Author: bharati

  • बारिश ने प्रयागराज में मचाई तबाही, 5 हजार घर जलमग्न; 6 फीट तक पानी में फंसे लोग बोले- क्या खाएं, कहां जाएं?

    बारिश ने प्रयागराज में मचाई तबाही, 5 हजार घर जलमग्न; 6 फीट तक पानी में फंसे लोग बोले- क्या खाएं, कहां जाएं?


    उत्तर प्रदेश । प्रयागराज में लगातार हुई भारी बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी है। रविवार रात करीब 1 बजे शुरू हुई बारिश सोमवार दोपहर तक जारी रही और करीब 90 मिमी बारिश दर्ज की गई। कुछ ही घंटों की बारिश के बाद शहर के कई निचले इलाकों में हालात बाढ़ जैसे हो गए। पांच हजार से ज्यादा घरों में पानी घुसने की बात सामने आई है। कई मकानों में चार से छह फीट तक पानी भर गया। ग्राउंड फ्लोर पर रखा घरेलू सामान पानी में डूब गया और लोगों को मजबूरी में ऊपरी मंजिलों या छतों पर शरण लेनी पड़ी। प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर में पानी भरा है तो खाना कैसे बने और जाएं तो जाएं कहां।

    करेली इलाके में बारिश का असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। यहां सड़कों पर खड़ी कारें और दोपहिया वाहन पानी में डूब गए। स्थानीय जानकारी के मुताबिक अकेले करेली में करीब 200 कारें पानी में फंस गईं। कई वाहनों को शाम तक ठेलकर या टू-चेन की मदद से गैराज तक पहुंचाया गया। इसके अलावा एक हजार से ज्यादा बाइक और स्कूटी भी जलभराव की चपेट में आ गईं। पानी में लंबे समय तक डूबे रहने के कारण कई वाहनों के खराब होने की आशंका है।

    मुंडेरा समेत कई इलाकों में घरों के भीतर पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। मुंडेरा की रहने वाली उषा देवी ने बताया कि घर में चारों तरफ पानी ही पानी है। छोटे बच्चे घर में हैं और पानी भरने के बाद खाना बनाने से लेकर पीने के पानी तक की समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि समझ नहीं आ रहा कि बच्चों को लेकर क्या करें और कहां जाएं।

    जलभराव को लेकर बच्चों में भी नाराजगी दिखाई दी। मुंडेरा में कुछ बच्चे हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लेकर सड़क पर पहुंचे और इलाके से पानी निकालने की मांग की। बच्चों का कहना था कि पानी भरने के कारण वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। घरों के वॉशरूम तक पानी में डूबे हैं और कई जगह सीवर ओवरफ्लो होने से गंदा पानी भी आसपास फैल गया है।

    नैनी इलाके में भी हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं। एक परिवार ने अपने घर के अंदर का हाल दिखाया जहां किचन बेडरूम और वॉशरूम तक पानी पहुंच गया। कई परिवारों ने ग्राउंड फ्लोर पर रखा जरूरी सामान ऊपर की मंजिलों पर शिफ्ट किया। जिन मकानों में ऊपरी मंजिल नहीं है वहां लोग छतों पर बैठकर पानी कम होने का इंतजार करते नजर आए।

    करेली से नैनी तक कई इलाके जलमग्न

    प्रयागराज के करेली के सोलह मार्केट बी ब्लॉक गौस नगर शम्स नगर जेके नगर गड्ढा कॉलोनी और इस्लाम नगर के साथ नैनी के चकदौदी चक फैजुल्ला पंजाबी हाता और जमुनानगर जैसे इलाकों में भी जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रही। टैगोर टाउन और सिविल लाइंस जैसे इलाकों में भी बारिश का असर देखने को मिला। कई जगह बारिश के पानी के साथ बड़े नालों का गंदा पानी भी घरों तक पहुंच गया।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर है। लोगों ने जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बारिश का पानी निकालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए।

