Author: bharati

  • दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    नई दिल्ली । दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों का असर राजधानी के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में दुकानों को बंद रखना पड़ रहा है और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। इसका असर ऐसे समय में दिखाई दे रहा है, जब दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के कारण कारोबार में तेजी आने की उम्मीद रहती है। इस स्थिति को लेकर विभिन्न व्यापारी संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताई हैं और बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की मांग की है।

    राजधानी में केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। व्यापारियों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के कारण कई बाजारों में लोग खरीदारी के लिए आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि जब सड़कों पर प्रदर्शन होते हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी या असुरक्षा की आशंका रहती है, तो बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट जाती है। इससे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित होती है और त्योहारों के दौरान होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

    दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि दशहरा और दिवाली का समय बिजली की सजावटी लाइटों, झूमरों और घरों को सजाने वाले सामान के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन त्योहारों के दौरान लोग घरों और प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए बड़ी संख्या में सामान खरीदते हैं। ऐसे में बाजारों में मांग बढ़ने से व्यापारियों को साल के इस हिस्से में बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती है। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शनों के कारण उन्हें बिक्री प्रभावित होने की चिंता सता रही है।

    अजय शर्मा ने सरकार और प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की कि फिलहाल विरोध प्रदर्शनों को टालने पर विचार किया जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के कारण लोग सड़कों पर निकलने से डर रहे हैं। उनके मुताबिक, अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, जिससे विरोध भी दर्ज हो सके और आम लोगों तथा कारोबारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    व्यापारी संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि कारोबार में गिरावट का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। बाजारों में बिक्री कम होने पर सरकार को मिलने वाले कर राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी में कमी आने से व्यापारिक गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं, जिसका असर संबंधित कारोबार और उससे जुड़े लोगों की आय पर पड़ेगा।

    फोटो मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार सेठी ने कहा कि देश में त्योहारों का कारोबारी मौसम 15 अगस्त के बाद शुरू हो जाता है। रक्षाबंधन से लेकर दिवाली के बाद तक बाजारों में आम तौर पर खरीदारी और बिक्री का स्तर बेहतर रहता है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों की सालभर की कमाई का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इन चार महीनों में आता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान कारोबार प्रभावित होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    सेठी ने प्रदर्शनों के तरीके पर भी सवाल उठाए और इन गतिविधियों को अराजकता बताते हुए आरोप लगाया कि इनके जरिए देश की स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क पर भी भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखने का आरोप लगाया और अपनी बात रखते हुए नेपाल तथा श्रीलंका में हुए घटनाक्रमों से तुलना की। ये आरोप उनके निजी बयान के रूप में सामने आए हैं।

    सेठी ने सरकार से मांग की कि मध्य दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में प्रदर्शनों की अनुमति देने के मामले में विशेष ध्यान रखा जाए। व्यापारियों का कहना है कि विरोध और अपनी मांगें रखने के अधिकार के साथ बाजारों की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना भी जरूरी है। उनका आग्रह है कि ऐसी व्यवस्था हो, जिससे त्योहारों के दौरान ग्राहक बाजारों तक पहुंच सकें और व्यापारियों को लगातार कारोबार प्रभावित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

  • दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में संघ के आयोजन पर जताई आपत्ति, सिंधिया से पूछा ग्वालियर में कार्यक्रम क्यों नहीं कराते

    दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में संघ के आयोजन पर जताई आपत्ति, सिंधिया से पूछा ग्वालियर में कार्यक्रम क्यों नहीं कराते


    मध्य प्रदेश।
    के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर के डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रस्तावित आयोजन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। इस मामले में उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा की है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से सवाल किया कि संघ का कार्यक्रम ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में क्यों नहीं कराया जाता। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखकर आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे।

