Author: bharati

  • यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रणनीति के तहत राज्य में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत की गुंजाइश भी बनी हुई है। ऐसे में चुनाव से पहले राज्य में विपक्षी दलों के बीच सीटों और मतदाताओं के समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

    AIMIM की रणनीति का पहला हिस्सा उन विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ऐसे क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आधार बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए उन सीटों की पहचान की जा रही है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्टी की कोशिश है कि इन इलाकों में स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाकर चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति मजबूत की जाए।

    दूसरी प्राथमिकता पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बनाया गया है। इस क्षेत्र की लगभग 65 विधानसभा सीटों पर AIMIM विशेष ध्यान दे रही है। मेरठ समेत कई जिलों में पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत असदुद्दीन ओवैसी की जनसभाएं भी प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को रामपुर में जनसभा, 24 अक्टूबर को कैराना में सभा और 14 नवंबर को मेरठ में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों तक पहुंचने और संगठन को सक्रिय करने का प्रयास करेगी।

    AIMIM की तीसरी योजना राज्यभर में संगठन का विस्तार करने से जुड़ी है। यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन पर सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी लगभग 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के विकल्प पर काम कर रही है। इस संभावित रणनीति से विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा का स्वरूप प्रभावित हो सकता है। खासकर उन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, जहां समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी पहले से अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करती रही हैं।

    पूर्वांचल में भी AIMIM ने कई विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी की तैयारियों में आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे जिले शामिल हैं। आजमगढ़ की मुबारकपुर, गोपालपुर, निजामाबाद और सदर सीटों पर पार्टी की नजर है। जौनपुर की सदर और शाहगंज सीटों के साथ मऊ की सदर तथा घोसी विधानसभा सीटों को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा बहराइच और श्रावस्ती जैसे क्षेत्रों में भी संगठन विस्तार की योजना है।

    पार्टी की रणनीति में स्थानीय और प्रभावशाली नेताओं को शामिल करना भी अहम बताया जा रहा है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देने की योजना है, जिन्हें दूसरे राजनीतिक दलों में पर्याप्त अवसर नहीं मिला है। AIMIM को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों के जरिए वह अपने समर्थन का दायरा बढ़ा सकती है। हालांकि, इन प्रयासों का चुनावी परिणाम क्या होगा, यह उम्मीदवारों के चयन, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    गठबंधन को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। AIMIM की ओर से दूसरे विपक्षी दलों के साथ संभावित समझौते की संभावना खुली रखी गई है। इस महीने के अंत तक बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई है। यदि गठबंधन नहीं बनता है, तो पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी को आगे बढ़ा सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM की भूमिका और उसका प्रभाव आगामी चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 3.7 प्रतिशत बढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। मई के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई की कीमत में भी तेजी दर्ज की गई और यह 3.5 प्रतिशत बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तेजी के बाद भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के पीछे मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और रूस से तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। ऊर्जा ठिकानों के आसपास हमलों की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य के क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा की है। कारोबारियों को चिंता है कि यदि इस क्षेत्र में तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से तेल परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहता है। इस रास्ते से होने वाली आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है। इसी वजह से क्षेत्रीय तनाव के घटनाक्रम पर तेल बाजार की नजर बनी हुई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष भी तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यदि रूस की रिफाइनिंग क्षमता या निर्यात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बाजार में तेल और उससे बनने वाले ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

    रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, अमेरिका में इस संबंध में प्रस्तावित समझौते का विरोध करने के लिए सांसदों ने विधेयक पेश किया है। इसके साथ ही रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण वहां से होने वाली आपूर्ति को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। इन परिस्थितियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

    भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन की लागत पर पड़ने की आशंका रहती है। पेट्रोल और डीजल परिवहन व्यवस्था से लेकर वस्तुओं की ढुलाई तक कई क्षेत्रों की लागत को प्रभावित करते हैं।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, तेल कंपनियों की लागत तथा सरकार की नीतियों सहित कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए फिलहाल केवल वैश्विक कीमतों में तेजी के आधार पर घरेलू ईंधन की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    आगे कच्चे तेल की कीमतों का रुख मुख्य रूप से मध्य पूर्व के हालात और रूस से आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित रहती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, परिस्थितियों में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने पर बाजार को राहत मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर बनी चिंताओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

