Author: bharati

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार, 4865 युवाओं को गांवों में मिलेगी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री Chaitanya Kashyap ने बताया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि स्वामित्व को मजबूत करने और योजनाओं की निगरानी बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठा रही है।

    46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी
    कैबिनेट ने फैसला लिया है कि SVAMITVA Yojana के तहत प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क राज्य सरकार खुद वहन करेगी। इस निर्णय से सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।

    इस योजना की शुरुआत Ministry of Panchayati Raj ने वर्ष 2020 में की थी। इसके तहत ड्रोन तकनीक से गांवों की आबादी वाली जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाते हैं। इससे ग्रामीणों को कानूनी स्वामित्व मिलता है, भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से लोन लेने में भी आसानी होती है।

    योजनाओं का फीडबैक लेने नया कार्यक्रम
    कैबिनेट ने योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए “सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम” शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा।

    इसके तहत प्रदेश के हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा और कुल 4865 युवाओं को गांवों में तैनात किया जाएगा। चयन प्रक्रिया Atal Bihari Vajpayee School of Good Governance and Policy Analysis के माध्यम से होगी।

    युवाओं को मिलेगा मानदेय
    चयनित युवाओं को 10 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा और उन्हें एक साल के अनुबंध पर रखा जाएगा। इस पूरी योजना पर तीन साल में लगभग 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने-अपने विकासखंड में चल रही सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति का अध्ययन और फीडबैक रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के जरिए मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए विशेष डैशबोर्ड और डिजिटल पोर्टल भी बनाया जाएगा।

    2031 तक जारी रहेंगी कई योजनाएं
    कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

    इनमें महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग की योजनाएं, छात्रवृत्ति कार्यक्रम, आरडीएसएस योजना, दिव्यांगजनों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

    स्वास्थ्य केंद्रों में होगी भर्ती
    कैबिनेट ने मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती को मंजूरी दी है। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। साथ ही चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी मंजूरी दी गई है।

    ‘एक जिला-एक उत्पाद’ को बढ़ावा
    राज्य सरकार ने One District One Product योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे।

    कैबिनेट बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा
    बैठक से पहले कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। सरकार ने गेहूं की खरीदी के लिए MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल पर 40 रुपये बोनस जोड़कर 2625 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद का फैसला किया। वहीं उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय भी लिया गया।

    इसके अलावा मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल Pachmarhi को जर्मनी द्वारा “ग्रीन डेस्टिनेशन” प्रमाणन मिलने को प्रदेश के पर्यटन के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया।

  • कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश

    कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act (ईसीए) के तहत अहम आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के तहत घरेलू रसोई के लिए Piped Natural Gas (PNG), परिवहन के लिए Liquefied Petroleum Gas (LPG) और Compressed Natural Gas (CNG) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ी चिंता
    सरकार के आकलन के अनुसार मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते आने वाले Liquefied Natural Gas (LNG) के शिपमेंट में बाधा आई है। कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर की घोषणा भी की है, जिसके तहत सीमित आपूर्ति को पहले प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।

    रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
    सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को भी एलपीजी पूल में भेजने के लिए कहा गया है, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति तय
    आदेश के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्र-2 में आने वाले उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत के 70 प्रतिशत तक सुनिश्चित की जाएगी।

    साथ ही यह भी कहा गया है कि इन संयंत्रों को गैस का इस्तेमाल केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही करना होगा। इसके लिए उन्हें प्रमाण पत्र Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) को जमा करना होगा।

    उद्योगों को भी सीमित आपूर्ति जारी रहेगी
    गैस मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि प्राथमिकता क्षेत्र-1 में आने वाले चाय उद्योग, विनिर्माण इकाइयों और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से गैस की आपूर्ति जारी रखी जाए।

    इन उपभोक्ताओं को परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सिटी गैस नेटवर्क को भी निर्देश
    आदेश में यह भी कहा गया है कि City Gas Distribution (CGD) नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनियां अपने नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराएं।

    सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति में संभावित संकट के बीच घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि आम लोगों की रसोई और जरूरी उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े।

  • सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन

    सास बहू से देवरानी जेठानी तक: रिश्तों की साझेदारी से चमक रहा छिंदवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन


    छिंदवाड़ा । छिंदवाड़ा जिले के पर्यटन ग्राम धीरे धीरे एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। सास बहू मां बेटी या देवरानी जेठानी जैसे रिश्ते अब केवल पारिवारिक संबंध नहीं बल्कि ग्रामीण पर्यटन की नई ताकत बन गए हैं। ग्राम धूसावानी में श्रीमती मनेशी धुर्वे और उनकी सास श्रीमती अलका धुर्वे इस बदलाव की मिसाल हैं। दोनों मिलकर अपने होम स्टे में पर्यटकों का स्वागत करती हैं भोजन तैयार करती हैं और पूरे उत्साह के साथ मेहमाननवाजी करती हैं।

    सावरवानी गांव में भी श्रीमती मालती यदुवंशी अपनी सास श्रीमती शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम स्टे का संचालन कर रही हैं। यह केवल दो परिवारों की कहानी नहीं बल्कि पूरे जिले में ग्रामीण पर्यटन में महिलाओं की भागीदारी की एक जीवंत तस्वीर है। इन होम स्टे से महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता तो मिल रही है साथ ही रिश्तों में विश्वास और सहयोग का नया आयाम भी देखने को मिल रहा है।

    छिंदवाड़ा जिला अब मध्यप्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहाँ सबसे अधिक होम स्टे संचालित हैं। जिले में लगभग 50 से अधिक होम स्टे हैं और इन सबका पंजीकरण महिलाओं के नाम पर है। संचालन की ज़िम्मेदारी भी अधिकांशतः महिलाएं ही संभालती हैं। सावरवानी चोपना काजरा देवगढ़ चिमटीपुर गुमतरा और धूसावानी जैसे पर्यटन ग्रामों में महिलाएं स्थानीय संस्कृति खानपान और आतिथ्य के हर पहलू को संभाल रही हैं।

    पर्यटक इन होम स्टे में आने पर केवल ठहरने नहीं आते बल्कि ग्रामीण जीवन और संस्कृति के करीब से अनुभव करते हैं। महिलाएं पर्यटकों के लिए पारंपरिक व्यंजन तैयार करती हैं लोकनृत्य और लोकगायन से उन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इससे पर्यटकों को ग्रामीण अनुभव मिलता है और महिलाओं को आर्थिक सम्मान भी प्राप्त होता है।

    सास बहू मां बेटी देवरानी जेठानी जैसे रिश्तों की यह साझेदारी ग्रामीण पर्यटन के लिए नई पहचान बन गई है। महिलाएं स्वागत से लेकर भोजन आवास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रबंधन तक पूरी जिम्मेदारी लेती हैं। यह पहल साबित कर रही है कि परिवार की महिलाएं मिलकर केवल घर ही नहीं बल्कि पूरे गांव की विकास यात्रा को आगे बढ़ा सकती हैं।

    स्थानीय लोग मानते हैं कि होम स्टे की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ साथ पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ा रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों का और विस्तार होने की संभावनाएं भी उज्ज्वल दिखाई दे रही हैं। छिंदवाड़ा का यह ग्रामीण पर्यटन मॉडल यह दिखाता है कि रिश्तों का सहयोग और विश्वास नई आर्थिक और सामाजिक दिशा में कैसे बदल सकता है।

  • भारत में नौकरियों की बहार! अप्रैल-जून में हायरिंग आउटलुक 68% के रिकॉर्ड स्तर पर

    भारत में नौकरियों की बहार! अप्रैल-जून में हायरिंग आउटलुक 68% के रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्ली। वैश्विक मानव संसाधन कंपनी ManpowerGroup की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में कंपनियां कर्मचारियों की भर्ती को लेकर काफी आशावादी हैं। 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए Net Employment Outlook (NEO) बढ़कर 68 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 17 प्रतिशत अंक और पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 24 प्रतिशत अंक अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद और Goods and Services Tax (GST) के तहत हुए सुधारों से कंपनियों को फायदा मिल रहा है, जिससे नई भर्तियों की योजना तेज हुई है।

    फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में सबसे ज्यादा अवसर
    रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में भर्ती का आउटलुक सबसे मजबूत रहा, जो 71 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 8 अंक और सालाना आधार पर 26 अंक की बढ़ोतरी दर्शाता है। इससे संकेत मिलता है कि वित्तीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में नौकरी के अवसर तेजी से बढ़ सकते हैं।