    ड्रेनेज कनेक्शन को लेकर उठे सवाल

    मुंडेरा के राहुल यादव ने आरोप लगाया कि इलाके से होकर जाने वाली ड्रेनेज लाइन को आगे मुख्य सीवर लाइन से जोड़ा ही नहीं गया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ड्रेनेज सिस्टम को मेन सीवर से जोड़ दिया जाता तो जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने नगर निगम कर्मचारियों और सीवर का काम करने वाले ठेकेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाया।

    राहुल यादव के मुताबिक करीब छह महीने पहले IGRS और स्पीड पोस्ट के जरिए पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह मेयर गणेश केसरवानी और पार्षद शिव कुमार को समस्या की जानकारी दी गई थी। उनका दावा है कि शिकायतों के बाद आश्वासन तो मिला लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

    प्रयागराज में बारिश के बाद पैदा हुए इन हालातों ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों परिवारों के घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान का नुकसान हुआ है और कई परिवारों के सामने खाने पीने और सुरक्षित जगह पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। अब लोगों की निगाह प्रशासन पर है कि जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं।

  • यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे

    यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंगलवार तड़के करीब 3 बजे से लखनऊ समेत प्रदेश के 30 से ज्यादा शहरों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। कई इलाकों में सुबह से ही आसमान घने काले बादलों से ढका रहा और दिन निकलने के बावजूद अंधेरा छाया रहा। लगातार बारिश के कारण शहरों और कस्बों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कहीं सड़कें तालाब बन गई हैं तो कहीं पुलिस थाने और सरकारी अस्पताल तक पानी में घिर गए हैं। हालात को देखते हुए प्रदेश के करीब 10 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

    संभल में तेज बारिश के बाद रोडवेज बस अड्डा पूरी तरह जलमग्न हो गया। सरकारी अस्पताल में भी बारिश का पानी घुस गया। प्रतापगढ़ के लालगंज इलाके में स्थिति और ज्यादा खराब नजर आई। यहां तहसील परिसर के साथ कोतवाली पुलिस स्टेशन प्राइमरी स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दो फीट तक पानी भर गया। पुलिस की गाड़ियों के पहिए तक पानी में डूब गए। निचले इलाकों में कई घरों के भीतर भी बारिश का पानी पहुंच गया है।

    भदोही और कौशांबी में भी भारी जलभराव देखने को मिला। कई प्रमुख सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। प्रतापगढ़ में रातभर हुई बारिश के कारण मंदिरों और रिहायशी इलाकों में घुटनों तक पानी भरने की तस्वीरें सामने आई हैं। जलभराव के कारण कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छुट्टी कर दी गई।

    भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रयागराज प्रतापगढ़ मिर्जापुर कौशांबी भदोही हरदोई अमेठी और जौनपुर समेत करीब 10 जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    काशी में गंगा का बढ़ा जलस्तर

    बारिश के साथ गंगा और यमुना समेत उत्तर प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों से ऊपर पहुंच गया है। घाट किनारे बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर पानी से घिर गए हैं। मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दशाश्वमेध घाट का ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर काफी हिस्से तक पानी में डूब गया है। कई जगह मंदिरों का केवल ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।

    नमो घाट की सीढ़ियों तक भी गंगा का पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर दी है और लोगों से घाटों के किनारे नहीं जाने की अपील की गई है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती अब छत के ऊपर कराई जा रही है।

    मणिकर्णिका घाट पर बदली अंतिम संस्कार की जगह

    गंगा का जलस्तर बढ़ने से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थलों तक भी पानी पहुंच गया है। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी सीढ़ियों वाले हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। घाटों पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

    कानपुर और उन्नाव में भी गंगा के किनारे बसे इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। कई सौ घरों में पानी पहुंचने के कारण प्रभावित परिवारों को छतों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। चित्रकूट में मंदाकिनी और बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं।

    23 अगस्त तक सक्रिय रह सकता है मानसून

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर दिशा में खिसकने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। 19 से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के सिस्टम का असर भी उत्तर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। खास तौर पर 20 और 21 अगस्त को कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और नदी तथा घाटों के आसपास जाने में विशेष सावधानी बरतें।

  • केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर अपनी प्राथमिकता में बदलाव करते हुए अब केवल मंजूरी देने के बजाय उन्हें समय पर पूरा कराने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू कराने पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि किसी परियोजना की वास्तविक सफलता उसकी घोषणा या स्वीकृति से नहीं, बल्कि जमीन पर उसके क्रियान्वयन और आर्थिक गतिविधियों में बदलने से तय होती है।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास की शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राज्यों से भूमि उपलब्धता, परिवहन संपर्क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं, वैधानिक मंजूरियों तथा परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों से जुड़ी बाधाओं को तेजी से दूर करने पर जोर दिया गया।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन, सड़क और परिवहन संपर्क, आवश्यक उपयोगिताओं तथा नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी अड़चनों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से समेकित योजना बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल भूमि आवंटन व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    सरकार की योजना औद्योगिक विकास को केवल फैक्टरियों और उत्पादन इकाइयों तक सीमित रखने की नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इससे उद्योगों के आसपास एक ऐसा समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश है, जिसमें कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।

    केंद्र सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, राज्यों को सहायता और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बेहतर ऋण सुविधा के माध्यम से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कर और सीमा शुल्क से जुड़े उपायों के जरिए देश में विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़कर समेकित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक नोड्स की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर दिया। उनका कहना है कि वैश्विक निवेश के अवसरों को आकर्षित करने के लिए परियोजनाओं को निवेशकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

    मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्री, श्रमिक आवास और आर्थिक-सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार औद्योगिक व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया।

    पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि जलमार्गों को औद्योगिक विकास की रीढ़ के रूप में विकसित करने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में भी बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया।

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने परियोजना एसपीवी को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार मिलने से औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सकेगा। सरकार का नया फोकस स्पष्ट रूप से मंजूरी से आगे बढ़कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उन्हें वास्तविक आर्थिक गतिविधि में बदलने पर केंद्रित है।

  • दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा

    दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा


    नई दिल्ली ।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बाद एआई से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी बदलाव का असर अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों पर समान नहीं रहा है।

    जून 2022 से जून 2026 के बीच दक्षिण कोरिया में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जा रहे कुल रोजगारों की संख्या में 2.85 लाख की कमी दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा जिन्हें एआई के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। कुल कम हुए रोजगारों में करीब 2.68 लाख यानी लगभग 94 प्रतिशत नौकरियां एआई प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं।

    इन क्षेत्रों में आईटी सेवाएं, प्रकाशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में ऐसे काम बड़ी संख्या में शामिल हैं जिन्हें जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स के जरिए तेजी से बदला या आसान किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी सेवाओं में युवाओं का रोजगार 31.4 प्रतिशत घटा। यह उन क्षेत्रों में सबसे बड़ी गिरावट रही, जहां एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    प्रकाशन क्षेत्र में भी युवा रोजगार में 27.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस श्रेणी में सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन से जुड़े पेशे भी शामिल हैं। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्षेत्र में युवाओं के रोजगार में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्रोफेशनल सर्विसेज में यह कमी 11.6 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि एआई का शुरुआती प्रभाव उन नौकरियों पर अधिक पड़ सकता है जिनमें डिजिटल, दोहराए जाने वाले या सामग्री आधारित कार्य बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    इसके विपरीत 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के रोजगार में इसी अवधि के दौरान 2.30 लाख की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह रही कि इनमें से 1.73 लाख रोजगार एआई प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़े। इससे यह संकेत मिलता है कि अनुभव, विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र की गहरी समझ वाले कर्मचारियों की मांग कई जगहों पर अभी भी मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में 2022 को आधार वर्ष माना गया है। इसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद जनरेटिव एआई तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा। इसके बाद कंपनियों में कंटेंट तैयार करने, कोडिंग, डेटा विश्लेषण और अन्य डिजिटल कार्यों के लिए एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत पर भी असर पड़ा है।

    शिक्षा के आधार पर रोजगार की स्थिति में भी बदलाव सामने आया है। 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत रही, जबकि माध्यमिक या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं में यह 8 प्रतिशत थी। 2022 के बाद उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण कोरिया की लगातार घटती आबादी युवाओं के रोजगार में बदलाव का एक कारण हो सकती है। हालांकि एआई ने इस बदलाव को और तेज किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन यही तकनीक कुछ भूमिकाओं में उनके काम को प्रतिस्थापित भी कर सकती है। इसलिए चुनौती केवल नौकरियां घटने की नहीं, बल्कि युवाओं के लिए पारंपरिक करियर की शुरुआती सीढ़ियों के कमजोर होने की भी है।

