Author: bharati

  • उज्जैन: चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर को फंसाने की 'खूनी' साजिश साध्वी मंदाकिनी और साथी पर FIR, बनारस की महिला ने खोली पोल

    उज्जैन: चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर को फंसाने की 'खूनी' साजिश साध्वी मंदाकिनी और साथी पर FIR, बनारस की महिला ने खोली पोल



    उज्जैन। उज्जैन के प्रसिद्ध चारधाम मंदिर के महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद महाराज के खिलाफ रची गई एक खौफनाक साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस साजिश की सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि अखाड़े से निष्कासित साध्वी मंदाकिनी पुरी और उसका साथी घनश्याम पटेल हैं। आरोपियों ने महाराज को ‘हनीट्रैप’ में फंसाकर करोड़ों की वसूली और मंदिर पर कब्जे का प्लान बनाया था, जिसके लिए बाकायदा बनारस से एक महिला को ‘हायर’ किया गया था।

    साजिश: 50 हजार का लालच और ‘अश्लील वीडियो’ का डर
    महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार, साजिश को अंजाम देने के लिए घनश्याम पटेल ने बनारस की एक महिला को 50 हजार रुपये का लालच दिया।महिला को महामंडलेश्वर पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाने के लिए उज्जैन बुलाया गया।जब महिला ने मना किया, तो घनश्याम ने उसके अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी और जबरन उसे उज्जैन आने के लिए बस का टिकट भेजा।

    खुलासा: रंगपंचमी के दिन दत्त अखाड़ा परिसर में जब घनश्याम महिला का ‘झूठा बयान’ रिकॉर्ड कर रहा था, तभी संतों ने उन्हें पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

    महामंडलेश्वर का पक्ष: “मंदिर पर कब्जे की है लड़ाई”
    महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद ने इसे अपनी छवि खराब करने और चारधाम मंदिर पर कब्जा करने की सोची-समझी साजिश बताया है। वहीं, एक अन्य महामंडलेश्वर नर्मदाशंकर ने भी मंदाकिनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने ‘आचार्य महामंडलेश्वर’ बनाने के नाम पर उनसे 8 लाख 90 हजार रुपये की ठगी की है।

    मंदाकिनी पुरी: रसोइए से ‘महामंडलेश्वर’ और फिर जेल तक का सफर
    जांच में साध्वी मंदाकिनी का एक काला अतीत सामने आया है:

    झूठ की बुनियाद: कभी संतों के लिए खाना बनाने वाली ममता जोशी (मंदाकिनी) ने खुद को अविवाहित और करोड़ों की संपत्ति का मालिक बताकर 2016 के सिंहस्थ में महामंडलेश्वर की पदवी हासिल की थी।

    आपराधिक रिकॉर्ड: धोखाधड़ी और उगाही के आरोपों के बाद अखाड़े ने उसे निष्कासित कर दिया था। उस पर जयपुर के एक व्यापारी से हर्बल प्रोडक्ट के नाम पर लाखों की ठगी का भी आरोप है।

    सुसाइड ड्रामा: पदवी छिनने के बाद उसने कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश भी की थी, ताकि सहानुभूति बटोर सके।

    अखाड़ा परिषद का रुख: “संतों को बदनाम करने का ट्रेंड”
    अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने इस घटना पर कड़ा रोष जताया है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ को देखते हुए संतों की आस्था पर चोट पहुँचाने के लिए ऐसे गिरोह सक्रिय हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पुलिस इस पूरे नेटवर्क को चिह्नित कर रही है।

    निष्कर्ष
    “यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि धर्म की आड़ में चल रहे ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ अपराध का उदाहरण है। जहाँ एक तरफ संतों की गरिमा दांव पर थी, वहीं पुलिस और सतर्क साधुओं ने समय रहते इस ‘हनीट्रैप’ का भंडाफोड़ कर एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया।”

    मुख्य कीवर्ड्स (Keywords with Comma)
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  • मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त

    मिडिल ईस्ट जंग तेज: ईरान की चेतावनी‘एक लीटर तेल भी नहीं जाने देंगे’, होर्मुज स्ट्रेट पर नई शर्त




    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष का आज 11वां दिन है और इसी बीच ईरान ने दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अगर हमले जारी रहे तो वह एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नई शर्त भी रख दी है। ईरानी सेना का कहना है कि कुछ देशों के जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा और इसके लिए उन देशों को पहले अपने यहां से अमेरिका और इजराइल के राजदूतों को निकालना होगा।

