Author: bharati

  • रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    रोज़ाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ और बदन दर्द से मिलेगी स्थायी राहत

    नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आज बदन दर्द और रीढ़ से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बन चुकी है। ऐसे समय में योग न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग विशेषज्ञ रोज़ाना कुछ खास आसनों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं जिनमें पूर्ण भुजंगासन का विशेष स्थान है।मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार पूर्ण भुजंगासन भुजंगासन का उन्नत और गहन रूप है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन देने के साथ-साथ पीठ कंधों और गर्दन की जकड़न को दूर करने में सहायक होता है। इसके नियमित अभ्यास से छाती खुलती है जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने में आसानी होती है।

    पूर्ण भुजंगासन कैसे करें
    योग विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन का अभ्यास बेहद सावधानी और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल ज़मीन पर लेट जाएं। दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखें और पैर सीधे रखें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। कोहनियों को थोड़ा मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें। इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए पैरों के पंजे ऊपर उठाएं और सिर-गर्दन को पीछे की ओर तानें। कोशिश करें कि पैरों के पंजे सिर को छू सकें।इस मुद्रा में बिना किसी दबाव के जितनी देर आराम से रह सकें उतनी देर रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस नीचे आएं और शवासन की स्थिति में लेटकर शरीर को पूरी तरह शिथिल करें। गहरी सांस लें और हृदय गति को सामान्य होने दें।

    पूर्ण भुजंगासन के प्रमुख फायदे

    नियमित रूप से पूर्ण भुजंगासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है। यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर करता है और थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक माना जाता है। खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं या जिन्हें कमर और पीठ दर्द की शिकायत रहती है उनके लिए यह आसन बेहद लाभकारी हो सकता है।

    कब न करें यह आसन

    हालांकि पूर्ण भुजंगासन बेहद लाभकारी है लेकिन कुछ स्थितियों में इससे बचना चाहिए। गर्भवती महिलाएं गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोग उच्च रक्तचाप हर्निया या हाल ही में सर्जरी कराने वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

    शुरुआत में रखें ये सावधानियां

    शुरुआती दिनों में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना सबसे बेहतर रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग में धैर्य और नियमितता सबसे अहम होती है। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट का खतरा भी हो सकता है।नियमित अभ्यास सही तकनीक और सावधानी के साथ किया गया पूर्ण भुजंगासन न सिर्फ रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि बदन दर्द से राहत दिलाकर जीवन को अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बना सकता है।

  • Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इस रंग से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक रहस्य

    Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इस रंग से जुड़े धार्मिक और प्राकृतिक रहस्य


    नई दिल्ली । भारत में ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना का पावन पर्व वसंत पंचमी वर्ष 2026 में 23 जनवरी को मनाया जाएगा। यह दिन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से विशेष होता है, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और रंगों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वसंत पंचमी आते ही चारों ओर एक ही रंग की छटा दिखाई देती है—पीला। मंदिरों से लेकर घरों तक, वस्त्रों से लेकर भोग तक, हर जगह पीले रंग का विशेष महत्व नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर वसंत पंचमी के दिन पीले रंग को ही इतना खास क्यों माना जाता है? इसके पीछे कई धार्मिक, प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, विवेक और सृजनात्मकता की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में पीला रंग सात्विकता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक है। यही कारण है कि वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, पीले फूलों से पूजा की जाती है और केसरिया भात, बूंदी या पीली मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पीले वस्त्र धारण कर पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

    वसंत पंचमी का संबंध केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि प्रकृति के बदलाव से भी है। यह पर्व शीत ऋतु के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है। कड़ाके की ठंड के बाद जब सूर्य की किरणें तेज और सुनहरी होने लगती हैं, तब धरती पर नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी समय खेतों में सरसों की फसल लहलहाने लगती है और चारों ओर पीले फूलों की बहार दिखाई देती है। प्रकृति स्वयं पीले रंग की चादर ओढ़ लेती है, जो समृद्धि, उर्वरता और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

    पीला रंग मनोवैज्ञानिक रूप से भी बेहद सकारात्मक माना जाता है। यह रंग मन में प्रसन्नता, आशा और उत्साह का संचार करता है। वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने से मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि इस दिन बच्चों की शिक्षा की शुरुआत, विद्यारंभ संस्कार और कला-संगीत से जुड़े कार्यों को शुभ माना जाता है।

