Author: bharati

  • खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान

    खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान


    नई दिल्ली। खुद अरबों डॉलर के विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान अब दूसरे विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के गुर सिखाने और उनकी आर्थिक चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जिम्मेदारी निभाएगा। संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले ‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ यानी कर्ज लेने वाले देशों के मंच की अध्यक्षता पाकिस्तान को मिली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में मंच की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष का पद संभाला।

    पाकिस्तान की इस नियुक्ति पर इसलिए चर्चा हो रही है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी वित्तीय मदद पर निर्भर है। हालांकि, इस मंच की अगुवाई करने से पाकिस्तान का अपना कर्ज कम नहीं होगा। न ही उसे कर्ज चुकाने की शर्तों में किसी तरह की विशेष राहत मिलेगी। इस मंच का उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के अनुभव साझा करने, आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के बेहतर विकल्प तलाशने का अवसर देना है।

    IMF से फिर मदद की उम्मीद, पहले भी मिल चुके हैं राहत पैकेज

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता मांगता रहा है। 7 अक्टूबर को पाकिस्तान और IMF के बीच एक समझौते पर सहमति बनी थी। इसके तहत पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की मदद मिल सकती है। हालांकि, इस सहायता के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।

    इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का IMF राहत पैकेज मिला था, जिसने उसे संप्रभु डिफॉल्ट यानी कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम होने की स्थिति से बचने में मदद की। इसके बाद 2024 में देश के लिए 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मंजूर किया गया। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने IMF से 1.3 अरब डॉलर का अलग ऋण भी हासिल किया।

    स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं। ऐसे में कर्ज प्रबंधन से जुड़े मंच की अध्यक्षता मिलना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम जिम्मेदारी है, लेकिन इससे उसकी आर्थिक चुनौतियां अपने आप दूर नहीं होंगी।

    क्या है बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म?

    बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म विकासशील देशों के लिए बनाया गया ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपनी समस्याओं, अनुभवों और आर्थिक सुधारों से जुड़े उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य कर्ज के बेहतर प्रबंधन, विकास के लिए वित्त जुटाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में कर्जदार देशों की चिंताओं को मजबूती से सामने लाने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    इस मंच को संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD यानी व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का सचिवालय सहयोग देता है। इसका विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित विकास वित्त सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

    अब तक कर्ज देने वाले देशों के बीच समन्वय के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद रही हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास आपसी सहयोग के लिए ऐसा स्थायी मंच नहीं था। बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।

    UNCTAD में कर्ज और विकास से जुड़े मामलों की प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में मंच की शुरुआत के दौरान कहा था कि कर्ज देने वाले देशों के समूह ‘पेरिस क्लब’ को इस तरह के समन्वय का करीब 70 साल का अनुभव है।

    पाकिस्तान पहले से रहा है मंच की तैयारी में शामिल

    पाकिस्तान इस मंच को तैयार करने की प्रक्रिया में पहले से भागीदारी कर रहा था। वह मिस्र की अगुवाई वाले कार्य समूह का उपाध्यक्ष था। इस समूह में कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे। समूह ने मंच के कामकाज, सदस्यता और संचालन से जुड़े नियम तैयार करने में योगदान दिया।

    UNCTAD के अनुसार, मंच के सदस्य हर साल अपना अध्यक्ष चुनते हैं। इसकी गवर्निंग काउंसिल में वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं, जो मंच की प्राथमिकताएं तय करते हैं। वहीं, संचालन समिति तकनीकी और व्यावहारिक कामकाज संभालती है।

    कर्ज प्रबंधन और आर्थिक सुधारों पर रहेगा जोर

    पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि उनका देश कर्ज प्रबंधन को बेहतर बनाने, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने पर ध्यान देगा। उन्होंने योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके नतीजों का आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

    हालांकि, अध्यक्ष के रूप में पाकिस्तान को दूसरे देशों के कर्ज की शर्तों पर बातचीत करने या अपने लिए भुगतान में राहत हासिल करने का अधिकार नहीं मिलेगा। UNCTAD के मुताबिक, यह मंच अपने सदस्यों की ओर से कर्ज की शर्तों या भुगतान को लेकर बातचीत नहीं करेगा। इसके बजाय यह कर्ज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान की भूमिका कर्ज से परेशान विकासशील देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने, उनके अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाने और उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की होगी। मंच की अध्यक्षता से उसे कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन अपने विदेशी कर्ज और उसे चुकाने की जिम्मेदारी से उसे कोई छूट नहीं मिलेगी।

