Author: bharati

  • डूरंड लाइन पर फिर बढ़ा तनाव…. अफगान बलों के साथ भीषण झड़प में पाकिस्तान के 7 सैनिकों की मौत

    डूरंड लाइन पर फिर बढ़ा तनाव…. अफगान बलों के साथ भीषण झड़प में पाकिस्तान के 7 सैनिकों की मौत


    इल्लामाबाद।
    पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan and Afghanistan) के बीच विवादित डूरंड लाइन (Disputed Durand Line) पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई भीषण झड़प में तकरीबन सात पाकिस्तानी सैनिकों (Pakistani Soldiers) की मौत की खबर है. लड़ाई अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत के दांड पटान जिले में हुई. यह इलाका खारलाची गेट और टॉप सर और कोंज अली सेक्टरों के पास स्थित है।

    मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर के आसपास शुरू हुई गोलीबारी की वजह से सीमा पार व्यापार प्रभावित हुआ. आसपास के गांवों के लोगों को भी अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। अफगान सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि उनकी सेना ने पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सीमा पर बिना इजाजत के चौकियां बना रहा था. अफगान पक्ष ने दावा किया कि झड़प में पाकिस्तानी सेना के जवानों को नुकसान पहुंचा।

    वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने गोलीबारी शुरू करने का आरोप अफगान सीमा रक्षकों पर लगाया है. उनका कहना है कि अफगान गार्ड्स ने पाकिस्तान के कुर्रम जिले में चौकियों को निशाना बनाया. इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की.


    पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच क्यों बढ़ रहा तनाव?

    दरअसल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ है. सीमा पर बार-बार होने वाली झड़पों के पीछे आतंकवादी गतिविधियों, सीमा पार हमलों और सैन्य ठिकानों को लेकर मतभेद बताए जाते हैं.

    पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आरोप लगाया है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाकों को अफगान क्षेत्र में सक्रिय रहने देती है. पाकिस्तान का दावा है कि ये लड़ाके अफगानिस्तान से सीमा पार करके उसके इलाके में हमले करते हैं. काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

    शनिवार को पाकिस्तान के कुर्रम जिले में भी पाकिस्तानी सैनिकों और अफगान तालिबान के जवानों के बीच कई जगहों पर गोलीबारी हुई थी. पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना ने तोपखाने की मदद से तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाया और अफगानिस्तान से घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी. इस घटना पर तालिबान सरकार की तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


    सीमा पर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    डूरंड लाइन पर लगातार होने वाली झड़पों से सीमा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. सीमा नियंत्रण, उग्रवादी गतिविधियों और सैन्य तैनाती को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बार-बार सशस्त्र संघर्ष का रूप ले लेते हैं. ताजा झड़प के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है।

  • पैरा एशियन गेम्स 2026 की आज होगी भव्य शुरुआत… भारत के 168 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

    पैरा एशियन गेम्स 2026 की आज होगी भव्य शुरुआत… भारत के 168 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा


    आइची-नागोया।
    भारत (India) रविवार से शुरू हो रहे पैरा एशियन गेम्स (Para Asian Games) में अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ने के इरादे से उतरेगा। हालांकि, इस बार भारतीय दल का आकार पहले के मुकाबले काफी छोटा है। इसके अलावा पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों ने भी खेलों से पहले माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत के लिए 2023 में जीते गए 111 पदकों की उपलब्धि को दोहराना एक बड़ी चुनौती होगी। भारत ने चीन के हांगझोउ में 2023 में आयोजित पिछले पैरा एशियन गेम्स में 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य सहित कुल 111 पदक जीते थे। यह इन खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस बार भारतीय खिलाड़ी (Indian players) इस रिकॉर्ड को बेहतर करने के लक्ष्य (New Medal Record) के साथ मैदान में उतरेंगे।


