Author: bharati

  • एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही

    एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही


    भोपाल । भोपाल के रायसेन रोड पर रविवार रात उस समय अफरा तफरी मच गई जब नगर निगम का एक कंटेनरनुमा ट्रक अचानक आग की चपेट में आ गया। घटना एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने की है जहां से गुजर रहे ट्रक के केबिन से अचानक धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुआं आग की लपटों में बदल गया और ट्रक का अगला हिस्सा जलने लगा। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और ट्रक कर्मचारियों ने साहस दिखाते हुए आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई।

    जानकारी के अनुसार नगर निगम का यह ट्रक आदमपुर स्थित कचरा खंती से वापस लौट रहा था। रात के समय जब वाहन रायसेन रोड पर एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने पहुंचा तब चालक को केबिन से धुआं निकलता दिखाई दिया। उसने तुरंत वाहन रोका और नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ लोगों ने अपनी गाड़ियों में रखी पानी की बड़ी बोतलें निकालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। कर्मचारियों और राहगीरों ने मिलकर आग पर पानी डाला लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उसे नियंत्रित करना आसान नहीं था। कुछ ही मिनटों में आग ने ट्रक के अगले हिस्से और टायरों को अपनी चपेट में ले लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद काफी समय तक दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब आधे घंटे तक आग धधकती रही और लोग अपने स्तर पर उसे बुझाने की कोशिश करते रहे। इस दौरान सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ और आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    घटना के बाद जब ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुका था। इसके अलावा ट्रक का इंश्योरेंस वर्ष 2019 से नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इतना ही नहीं वाहन का परमिट भी वैध नहीं पाया गया। इस खुलासे ने नगर निगम के वाहन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फिटनेस जांच और समय पर रखरखाव से ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। यदि वाहन की तकनीकी जांच समय पर होती रहे तो शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

    फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है जो राहत की बात है। हालांकि इस हादसे ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और पुराने वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

  • मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान

    मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके से एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां दवा लेने में हुई कथित गलती एक युवती की जान पर भारी पड़ गई। पेट दर्द और ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान 28 वर्षीय युवती ने अपनी नियमित दवा के साथ गलती से मां की शुगर की दवा भी खा ली। इसके कुछ समय बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान वंदना मीणा के रूप में हुई है जो बैरागढ़ क्षेत्र के गांव बेटा की रहने वाली थी। वंदना अपने परिवार के साथ रहती थी और लंबे समय से ब्लड प्रेशर तथा पेट दर्द की समस्या से जूझ रही थी। परिजनों ने बताया कि रविवार देर रात उसे अचानक पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उसने अपनी नियमित दवा ली लेकिन इसी दौरान गलती से अपनी मां की शुगर नियंत्रित करने वाली दवा भी खा ली।

    दवा लेने के कुछ समय बाद वंदना की हालत बिगड़ने लगी। उसे बेचैनी महसूस हुई और स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा। परिवार के सदस्य घबरा गए और तत्काल उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और हालत को संभालने का प्रयास किया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

    इलाज के दौरान सोमवार तड़के वंदना ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की सूचना बैरागढ़ पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा गया जहां सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और दवा के सेवन का इसमें कितना योगदान रहा।

    जानकारी के अनुसार वंदना के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वह परिवार के छह भाई बहनों में शामिल थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उसका जीवन सामान्य रूप से चल रहा था लेकिन एक छोटी सी चूक ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना के बाद घर में शोक का माहौल है और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अलग बीमारियों की दवाओं को बिना जांचे परखे लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेष रूप से मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की दवाओं का असर शरीर पर अलग तरीके से पड़ता है। इसलिए दवा लेते समय पूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

    फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर दवा सेवन में सतर्कता की आवश्यकता की गंभीर याद दिलाती है।

  • स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

    स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का नया दौर कई वजहों से सुर्खियों में आ गया है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे प्रभाव को नियंत्रित करना था लेकिन वार्ता के दौरान सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    स्विस रिसॉर्ट बुर्गेनस्टॉक में आयोजित इस बैठक में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि लंबे समय तक बातचीत में शामिल रहे। दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन किसी ठोस सहमति तक पहुंचने की खबर सामने नहीं आई। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया बयानों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने असंतोष जताया और कुछ समय के लिए वार्ता प्रक्रिया से अलग हो गया। हालांकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले हफ्तों में इस पर आगे विचार विमर्श जारी रहेगा।