    तो पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों से सुरक्षा शुल्क यानी सिक्योरिटी टैक्स वसूलने की योजना भी बना रहा है, खासकर उन देशों के जहाजों से जो अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं।

    इसी बीच युद्ध का असर क्षेत्र के दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के अनुसार 2 मार्च से अब तक 80 हजार से ज्यादा सीरियाई नागरिक लेबनान से सीमा पार कर अपने देश वापस लौट चुके हैं। एजेंसी की प्रवक्ता सेलिन श्मिट ने बताया कि इजराइली हमलों के डर से कई परिवार जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर लौटे हैं। अधिकांश लोग बिना सामान लिए ही निकल गए और फिलहाल अपने रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। अभी तक इन लोगों ने आपातकालीन आश्रय की कोई आधिकारिक मांग दर्ज नहीं कराई है।

    युद्ध के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम नहीं चाहता। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान पर हमला करने वालों को ऐसा जवाब दिया जाएगा कि वे दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करें। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को नहीं लगता कि अमेरिका और इजराइल से बातचीत करके यह युद्ध खत्म होगा। उनके मुताबिक ईरान उस स्थिति को खत्म करना चाहता है जिसमें पहले युद्ध होता है, फिर बातचीत और युद्धविराम होता है और कुछ समय बाद फिर से लड़ाई शुरू हो जाती है।

    दूसरी तरफ इराक ने भी इस संघर्ष से दूरी बनाने की कोशिश की है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिका से साफ कहा है कि इराक की जमीन या उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमले के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत के दौरान कही। इराक का कहना है कि वह इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता और अपने क्षेत्र को किसी भी सैन्य टकराव से दूर रखना चाहता है।

    युद्ध के कारण एशिया के कई देशों में भी चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के बाद अब थाईलैंड ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया है। थाई सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश यात्रा पर भी रोक लगा दी है और ऊर्जा बचत के लिए अलग-अलग उपाय लागू किए हैं। पाकिस्तान में भी सरकार ने खर्च कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों को हफ्ते में चार दिन खोलने और आधे कर्मचारियों को घर से काम करने का फैसला किया है। वहीं वियतनाम ने लोगों से ईंधन बचाने की अपील की है और बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट को देखते हुए विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं तथा छुट्टियों की अवधि बढ़ा दी है।

    इस संघर्ष का पर्यावरण पर भी असर दिखने लगा है। पाकिस्तान के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि ईरान में हुए हवाई हमलों के बाद वहां से उठने वाला धुआं और प्रदूषण पाकिस्तान के पश्चिमी इलाकों तक पहुंच सकता है, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के तेल भंडारण ठिकानों पर हमलों के बाद कई शहरों के ऊपर घना काला धुआं छाया हुआ है और वहां सांस लेना मुश्किल हो गया है।

    दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने भी इस स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। कंपनी के सीईओ अमीन नासिर के अनुसार अगर युद्ध जारी रहता है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं बल्कि शिपिंग, बीमा, हवाई यात्रा, खेती और ऑटोमोबाइल जैसे कई उद्योगों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा दुनिया में तेल का भंडार पहले ही पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर के आसपास है, इसलिए सप्लाई में किसी भी बड़ी रुकावट से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    इसी बीच तुर्किये ने भी अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और देश के दक्षिण-पूर्वी इलाके में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया गया है। तुर्किये का कहना है कि हाल की घटनाओं को देखते हुए उसकी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत की जा रही है।

    उधर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना अब तक ईरान के 46 युद्धपोतों को डुबो चुकी है। उनके इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा यह ईरान तय करेगा और अगर हमले जारी रहे तो क्षेत्र से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।

    युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। मिस्र ने घरेलू ईंधन की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण तेल सप्लाई और समुद्री परिवहन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।

    कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। तेल सप्लाई, शरणार्थी संकट, पर्यावरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था—इन सभी पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है और अगर हालात जल्द नहीं संभले तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

  • भोपाल में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष राहटकर करेंगी महिलाओं की जनसुनवाई

    भोपाल में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष राहटकर करेंगी महिलाओं की जनसुनवाई


    भोपाल। महिलाओं से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग सक्रिय हो गया है। इसके तहत आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया राहटकर 11 मार्च 2026 को भोपाल में महिलाओं के साथ जनसुनवाई करेंगी। यह जनसुनवाई दोपहर 1.30 बजे शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई महाविद्यालय पॉलिटेक्निक चौराहा भोपाल में आयोजित की जाएगी।

