Author: bharati

  • धारा 370 से राष्ट्र प्रथम तक भाजपा का वैचारिक महाअभियान मध्यप्रदेश में बूथ गौरव दिवस के साथ होंगे हजारों कार्यक्रम

    धारा 370 से राष्ट्र प्रथम तक भाजपा का वैचारिक महाअभियान मध्यप्रदेश में बूथ गौरव दिवस के साथ होंगे हजारों कार्यक्रम


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी आगामी 23 जून से 6 जुलाई तक व्यापक जनसंपर्क और वैचारिक जागरण अभियान चलाने जा रही है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले इस विशेष अभियान को पार्टी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पक्ष नाम दिया है। इसके तहत प्रदेश के बूथ स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को जन जन तक पहुंचाना और संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय बनाना है। मध्यप्रदेश भाजपा इस पूरे पखवाड़े को बूथ गौरव दिवस के रूप में मनाएगी। इसके लिए प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

    अभियान का प्रमुख केंद्र जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले को बनाया गया है। भाजपा कार्यकर्ता विभिन्न व्याख्यानों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बताएंगे कि किस प्रकार यह निर्णय देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। कार्यक्रमों में राष्ट्र प्रथम की अवधारणा को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। पार्टी का मानना है कि डॉ. मुखर्जी के विचारों और उनके सपनों को साकार करने की दिशा में यह ऐतिहासिक निर्णय महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

    प्रदेश के सभी जिलों में जिला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में प्रबुद्ध वक्ता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन दर्शन सामाजिक योगदान राजनीतिक यात्रा और भारतीय जनसंघ की स्थापना में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। इसके साथ ही स्वतंत्र भारत के निर्माण में उनके योगदान और राष्ट्रहित से जुड़े उनके विचारों पर भी चर्चा की जाएगी।

    युवा वर्ग को जोड़ने के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों और विश्वविद्यालयों के आसपास छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और डॉ. मुखर्जी के विचारों से जोड़ना है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार ये आयोजन शैक्षणिक परिसरों के बाहर आयोजित होंगे।

    अभियान के दौरान सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों को भी प्रमुखता दी जाएगी। प्रदेश के विभिन्न शहरों और नगरों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर मार्ग उद्यान अथवा प्रमुख स्थलों का नामकरण किया जाएगा। कई स्थानों पर उनकी प्रतिमा अथवा चित्र का अनावरण भी प्रस्तावित है। इसके अलावा मानसून को देखते हुए बूथ स्तर तक व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। भाजपा का लक्ष्य है कि पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत किया जाए।

    भाजपा संगठन का मानना है कि यह अभियान केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रवाद संगठन सशक्तिकरण और जनजागरण का व्यापक अभियान होगा। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पार्टी अपने वैचारिक आधार को मजबूत करने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास करेगी। आने वाले दिनों में प्रदेशभर में इस अभियान से जुड़ी गतिविधियां राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आएंगी।

  • मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा

    मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा


    मध्यप्रदेश । भोपाल में आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी ATS द्वारा की जा रही जांच में कथित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। एजेंसी की हिरासत में मौजूद आरोपियों से पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और सामने आई जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार आरोपी इजहार उल हक से पूछताछ में एक कथित नेटवर्क और उसके उद्देश्यों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से बताया कि कुछ लोग एक विशेष एजेंडे के तहत काम कर रहे थे और सोशल मीडिया तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियां इन दावों की गहन जांच कर रही हैं।

    ATS के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे। टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग कथित तौर पर संवाद और विचारों के आदान प्रदान के लिए किया जा रहा था। एजेंसी अब इन डिजिटल संपर्कों और चैट रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके विस्तार का पता लगाया जा सके।

    पूछताछ में आरोपी फराज से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज पिछले कई वर्षों से कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसकी पहचान कुछ ऐसे लोगों से कराई गई थी जो विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। एजेंसी अब इन संपर्कों की प्रामाणिकता और उनके संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर वैचारिक प्रभाव डालकर लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपियों ने विभिन्न राज्यों के लोगों के संपर्क में होने की बात भी स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन क्षेत्रों तक सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

