बुरहानपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। अजय सिंह कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी के घर पहुंचे थे और उनके स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान अचानक हवाई फायरिंग की गई। माला पहनाने के समय हुई गोली की आवाज से अजय सिंह कुछ देर के लिए सहम गए। बताया गया कि उन्होंने फायरिंग करने वाले व्यक्ति से ऐसा न करने की बात भी कही। इसके बाद जब दोबारा फायरिंग हुई तो वह फिर चौंक गए। अब इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वागत के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कितनी उचित हैं।
उधर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से बातचीत के दौरान मंत्री ने एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री का नाम पूछा। जब ग्रामीण स्पष्ट जवाब नहीं दे सका तो मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का नाम बताया और फिर अपना परिचय भी दिया। उन्होंने खुद को इंदौर से आया बताते हुए अपने विभाग के बारे में जानकारी दी और कहा कि वह जल से जुड़ा विभाग संभालते हैं। लेकिन इस दौरान उनके हाथ के हाव भाव और इशारे को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री का यह अंदाज चर्चा में आ गया।
दमोह जिले के पथरिया में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल ने सड़कों के गड्ढों को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के लोगों को सड़कों के गड्ढे दिखाई देते हैं लेकिन पुराने समय में कई जगह सड़कें ही नहीं थीं। मंत्री ने लोगों को अपने बुजुर्गों से पूछने की सलाह देते हुए कहा कि पहले सड़कें देखना भी बड़ी बात थी। उनके इस बयान पर लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे पुराने और नए दौर के विकास की तुलना बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे खराब सड़कों की समस्या से ध्यान हटाने वाला बयान मान रहे हैं।
इसी बीच खंडवा में एक प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का फोन कॉल भी चर्चा में रहा। प्रशासन की टीम एक शराब दुकान के अहाते पर कार्रवाई कर रही थी तभी अधिकारी के पास सांसद का फोन आया। बताया गया कि कार्रवाई रुकवाने को लेकर बातचीत हुई लेकिन अधिकारी ने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की बात कही और सांसद को कलेक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया।
इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेताओं के बयान हों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली घटनाएं हर मामला अब तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है और जनता भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।