    यूटिलिटीज और नेचुरल रिसोर्सेज में भी बड़ा उछाल
    यूटिलिटीज और नेचुरल रिसोर्सेज सेक्टर में तिमाही आधार पर सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस सेक्टर का आउटलुक 22 अंक बढ़कर चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह 2021 की चौथी तिमाही के बाद इस क्षेत्र का सबसे मजबूत भर्ती संकेत है।

    हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भर्ती धीमी
    दूसरी ओर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भर्ती का आउटलुक सबसे कम 31 प्रतिशत रहा। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र की कंपनियां फिलहाल भर्ती को लेकर कुछ सतर्क बनी हुई हैं।

    ऑटो और आईटी सेक्टर में नौकरियों की ज्यादा उम्मीद
    रिपोर्ट के अनुसार नई नौकरियों के मामले में ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद आईटी और आईटी सर्विसेज सेक्टर का स्थान है, जहां कंपनियां बड़े पैमाने पर भर्ती की योजना बना रही हैं।

    कंपनियों को कुशल कर्मचारियों की कमी
    Sandeep Gulati ने कहा कि 2026 की दूसरी तिमाही के आंकड़े एक मिश्रित स्थिति दिखाते हैं।
    एक तरफ कंपनियां भर्ती को लेकर काफी उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर योग्य और कुशल प्रतिभा की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 82 प्रतिशत कंपनियों को जरूरत के मुताबिक योग्य कर्मचारी ढूंढने में कठिनाई हो रही है।

    उत्तर भारत में सबसे ज्यादा भर्ती की उम्मीद
    क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो भारत के उत्तरी क्षेत्र में भर्ती का आउटलुक सबसे मजबूत रहा, जहां NEO करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं पूर्वी क्षेत्र में तिमाही आधार पर सबसे तेज सुधार देखने को मिला है, जहां उम्मीदें 20 अंक बढ़ गई हैं। यह 2012 की तीसरी तिमाही के बाद इस क्षेत्र का सबसे ऊंचा स्तर है।

    एआई का बढ़ रहा इस्तेमाल
    रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 87 प्रतिशत कंपनियां भर्ती, ऑनबोर्डिंग और ट्रेनिंग की प्रक्रिया में Artificial Intelligence (AI) का इस्तेमाल कर रही हैं।

    एशिया-प्रशांत क्षेत्र में AI अपनाने की औसत दर करीब 80 प्रतिशत है। इस मामले में China 95 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है, जबकि India दूसरे स्थान पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में AI और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से भर्ती की प्रक्रिया और तेज तथा प्रभावी हो सकती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों पर्यटकों ने फिलहाल अपने प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने यात्रा टाल दी है।

    हजारों बुकिंग प्रभावित, कई यात्रियों ने नए प्लान ही नहीं बनाए
    ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक करीब 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले ही फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जिन पर सीधे असर पड़ा है। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने हालात को देखते हुए नई बुकिंग ही नहीं कराई या अपनी यात्रा संबंधी पूछताछ वापस ले ली। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ट्रैवल इंडस्ट्री में साफ तौर पर मंदी का संकेत दिखाई देने लगा है।

    करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का होता है। अगर औसत 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड, क्रेडिट शेल या रीबुकिंग का विकल्प दे रही हैं, जिससे पूरा नुकसान नहीं माना जा रहा।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा असर
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से बुकिंग कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी प्रभाव है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह रुकी नहीं हैं बल्कि धीमी पड़ी हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी आई गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री क्रूज ट्रिप रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    घरेलू पर्यटन की ओर बढ़ा रुझान
    अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अब कई यात्री घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में हिमाचल, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थलों के लिए पूछताछ बढ़ी है। जो परिवार पहले दुबई या यूरोप की योजना बना रहे थे, वे अब भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

    साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्प
    मिडिल ईस्ट के विकल्प के रूप में अब यात्रियों का रुझान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर भी बढ़ रहा है। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए इंक्वायरी बढ़ने लगी है। आसान वीजा प्रक्रिया और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल के कारण पर्यटक इन्हें बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

    अगर तनाव लंबा चला तो और बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर और बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों का भरोसा लौटेगा और पर्यटन बाजार फिर तेजी से उभर सकता है।

  • शेयर बाजार में शानदार रैली! सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    शेयर बाजार में शानदार रैली! सेंसेक्स 650 अंक चढ़ा, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें


    नई दिल्ली। मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई। सुबह करीब 11:45 बजे BSE Sensex 668 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,224 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 भी 198 अंक या 0.85 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,225 के स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में यह तेजी कई घरेलू और वैश्विक कारणों के चलते देखने को मिल रही है, जिनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों का सकारात्मक रुख प्रमुख हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी
    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Midcap 100 Index 721 अंक यानी 1.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 56,892 पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 Index 274 अंक या 1.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 16,406 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी हो रही है और निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहारा
    भारतीय बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को माना जा रहा है। Brent Crude की कीमत करीब 6 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है।

    गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में आई तेज गिरावट से ऊर्जा लागत कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिला है।

    ट्रंप के बयान से कम हुआ भू-राजनीतिक तनाव
    कच्चे तेल में आई गिरावट के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का बयान भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि Iran के साथ चल रहा युद्ध समाप्त होने के करीब है।

    इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद बनी, जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई और इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर पड़ा।

    रुपये की मजबूती से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
    शेयर बाजार में तेजी का एक कारण डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा की मजबूती भी है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत दिखाई दिया।

    कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये का उच्चतम स्तर 91.72 और न्यूनतम स्तर 92.33 रहा। मजबूत रुपये से आयात लागत कम होने की उम्मीद रहती है, जिससे बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बनता है।

    इंडिया विक्स में गिरावट से घटा बाजार का डर
    बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला India VIX भी मंगलवार को तेजी से नीचे आया। खबर लिखे जाने तक यह करीब 15.37 प्रतिशत गिरकर 19.77 पर पहुंच गया था। इंडिया विक्स में गिरावट का मतलब है कि बाजार में डर कम हो रहा है और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है, जो शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।

    वैश्विक बाजारों से भी मिला समर्थन
    वैश्विक बाजारों में तेजी का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। एशिया के प्रमुख बाजार जैसे Nikkei 225, Shanghai Composite Index और Hang Seng Index बढ़त के साथ खुले।

    इसके अलावा सोल, बैंकॉक और जकार्ता के बाजारों में भी मजबूती देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और भारतीय शेयर बाजार को भी सहारा मिला।

  • इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

    इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

    भोपाल । भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है जहां कथित फर्जी सेल डीड के आधार पर मसूद और अमन एजुकेशन सोसाइटी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी। हाईकोर्ट ने पहले पुलिस कमिश्नर को मसूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर शामिल थे ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार का जवाब आए बिना ऐसा अंतरिम आदेश देना उचित नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए सख्त निर्देश पहली नजर में उचित नहीं लगते।

    आरिफ मसूद की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने की। तंखा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने ही एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए सभी पक्ष जल्द अपनी दलीलें प्रस्तुत करें। इसके बाद ही हाईकोर्ट मामले में मेरिट के आधार पर निर्णय लेगा।

    मामला इस प्रकार शुरू हुआ कि मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने 9 जून 2025 को इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी। कॉलेज का संचालन अमन एजुकेशन सोसाइटी करती है और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस सोसाइटी के सचिव हैं। मसूद ने मान्यता रद्द होने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

    पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच के दौरान आयुक्त उच्च शिक्षा ने पाया कि अमन एजुकेशन सोसाइटी ने कॉलेज के संचालन के लिए फर्जी दस्तावेजों पर एनओसी और मान्यता ली थी। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सेल डीड तैयार करवाई गई और इसे पंजीयन कार्यालय में फर्जी तरीके से दर्ज किया गया।

    इस मामले से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई थी क्योंकि मसूद कांग्रेस विधायक हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूद को फिलहाल कानूनी राहत मिल गई है लेकिन हाईकोर्ट में मामला अब भी लंबित है और वहीं अंतिम निर्णय होगा।

    राजनीतिक और शिक्षा जगत दोनों में इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बिना पक्षकार की सुनवाई के सख्त आदेश देना न्यायसंगत नहीं होता जिससे राज्य के प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। अब हाईकोर्ट मामले में दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर निर्णय करेगा।

  • मेक इन इंडिया को बढ़ावा, एप्पल ने भारत में 53% बढ़ाया उत्पादन; हर चौथा iPhone यहीं बन रहा

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा, एप्पल ने भारत में 53% बढ़ाया उत्पादन; हर चौथा iPhone यहीं बन रहा


    नई दिल्ली। अमेरिकी टेक्नोलॉजी दिग्गज Apple ने भारत में अपने उत्पादन को तेजी से बढ़ाते हुए 2025 में आईफोन निर्माण में बड़ा विस्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने इस दौरान भारत में करीब 5.5 करोड़ आईफोन यूनिट्स की असेंबली की, जो पिछले वर्ष के 3.6 करोड़ यूनिट्स के मुकाबले लगभग 53 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि एप्पल अब वैश्विक सप्लाई चेन में भारत को एक अहम मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित कर रहा है।

    टैरिफ से बचने के लिए भारत बना प्रमुख विकल्प
    एक रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल अमेरिका में चीनी उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ से बचने के लिए अपने फ्लैगशिप उत्पादों का बड़ा हिस्सा भारत में तैयार कर रहा है।

    दुनिया भर में कंपनी हर साल लगभग 22 से 23 करोड़ iPhone का उत्पादन करती है। इनमें से अब करीब एक चौथाई हिस्सा भारत में बनने लगा है, जो वैश्विक उत्पादन में भारत की तेजी से बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

    पीएलआई योजना से मिला बड़ा प्रोत्साहन
    भारत में उत्पादन बढ़ाने के पीछे सरकार की Production Linked Incentive Scheme (PLI) योजना की अहम भूमिका रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने पर वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पीएलआई योजना ने चीन की तुलना में भारत में मौजूद कुछ चुनौतियों जैसे आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत को कम करने में मदद की है। इससे वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिला है।

    फॉक्सकॉन, टाटा और पेगाट्रॉन बना रहे आईफोन
    एप्पल भारत में अपने कई प्रमुख सप्लायरों के साथ मिलकर आईफोन का निर्माण कर रहा है। इनमें Foxconn, Tata Electronics और Pegatron शामिल हैं। इन कंपनियों के प्लांट्स में अब नई iPhone 17 सीरीज के सभी मॉडल, जिनमें प्रो और प्रो मैक्स वेरिएंट भी शामिल हैं, बनाए जा रहे हैं। वहीं iPhone 15 और iPhone 16 जैसे पुराने मॉडल घरेलू बाजार और निर्यात के लिए भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं।

    भारत में एप्पल का रिटेल नेटवर्क भी बढ़ा
    भारत में आईफोन की बढ़ती मांग को देखते हुए एप्पल अपने रिटेल नेटवर्क का भी विस्तार कर रहा है। देश में कंपनी की बिक्री 9 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही कंपनी के अब भारत में कुल छह रिटेल स्टोर हो चुके हैं और आने वाले समय में इनके और बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा एप्पल इस साल के अंत तक भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सेवा Apple Pay लॉन्च करने की तैयारी भी कर रहा है।

    भारत से रिकॉर्ड आईफोन निर्यात
    इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत से निर्यात होने वाली सबसे मूल्यवान वस्तु आईफोन बन गया है। देश के विभिन्न प्लांट्स से एप्पल ने करीब 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए, जिनमें से अधिकांश अमेरिका भेजे गए। जनवरी से दिसंबर के दौरान भारत से कुल 30.13 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन निर्यात हुए। पहली बार स्मार्टफोन भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बनकर उभरे।

    कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की बड़ी हिस्सेदारी
    आंकड़ों के मुताबिक भारत के कुल स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए भारत तेजी से एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एप्पल भारत में और निवेश कर सकता है, जिससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को और मजबूती मिलेगी

  • भोपाल निगम में इंजीनियरों के कार्य विभाजन में बड़ा फेरबदल: उदित गर्ग और आरआर जारोलिया के जिम्मे हटाए गए विभाग

    भोपाल निगम में इंजीनियरों के कार्य विभाजन में बड़ा फेरबदल: उदित गर्ग और आरआर जारोलिया के जिम्मे हटाए गए विभाग


    भोपाल। भोपाल नगर निगम में इंजीनियरों के बीच लंबे समय से चल रही कार्य विभाजन की कवायद को निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने अंतिम रूप दे दिया है। नए आदेश के तहत निगम में प्रमुख इंजीनियरों के जिम्मे कई विभागों में बदलाव किए गए हैं।

    उदित गर्ग और जारोलिया के विभागों में बदलाव
    उदित गर्ग, जो कि चार विभागों के प्रभारी थे, उनसे स्वच्छ भारत मिशन और हाउसिंग फॉर ऑल शाखा का प्रभार छीन लिया गया। निगम सूत्रों के मुताबिक, गर्ग मूल रूप से पीएचई विभाग के इंजीनियर हैं और उन्होंने विभाग में वापसी के लिए आवेदन भी दिया है।

    वहीं आरआर जारोलिया, जो सिविल शाखा के प्रभारी थे, उनसे सिविल शाखा का काम भी हटा दिया गया। नए आदेश के अनुसार अब विधानसभा में पदस्थ कार्यपालन यंत्रियों की फाइलें सीधे अपर आयुक्त को भेजी जाएंगी।

    बिल्डिंग परमिशन और नगर निवेशकों में फेरबदल
    निगमायुक्त ने बिल्डिंग परमिशन शाखा में भी बदलाव किया है। अब यहां चार नगर निवेशक पदस्थ किए गए हैं, जिनमें नीरज आनंद लिखार को मुख्य नगर निवेशक का प्रभार सौंपा गया है।

    टीएंडसीपी से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ ज्वाइंट डायरेक्टर लिखार को चीफ सिटी प्लानर (सीसीपी) का प्रभार मिला है। 8 कार्यपालन यंत्रियों में से सबसे वरिष्ठ जारोलिया को अधीक्षण यंत्री का प्रभार दिया गया।

    प्रमुख इंजीनियरों को सौंपी गई जिम्मेदारियां
    आरआर जारोलिया: प्रभारी एसई, यांत्रिकी योजना प्रकोष्ठ एवं विद्युत शाखा (जोन 01 से 21)

    आरके गोयल: ईई एवं विभागाध्यक्ष, हाउसिंग फॉर ऑल (एचएफए)

    अनिल तटवाड़े: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), उत्तर व मध्य विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा)

    ए के साहनी: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), नरेला विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा), प्रभारी प्रोजेक्ट एमआईएस व अतिक्रमण सेल

    प्रमोद मालवीय: ईई एवं विभागाध्यक्ष – प्रोजेक्ट, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, स्वच्छ भारत मिशन

    एसके राजेश: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), हुजूर विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा शाखा)

    ए के डेहरिया: ईई (सिविल एवं अतिक्रमण), दक्षिण-पश्चिम विधानसभा, प्रभारी सिटी प्लानर (भवन अनुज्ञा शाखा), दक्षिण-पश्चिम और गोविंदपुरा विधानसभा

  • सोना-चांदी में फिर आई चमक! गोल्ड 1.62 लाख पार, चांदी 2.76 लाख के ऊपर

    सोना-चांदी में फिर आई चमक! गोल्ड 1.62 लाख पार, चांदी 2.76 लाख के ऊपर


    नई दिल्ली। मंगलवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों की बढ़ती खरीदारी के चलते दोनों कीमती धातुएं मजबूत स्तर पर पहुंच गईं। सुबह करीब 10:22 बजे Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने का 2 अप्रैल वाला वायदा कॉन्ट्रैक्ट 1.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,62,010 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी का 5 मई का कॉन्ट्रैक्ट 3.46 प्रतिशत उछलकर 2,76,411 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग बढ़ने से कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ी चमक
    केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूत दिखाई दिए। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर सोने की कीमत 1.40 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,175 डॉलर प्रति औंस हो गई।

    वहीं चांदी की कीमत में और ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह 5.42 प्रतिशत बढ़कर 89.105 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने इन धातुओं को मजबूती दी है।

    डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से मिला सहारा
    सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह अमेरिकी मुद्रा में आई कमजोरी को माना जा रहा है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला US Dollar Index गिरकर 98.85 पर आ गया है, जबकि सोमवार को यह 99 के ऊपर था। डॉलर कमजोर होने पर आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिलता है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं में इन धातुओं को खरीदना सस्ता हो जाता है और मांग बढ़ जाती है।

    वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांग
    इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक इंटरव्यू में कहा कि Iran के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जीत का मतलब तब माना जाएगा जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें।

    ईरान की प्रतिक्रिया से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता
    ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने सरकारी मीडिया के जरिए कहा कि संघर्ष कब खत्म होगा, यह वाशिंगटन नहीं बल्कि तेहरान तय करेगा।

    इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूर होकर सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि इन धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

    आगे भी बनी रह सकती है तेजी
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है और डॉलर में कमजोरी जारी रहती है तो सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
    हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा हालात में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से कीमती धातुओं का रुख फिलहाल मजबूत बना हुआ है।