    दिग्विजय सिंह इन दिनों अपनी प्रस्तावित सनातन यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं। इसी सिलसिले में इंदौर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। डेली कॉलेज में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर उन्होंने संस्थान के प्रबंधन के सामने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत सहित देशभर से राष्ट्रीय और प्रांत स्तर के पदाधिकारियों के शामिल होने का कार्यक्रम है। इसके अलावा 28 अक्टूबर को यहां करीब एक लाख स्वयंसेवकों के जुटने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

    दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी डेली कॉलेज बोर्ड के चेयरमैन विक्रम पंवार और अन्य सदस्यों के साथ बैठक हुई थी। बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि कॉलेज परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। हालांकि, उनके अनुसार बोर्ड चेयरमैन ने यह भी कहा कि इस बार संघ के आयोजन को रोकना संभव नहीं है। दिग्विजय सिंह ने इसी निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक परिसर में इस तरह के आयोजन से बचना चाहिए।

    उन्होंने बताया कि डेली कॉलेज के संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी उन्होंने इस विषय पर बात की थी। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से कहा कि कॉलेज में संघ का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि इस आयोजन के लिए ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का चयन क्यों नहीं किया जाता। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उनके इस सवाल पर सिंधिया ने कोई जवाब नहीं दिया।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मामले में डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखने जा रहे हैं। पत्र के माध्यम से वह आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह दस साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, तब इस दौरान डेली कॉलेज में कभी कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हुआ। उन्होंने ये बातें इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम के दौरान कहीं।

    राजनीतिक मतभेदों के बीच आपसी संबंधों पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपना पुराना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय के साथ उनकी मित्रता करीब 30 से 35 साल पुरानी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्ती के बावजूद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में कोई कमी नहीं रहती। दोनों एक-दूसरे की आलोचना भी करते हैं। उनके मुताबिक, राजनीति में मतभेद होना जरूरी है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके संबंध पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा और सुंदरलाल पटवा जैसे नेताओं के साथ भी मित्रतापूर्ण रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह विक्रम वर्मा के यहां शादी में शामिल हुए थे और सुंदरलाल पटवा के घर दाल-बाफले खाने भी जाते थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में इस तरह के आपसी संबंधों की परंपरा बनी रहनी चाहिए और असहमति को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।

    मध्य प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य पर करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है, जबकि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, तब यह लगभग 23 हजार करोड़ रुपये था। लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी संकेतों में इस योजना को आर्थिक बोझ बता चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब फिलहाल योजना के तहत 1,250 रुपये की किस्त दी जा रही है, तो इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये करने पर स्थिति क्या होगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आगे की स्थिति को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव देखेंगे।

  • राहुल गांधी ने उठाए एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण, हॉस्टलों की बदहाली और बालाघाट के आदिवासी परिवारों के गंभीर मुद्दे

    राहुल गांधी ने उठाए एमपी में 27% ओबीसी आरक्षण, हॉस्टलों की बदहाली और बालाघाट के आदिवासी परिवारों के गंभीर मुद्दे

    नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश के जरिए पिछले एक महीने के दौरान अपने दौरों, मुलाकातों और उठाए गए मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग से लेकर छात्रों की समस्याओं और बालाघाट के आदिवासी परिवारों की परेशानियों पर अपनी बात रखी। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, संस्थाओं की जवाबदेही और निष्पक्ष परीक्षाओं से जुड़े सवाल भी उठाए।

    राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां युवाओं के साथ शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हुई। छात्रों ने सत्य निकेतन की घटना, शिक्षा बजट में कटौती, छात्रावासों की कमी और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे सामने रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    अपने संदेश में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी आरोप लगाए। उनका कहना था कि इनके नेतृत्व में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों का संस्थानों पर प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि व्यवस्था को सवाल पूछने वाले छात्रों के बजाय अंधसमर्थक चाहिए। ये टिप्पणियां राहुल गांधी के राजनीतिक आरोपों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताओं का हिस्सा थीं।

    राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में आदिवासी छात्रों से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों की खराब स्थिति और वहां लागू कड़े नियमों को लेकर उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा था। उनके अनुसार, इसके बाद छात्रावास में रहने के लिए निर्धारित आयु सीमा से संबंधित नियम वापस ले लिया गया। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के प्रति समर्थन भी जताया।

    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग की। यह मुद्दा प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था और उससे जुड़े कानूनी तथा प्रशासनिक फैसलों के बीच महत्वपूर्ण बना हुआ है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में इस मांग को प्रमुखता से उठाया और राज्य सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की।

    उन्होंने बालाघाट के दौरे के दौरान आदिवासी परिवारों से हुई मुलाकात को भी याद किया। राहुल गांधी ने उन परिवारों की पीड़ा का जिक्र किया, जिन्होंने कुपोषण और गंभीर बीमारियों के कारण अपने छोटे बच्चों को खो दिया था। उन्होंने कहा कि कुछ दुख इतने गहरे होते हैं कि उन्हें शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक, इस दौरे का उद्देश्य पीड़ित परिवारों की बातें सुनना और उनके दुख में सहभागी बनना था।

    राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाते हुए दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 लोगों में से 728 लोगों का मतदान का अधिकार छिन गया। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान से जुड़े सवालों के रूप में पेश किया तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की।

    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, बैठक में आम नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा पर चर्चा हुई। इसके अलावा उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में दिशा समिति की बैठक और विकास कार्यों की समीक्षा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात तथा दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की जानकारी भी साझा की।

  • त्योहारों से पहले चीनी की बिक्री बढ़ाने की छूट, भारत की जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान

    त्योहारों से पहले चीनी की बिक्री बढ़ाने की छूट, भारत की जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन में बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति दी है। इस फैसले के तहत मिलें अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर, दोनों महीनों में बेच सकेंगी। यह बिक्री उनके नियमित मासिक कोटे के अतिरिक्त होगी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना और मांग के अनुरूप चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों को जारी निर्देश में अक्टूबर में उत्पादित चीनी की दोनों महीनों में बिक्री की अनुमति दी है। सामान्य मासिक आवंटन के अलावा अतिरिक्त मात्रा बेचने की छूट से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस अतिरिक्त बिक्री की अनुमति से बाजार में कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

    इस बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर भी सकारात्मक अनुमान सामने आया है। डेलॉयट इंडिया के आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 7.3 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इस अनुमान के पीछे निजी निवेश में सुधार को एक प्रमुख कारण बताया गया है। निजी क्षेत्र की ओर से निवेश बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों और बाजार की मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    आकलन के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष 2027-28 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मजबूत रह सकती है, हालांकि इसके कुछ धीमी रहने का अनुमान है। इस अवधि में जीडीपी वृद्धि दर 6.6 से 7 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है। यह अनुमान दर्शाता है कि आने वाले वित्त वर्षों में भी आर्थिक विस्तार जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन विकास की वास्तविक गति कई घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    आर्थिक विकास के सामने कुछ जोखिम भी बताए गए हैं। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली बाधाएं शामिल हैं। ऊर्जा की कीमतों में तेजी से उत्पादन और परिवहन की लागत प्रभावित हो सकती है। वहीं, वैश्विक व्यापार में रुकावटों का असर वस्तुओं की आपूर्ति और कारोबारी गतिविधियों पर पड़ सकता है। इन परिस्थितियों के कारण आर्थिक विकास के अनुमान में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

    इसी बीच, केंद्र सरकार ने वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो यानी एफएसआईबी का नए सिरे से गठन किया है। पूर्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव एससीएल दास को ब्यूरो का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल अधिसूचना जारी होने की तारीख से तीन साल का होगा। एफएसआईबी सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शीर्ष पदों पर नियुक्तियों के लिए सिफारिशें करता है। इस संस्था की भूमिका वित्तीय क्षेत्र में वरिष्ठ पदों पर चयन प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    नए अध्यक्ष के साथ ब्यूरो में छह सदस्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक अरिजीत बसु, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व निदेशक सतीश काशीनाथ मराठे और पूर्व कार्यकारी निदेशक रमनाथन सुब्रमणियन शामिल हैं। इनके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम के पूर्व प्रमुख सिद्धार्थ मोहंती, न्यू इंडिया एश्योरेंस की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नीरजा कपूर और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण की पूर्व सदस्य टीएल अलामेलु को भी सदस्य बनाया गया है।