    इसके अलावा, ज्योतिष शास्त्र में पीले रंग का संबंध बृहस्पति ग्रह से भी माना गया है, जो ज्ञान, धर्म और शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह है। वसंत पंचमी पर पीला रंग धारण करना बृहस्पति की कृपा पाने का भी एक माध्यम माना जाता है। इस तरह वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धर्म, प्रकृति, मनोविज्ञान और ज्योतिष चारों का सुंदर संगम है। यही कारण है कि इस दिन पीले रंग में रंगकर लोग ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता का स्वागत करते हैं।

  • कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट

    कृषि व ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत: दिसंबर में खाद्य महंगाई दर नकारात्मक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई दर नकारात्मक रही जिससे इन वर्गों के लिए महंगाई के बोझ में राहत मिली है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक सीपीआई-एल 0.04 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए (सीपीआई-आरएल) 0.11 प्रतिशत सालाना आधार पर दर्ज किया गया।

    मंत्रालय ने बताया कि खाद्य महंगाई इस दौरान कृषि श्रमिकों के लिए -1.8 प्रतिशत और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73 प्रतिशत रही। इस नकारात्मक महंगाई का मुख्य कारण खाद्य उत्पादन में वृद्धि के साथ कीमतों में गिरावट है। हाल के महीनों में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में आई यह कमी विशेष रूप से कमजोर वर्गों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है। इससे उनके पास खर्च करने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है और जीवन स्तर में सुधार की संभावना बढ़ती है।

    श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो ने जून 2025 से कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2019=100 निर्धारित किया है। इस नए आधार वर्ष में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से आंकड़े एकत्रित किए गए। पुराने 1986-87=100 सीरीज को बदलकर सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल की नई सीरीज लाई गई है। नई सीरीज में सूचकांक की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दायरा और कवरेज काफी हद तक बढ़ाया गया और इसमें कार्यप्रणालीगत सुधार भी किए गए।

    इस बीच सामान्य खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2025 में 1.33 प्रतिशत रही जो नवंबर में 0.71 प्रतिशत थी। वहीं थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर दिसंबर में 0.83 प्रतिशत दर्ज की गई जबकि नवंबर में यह -0.32 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई है।

    आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में खुदरा महंगाई दर करीब 2 प्रतिशत रह सकती है। इसकी वजह जीएसटी में कटौती और खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट को बताया गया है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खाद्य महंगाई में आई यह कमी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे उनकी खरीद क्षमता बढ़ती है और जीवन यापन में आसानी होती है। सरकार की नीतियों और उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

  • कुंभ राशि में सूर्य–मंगल की महायोग युति, इन राशियों को मिलेगा मान-सम्मान और करियर में बड़ी सफलता

    कुंभ राशि में सूर्य–मंगल की महायोग युति, इन राशियों को मिलेगा मान-सम्मान और करियर में बड़ी सफलता


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और मंगल को साहस, ऊर्जा और आत्मबल के सबसे प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। सूर्य जहां आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान का प्रतीक है, वहीं मंगल ऊर्जा, पराक्रम और निर्णय शक्ति का कारक ग्रह है। जब ये दोनों शक्तिशाली ग्रह एक साथ आते हैं, तो इसे सूर्य–मंगल की युति कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह विशेष युति 23 फरवरी से 15 मार्च के बीच कुंभ राशि में बनने जा रही है, जो कई राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आएगी। यह युति खासतौर पर करियर, व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से बेहद शुभ मानी जा रही है। इस दौरान कुछ राशियों को नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं, कारोबार में विस्तार के योग बनेंगे और आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। साथ ही, कुछ जातकों के लिए नए रिश्ते और महत्वपूर्ण संपर्क बनने के भी संकेत हैं। आइए जानते हैं किन राशियों पर सूर्य–मंगल की युति का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य–मंगल की युति दशम भाव को प्रभावित करेगी, जो करियर और कर्म क्षेत्र का भाव माना जाता है। इस दौरान नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति, नई जिम्मेदारियां या बेहतर जॉब ऑफर मिल सकता है। व्यवसाय से जुड़े जातकों को नए क्लाइंट, बड़े प्रोजेक्ट और मुनाफे के अवसर प्राप्त होंगे। सरकारी क्षेत्र में काम करने वालों को मान-सम्मान और पहचान मिल सकती है। लंबे समय से की जा रही मेहनत का फल मिलने से आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि में ही सूर्य और मंगल की युति बन रही है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद खास रहेगा। नेतृत्व क्षमता, आत्मबल और निर्णय शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। नई नौकरी शुरू करने, करियर बदलने या खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। सामाजिक और कार्यस्थल पर आपकी छवि मजबूत होगी। वैवाहिक जीवन में भी स्थिरता और मजबूत रिश्ते बनने के योग हैं। लंबे समय से अटके हुए काम और प्रोजेक्ट इस दौरान गति पकड़ सकते हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह युति तीसरे भाव को प्रभावित करेगी, जो साहस, पराक्रम और संचार का भाव होता है। इस दौरान जोखिम लेने की क्षमता बढ़ेगी और आप आत्मविश्वास के साथ नए कदम उठा पाएंगे। मीडिया, कम्युनिकेशन, मार्केटिंग, सेल्स, लेखन और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। नए अनुबंध, छोटी यात्राएं और नेटवर्किंग के जरिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं। भाई-बहनों से सहयोग भी प्राप्त हो सकता है। कुल मिलाकर सूर्य–मंगल की यह युति कई राशियों के लिए आत्मबल, सफलता और सम्मान का मार्ग खोलने वाली है। सही दिशा में प्रयास करने से इस शुभ योग का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

  • देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम

    देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जो शिव के नाम से नहीं बल्कि उनके प्रिय भक्त, वाहन और गण नंदी के नाम से जाना जाता है। शिव और नंदी को एक-दूसरे के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र देश का ऐसा दुर्लभ स्थल है, जहां नंदी स्वयं शिवलिंग का लगातार अभिषेक करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ अपने रहस्य के कारण भी भक्तों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह पवित्र मंदिर बेंगलुरु के मल्लेश्वरम लेआउट क्षेत्र में स्थित है और इसे नंदीश्वर तीर्थ, बसवा तीर्थ या स्थानीय भाषा में मल्लेश्वरम नंदी गुड़ी भी कहा जाता है। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नंदी की विशाल मूर्ति के मुख से लगातार जलधारा बहती रहती है, जो सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती है। आश्चर्य की बात यह है कि आज तक कोई यह पता नहीं लगा सका है कि यह जलधारा आखिर कहां से आती है। वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से यह मंदिर एक रहस्य बना हुआ है।

    इतिहास की बात करें तो इस मंदिर का दोबारा प्रकट होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। वर्ष 1997 में जब इस क्षेत्र में जमीन की खुदाई का काम चल रहा था, तब यह प्राचीन मंदिर फिर से सामने आया। अन्य दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां कोई भव्य गोपुरम नहीं है और आकार में भी यह मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता और रहस्यमयी स्वरूप इसे विशिष्ट बनाता है। नंदी के मुख से निरंतर होते शिवाभिषेक को देखकर भक्तों की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस मंदिर की स्थापना को लेकर एक लोकप्रिय दंतकथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुआ करती थी। किसानों को बार-बार एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था। हर पूर्णिमा की रात एक सांड खेतों में घुस आता और पूरी फसल को नष्ट कर देता। परेशान होकर एक रात सभी किसानों ने उस सांड को पकड़ने का फैसला किया। वे उसका पीछा करते हुए एक पहाड़ी तक पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही सांड अचानक गायब हो गया। उसकी जगह उन्हें नंदी की एक मूर्ति दिखाई दी, जिसे कन्नड़ भाषा में बसवा कहा जाता है।

    किसानों ने इसे भगवान शिव के गण नंदी का संकेत मानते हुए उनके क्रोध को शांत करने के लिए उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवा दिया। मान्यता है कि मंदिर बनने के बाद सांड ने खेतों को नुकसान पहुंचाना बंद कर दिया। तभी से यहां हर साल उत्सव मनाया जाता है और किसान अपनी फसल का पहला हिस्सा नंदी को अर्पित करते हैं। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी नंदी मूर्तियों में से एक है। आज यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी जलधारा के कारण देश के सबसे विशिष्ट और चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है।

  • ICC वनडे रैंकिंग में बड़ा बदलाव: विराट कोहली से छिना नंबर-1 का ताज, डेरिल मिचेल बने टॉप बल्लेबाज

    ICC वनडे रैंकिंग में बड़ा बदलाव: विराट कोहली से छिना नंबर-1 का ताज, डेरिल मिचेल बने टॉप बल्लेबाज


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के कप्तान विराट कोहली को वनडे रैंकिंग में नंबर-1 बल्लेबाज का ताज सिर्फ एक हफ्ते ही टिक सका। आईसीसी ने ताजा रैंकिंग में न्यूजीलैंड के स्टार बल्लेबाज डेरिल मिचेल को शीर्ष स्थान पर पहुंचते हुए नंबर-1 बल्लेबाज का खिताब दिया है। यह बदलाव उनके लगातार दो शानदार पारियों के दम पर संभव हुआ।