    303 से घटकर 168 हुआ भारतीय दल

    आइची-नागोया (Aichi-Nagoya) में आयोजित होने वाले इन खेलों में भारत ने 11 खेलों के लिए 168 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जबकि हांगझोउ में भारत की ओर से 303 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भागीदारी के लिए कड़े किए गए कोटे और खेल कार्यक्रमों में बदलाव के कारण भारतीय दल के आकार में कमी आई है। खिलाड़ियों की संख्या में आई इस गिरावट का असर पदकों की कुल संख्या पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत की सफलता काफी हद तक अनुभवी पदक विजेताओं के प्रदर्शन और नए खिलाड़ियों की महाद्वीपीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी। आधिकारिक उद्घाटन समारोह से पहले ही भारतीय खिलाड़ी पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, बोकिया और दृष्टिबाधित फुटबॉल में अपने अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।


    पैरा एथलेटिक्स से सबसे ज्यादा उम्मीदें

    हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में भारत ने पैरा एथलेटिक्स में 18 स्वर्ण सहित कुल 55 पदक जीते थे। इस बार भी एथलेटिक्स भारतीय दल के लिए पदकों का बड़ा स्रोत बन सकता है। हालांकि, इस स्पर्धा में भारत के खिलाड़ियों की संख्या 123 से घटकर 62 रह गई है। पैरालंपिक चैंपियन और विश्व रिकॉर्डधारी भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल से स्वर्ण पदक की उम्मीद होगी। ऊंची कूद में निषाद कुमार, फर्राटा दौड़ में प्रीति पाल और क्लब थ्रो में धरमबीर सिंह भारतीय चुनौती को मजबूती देंगे।


    तीरंदाजी, बैडमिंटन और निशानेबाजी पर नजर

    तीरंदाजी में भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी और पायल नाग से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, पैरालंपिक रिकर्व चैंपियन हरविंदर सिंह और विश्व चैंपियन तोमान कुमार भी पदक के दावेदारों में शामिल हैं। पैरा बैडमिंटन में कई बार के चैंपियन प्रमोद भगत और सुहास एलवाई पर भारत की उम्मीदों का बड़ा दारोमदार होगा। निशानेबाजी में पैरालंपिक चैंपियन अवनि लेखरा भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगी। पैरा टेबल टेनिस में टोक्यो पैरालंपिक की रजत पदक विजेता भाविना पटेल से भी पदक की आस रहेगी।

    चयन प्रक्रिया पर विवाद से बढ़ी मुश्किलें
    खेलों से पहले पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आए हैं। करीब 150 पैरा निशानेबाजों ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) से कथित वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और चयन संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझड़िया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई। वहीं, खेल मंत्रालय ने निशानेबाजी टीम के मुख्य कोच को दल से हटाकर उनकी जगह दूसरे कोच को शामिल किया। इस फैसले का कई प्रमुख निशानेबाजों ने विरोध किया। पैरा साइकिलिंग में भी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। संयुक्त चयन समिति ने छह साइकिलिस्ट का चयन किया था, लेकिन खेल मंत्रालय ने केवल अरशद शेख के नाम को मंजूरी दी।


    अनुभवी खिलाड़ियों और नए चेहरों पर टिकी निगाहें

    भारतीय दल के सामने इस बार चुनौती केवल पदकों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि सीमित खिलाड़ियों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की भी है। एक ओर सुमित अंतिल, अवनि लेखरा, प्रमोद भगत और भाविना पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें हैं, तो दूसरी ओर नए खिलाड़ियों के पास बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका होगा। अब देखना होगा कि छोटा भारतीय दल विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हांगझोउ के 111 पदकों के रिकॉर्ड को पार कर पाता है या नहीं।

  • मुस्कान को सता रही बड़ी बेटी से मिलने की तड़प, रविता ने भी उठाया अगला कदम, फांसी की सजा के खिलाफ अपील की तैयारी तेज

    मुस्कान को सता रही बड़ी बेटी से मिलने की तड़प, रविता ने भी उठाया अगला कदम, फांसी की सजा के खिलाफ अपील की तैयारी तेज