  • भारत-चीन पर रूस से तेल खरीदने के लिए प्रतिबंध चाहता था अमेरिका, यूरोप ने किया इनकार, ऐसी खुली पोल

    भारत-चीन पर रूस से तेल खरीदने के लिए प्रतिबंध चाहता था अमेरिका, यूरोप ने किया इनकार, ऐसी खुली पोल


    नई दिल्ली। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और चीन के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों की रणनीति को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का रुख चर्चा में है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका चाहता था कि यूरोपीय देश रूसी तेल खरीदने के लिए भारत और चीन पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाएं, लेकिन उसके सहयोगियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। बेसेंट ने इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका अकेले प्रतिबंधों का बोझ क्यों उठाए।

    अमेरिकी टीवी चैनल NBC के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में बातचीत के दौरान बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय देश एक ओर रूस के खिलाफ कार्रवाई की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर रूसी ऊर्जा का आयात भी जारी रखते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के आयात से रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिलती है।

    ‘अकेला अमेरिका ही प्रतिबंधों का बोझ क्यों उठाए?’

    बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने यूरोपीय सहयोगियों से भारत और चीन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यूरोपीय देश खुद रूसी ऊर्जा खरीद रहे हैं, तो अमेरिका ही इस दिशा में अकेले कदम क्यों उठाए।

    अमेरिकी वित्त मंत्री ने यूरोप के ऊर्जा आयात को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की तुलना में रूस और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अधिक पैसा दिया है। बेसेंट के अनुसार, अमेरिका करीब 4 अरब डॉलर के रूसी उत्पादों का आयात करता है, जिसमें लगभग 1.8 अरब डॉलर का उर्वरक शामिल है। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय देशों का रूसी उत्पादों का आयात अमेरिका के मुकाबले करीब दस गुना है।

    प्रतिबंधों और टैरिफ पर 60 दिनों की अस्थायी छूट

    अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, रूस पर प्रतिबंधों और भारत समेत अन्य देशों पर टैरिफ से जुड़ी छूट को 60 दिनों के लिए अस्थायी रूप से दिया गया है। इसका उद्देश्य इन उपायों के आर्थिक प्रभाव का आकलन करना है।

    वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ‘लिंडसे ओ’ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ के तहत राष्ट्रपति को परिस्थितियों का आकलन करने की छूट है। बेसेंट के मुताबिक, शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश के जरिए 60 दिनों की छूट दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे स्थायी रूप से प्रतिबंध हटाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और उज्बेकिस्तान की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति इन 60 दिनों का इस्तेमाल यह समझने के लिए करना चाहते हैं कि प्रतिबंधों और टैरिफ का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

    रुबियो ने इस दौरान ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव, सऊदी अरब में हूती हमलों और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी उल्लेख किया।

    ट्रंप ने फैसले को बताया था अमेरिका और दुनिया के लिए अच्छा

    शुक्रवार को मियामी के पास मार-ए-लागो रिसॉर्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया था। उन्होंने इसे अमेरिका और दुनिया, दोनों के लिए अच्छा निर्णय बताया। हालांकि, इस कदम को लेकर अमेरिकी राजनीति में विरोध भी सामने आया है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसदों ने फैसले पर सवाल उठाए हैं।

    भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने सोशल मीडिया पर कहा कि ट्रंप का कदम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को राहत देने और यूक्रेन को पीछे छोड़ने जैसा है। वहीं, सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने भी ट्रंप प्रशासन के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि सहयोगियों की ढिलाई की कीमत अमेरिका और उसके साझेदारों को चुकानी पड़ रही है।

    रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और चीन के खिलाफ प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब यूक्रेन युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। फिलहाल 60 दिनों की अस्थायी छूट के बाद अमेरिकी प्रशासन की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।

  • टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग, पीछे चल रहे थे करणवीर मेहरा, बताया आंखों देखा हाल

    टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग, पीछे चल रहे थे करणवीर मेहरा, बताया आंखों देखा हाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, बाइक सवार तीन अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर गोलियां चलाईं। उस वक्त टीवी अभिनेता और ‘बिग बॉस 18’ के विजेता करणवीर मेहरा की कार भी टाइगर की गाड़ी के ठीक पीछे थी। घटना के करीब एक घंटे बाद करणवीर ने एक इंटरव्यू में घटनास्थल का हाल बताते हुए कहा कि वहां का मंजर देखकर वह भी सदमे में थे।

    ‘मौके पर पहुंचे तो खून के धब्बे दिखे’

    करणवीर मेहरा ने जूम को बताया कि उनकी कार टाइगर श्रॉफ की गाड़ी के ठीक पीछे चल रही थी। उनके मुताबिक, जब उनकी गाड़ी गेट से बाहर निकलकर घटनास्थल के पास पहुंची, तब वहां खून के धब्बे दिखाई दिए। इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि टाइगर के ड्राइवर फिरदौस को गोली लगी है।

    करणवीर ने कहा कि टाइगर के सुरक्षित होने से उन्हें राहत मिली, लेकिन ड्राइवर के घायल होने की खबर से वह दुखी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ड्राइवर जल्द स्वस्थ हो जाएगा।

    करणवीर के अनुसार, घटनास्थल पर बच्चे भी मौजूद थे और वहां जन्मदिन की पार्टी चल रही थी। अचानक गोलियों की आवाज से अफरा-तफरी मच गई। लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे और अपनी सुरक्षा के लिए जगह तलाशने लगे।

    पटाखों की आवाज के बीच हुई फायरिंग

    करणवीर ने बताया कि वह टाइगर श्रॉफ को लंबे समय से जानते हैं और मुंबई के जुहू में उनके साथ फुटबॉल भी खेलते हैं। हालांकि, घटना के दौरान वह हमलावरों को नहीं देख पाए।

    उनके मुताबिक, घटनास्थल के आसपास काफी लोग मौजूद थे और कुछ लोग तस्वीरें भी ले रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाजें सुनाई दीं। शुरुआत में आसपास पटाखे फोड़े जाने के कारण कुछ लोगों को लगा कि ये आवाजें पटाखों की ही हैं। लेकिन जब लोगों ने फायरिंग होने की बात कहते हुए शोर मचाया, तब स्थिति की गंभीरता समझ में आई और पुलिस को सूचना दी गई।

    ड्राइवर के बाएं हाथ में चोट, CCTV फुटेज की जांच

    रिपोर्ट के अनुसार, बाइक सवार हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की कार पर तीन से चार राउंड गोलियां चलाईं। मुंबई पुलिस के मुताबिक, ड्राइवर फिरदौस के बाएं हाथ में चोट आई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    मामले की जांच के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई हैं। हमलावरों की पहचान और घटनाक्रम का पता लगाने के लिए आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। रिपोर्ट में बैलिस्टिक जांच के हवाले से यह भी कहा गया है कि गोलियां नजदीक से चलाई गई थीं।

    ‘टाइगर को लंबे समय से जानता हूं’, करणवीर ने जताई चिंता

    करणवीर मेहरा ने कहा कि वह टाइगर को कई वर्षों से जानते हैं और उन्हें एक अच्छा इंसान मानते हैं, जो अपने काम पर ध्यान देते हैं और दूसरों के साथ सम्मान से पेश आते हैं।

    उन्होंने कहा कि टाइगर और उनके परिवार को ऐसी परिस्थिति से गुजरते देखना उनके लिए बेहद दर्दनाक और तनावपूर्ण है। करणवीर ने यह भी बताया कि टाइगर के परिवार से उनकी अच्छी जान-पहचान है।

    कथित ऑडियो में बिश्नोई गैंग से जुड़े शख्स का दावा

    फायरिंग की घटना के बाद सोशल मीडिया और रिपोर्टों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम भी सामने आया है। एक कथित ऑडियो क्लिप में खुद को लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई अनिल पंडित बताने वाले शख्स ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। ऑडियो में हरमन संधू नाम के एक अन्य व्यक्ति का भी जिक्र होने की बात कही गई है।

    कथित ऑडियो में फिल्म इंडस्ट्री में काम करने और सलमान खान के साथ काम करने को लेकर धमकी दिए जाने का दावा भी किया गया है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता, उसमें बोल रहे व्यक्ति की पहचान और हमले से उसके संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।