    इस मौके पर महिलाएं सीधे राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष के समक्ष अपनी समस्याओं और शिकायतों को रख सकेंगी। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं के मामलों का शीघ्र और प्रभावी समाधान हो सके। जिन मुद्दों को सामने रखा जाएगा उनकी जांच और समाधान की कार्रवाई तुरंत शुरू की जाएगी।

    श्रीमती राहटकर ने कहा है कि यह जनसुनवाई महिलाओं के लिए अपने अधिकारों और समस्याओं को सीधे सुनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसमें घरेलू हिंसा उत्पीड़न नौकरी या शिक्षा से जुड़ी समस्याएँ सुरक्षा और समाज में महिला सम्मान से संबंधित मामले शामिल हो सकते हैं।

    आयोग के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे और महिलाओं की शिकायतों को दर्ज करेंगे। आयोग का प्रयास रहेगा कि प्रत्येक शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और उसकी त्वरित कार्रवाई की जाए।

    इस जनसुनवाई का आयोजन महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनकी समस्याओं को सीधे शासन और आयोग तक पहुँचाने के लिए किया गया है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्थानीय मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस जनसुनवाई में शामिल होंगे ताकि इसे व्यापक जनजागरूकता के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती राहटकर का मानना है कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयास से ही नहीं बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।

    जनसुनवाई में उपस्थित महिलाएं सीधे अपने मुद्दे प्रस्तुत कर सकती हैं और आयोग अधिकारियों से मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकती हैं। इससे न केवल तत्काल समस्या का समाधान होगा बल्कि महिलाओं में अपने अधिकारों को समझने और उनका प्रयोग करने की क्षमता भी बढ़ेगी।

    इस तरह की पहल महिलाओं के लिए अपने जीवन और समाज में सम्मानजनक स्थान बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। भोपाल में होने वाली यह जनसुनवाई महिलाओं को अपने मुद्दों को सामने रखने और राष्ट्रीय महिला आयोग से सहायता प्राप्त करने का अवसर देगी।

  • आईपीएल का पहला हिस्सा तय, शुरुआती 20 दिनों का शेड्यूल 12 मार्च तक बीसीसीआई करेगी जारी

    आईपीएल का पहला हिस्सा तय, शुरुआती 20 दिनों का शेड्यूल 12 मार्च तक बीसीसीआई करेगी जारी


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पुष्टि की है कि आईपीएल 2026 के शुरुआती 20 दिनों का शेड्यूल 12 मार्च तक जारी कर दिया जाएगा। बीसीसीआई सचिव Devjit Saikia ने आईएएनएस को बताया, “हम शुरुआती 20 दिनों का शेड्यूल 12 मार्च तक रिलीज करने की योजना बना रहे हैं। शेष मुकाबलों का शेड्यूल बाद में घोषित किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान किसी भी टकराव से बचना है, खासकर पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में होने वाले चुनावों के समय।

    आईपीएल 2026 की सभी टीमों ने शेड्यूल घोषित
    आईपीएल 2026 की सभी टीमों ने शेड्यूल घोषित होने से पहले ही प्री-सीजन तैयारियों की शुरुआत कर दी है। चेन्नई सुपर किंग्स ने 1 मार्च को नवलूर के हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में अभ्यास शुरू किया, जबकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 10 फरवरी को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में छोटा-सा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। गुजरात टाइटंस ने नाथद्वारा के मिराज इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में दो अभ्यास सत्र किए। पंजाब किंग्स फरवरी की शुरुआत में अबू धाबी में अभ्यास कर रही थी और फिलहाल धर्मशाला में प्री-सीजन शिविर जारी है। सनराइजर्स हैदराबाद ने 1 मार्च को अपने घरेलू खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण शुरू किया और मुंबई इंडियंस ने आगामी सीजन के लिए अभ्यास आरंभ कर दिया।

    कोलकाता नाइट राइडर्स 18 मार्च से प्री-सीजन शिविर शुरू करेगी, जबकि राजस्थान रॉयल्स 15 मार्च से जयपुर में अभ्यास शिविर के लिए इकट्ठा होने की उम्मीद है। दिल्ली कैपिटल्स ने हाल ही में हैदराबाद में पहला शिविर आयोजित किया और आगे दिल्ली में दूसरा शिविर संभावित है। लखनऊ सुपर जायंट्स ने लखनऊ में अपना तैयारी सत्र पहले ही पूरा कर लिया है।

