Author: bharati

  • महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु

    महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अष्टभुजा धाम नईगढ़ी में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 50 हजार से अधिक बताई गई। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना रहा। मां के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देर तक लगी रहीं।
    महाअष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना तड़के ही शुरू हो गया था। सुबह करीब तीन बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगने लगीं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी अष्टभुजा धाम पहुंचे। रीवा सीधी सतना प्रयागराज और वाराणसी सहित कई स्थानों से आए भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।
    दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने देवी की आराधना की। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन जैसे धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए। मंदिर परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल रहा और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।
    महाअष्टमी के अवसर पर अष्टभुजा धाम में विशेष हवन और पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराया गया और दक्षिणा तथा उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। जिले के दूसरे देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी हवन कन्या पूजन और भंडारे आयोजित किए गए।
    महाअष्टमी पर केवल अष्टभुजा धाम ही नहीं बल्कि पूरे मऊगंज जिले में भक्ति का माहौल दिखाई दिया। मां जालपा धाम दूबी और बसदेईन माता वसिगड़ा देवी धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। नईगढ़ी हनुमना शाहपुर खटखरी पहाड़ी और देवतालाब सहित कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सजे दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। जगह-जगह भजन और धार्मिक आयोजनों के बीच नवरात्रि का उत्साह नजर आया।
    इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम भी अपने परिवार के साथ अष्टभुजा धाम पहुंचे। उन्होंने मां के दर्शन कर चुनरी अर्पित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने परिवार के साथ क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
  • 2.5 ओवर में 50 रन ठोककर भारत ने रचा इतिहास, बारिश ने रोका मुकाबला, नमन धीर ने 6 गेंदों में जड़े 24 रन

    2.5 ओवर में 50 रन ठोककर भारत ने रचा इतिहास, बारिश ने रोका मुकाबला, नमन धीर ने 6 गेंदों में जड़े 24 रन


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए पांचवें टी20 मुकाबले में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से नया रिकॉर्ड बना दिया। टीम इंडिया ने महज 2.5 ओवर यानी 17 गेंदों में 50 रन पूरे कर लिए। यह टी20 क्रिकेट में भारत का सबसे तेज अर्धशतक रहा। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही तेज रफ्तार से रन बनाए और विरोधी गेंदबाजों पर दबाव बनाया। हालांकि बारिश के कारण मुकाबला पूरा नहीं हो सका और आखिरकार मैच रद्द करना पड़ा।
    एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बारिश के कारण टॉस में काफी देरी हुई। इसके बाद दोनों टीमों के बीच मैच को नौ-नौ ओवरों का कर दिया गया। भारतीय बल्लेबाजों ने कम ओवरों में बड़ा स्कोर खड़ा करने के इरादे से आक्रामक रुख अपनाया। टीम ने केवल 2.5 ओवरों में 50 रन का आंकड़ा छूकर अपना पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। यह प्रदर्शन भारतीय बल्लेबाजी की तेज गति और छोटे प्रारूप में बड़े लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने की क्षमता को दिखाता है।
    इससे पहले इसी सीरीज में भारत ने हैदराबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन ओवर में 50 रन पूरे किए थे। न्यूजीलैंड के खिलाफ गुवाहाटी में भारतीय टीम ने 3.1 ओवर में यह आंकड़ा हासिल किया था। एशियन गेम्स 2026 के दौरान जापान के निस्शिन में पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने 3.2 ओवर में अर्धशतक पूरा किया था। वहीं अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में भारतीय बल्लेबाजों ने 3.3 ओवर में 50 रन पूरे किए थे। बेंगलुरु में बनाया गया नया रिकॉर्ड इन सभी उपलब्धियों से आगे निकल गया।
    भारतीय पारी में ईशान किशन ने तेज शुरुआत करते हुए केवल 10 गेंदों में 30 रन बनाए। उनकी पारी में पांच बाउंड्री शामिल रहीं। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 14 गेंदों में 22 रन जोड़े। संजू सैमसन ने 16 रन का योगदान दिया। वहीं नमन धीर ने कम गेंदों में तेजी से रन बनाकर दर्शकों का ध्यान खींचा। वह छह गेंदों पर 24 रन बनाकर नाबाद रहे। इन पारियों की मदद से भारतीय टीम ने बारिश से प्रभावित मुकाबले में भी बड़े स्कोर की ओर तेजी से कदम बढ़ाए।
    वेस्टइंडीज की ओर से कीमो पॉल और शमार स्प्रिंगर ने दो-दो विकेट हासिल किए जबकि शमार जोसेफ को एक सफलता मिली। भारतीय टीम ने 7.4 ओवरों की समाप्ति तक पांच विकेट खोकर 118 रन बना लिए थे। इसके बाद बारिश ने एक बार फिर खेल रोक दिया। मौसम में सुधार नहीं होने के कारण मुकाबले को रद्द करने का फैसला किया गया। इस तरह दर्शकों को मैच का पूरा रोमांच देखने का अवसर नहीं मिल सका।
    भले ही पांचवां टी20 मुकाबला पूरा नहीं हो पाया लेकिन भारतीय टीम का तेज अर्धशतक चर्चा का विषय बन गया। कम गेंदों में 50 रन पूरे करना टी20 प्रारूप में आक्रामक बल्लेबाजी का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की तेज पारियों के साथ नमन धीर की विस्फोटक बल्लेबाजी ने भारतीय पारी को रफ्तार दी। बेंगलुरु में बना यह रिकॉर्ड भारतीय टी20 क्रिकेट के सबसे तेज अर्धशतकों में खास स्थान रखेगा।