    इस बीच सम्मेलन से जुड़े कुछ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो और तस्वीरों के आधार पर कई तरह के दावे और व्याख्याएं सामने आने लगीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब यह दावा किया गया कि कतर के एक वरिष्ठ मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच औपचारिक अभिवादन के दौरान हाथ नहीं मिलाया गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल समय प्रबंधन और मंच व्यवस्था जैसी कई वजहों से ऐसी स्थितियां बन सकती हैं इसलिए किसी एक दृश्य के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    एक अन्य घटनाक्रम जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का सामूहिक फोटो सत्र में शामिल न होना था। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल से बिना तस्वीर खिंचवाए रवाना हो गए। हालांकि इसके पीछे की वास्तविक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार देश अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं या राजनीतिक संदेशों के तहत कुछ औपचारिक गतिविधियों से दूरी बनाते हैं। इसलिए इस घटना को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं। वायरल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर लोगों ने अलग अलग अनुमान लगाए लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव या शारीरिक हावभाव के आधार पर उसकी मानसिक स्थिति या राजनीतिक रुख का आकलन नहीं किया जा सकता।

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर छोटे दिखने वाले घटनाक्रम भी बड़े संदेशों के रूप में देखे जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे सम्मेलनों में नेताओं की गतिविधियां मीडिया और विश्लेषकों की नजर में रहती हैं। हालांकि किसी भी घटना की सही व्याख्या के लिए आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होता है।

    फिलहाल स्विट्जरलैंड में हुई यह वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है लेकिन इससे जुड़े कूटनीतिक संकेत और चर्चाएं वैश्विक राजनीति में आने वाले दिनों तक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

  • दिलीप कुमार जीते लेकिन अनारकली हार गई 1961 के अवॉर्ड्स में बीना राय ने रचा था इतिहास

    दिलीप कुमार जीते लेकिन अनारकली हार गई 1961 के अवॉर्ड्स में बीना राय ने रचा था इतिहास

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे हैं जो समय की सीमाओं को पार कर अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक किरदार था मुगल ए आजम की अनारकली जिसे मधुबाला ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया था। आज भी जब भारतीय सिनेमा की महान अभिनेत्रियों का जिक्र होता है तो मधुबाला और उनका अनारकली का किरदार सबसे पहले याद किया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस भूमिका ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई उसी किरदार के लिए वह फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने से चूक गई थीं।

    साल 1960 हिंदी सिनेमा के लिए स्वर्णिम दौर माना जाता है। इसी वर्ष मुगल ए आजम चौदहवीं का चांद बरसात की रात और कई अन्य शानदार फिल्में रिलीज हुई थीं। इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि अभिनय संगीत और कहानी के स्तर पर भी नए मानक स्थापित किए। इनमें मुगल ए आजम सबसे बड़ी और चर्चित फिल्म बनकर उभरी। फिल्म की भव्यता कलाकारों के अभिनय और संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की कालजयी कृति बना दिया।

    फिल्म में सलीम के किरदार में दिलीप कुमार और अनारकली के रूप में मधुबाला की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। खासतौर पर मधुबाला का अभिनय इतना प्रभावशाली था कि लोगों ने उन्हें अनारकली के रूप में हमेशा के लिए अपने दिलों में बसा लिया। यही कारण था कि 1961 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

    जब पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ तो मुगल ए आजम को कुल 11 नामांकन मिले। फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार अपने नाम किया और दिलीप कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य उस समय हुआ जब सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के विजेता के नाम की घोषणा की गई। सभी को उम्मीद थी कि यह सम्मान मधुबाला को मिलेगा लेकिन पुरस्कार अभिनेत्री बीना राय के नाम रहा।

    बीना राय को यह सम्मान फिल्म घूंघट में उनके शानदार अभिनय के लिए दिया गया था। उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की दौड़ में मधुबाला के अलावा नूतन जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री भी शामिल थीं लेकिन बीना राय ने सभी को पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम कर लिया। यह परिणाम उस दौर में काफी चर्चा का विषय बना था क्योंकि अधिकांश लोग मधुबाला को ही विजेता मान रहे थे।

