शिवभक्तों के लिए जरूरी खबर, असली और नकली रुद्राक्ष में ऐसे पहचानें अंतर, इन चार बातों पर दें ध्यान


नई दिल्ली । भगवान शिव की पूजा और उपासना में रुद्राक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रिय माना गया है और इसे धारण करने से सकारात्मक ऊर्जा तथा मानसिक शांति मिलने की मान्यता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुद्राक्ष की माला या एकल दाने को अपने पास रखते हैं। लेकिन इसकी बढ़ती मांग के बीच बाजार में नकली रुद्राक्ष भी बेचे जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार प्लास्टिक लकड़ी या दूसरे बीजों से तैयार किए गए दानों को असली बताकर ग्राहकों को बेच दिया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि रुद्राक्ष खरीदते समय उसकी बनावट और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए। कुछ सामान्य तरीकों से शुरुआती जांच जरूर की जा सकती है लेकिन किसी भी घरेलू परीक्षण को असली होने का पक्का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।

रुद्राक्ष की पहचान के लिए सबसे पहले उसकी प्राकृतिक बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। असली रुद्राक्ष पर ऊपर से नीचे तक प्राकृतिक धारियां बनी होती हैं। इन धारियों को मुख कहा जाता है। हर दाने में मुखों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। इनकी बनावट प्राकृतिक होती है और धारियां दाने के एक सिरे से दूसरे सिरे तक दिखाई देती हैं। नकली रुद्राक्ष में कई बार मशीन या हाथ से बनाई गई कृत्रिम लकीरें देखने को मिलती हैं। इसलिए खरीदते समय दाने को ध्यान से देखना चाहिए। हालांकि केवल धारियां देखकर भी असली होने का अंतिम फैसला नहीं किया जा सकता क्योंकि नकली दानों पर भी ऐसी बनावट तैयार की जा सकती है।

दूसरा तरीका पानी से जुड़ा हुआ है। पारंपरिक रूप से कुछ लोग रुद्राक्ष को पानी से भरी कटोरी में डालकर उसकी जांच करते हैं। ऐसी मान्यता है कि असली रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है जबकि नकली दाना ऊपर तैर सकता है। लेकिन यह तरीका पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। रुद्राक्ष की नमी उसके अंदर मौजूद हवा और प्राकृतिक संरचना के कारण उसका व्यवहार बदल सकता है। कई असली रुद्राक्ष भी पानी में तैर सकते हैं और कुछ नकली दाने डूब सकते हैं। इसलिए केवल इस परीक्षण के आधार पर खरीदारी का फैसला करना ठीक नहीं है।

इसी तरह तांबे के सिक्कों वाला परीक्षण भी काफी प्रचलित है। इसमें रुद्राक्ष को तांबे के दो सिक्कों के बीच रखकर उसके कंपन या हलचल को देखने की बात कही जाती है। कुछ लोग इसे असली रुद्राक्ष की पहचान बताते हैं लेकिन इसके समर्थन में कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए सिक्कों के बीच किसी तरह की हलचल महसूस होना या नहीं होना रुद्राक्ष की शुद्धता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

रुद्राक्ष पर रंग या पॉलिश चढ़ाकर उसे आकर्षक बनाने की संभावना भी रहती है। इसलिए खरीदते समय उसके रंग और सतह पर ध्यान देना चाहिए। यदि दाने पर असामान्य चमक दिखाई दे या रंग असमान नजर आए तो विक्रेता से उसकी प्रक्रिया और गुणवत्ता के बारे में जानकारी लें। सरसों के तेल में भिगोकर रंग जांचने का तरीका भी प्रचलित है लेकिन यह प्रमाणित जांच नहीं है। तेल के कारण प्राकृतिक दाने की सतह प्रभावित हो सकती है इसलिए बिना जानकारी के ऐसा प्रयोग करने से बचना चाहिए।

रुद्राक्ष खरीदते समय सबसे जरूरी बात विश्वसनीय विक्रेता का चुनाव करना है। विक्रेता से दाने की उत्पत्ति और गुणवत्ता की जानकारी मांगें। महंगे या दुर्लभ मुखी रुद्राक्ष को खरीदने से पहले किसी अनुभवी विशेषज्ञ या विश्वसनीय रत्न एवं बीज परीक्षण प्रयोगशाला से जांच कराने पर विचार करें। जरूरत पड़ने पर माइक्रोस्कोप से इसकी प्राकृतिक संरचना और धारियों की जांच की जा सकती है।

धार्मिक आस्था से जुड़े रुद्राक्ष को खरीदते समय जल्दबाजी और कम कीमत के लालच में फैसला नहीं करना चाहिए। याद रखें कि पानी का परीक्षण तांबे के सिक्के या तेल से जांच करने जैसे घरेलू नुस्खे असली होने की गारंटी नहीं देते। सही जानकारी और भरोसेमंद जांच ही नकली रुद्राक्ष खरीदने से बचने का बेहतर तरीका है।