    इस प्रकार, त्योहारी मांग को ध्यान में रखते हुए चीनी की अतिरिक्त बिक्री की अनुमति, आर्थिक विकास के अनुमान और वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो के नए गठन से जुड़े फैसले एक साथ सामने आए हैं। चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम निकट अवधि की बाजार मांग से जुड़ा है, जबकि जीडीपी वृद्धि के अनुमान और एफएसआईबी में नियुक्तियां अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय संस्थानों से संबंधित व्यापक घटनाक्रम हैं।

  • रेलवे टिकट पर सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का बीमा, जानिए किन यात्रियों को मिलेगा फायदा और कब लागू होंगे नए नियम

    रेलवे टिकट पर सिर्फ 45 पैसे में 10 लाख का बीमा, जानिए किन यात्रियों को मिलेगा फायदा और कब लागू होंगे नए नियम

    नई दिल्ली ।भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यात्रा बीमा से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब तक ऑनलाइन आरक्षित टिकट बुक करने वाले यात्रियों को मामूली प्रीमियम पर यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता था, लेकिन रेलवे के आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्री इस सुविधा से बाहर थे। अब इस अंतर को खत्म करने की तैयारी की जा रही है। दिए गए विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद रेलवे को 27 अक्टूबर 2026 से काउंटर से आरक्षित टिकट लेने वाले यात्रियों को भी इस सुविधा के दायरे में लाने के लिए व्यवस्था करने को कहा गया है।

    मौजूदा ऑनलाइन रेलवे यात्रा बीमा योजना की खास बात इसका कम प्रीमियम है। टिकट बुक करते समय यात्री केवल 45 पैसे देकर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा टिकट बुकिंग के दौरान उपलब्ध बीमा विकल्प और संबंधित शर्तों के अनुसार मिलती है। काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों के लिए प्रीमियम, बीमा चुनने की प्रक्रिया और दावा करने के विस्तृत नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आना जरूरी है। इसलिए फिलहाल यह मानना सही नहीं होगा कि प्रत्येक काउंटर टिकट पर बीमा अपने आप लागू हो चुका है।

    यात्रा बीमा का उद्देश्य ट्रेन दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों या उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देना है। दुर्घटना में यात्री की मृत्यु होने या स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर मौजूदा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जा सकता है। यह राशि दुर्घटना के परिणाम और बीमा पॉलिसी में निर्धारित शर्तों के आधार पर मिलती है।

    स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में 7.5 लाख रुपये तक के बीमा कवर का प्रावधान है। वहीं, गंभीर रूप से घायल होने पर दो लाख रुपये और मामूली चोट लगने की स्थिति में 10,000 रुपये तक की सहायता मिल सकती है। हालांकि, इन सभी मामलों में वास्तविक भुगतान पॉलिसी की शर्तों, चोट की प्रकृति और संबंधित पात्रता पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को बीमा को हर प्रकार की दुर्घटना या परेशानी के लिए मिलने वाला सामान्य मुआवजा नहीं समझना चाहिए।