    बीना राय अपने समय की बेहद लोकप्रिय और सम्मानित अभिनेत्री थीं। उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अपनी सशक्त अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। वर्ष 1953 में आई फिल्म अनारकली में भी उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी और इस किरदार के लिए खूब सराहना बटोरी थी। बाद में ताज महल जैसी फिल्मों में भी उनका अभिनय चर्चा में रहा।

    बीना राय का संबंध कपूर खानदान से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने अभिनेता प्रेमनाथ से विवाह किया था। प्रेमनाथ की बहन कृष्णा राज कपूर थीं जो महान अभिनेता और फिल्मकार राज कपूर की पत्नी थीं। इस रिश्ते से बीना राय कपूर परिवार का हिस्सा बन गई थीं। यही कारण है कि उनका नाम हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित फिल्मी परिवारों से भी जुड़ा रहा।

    1961 का फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। इस समारोह ने यह संदेश दिया कि पुरस्कार केवल लोकप्रियता के आधार पर नहीं बल्कि कलाकारों के अभिनय और काम की गुणवत्ता के आधार पर दिए जाते हैं। यही वजह है कि उस वर्ष मधुबाला जैसी दिग्गज अभिनेत्री भी पुरस्कार से चूक गईं और बीना राय ने अपने शानदार अभिनय के दम पर इतिहास रच दिया।

  • मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया

    मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में शामिल मुन्ना भाई एमबीबीएस और 3 इडियट्स के बीच एक दिलचस्प कड़ी सामने आई है। मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी ने खुलासा किया है कि 3 इडियट्स का एक बेहद चर्चित और भावुक दृश्य दरअसल पहले मुन्ना भाई एमबीबीएस की स्क्रिप्ट का हिस्सा था। हालांकि उस समय इसे फिल्म से हटा दिया गया लेकिन वर्षों बाद यही विचार नए रूप में 3 इडियट्स में नजर आया और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरने में सफल रहा।

    साल 2003 में रिलीज हुई मुन्ना भाई एमबीबीएस ने भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय लिखा था। संजय दत्त और अरशद वारसी की जोड़ी ने दर्शकों को हंसाया भी और भावुक भी किया। फिल्म की कहानी और उसके किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट में कई ऐसे दृश्य भी लिखे गए थे जो बाद में अंतिम संस्करण का हिस्सा नहीं बन पाए।

    राजकुमार हिरानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने मुन्ना भाई एमबीबीएस के लिए एक खास दृश्य लिखा था जो मुख्य किरदार मुन्ना के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला था। कहानी के अनुसार एक रात मुन्ना और सर्किट शराब पीकर सड़क पर घूम रहे होते हैं। शहर में कर्फ्यू लगा होता है और सन्नाटा पसरा होता है। तभी एक छोटा बच्चा घबराया हुआ उनके पास आता है और बताता है कि उसकी मां को प्रसव पीड़ा हो रही है लेकिन कोई एम्बुलेंस या डॉक्टर मदद के लिए उपलब्ध नहीं है।

    जब बच्चे को पता चलता है कि मुन्ना डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहा है तो वह उसे अपने साथ चलने के लिए मजबूर कर देता है। मुन्ना के पास कोई वास्तविक चिकित्सकीय अनुभव नहीं होता लेकिन वह फिल्मों में देखी गई बातों के आधार पर मदद करने की कोशिश करता है। वह लोगों से गर्म पानी और जरूरी सामान लाने को कहता है और हालात को संभालने का प्रयास करता है।

    कहानी के अनुसार अंततः बच्चे का जन्म हो जाता है और जब मुन्ना पहली बार नवजात को अपनी गोद में उठाता है तब उसके भीतर एक बड़ा भावनात्मक परिवर्तन आता है। उसी पल उसे जीवन की कीमत और अपने पेशे की जिम्मेदारी का एहसास होता है। यही दृश्य उसके किरदार के विकास में महत्वपूर्ण मोड़ बनने वाला था।