    तैयारी और रणनीति का महत्व
    टीमों ने प्री-सीजन प्रशिक्षण शिविरों में फिटनेस, तकनीक और रणनीति पर खास ध्यान दिया है। बीसीसीआई के अनुसार, शुरुआती 20 दिनों के शेड्यूल के बाद टीमों को अपनी गेम प्लान के अनुसार तैयारियां अंतिम रूप देने का मौका मिलेगा।

    फुटबॉल से लेकर क्रिकेट तक, प्री-सीजन तैयारी टीमों की सफलता में अहम भूमिका निभाती है। आईपीएल 2026 में भी यह रणनीति खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस और मुकाबलों के परिणाम पर असर डालेगी।

    आईपीएल 2026 का यह सीजन दर्शकों के लिए रोमांचक मुकाबले और नई रणनीतियों का मौका लेकर आएगा। 12 मार्च के बाद शेड्यूल जारी होने के साथ ही फैंस अपने पसंदीदा मैचों की तारीखें और स्थान जान सकेंगे, जिससे रोमांच और उत्साह और भी बढ़ जाएगा।

  • आईपीएल इतिहास के 5 सबसे बड़े रन मशीन, जिन्होंने बनाए सबसे ज्यादा रन

    आईपीएल इतिहास के 5 सबसे बड़े रन मशीन, जिन्होंने बनाए सबसे ज्यादा रन


    नई दिल्ली। दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी20 लीग Indian Premier League में अब तक 18 सीजन खेले जा चुके हैं। इस दौरान कई महान बल्लेबाजों ने अपने शानदार प्रदर्शन से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता है।

    आईपीएल के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की बात करें तो इस सूची में भारतीय खिलाड़ियों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिलता है। टॉप-5 बल्लेबाजों में चार खिलाड़ी भारत के हैं, जबकि सिर्फ एक विदेशी खिलाड़ी इस सूची में जगह बना पाया है। आइए जानते हैं आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले इन पांच दिग्गज बल्लेबाजों के बारे में।

    1. विराट कोहली – आईपीएल के सबसे बड़े रन-मशीन
    आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड Virat Kohli के नाम है। कोहली ने अपने पूरे आईपीएल करियर में सिर्फ Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया है।

    कोहली अब तक 267 मैच खेल चुके हैं और उन्होंने 39.54 की औसत से 8,661 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 8 शतक और 63 अर्धशतक निकले हैं। इसके अलावा उन्होंने 291 छक्के और 771 चौके भी लगाए हैं। कोहली की लगातार रन बनाने की क्षमता ने उन्हें आईपीएल इतिहास का सबसे सफल बल्लेबाज बना दिया है।

    2. रोहित शर्मा – शानदार रिकॉर्ड के साथ दूसरे स्थान पर
    भारतीय कप्तान Rohit Sharma इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 2008 से अब तक आईपीएल में दो टीमों के लिए खेलते हुए शानदार बल्लेबाजी की है।

    रोहित ने अब तक 29.73 की औसत से 7,046 रन बनाए हैं। उनके नाम 2 शतक और 47 अर्धशतक दर्ज हैं। इसके अलावा उन्होंने 302 छक्के और 640 चौके भी लगाए हैं। रोहित की विस्फोटक बल्लेबाजी और बड़े मैचों में प्रदर्शन उन्हें आईपीएल के महान बल्लेबाजों में शामिल करता है।

    3. शिखर धवन – लगातार रन बनाने वाले भरोसेमंद बल्लेबाज
    बाएं हाथ के दिग्गज बल्लेबाज Shikhar Dhawan इस सूची में तीसरे स्थान पर आते हैं। उन्होंने 2008 से 2024 के बीच आईपीएल में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया।

    धवन ने 222 मैचों में 35.25 की औसत से 6,769 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 2 शतक और 51 अर्धशतक लगाए। उनके बल्ले से 152 छक्के और 768 चौके भी निकले हैं। धवन अपनी आक्रामक शुरुआत और स्थिर बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं।

    4. डेविड वॉर्नर – टॉप-5 में शामिल एकमात्र विदेशी खिलाड़ी
    ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज David Warner इस सूची में चौथे स्थान पर हैं और टॉप-5 में शामिल एकमात्र विदेशी खिलाड़ी भी हैं।