    ATS अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। एजेंसी यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा। इसी कारण जांच से जुड़ी जानकारियों को सावधानीपूर्वक परखा जा रहा है।

    इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलाए जाने वाले कट्टरपंथी विचारों और संदिग्ध नेटवर्क की चुनौती को सामने ला दिया है। जांच एजेंसियां लगातार ऐसे तत्वों पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि किसी भी प्रकार की अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

  • सीनियर अफसरों की अनदेखी से बढ़ा विवाद एमएसएमई विभाग में जूनियर लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर

    सीनियर अफसरों की अनदेखी से बढ़ा विवाद एमएसएमई विभाग में जूनियर लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में हाल ही में जारी प्रभार आदेशों ने विभागीय व्यवस्था को लेकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। वाणिज्यिक कर विभाग में तबादलों को लेकर उठे सवालों के बाद अब एमएसएमई विभाग के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अधिकारियों का आरोप है कि वरिष्ठता और योग्यता की अनदेखी करते हुए जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार सौंप दिया गया है जिससे विभागीय पदक्रम और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

    विवाद की शुरुआत 15 और 16 जून को जारी किए गए प्रभार आदेशों से हुई। इन आदेशों के तहत कुछ ऐसे अधिकारियों को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधक का प्रभार दिया गया है जो मूल रूप से सहायक प्रबंधक पद पर नियुक्त हैं और वर्तमान में प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। विभाग के भीतर इसे चार्ज के ऊपर चार्ज की व्यवस्था बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य है और इससे विभाग में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

    जिन अधिकारियों को महाप्रबंधक का प्रभार सौंपा गया है उनमें सुबोध कुमार श्रीवास्तव को मंडीदीप जेपी तिवारी को रीवा शिवशंकर सिंह को निवाड़ी सुरेश कुमार गोस्वामी को भिंड राममूर्ति खरे को अनूपपुर अजय तिवारी को शिवपुरी तथा बीएल अहिरवार को दमोह की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को लेकर विभाग के भीतर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि विभाग में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित वर्ष 2016 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक वर्ग दो राजपत्रित अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें प्रबंधक और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद उन्हें जिम्मेदारी न देकर प्रभारी प्रबंधकों को महाप्रबंधक का प्रभार देना कई अधिकारियों को समझ से परे लग रहा है। उनका मानना है कि जब योग्य और नियमित रूप से चयनित अधिकारी उपलब्ध हैं तो उन्हें नजरअंदाज करने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।

    नाराजगी का एक बड़ा कारण लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया भी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्षों से पदोन्नति के मामले लंबित हैं और अधिकारियों को उनके अधिकारिक पद नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी ओर जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार देकर वरिष्ठ अधिकारियों की उपेक्षा की जा रही है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और विभाग में असंतोष का माहौल बन रहा है।

    विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर से जुड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में अब ऐसे हालात बन सकते हैं जहां वर्ग दो राजपत्रित अधिकारी उन अधिकारियों के अधीन कार्य करेंगे जो मूल रूप से वर्ग तीन सेवा श्रेणी से आते हैं। ऐसी स्थिति में जूनियर अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की सीआर लिखेंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह न केवल सेवा संरचना के सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी उचित नहीं माना जा सकता।

    विभाग के भीतर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि नियमित और वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं तो फिर प्रभारी व्यवस्था के माध्यम से उच्च पदों की जिम्मेदारी देने के पीछे क्या प्रशासनिक तर्क अपनाया गया है। फिलहाल विभाग की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है लेकिन आदेशों को लेकर विरोध और चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

    एमएसएमई विभाग में बढ़ते असंतोष ने एक बार फिर सरकारी विभागों में तबादला और प्रभार व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यदि विभाग इस मामले पर स्पष्टता नहीं देता है तो विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां

    करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक भले ही धीमी हो लेकिन लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर जलभराव और गड्ढों की समस्या के बीच अब बिजली के लटकते तार भी मौत का कारण बन रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में बिजली व्यवस्था की बदहाली साफ दिखाई दे रही है जहां बाजारों कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर तारों का जाल लोगों की सुरक्षा को चुनौती दे रहा है।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की हालिया रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेशभर में 1963 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1102 लोगों की मौत हुई जबकि 329 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इतना ही नहीं 1492 पशुओं की भी करंट लगने से जान चली गई। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसतन हर दिन तीन लोगों की मौत बिजली हादसों में हो रही है और लगभग हर आठ घंटे में एक व्यक्ति करंट का शिकार बन रहा है।

    भोपाल की स्थिति भी किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त इलाकों में बिजली के तार खुलेआम लटकते दिखाई देते हैं। न्यू मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में जहां प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं वहां खंभों और दुकानों के बीच फैले तार दुर्घटना को आमंत्रण देते नजर आते हैं। पुराने भोपाल की संकरी गलियों में कई स्थानों पर बिजली के तार मकानों की बालकनियों से सटे हुए हैं जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

    शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक हैं। रोशनपुरा चौराहे पर बिजली के तार खंभों से नीचे जमीन तक झूलते दिखाई देते हैं। कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने कई जगह तार लोगों के सिर तक पहुंच रहे हैं। एमपी नगर के कोचिंग हब क्षेत्र में छात्रों की भीड़ के बीच सड़कों के ऊपर उलझे तार सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। वहीं 10 नंबर मार्केट क्षेत्र में एक तार जमीन से महज चार फीट की ऊंचाई पर लटका हुआ देखा गया जो किसी भी राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान ऐसे खुले और झूलते तारों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बारिश के पानी और नमी के कारण करंट फैलने की आशंका बढ़ जाती है जिससे आम नागरिकों के साथ पशुओं की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। इसके बावजूद कई इलाकों में लंबे समय से शिकायतों के बाद भी सुधार कार्य नहीं हो पाए हैं।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी जारी रही तो बिजली अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है।

    प्रदेश में बढ़ते बिजली हादसे इस बात का संकेत हैं कि केवल निर्देश और चेतावनियां पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत है कि प्रशासन और बिजली कंपनियां तत्काल प्रभाव से जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सुधार कार्य शुरू करें। क्योंकि जब तक सड़कों पर लटकते ये मौत के तार हटाए नहीं जाते तब तक हर बारिश के साथ किसी नई दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।

  • एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही

    एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही


    भोपाल । भोपाल के रायसेन रोड पर रविवार रात उस समय अफरा तफरी मच गई जब नगर निगम का एक कंटेनरनुमा ट्रक अचानक आग की चपेट में आ गया। घटना एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने की है जहां से गुजर रहे ट्रक के केबिन से अचानक धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुआं आग की लपटों में बदल गया और ट्रक का अगला हिस्सा जलने लगा। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और ट्रक कर्मचारियों ने साहस दिखाते हुए आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई।

    जानकारी के अनुसार नगर निगम का यह ट्रक आदमपुर स्थित कचरा खंती से वापस लौट रहा था। रात के समय जब वाहन रायसेन रोड पर एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने पहुंचा तब चालक को केबिन से धुआं निकलता दिखाई दिया। उसने तुरंत वाहन रोका और नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ लोगों ने अपनी गाड़ियों में रखी पानी की बड़ी बोतलें निकालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। कर्मचारियों और राहगीरों ने मिलकर आग पर पानी डाला लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उसे नियंत्रित करना आसान नहीं था। कुछ ही मिनटों में आग ने ट्रक के अगले हिस्से और टायरों को अपनी चपेट में ले लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद काफी समय तक दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब आधे घंटे तक आग धधकती रही और लोग अपने स्तर पर उसे बुझाने की कोशिश करते रहे। इस दौरान सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ और आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    घटना के बाद जब ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुका था। इसके अलावा ट्रक का इंश्योरेंस वर्ष 2019 से नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इतना ही नहीं वाहन का परमिट भी वैध नहीं पाया गया। इस खुलासे ने नगर निगम के वाहन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फिटनेस जांच और समय पर रखरखाव से ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। यदि वाहन की तकनीकी जांच समय पर होती रहे तो शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

    फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है जो राहत की बात है। हालांकि इस हादसे ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और पुराने वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

  • मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान

    मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके से एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां दवा लेने में हुई कथित गलती एक युवती की जान पर भारी पड़ गई। पेट दर्द और ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान 28 वर्षीय युवती ने अपनी नियमित दवा के साथ गलती से मां की शुगर की दवा भी खा ली। इसके कुछ समय बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान वंदना मीणा के रूप में हुई है जो बैरागढ़ क्षेत्र के गांव बेटा की रहने वाली थी। वंदना अपने परिवार के साथ रहती थी और लंबे समय से ब्लड प्रेशर तथा पेट दर्द की समस्या से जूझ रही थी। परिजनों ने बताया कि रविवार देर रात उसे अचानक पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उसने अपनी नियमित दवा ली लेकिन इसी दौरान गलती से अपनी मां की शुगर नियंत्रित करने वाली दवा भी खा ली।

    दवा लेने के कुछ समय बाद वंदना की हालत बिगड़ने लगी। उसे बेचैनी महसूस हुई और स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा। परिवार के सदस्य घबरा गए और तत्काल उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और हालत को संभालने का प्रयास किया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

    इलाज के दौरान सोमवार तड़के वंदना ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की सूचना बैरागढ़ पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा गया जहां सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और दवा के सेवन का इसमें कितना योगदान रहा।

    जानकारी के अनुसार वंदना के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वह परिवार के छह भाई बहनों में शामिल थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उसका जीवन सामान्य रूप से चल रहा था लेकिन एक छोटी सी चूक ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना के बाद घर में शोक का माहौल है और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अलग बीमारियों की दवाओं को बिना जांचे परखे लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेष रूप से मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की दवाओं का असर शरीर पर अलग तरीके से पड़ता है। इसलिए दवा लेते समय पूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

    फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर दवा सेवन में सतर्कता की आवश्यकता की गंभीर याद दिलाती है।

  • स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

    स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का नया दौर कई वजहों से सुर्खियों में आ गया है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे प्रभाव को नियंत्रित करना था लेकिन वार्ता के दौरान सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    स्विस रिसॉर्ट बुर्गेनस्टॉक में आयोजित इस बैठक में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि लंबे समय तक बातचीत में शामिल रहे। दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन किसी ठोस सहमति तक पहुंचने की खबर सामने नहीं आई। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया बयानों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने असंतोष जताया और कुछ समय के लिए वार्ता प्रक्रिया से अलग हो गया। हालांकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले हफ्तों में इस पर आगे विचार विमर्श जारी रहेगा।

    इस बीच सम्मेलन से जुड़े कुछ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो और तस्वीरों के आधार पर कई तरह के दावे और व्याख्याएं सामने आने लगीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब यह दावा किया गया कि कतर के एक वरिष्ठ मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच औपचारिक अभिवादन के दौरान हाथ नहीं मिलाया गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल समय प्रबंधन और मंच व्यवस्था जैसी कई वजहों से ऐसी स्थितियां बन सकती हैं इसलिए किसी एक दृश्य के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    एक अन्य घटनाक्रम जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का सामूहिक फोटो सत्र में शामिल न होना था। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल से बिना तस्वीर खिंचवाए रवाना हो गए। हालांकि इसके पीछे की वास्तविक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार देश अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं या राजनीतिक संदेशों के तहत कुछ औपचारिक गतिविधियों से दूरी बनाते हैं। इसलिए इस घटना को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं। वायरल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर लोगों ने अलग अलग अनुमान लगाए लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव या शारीरिक हावभाव के आधार पर उसकी मानसिक स्थिति या राजनीतिक रुख का आकलन नहीं किया जा सकता।