    हालांकि बाद में यह पूरा दृश्य फिल्म से हटा दिया गया। लेकिन राजकुमार हिरानी को इस विचार की ताकत पर पूरा भरोसा था। इसलिए वर्षों बाद जब उन्होंने 3 इडियट्स बनाई तो इसी भावनात्मक आधार को नए अंदाज में इस्तेमाल किया। फिल्म में रैंचो आपात स्थिति में पिया की बहन की डिलीवरी करवाता है। यह दृश्य न सिर्फ फिल्म के सबसे यादगार पलों में शामिल हुआ बल्कि इसके जरिए वायरस के किरदार का हृदय परिवर्तन भी दिखाया गया।

    3 इडियट्स में यह दृश्य दर्शकों के लिए रोमांच भावनाओं और प्रेरणा का अनूठा मिश्रण साबित हुआ। शायद यही वजह है कि आज भी यह सीन फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में गिना जाता है।

    राजकुमार हिरानी का यह खुलासा बताता है कि कई बार फिल्म निर्माण के दौरान हटाए गए विचार भी वर्षों बाद नई कहानी में जगह पाकर इतिहास रच देते हैं। मुन्ना भाई एमबीबीएस से निकलकर 3 इडियट्स तक पहुंचा यह दृश्य इसका बेहतरीन उदाहरण है।

  • 37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच

    37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की चर्चित फिल्म त्रिदेव का सुपरहिट गाना ओए ओए आज भी लोगों की जुबान पर है। इस गाने ने जहां फिल्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया वहीं अभिनेत्री सोनम खान को भी रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। हालांकि इस सफलता के साथ एक ऐसी अफवाह भी जुड़ गई जो वर्षों तक उनका पीछा करती रही। दावा किया जाता था कि सोनम खान को यह गाना और फिल्म में विशेष महत्व इसलिए मिला क्योंकि उनका फिल्म के निर्देशक राजीव राय के साथ अफेयर चल रहा था। अब करीब 37 साल बाद अभिनेत्री ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले की सच्चाई बताई है।

    सोनम खान ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए उन सभी चर्चाओं और अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की जो दशकों से उनके नाम के साथ जुड़ी हुई थीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब त्रिदेव की शूटिंग शुरू हुई थी तब वह और राजीव राय किसी भी तरह के प्रेम संबंध में नहीं थे। इतना ही नहीं दोनों उस समय अलग अलग लोगों के साथ रिश्ते में थे।

    सोनम ने बताया कि त्रिदेव के पहले दिन की शूटिंग और उनके पहले बड़े गाने के साथ ही पहली बड़ी अफवाह ने जन्म लिया था। फिल्म की रिलीज के बाद यह धारणा बना दी गई कि निर्देशक के साथ करीबी रिश्तों के कारण उन्हें फिल्म में बाकी अभिनेत्रियों से ज्यादा महत्व मिला। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी।

    अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में खुलासा किया कि राजीव राय उन्हें फिल्म में लेने के पक्ष में भी नहीं थे। उन्होंने पहले किसी दूसरी अभिनेत्री को फिल्म में लेने की योजना बनाई थी और लगभग बातचीत भी पूरी कर ली थी। सोनम के अनुसार निर्देशक ने उनकी पिछली फिल्म के कुछ दृश्य देखे थे और वह उनसे प्रभावित नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें फिल्म में लेना राजीव राय की पहली पसंद नहीं बल्कि मजबूरी बन गया था क्योंकि अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं थे।

    सोनम ने यह भी कहा कि उस समय राजीव राय अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थे जबकि उनका अपना बॉयफ्रेंड भी शूटिंग स्थल के आसपास मौजूद रहता था। ऐसे में दोनों के बीच किसी तरह के गुप्त रिश्ते या रोमांस की बात पूरी तरह निराधार थी। उन्होंने कहा कि न तो कोई सीक्रेट मुलाकात होती थी और न ही कोई छिपा हुआ प्रेम प्रसंग था।

    दिलचस्प बात यह है कि बाद में परिस्थितियां बदलीं और त्रिदेव की रिलीज के काफी समय बाद सोनम खान और राजीव राय एक दूसरे के करीब आए। उस समय दोनों अपने अपने पुराने रिश्तों से बाहर निकल चुके थे और सिंगल थे। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया और उनका रिश्ता आगे बढ़ता गया। आखिरकार वर्ष 1991 में दोनों ने शादी कर ली। हालांकि यह रिश्ता भी हमेशा कायम नहीं रह सका और साल 2016 में दोनों अलग हो गए।