    वॉर्नर ने 2009 से 2024 के बीच 184 मैच खेले और 40.52 की शानदार औसत से 6,565 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 4 शतक और 62 अर्धशतक निकले। उन्होंने आईपीएल में 236 छक्के और 663 चौके भी लगाए हैं। वॉर्नर की आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें लीग के सबसे सफल विदेशी खिलाड़ियों में शामिल किया है।

    5. सुरेश रैना – मिस्टर आईपीएल का दमदार रिकॉर्ड
    पूर्व भारतीय क्रिकेटर Suresh Raina को अक्सर “मिस्टर आईपीएल” कहा जाता है और वे इस सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

    रैना ने 2008 से 2021 के बीच 205 मैच खेले और 32.51 की औसत से 5,528 रन बनाए। उनके बल्ले से 1 शतक और 39 अर्धशतक निकले। इसके अलावा उन्होंने 203 छक्के और 506 चौके भी लगाए। रैना लंबे समय तक आईपीएल के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक रहे और उन्होंने कई मैचों में अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • कंस्ट्रक्शन साइट पर 7 श्रमिकों की मौत से हड़कंप, सिग्नेचर ग्लोबल को भेजा गया नोटिस

    कंस्ट्रक्शन साइट पर 7 श्रमिकों की मौत से हड़कंप, सिग्नेचर ग्लोबल को भेजा गया नोटिस


    नई दिल्ली। हरियाणा के Gurugram में एक निर्माण स्थल पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद रियल एस्टेट कंपनी Signature Global को पुलिस ने नोटिस जारी किया है। इस हादसे में सात श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य मजदूर घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद कंपनी से जवाब मांगा गया है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मृतक श्रमिकों के परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

    प्रशासन की प्राथमिकता: परिवारों को मुआवजा और मदद
    गुरुग्राम के असिस्टेंट कमिश्नर Anil Sharma ने बताया कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपना और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने कहा कि कंपनी से मुआवजे के चेक प्राप्त कर उन्हें मृतक मजदूरों के परिवारों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही पूरे मामले की कानूनी जांच भी की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    खुदाई के दौरान अचानक धंसी मिट्टी
    यह हादसा सोमवार शाम करीब 7 बजे Sidhrawali क्षेत्र में Delhi–Jaipur Highway के पास स्थित एक निर्माण स्थल पर हुआ। अधिकारियों के मुताबिक खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    सात मजदूरों की मौत, चार घायल
    इस दुर्घटना में सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। घायल मजदूरों को इलाज के लिए Bhiwadi के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीन मजदूरों का इलाज जारी है। अधिकारियों के मुताबिक घायलों में से तीन मजदूर नेपाल के रहने वाले हैं।

    मृतकों में झारखंड और राजस्थान के मजदूर
    पुलिस के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सात मजदूरों में से छह झारखंड के रहने वाले थे, जबकि एक मजदूर राजस्थान का निवासी था। अधिकारियों ने बताया कि सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए गुरुग्राम भेजा जा रहा है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव उनके परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।

    लापरवाही की जांच, सख्त कार्रवाई के संकेत
    गुरुग्राम पुलिस ने बताया कि इस मामले में कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि चूंकि हादसा हरियाणा के अधिकार क्षेत्र में हुआ है, इसलिए इस मामले की कानूनी कार्रवाई भी Haryana में ही की जाएगी।

  • मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया

    मंत्री परमार ने चित्रकूट के पंचवटी घाट पर किया श्रमदान, मां मंदाकिनी नदी को स्वच्छ रखने का संदेश दिया


    भोपाल । चित्रकूट की पवित्र घाटियों में सोमवार को एक जीवंत दृश्य देखने को मिला जब उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने पंचवटी घाट पर माँ मंदाकिनी नदी के स्वच्छता अभियान में स्वयं हाथ बंटाया। मंत्री ने घाट परिसर में सफाई करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को स्वच्छता के महत्व की याद दिलाई और जनभागीदारी की प्रेरणा दी।

    मंत्री परमार ने कहा कि चित्रकूट धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहाँ बहने वाली माँ मंदाकिनी नदी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसकी स्वच्छता बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही सफल होने वाला एक जनआंदोलन है।

    घाट परिसर में पहुंचे सभी लोगों के साथ मिलकर मंत्री ने कचरा एकत्रित किया आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित किया और लोगों से आग्रह किया कि वे नदी में कोई कचरा न डालें। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय समुदाय प्रशासन और आगंतुकों का सहयोग ही स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक पर्यावरण सुनिश्चित कर सकता है।