    मेरठ । मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान अब अपनी बड़ी बेटी से मिलने की इच्छा जता रही है। दूसरी ओर पति की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाली रविता ने भी अपने बचाव के लिए कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। दोनों महिलाओं ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए निजी वकील उपलब्ध कराने की मांग की है। जेल प्रशासन के मुताबिक उनके आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इन दोनों मामलों में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
    नीला ड्रम कांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को पति सौरभ की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाया गया है। इसी तरह सांप कांड में रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को पति अमित की हत्या के मामले में फांसी की सजा दी गई है। दोनों घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया था। निचली अदालत के फैसले के बाद अब चारों दोषी उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वे निजी अधिवक्ताओं की सहायता चाहते हैं ताकि अपने पक्ष को कानूनी तरीके से प्रस्तुत कर सकें।
    जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान और रविता की ओर से निजी वकील की मांग को लेकर आवेदन दिया गया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों के आवेदन पर नियमानुसार निजी वकील उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जाएगी। मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर मिलता है और मामले में आगे का निर्णय संबंधित अदालतों की सुनवाई तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर होता है। इसलिए निचली अदालत के फैसले के बाद भी इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
    इस बीच जेल में बंद चारों दोषियों के कामकाज से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। जेल प्रशासन के अनुसार मुस्कान ने सिलाई और कढ़ाई का काम चुना है जबकि साहिल खेती से जुड़ा काम कर रहा है। रविता ने बैग बनाने का काम चुना है और अमरदीप रंगाई-पुताई से संबंधित काम कर रहा है। जेल प्रशासन ने बताया कि मृत्युदंड की सजा के बाद रविता और अमरदीप को नई बैरकों में स्थानांतरित किया गया है। बंदियों की निगरानी और जेल से जुड़ी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही हैं।
    फांसी की सजा के मामलों में अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंदियों को दूसरी जेलों में स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा सकती है। खबर के मुताबिक पुरुष बंदियों को आगरा सेंट्रल जेल और महिला बंदियों को लखनऊ स्थित निर्धारित जेल में भेजने की व्यवस्था है। हालांकि स्थानांतरण जेलों में उपलब्ध जगह और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। फिलहाल चारों दोषियों की अपील से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
    दूसरी ओर सांप कांड में सजा पाए अमरदीप की मां का एक वीडियो भी चर्चा में है। वीडियो में वह अपने बेटे को निर्दोष बताते हुए उसे रिहा कराने की मांग करती नजर आ रही हैं। उन्होंने रविता को सजा देने की बात भी कही है। हालांकि किसी आरोपी के दोषी होने या निर्दोष होने का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होता है।
    इसी बीच मेरठ के जल्लाद पवन का बयान भी सामने आया है। उसने कहा कि यदि जेल प्रशासन उसे जिम्मेदारी सौंपता है तो वह चारों दोषियों को फांसी देने के लिए तैयार है। उसका कहना है कि गंभीर अपराधों में कानून के अनुसार सजा मिलना जरूरी है। अब इन मामलों में आगे की कानूनी कार्यवाही और उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की पूछताछ तेज, पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से तीन घंटे तक सवाल-जवाब, उर्मिला सनावर पर दिया बयान

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए। पूछताछ हरिद्वार के भेल क्षेत्र स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में हुई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीबीआई की टीम और पूर्व विधायक वहां से रवाना हो गए। इस पूछताछ के बाद मामले की जांच और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

    पूछताछ के बाद सुरेश राठौड़ ने बाहर आकर अपने बयान में कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने जो भी सवाल पूछे, उनसे संबंधित बातें उन्होंने सत्यता के साथ बताईं। उन्होंने कहा, “मैंने सीबीआई की जांच में पूरा सहयोग किया है। न इससे कम, न इससे ज्यादा।” पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि वह आगे भी जांच में सहयोग करते रहेंगे।

    वायरल ऑडियो पर सवाल, उर्मिला सनावर से अनभिज्ञता जताई
    पूछताछ के बाद पत्रकारों ने सुरेश राठौड़ से कथित वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े संबंधों को लेकर सवाल किए। इस पर पूर्व विधायक ने उर्मिला सनावर के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह नहीं जानते कि उर्मिला सनावर कौन हैं और उनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वायरल ऑडियो को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में यह सवाल अहम माना जा रहा है, हालांकि पूछताछ में अधिकारियों ने किन-किन विशिष्ट बिंदुओं पर सवाल किए, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

