गर्मी से पहले जल संकट से निपटने की तैयारी, नगर निगम खरीदेगा 30 से ज्यादा पानी के टैंकर, हाइड्रेंट्स पर CCTV से होगी निगरानी


इंदौर । इंदौर में पानी की बचत और टैंकरों से होने वाली बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। अब रोड मीडियन की सफाई और बगीचों में पानी डालने के लिए इस्तेमाल होने वाले ट्रीटेड पानी के टैंकरों पर पीली पट्टी लगाई जाएगी। इससे आम लोग इन टैंकरों को आसानी से पहचान सकेंगे और यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें सामान्य उपयोग के बजाय ट्रीटेड पानी भरा है। इसके साथ ही जिन टैंकरों से पानी का रिसाव होता है और चलते समय सड़कों पर पानी गिरता रहता है उन्हें सुधारने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। तय समय में सुधार नहीं होने पर संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

दरअसल नगर निगम जब टैंकरों के जरिए रोड मीडियन की सफाई करता है या शहर के बगीचों में पानी डालता है तो कई बार लोग इसके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। इन वीडियो के आधार पर निगम पर पीने योग्य पानी बर्बाद करने के आरोप लगाए जाते हैं। जबकि निगम के अनुसार इन कामों में ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में टैंकरों की अलग पहचान नहीं होने से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए ट्रीटेड पानी के टैंकरों पर पीली पट्टी लगाने का निर्णय लिया गया है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि गर्मी के मौसम में शहर में जलसंकट की स्थिति से निपटने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए अभी से तैयारी की जा रही है। नगर निगम 30 से ज्यादा नए टैंकर खरीदने वाला है। इससे जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने और शहर में विभिन्न कार्यों के लिए टैंकरों की उपलब्धता बढ़ाई जा सकेगी। इसके अलावा शहर के हाइड्रेंट्स की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी योजना है। कैमरों के जरिए हाइड्रेंट्स पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और पानी के इस्तेमाल की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी।

पानी की बर्बादी को लेकर सोशल मीडिया पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। गर्मी के दिनों में महापौर के घर के बाहर पानी से सफाई किए जाने का एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद पानी की बर्बादी को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि उस काम में भी ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई थी। अब निगम ने ट्रीटेड पानी के टैंकरों पर पीली पट्टी लगाने का फैसला किया है ताकि ऐसे मामलों में लोगों को वास्तविक स्थिति समझने में आसानी हो।

नगर निगम ने टैंकरों से पानी के रिसाव को भी गंभीरता से लिया है। महापौर के मुताबिक जिन एजेंसियों ने शहर में पानी पहुंचाने के लिए अपने टैंकर लगाए हैं उन्हें लीकेज ठीक कराने के लिए सात दिन की मोहलत दी गई है। इस अवधि में टैंकरों की मरम्मत कराना जरूरी होगा। यदि निर्धारित समय के बाद भी किसी टैंकर से पानी सड़क पर गिरता मिला तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा। खास बात यह है कि इस नियम के दायरे में नगर निगम की अपनी एजेंसियां भी रहेंगी। निगम के टैंकरों से पानी की बर्बादी होने पर भी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

इसके लिए वर्कशॉप विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निगम के जिन टैंकरों में लीकेज है उन्हें तत्काल सुधारा जाए। इससे पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकने के साथ टैंकरों की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी। गर्मी से पहले टैंकरों की संख्या बढ़ाने और हाइड्रेंट्स की निगरानी की तैयारी के बीच निगम का जोर अब पानी के सही इस्तेमाल पर है। पीली पट्टी और लीकेज पर कार्रवाई की नई व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है यह आने वाले दिनों में सामने आएगा।