    विराट कोहली ने बीते हफ्ते भारत-न्यूजीलैंड श्रृंखला के पहले वनडे में 93 रनों की शानदार पारी खेली थी। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया और उसी रैंकिंग में वे नंबर-1 बल्लेबाज बने थे। लेकिन सिर्फ सात दिन बाद तीसरे वनडे में टीम इंडिया की हार के बावजूद मिचेल ने अपनी लगातार दो बड़ी पारियों के दम पर नंबर-1 स्थान हासिल कर लिया।डेरिल मिचेल की शानदार पारी तीसरे वनडे में देखने को मिली जो इंदौर में खेला गया। मिचेल ने मुश्किल परिस्थितियों में 131 गेंदों पर 137 रन बनाए और टीम को संकट से बाहर निकाला। इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 3 छक्के लगाए। खास बात यह थी कि उन्होंने टीम की शुरुआत में ही संकट का सामना किया जब न्यूजीलैंड की टीम 5 रन पर 2 विकेट गंवा चुकी थी। इस शानदार प्रदर्शन के बाद मिचेल की रेटिंग 845 तक पहुंच गई जो उनके करियर की अब तक की सर्वोत्तम रेटिंग है।

    वहीं विराट कोहली अब 795 रेटिंग के साथ नंबर-2 पर हैं। उनके अलावा रोहित शर्मा भी तीसरे स्थान से गिरकर चौथे स्थान पर आ गए हैं उनकी रेटिंग अब 757 है। अफगानिस्तान के इब्राहिम जादरान ने 764 रेटिंग के साथ तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया।आईसीसी रैंकिंग में एक और दिलचस्प बदलाव केएल राहुल की टॉप-10 में एंट्री है। उन्होंने 11वें स्थान से छलांग लगाकर अब 670 रेटिंग के साथ दसवें स्थान पर जगह बनाई। वहीं श्रेयस अय्यर एक स्थान फिसलकर 11वें स्थान पर आ गए हैं।

    इस अपडेट के साथ ही वनडे रैंकिंग में नए खिलाड़ी और पुराने दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक होती जा रही है। डेरिल मिचेल की निरंतरता और दबाव में शानदार खेल ने उन्हें दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल कर दिया है वहीं विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसी भारतीय स्टार बल्लेबाजों के लिए नंबर-1 की चुनौती अब और कठिन हो गई है।आईसीसी की यह ताजा रैंकिंग दर्शाती है कि वनडे क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और हर खिलाड़ी को लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर करना होगा।

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।

  • डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा ‘संपन्न’ पोर्टल, पेंशनरों को मिलेगी ऑनलाइन सुविधा

    डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा ‘संपन्न’ पोर्टल, पेंशनरों को मिलेगी ऑनलाइन सुविधा


    नई दिल्ली। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने एक बड़ी पहल की है। अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए संपन्न पोर्टल को डिजीलॉकर से जोड़ दिया गया है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनर अपनी पेंशन संबंधित जरूरी दस्तावेज जैसे ई-पेंशन पेमेंट ऑर्डरई-पीपीओ ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर कम्यूटेशन ऑर्डर और फॉर्म-16 घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

    संपन्न पेंशन पोर्टल कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्सCGCA द्वारा विकसित किया गया है। दूरसंचार विभाग ने इस पहल के तहत अपने सभी पेंशनरों को इंटीग्रेशन की जानकारी दे दी है। अब पेंशनर पोर्टल पर अपने पीपीओ नंबर को दर्ज कर गेट डॉक्यूमेंट पर क्लिक करेंगे और सिस्टम उनके अनुरोध के अनुसार आवश्यक दस्तावेज तैयार कर देगा।संचार मंत्रालय के अनुसार इस कदम से पेंशनर सीधे अपने डिजीलॉकर अकाउंट में कम्युनिकेशन स्वीकृति आदेश फॉर्म-16 और अन्य अहम दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। इससे दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और कागज की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त होगी। साथ ही बैंकिंग मेडिकल रिइंबर्समेंट या अन्य आधिकारिक प्रक्रियाएं पहले से अधिक आसान और त्वरित हो जाएंगी।