  • आज 17 अक्टूबर को बैंक खुले हैं या बंद, जानें तीसरे शनिवार और महा सप्तमी की छुट्टी का पूरा अपडेट

    आज 17 अक्टूबर को बैंक खुले हैं या बंद, जानें तीसरे शनिवार और महा सप्तमी की छुट्टी का पूरा अपडेट

    नई दिल्ली ।शनिवार को बैंक जाने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए 17 अक्टूबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है। आज देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी, लेकिन त्रिपुरा में महा सप्तमी के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में बैंक से जुड़ा जरूरी काम करने से पहले अपने राज्य और स्थानीय शाखा में लागू छुट्टी की जानकारी लेना जरूरी है। अक्टूबर में त्योहारों के कारण अलग-अलग राज्यों में बैंक कई दिनों तक बंद रहने वाले हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, देश में बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहते हैं। इसके अलावा रविवार को भी बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होता। महीने के पहले और तीसरे शनिवार को सामान्य तौर पर बैंक खुले रहते हैं। इसी नियम के तहत शनिवार, 17 अक्टूबर को देश के अधिकांश राज्यों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इसका मतलब है कि भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों की शाखाएं अधिकांश क्षेत्रों में खुली रहेंगी। ग्राहक नकद जमा करने, निकासी, चेक से जुड़े कार्यों और अन्य शाखा आधारित सेवाओं के लिए बैंक जा सकते हैं। हालांकि, स्थानीय त्योहारों और राज्यवार अवकाश के कारण कुछ स्थानों पर स्थिति अलग हो सकती है।

    त्रिपुरा में आज बैंक बंद रहेंगे। राज्य में महा सप्तमी के पर्व के कारण बैंक शाखाओं में सार्वजनिक अवकाश निर्धारित है। इसलिए त्रिपुरा के ग्राहकों को आज बैंक से संबंधित काम के लिए शाखा जाने से पहले अगली कार्यदिवस की योजना बनानी पड़ सकती है। अन्य राज्यों में भी त्योहारों के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर बैंकिंग कामकाज प्रभावित होगा।

    अक्टूबर 2026 में दुर्गा पूजा, दशहरा, विजयादशमी, आयुध पूजा, लक्ष्मी पूजा और अन्य क्षेत्रीय पर्वों के कारण कई राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। इन छुट्टियों की तारीखें राज्य और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। इसलिए किसी एक राज्य में बैंक बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि उसी दिन पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं भी बंद रहेंगी।

    19 अक्टूबर को दुर्गा पूजा, महाष्टमी, महानवमी, आयुध पूजा और विजयादशमी से संबंधित अवसरों पर त्रिपुरा, मिजोरम, ओडिशा, तमिलनाडु, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और मेघालय में बैंक बंद रहने का उल्लेख है।

    20 अक्टूबर को दशहरा, विजयादशमी, महानवमी, आयुध पूजा और दुर्गा पूजा के कारण कई राज्यों में बैंकिंग अवकाश रहेगा। इनमें मध्य प्रदेश के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरल, दिल्ली, गोवा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य राज्य शामिल हैं।

    21 अक्टूबर को विजयादशमी और दुर्गा पूजा के अवसर पर त्रिपुरा, कर्नाटक, सिक्किम, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे। 22 और 23 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के कारण सिक्किम में अवकाश रहेगा।इसके बाद 26 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा, विलय दिवस और महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर त्रिपुरा में बैंक बंद रहने का उल्लेख है। 29 अक्टूबर को करवा चौथ के कारण चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बैंकिंग अवकाश रहेगा। वहीं, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।

    बैंक जाने से पहले ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छुट्टियां राज्यवार लागू होती हैं और सभी राज्यों में एक जैसी नहीं होतीं। यदि किसी दिन शाखा बंद रहती है, तो एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन सेवाओं के माध्यम से हर तरह का शाखा आधारित काम पूरा नहीं किया जा सकता।

    इसलिए 17 अक्टूबर को बैंक जाने वाले ग्राहकों के लिए मुख्य बात यह है कि देश के अधिकांश हिस्सों में तीसरे शनिवार को बैंक खुले रहेंगे, जबकि त्रिपुरा में महा सप्तमी के कारण शाखाएं बंद रहेंगी। किसी जरूरी वित्तीय काम के लिए निकलने से पहले अपनी स्थानीय शाखा की स्थिति और लागू अवकाश की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

  • सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव

    सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान सोना प्रति 10 ग्राम 4,500 रुपये सस्ता हुआ, जबकि चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 13,500 रुपये तक गिर गई। हालांकि, शुक्रवार को दिल्ली के हाजिर सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव स्थिर रहे। दूसरी ओर, वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। रुपये की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। पूरे सप्ताह के हिसाब से इसकी कीमत में 4,500 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत में मामूली सुधार हुआ और यह 0.30 प्रतिशत बढ़कर 4,183.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    वायदा बाजार में सोने की कीमतों का रुख हाजिर बाजार से अलग रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध शुक्रवार को 876 रुपये या 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,48,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान ताजा खरीदारी और हाजिर मांग में सुधार को इस तेजी से जोड़कर देखा गया। न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में भी सोने की कीमत 0.01 प्रतिशत बढ़कर 4,171.84 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।

    चांदी की कीमतों में भी सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय गिरावट रही। दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी का भाव 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहा। हालांकि, साप्ताहिक आधार पर इसकी कीमत 13,500 रुपये यानी करीब 6 प्रतिशत कम हुई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में चांदी 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 57.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा अनुबंध शुक्रवार को 2,217 रुपये या 1.05 प्रतिशत बढ़कर 2,12,877 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। कारोबारियों की ओर से सौदों का आकार बढ़ाए जाने के बीच कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में भी चांदी 0.31 प्रतिशत चढ़कर 57.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी सीमित रहने की एक प्रमुख वजह भारतीय रुपये की मजबूती रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और सात पैसे की बढ़त के साथ 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से मिले समर्थन के बीच रुपये की मजबूती का असर आयात लागत पर भी पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से विदेशों से खरीदे जाने वाले सोने और चांदी की लागत कम हो सकती है, जिससे घरेलू कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक फिसलने के बाद दोनों धातुओं में नुकसान की भरपाई करने की कोशिश दिखाई दी। हालांकि, रुपये की लगातार मजबूती ने इस सुधार को सीमित रखा।

    आगे के रुझान को लेकर कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमतों में हल्की तेजी के साथ सीमित दायरे में कारोबार हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के अनुसार सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

  • जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करने वाली पूनम पांडे अब क्यों हुईं खिलाफ, पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन करने वाली अभिनेत्री और मॉडल पूनम पांडे अब पार्टी के नए आंदोलन के विरोध में नजर आ रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर सवाल उठाए हैं। पूनम का कहना है कि किसी भी व्यक्ति का अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगना उचित नहीं है। उन्होंने मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को देश के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से देश की छवि प्रभावित होती है।

    नीट पेपर लीक के खिलाफ जून और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान सीजेपी को कई लोगों का समर्थन मिला था। छात्रों के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर आम लोगों के साथ कुछ चर्चित हस्तियां भी प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई थी। इसी दौरान पूनम पांडे भी वहां पहुंची थीं। उन्होंने छात्रों की समस्याओं पर सरकार से जल्द ध्यान देने और उनकी मांगों को सुनने की अपील की थी।

    हालांकि, अब पार्टी की ओर से चलाए जा रहे नए आंदोलन को लेकर पूनम का रुख बदल गया है। सीजेपी इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है। इसके साथ ही पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे और व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग भी उठाई जा रही है। पूनम पांडे ने इन मांगों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश में विरोध के नाम पर जिस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, वे उचित नहीं हैं।

    पूनम ने कहा कि किसी के भी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांगने का तरीका ऐसा नहीं हो सकता कि जब मन हुआ, सीधे पद छोड़ने की मांग कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के पद की अहमियत का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर इस तरह की मांगें किस आधार पर की जा रही हैं। उनके अनुसार, देश का संचालन इस तरीके से नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री कोई पड़ोसी या निजी परिचित नहीं हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद पर आसीन व्यक्ति हैं।

    पूनम पांडे ने आंदोलन में शामिल युवाओं की समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि वे किस उद्देश्य से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ छात्र और युवा बिना पूरी जानकारी के प्रदर्शन का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने इसे देश के लिए अस्वस्थ माहौल बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां राष्ट्रीय हित में नहीं हैं।

    इसी बातचीत के दौरान पूनम ने इमरान खान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नागरिक होने के कारण उन्हें देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए था। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने देश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी असहमति जाहिर की।

