल पर विराजमान रहते हैं, उसमें 56 पंखुड़ियां होती हैं। इस कमल की तीन परतें बताई गई हैं।

पहली परत में 8, दूसरी में 16 और तीसरी परत में 32 पंखुड़ियां मानी जाती हैं। तीनों को जोड़ने पर संख्या 8+16+32=56 होती है। इसी वजह से भी भगवान कृष्ण को 56 भोग अर्पित करने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

तीसरी मान्यता : गोपिकाओं ने अर्पित किए थे 56 भोग

श्रीमद्भागवत कथा से जुड़ी एक अन्य मान्यता में बताया जाता है कि भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने की इच्छा से गोपिकाओं ने एक महीने तक प्रतिदिन भोर में यमुना में स्नान किया और कात्यायिनी माता की पूजा-अर्चना करते हुए व्रत रखा।

जब भगवान कृष्ण ने उनकी मनोकामना पूरी करने की सहमति दी, तब गोपिकाओं ने प्रसन्न होकर भगवान को 56 प्रकार के भोग बनाकर अर्पित किए। इस मान्यता को भी छप्पन भोग की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

छप्पन भोग में क्या-क्या होता है?

छप्पन भोग में अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों के अनुसार व्यंजनों की सूची बदल सकती है। इसमें मिठाइयों के साथ नमकीन पकवान, फल, पेय और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक भोजन शामिल किए जाते हैं। भक्त इन्हें श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान कृष्ण को अर्पित करते हैं।

यानी 56 भोग सिर्फ व्यंजनों की संख्या नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने की धार्मिक परंपरा के रूप में देखा जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की अलग-अलग परंपराओं में अलग-अलग व्याख्या मिल सकती है। हम इनकी तथ्यात्मक पुष्टि नहीं करते हैं।