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर छोटे दिखने वाले घटनाक्रम भी बड़े संदेशों के रूप में देखे जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे सम्मेलनों में नेताओं की गतिविधियां मीडिया और विश्लेषकों की नजर में रहती हैं। हालांकि किसी भी घटना की सही व्याख्या के लिए आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होता है।

    फिलहाल स्विट्जरलैंड में हुई यह वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है लेकिन इससे जुड़े कूटनीतिक संकेत और चर्चाएं वैश्विक राजनीति में आने वाले दिनों तक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

  • दिलीप कुमार जीते लेकिन अनारकली हार गई 1961 के अवॉर्ड्स में बीना राय ने रचा था इतिहास

    दिलीप कुमार जीते लेकिन अनारकली हार गई 1961 के अवॉर्ड्स में बीना राय ने रचा था इतिहास

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे हैं जो समय की सीमाओं को पार कर अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक किरदार था मुगल ए आजम की अनारकली जिसे मधुबाला ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया था। आज भी जब भारतीय सिनेमा की महान अभिनेत्रियों का जिक्र होता है तो मधुबाला और उनका अनारकली का किरदार सबसे पहले याद किया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस भूमिका ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई उसी किरदार के लिए वह फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने से चूक गई थीं।

    साल 1960 हिंदी सिनेमा के लिए स्वर्णिम दौर माना जाता है। इसी वर्ष मुगल ए आजम चौदहवीं का चांद बरसात की रात और कई अन्य शानदार फिल्में रिलीज हुई थीं। इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि अभिनय संगीत और कहानी के स्तर पर भी नए मानक स्थापित किए। इनमें मुगल ए आजम सबसे बड़ी और चर्चित फिल्म बनकर उभरी। फिल्म की भव्यता कलाकारों के अभिनय और संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की कालजयी कृति बना दिया।

    फिल्म में सलीम के किरदार में दिलीप कुमार और अनारकली के रूप में मधुबाला की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। खासतौर पर मधुबाला का अभिनय इतना प्रभावशाली था कि लोगों ने उन्हें अनारकली के रूप में हमेशा के लिए अपने दिलों में बसा लिया। यही कारण था कि 1961 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

    जब पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ तो मुगल ए आजम को कुल 11 नामांकन मिले। फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार अपने नाम किया और दिलीप कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य उस समय हुआ जब सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के विजेता के नाम की घोषणा की गई। सभी को उम्मीद थी कि यह सम्मान मधुबाला को मिलेगा लेकिन पुरस्कार अभिनेत्री बीना राय के नाम रहा।

    बीना राय को यह सम्मान फिल्म घूंघट में उनके शानदार अभिनय के लिए दिया गया था। उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की दौड़ में मधुबाला के अलावा नूतन जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री भी शामिल थीं लेकिन बीना राय ने सभी को पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम कर लिया। यह परिणाम उस दौर में काफी चर्चा का विषय बना था क्योंकि अधिकांश लोग मधुबाला को ही विजेता मान रहे थे।

    बीना राय अपने समय की बेहद लोकप्रिय और सम्मानित अभिनेत्री थीं। उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अपनी सशक्त अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। वर्ष 1953 में आई फिल्म अनारकली में भी उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी और इस किरदार के लिए खूब सराहना बटोरी थी। बाद में ताज महल जैसी फिल्मों में भी उनका अभिनय चर्चा में रहा।

    बीना राय का संबंध कपूर खानदान से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने अभिनेता प्रेमनाथ से विवाह किया था। प्रेमनाथ की बहन कृष्णा राज कपूर थीं जो महान अभिनेता और फिल्मकार राज कपूर की पत्नी थीं। इस रिश्ते से बीना राय कपूर परिवार का हिस्सा बन गई थीं। यही कारण है कि उनका नाम हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित फिल्मी परिवारों से भी जुड़ा रहा।