    त्रिदेव की बात करें तो यह फिल्म अपने दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में सनी देओल जैकी श्रॉफ नसीरुद्दीन शाह माधुरी दीक्षित और अमरीश पुरी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। वहीं ओए ओए गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।

    सोनम खान का यह खुलासा न केवल एक पुरानी अफवाह का अंत करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बिना सच्चाई जाने बनाई गई धारणाएं कलाकारों का वर्षों तक पीछा करती रहती हैं।

  • ओटीटी पर 2026 का जलवा इन 11 वेब सीरीज ने जीता दर्शकों का दिल IMDB रेटिंग भी है जबरदस्त

    ओटीटी पर 2026 का जलवा इन 11 वेब सीरीज ने जीता दर्शकों का दिल IMDB रेटिंग भी है जबरदस्त


    नई दिल्ली । साल 2026 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए बेहद खास साबित हो रहा है। इस वर्ष कई ऐसी वेब सीरीज रिलीज हुईं जिन्होंने न सिर्फ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया बल्कि अपनी दमदार कहानियों और शानदार अभिनय के दम पर आलोचकों की भी तारीफ हासिल की। क्राइम थ्रिलर से लेकर स्पोर्ट्स ड्रामा और बायोपिक तक हर तरह का कंटेंट दर्शकों को देखने को मिला। खास बात यह है कि इन चर्चित सीरीज की आईएमडीबी रेटिंग भी 6.5 से ऊपर है जो उनकी लोकप्रियता और गुणवत्ता को साबित करती है।

    इस साल सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाली सीरीज में ब्राउन का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। करिश्मा कपूर की वापसी वाली इस साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर ने दर्शकों को एक रहस्यमयी और रोमांचक दुनिया से रूबरू कराया। वहीं नाना पाटेकर अभिनीत संकल्प ने राजनीति और सत्ता के पीछे चलने वाले खेल को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

    क्राइम और कॉमेडी का शानदार मिश्रण लेकर आई द पिरामिड स्कीम भी दर्शकों की पसंदीदा सीरीज में शामिल रही। हरिद्वार की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी नेटवर्क मार्केटिंग के चमकदार लेकिन खतरनाक जाल को उजागर करती है। दूसरी ओर नेटफ्लिक्स की ग्लोरी ने खेल जगत की चमक के पीछे छिपे संघर्ष और साजिशों को रोमांचक अंदाज में दिखाया।

    इमरान हाशमी की तस्करी द स्मगलर्स वेब ने भी दर्शकों को बांधे रखा। मुंबई एयरपोर्ट पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ जंग की यह कहानी एक हाई वोल्टेज थ्रिलर के रूप में सामने आई। वहीं विजय वर्मा स्टारर मटका किंग ने मुंबई के सट्टेबाजी साम्राज्य की कहानी को दिलचस्प अंदाज में पेश किया और खूब सराहना बटोरी।

    अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई राख इस साल की सबसे चर्चित क्राइम थ्रिलर सीरीज में गिनी जा रही है। अली फजल और सोनाली बेंद्रे की दमदार अदाकारी ने इस रहस्यमयी कहानी को और प्रभावशाली बना दिया। दो बच्चों के अचानक गायब होने की घटना से शुरू होने वाली यह कहानी दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।

    बायोपिक श्रेणी में हेलो बच्चों ने खास पहचान बनाई। फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित इस सीरीज ने युवाओं को प्रेरित किया। वहीं हाथरस ने एक संवेदनशील और चर्चित वास्तविक घटना को डॉक्यू सीरीज के रूप में पेश कर दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

    इस साल की सबसे सराही गई सीरीज में मेड इन इंडिया ए टाइटन स्टोरी भी शामिल है। यह सीरीज बताती है कि किस तरह भारतीय उद्योग जगत ने चुनौतियों के बीच एक वैश्विक ब्रांड की नींव रखी। नसीरुद्दीन शाह और जिम सरभ की शानदार अदाकारी ने इसे और खास बना दिया।