    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली में विरोध का भी सामना करना पड़ा। शुक्रवार को पार्टी ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समर्थकों को बुलाया था। हालांकि, वहां बड़ी संख्या में विरोध करने वाले लोग भी जुट गए। कनॉट प्लेस के कई कारोबारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली पुलिस के समर्थन में नारे लगाए तथा सीजेपी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    कार्यक्रम से पहले पार्टी के युवा नेताओं अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। इसके बाद कार्यक्रम में पार्टी समर्थकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इस घटनाक्रम के बीच सीजेपी को एक ओर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पहले समर्थन कर चुकी पूनम पांडे की आलोचना भी उसके लिए चर्चा का विषय बन गई है।

  • अवैध खनन के आरोपों से जुड़े मामले में संजय पाठक की फर्म की याचिका खारिज, अब कलेक्टर के सामने रखना होगा पक्ष

    अवैध खनन के आरोपों से जुड़े मामले में संजय पाठक की फर्म की याचिका खारिज, अब कलेक्टर के सामने रखना होगा पक्ष


    जबलपुर। मध्यप्रदेश में कथित अवैध लौह अयस्क खनन से जुड़े मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक से संबंधित एक और फर्म को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जबलपुर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पैसिफिक एक्सपोर्ट की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी। इस याचिका के जरिए फर्म ने जबलपुर कलेक्टर की ओर से जारी 81.73 करोड़ रुपये के रिकवरी नोटिस को चुनौती दी थी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में कार्रवाई करने का अधिकार कलेक्टर के पास है। साथ ही फर्म को अपना पक्ष कलेक्टर के समक्ष रखने की छूट दी गई है। कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वह चार महीने के भीतर मामले का निराकरण करें।
    यह मामला संजय पाठक से संबंधित फर्मों के खिलाफ की जा रही करीब 443 करोड़ रुपये की रिकवरी कार्रवाई से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त देय जीएसटी की वसूली का मामला भी इसमें शामिल बताया गया है। अधिवक्ता पंकज कुमार दुबे के मुताबिक अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामला वर्ष 2004 से 2017 के बीच का है। आरोप है कि इस अवधि में संबंधित फर्मों ने निर्धारित सीमा से अधिक लौह अयस्क का खनन किया था। इसी कथित अतिरिक्त खनन को लेकर प्रशासन की ओर से रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल यह मामला जबलपुर कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन है।
    पैसिफिक एक्सपोर्ट के खिलाफ करीब 81.73 करोड़ रुपये की रिकवरी का मामला है। फर्म के डायरेक्टर सुमित अग्रवाल बताए गए हैं। रिकवरी नोटिस को चुनौती देते हुए फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज करते हुए फर्म को संबंधित प्रशासनिक प्राधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने का विकल्प दिया है। इसका अर्थ है कि अब फर्म को कलेक्टर के समक्ष अपने दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत करनी होंगी। इसके बाद कलेक्टर को निर्धारित समय सीमा के भीतर मामले पर निर्णय लेना होगा।
    इस प्रकरण में इससे पहले भी संजय पाठक से संबंधित एक अन्य फर्म आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी। 8 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज कर दी थी। उस बेंच में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा शामिल थे। अब पैसिफिक एक्सपोर्ट की याचिका खारिज होने के बाद इसी मामले से संबंधित एक और फर्म को प्रशासनिक स्तर पर अपना पक्ष रखना होगा। मामले से जुड़े पांच प्रकरणों में अलग-अलग याचिकाओं पर कार्रवाई की जा रही है।
    सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात भी रखी गई कि पैसिफिक एक्सपोर्ट को वर्ष 2025 से नोटिस जारी किए जा रहे थे और जवाब देने के लिए कई बार समय दिया गया था। इसके बावजूद फर्म की ओर से अब तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही कलेक्टर के समक्ष उपस्थिति दर्ज कराई गई। अदालत ने इसी संदर्भ में फर्म को कलेक्टर के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया और चार महीने में निर्णय लेने के निर्देश जारी किए।
    अधिवक्ता पंकज कुमार दुबे के अनुसार मामला पिछले छह से आठ महीने से लंबित है। उन्होंने कहा कि हस्तक्षेप आवेदन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासकीय राजस्व से जुड़े बड़े मामले में अनावश्यक देरी न हो और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। अब इस पूरे प्रकरण में कलेक्टर की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। चार महीने के भीतर होने वाले निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि रिकवरी संबंधी दावों और फर्म के पक्ष पर प्रशासन क्या निष्कर्ष निकालता है।

  • ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक पसंद बनी मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ 13 नवंबर को छह भाषाओं में सिनेमाघरों में होगी रिलीज

    ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक पसंद बनी मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ 13 नवंबर को छह भाषाओं में सिनेमाघरों में होगी रिलीज

    नई दिल्ली । मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ अब देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। 99वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुनी गई यह फिल्म 13 नवंबर को रिलीज होगी। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि इसकी कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा ‘गोंधल’ के इर्द-गिर्द बुनी गई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी यह फिल्म मराठी के साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में भी प्रदर्शित की जाएगी। इस तरह दर्शक इसे कुल छह भाषाओं में देख सकेंगे।

    ‘गोंधल’ को भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में 18 सितंबर को चुने जाने की घोषणा की गई थी। इस चयन के दौरान फिल्म ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़ा। इसके बाद से ही फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ गई थी। अब सिनेमाघरों में इसकी रिलीज की तारीख सामने आने के बाद दर्शकों को इसकी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का अवसर मिलेगा। फिल्म का निर्माण और निर्देशन संतोष दावखर ने किया है। इसकी पटकथा भी उन्होंने ही लिखी है। फिल्म का निर्माण दावखर फिल्म्स के बैनर तले किया गया है।

    फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। इसमें आधी रात को आयोजित होने वाले पारंपरिक गोंधल समारोह को कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। गोंधल महाराष्ट्र की एक पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे फिल्म में कहानी को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख तत्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी समारोह के दौरान पात्रों के जीवन से जुड़े रहस्य सामने आने लगते हैं और घटनाएं धीरे-धीरे गंभीर मोड़ लेती हैं।

    फिल्म में इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला की भूमिका निभा रही हैं। सुमन की शादी एक अमीर परिवार में होती है, लेकिन वह अपनी जिंदगी से परेशान रहती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है। इस मुलाकात के बाद उसकी जिंदगी में कई बदलाव आते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ रिश्तों की जटिलताएं, धोखे और विश्वासघात जैसे पहलू उभरते हैं। घटनाक्रम धीरे-धीरे हत्या की साजिश तक पहुंच जाता है। रातभर चलने वाला गोंधल समारोह इन घटनाओं को जोड़ने और कहानी के रहस्य को गहरा करने में अहम भूमिका निभाता है।

    ‘गोंधल’ में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर और अनुज प्रभु प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म में कलाकारों के अभिनय के साथ इसकी कहानी और पारंपरिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ग्रामीण महाराष्ट्र का वातावरण और धार्मिक समारोह कथानक को विशिष्ट पहचान देते हैं।फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने संभाली है। वहीं, अमलेंदु चौधरी ने सिनेमैटोग्राफी की है। संगीत और दृश्यांकन के जरिए फिल्म के वातावरण तथा घटनाओं को प्रभावी रूप से पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

    ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद ‘गोंधल’ की पहचान देश के बाहर भी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, फिल्म की अगली महत्वपूर्ण परीक्षा सिनेमाघरों में होगी, जहां दर्शकों की प्रतिक्रिया उसके प्रदर्शन को लेकर तस्वीर साफ करेगी। 13 नवंबर को रिलीज होने वाली यह मराठी थ्रिलर छह भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचेगी। अब देखना होगा कि महाराष्ट्र की पारंपरिक धार्मिक संस्कृति, रहस्य और रिश्तों की उलझनों पर आधारित यह कहानी दर्शकों को कितना प्रभावित करती है।

  • दिल्ली कैपिटल्स को खिताब दिलाने की नई रणनीति, 400 वनडे विकेट लेने वाले चामिंडा वास बने तेज गेंदबाजी कोच

    दिल्ली कैपिटल्स को खिताब दिलाने की नई रणनीति, 400 वनडे विकेट लेने वाले चामिंडा वास बने तेज गेंदबाजी कोच