    काउंटर टिकट लेने वाले यात्रियों को भी बीमा सुविधा के दायरे में लाने का मुख्य उद्देश्य टिकट खरीदने के माध्यम के आधार पर होने वाले अंतर को समाप्त करना है। देश में बड़ी संख्या में यात्री अब भी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर से टिकट लेते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी, बुजुर्ग और ऐसे लोग शामिल हैं जो ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा का नियमित इस्तेमाल नहीं करते। नई व्यवस्था लागू होने पर इन यात्रियों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार यात्रा बीमा लेने का अवसर मिल सकेगा।
    इस बदलाव को लागू करने के लिए रेलवे को अपने यात्री आरक्षण सिस्टम यानी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम में जरूरी तकनीकी और प्रक्रियागत संशोधन करने होंगे। काउंटर पर टिकट खरीदने के दौरान बीमा का विकल्प कैसे उपलब्ध कराया जाएगा, यात्रियों की सहमति किस तरह दर्ज होगी और पॉलिसी की जानकारी कैसे दी जाएगी, इन पहलुओं पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।

    यात्रियों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि बीमा का लाभ लेने के लिए बुकिंग के समय नियमों और शर्तों की जानकारी रखना आवश्यक है। ऑनलाइन टिकट लेते समय बीमा का विकल्प चुनने के बाद पॉलिसी से संबंधित संदेश और दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए। जहां लागू हो, वहां नामांकित व्यक्ति यानी नॉमिनी का विवरण भी सही भरना चाहिए। दुर्घटना की स्थिति में दावा करते समय ये जानकारियां उपयोगी हो सकती हैं।

    काउंटर से आरक्षित टिकट खरीदने वाले यात्रियों को नई व्यवस्था लागू होने के बाद रेलवे की आधिकारिक सूचना और बीमा पॉलिसी की शर्तें जांचनी चाहिए। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा लिया गया है या नहीं और उसका प्रमाण उपलब्ध है। केवल टिकट खरीद लेने से बीमा कवर मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसका लाभ संबंधित नियमों और प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

  • अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव

    अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे तिमाही नतीजे, विदेशी निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह कई अहम संकेत लेकर आने वाला है। सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में एक बार फिर दबाव देखने को मिलता है।

    बीते सप्ताह निफ्टी 50 में 2.77 प्रतिशत और सेंसेक्स में 3.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में नई खरीदारी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव में कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे सत्र में तेजी रही। इससे हालिया गिरावट के बाद बाजार में आई रिकवरी को मजबूती मिली।

    शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 148.80 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,146.15 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 2,256.94 अंक और निफ्टी में 625.7 अंक की बढ़त रही। अब बाजार की नजर इस तेजी के आगे बने रहने की संभावनाओं पर है।

    अगले सप्ताह सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होंगे। बाजार यह आकलन करेगा कि हालिया तेजी केवल आईटी शेयरों तक सीमित रहती है या बैंकिंग, उपभोक्ता और औद्योगिक क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुझान दिखाई देता है। कंपनियों के राजस्व, मुनाफे, मार्जिन और मांग की स्थिति से जुड़े आंकड़ों पर खास ध्यान दिया जाएगा।

    कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियां और आने वाली तिमाहियों के लिए जारी किया जाने वाला कारोबारी मार्गदर्शन भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। बेहतर नतीजे और सकारात्मक भविष्य के संकेत शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, कमजोर वित्तीय प्रदर्शन या कारोबार को लेकर सतर्क अनुमान निवेशकों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई का रुख भी बाजार के लिए अहम रहेगा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कुछ कमी आने से बाजार को राहत मिली है, लेकिन आगे उनकी गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली दोबारा बढ़ती है, तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव आ सकता है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

    वैश्विक बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत होगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयरों का मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसके विपरीत, बॉन्ड यील्ड में नरमी आने पर जोखिम वाले निवेश विकल्पों में रुचि बढ़ने की संभावना रहती है। मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदें भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

    कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और लाभ मार्जिन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं, वैश्विक तनाव बढ़ने से वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है।

    कुल मिलाकर, अगले सप्ताह शेयर बाजार में कंपनियों के नतीजों और घरेलू-वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। बीते सप्ताह की तेजी के बाद बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह काफी हद तक इन कारकों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगा।

  • आगरा से घूमने निकले दोस्तों की खुशियां मातम में बदलीं, सहारनपुर में थार का भीषण एक्सीडेंट, 2 गंभीर घायल