    इस अवसर पर जनप्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर माँ मंदाकिनी की स्वच्छता के लिए श्रमदान किया और इस पहल का उत्साहजनक समर्थन किया। मंत्री परमार ने आशा जताई कि इस प्रकार के अभियान स्थानीय लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को बढ़ाएंगे।

    मंत्री ने यह भी कहा कि स्वच्छता के लिए छोटे छोटे प्रयास भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। नदी और घाट का पर्यावरण केवल प्रशासनिक कर्मियों का कार्यक्षेत्र नहीं बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखें और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं।

    इस मौके पर उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि इस तरह के अभियान धार्मिक स्थलों की साफ सफाई के साथ साथ स्थानीय पर्यटन और स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि पंचवटी घाट जैसे धार्मिक स्थल स्वच्छ रहेंगे तो वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अनुभव भी सकारात्मक होगा।

    घाट पर श्रमदान करते हुए मंत्री परमार ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का काम केवल सरकार के हाथ में नहीं छोड़ना चाहिए। हर नागरिक की भागीदारी से ही माँ मंदाकिनी और अन्य नदियों का जल स्वच्छ और सुरक्षित रहेगा। यह कदम चित्रकूट के धार्मिक और सामाजिक जीवन में स्वच्छता के प्रति नई चेतना का प्रतीक बन गया है।

  • ग्वालियर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव: गिरवाई में पुलिस और भीड़ आमने-सामने, हालात काबू करने के लिए किया गया बल प्रयोग

    ग्वालियर में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव: गिरवाई में पुलिस और भीड़ आमने-सामने, हालात काबू करने के लिए किया गया बल प्रयोग




    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम पर भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसके बाद स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। घटना शहर के Girwai इलाके की बताई जा रही है। विवाद बढ़ने पर पुलिस को हालात नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के मुताबिक तहसीलदार न्यायालय द्वारा एक जमीन पर बेदखली का आदेश जारी किया गया था। इसी आदेश का पालन कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची थी। प्रशासन की टीम का उद्देश्य जमीन से अतिक्रमण हटाकर उसे खाली कराना था।

    बताया जा रहा है कि उस जमीन पर कुछ लोग लंबे समय से मकान बनाकर रह रहे थे। जैसे ही प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, वहां मौजूद लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह विरोध उग्र हो गया और मौके पर मौजूद भीड़ ने पुलिस और प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू कर दिया।

    पथराव के बाद स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। वायरल वीडियो में पुलिस और भीड़ के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति भी दिखाई दे रही है। कुछ वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज करते हुए भी देखा जा सकता है, जिसमें महिलाओं के साथ भी सख्ती बरतने के आरोप सामने आए हैं।

    घटना के दौरान इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हालात पर काबू पा लिया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और पथराव करने वालों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

    प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए ही यह कार्रवाई की जा रही थी। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय दिए बिना अचानक कार्रवाई की गई, जिसके कारण विवाद की स्थिति बनी।

    फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि दोबारा किसी तरह की अशांति न फैले।

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  • फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल

    फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि भारत का खाद्य और कृषि उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और अब यह सालाना करीब 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की कृषि क्षमता और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
    नई दिल्ली में आयोजित Aahar – The International Food and Hospitality Fair के 40वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उन्होंने खाद्य, कृषि और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के लोगों से अपील की कि वे मिलकर भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बनाने की दिशा में काम करें। गोयल ने कहा कि सरकार की नीतियां, बढ़ते व्यापार समझौते और वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग इस दिशा में बड़े अवसर पैदा कर रही हैं।

    कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में तेज उछाल
    मंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों यानी 2014 से 2025 के दौरान भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना, फल और दालों का निर्यात तीन गुना और प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात चार गुना बढ़ा है। इसके अलावा कोको का निर्यात तीन गुना और अनाज का निर्यात दोगुना हो गया है। वहीं चावल का निर्यात भी इस अवधि में करीब 62 प्रतिशत बढ़ा है। गोयल ने कहा कि इन उपलब्धियों ने भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों की कतार में ला खड़ा किया है। वर्तमान में भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आगे और बड़ी संभावनाओं का संकेत देती है।