    नई दिल्ली। आईपीएल 2027 से पहले दिल्ली कैपिटल्स ने अपनी कोचिंग टीम को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। फ्रेंचाइजी ने श्रीलंका के दिग्गज पूर्व तेज गेंदबाज चामिंडा वास को टीम का तेज गेंदबाजी कोच नियुक्त किया है। दिल्ली कैपिटल्स ने शनिवार 17 अक्टूबर को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए इस नियुक्ति की घोषणा की। टीम आगामी सीजन में अपना पहला आईपीएल खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ नई रणनीति पर काम कर रही है। चामिंडा वास जैसे अनुभवी खिलाड़ी के जुड़ने से टीम के गेंदबाजी विभाग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
    दिल्ली कैपिटल्स ने आईपीएल 2027 के लिए अपनी कोचिंग व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को टीम का मुख्य कोच बनाया गया है। वहीं भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह को सहायक कोच और बल्लेबाजी कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब चामिंडा वास को तेज गेंदबाजी कोच नियुक्त किए जाने से टीम का कोचिंग ढांचा और मजबूत दिखाई दे रहा है। फ्रेंचाइजी अनुभवी खिलाड़ियों की मदद से ऐसी टीम तैयार करना चाहती है जो आगामी सीजन में बेहतर प्रदर्शन करते हुए खिताब की चुनौती पेश कर सके।
    दिल्ली कैपिटल्स की ओर से पूर्व भारतीय लेग स्पिनर अमित मिश्रा को स्पिन गेंदबाजी कोच बनाए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। अमित मिश्रा दिल्ली की टीम के लिए खेल चुके हैं और उनके पास आईपीएल क्रिकेट का अच्छा अनुभव है। हालांकि उनकी नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यदि वह भी कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बनते हैं तो टीम के गेंदबाजी विभाग को अनुभव और विशेषज्ञता का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।
    चामिंडा वास का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर बेहद शानदार रहा है। श्रीलंका के इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने अपनी स्विंग और सटीक लाइन लेंथ से दुनिया के कई बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया। उन्होंने 1994 से 2009 के बीच श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करते हुए 111 टेस्ट मैचों में 355 विकेट हासिल किए। वनडे क्रिकेट में उनका प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। वास ने 322 वनडे मुकाबलों में 400 विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा उन्होंने श्रीलंका के लिए छह टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और छह विकेट हासिल किए। आईपीएल में भी वह 13 मैचों में 18 विकेट ले चुके हैं।
    चामिंडा वास 1996 में वनडे विश्व कप जीतने वाली श्रीलंकाई टीम के अहम सदस्य भी रहे हैं। उस ऐतिहासिक जीत ने श्रीलंका को विश्व क्रिकेट में नई पहचान दिलाई थी। वास का अनुभव केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है। वह श्रीलंका और आयरलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के साथ कोच के रूप में भी काम कर चुके हैं। इससे उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाजों को तैयार करने और उनकी तकनीक सुधारने का अनुभव मिला है।
    52 वर्षीय चामिंडा वास की नियुक्ति दिल्ली कैपिटल्स के युवा तेज गेंदबाजों के लिए खास अवसर मानी जा रही है। उनके मार्गदर्शन में गेंदबाज स्विंग नियंत्रण और सही लाइन लेंथ के साथ दबाव में गेंदबाजी करने की बारीकियां सीख सकते हैं। अब देखना होगा कि सौरव गांगुली युवराज सिंह और चामिंडा वास जैसे अनुभवी नामों वाली नई कोचिंग टीम आईपीएल 2027 में दिल्ली कैपिटल्स के प्रदर्शन को किस तरह बदलती है और क्या टीम अपने पहले खिताब के सपने को पूरा कर पाती है।

  • शादीशुदा गुरमीत चौधरी संग किसिंग सीन पर ईशा मालवीय ने तोड़ी चुप्पी।

    शादीशुदा गुरमीत चौधरी संग किसिंग सीन पर ईशा मालवीय ने तोड़ी चुप्पी।

    नई दिल्ली । ईशा मालवीय और गुरमीत चौधरी की आगामी रोमांटिक फिल्म ‘तुम मेरे हो’ रिलीज से पहले ही चर्चा में आ गई है। फिल्म के एक पोस्टर में दोनों कलाकार किस करते नजर आ रहे हैं। इस रोमांटिक तस्वीर के सामने आने के बाद फिल्म की कहानी और कलाकारों के बीच फिल्माए गए अंतरंग दृश्यों को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। खास बात यह है कि गुरमीत चौधरी शादीशुदा हैं और दो जुड़वां बेटियों के पिता हैं। उनकी पत्नी देबिना बनर्जी भी इस फिल्म के निर्माण से जुड़ी हैं।