    आगरा से घूमने निकले दोस्तों की खुशियां मातम में बदलीं, सहारनपुर में थार का भीषण एक्सीडेंट, 2 गंभीर घायल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रविवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पांचों दोस्त दशहरे की छुट्टी पर आगरा से मसूरी घूमने जा रहे थे। रास्ते में नागल थाना क्षेत्र के बेलड़ा गोल चक्कर के पास उनकी थार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई और पलट गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
    हादसा रविवार सुबह करीब चार बजे हुआ। दुर्घटना में साहिल तिवारी उम्र 25 वर्ष राहुल सिंह उम्र 25 वर्ष और सक्षम गौतम उम्र 22 वर्ष की मौत हो गई। वहीं सचिन और हेमंत वर्मा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दोनों चचेरे भाई बताए गए हैं और उनका इलाज सहारनपुर जिला अस्पताल में चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के समय थार तेज रफ्तार में थी। अचानक जोरदार टक्कर की आवाज सुनाई दी। जब लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो कार पलटी हुई थी और उसके शीशे सड़क पर बिखरे पड़े थे। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आ रहा था।
    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया गया कि कार में सवार दो युवक पुल के नीचे जा गिरे थे। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और घायलों को निकालने में मदद की। पुलिस ने कार के दरवाजे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों ने तीन युवकों को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिवारों में मातम छा गया।
    इस हादसे में जान गंवाने वाले साहिल तिवारी अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसके पिता सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ में अधिकारी हैं और फिलहाल बेंगलुरु में तैनात हैं। साहिल अपनी मां और बहन के साथ दिल्ली में रहता था। उसके मौसा ब्रह्मानंद के मुताबिक वह दो दिन पहले ही आगरा आया था। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
    मृतक राहुल सिंह के पिता गोपाल सिंह ने बताया कि राहुल शनिवार दोपहर घर से निकला था। रात में फोन पर बातचीत के दौरान उसने घूमने जाने की जानकारी दी थी। पिता ने उसे घर लौटने के लिए कहा लेकिन वह नहीं माना। रविवार सुबह करीब पांच बजे परिवार को दुर्घटना की सूचना मिली। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें बेटे की मौत का पता चला। राहुल एक निजी अस्पताल में कंपाउंडर के रूप में काम करता था।
    वहीं सक्षम गौतम के पिता राजेंद्र गौतम ने बताया कि सक्षम को तीन दिन की छुट्टी मिली थी और उसने मसूरी जाने की बात कही थी। वह शनिवार शाम अपने दोस्तों के साथ रवाना हुआ था। सुबह पुलिस का फोन आने पर परिवार को लगा कि उसे चोट लगी होगी और इलाज के बाद वह ठीक हो जाएगा। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर बेटे की मौत की खबर ने परिवार को तोड़ दिया। सक्षम एक दवा कंपनी में एरिया मैनेजर के पद पर कार्यरत था।
    नागल थाना प्रभारी राधेश्याम यादव के मुताबिक थार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। उन्होंने बताया कि आगे की सीट पर बैठे दोनों लोगों ने सीट बेल्ट लगा रखी थी और वे बच गए। हादसे में एयरबैग भी प्रभावी तरीके से नहीं खुल सके। फिलहाल इस दर्दनाक दुर्घटना ने तीन परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध, व्यापारिक तनाव और बढ़ते कर्ज का खतरा, आईएमएफ ने आर्थिक स्थिरता को लेकर दी चेतावनी

    वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध, व्यापारिक तनाव और बढ़ते कर्ज का खतरा, आईएमएफ ने आर्थिक स्थिरता को लेकर दी चेतावनी

    नई दिल्ली । वैश्विक अर्थव्यवस्था ने हाल के आर्थिक झटकों का अनुमान से बेहतर सामना किया है, लेकिन आगे भी यही स्थिति बनी रहेगी, इसकी गारंटी नहीं है। युद्ध, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुकावट, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और भारी सार्वजनिक कर्ज वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की नीति-निर्धारक समिति ने इन चुनौतियों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकारों को आने वाले समय में कई मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