    अंकिता के परिजनों ने की थी कार्रवाई की मांग

    पिछले कुछ दिनों में अंकिता भंडारी मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था और सीबीआई मुख्यालय जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। परिजनों ने मामले में जल्द और कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई थी। परिवार की ओर से न्याय की मांग लगातार चर्चा में रही है। इसी बीच सीबीआई की ओर से पूर्व विधायक से पूछताछ किए जाने की घटना जांच की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के बाद बढ़ा था विवाद
    इससे पहले सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इस रिकॉर्डिंग को लेकर अलग-अलग सवाल उठे और मामले ने राजनीतिक चर्चा का रूप भी लिया। हालांकि, किसी कथित रिकॉर्डिंग में कही गई बातों और उनकी सत्यता को जांच के निष्कर्ष के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी कारण इस प्रकरण में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    सीबीआई जांच में किन पहलुओं पर नजर?

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीआई अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। वायरल ऑडियो से जुड़े सवाल भी इस मामले की चर्चा का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, पूर्व विधायक से पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने किन विशेष जानकारियों की पुष्टि करने की कोशिश की और इस पूछताछ से जांच को क्या निष्कर्ष मिला, इसका आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

    फिलहाल सुरेश राठौड़ ने जांच में सहयोग करने की बात कही है और उर्मिला सनावर को लेकर जानकारी होने से इनकार किया है। सीबीआई की पूछताछ को मामले की जांच की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आगे की कार्रवाई और जांच से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस घटनाक्रम के व्यापक पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा।

  • दुनिया के इन 10 देशों में भूख का बड़ा संकट, पाकिस्तान से बांग्लादेश और अफगानिस्तान तक बिगड़े हालात, 17.7 करोड़ लोगों पर मंडराया खतरा

    दुनिया के इन 10 देशों में भूख का बड़ा संकट, पाकिस्तान से बांग्लादेश और अफगानिस्तान तक बिगड़े हालात, 17.7 करोड़ लोगों पर मंडराया खतरा


    नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में खाद्य संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जहां लाखों लोगों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में वर्ष 2026 के दौरान करीब 1.06 करोड़ लोगों को जीवित रहने के लिए तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है। यह आंकड़ा देश में गरीबी बेरोजगारी महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पैदा हुए संकट की गंभीरता को उजागर करता है। रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलावा दुनिया के नौ अन्य देशों को भी गंभीर खाद्य संकट से प्रभावित बताया गया है।
    पाकिस्तान में आर्थिक हालात लंबे समय से आम लोगों के लिए चुनौती बने हुए हैं। महंगाई के कारण खाने पीने की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवारों की आमदनी उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। बेरोजगारी और आय के सीमित अवसरों के कारण लोगों की भोजन और पौष्टिक आहार तक पहुंच प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक संकेतकों में सुधार के दावों के बावजूद बड़ी आबादी के सामने खाद्य सुरक्षा की समस्या बनी हुई है।
    पाकिस्तान में खाद्य संकट की एक बड़ी वजह प्राकृतिक आपदाएं भी हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ सूखा भीषण गर्मी और अनियमित मानसूनी बारिश जैसी घटनाओं का असर खेती पर पड़ता है। फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की आमदनी घटती है और खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता तथा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही पशुपालन पर निर्भर परिवारों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितता ने पहले से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
    मानवीय सहायता में कमी आने से हालात और चिंताजनक हो सकते हैं। जब जरूरतमंद परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मदद और भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता तो उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है। कुछ परिवार कम भोजन करने या दिन में एक समय का खाना छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों को अपने पशु और दूसरी संपत्तियां बेचने जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। बच्चों की शिक्षा पर भी इसका असर पड़ने की आशंका रहती है क्योंकि परिवारों को सीमित संसाधनों में भोजन और अन्य जरूरी खर्चों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों और महिलाओं में कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है।
    एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलावा नाइजीरिया कांगो सूडान यमन अफगानिस्तान म्यांमार बांग्लादेश दक्षिण सूडान और सीरिया को भी गंभीर खाद्य संकट का सामना करने वाले देशों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन दस देशों में लगभग 17.7 करोड़ लोग गंभीर भूख की समस्या से प्रभावित हैं। इन देशों में संघर्ष राजनीतिक अस्थिरता गरीबी जलवायु संबंधी आपदाएं और मानवीय सहायता की कमी जैसे अलग-अलग कारण खाद्य संकट को बढ़ाते हैं। हालांकि हर देश में संकट की परिस्थितियां और उसकी तीव्रता अलग-अलग हैं।
    वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट का बढ़ना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भूख से निपटने के लिए केवल भोजन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रभावित परिवारों की आय बढ़ाने कृषि व्यवस्था मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता विकसित करने की भी जरूरत है। पाकिस्तान समेत दूसरे प्रभावित देशों में समय पर मानवीय सहायता पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों लोगों के जीवन और भविष्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