    फिल्म में अपने सह-कलाकार गुरमीत के साथ किसिंग सीन करने को लेकर ईशा मालवीय ने खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि पोस्टर के लिए अलग से कोई फोटोशूट नहीं किया गया था। इसमें दिखाई देने वाला रोमांटिक पल फिल्म के एक दृश्य से लिया गया है। ईशा के अनुसार, यह सीन कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसके जरिए आकाश तथा तमन्ना के रिश्ते को दिखाया गया है। दोनों किरदार कई परिस्थितियों से गुजरने के बाद किस तरह एक-दूसरे के करीब आते हैं, इसकी झलक इस दृश्य में देखने को मिलती है।

    फिल्म निर्माताओं ने इसी दृश्य को पोस्टर के रूप में दर्शकों के सामने पेश करने का फैसला किया। इसका उद्देश्य फिल्म के रोमांटिक अंदाज और कहानी के भावनात्मक पक्ष की झलक दिखाना है। पोस्टर सामने आने के बाद ईशा और गुरमीत के बीच फिल्माए गए इस दृश्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं।

    ईशा ने स्पष्ट किया कि गुरमीत चौधरी के साथ किसिंग सीन शूट करने में उन्हें कोई खास परेशानी नहीं हुई। उन्होंने गुरमीत को एक बेहतरीन अभिनेता और अच्छा इंसान बताया। ईशा के मुताबिक, ऐसे दृश्यों को सहजता से शूट करने में उनका अपना आत्मविश्वास भी काफी मददगार रहा। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनय के पेशे में आने वाले कलाकारों को इस क्षेत्र के फायदे और चुनौतियों को समझना चाहिए। कलाकारों का काम दर्शकों का मनोरंजन करना है और इसी जिम्मेदारी के साथ वे अपने किरदार निभाते हैं।

    दूसरी ओर, गुरमीत चौधरी ने अंतरंग दृश्यों की शूटिंग के दौरान पेशेवर माहौल और कलाकारों की सहजता को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, किसी भी फिल्म में सबसे अहम उसकी कहानी होती है। कलाकारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने किरदारों की भावनाओं को सही ढंग से समझें और उन्हें पर्दे पर विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करें। फिल्म में ईशा और गुरमीत के अलावा शान आर ग्रोवर, अनुष्का लुहार और रोमांच मेहता सहित अन्य कलाकार भी नजर आएंगे।

    गुरमीत और ईशा के किसिंग पोस्टर को लेकर चर्चा की एक वजह यह भी है कि गुरमीत की पत्नी देबिना बनर्जी खुद इस फिल्म की निर्माता हैं। ऐसे में फिल्म के रोमांटिक दृश्य और पोस्टर दर्शकों के बीच खास दिलचस्पी पैदा कर रहे हैं। हालांकि, ईशा ने अपने बयान में शूटिंग के दौरान किसी विशेष असहजता की बात नहीं कही है। उन्होंने इस दृश्य को कहानी का जरूरी हिस्सा बताया और गुरमीत के साथ काम करने के अनुभव को सहज माना
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    ईशा मालवीय के लिए ‘तुम मेरे हो’ खास फिल्म है, क्योंकि इसके जरिए वह बॉलीवुड में कदम रखने जा रही हैं। फिल्म का निर्देशन आशीष पांडा ने किया है और इसे 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना है। रिलीज के समय फिल्म का मुकाबला आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की ‘उड़ता तीर’ तथा लव रंजन की ‘पहला प्यार दूसरी बार’ से होने वाला है। अब देखना होगा कि रोमांटिक पोस्टर से चर्चा में आई यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों को कितना आकर्षित कर पाती है।

  • मुंबई इंडियंस को 3 IPL ट्रॉफी दिलाने वाले महेला जयवर्धने की विदाई, खराब सीजन के बाद फ्रेंचाइजी का बड़ा फैसला