    हालांकि सभी सीरीज के बीच सपने वर्सेस एवरीवन सीजन 2 ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। 9.6 की शानदार आईएमडीबी रेटिंग के साथ यह सीरीज दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है। मिडिल क्लास युवाओं के सपनों संघर्ष और महत्वाकांक्षाओं को बेहद भावनात्मक तरीके से पेश करने वाली इस कहानी ने लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई है।

    कुल मिलाकर साल 2026 ओटीटी कंटेंट के लिहाज से बेहद समृद्ध रहा है। अगर आप भी बेहतरीन कहानियों और दमदार अभिनय के शौकीन हैं तो ये 11 वेब सीरीज आपकी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल होनी चाहिए।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता

    राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस विवाद के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आ गए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

    राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते रहे हैं। समर्थक उन्हें अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता मानते हैं, वहीं आलोचक उन पर निर्णयों में एकतरफा रवैया अपनाने के आरोप लगाते रहे हैं।

    ट्रस्ट में बढ़ता असंतोष और पुराने विवाद

    सूत्रों और चर्चा के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने संत और महंत ट्रस्ट के गठन से ही कुछ फैसलों से असंतुष्ट रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई प्रमुख संतों और संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया।

    ट्रस्ट में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य पदों की मौजूदगी के बावजूद, लंबे समय से यह धारणा रही है कि प्रशासनिक और संगठनात्मक निर्णयों में चंपत राय की भूमिका प्रमुख रही है। इसी कारण कुछ सदस्यों के बीच असंतोष की स्थिति भी बनी रही।

    चढ़ावे की चोरी का मामला और बढ़ता विवाद

    हाल ही में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले के बाद चंपत राय पर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ पूर्व जुड़े लोगों और संतों ने सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है, जबकि कुछ ने जांच की मांग की है।

    हालांकि, चंपत राय को लेकर उनके समर्थक यह भी मानते हैं कि उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और सादगी से जुड़ा रहा है और उन पर सीधे तौर पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है।

    सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया

    इस पूरे मामले पर सरकार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के कार्यों में कुछ व्यवस्थागत कमियों की बात स्वीकार की है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी तरह के गंभीर आरोपों से इनकार किया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हालिया घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर बिना ठोस आधार के टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

    आगे क्या होगा?

    सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव या पुनर्गठन पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • चातुर्मास कब से शुरू होगा? जानिए तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा-विधि और पालन के प्रमुख नियम

    चातुर्मास कब से शुरू होगा? जानिए तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा-विधि और पालन के प्रमुख नियम


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में चातुर्मास को भक्ति, तपस्या और आत्मसंयम का विशेष काल माना जाता है। यह चार महीने का पावन समय भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से होगी और इसका समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस दौरान श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास आएंगे।

    क्या है चातुर्मास का धार्मिक महत्व?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित रखा जाता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत फिर से हो जाती है।

    पौराणिक कथाओं में चातुर्मास का संबंध राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से बताया गया है। कथा के अनुसार, भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। दो पग में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया, जबकि तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया और चार माह तक उनके द्वार पर रहने का संकल्प लिया। इसी परंपरा से चातुर्मास की मान्यता जुड़ी मानी जाती है।

    चातुर्मास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?

    चातुर्मास के दौरान विवाह, यज्ञ, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार सहित अन्य बड़े शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है। हालांकि नियमित पूजा-पाठ, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई रोक नहीं होती। बल्कि इस समय को साधना, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

    चातुर्मास में खान-पान के नियम

    इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने और खान-पान में संयम रखने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु गुड़, तेल, बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां, अधिक मसालेदार और तामसिक भोजन का त्याग करते हैं। वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले भक्त प्याज, लहसुन और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से भी दूरी बनाए रखते हैं।

    मास अनुसार परहेज के नियम इस प्रकार बताए गए हैं

    श्रावण मास: पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज।
    भाद्रपद मास: दही का सेवन नहीं किया जाता।
    आश्विन मास: दूध का त्याग करने की परंपरा है।
    कार्तिक मास: मांसाहार, विशेष रूप से मछली का सेवन वर्जित माना जाता है।

    चातुर्मास में कैसे करें पूजा और साधना?