  • भारत-वेस्टइंडीज टी20 सीरीज ड्रॉ, शाई होप बने सबसे बड़े हीरो, श्रेयस अय्यर ने मानी टीम इंडिया की रणनीति में कमी

    भारत-वेस्टइंडीज टी20 सीरीज ड्रॉ, शाई होप बने सबसे बड़े हीरो, श्रेयस अय्यर ने मानी टीम इंडिया की रणनीति में कमी


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 की बराबरी पर समाप्त हो गई। शनिवार को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाला पांचवां और निर्णायक मुकाबला बारिश के कारण नहीं खेला जा सका। लगातार बारिश और मैदान की परिस्थितियों को देखते हुए अंपायरों ने मैच रद्द करने का फैसला किया। इसके साथ ही सीरीज का परिणाम बराबरी पर रहा। मुकाबला रद्द होने के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप के प्रदर्शन की तारीफ की और माना कि उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय टीम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की।
    श्रेयस अय्यर ने मैच के बाद कहा कि भारतीय टीम दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में बेहतर गेंदबाजी कर सकती थी। अगर इन मैचों में गेंदबाज अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को शानदार बताते हुए कहा कि विरोधी टीम को उसके प्रदर्शन का पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। अय्यर के मुताबिक शाई होप ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और उनकी पारियों ने भारतीय टीम के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं। उन्होंने होप को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई भी दी।
    इस सीरीज में शाई होप वेस्टइंडीज की सफलता के सबसे प्रमुख खिलाड़ियों में रहे। उन्होंने चार पारियों में दो शतकों की मदद से कुल 261 रन बनाए। इनमें से 204 रन उन्होंने केवल 95 गेंदों पर बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया और वेस्टइंडीज को सीरीज में वापसी करने का मौका दिया। होप को उनके लगातार शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
    सीरीज के दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को हराया था। इन दोनों मैचों में शाई होप ने शतक लगाकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन की बदौलत वेस्टइंडीज ने सीरीज में 2-2 की बराबरी हासिल कर ली। भारतीय टीम के लिए इन मुकाबलों में विपक्षी बल्लेबाजों को रोकना चुनौतीपूर्ण रहा। कप्तान अय्यर की टिप्पणी से भी साफ हुआ कि टीम को अपनी गेंदबाजी योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की जरूरत है।
    वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी में शरफेन रदरफोर्ड का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। बाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने दूसरे टी20 में 37 गेंदों पर 84 रन की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद चौथे मुकाबले में उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन बनाकर टीम को मजबूती दी। होप और रदरफोर्ड की पारियों ने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को धार दी और भारतीय टीम के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा की।
    सीरीज बराबरी पर समाप्त होने के बाद शाई होप ने भी अपनी टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि टीम जीत के काफी करीब पहुंची और इतने वर्षों में इस तरह की प्रतिस्पर्धा दिखाना खिलाड़ियों के सामूहिक प्रयास को दर्शाता है। होप के अनुसार सीरीज में टीम ने खुद को अच्छा मौका दिया और यह संकेत है कि वेस्टइंडीज एक इकाई के रूप में आगे बढ़ रही है।
    पांचवें मुकाबले के बारिश में धुलने से दोनों टीमों को निर्णायक मैच खेलने का मौका नहीं मिला। भारतीय टीम जहां अपनी गेंदबाजी की कमियों से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहेगी वहीं वेस्टइंडीज के लिए शाई होप और शरफेन रदरफोर्ड का प्रदर्शन सकारात्मक पहलू रहा। बराबरी पर खत्म हुई सीरीज ने दोनों टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा को दिखाया।

  • इंदौर में विशाल चुनरी यात्रा शुरू, बड़ा गणपति से बिजासन माता मंदिर तक निकलेगा जुलूस, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन

    इंदौर में विशाल चुनरी यात्रा शुरू, बड़ा गणपति से बिजासन माता मंदिर तक निकलेगा जुलूस, कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन


    इंदौर । नवरात्रि के पावन अवसर पर इंदौर में मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विशाल चुनरी यात्रा की शुरुआत हो गई है। रविवार को बड़ा गणपति चौराहे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यात्रा का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। लाखों सितारों से सुसज्जित ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी बिजासन माता को अर्पित की जाएगी।
    आयोजन को लेकर शहर में व्यापक तैयारियां की गई हैं और यात्रा मार्ग पर व्यवस्था संभालने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों को तैनात किया गया है।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने निर्धारित कार्यक्रमों के तहत पहले लालबाग पहुंचे। इसके बाद वे एमवाय अस्पताल में मशीन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से मुख्यमंत्री बड़ा गणपति चौराहे पहुंचे और चुनरी यात्रा की शुरुआत की। वे कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 से 12 मिनट तक रुके और संक्षिप्त संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने लोगों को नवरात्रि दशहरा और दीपावली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद वे सुसज्जित वाहन में पहुंचे और वहां से रवाना हो गए।
    यात्रा बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर वायरलेस चौराहा और कालानी नगर होते हुए एरोड्रम थाना क्षेत्र से गुजरेगी। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था पंचशील नगर और बाबू मुराई कॉलोनी से होते हुए एयरपोर्ट प्रवेश द्वार के रास्ते बिजासन माता मंदिर पहुंचेगा। यात्रा का प्रमुख आकर्षण लाखों सितारों से सजी विशाल चुनरी है जिसे माता को अर्पित किया जाएगा। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी की उम्मीद है।
    आयोजन को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों की तैनाती की गई है। ये रक्षक प्रमुख चौराहों पर यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने में सहयोग करेंगे। यात्रा संयोजकों ने नागरिकों से भी व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। यात्रा के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट रहेगा ताकि भीड़ के बीच वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा सके।
    यात्रा के कारण गंगवाल और राजमोहल्ला चौराहे पर सिटी बसों तथा बड़े वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। नगर निगम चौराहे पर भी बड़े वाहनों के लिए डायवर्जन रहेगा। महेश नगर में कार और दोपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। गोराकुंड और अंतिम चौराहे से बड़ा गणपति की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जाएगा। टोरी कॉर्नर पर मल्हारगंज की ओर से आने वाले वाहनों को गोराकुंड की तरफ मोड़ा जाएगा जबकि गोपाल बिल्डिंग के पास वाहनों को कैलाश मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
    एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी यात्रा मार्ग पर संभावित भीड़ और यातायात बदलाव को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है। एरोड्रम जाने के लिए वाहन चालक मरीमाता से किला मैदान और टाटा स्टील होते हुए 60 फीट एसएफए टर्निंग तथा पंचशील मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा छोटा बांगड़दा से सुपर कॉरिडोर होते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का विकल्प भी रहेगा। भंवरकुआं अन्नपूर्णा और महू नाका की ओर से आने वाले यात्री चंदन नगर सिरपुर जवाहर टेकरी और चोइथराम अस्पताल चौराहे से नावदा तथा ग्राम रिजलाय होते हुए हिंकारगिरी के रास्ते एयरपोर्ट जा सकेंगे।
    यात्रा संयोजक सुदर्शन गुप्ता ने नागरिकों से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बड़ा गणपति मंदिर से बिजासन माता मंदिर तक के मार्ग पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। जरूरी काम होने पर वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को उड़ान के समय से पर्याप्त पहले घर से निकलने को कहा गया है ताकि रास्ते में संभावित जाम के कारण परेशानी न हो।