  • इस हफ्ते OTT पर क्राइम से लेकर कॉमेडी और रोमांस तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन, जानें पूरी रिलीज लिस्ट

    इस हफ्ते OTT पर क्राइम से लेकर कॉमेडी और रोमांस तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन, जानें पूरी रिलीज लिस्ट


    नई दिल्ली। अगस्त का तीसरा हफ्ता OTT दर्शकों के लिए काफी खास रहने वाला है। 18 से 21 अगस्त के बीच JioHotstar पर फिल्मों और वेब सीरीज की एक से बढ़कर एक रिलीज देखने को मिलने वाली हैं। इस लिस्ट में हॉलीवुड की चर्चित डार्क कॉमेडी सीरीज से लेकर अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फिल्म और लोकप्रिय रोमांटिक ड्रामा का नया एपिसोड शामिल है। ऐसे में अगर आप घर बैठे मनोरंजन का प्लान बना रहे हैं तो आने वाले दिनों की ये रिलीज आपके लिए काफी खास हो सकती हैं।

    Its Always Sunny In Philadelphia

    18 अगस्त को JioHotstar पर Its Always Sunny In Philadelphia का नया सीजन स्ट्रीम होने जा रहा है। यह लंबे समय से चल रही डार्क कॉमेडी सीरीज है जिसमें चार्ली डे ग्लेन हॉवर्टन रॉब मैकएल्हेनी कैटलिन ओलसन और डैनी डेविटो जैसे कलाकार नजर आते हैं। शो की कहानी ऐसे लोगों के ग्रुप के इर्द गिर्द घूमती है जिन्हें उनकी अजीबोगरीब सोच और व्यवहार के कारण अलग पहचान मिलती है।

    इस सीरीज में कॉमेडी के साथ कई ऐसे हालात देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को हंसाने के साथ चौंकाते भी हैं। यही वजह है कि लंबे समय से यह शो अपने खास अंदाज के कारण दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है। इसका नया सीजन 18 अगस्त से JioHotstar पर देखा जा सकेगा।

    Welcome To The Jungle

    21 अगस्त का दिन अक्षय कुमार के फैंस के लिए खास होने वाला है। अक्षय कुमार स्टारर Welcome To The Jungle 21 अगस्त को JioHotstar पर स्ट्रीम होगी। फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद अब OTT दर्शकों के बीच पहुंचने के लिए तैयार है।

    फिल्म में अक्षय कुमार के साथ रवीना टंडन समेत बड़ी स्टारकास्ट नजर आती है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टीस्टार कास्ट बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें करीब 32 कलाकारों ने काम किया है। थिएटर रिलीज के बाद अब दर्शक इस कॉमेडी एंटरटेनर को घर बैठे देख सकेंगे।

    अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह रिलीज खास हो सकती है। खासकर वे लोग जो फिल्म को थिएटर में नहीं देख पाए थे उनके पास अब इसे OTT पर देखने का मौका होगा।

    ठुकरा के मेरा प्यार सीजन 2

    21 अगस्त को JioHotstar पर Thukra Ke Mera Pyaar Season 2 का नया एपिसोड भी दर्शकों के बीच आएगा। इस सीरीज को लेकर दर्शकों में पहले से उत्सुकता बनी हुई है। हर नए एपिसोड के साथ कहानी में आने वाले मोड़ दर्शकों की दिलचस्पी बनाए हुए हैं।

    पॉलिटिकल रिवेंज ड्रामा के साथ रोमांस का मिश्रण इस सीरीज को अलग अंदाज देता है। इसमें धवल ठाकुर संचिता बसु अनिरुद्ध दवे गोविंद पांडे सुशील पांडे कपिल कनपुरिया और निहारिका चौकसे जैसे कलाकार नजर आ रहे हैं। दूसरे सीजन के नए एपिसोड को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा है।

    18 से 21 अगस्त तक OTT पर क्या देखें

    अगर आप इस हफ्ते OTT पर कुछ नया देखने की तैयारी कर रहे हैं तो 18 अगस्त को Its Always Sunny In Philadelphia का नया सीजन और 21 अगस्त को Welcome To The Jungle के साथ Thukra Ke Mera Pyaar Season 2 का नया एपिसोड आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकता है। यानी कॉमेडी से लेकर रोमांस और ड्रामा तक इस हफ्ते OTT पर मनोरंजन के कई विकल्प मौजूद रहेंगे।

    खास तौर पर अक्षय कुमार की Welcome To The Jungle की OTT रिलीज पर दर्शकों की नजर रहेगी। थिएटर के बाद अब फिल्म JioHotstar के जरिए बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचने वाली है। वहीं लंबे समय से पसंद की जा रही Its Always Sunny In Philadelphia और Thukra Ke Mera Pyaar की नई कड़ियां भी OTT दर्शकों को व्यस्त रखने वाली हैं।

  • सोना 1.54 लाख रुपये के पार, चांदी 2.35 लाख पर पहुंची, घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछा

    सोना 1.54 लाख रुपये के पार, चांदी 2.35 लाख पर पहुंची, घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछा

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को मजबूत तेजी दर्ज की गई। घरेलू सराफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में करीब 1,800 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई। इस तेजी के बाद 24 कैरेट सोने की कीमत 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव भी 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर चला गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में बढ़त रही, जिसका असर घरेलू बाजार पर दिखाई दिया।

    घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 1,804 रुपये बढ़कर 1,54,167 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। इससे पहले सोना 1,52,363 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। एक ही कारोबारी सत्र में इतनी बढ़ोतरी से सोने की कीमत ने फिर ऊंचे स्तर की ओर रुख किया है। निवेशकों के साथ आभूषण बाजार की नजर भी अब आगे की कीमतों पर बनी हुई है।

    22 कैरेट सोने की कीमत में भी तेजी रही। इसका भाव 1,652 रुपये बढ़कर 1,41,217 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि इससे पहले कीमत 1,39,565 रुपये थी। इसी तरह 18 कैरेट सोना 1,353 रुपये महंगा होकर 1,15,625 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी स्तर पर इसकी कीमत 1,14,272 रुपये थी।

    चांदी ने भी सोमवार के कारोबार में मजबूती दिखाई। इसकी कीमत 1,800 रुपये बढ़कर 2,35,642 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इससे पहले चांदी 2,33,842 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। चांदी में यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब औद्योगिक मांग और निवेश से जुड़े कारकों के कारण वैश्विक बाजार में भी इस धातु की कीमतों पर लगातार नजर बनी हुई है।

    हाजिर बाजार के अलावा वायदा कारोबार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी रही। एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 के सोने के अनुबंध में 1,419 रुपये यानी 0.92 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई और भाव 1,55,925 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे घरेलू वायदा बाजार में भी खरीदारी का रुख मजबूत रहने का संकेत मिला।

    चांदी के वायदा अनुबंध में भी बढ़त दर्ज की गई। 4 सितंबर 2026 का अनुबंध 2,419 रुपये यानी 1.03 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,38,343 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। हाजिर और वायदा दोनों बाजारों में एक साथ तेजी से कीमती धातुओं के कारोबार में मजबूती का संकेत मिला है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। कॉमेक्स पर सोना 0.83 प्रतिशत बढ़कर 4,474 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी में 2.05 प्रतिशत की तेजी रही और इसका भाव 66.43 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। वैश्विक बाजार की यह मजबूती घरेलू कीमतों को भी समर्थन देती दिखाई दी।

    बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर है। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा और मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। ब्याज दरों से जुड़े संकेत वैश्विक स्तर पर सोने की मांग और कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार, फेड के रुख और निवेशकों की गतिविधियां सोने तथा चांदी की अगली चाल के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

  • बैदोआ में अल-शबाब और लाफ्टागरीन समर्थक हथियारबंद मिलिशिया की चुनौती, सोमाली सेना ने जवाबी कार्रवाई में 30 आतंकी मार गिराए

    बैदोआ में अल-शबाब और लाफ्टागरीन समर्थक हथियारबंद मिलिशिया की चुनौती, सोमाली सेना ने जवाबी कार्रवाई में 30 आतंकी मार गिराए


    नई दिल्ली ।
    सोमालिया के बैदोआ शहर में सोमवार को सुरक्षाबलों और हथियारबंद लड़ाकों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। सुरक्षा बलों ने हमलावरों को पीछे धकेलते हुए शहर पर अपना नियंत्रण बनाए रखने का दावा किया है। इस कार्रवाई में करीब 30 लड़ाकों के मारे जाने की जानकारी दी गई है।

    सोमालिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सुबह करीब पांच बजे हथियारबंद समूहों ने शहर में सुरक्षा बलों की चौकियों को निशाना बनाकर हमला किया। हमलावरों में अल-शबाब के सदस्य और साउथवेस्ट स्टेट के पूर्व राष्ट्रपति अब्दिअजीज हसन मोहम्मद लाफ्टागरीन के प्रति वफादार लड़ाके शामिल होने की बात कही गई है।

    सुरक्षाबलों ने हमले का जवाब देते हुए व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू की। कई घंटे तक चले संघर्ष के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों से गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। सेना ने हमलावरों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया और उनके कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस सुरक्षित करने की कार्रवाई की।

    रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अभियान के दौरान करीब 30 लड़ाके मारे गए और कुछ अन्य के घायल होने की जानकारी है। सुरक्षा बलों ने हमलावरों के हथियार और वाहनों को भी जब्त करने का दावा किया है। हालांकि, सैन्य बलों की ओर से अपने जवानों के बीच हुए नुकसान का विस्तृत आंकड़ा तत्काल उपलब्ध नहीं कराया गया।

    संघर्ष के बाद सुरक्षाबलों ने बैदोआ के विभिन्न हिस्सों में तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लड़ाके अभी भी शहर के कुछ इलाकों में छिपे हो सकते हैं। इसलिए सैन्य बल संदिग्ध स्थानों की जांच कर रहे हैं और शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

    बैदोआ सोमालिया के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है और लंबे समय से देश के राजनीतिक तथा सुरक्षा संघर्ष का केंद्र रहा है। यहां संघीय सरकार और क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों के बीच तनाव के साथ अल-शबाब की गतिविधियां भी सुरक्षा चुनौती बनी हुई हैं।

    ताजा संघर्ष का संबंध लाफ्टागरीन के समर्थक सशस्त्र समूहों और संघीय सरकार के बीच जारी राजनीतिक तनाव से भी जुड़ा हुआ है। मार्च में संघीय बलों ने बैदोआ पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद लाफ्टागरीन ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। सोमवार की कार्रवाई में उनके समर्थक लड़ाकों की मौजूदगी ने संघर्ष को राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बना दिया है।

    अल-शबाब सोमालिया में लंबे समय से सक्रिय सशस्त्र संगठन है और सरकारी बलों तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता रहा है। संगठन के खिलाफ सोमाली सुरक्षा बलों के अभियान लगातार जारी हैं। बैदोआ और आसपास के इलाकों में सरकारी नियंत्रण बनाए रखना इन अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद सुरक्षा बलों ने शहर को पूरी तरह सुरक्षित करने और बचे हुए लड़ाकों की तलाश जारी रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद संघर्ष और उससे हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • ट्रंप प्रशासन ने बिग बेंड नेशनल पार्क में विवादित सीमा परियोजना पर लगाई रोक, पर्यावरणीय नुकसान को लेकर उठे थे सवाल

    ट्रंप प्रशासन ने बिग बेंड नेशनल पार्क में विवादित सीमा परियोजना पर लगाई रोक, पर्यावरणीय नुकसान को लेकर उठे थे सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दक्षिणी टेक्सास में बिग बेंड नेशनल पार्क से होकर गुजरने वाली विवादित सीमा परियोजना के निर्माण पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह परियोजना लंबे समय से पर्यावरण और राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक संरचना को लेकर विवादों में रही थी। परियोजना के विरोध में उठाई गई प्रमुख आपत्तियों में क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरणीय भू-भाग पर संभावित असर और सीमा सुरक्षा के लिए इसकी वास्तविक जरूरत शामिल थी।

    बिग बेंड नेशनल पार्क टेक्सास के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक विशाल और दूरस्थ प्राकृतिक क्षेत्र है। यहां का भू-भाग कठिन होने के कारण सामान्य आवाजाही पहले से ही सीमित मानी जाती है। सीमा परियोजना के आलोचकों का तर्क रहा है कि इस प्राकृतिक क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां अपने आप में प्रवासियों और तस्करों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में इस इलाके में अतिरिक्त सीमा अवरोध खड़ा करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए।

    विवादित परियोजना को राजनीतिक स्तर पर भी विरोध का सामना करना पड़ा। आलोचकों में दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल रहे हैं। उनका कहना था कि सीमा सुरक्षा के उद्देश्य से बनाई जाने वाली किसी भी परियोजना में पर्यावरणीय प्रभाव और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेष रूप से राष्ट्रीय उद्यान जैसे संवेदनशील इलाके में निर्माण कार्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता बताई गई।

    ट्रंप प्रशासन की ओर से परियोजना को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला एक एजेंसी प्रमुख के टेक्सास दौरे के बाद किए गए जमीनी मूल्यांकन से जुड़ा बताया गया है। अधिकारियों की ओर से क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को देखने और परियोजना के संभावित प्रभावों का आकलन करने के बाद निर्माण रोकने का निर्णय लिया गया।

    दक्षिणी टेक्सास में प्रस्तावित सीमा परियोजना का एक हिस्सा राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र से होकर गुजरना था। इसे लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और अन्य आलोचकों ने आशंका जताई थी कि निर्माण से प्राकृतिक भू-भाग प्रभावित हो सकता है। उनका कहना था कि बिग बेंड जैसे संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से वहां के पारिस्थितिक संतुलन और प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है।

    परियोजना पर रोक लगाए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया को लेकर निगाहें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं। अस्थायी रोक का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र के मूल्यांकन और परियोजना की उपयोगिता पर आगे भी विचार किया जा सकता है।

    बिग बेंड में सीमा परियोजना को लेकर विवाद अमेरिका में सीमा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। एक तरफ सीमा पर अवैध प्रवेश और तस्करी रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की जाती रही है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय उद्यानों और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों को निर्माण से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।

    फिलहाल ट्रंप प्रशासन के फैसले से बिग बेंड नेशनल पार्क के उस क्षेत्र में प्रस्तावित सीमा निर्माण को तत्काल राहत मिली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे किए जाने वाले मूल्यांकन के बाद परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जाता है या किसी संशोधित योजना के साथ इसे दोबारा आगे बढ़ाया जाता है।

  • भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल। देश भर में स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे एक ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और तटीय व ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के पनिया गांव में स्कूली छात्र हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे अत्यंत कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए विद्यालय पहुंचे। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह से कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो चुका था। छोटे-छोटे बच्चों को इसी दुर्गम रास्ते से गुजरकर ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने के लिए जाना पड़ा।

    परेशानियों का सिलसिला केवल खराब रास्ते तक ही सीमित नहीं रहा। जब छात्र विद्यालय परिसर में पहुंचे, तो वहां जर्जर भवन की खतरनाक स्थिति सामने आई। विद्यालय के एक कमरे की छत का प्लास्टर टूटकर जमीन पर गिर गया, जिससे वहां उपस्थित लोगों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। इस प्रकार की स्थिति में दैनिक रूप से पठन-पाठन कार्य संचालित होना बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।

    तमाम विपरीत परिस्थितियों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के बावजूद विद्यार्थियों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। छात्रों ने अनुशासित रूप से पंक्तिबद्ध होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान का गायन किया। बच्चों के चेहरे पर देशभक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि पृष्ठभूमि में जर्जर इमारत और कीचड़युक्त परिसर व्यवस्थागत कमियों को उजागर कर रहा था।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के मौसम के दौरान इस प्रकार की समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ग्रामीण इलाकों में पक्के संपर्कों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पनिया गांव की यह घटना यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का विकास अभी भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनाक्रम पर संज्ञान लेने की बात कही है। जिला कलेक्टर ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और आश्वस्त किया है कि संबंधित विभाग के माध्यम से विद्यालय भवन की मरम्मत तथा पहुंच मार्ग को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय निवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र अति शीघ्र नए भवन और पक्की सड़क की मांग की है।

    स्थानीय समुदाय का मानना है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षा के लिए सुरक्षित कक्षाएं, पेयजल और पक्के पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जर्जर इमारतों की समय पर मरम्मत न होने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

    फिलहाल, इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद पनिया गांव के इस प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार कब तक पूरा हो पाता है और छात्रों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण कब उपलब्ध कराया जाता है।

  • भारत के अति प्राचीन रहस्यमयी मंदिर, जिनकी अनसुलझी पहेलियों और अकल्पनीय चमत्कारों के सामने विज्ञान भी हुआ नतमस्तक

    भारत के अति प्राचीन रहस्यमयी मंदिर, जिनकी अनसुलझी पहेलियों और अकल्पनीय चमत्कारों के सामने विज्ञान भी हुआ नतमस्तक


    नई दिल्ली ।
    भारत की पहचान सदियों से उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थापत्य कला के बेजोड़ उदाहरण माने जाने वाले प्राचीन मंदिरों से रही है। देश के विभिन्न भूभागों में स्थित कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां की परंपराएं और अनोखी विशेषताएं आज के आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं न केवल श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का प्रतीक हैं, बल्कि इनके निर्माण और चमत्कारों के पीछे छिपे रहस्यों को समझ पाना आज भी शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

    उत्तरी भारत के राजस्थान राज्य में स्थित कई प्रमुख मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। बीकानेर के प्रसिद्ध देवी मंदिर में हजारों की संख्या में रहने वाले चूहों की मौजूदगी और उन्हें दिए जाने वाले प्रसाद की परंपरा अद्भुत मानी जाती है। इसी प्रकार धौलपुर क्षेत्र में चंबल नदी के निकट स्थित प्राचीन शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग के दिन में तीन बार रंग बदलने की मान्यता भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है। दौसा जिले में स्थित हनुमान मंदिर में भी नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।

    दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश में स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की अपनी अलग भव्यता और धार्मिक महत्ता है। इस मंदिर परिसर से जुड़ी अनेक धार्मिक कल्पनाएं और प्राकृतिक ध्वनियों की अनुभूति श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित करती है। असम के गुवाहाटी में नीलांचल पहाड़ी पर स्थित कामाख्या देवी का स्थल भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है, जहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    तटीय राज्यों की बात करें तो गुजरात के अरब सागर तट पर स्थित शिव मंदिर ज्वार-भाटे की प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण दिन में दो बार समुद्र के पानी में पूरी तरह जलमग्न हो जाता है और पानी उतरने पर पुनः स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। भावनगर तट के समीप स्थित एक अन्य शिव मंदिर में भी समुद्र की लहरें प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं, जहां भक्त केवल पानी का स्तर घटने पर ही पैदल पहुंचकर पूजा-अर्चना कर पाते हैं।

    मध्य प्रदेश के तटीय और सीमावर्ती जिलों में स्थित अनेक प्राचीन मंदिरों की महत्ता भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है। भिंड जिले में स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर से जुड़ी जनश्रुतियों के अनुसार श्रद्धालु असाध्य रोगों से राहत पाने की आस में यहां माथा टेकने आते हैं। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भी ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जहां शिवलिंग पर प्राकृतिक बिजली गिरने के बाद उसका पुनः जुड़ जाना, एक लाख छिद्रों वाले शिवलिंग का अस्तित्व होना अथवा कोणार्क के रथ रूपी सूर्य मंदिर के पहियों से सटीक समय का अनुमान लगाना जैसी अद्भुत विशेषताएं देखने को मिलती हैं।

    इन सभी स्थलों की ऐतिहासिकता, वास्तुकला और धार्मिक अनुष्ठान भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने कई बार इन घटनाओं के पीछे के भौतिक और वैज्ञानिक कारणों को समझने का प्रयास किया है, परंतु अनेक प्रश्नों के उत्तर आज भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सके हैं। यही कारण है कि यह सभी स्थान न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान-विज्ञान परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।