    लॉरेंस बिश्नोई पहले भी सलमान खान को धमकियां देने के मामले में चर्चा में रहा है। यह विवाद काले हिरण के शिकार से जुड़े मामले से भी जुड़ा है। वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट ने सलमान खान को दोषी ठहराया था और उन्होंने फैसले को राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

    वर्ष 2024 में सलमान खान के करीबी माने जाने वाले नेता बाबा सिद्दीकी की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस मामले में भी बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया था।

    फिलहाल टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच जारी है। पुलिस हमलावरों की पहचान, घटना के पीछे की वजह और कथित ऑडियो की सत्यता की पड़ताल कर रही है।

  • बदमाशों से जान बचाने के लिए डिफेंडर लेकर थाने पहुंचे फिल्ममेकर अमित जानी, शिकायत कराई दर्ज

    बदमाशों से जान बचाने के लिए डिफेंडर लेकर थाने पहुंचे फिल्ममेकर अमित जानी, शिकायत कराई दर्ज


    नई दिल्ली। फिल्म प्रोड्यूसर अमित जानी ने दावा किया है कि जम्मू से नोएडा लौटते वक्त कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी लैंड रोवर डिफेंडर SUV का पीछा किया और बंदूक दिखाकर गाड़ी रोकने की कोशिश की। घटना हरियाणा के सोनीपत इलाके में होने की बात कही गई है। जानी के मुताबिक, पहले से मिल रही धमकियों के कारण उन्हें खतरे का अंदेशा हुआ, जिसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ाई और सुरक्षा के लिए कुंडली थाने पहुंच गया।

    अमित जानी ने 18 अक्टूबर 2026 को कुंडली थाने में शिकायत दी है। उनके अनुसार, पुलिस की ओर से शिकायत मिलने की रसीद भी जारी की गई है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    ओवरटेक करने के बाद किया पीछा, हथियार दिखाने का आरोप
    अमित जानी की शिकायत के मुताबिक, वह माता वैष्णो देवी के दर्शन के बाद जम्मू से नोएडा लौट रहे थे। उनकी डिफेंडर SUV में भारत सिंह, सौरव यादव, मनीष भारद्वाज और ड्राइवर यदूवीर सिंह भी मौजूद थे।

    जानी ने आरोप लगाया कि रात करीब 8:28 बजे, जब उनकी गाड़ी सोनीपत इलाके से गुजर रही थी, तभी पीछे से आई एक सफेद कार ने ओवरटेक करने की कोशिश की। इसके बाद कार सवार ने खिड़की से हाथ बाहर निकालकर उन्हें रुकने का इशारा किया।

    शिकायत के अनुसार, हरियाणा से पहले मिल रही धमकियों को ध्यान में रखते हुए जानी ने ड्राइवर से गाड़ी नहीं रोकने और आगे बढ़ने को कहा। आरोप है कि इसके बाद सफेद कार ने भी रफ्तार बढ़ा दी और उनकी SUV का पीछा करने लगी। जानी का दावा है कि पीछा कर रही कार बाईं ओर आई और उसमें सवार व्यक्ति ने हथियार निकाल लिया।

    खतरा महसूस हुआ तो कुंडली थाने की ओर मोड़ी गाड़ी
    जानी के मुताबिक, पीछा करने और हथियार दिखाए जाने की आशंका के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी। ड्राइवर ने गाड़ी रोकने के बजाय सीधे कुंडली थाने की ओर रुख किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत में जानी ने अपनी डिफेंडर SUV का रजिस्ट्रेशन नंबर UP15EV4454 बताया है। अब मामले में पुलिस की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    ‘उदयपुर फाइल्स’ और ‘काला हिरण’ को लेकर भी रहे चर्चा में
    अमित जानी फिल्म निर्माण से जुड़े हैं और ‘उदयपुर फाइल्स’, ‘ज्ञानवापी फाइल्स’ तथा ‘काला हिरण’ जैसी फिल्मों को लेकर चर्चा में रहे हैं। सलमान खान की जिंदगी से जुड़े विषय पर आधारित बताई जाने वाली फिल्म ‘काला हिरण’ के कारण भी उनका नाम सुर्खियों में आया था।

    जानी पहले सलमान खान से जुड़े धमकी के आरोप भी लगा चुके हैं। हालांकि, मौजूदा मामले में पीछा करने और हथियार दिखाने के उनके दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित घटना के पीछे कौन लोग थे और उनका मकसद क्या था।