    मुंबई इंडियंस को 3 IPL ट्रॉफी दिलाने वाले महेला जयवर्धने की विदाई, खराब सीजन के बाद फ्रेंचाइजी का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली। आईपीएल की सबसे सफल टीमों में शामिल मुंबई इंडियंस और महेला जयवर्धने की राहें अलग हो गई हैं। फ्रेंचाइजी और श्रीलंका के पूर्व कप्तान ने आपसी सहमति से हेड कोच के पद से अलग होने का फैसला किया है। जयवर्धने के नेतृत्व में मुंबई इंडियंस ने तीन बार आईपीएल का खिताब अपने नाम किया था। ऐसे में उनका जाना टीम के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पांच बार की आईपीएल चैंपियन मुंबई इंडियंस अब आगामी सीजन से पहले अपने कोचिंग और नेतृत्व ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह फैसला 2026 के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद लिया गया है जिसमें टीम को केवल चार जीत मिलीं और उसे अंक तालिका में नौवें स्थान से संतोष करना पड़ा।
    महेला जयवर्धने का मुंबई इंडियंस के साथ लंबा और सफल जुड़ाव रहा है। उन्होंने वर्ष 2017 में पहली बार टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके मार्गदर्शन में मुंबई इंडियंस ने 2017 में खिताब जीता और इसके बाद 2019 तथा 2020 में लगातार दो बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। लगातार दो आईपीएल खिताब जीतना टीम की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जयवर्धने ने खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने और टीम की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में मुंबई इंडियंस ने कई यादगार मुकाबले खेले और आईपीएल में अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी।
    हेड कोच की जिम्मेदारी से हटने के बाद जयवर्धने ने 2022 से 2024 तक मुंबई इंडियंस के ग्लोबल हेड ऑफ परफॉर्मेंस के रूप में काम किया। इस भूमिका में उन्होंने फ्रेंचाइजी की अंतरराष्ट्रीय टीमों के लिए कोचिंग व्यवस्था स्काउटिंग और रणनीतिक योजनाओं से जुड़े काम संभाले। वर्ष 2024 में वह दो प्लस एक साल के करार के तहत दोबारा मुंबई इंडियंस के हेड कोच बने। 2025 में टीम ने प्लेऑफ तक पहुंचकर अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन 2026 का सीजन उसके लिए बेहद निराशाजनक रहा। चोटों खिलाड़ियों की उपलब्धता से जुड़ी परेशानियों और ड्रेसिंग रूम में कथित असंतोष जैसी चुनौतियों ने टीम के प्रदर्शन को प्रभावित किया। अब फ्रेंचाइजी अगले सीजन से पहले नए कोच की तलाश में जुटी है।
    मुंबई इंडियंस से अलग होने के बाद जयवर्धने ने फ्रेंचाइजी के साथ अपने सफर को याद करते हुए कहा कि यह संगठन एक दशक से भी अधिक समय से उनके जीवन और करियर का खास हिस्सा रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों कोचिंग स्टाफ और प्रशंसकों के सहयोग को अपने अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। जयवर्धने ने नीता अंबानी और आकाश अंबानी का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक उन पर भरोसा जताया और लगातार समर्थन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि टीम के साथ बिताए गए पल और हासिल की गई उपलब्धियां हमेशा उनके लिए खास रहेंगी। उन्होंने भविष्य के लिए मुंबई इंडियंस को शुभकामनाएं भी दीं।
    फ्रेंचाइजी की मालकिन नीता एम अंबानी ने भी जयवर्धने के योगदान की सराहना की। उन्होंने उनके शांत नेतृत्व ईमानदारी और क्रिकेट के प्रति समर्पण को टीम के लिए महत्वपूर्ण बताया। नीता अंबानी के अनुसार जयवर्धने ने मुंबई इंडियंस के साथ अपने लंबे जुड़ाव के दौरान कई यादगार उपलब्धियां हासिल करने में योगदान दिया। फ्रेंचाइजी ने उनके प्रति आभार जताते हुए उनके भविष्य के लिए सफलता और खुशियों की कामना की।
    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुंबई इंडियंस अगले सीजन के लिए किसे अपना नया हेड कोच नियुक्त करेगी। खबरों के मुताबिक फ्रेंचाइजी ने इस पद के लिए कई उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया है और उनके इंटरव्यू की तैयारी की जा रही है। नए कोच के सामने टीम को फिर से मजबूत बनाना और पिछले सीजन की कमजोरियों को दूर करना बड़ी चुनौती होगी। तीन बार चैंपियन बनाने वाले जयवर्धने की विदाई के बाद मुंबई इंडियंस के प्रशंसकों की नजरें अब टीम के अगले फैसले पर टिकी हैं।