  • महाष्टमी पर कन्या भोज कब करें, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक शुभ समय, अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकेंगे पूजन

    महाष्टमी पर कन्या भोज कब करें, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक शुभ समय, अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकेंगे पूजन


    उज्जैन । नवरात्रि के दौरान महाष्टमी का पर्व इस बार 18 और 19 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। उज्जैन में अष्टमी तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच पूजन के समय को लेकर विशेष उत्सुकता है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू हुई और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। तिथि की अवधि और पूजा की पारंपरिक मान्यताओं के कारण कुछ घरों में रविवार को जबकि कुछ घरों में सोमवार सुबह महाष्टमी का पूजन किया जाएगा।
    ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के अनुसार जिन परिवारों में रात्रि के समय अष्टमी पूजन करने की परंपरा है वे 18 अक्टूबर को पूजा कर सकते हैं। वहीं सुबह पूजन करने वाले परिवार 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान पूजा कर सकते हैं। परंपराओं और पंचांग की गणना में अंतर के कारण पूजा के समय में भिन्नता देखने को मिल रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय तय करना चाहिए।
    उज्जैन में सोमवार को नगर पूजा का भी आयोजन होगा। शहर के प्रसिद्ध चौबीस खंभा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा की जाएगी। इस परंपरा के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा माता को मदिरा का भोग अर्पित किया जाएगा। नगर पूजा उज्जैन की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है और हर वर्ष नवरात्रि के दौरान इसका आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई जाएगी।
    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस नवरात्रि में दो सर्वार्थ सिद्धि योग और दो रवि योग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी आधार पर साधना और उपासना के साथ भूमि या भवन की खरीदारी तथा वाहन और संपत्ति से जुड़े कार्य करने की भी मान्यता है। हालांकि किसी भी महत्वपूर्ण खरीदारी या शुभ कार्य के लिए संबंधित तिथि और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना उचित माना जाता है।
    महाष्टमी पर पूजा करने वालों के लिए समय का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार रात्रि पूजन की परंपरा निभाने वाले श्रद्धालु 18 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे के बीच पारंपरिक पूजा कर सकते हैं। वहीं सुबह पूजा करने वाले परिवारों को 19 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 30 मिनट से पहले पूजन संपन्न करने की सलाह दी गई है। अलग-अलग पंचांगों में अष्टमी तिथि को लेकर गणना का अंतर भी बताया गया है। अष्टगामी ग्रह लाघवी पद्धति में अष्टमी 18 अक्टूबर को 60 घटी की मानी गई है जबकि चित्रा केतकी पंचांग में इसे 19 अक्टूबर को बताया गया है।
    कन्या पूजन और कन्या भोज के लिए भी 19 अक्टूबर को विशेष समय बताया गया है। अष्टमी तिथि के दौरान सूर्योदय से सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक कन्या पूजन और भोज कराया जा सकता है। यदि किसी कारणवश श्रद्धालु इस अवधि में पूजा नहीं कर पाते हैं तो दोपहर 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन और भोज करा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को शुभ और सिद्धिदायक माना जाता है इसलिए इस अवधि में भी पूजा करना उचित बताया गया है।
    महाष्टमी के अवसर पर देवी दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन और भोज को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और भोजन कराकर आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि के इन अंतिम दिनों में मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ का सिलसिला जारी है। श्रद्धालुओं को सलाह है कि वे अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजन करें।

  • सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई

    सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई


    उज्जैन । उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को लेकर प्रशासन ने सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी अभियान के तहत रविवार तड़के नगर निगम की टीम ने जयसिंहपुरा क्षेत्र में नरसिंह घाट के पास स्थित महासिद्ध आश्रम यानी एमएस सुकृत ट्रस्ट के परिसर में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। सुबह करीब पांच बजे पहुंची टीम ने तीन पोकलैंड मशीनों की मदद से नवनिर्मित भवन के कुछ हिस्सों को ध्वस्त किया। हालांकि भवन के भीतर रखा सामान निकालने के लिए समय दिए जाने के बाद कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
    नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के अनुसार आश्रम परिसर में सिंहस्थ के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि पर हाल ही में तीन अलग-अलग पक्के भवनों का निर्माण किया गया था। निगम प्रशासन ने इन निर्माणों को हटाने के लिए आश्रम संचालक को पहले ही दो बार नोटिस जारी किए थे। निर्धारित समय सीमा में निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद रविवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन का उद्देश्य सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है ताकि आयोजन के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रह सके।
    कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पता चला कि नवनिर्मित भवन के अंदर आश्रम का काफी सामान रखा हुआ है। ऐसे में सामान को बाहर निकालने के लिए समय दिया गया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने फिलहाल कार्रवाई रोक दी और मौके से लौट गई। अधिकारियों के मुताबिक दी गई समय सीमा समाप्त होने के बाद शेष अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया फिर शुरू की जाएगी। इस तरह भवन के कुछ हिस्सों पर कार्रवाई हो चुकी है जबकि बाकी निर्माण हटाने की प्रक्रिया सामान खाली होने के बाद आगे बढ़ेगी।
    सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान पिछले कुछ समय से लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन का जोर उन जमीनों को खाली कराने पर है जिन्हें सिंहस्थ के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे क्षेत्रों में पक्के निर्माण होने से भविष्य में आयोजन संबंधी सुविधाओं और आवागमन की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए नगर निगम की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर निर्माणों की जांच कर रही हैं और नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
    महासिद्ध आश्रम पर कार्रवाई से दो दिन पहले नगर निगम की टीम ने इसी क्षेत्र में स्थित हरियाणा वाले सत्यगिरि महाराज के आश्रम में किए गए अवैध निर्माण को भी पोकलैंड मशीन की मदद से ध्वस्त किया था। लगातार हो रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि हर मामले में संबंधित निर्माण की स्थिति और जारी नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
    सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए भूमि और यातायात प्रबंधन महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन को अस्थायी सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होगी। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की मुहिम को आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। महासिद्ध आश्रम के मामले में फिलहाल कार्रवाई आंशिक रूप से पूरी हुई है और सामान हटाने के लिए निर्धारित समय बीतने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित

    ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। चीनौर रोड पर दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और मंदिर परिसर के आसपास चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
    जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे हुआ। उस समय शीतला माता मंदिर में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कई लोग सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अचानक बेकाबू हो गया। बताया गया है कि घटनास्थल पर सड़क का ढलान काफी तीखा है। ट्रक लोगों को रौंदता हुआ आगे बढ़ा और पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर की दीवार ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए।
    ट्रक चालक ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक फेल हो गए थे। खबर के मुताबिक वह गूगल मैप की मदद से ट्रक चला रहा था। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों और उसमें किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद पुलिस और राहत दल ने घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। घायलों को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
    हादसे में घायल थाटीपुर निवासी अभिषेक ने बताया कि वह उस समय हाथ-पैर धो रहे थे जब अचानक सामने से ट्रक आ गया। उनके मुताबिक ट्रक उन्हें घसीटते हुए आगे ले गया। एक व्यक्ति ने उन्हें तलाशकर बाहर निकाला जिससे उनकी जान बच सकी। हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
    घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटाया गया है। इसके साथ ही आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इनमें झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव और आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा सहित यातायात पुलिस के अधिकारी तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह कार्रवाई हादसे के दौरान कथित लापरवाही के मामले में की गई है।
    मुख्यमंत्री ने मृतकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है। उन्होंने हादसे में घायल सभी लोगों का निशुल्क इलाज कराने की घोषणा की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी घटना पर दुख जताया और मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
    अष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने के बीच इस हादसे ने धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीखे ढलान वाले मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है। हादसे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रक के बेकाबू होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में चूक के लिए कौन से कारण जिम्मेदार थे।

  • दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    दिल्ली में दशहरे पर 30 फुट का कॉकरोच पुतला जलाने की तैयारी, विवाद के बीच आयोजकों ने बताई वजह

    नई दिल्ली ।दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने धार्मिक आयोजन में कॉकरोच के पुतले को शामिल करने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोजकों ने इसे स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल बताया है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है।

    पीतमपुरा में वार्षिक रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने कॉकरोच को गंदगी का प्रतीक बताया है। समिति के अनुसार, दशहरे के मौके पर इस पुतले का दहन करने के जरिए लोगों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में संदेश दिया जाएगा। आयोजकों ने इस पहल को स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियानों से जोड़ते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को अपने आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है।

    समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले के पीछे किसी राजनीतिक मकसद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पुतला दहन का उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के साथ स्वच्छता की अहमियत को भी सामने लाना है। उनके मुताबिक, कॉकरोच के पुतले को रावण की सेना में शामिल असुरों के बीच दिखाया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस प्रतीक के माध्यम से सफाई से जुड़ा संदेश लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

    हालांकि, इस फैसले पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि दशहरा जैसे पारंपरिक धार्मिक उत्सव में समसामयिक मुद्दों को शामिल करना कितना उचित है। उनका कहना है कि त्योहार का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है और आयोजन में किसी नए प्रतीक को शामिल करने से धार्मिक परंपरा के अर्थ को लेकर बहस पैदा हो सकती है।

    एक सोशल मीडिया यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस परंपरा को मौजूदा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि त्योहारों का उद्देश्य लोगों को एकजुट करना होना चाहिए, न कि उनके बीच राजनीतिक मतभेदों को बढ़ाना।

    कुछ अन्य लोगों ने भी इस पहल पर आपत्ति जताई। एक यूजर ने आशंका जताई कि रावण की तुलना कॉकरोच से करने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल अपने हितों के लिए किया जा रहा है। इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि कॉकरोच के पुतले को लेकर चर्चा केवल स्वच्छता के संदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें धार्मिक परंपरा और सार्वजनिक आयोजनों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पहचाने जाने वाला समूह भी विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहा है। इस समूह ने शुरुआत में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भी शामिल हो गया। हालांकि, समिति ने अपने फैसले को इन घटनाक्रमों से जोड़ने से इनकार किया है।

    इस पहल पर पर्यावरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब शहर पहले से प्रदूषण से जूझ रहा है, तो इतने बड़े पुतले को जलाने की जरूरत क्यों है। इस तरह आयोजन को लेकर स्वच्छता के संदेश, धार्मिक भावनाओं और पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • इंदौर में चुनरी यात्रा को लेकर ट्रैफिक अलर्ट, कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन, एयरपोर्ट जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग जारी

    इंदौर में चुनरी यात्रा को लेकर ट्रैफिक अलर्ट, कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन, एयरपोर्ट जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग जारी


    इंदौर । इंदौर में नवरात्रि के अवसर पर आज विशाल चुनरी यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होकर बिजासन माता मंदिर तक पहुंचने वाली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। लाखों सितारों से सुसज्जित ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी माता को अर्पित की जाएगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ और यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए तीन हजार चुनरी रक्षकों की तैनाती की गई है।
    यात्रा सुबह 10 बजे बड़ा गणपति मंदिर से शुरू होगी। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था वायरलेस चौराहा और कालानी नगर होते हुए एरोड्रम थाना क्षेत्र से गुजरेगा। यात्रा पंचशील नगर और बाबू मुराई कॉलोनी से होते हुए एयरपोर्ट प्रवेश द्वार के रास्ते बिजासन माता मंदिर पहुंचेगी। यात्रा संयोजक और भाजपा के पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता के मुताबिक आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख चौराहों पर तैनात चुनरी रक्षक यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करेंगे। आपसी तालमेल बनाए रखने के लिए उनके पास वॉकी-टॉकी भी रहेंगे।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में बदलाव हुआ है। वे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले लालबाग गए और इसके बाद एमवाय अस्पताल में मशीन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां से उनके बड़ा गणपति चौराहे पहुंचकर चुनरी यात्रा में शामिल होने का कार्यक्रम है। आयोजन में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों के भी मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।
    यात्रा के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना है। गंगवाल और राजमोहल्ला चौराहे पर सिटी बसों और बड़े वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा। नगर निगम चौराहे पर भी बड़े वाहनों और सिटी बसों के लिए डायवर्जन रहेगा। महेश नगर में कार और दोपहिया वाहनों की आवाजाही को बदला जाएगा। गोराकुंड और अंतिम चौराहे पर बड़ा गणपति की ओर आने वाले वाहनों को दूसरे मार्गों से निकाला जाएगा। टोरी कॉर्नर पर मल्हारगंज की ओर से आने वाले वाहन गोराकुंड की तरफ भेजे जाएंगे जबकि गोपाल बिल्डिंग के पास वाहनों को कैलाश मार्ग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
    कर्णावतपुरा तिराहे और बड़वाली चौकी से बड़ा गणपति की ओर जाने वाले वाहन भी वैकल्पिक मार्गों से गुजरेंगे। वायरलेस चौराहे और कालानी नगर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी अलग-अलग स्थानों पर डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। दिलीप नगर टी से बिजासन माता मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजा जाएगा। सुपर कॉरिडोर चौराहे से बिजासन टी की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा।
    एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एरोड्रम की ओर जाने के लिए वाहन चालक मरीमाता से किला मैदान और टाटा स्टील होते हुए 60 फीट एसएफए टर्निंग तथा पंचशील मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरा विकल्प छोटा बांगड़दा से सुपर कॉरिडोर होते हुए एयरपोर्ट पहुंचने का है। भंवरकुआं और अन्नपूर्णा सहित महू नाका की ओर से आने वाले वाहन चंदन नगर और सिरपुर होते हुए जवाहर टेकरी तथा चोइथराम अस्पताल चौराहे से नावदा और ग्राम रिजलाय के रास्ते हिंकारगिरी होकर एयरपोर्ट जा सकेंगे।
    आयोजकों ने नागरिकों से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यात्रा मार्ग पर अनावश्यक आवागमन से बचने की अपील की है। जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को उड़ान के समय को ध्यान में रखकर घर से पर्याप्त समय पहले निकलना चाहिए ताकि सड़क पर संभावित जाम के कारण परेशानी न हो।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक

    मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 72 घंटे से आंधी और बारिश का दौर जारी है। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। लगातार बदलते मौसम के कारण दिन के तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 15 जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। वहीं अनुमान है कि 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट के साथ ठंडक बढ़ने लगेगी।
    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक रविवार को नीमच मंदसौर श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर पन्ना मऊगंज सीधी सिंगरौली सिवनी और बालाघाट में बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की संभावना है। पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से इंदौर उज्जैन ग्वालियर चंबल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में मौसम प्रभावित हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को भी इन क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई थी। बड़वानी जिले के सेंधवा सीहोर और पीथमपुर में भी पानी गिरा जबकि रीवा और सागर संभाग के कई इलाकों में बादल छाए रहे।
    मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद मौसम में बदलाव आने की संभावना है। 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट होने से ठंडक बढ़ सकती है। अक्टूबर में दिन के समय गर्मी रात में हल्की ठंडक और बीच-बीच में बारिश का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी प्रदेश में मौसम का यही मिला-जुला रूप दिखाई दे रहा है।
    गौर करने वाली बात यह है कि मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही लौट चुका है। इसके बावजूद नए मौसमी सिस्टम सक्रिय होने से बारिश का दौर दोबारा शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता रहा है। इस बार भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही परिस्थितियां बन रही हैं। महीने की शुरुआत में कई जिलों में मौसम साफ हुआ था और तेज धूप निकली थी लेकिन बाद में आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया।
    प्रदेश में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी हिस्से के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक बताया गया है। हालांकि कुछ जिलों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है। बालाघाट छिंदवाड़ा दमोह जबलपुर नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश की कमी सामने आई है। आलीराजपुर अशोकनगर बड़वानी बैतूल देवास धार हरदा इंदौर झाबुआ खंडवा मंदसौर मुरैना नर्मदापुरम नीमच रायसेन रतलाम सीहोर शाजापुर उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल राजगढ़ बुरहानपुर खरगोन कटनी मंडला डिंडौरी ग्वालियर गुना दतिया पन्ना छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी मैहर आगर-मालवा भिंड श्योपुर सिंगरौली सीधी सतना मऊगंज शहडोल उमरिया और अनूपपुर सहित 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा होने की जानकारी दी गई है।
    इस साल जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के कारण आंकड़ों में सुधार हुआ लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के अंतिम दौर में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम रही। मध्य प्रदेश में औसत मौसमी बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है।
    राजधानी भोपाल सहित इंदौर ग्वालियर जबलपुर और उज्जैन में अक्टूबर के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ग्वालियर में इस महीने दिन का तापमान कई बार 38 डिग्री के पार पहुंच चुका है जबकि इंदौर में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में रात की ठंडक बढ़ने लगती है। जबलपुर और उज्जैन में भी इस महीने बारिश के साथ तापमान में बदलाव का इतिहास रहा है। फिलहाल प्रदेश के कई जिलों में लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बारिश और तेज हवाओं की संभावना वाले इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत है।