  • दशहरे पर इंदौर-उज्जैन समेत MP के पश्चिमी हिस्से में बारिश के आसार, 15 जिलों में अलर्ट

    दशहरे पर इंदौर-उज्जैन समेत MP के पश्चिमी हिस्से में बारिश के आसार, 15 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में दशहरे के दिन बारिश उत्सव के रंग में खलल डाल सकती है। मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर को इंदौर, उज्जैन, रतलाम समेत पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में आंधी-बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। सोमवार को भी प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का अनुमान है। इनमें भोपाल, उज्जैन, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, 20, 21 और 22 अक्टूबर को पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं, पूर्वी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

    दशहरे पर इन जिलों में बारिश के आसार

    दशहरे के दिन इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, शाजापुर, हरदा और बैतूल में बारिश हो सकती है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चलने की आशंका भी है। ऐसे में दशहरा आयोजन, रावण दहन और खुले मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान मौसम पर नजर रखना जरूरी होगा।

    रविवार को तेज बारिश से पंडालों में भरा पानी

    रविवार को इंदौर, सीहोर और शाजापुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। सीहोर में बारिश और हवा के कारण माता के पंडालों के टेंट उड़ गए। महू में गरबा और माता की स्थापना के लिए तैयार किए गए पंडालों में पानी भर गया। बारिश के कारण रावण के पुतले भी भीग गए।

    गुना शहर में रविवार शाम अचानक मौसम बदला और आधे घंटे से अधिक समय तक तेज बारिश हुई। बेमौसम बरसात से शहर की प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    ट्रफ और चक्रवाती परिसंचरण से बदला मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्यप्रदेश के ऊपर से एक ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण यानी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव भी बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। अगले चार दिन तक इस क्षेत्र में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर भी बारिश

    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है, लेकिन सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। बीते एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी, दोनों हिस्सों के कई जिलों में आंधी-बारिश दर्ज की गई है। पिछले चार दिनों में कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और रात के तापमान में गिरावट का मिला-जुला असर सामान्य तौर पर देखने को मिलता है। इस बार भी यही स्थिति बन रही है। महीने की शुरुआत में मौसम साफ होने और दिन में धूप निकलने के साथ रातों में ठंडक महसूस की गई, जबकि अब कई जिलों में फिर बारिश हो रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

  • यूरोप में महंगाई और कम वेतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, फ्रांस में हिंसा और आगजनी के बाद हजार से ज्यादा गिरफ्तार

    यूरोप में महंगाई और कम वेतन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, फ्रांस में हिंसा और आगजनी के बाद हजार से ज्यादा गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।
    यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई, कम वेतन, महंगे मकानों और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति के खिलाफ 17 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। फ्रांस, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल में हजारों से लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने जीवनयापन की बढ़ती लागत और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को लेकर नाराजगी जताई। फ्रांस में कई जगह प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग किया। फ्रांस में अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनों में 5.5 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों के अनुमान इससे ज्यादा बताए गए।

    फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के साथ हुई थी। बाद में आंदोलन का दायरा बढ़ा और इसमें ईंधन की बढ़ती कीमतों, महंगाई, कम वेतन तथा जीवनयापन की लागत जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए। पेरिस, मार्सेई, नीस, नांत, बोर्डो, लिमोज, लिली, टूलूज और स्ट्रासबर्ग समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कई दुकानों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ तथा लूटपाट की घटनाएं भी दर्ज की गईं।

    लिमोज शहर में 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई। इस घटना में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आग के कारण उसकी छत नीचे की मंजिलों पर गिर गई। शुरुआती जानकारी में इमारत के बाहरी हिस्से का करीब दो-तिहाई भाग नष्ट होने की बात कही गई। अधिकारियों ने इसे शहर की ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ा नुकसान बताया। हिंसा के दौरान कई अन्य स्थानों पर भी आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च में भी हिस्सा लिया।

    फ्रांस में हिंसा के बाद गिरफ्तारियों का आंकड़ा एक हजार से अधिक पहुंच गया। अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में गिरफ्तारी की संख्या में अंतर रहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों के घायल होने और नाबालिगों के साथ पुलिस के व्यवहार पर विवाद का उल्लेख किया गया। इन मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक जानकारी पर निर्भर करेगी।

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर करते हुए सार्वजनिक इमारतों, दुकानों और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। सरकार ने स्पष्ट किया कि आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों को कानून के तहत जवाबदेह बनाया जाएगा।