    1961 का फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। इस समारोह ने यह संदेश दिया कि पुरस्कार केवल लोकप्रियता के आधार पर नहीं बल्कि कलाकारों के अभिनय और काम की गुणवत्ता के आधार पर दिए जाते हैं। यही वजह है कि उस वर्ष मधुबाला जैसी दिग्गज अभिनेत्री भी पुरस्कार से चूक गईं और बीना राय ने अपने शानदार अभिनय के दम पर इतिहास रच दिया।

  • मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया

    मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में शामिल मुन्ना भाई एमबीबीएस और 3 इडियट्स के बीच एक दिलचस्प कड़ी सामने आई है। मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी ने खुलासा किया है कि 3 इडियट्स का एक बेहद चर्चित और भावुक दृश्य दरअसल पहले मुन्ना भाई एमबीबीएस की स्क्रिप्ट का हिस्सा था। हालांकि उस समय इसे फिल्म से हटा दिया गया लेकिन वर्षों बाद यही विचार नए रूप में 3 इडियट्स में नजर आया और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरने में सफल रहा।

    साल 2003 में रिलीज हुई मुन्ना भाई एमबीबीएस ने भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय लिखा था। संजय दत्त और अरशद वारसी की जोड़ी ने दर्शकों को हंसाया भी और भावुक भी किया। फिल्म की कहानी और उसके किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट में कई ऐसे दृश्य भी लिखे गए थे जो बाद में अंतिम संस्करण का हिस्सा नहीं बन पाए।

    राजकुमार हिरानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने मुन्ना भाई एमबीबीएस के लिए एक खास दृश्य लिखा था जो मुख्य किरदार मुन्ना के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला था। कहानी के अनुसार एक रात मुन्ना और सर्किट शराब पीकर सड़क पर घूम रहे होते हैं। शहर में कर्फ्यू लगा होता है और सन्नाटा पसरा होता है। तभी एक छोटा बच्चा घबराया हुआ उनके पास आता है और बताता है कि उसकी मां को प्रसव पीड़ा हो रही है लेकिन कोई एम्बुलेंस या डॉक्टर मदद के लिए उपलब्ध नहीं है।

    जब बच्चे को पता चलता है कि मुन्ना डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहा है तो वह उसे अपने साथ चलने के लिए मजबूर कर देता है। मुन्ना के पास कोई वास्तविक चिकित्सकीय अनुभव नहीं होता लेकिन वह फिल्मों में देखी गई बातों के आधार पर मदद करने की कोशिश करता है। वह लोगों से गर्म पानी और जरूरी सामान लाने को कहता है और हालात को संभालने का प्रयास करता है।

    कहानी के अनुसार अंततः बच्चे का जन्म हो जाता है और जब मुन्ना पहली बार नवजात को अपनी गोद में उठाता है तब उसके भीतर एक बड़ा भावनात्मक परिवर्तन आता है। उसी पल उसे जीवन की कीमत और अपने पेशे की जिम्मेदारी का एहसास होता है। यही दृश्य उसके किरदार के विकास में महत्वपूर्ण मोड़ बनने वाला था।

    हालांकि बाद में यह पूरा दृश्य फिल्म से हटा दिया गया। लेकिन राजकुमार हिरानी को इस विचार की ताकत पर पूरा भरोसा था। इसलिए वर्षों बाद जब उन्होंने 3 इडियट्स बनाई तो इसी भावनात्मक आधार को नए अंदाज में इस्तेमाल किया। फिल्म में रैंचो आपात स्थिति में पिया की बहन की डिलीवरी करवाता है। यह दृश्य न सिर्फ फिल्म के सबसे यादगार पलों में शामिल हुआ बल्कि इसके जरिए वायरस के किरदार का हृदय परिवर्तन भी दिखाया गया।

    3 इडियट्स में यह दृश्य दर्शकों के लिए रोमांच भावनाओं और प्रेरणा का अनूठा मिश्रण साबित हुआ। शायद यही वजह है कि आज भी यह सीन फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में गिना जाता है।

    राजकुमार हिरानी का यह खुलासा बताता है कि कई बार फिल्म निर्माण के दौरान हटाए गए विचार भी वर्षों बाद नई कहानी में जगह पाकर इतिहास रच देते हैं। मुन्ना भाई एमबीबीएस से निकलकर 3 इडियट्स तक पहुंचा यह दृश्य इसका बेहतरीन उदाहरण है।

  • 37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच

    37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की चर्चित फिल्म त्रिदेव का सुपरहिट गाना ओए ओए आज भी लोगों की जुबान पर है। इस गाने ने जहां फिल्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया वहीं अभिनेत्री सोनम खान को भी रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। हालांकि इस सफलता के साथ एक ऐसी अफवाह भी जुड़ गई जो वर्षों तक उनका पीछा करती रही। दावा किया जाता था कि सोनम खान को यह गाना और फिल्म में विशेष महत्व इसलिए मिला क्योंकि उनका फिल्म के निर्देशक राजीव राय के साथ अफेयर चल रहा था। अब करीब 37 साल बाद अभिनेत्री ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले की सच्चाई बताई है।

    सोनम खान ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए उन सभी चर्चाओं और अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की जो दशकों से उनके नाम के साथ जुड़ी हुई थीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब त्रिदेव की शूटिंग शुरू हुई थी तब वह और राजीव राय किसी भी तरह के प्रेम संबंध में नहीं थे। इतना ही नहीं दोनों उस समय अलग अलग लोगों के साथ रिश्ते में थे।

    सोनम ने बताया कि त्रिदेव के पहले दिन की शूटिंग और उनके पहले बड़े गाने के साथ ही पहली बड़ी अफवाह ने जन्म लिया था। फिल्म की रिलीज के बाद यह धारणा बना दी गई कि निर्देशक के साथ करीबी रिश्तों के कारण उन्हें फिल्म में बाकी अभिनेत्रियों से ज्यादा महत्व मिला। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी।

    अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में खुलासा किया कि राजीव राय उन्हें फिल्म में लेने के पक्ष में भी नहीं थे। उन्होंने पहले किसी दूसरी अभिनेत्री को फिल्म में लेने की योजना बनाई थी और लगभग बातचीत भी पूरी कर ली थी। सोनम के अनुसार निर्देशक ने उनकी पिछली फिल्म के कुछ दृश्य देखे थे और वह उनसे प्रभावित नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें फिल्म में लेना राजीव राय की पहली पसंद नहीं बल्कि मजबूरी बन गया था क्योंकि अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं थे।

    सोनम ने यह भी कहा कि उस समय राजीव राय अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थे जबकि उनका अपना बॉयफ्रेंड भी शूटिंग स्थल के आसपास मौजूद रहता था। ऐसे में दोनों के बीच किसी तरह के गुप्त रिश्ते या रोमांस की बात पूरी तरह निराधार थी। उन्होंने कहा कि न तो कोई सीक्रेट मुलाकात होती थी और न ही कोई छिपा हुआ प्रेम प्रसंग था।

    दिलचस्प बात यह है कि बाद में परिस्थितियां बदलीं और त्रिदेव की रिलीज के काफी समय बाद सोनम खान और राजीव राय एक दूसरे के करीब आए। उस समय दोनों अपने अपने पुराने रिश्तों से बाहर निकल चुके थे और सिंगल थे। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया और उनका रिश्ता आगे बढ़ता गया। आखिरकार वर्ष 1991 में दोनों ने शादी कर ली। हालांकि यह रिश्ता भी हमेशा कायम नहीं रह सका और साल 2016 में दोनों अलग हो गए।

    त्रिदेव की बात करें तो यह फिल्म अपने दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में सनी देओल जैकी श्रॉफ नसीरुद्दीन शाह माधुरी दीक्षित और अमरीश पुरी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। वहीं ओए ओए गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।

    सोनम खान का यह खुलासा न केवल एक पुरानी अफवाह का अंत करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बिना सच्चाई जाने बनाई गई धारणाएं कलाकारों का वर्षों तक पीछा करती रहती हैं।