  • गगनयान मिशन को मिली नई ताकत, ISRO ने परखी अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की तकनीक, 2026 के मानवरहित मिशन पर नजरें

    गगनयान मिशन को मिली नई ताकत, ISRO ने परखी अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की तकनीक, 2026 के मानवरहित मिशन पर नजरें


    नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष अभियान के लिए गगनयान मिशन एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO इस मिशन को सफल बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण परीक्षण कर रहा है। इसी कड़ी में इसरो ने क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने से जुड़े अहम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। यह परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे तो उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में इस तकनीक की बड़ी भूमिका होगी। इस सफलता से गगनयान के पहले मानवरहित मिशन G1 की तैयारियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
    गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजने और मिशन पूरा होने के बाद सुरक्षित वापस लाने की योजना है। इस अभियान में अंतरिक्ष यान के अलग-अलग हिस्सों का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। गगनयान के ऑर्बिटल मॉड्यूल में मुख्य रूप से दो हिस्से होते हैं। पहला क्रू मॉड्यूल है जिसमें अंतरिक्ष यात्री यात्रा करेंगे। दूसरा सर्विस मॉड्यूल है जो मिशन के दौरान जरूरी सेवाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है। अंतरिक्ष यान के उड़ान भरने के समय दोनों मॉड्यूल एक साथ जुड़े रहते हैं और अपने निर्धारित कार्य करते हैं।
    मिशन का सबसे महत्वपूर्ण चरण तब आता है जब क्रू मॉड्यूल को पृथ्वी पर वापस लाना होता है। इस दौरान उसे सर्विस मॉड्यूल से अलग करना पड़ता है। दोनों मॉड्यूल के बीच बिजली और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए कई कनेक्शन होते हैं जिन्हें तय प्रक्रिया के तहत अलग किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई तकनीकी उपकरण एक साथ काम करते हैं। यदि किसी कनेक्शन या अलग करने वाले सिस्टम में गड़बड़ी होती है तो अंतरिक्ष यान की वापसी प्रभावित हो सकती है। इसलिए इसरो पहले ही इन प्रणालियों की क्षमता और विश्वसनीयता को परख रहा है ताकि वास्तविक मिशन के दौरान किसी भी संभावित जोखिम को कम किया जा सके।
    यह परीक्षण केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में किया गया। यहां क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को जोड़कर ऐसी व्यवस्था तैयार की गई जिससे वास्तविक उड़ान के दौरान होने वाली प्रक्रिया का आकलन किया जा सके। परीक्षण में यह जांचा गया कि दोनों मॉड्यूल को जोड़ने वाले कनेक्शन निर्धारित समय पर अलग हो सकते हैं या नहीं। इसके साथ ही अलगाव के दौरान उत्पन्न होने वाले झटकों और उनके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तकनीकी प्रणालियों की मजबूती भी परखी गई।
    इसरो ने एवियोनिक्स इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम हीट शील्ड और तैनात होने वाली अंबिलिकल शील्ड जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों की कार्यक्षमता की भी जांच की। ये सिस्टम अंतरिक्ष यान को सही दिशा में बनाए रखने और पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय जरूरी सुरक्षा प्रदान करने में मदद करते हैं। वापसी के दौरान क्रू मॉड्यूल को अत्यधिक तापमान का सामना करना पड़ता है इसलिए उसकी सुरक्षा व्यवस्था का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा तापमान और नमी नियंत्रित करने वाले उपकरणों की भी जांच की गई।
    अब इसरो की नजर गगनयान के पहले मानवरहित मिशन G1 पर है। वर्ष 2026 में इस मिशन को भेजने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के बिना यान को अंतरिक्ष में भेजकर विभिन्न प्रणालियों और सुरक्षा प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा। इस उड़ान से मिलने वाले परिणाम आगे के मिशनों की तैयारियों में मदद करेंगे। गगनयान की सफलता भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है। साथ ही यह देश की वैज्ञानिक क्षमता और स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

  • अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए संगीतकार के परिवार, माता-पिता और रजनीकांत से खास रिश्ते की पूरी जानकारी

    अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए संगीतकार के परिवार, माता-पिता और रजनीकांत से खास रिश्ते की पूरी जानकारी

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर इन दिनों काव्या मारन के साथ अपनी शादी को लेकर चर्चा में हैं। काव्या मारन सनराइजर्स हैदराबाद की मालकिन के रूप में जानी जाती हैं। दोनों की शादी को लेकर सामने आ रही खबरों के बीच अनिरुद्ध के परिवार को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। अनिरुद्ध का परिवार दक्षिण भारतीय सिनेमा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता अभिनेता हैं, मां शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी हैं और परिवार का संबंध सुपरस्टार रजनीकांत से भी है।

    शादी को लेकर क्या है चर्चा?

    सामने आई जानकारी के मुताबिक, अनिरुद्ध रविचंदर और काव्या मारन की शादी 11 नवंबर 2026 को ग्रीस में होने की चर्चा है। यह भी दावा किया गया है कि शादी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय को निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि, शादी से जुड़ी इन जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समारोह की तारीख और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है। फिलहाल इस संभावित शादी को लेकर प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

    रवि राघवेंद्र हैं अनिरुद्ध के पिता

    अनिरुद्ध रविचंदर के पिता रवि राघवेंद्र तमिल फिल्मों और टेलीविजन की दुनिया के जाने-पहचाने अभिनेता हैं। अभिनय के क्षेत्र में उनकी अपनी पहचान है। मनोरंजन जगत से जुड़े परिवार में पले-बढ़े अनिरुद्ध ने संगीत की दुनिया में अलग मुकाम बनाया है। उनके पिता का अभिनय से जुड़ा अनुभव परिवार की उस पृष्ठभूमि को दर्शाता है, जिसका संबंध लंबे समय से दक्षिण भारतीय मनोरंजन उद्योग से रहा है।

    मां लक्ष्मी रविचंदर हैं शास्त्रीय नृत्यांग
    ना
    अनिरुद्ध की मां लक्ष्मी रविचंदर पेशे से शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। इस तरह उनके परिवार में अभिनय के साथ-साथ कला और संगीत से जुड़ी परंपरा भी मौजूद है। अनिरुद्ध ने फिल्म संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके परिवार के सदस्यों की अलग-अलग कलात्मक गतिविधियां उन्हें दक्षिण भारतीय मनोरंजन जगत से जोड़ती हैं।

    बहन वैष्णवी और परिवार के दूसरे सदस्य
    अनिरुद्ध रविचंदर की एक बहन भी हैं, जिनका नाम वैष्णवी है। उनके परिवार में अन्य सदस्य भी फिल्म जगत से जुड़े हुए हैं। अनिरुद्ध की बुआ लता रजनीकांत हैं, जिनकी शादी सुपरस्टार रजनीकांत से हुई है। इस रिश्ते के कारण रजनीकांत अनिरुद्ध के फूफा लगते हैं। रजनीकांत दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं और उनका परिवार भी फिल्म निर्माण से जुड़ा रहा है।