    चातुर्मास का पालन घर पर रहकर भी सरलता से किया जा सकता है। इसके लिए प्रतिदिन भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र-जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    – प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर भगवान विष्णु की पूजा करें।
    – दीप प्रज्वलित कर तुलसी दल अर्पित करें।
    – विष्णु सहस्रनाम अथवा हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।
    – चातुर्मास में कम से कम एकादशी व्रत अवश्य रखें।
    – किसी एक प्रिय वस्तु या आदत का त्याग कर व्यक्तिगत संकल्प लें।
    – श्रीमद्भागवत, रामायण या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ एवं श्रवण करें।
    – अन्नदान, जरूरतमंदों की सहायता और धार्मिक सेवा कार्यों में सहभागिता करें।
    धार्मिक दृष्टि से चातुर्मास केवल व्रत और नियमों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और ईश्वर भक्ति को जीवन में उतारने का अवसर भी माना जाता है।

  • दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की विशाल सुरंग का खुलासा, 50 ईरानी ड्रोन और भारी हथियार बरामद

    दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की विशाल सुरंग का खुलासा, 50 ईरानी ड्रोन और भारी हथियार बरामद


    नई दिल्ली। इजरायल डिफेंस फोर्सेज IDF ने दक्षिणी लेबनान के माजदल जौन क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के एक बड़े भूमिगत नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। सेना के अनुसार, गांव के नीचे करीब 200 मीटर लंबी और 29 मीटर गहरी सुरंग मिली है, जिसमें बड़ी मात्रा में हथियार, एंटी-टैंक मिसाइलें और 50 ईरानी निर्मित विस्फोटक ड्रोन बरामद किए गए हैं।

    IDF ने बताया कि यह कार्रवाई 2026 के युद्धविराम (सीजफायर) के दौरान चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान के तहत की गई। पिछले सप्ताह 551वीं ब्रिगेड और विशेष याहलोम यूनिट ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें 20 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया गया। सेना ने सुरंग के आसपास मौजूद कई अन्य ठिकानों को भी ध्वस्त कर दिया।

    सुरंग में मौजूद थीं हमले की पूरी तैयारियां

    सेना के मुताबिक, सुरंग को इस तरह तैयार किया गया था कि आतंकी लंबे समय तक इसमें रह सकें। अंदर रहने के लिए कमरे बनाए गए थे और इजरायल की दिशा में लॉन्च शाफ्ट स्थापित किए गए थे। यहां से रॉकेट और मिसाइल हमलों को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। बरामद किए गए 50 सुसाइड ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलें संभावित हमले की तैयारियों की ओर संकेत करती हैं।

    ईरानी मदद से निर्माण का दावा

    IDF का कहना है कि यह सुरंग नेटवर्क पिछले एक दशक में ईरानी वित्तीय और सैन्य सहायता के जरिए तैयार किया गया। सेना के अनुसार, सुरंगों को जानबूझकर आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे बनाया गया था और इनके कुछ हिस्से गांव की मस्जिद के आसपास भी जुड़े हुए थे। इजरायल ने आरोप लगाया है कि हिज्बुल्लाह नागरिक क्षेत्रों का इस्तेमाल अपनी सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए करता रहा है।

    नागरिक इलाकों के नीचे हथियारों का जखीरा
    ऑपरेशन के दौरान जारी किए गए वीडियो में सुरंग के भीतर हथियारों के भंडार, ड्रोन और रहने की व्यवस्थाएं दिखाई गई हैं। इजरायल का दावा है कि इन संरचनाओं को स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के आसपास विकसित किया गया, जिससे स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता था।

    सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव

    इजरायल का आरोप है कि युद्धविराम के बावजूद हिज्बुल्लाह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ था। दूसरी ओर, लेबनान लगातार इजरायली सैन्य अभियानों पर सवाल उठाता रहा है। इस ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्र में लागू सीजफायर की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान

    IDF के प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। सेना का लक्ष्य सीमा क्षेत्र के आसपास मौजूद सभी संभावित सुरंगों और आतंकी ठिकानों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजरायल की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की कोई नई कोशिश हुई तो सेना और कड़ी कार्रवाई करेगी।