    बेल्जियम में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव देखने को मिला। राजधानी ब्रसेल्स में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं और आगजनी की घटनाएं भी हुईं। लीज शहर में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। वहां शिक्षा की बढ़ती लागत और उच्च शिक्षा तक पहुंच को लेकर चिंताएं भी विरोध के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं।

    पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन समेत कई शहरों में हजारों लोगों ने महंगाई, कम वेतन और आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने बेहतर वेतन, पेंशन और सार्वजनिक सेवाओं की मांग उठाई। मकानों की कीमतों और किराये में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों के लिए घर खरीदना या किराये पर लेना मुश्किल हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद से वहां मकानों की कीमतें दोगुने से अधिक हो चुकी हैं। नए किरायेदारी समझौतों में भी किराये में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के संसदीय मामलों के मंत्री कार्लोस अब्रू अमोरिम ने कहा था कि सरकार सड़कों पर उठने वाले नारों के दबाव में नहीं झुकेगी। प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेतृत्व पर आम लोगों की समस्याओं से दूर रहने का आरोप लगाया।

    इटली के मिलान और बोलोन्या में भी जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और अधिकारियों के साथ झड़प की, जबकि अन्य स्थानों पर मार्च शांतिपूर्ण रहे। अलग-अलग देशों में विरोध के स्थानीय मुद्दे भले ही अलग थे, लेकिन महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर असंतोष प्रमुख रहा। इन प्रदर्शनों ने यूरोपीय सरकारों पर आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बढ़ाया है।

  • रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    रूसी तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों को ट्रंप ने टैरिफ से दी छूट, अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसले की बताई वजह

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़े प्रावधानों को लागू नहीं किया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी राजनीति में बहस शुरू हो गई है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। वहीं, ट्रंप ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह अमेरिका के हित में है और इससे दुनिया को भी फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अभी कई लोगों को उनके फैसले का वास्तविक अर्थ समझ नहीं आया है।

    जिन पांच देशों को इस टैरिफ से छूट मिली है, उनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। ये देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले के तहत इन देशों पर प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल लागू नहीं होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी ऊर्जा खरीद से जुड़े व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका में चर्चा जारी है।

    ट्रंप ने रविवार को मियामी में मीडिया से बातचीत के दौरान अपने निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों को अभी यह जानकारी नहीं है कि उनके फैसले का वास्तविक मतलब क्या है। उनके मुताबिक, समय के साथ इस निर्णय के पीछे का उद्देश्य समझ में आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कदम अमेरिका के हित में होगा और वैश्विक स्तर पर भी इसका लाभ देखने को मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में इस फैसले से होने वाले संभावित लाभों का विस्तृत विवरण नहीं दिया।

    इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से संबंधित नए प्रतिबंध कानून के कुछ प्रावधानों को लागू करने से छूट दी गई। अमेरिकी कांग्रेस ने सितंबर में इस कानून को पारित किया था। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल था। भारत और चीन समेत पांच देशों को इस कार्रवाई से फिलहाल राहत मिलने के बाद कानून के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री और वित्त मंत्री यह तय नहीं कर लेते कि आगे क्या कार्रवाई आवश्यक है। इस व्यवस्था के कारण संबंधित देशों पर टैरिफ लगाने का निर्णय तत्काल लागू नहीं हुआ है। हालांकि, इससे भविष्य में टैरिफ लगाने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती। आगे की कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

    ट्रंप के इस कदम की आलोचना उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के साथ-साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी की है। दोनों दलों के नेताओं ने पिछले महीने इस कानून को भारी बहुमत से पारित किया था। ऐसे में राष्ट्रपति के फैसले को लेकर अमेरिकी राजनीतिक हलकों में मतभेद सामने आए हैं। आलोचकों का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

    दक्षिण कैरोलिना की रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह रूस पर दबाव बनाने का विकल्प चुनतीं, ताकि युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जा सके और गैस की कीमतें कम हों। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा नहीं होने की बात भी कही। इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ रखा गया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि रूस से ऊर्जा खरीद और उस पर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी प्रशासन तथा कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच मतभेद बने हुए हैं।

  • भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत की आर्थिक प्रगति को पिछले एक दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने कहा है कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद का आधार प्रदान करती है। उनके अनुसार, भारत के सामने अभी कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में भी भारत के मजबूत विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं और यह उपलब्धि सराहना के साथ जश्न मनाने योग्य है।

    क्युंघून किम ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को उसके आकार और आबादी के संदर्भ में समझना जरूरी है। करीब 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए लगातार मजबूत विकास दर हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की क्षमता और आने वाले वर्षों में विकास की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

    उनकी यह टिप्पणी भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर वैश्विक संस्थानों के बदले आकलन के बीच आई है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमानों को बढ़ाकर सात प्रतिशत से अधिक कर दिया है। उनके अनुसार, विभिन्न संस्थानों के अनुमानों में हुआ यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।

    किम ने कोविड-19 महामारी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति में आए सुधार का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, महामारी के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की और वर्ष 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद अगले चार वर्षों तक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनी रही। इस प्रदर्शन को उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

    अर्थशास्त्री ने कहा कि लगातार बेहतर होते आर्थिक आंकड़ों के कारण उन्हें और कई अन्य अर्थशास्त्रियों को अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में बार-बार संशोधन करना पड़ा। हर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे। इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज की। उनके मुताबिक, यह प्रदर्शन वर्ष 2003 से 2007 के उस दौर की याद दिलाता है, जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।

    किम ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत रहने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि में यह दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक औसत वृद्धि केवल वर्ष 2003 से 2007 के दौरान दर्ज की गई थी, जब यह आंकड़ा 7.89 प्रतिशत रहा था। इस तुलना के जरिए उन्होंने भारत की हालिया आर्थिक वृद्धि के महत्व को रेखांकित किया।

    भारत की अर्थव्यवस्था के आकार में आए बदलाव को भी किम ने अहम बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह चार ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। इसका अर्थ है कि आज समान विकास दर से होने वाला आर्थिक विस्तार दो दशक पहले की तुलना में कहीं बड़े पैमाने पर मूल्य सृजन करता है। किम ने कहा कि भारत की पिछले दशक की प्रगति और मध्यम अवधि में मजबूत विकास की संभावनाएं महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि देश के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • दतिया के उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, रसगुल्लों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    दतिया के उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत, रसगुल्लों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश। के दतिया जिले के भांडेर तहसील अंतर्गत उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद कई ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में भोजन करने के बाद लोगों को उल्टी, पेट दर्द और सिरदर्द जैसी शिकायतें होने लगीं। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में शिविर लगाकर प्रभावित लोगों का इलाज शुरू किया। हालांकि, ग्रामीणों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के अनुसार, गांव के निवासी तिलक सिंह यादव के पिता एदल सिंह पटेल का बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार की ओर से त्रयोदशी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे थे। भोजन के दौरान लोगों ने अन्य व्यंजनों के साथ रसगुल्ले भी खाए। इसके बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और गांव में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को लेकर चिंता बढ़ गई।

    इस घटना में लगभग एक हजार लोगों के बीमार होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही बीमारी के दायरे का सही आकलन किया जा सकेगा।

    ग्रामीणों के बीमार पड़ने के बाद रसगुल्लों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। आशंका जताई जा रही है कि मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल किया गया मावा खराब हो सकता था। मावा या खोया दूध को पकाकर तैयार किया जाता है और कई प्रकार की मिठाइयों में इसका उपयोग होता है। यदि मिठाई बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री दूषित हो, तो उसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, उड़ीना गांव की घटना में खराब मावे को बीमारी का कारण मानने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। यह स्पष्ट होना बाकी है कि रसगुल्ले तैयार करने में किस सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, मावा कहां से लाया गया था और मिठाई बनाने की प्रक्रिया में साफ-सफाई के मानकों का पालन हुआ था या नहीं। जांच पूरी होने से पहले किसी खाद्य सामग्री या व्यक्ति को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 17 अक्टूबर को गांव में चिकित्सा शिविर लगाया। शिविर में बीमार ग्रामीणों की जांच की गई और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। कुछ मरीजों को जिला अस्पताल के अलावा इंदरगढ़ और भांडेर के अस्पतालों में भी इलाज के लिए जाना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित लोगों की स्थिति का आकलन किया और जरूरत के अनुसार उपचार दिया।

    भांडेर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. जयंत यादव के अनुसार, गांव में लगाए गए शिविर के दौरान जांच किए गए लोगों में गंभीर लक्षण नहीं पाए गए। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई गई है और किसी गंभीर समस्या की जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद घटना के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि बीमारी के स्रोत का पता लगाया जा सके।

    यह घटना सार्वजनिक और पारिवारिक आयोजनों में भोजन की गुणवत्ता तथा स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करती है। ऐसे कार्यक्रमों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, उसे तैयार करने के तरीके और सुरक्षित रखरखाव पर ध्यान देना आवश्यक है। भोजन करने के बाद उल्टी, पेट दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। उड़ीना गांव में ग्रामीणों के बीमार पड़ने के मामले में अब बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि और प्रभावित लोगों की स्थिति पर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप

    इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर में गरबा आयोजन के दौरान नाबालिग लड़की के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में लड़की ने आरोप लगाया है कि चौहान ने उसका हाथ पकड़ा, खींचा और सीने पर हाथ मारते हुए धक्का दिया। दूसरी ओर, चौहान ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

    यह मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो में आयोजित मां कनकेश्वरी गरबा उत्सव से जुड़ा है। घटना 15 और 16 अक्टूबर की दरमियानी रात की बताई गई है। शिकायत 17 वर्षीय लड़की ने 17 अक्टूबर को दर्ज कराई। आयोजन के दौरान लड़की को धक्का दिए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद पार्टी ने भी चौहान से जवाब मांगा और उन्हें तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया।

    एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, लड़की की छोटी बहन गरबा आयोजन में शामिल थी। गरबा करते समय उसे प्यास लगी तो बड़ी बहन ने उसे पानी पिलाया। इस दौरान छोटी बहन का पास बड़ी बहन के पास ही रह गया। वह पास लौटाने के लिए अपनी बहन को आवाज लगा रही थी। इसी बीच कमल सिंह चौहान वहां पहुंचे और उससे पूछने लगे कि वह पास क्यों बदल रही है।

    लड़की ने शिकायत में बताया कि उसने चौहान को स्पष्ट किया कि वह पास नहीं बदल रही, बल्कि उसकी बहन का पास उसके पास रह गया है। आरोप है कि इसके बाद चौहान ने उसका हाथ गलत तरीके से पकड़ा और खींचा। लड़की के मुताबिक, उन्होंने उसके सीने पर हाथ मारते हुए जोर से धक्का भी दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चौहान ने कहा कि यहां हजारों लड़कियां आती हैं और उन्हें मालूम है कि वे क्या करती हैं। लड़की ने कहा कि इस तरह छुआ जाना उसे अच्छा नहीं लगा। उसने अपने पिता के साथ भी गलत व्यवहार किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 लगाए जाने की वजह भी शिकायत में दर्ज आरोपों से जुड़ी है। धारा 7 के तहत बच्चे के साथ यौन मंशा से शारीरिक संपर्क बनाने या ऐसा कृत्य करने का आरोप आने पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें कपड़ों के ऊपर से किया गया संपर्क भी परिस्थितियों और कथित मंशा के आधार पर शामिल हो सकता है। धारा 8 में इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर तीन से पांच साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है।

    इसके अलावा, बीएनएस की धारा 74 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से हमला करने या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है। धारा 75 यौन उत्पीड़न से जुड़े कृत्यों को परिभाषित करती है, जब
    कि इसकी उपधारा 75(2) में संबंधित अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। इन धाराओं के तहत कार्रवाई का आधार शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

    उधर, कमल सिंह चौहान ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह पिछले दस वर्षों से गरबा आयोजन में सेवा दे रहे हैं और अब तक ऐसी घटना नहीं हुई। चौहान का दावा है कि लड़की के पिता शराब पीकर आयोजन में आए थे। उनके मुताबिक, वह पिता को समझाने पहुंचे थे, तभी लड़की बीच में आ गई और उनसे बहस करने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की ने गाली भी दी और समझाने के बावजूद नहीं मानी। चौहान ने कहा कि जब उन्होंने उसे बाहर निकाला, तब यह घटना हुई।

    चौहान ने यह भी कहा कि यदि उनके व्यवहार से किसी को बुरा लगा है तो वह माफी मांगते हैं। उन्होंने लड़की से भी माफी मांगने की बात कही और मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तथा नगर अध्यक्ष से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए। फिलहाल, मामला दर्ज होने के बाद आरोपों की जांच और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।