    ‘दुनिया की फूड बास्केट’ बनने की दिशा में भारत
    गोयल ने कहा कि भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में दुनिया में शीर्ष स्थान दिलाने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस विजन से जुड़ा है, जिसमें भारत को “दुनिया की फूड बास्केट” बनाने की बात कही गई है।
    उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों, उद्यमियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को मिलकर काम करना होगा। यदि उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।

    व्यापार समझौतों से खुले नए वैश्विक बाजार
    मंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिनके जरिए 38 विकसित और समृद्ध देशों के बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुले हैं और भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन से तेजी से जुड़ रही हैं।
    उन्होंने कहा कि आज भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिक बाजार पहुंच प्राप्त है। इससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन रहा है और निर्यात के नए रास्ते खुल रहे हैं।

    किसानों और एमएसएमई के हितों की सुरक्षा
    गोयल ने स्पष्ट किया कि एफटीए वार्ताओं के दौरान सरकार ने किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह जीन संशोधित (GM) उत्पादों को भी शुल्क में छूट या बाजार तक पहुंच नहीं दी गई है। इसके अलावा चावल, गेहूं, मक्का, सोया मील और कई तरह की दालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को भी व्यापार समझौतों में सुरक्षित रखा गया है। वहीं चीनी क्षेत्र में भी आम तौर पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि विदेशी आयात से भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।

    एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से बढ़ेगा वैल्यू एडिशन
    मंत्री ने किसानों और उद्यमियों से Agriculture Infrastructure Fund के 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने से किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है।
    उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में छोटे उद्यम भी फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    आहार मेले में पहली बार इटली बना पार्टनर देश
    गोयल ने बताया कि इस वर्ष आयोजित आहार फूड एंड हॉस्पिटैलिटी फेयर में Italy को पहली बार पार्टनर देश बनाया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 13 मार्च और शनिवार को यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खासकर युवाओं को भारत और दुनिया के फूड, बेवरेज और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ताकत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के टूरिज्म सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों लोगों ने फिलहाल अपने ट्रैवल प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की संभावना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी या नई बुकिंग ही नहीं कराई।

    ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip की भोपाल लोकेशन हेड Richa Singh Bhadauria के मुताबिक लगभग 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले से फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जो सीधे प्रभावित हुए हैं। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने अनिश्चित हालात को देखते हुए अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं। हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल ट्रैवल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पर्यटन कारोबार में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है।

    60 करोड़ का संभावित कारोबार अटका
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का होता है। यदि 60 हजार रुपए का औसत और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपए का संभावित ट्रैवल कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि सभी मामलों में पूरी राशि का नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दे रही हैं।

    60–70% यात्रियों को मिला पूरा रिफंड
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार प्रभावित बुकिंग्स में से लगभग 60 से 70 प्रतिशत यात्रियों को पूरा रिफंड मिल गया है। ऐसा उन मामलों में हुआ जहां एयरलाइंस ने खुद फ्लाइट रद्द की या शेड्यूल बदला। वहीं करीब 15 से 25 प्रतिशत यात्रियों को आंशिक नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से वीजा फीस, होटल कैंसिलेशन पॉलिसी या नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण हुआ। कई यात्रियों ने रिफंड लेने के बजाय भविष्य के लिए ट्रैवल क्रेडिट या क्रेडिट शेल का विकल्प चुना है।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा कैंसिलेशन
    ट्रैवल ट्रेड के अनुभव के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी कुछ प्रभाव देखा गया है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं बल्कि धीमी पड़ गई हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी 30–40% गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री अपनी यात्रा पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा प्रभावित
    मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर लीजर ट्रैवल सेगमेंट पर पड़ा है, जिसमें फैमिली हॉलीडे, हनीमून ट्रिप और ग्रुप टूर शामिल हैं। इसके मुकाबले कॉर्पोरेट ट्रैवल अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, क्योंकि बिजनेस मीटिंग और काम से जुड़े यात्राओं को पूरी तरह टालना कई बार संभव नहीं होता।

    एयरलाइंस दे रही लचीले विकल्प
    मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियां क्रेडिट शेल की वैधता बढ़ा रही हैं, जबकि कई एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तारीख पर रीबुकिंग की सुविधा दे रही हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री का फोकस फिलहाल यात्रियों का भरोसा बनाए रखने और सुरक्षित समय पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

    तनाव लंबा चला तो बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का मानना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है, क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है, तो इंटरनेशनल टूरिज्म में गिरावट और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों की मांग फिर तेजी से वापस लौट सकती है।

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