    बैंकॉक में आयोजित अपनी 54वीं बैठक के बाद शनिवार को जारी बयान में इंटरनेशनल मॉनेटरी एंड फाइनेंशियल कमिटी (आईएमएफसी) ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का मौजूदा प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है, लेकिन इसे स्थायी स्थिति मानना उचित नहीं होगा। समिति के मुताबिक, विभिन्न देशों की सरकारें एक साथ भू-राजनीतिक और वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही हैं। ऐसे में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सतर्क नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।

    समिति की अध्यक्षता सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने की। बयान में कहा गया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के कारण भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान हो रहा है। इन परिस्थितियों का सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर देशों पर पड़ रहा है। युद्धों के कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान पैदा हो सकता है, जिससे वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ उनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। इसका असर ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर पड़ सकता है। समिति ने चेताया कि यदि ये बाधाएं बढ़ती हैं, तो पहले से मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे देशों में ऊर्जा और खाद्य असुरक्षा की समस्या गंभीर हो सकती है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार नीतियों और लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के आर्थिक प्रभावों को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है।

    वित्तीय क्षेत्र में समिति ने सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न यानी सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, सार्वजनिक कर्ज के भारी स्तर और पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेने की जरूरत को प्रमुख जोखिम बताया। इन परिस्थितियों में उन देशों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्हें अपनी वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए लगातार उधार लेना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक सीमित पहुंच रखने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर इसका दबाव अधिक पड़ सकता है।

    समिति ने उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों के बढ़ते आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा की। उसके अनुसार, तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के साथ उत्पादकता में सुधार कर सकती है। हालांकि, इन तकनीकों के आर्थिक और वित्तीय नतीजों को लेकर बनी अनिश्चितता मौजूदा कमजोरियों को बढ़ा सकती है। इसलिए तकनीकी बदलावों से मिलने वाले अवसरों के साथ उनसे जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए आईएमएफसी ने मजबूत व्यापक आर्थिक नीतियों, विश्वसनीय राजकोषीय ढांचे और सरकारों के बीच निरंतर सहयोग पर जोर दिया। समिति ने देशों से अपनी वित्तीय कमजोरियों को दूर करने, कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दीर्घकालिक विकास के लिए जरूरी निवेश जारी रखने का आग्रह किया। उसने यह भी कहा कि महंगाई की उम्मीदों को नियंत्रित रखने और आर्थिक नीतियों पर भरोसा बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है।

    बयान में बैंकॉक ब्लूप्रिंट का स्वागत किया गया, जिसका उद्देश्य डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक सुरक्षित बनाना, साइबर सुरक्षा मजबूत करना और डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है। समिति ने वैश्विक आर्थिक असंतुलन, व्यापारिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य को प्रभावित करने वाली विसंगतियों को दूर करने के लिए भी आपसी सहयोग की आवश्यकता बताई।

    इसके अलावा, सुरक्षित और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवागमन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया गया। समिति ने संप्रभु ऋण पुनर्गठन की प्रक्रिया में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विशेष रूप से कम आय वाले और कमजोर मध्यम आय वाले देशों के लिए कर्ज पुनर्गठन को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई। इसके तहत कर्ज लेने वालों और कर्ज देने वालों से अधिक पारदर्शिता बरतने तथा ऋण पुनर्गठन की व्यवस्थाओं को अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमान योग्य बनाने का आह्वान किया गया।

  • नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच

    नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच


    इंदौर । इंदौर के कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला लगातार चर्चा में है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल चौहान के खिलाफ हीरा नगर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आया है। वीडियो में कमल चौहान अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक कनकेश्वरी गरबा पंडाल में नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामले में कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसके बाद हीरा नगर पुलिस ने कमल चौहान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
    प्रकरण दर्ज होने के बाद कमल चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि बालिका के पिता शराब के नशे में पंडाल पहुंचे थे और बालिका भी आयोजन स्थल के अंदर आने का प्रयास कर रही थी। कमल चौहान ने कहा कि वह कई वर्षों से गरबा आयोजन में सेवाएं देते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से हुई गलती के लिए माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
    अपने बयान में कमल चौहान ने यह भी कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजवाड़ा चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर कमल चौहान अपनी सफाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग नाबालिग से जुड़े मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आयोजन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के अनुसार घटना के कुछ समय बाद मुख्यमंत्री इसी गरबा आयोजन में पहुंचे थे और उन्होंने कन्या पूजन किया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक समय पर पहुंची थी या नहीं और पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों पर स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ लोग इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से कर रहे हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल कमल चौहान के खिलाफ दर्ज प्रकरण में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।

  • सोने की कीमत में 3,004 रुपये और चांदी में 10,191 रुपये की गिरावट, जानें अब 10 ग्राम गोल्ड और किलो सिल्वर के भाव

    सोने की कीमत में 3,004 रुपये और चांदी में 10,191 रुपये की गिरावट, जानें अब 10 ग्राम गोल्ड और किलो सिल्वर के भाव


    नई दिल्ली ।
    सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। दोनों कीमती धातुओं के भाव में कमी आने से खरीदारों और निवेशकों का ध्यान बाजार के नए रुख पर है। सप्ताह के दौरान सोने की कीमत 3,000 रुपये से अधिक और चांदी का भाव 10,000 रुपये से ज्यादा नीचे आया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम घटकर 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया, जबकि चांदी की कीमत कम होकर 2,10,918 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं के भाव दबाव में रहे।

    बुलियन बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत इस सप्ताह 3,004 रुपये घट गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,49,430 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो गिरकर 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस बदलाव के साथ सोने की कीमत में उल्लेखनीय साप्ताहिक कमी दर्ज की गई है।

    अन्य शुद्धता वाले सोने के भाव में भी गिरावट देखने को मिली। 22 कैरेट सोने की कीमत पहले 1,36,878 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो घटकर 1,34,126 रुपये रह गई। इसी तरह 18 कैरेट सोने का भाव 1,12,073 रुपये से कम होकर 1,09,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह अलग-अलग श्रेणियों में सोने की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।

    सप्ताह के दौरान 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 12 अक्टूबर को सुबह के सत्र में 1,48,425 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था। वहीं, सबसे कम भाव 15 अक्टूबर को सुबह के सत्र में 1,45,564 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सप्ताह के भीतर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा और कुल मिलाकर भाव नीचे आए।

    चांदी की कीमत में भी सोने के मुकाबले बड़ी रकम की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान चांदी 10,191 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई। इसका भाव पहले 2,21,109 रुपये प्रति किलो था, जो घटकर 2,10,918 रुपये प्रति किलो रह गया। चांदी का उच्चतम भाव 12 अक्टूबर को सुबह के सत्र में 2,20,874 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। इसके बाद कीमत में गिरावट आई और 15 अक्टूबर को सुबह के सत्र में भाव घटकर 2,07,098 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया।

    सोने और चांदी की कीमतें जारी करने वाली व्यवस्था के तहत दिन में दो बार, सुबह और शाम के सत्र में भाव घोषित किए जाते हैं। इससे बाजार में कीमतों के बदलाव पर नजर रखने में मदद मिलती है। हालांकि, ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए कि आभूषण खरीदते समय अंतिम कीमत में शुद्धता, स्थानीय बाजार के भाव, मेकिंग चार्ज और लागू करों के कारण अंतर हो सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,186 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 57 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही थी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण डॉलर मजबूत होने से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, महंगाई बढ़ने की आशंका से ब्याज दरों में इजाफे की संभावना भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

    ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के बीच कुछ निवेशक सोने और चांदी में बिकवाली कर रहे हैं। इससे दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट को बल मिला है। आने वाले दिनों में इनके भाव पर डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर बना रह सकता है।