    ऐश्वर्या और सौंदर्या रजनीकांत हैं चचेरी बहनें
    रजनीकांत और लता रजनीकांत की बेटियां ऐश्वर्या रजनीकांत और सौंदर्या रजनीकांत अनिरुद्ध की चचेरी बहनें हैं। दोनों फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। इस तरह अनिरुद्ध का पारिवारिक संबंध अभिनय, निर्देशन, नृत्य और संगीत जैसे मनोरंजन जगत के विभिन्न क्षेत्रों से है। हालांकि, अनिरुद्ध ने अपनी पहचान मुख्य रूप से संगीतकार के रूप में बनाई है।

    काव्या मारन से रिश्ते को लेकर भी चर्चा
    अनिरुद्ध और काव्या मारन के रिश्ते को लेकर यह भी चर्चा है कि दोनों के बीच संबंध आगे बढ़ने में रजनीकांत की भूमिका रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। काव्या मारन क्रिकेट जगत में अपनी भूमिका के कारण जानी जाती हैं, जबकि अनिरुद्ध तमिल फिल्मों के संगीतकार के तौर पर लोकप्रिय हैं। दोनों की संभावित शादी को लेकर प्रशंसकों की निगाहें अब आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं।

  • हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा, स्ट्रक्चर गिरने से छात्रा की मौत, बहन गंभीर रूप से घायल

    हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा, स्ट्रक्चर गिरने से छात्रा की मौत, बहन गंभीर रूप से घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के नादरगुल स्थित एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा हो गया। कॉलेज में आयोजित उत्सव के दौरान लाइटिंग या लिफ्टिंग के लिए लगाया गया एक स्ट्रक्चर अचानक गिर गया। इस घटना में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ईईई) की प्रथम वर्ष की छात्रा सोना नारायण दास की मौत हो गई, जबकि उसकी बहन मीना नारायण दास गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे में कई अन्य छात्र भी घायल हुए हैं।

    यह घटना शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को कॉलेज में आयोजित डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुई। उत्सव में छात्र शामिल हुए थे और कार्यक्रम चल रहा था। इसी बीच लाइटिंग या लिफ्टिंग के लिए लगाए गए स्ट्रक्चर के गिरने से वहां मौजूद लोगों में हादसे की स्थिति पैदा हो गई। घटना में कई छात्रों को चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल सोना नारायण दास को बचाने और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृत छात्रा की पहचान सोना नारायण दास के रूप में हुई है। वह एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की प्रथम वर्ष की छात्रा थी। डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुए इस हादसे ने कॉलेज के उत्सवी माहौल को दुखद घटना में बदल दिया। सोना की बहन मीना नारायण दास भी हादसे की चपेट में आ गई। उसे गंभीर चोटें आई हैं और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

    घायल मीना नारायण दास को इलाज के लिए नादरगुल के पास स्थित प्रत्युषा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में उसका उपचार जारी है। हादसे में घायल हुए अन्य छात्रों को भी चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद घायलों के इलाज पर ध्यान दिया गया, जबकि मृत छात्रा की पहचान और हादसे से जुड़ी शुरुआती जानकारी सामने आई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह कार्यक्रम के दौरान लगाया गया स्ट्रक्चर गिरना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्ट्रक्चर किन परिस्थितियों में गिरा। यह भी अभी साफ नहीं है कि उसके गिरने के पीछे तकनीकी खराबी, असंतुलन या कोई अन्य कारण था। घटना के समय कार्यक्रम स्थल पर कितने छात्र मौजूद थे, इसकी भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। स्ट्रक्चर लगाने की व्यवस्था कैसी थी, उसे किस उद्देश्य से स्थापित किया गया था और कार्यक्रम के दौरान उसकी सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इन बिंदुओं पर अभी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, स्ट्रक्चर गिरने से कई छात्र घायल हुए और सोना नारायण दास की इलाज के दौरान मौत हो गई।

    इस घटना में सबसे गंभीर स्थिति सोना की बहन मीना की है, जिसका अस्पताल में उपचार जारी है। फिलहाल उसकी सेहत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान हुई इस दुर्घटना में एक छात्रा की मौत और कई विद्यार्थियों के घायल होने से कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारण और परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए अधिक जानकारी का इंतजार है।

  • भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग

    भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग


    नई दिल्ली। लंदन में यूट्यूबर ध्रुव राठी के प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। शनिवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में ध्रुव राठी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटे तो दूसरी ओर उनके विरोध में भी लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ने लगा। हालात को संभालने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों गुटों को अलग रखा ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे।
    ध्रुव राठी ने संसद चौक पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने कभी भारत पर शासन किया था और आज भारतीय नागरिक उसी देश की संसद के सामने खड़े होकर अपनी बात रख रहे हैं। राठी ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि अपने देश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलती लेकिन लंदन में लोग खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ मारपीट हुई और उन्हें उनके घर से जबरन ले जाया गया। हालांकि ये आरोप राठी के बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
    राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति हो। उनके मुताबिक यह मांग इसलिए उठाई जा रही है ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें और प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिले। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने परिवार और परिचितों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा करने की अपील की।
    इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की युवा शाखा ने किया था। इसे ब्रिटेन में सक्रिय कुछ भारतीय छात्र संगठनों और प्रवासी भारतीय समूहों का समर्थन भी मिला। प्रदर्शन के दौरान इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए। इसके साथ ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देने की कोशिश की गई। आयोजकों ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर आवाज उठाना जरूरी है।
    दूसरी ओर ध्रुव राठी के विरोध में भी एक जवाबी प्रदर्शन आयोजित किया गया। इंडिया डायस्पोरा यूके ने भारत समर्थक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। संगठन के संस्थापक हृदेश गुप्ता ने कहा कि ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी समुदाय मजबूत और विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समर्थन में खड़ा है। इस तरह एक ही स्थान पर अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले समूह आमने-सामने आ गए।
    दोनों पक्षों की ओर से लगातार नारेबाजी के कारण माहौल तनावपूर्ण होता गया। हर समूह दूसरे की आवाज को दबाने के लिए तेज नारे लगाने लगा। इसके बाद पुलिस ने दोनों समूहों के बीच दूरी बनाए रखी। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि भारत की चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।

  • महाष्टमी 2026: 19 अक्टूबर को करें कन्या पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा की सही विधि और महानवमी की तारीख

    महाष्टमी 2026: 19 अक्टूबर को करें कन्या पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा की सही विधि और महानवमी की तारीख

    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्र के अंतिम दिनों में महाष्टमी और महानवमी की पूजा के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इन दिनों भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं और छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन करते हैं। वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण महाष्टमी की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। ऐसे में पूजा की तैयारी करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अष्टमी की सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और महानवमी का समय जानना जरूरी है।

    पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर महाष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।

    महाष्टमी पर कन्या पूजन को नवरात्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में गिना जाता है। मान्यता है कि छोटी कन्याओं में मां दुर्गा का स्वरूप देखा जाता है और उनका सम्मानपूर्वक पूजन किया जाता है। 19 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए तीन प्रमुख शुभ समय बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 16 मिनट तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि भी कर लेनी चाहिए।

    कन्या पूजन की शुरुआत घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई से की जाती है। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करके कन्याओं को आदरपूर्वक घर आमंत्रित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, नौ कन्याओं के साथ एक बालक को भी बुलाया जाता है। बालक को भैरव स्वरूप मानने की धार्मिक मान्यता है। कन्याओं के घर आने पर उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें साफ आसन पर बैठाया जाता है। इसके बाद माथे पर तिलक लगाकर उनकी पूजा की जाती है।

    पूजन के बाद कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। भोजन में हलवा, पूरी और चने जैसी पारंपरिक चीजें शामिल की जाती हैं। भोजन कराने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर कन्याओं को सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है। इस परंपरा में कन्याओं के प्रति आदर और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।

    महाष्टमी के बाद महानवमी का पर्व मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, महानवमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु महानवमी पर हवन और कन्या पूजन करने के बाद नौ दिनों से चल रहे व्रत का पारण करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं में मां महागौरी को शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना गया है। महाष्टमी पर भक्त उनकी आराधना करके परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के दौरान कन्या पूजन को भी देवी की उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन पूजा, भोजन और उपहार के माध्यम से कन्याओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं।