Author: bharati

  • दिव्यांग पेंशन पर टैक्स के खिलाफ भड़के पूर्व सैनिक, रिटायर्ड मेजर जनरल बोले– अग्निवीर योजना से कमजोर होगी सेना

    दिव्यांग पेंशन पर टैक्स के खिलाफ भड़के पूर्व सैनिक, रिटायर्ड मेजर जनरल बोले– अग्निवीर योजना से कमजोर होगी सेना


    भोपाल। केंद्र सरकार के हालिया बजट में पूर्व सैनिकों की दिव्यांग पेंशन पर इनकम टैक्स लगाने के फैसले को लेकर देशभर में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भोपाल में कांग्रेस भूतपूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपनी जान और शरीर तक दांव पर लगाने वाले सैनिकों की पेंशन पर टैक्स लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील फैसला है।

    श्याम श्रीवास्तव ने कहा कि दिव्यांग पेंशन उन सैनिकों को दी जाती है, जो युद्ध, ऑपरेशन या ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो जाते हैं। यह पेंशन उनकी मुख्य पेंशन का एक निर्धारित हिस्सा होती है, जो उनके जीवन-यापन और इलाज में मदद करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब इस दिव्यांग पेंशन पर भी इनकम टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है, जो 30 प्रतिशत तक हो सकता है। श्रीवास्तव ने कहा कि 1922 में बने पहले इनकम टैक्स कानून में स्पष्ट प्रावधान था कि ऐसे सैनिकों की पेंशन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन करीब 100 साल बाद सरकार ने उस पर भी टैक्स लगाने का फैसला कर लिया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार पूर्व सैनिकों की पेंशन पर टैक्स लगाकर कितना राजस्व जुटा लेगी, जबकि इससे सैनिकों का मनोबल जरूर टूटेगा।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सैनिकों के लिए चल रही एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। श्रीवास्तव ने कहा कि यह योजना पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन हाल के समय में बजट की कमी के कारण इसकी हालत खराब होती जा रही है। उनका आरोप है कि कई निजी अस्पतालों के बिल महीनों से लंबित पड़े हैं, जिसके कारण कई अस्पतालों ने पूर्व सैनिकों का इलाज करना बंद कर दिया है। इससे हजारों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

    रिटायर्ड मेजर जनरल ने सेना में लागू अग्निवीर योजना को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत युवाओं की चार साल के लिए अस्थायी भर्ती की जाती है और बाद में 75 प्रतिशत जवानों को सेवा से बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को चार साल बाद वापस भेज दिया जाएगा, उन्हें न तो पेंशन मिलेगी, न ग्रेच्युटी और न ही शहीद होने पर मिलने वाली सुविधाएं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही व्यवस्था जारी रही तो आने वाले 8 से 10 वर्षों में सेना में स्थायी सैनिकों की संख्या लगातार घटती जाएगी और अग्निवीरों की संख्या बढ़ती जाएगी।

    श्याम श्रीवास्तव के अनुसार वर्तमान में भारतीय सेना में करीब 14 लाख सैनिक हैं, लेकिन यदि नियमित भर्ती कम होती रही और अग्निवीरों की संख्या बढ़ती गई, तो भविष्य में केवल लगभग साढ़े तीन लाख स्थायी सैनिक ही रह जाएंगे, जो पूरी तरह प्रशिक्षित और युद्ध के लिए तैयार होंगे। उन्होंने मांग की कि सभी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश में पूर्व सैनिकों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तृतीय श्रेणी की नौकरियों में 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन चयन प्रक्रिया में इसका सही लाभ पूर्व सैनिकों को नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि यदि आरक्षण का सही तरीके से पालन हो, तो पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने हाल के वर्षों में कुछ राज्यों में सैनिकों और पूर्व सैनिकों के साथ पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि जो लोग देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। पूर्व सैनिकों ने सरकार से मांग की है कि दिव्यांग पेंशन पर लगाए गए टैक्स के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए और सैनिकों से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

  • T20 World Cup 2026: भारत बना चैंपियन, करोड़ों की इनामी बारिश; रनर-अप न्यूजीलैंड भी मालामाल

    T20 World Cup 2026: भारत बना चैंपियन, करोड़ों की इनामी बारिश; रनर-अप न्यूजीलैंड भी मालामाल


    नई दिल्ली। भारत ने T20 World Cup 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने घर में इतिहास रच दिया। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में 8 मार्च को खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत टी20 विश्व कप में सबसे ज्यादा बार चैंपियन बनने वाली टीम बन गया।

    फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 255 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 19 ओवर में 159 रन पर सिमट गई।

    इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही टीम इंडिया पर करोड़ों रुपये की इनामी बारिश भी हुई। International Cricket Council (ICC) ने T20 World Cup 2026 के लिए कुल 13.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 123.77 करोड़ रुपये का प्राइज पूल रखा था, जो पिछले संस्करण की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है।

    टूर्नामेंट की विजेता टीम होने के नाते भारत को 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 27.48 करोड़ रुपये की प्राइज मनी मिली। वहीं फाइनल में हारने वाली न्यूजीलैंड की टीम भी खाली हाथ नहीं लौटी। रनर-अप रहने पर कीवी टीम को 1.6 मिलियन डॉलर यानी लगभग 14.65 करोड़ रुपये की राशि दी गई।

    सेमीफाइनल तक पहुंचने वाली लेकिन फाइनल में जगह नहीं बना सकने वाली टीमों को भी अच्छी खासी इनामी राशि मिली। दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड को सेमीफाइनलिस्ट के रूप में 790,000 डॉलर यानी करीब 7.24 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया गया।

    वहीं सुपर-8 चरण तक पहुंचने के बाद सेमीफाइनल में जगह बनाने से चूकने वाली टीमों को भी ICC ने सम्मानजनक इनाम दिया। इस चरण में बाहर होने वाली टीमों को 380,000 डॉलर यानी करीब 3.48 करोड़ रुपये मिले। इनमें जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीमें शामिल रहीं।

    ग्रुप स्टेज में हिस्सा लेने वाली सभी टीमों को भी ICC की ओर से 250,000 डॉलर यानी करीब 2.29 करोड़ रुपये की गारंटीड प्राइज मनी दी गई।

  • मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान

    मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान


    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश की जल संपदा को संरक्षित करने और नगरीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की व्यापक कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुरूप तैयार यह योजना पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।

    अभियान के तहत सभी नगरीय निकायों को नदियों तालाबों बावडियों और नालों के किनारे किए गए अतिक्रमण को चिह्नित कर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल जल संरचनाओं का प्राकृतिक स्वरूप लौटेगा बल्कि वर्षा जल के प्रवाह से भू जल स्तर में भी वृद्धि होगी।

    अभियान में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता कार्यों के लिए वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। अमृत 2.0 के तहत 112 जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा जिनका क्षेत्रफल लगभग 3315 एकड़ है और इस पर 67 करोड़ रुपये का निवेश होगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण पर 664 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। भविष्य में 1000 जल ग्रहण संरचनाओं का वैज्ञानिक संवर्धन और 5000 नाले नालियों की सघन सफाई एवं सौंदर्यीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में 5000 नई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की जाएंगी।

    नागरिक सुविधाओं के विस्तार में प्रमुख बाजारों बस स्टैंडों और सार्वजनिक चौराहों पर सुव्यवस्थित प्याऊ स्थापित किए जाएंगे जिससे ग्रीष्मकाल में राहगीरों और आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। पर्यावरण संरक्षण के हिस्से के रूप में अमृत 2.0 के तहत 116 निकायों में 300 एकड़ क्षेत्र को हरित क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा जिस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आगामी मानसून सत्र में 1 करोड़ पौधों का रोपण भी किया जाएगा।

    युवा सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए 5000 युवाओं को अमृत मित्र के रूप में MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। ये युवा जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता फैलाने और अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस एकीकृत कार्य योजना से प्रदेश की जल धरोहर संरक्षित होगी और स्वच्छ हरित मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने में मदद मिलेगी।

  • जबलपुर में साइबर ठगी: बुजुर्ग के खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए, योनो लिंक पर क्लिक कर हुआ हैक

    जबलपुर में साइबर ठगी: बुजुर्ग के खाते से एक लाख रुपये उड़ा लिए, योनो लिंक पर क्लिक कर हुआ हैक


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग नागरिक को अपना शिकार बना लिया। गोराबाजार थाना क्षेत्र के निवासी प्रभाकर मोहिते ने पुलिस को शिकायत दी कि उनके खाते से करीब एक लाख रुपये ठगी के जरिए गायब हो गए।

    शिकायत में बताया गया कि ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर बताया कि उनके एसबीआई योनो ऐप का एक्सपायर हो गया है। इसके बाद उन्होंने प्रभाकर मोहिते को एक लिंक भेजा और उस पर क्लिक करने को कहा। लिंक पर क्लिक करते ही बुजुर्ग का मोबाइल हैक हो गया। इसके तुरंत बाद उनके खाते से कई ट्रांजेक्शन के जरिए कुल एक लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए गए।

    गोराबाजार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात साइबर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों को चेताया है कि कभी भी मोबाइल लिंक या कॉल पर बैंक की जानकारी साझा न करें और ऐसे संदिग्ध संदेश आने पर सीधे अपने बैंक या पुलिस से संपर्क करें।

    इस घटना ने एक बार फिर साइबर ठगी के नए तरीकों की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करते समय हमेशा सुरक्षित ऐप और आधिकारिक वेबसाइटों का ही प्रयोग करें।

  • SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया

    SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया


    भोपाल । भोपाल में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पूरा हो गया है लेकिन सियासत थमने का नाम नहीं ले रही। सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह चुनाव आयोग पहुंचे। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी के सबूत प्रस्तुत किए और गंभीर आरोप लगाए कि एसआईआर में फर्जी नाम जोड़े गए और कुछ नाम हटा दिए गए। उनका कहना है कि यह बीजेपी सरकार के दबाव में हुआ।

    दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। उन्होंने चुनाव आयोग से मुलाकात कर शिकायत की और आश्वासन प्राप्त किया कि मामले की जांच की जाएगी। दिग्विजय ने चुनाव आयोग का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने उनकी बात सुनी और गड़बड़ी के दस्तावेजों को स्वीकार किया।

    विशेष रूप से उन्होंने तीन अलग अलग घरों में 30 से अधिक मतदाता होने की शिकायत दी। मकान मालिकों ने बताया कि उनके घर में वास्तविक तौर पर केवल 6 या 7 सदस्य हैं लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी हुई मतदाता सूची में एक मकान नंबर पर 30 से अधिक सदस्य दर्शाए गए।
    दिग्विजय सिंह ने यह शिकायत भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र से लेकर गए थे।

    उनका कहना है कि यह गंभीर अनियमितता है और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि शिकायत का उचित समाधान किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश में मतदाता सूची सुधार और उसकी वैधता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है

    उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है


    भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों से लगातार हो रहे पलायन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की तलाश में अपने ही राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है।

    सिंघार ने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी समुदाय आज अपने गांव और खेत छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए विवश हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का यह पलायन उनकी पहचान और सम्मान से जुड़ा एक गहरा सामाजिक संकट बनता जा रहा है।

    भाजपा सरकार की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

    आदिवासियों के पलायन के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही सरकार दलित और आदिवासी समाज के मुद्दों पर केवल घोषणाएं और प्रचार तक सीमित रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव के नाम पर कार्यक्रम तो आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासी परिवारों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें प्रदेश छोड़कर जाना पड़ रहा है।

    सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि जब किसी प्रदेश के मूल निवासी ही अपनी जमीन और गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं, तो यह सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत है।

    उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से हर वर्ष बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

  • ग्वालियर में फटे पाइप वाली फायर ब्रिगेड के कारण आग बुझाने में 7 घंटे, एक महिला की मौत

    ग्वालियर में फटे पाइप वाली फायर ब्रिगेड के कारण आग बुझाने में 7 घंटे, एक महिला की मौत


    ग्वालियर । ग्वालियर के कोतवाली थाना क्षेत्र में रविवार शाम करीब 4 बजे बालाबाई बाजार स्थित एक व्यापारी के मकान में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से भड़क गई कि घर में मौजूद छह लोग खिड़कियों तक ही सीमित रह गए। फायर ब्रिगेड के दमकलकर्मियों ने पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला लेकिन घर की बहू अंकिता अग्रवाल का दम घुट गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना की खबर सुनते ही उनके पिता अशोक अग्रवाल को हार्ट अटैक आया और उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं लेकिन पाइप कई जगह से फटे हुए थे और पानी का बड़ा हिस्सा सड़क पर बहता रहा। कुछ स्थानीय लोग ईंट पत्थर लगाकर पाइप की लीकेज को बंद करने की कोशिश करते रहे। कई गाड़ियों में पानी का प्रेशर कम होने के कारण आग पर काबू पाने में लगातार देरी होती रही।

    बालाबाई बाजार का इलाका संकरा होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर तक पहुंचने में भी समस्या आई। खराब पाइप लीकेज और कम प्रेशर वाली गाड़ियों ने आग बुझाने की प्रक्रिया को और धीमा कर दिया। नतीजतन आग को काबू में करने में सात घंटे से ज्यादा का समय लग गया। फायर ब्रिगेड की 10 से अधिक गाड़ियों के साथ टैंकरों से भी पानी मंगाया गया। अपर आयुक्त प्रदीप तोमर के अनुसार 35 से अधिक फायर ब्रिगेड गाड़ियों का पानी आग बुझाने में इस्तेमाल हुआ। एसडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में लगी रही।

    मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि अगर पहली फायर ब्रिगेड की गाड़ी पूरी तरह से कार्यशील होती तो आग को शुरुआती समय में ही नियंत्रित किया जा सकता था।कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि फायर ब्रिगेड वाहनों की नियमित सर्विसिंग और टेस्टिंग जरूरी है। उन्होंने नगर निगम आयुक्त को जानकारी देने और फायर ब्रिगेड व्यवस्थाओं की जांच कराने के निर्देश दिए। इस हादसे ने ग्वालियर में फायर ब्रिगेड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं और शहर में आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया।

  • जबलपुर में भाजपा का पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान शुरू, मुख्यमंत्री बोले- संगठन की ताकत ही पार्टी की सफलता का आधार

    जबलपुर में भाजपा का पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान शुरू, मुख्यमंत्री बोले- संगठन की ताकत ही पार्टी की सफलता का आधार


    जबलपुर । जबलपुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के तहत भाजपा का बड़ा संभागीय प्रशिक्षण अभियान आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश गुजरात के संगठन महामंत्री रत्नाकर सहित वरिष्ठ मंत्री विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संगठन को मजबूत बनाना और प्रशिक्षण का क्रम जारी रखना ही भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाता है। उन्होंने बताया कि सरकार जनहित के कार्यों में अपने संगठन की शक्ति का उपयोग करती है। डॉ. यादव ने कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक कौशल वैचारिक स्पष्टता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए प्रशिक्षण वर्ग की महत्ता पर जोर दिया।

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भाजपा अपने उद्देश्यों को मिशन की तरह आगे बढ़ा रही है और इसके लिए प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने जूडा की हड़ताल पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं से ड्यूटी पर लौटने का आग्रह किया।

    प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह नरसिंहपुर से कार द्वारा जबलपुर पहुंचे और रानीताल स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में शामिल हुए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह भी प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने जबलपुर पहुंची।

    कार्यशाला में जबलपुर रीवा शहडोल और छिंदवाड़ा संभाग के 19 जिलों से लगभग 400 प्रशिक्षार्थी कार्यकर्ता शामिल हैं। प्रातः 11 बजे पंजीयन और दोपहर 12:30 बजे उद्घाटन सत्र हुआ जिसमें वरिष्ठ नेताओं ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उद्घाटन के बाद विभिन्न विषयगत सत्रों में विशेषज्ञ और वक्ता कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक वैचारिक और नेतृत्व संबंधी प्रशिक्षण देंगे।

    कार्यशाला के माध्यम से कार्यकर्ताओं को अपने विचारों के प्रति प्रतिबद्ध रहकर जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। भाजपा का यह प्रशिक्षण महाभियान चार संभागों में आयोजित किया गया है और इसका उद्देश्य संगठन की मजबूती के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय और सक्षम बनाना है।

  • रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी

    रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी


    रतलाम । रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स यानी खसरा के 10 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और बच्चों की हालत का जायजा लिया। विभाग के मुताबिक बच्चों की स्थिति अब नियंत्रण में है।

    मरीजों में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। होली पर बाहर गए कुछ बच्चे वापस भी पलायन कर गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांवों में भ्रमण कर बच्चों को आवश्यक उपचार सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। मामले में संबंधित एएनएम के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।

    शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा। टीम ने ग्राम बोरपाड़ा और रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन के साथ विटामिन ए का घोल भी पिलाया।

    जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा एक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार खांसी बहती नाक लाल और पानी भरी आंखें और पूरे शरीर पर लाल भूरे रंग के दाने शामिल हैं। दाने आने से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे कोप्लिक स्पाट्स भी दिखाई दे सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद ये लक्षण प्रकट होते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्र में नोटिफिकेशन जारी करने घर घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने और अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली है। बच्चों की हालत अब बेहतर है और विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। मरीजों के इलाज और संक्रमण रोकने के लिए एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन ए अभियान लगातार जारी रहेगा।

  • मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी बंद; सामान्य ऑपरेशन भी टलेंगे

    मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी बंद; सामान्य ऑपरेशन भी टलेंगे


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार से स्वास्थ्य सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हो गई हैं। लंबित स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान की मांग को लेकर प्रदेशभर के करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टर सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर सुबह 9 बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं बंद हो गई हैं और सामान्य ऑपरेशन भी फिलहाल टाल दिए गए हैं।

    राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इसका सीधा असर मरीजों पर दिखाई दे रहा है। यहां स्त्री रोग विभाग में पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर फर्टिलिटी क्लिनिक एएनसी रूम सहित कई व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। आमतौर पर इन विभागों की जिम्मेदारी सीनियर डॉक्टरों के साथ जूनियर डॉक्टर भी संभालते हैं लेकिन हड़ताल के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

    ओपीडी के बाहर सुबह से मरीज अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। इलाज के लिए पहुंचे मरीज अनवर ने बताया कि वह सुबह से अस्पताल में भटक रहे हैं। पैरों में दर्द सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वह काफी परेशान हैं लेकिन डॉक्टरों के हड़ताल पर होने से उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है।

    जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तब तक वे ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। साथ ही ऑपरेशन थिएटर में भी केवल अति गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। इसका मतलब है कि हर्निया रॉड इंप्लांट और अन्य सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं जिससे कई मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    JDA के मुताबिक शासन के आदेश के अनुसार सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन एक अप्रैल 2025 से लागू होना था लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

    JDA के प्रतिनिधि डॉ. ब्रिजेंद्र ने बताया कि 7 जून 2021 को जारी शासनादेश के अनुसार स्टाइपेंड में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर संशोधन का प्रावधान है। इसके बावजूद निर्धारित समय पर संशोधन लागू नहीं किया गया। इस कारण प्रदेशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    डॉक्टरों ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों को पत्र सौंपकर हड़ताल की सूचना दे दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टर पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल शासन का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करना है। यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर विरोध को और तेज किया जा सकता है।

    उधर JDA जबलपुर के प्रेसिडेंट डॉ. शुभम शर्मा सोमवार दोपहर उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात करेंगे। इस बैठक के बाद ही आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।