    दिल्ली के प्रधान संचार लेखा नियंत्रक आशीष जोशी ने कहा कि यह पहल पेंशनरों के समय और पैसे की बचत करेगी क्योंकि उन्हें अब कागजी दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।पेंशनर इस सेवा का उपयोग डिजीलॉकर.गव.इन पर आधार के माध्यम से लॉगिन करके कर सकते हैं। लॉगिन के बाद अपना पीपीओ नंबर लिंक कर तुरंत जरूरी दस्तावेज डाउनलोड किए जा सकते हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 दिसंबर 2018 को देश को समर्पित किया गया संपन्न पोर्टल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेंशनर-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ है। इस पोर्टल के माध्यम से पेंशन की पूरी प्रक्रिया – आवेदन प्रोसेसिंग ई-पीपीओ जारी करना भुगतान लेखा-जोखा ऑडिट और शिकायत निवारण – पूरी तरह डिजिटल हो गई है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों की जिंदगी आसान हुई है।सरकार की यह पहल न केवल पेंशनरों की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को साकार करने में भी एक अहम कदम साबित होगी।

  • वनप्लस इंडिया ने परिचालन बंद करने की अफवाहों को किया खारिज, सीईओ बोले- स्थिति सामान्य

    वनप्लस इंडिया ने परिचालन बंद करने की अफवाहों को किया खारिज, सीईओ बोले- स्थिति सामान्य


    नई दिल्ली। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि वनप्लस इंडिया भारत में अपने ऑपरेशन बंद करने जा रही है। इस खबर के सामने आते ही कंपनी ने बुधवार को इसे पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि उनके संचालन पूरी तरह से सामान्य हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वनप्लस के सीईओ रॉबिन लियू ने एक पोस्ट में कहा,वनप्लस इंडिया और उसके संचालन के बारे में फैल रही कुछ गलत जानकारियों को मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। हम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।- उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में आई अपुष्ट खबरें पूरी तरह झूठी हैं और सभी पक्षकारों से आग्रह किया कि वे आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि किए बिना कोई जानकारी साझा न करें।कंपनी की इस सफाई ऐसे समय में आई है जब भारत में स्मार्टफोन निर्माताओं को कड़ी सुरक्षा जांच और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। वनप्लस 2013 में स्वतंत्र ब्रांड के रूप में स्थापित हुआ थालेकिन इसकी ओप्पो के साथ काफी करीबी साझेदारी है। दोनों कंपनियां बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स ग्रुप का हिस्सा हैं और निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों के बीच निकटता है।

    वनप्लस भारतीय स्मार्टफोन बाजार के मध्य-प्रीमियम सेगमेंट में सक्रिय है। 2025 की तीसरी तिमाही में कंपनी की वृद्धि सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत रही और बाजार हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई। इस सेगमेंट में सैमसंग शीर्ष पर हैउसके बाद ओप्पो और फिर वनप्लस का स्थान है।आईडीसी के अनुसार2025 की तीसरी तिमाही में भारत का स्मार्टफोन बाजार पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयाजिसमें सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल बिक्री 48 मिलियन यूनिट तक पहुंची। इस अवधि में भारत से स्मार्टफोन की विदेशी शिपमेंट लगभग 79.03 बिलियन डॉलर रहीजिसमें एप्पल के आईफोन का हिस्सा लगभग 75 प्रतिशत यानी 22 बिलियन डॉलर से अधिक रहा।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि सेमीकंडक्टर उत्पादन बढ़ने से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में और वृद्धि होने की उम्मीद है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया हैजहां घरेलू स्तर पर बिकने वाले 99 प्रतिशत से अधिक फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैंजिससे देश की विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में महत्व बढ़ गया है।वनप्लस इंडिया की स्थिति स्पष्ट है – कंपनी भारत में कामकाज जारी रखेगी और स्मार्टफोन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मार्च 2026 में समाप्त होने वाली स्मार्टफोन पीएलआई योजना के बावजूद सरकार कथित तौर पर समर्थन बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैजिससे भारत में स्मार्टफोन उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मिलते हैं।

  • नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना

    नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना


    भोपाल । मध्य प्रदेश के गौरव और देश के उभरते हुए पोल वॉल्टर देव कुमार मीणा को अपनी खेल प्रतिभा के बदले महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर खिलाड़ी और उनके साथी कुलदीप यादव को न केवल ट्रेन से उतार दिया गया, बल्कि खेल उपकरण पोल साथ रखने के जुर्म में उन पर भारी जुर्माना भी थोपा गया।

    क्या है पूरा मामला

    17 जनवरी को देव मीणा और कुलदीप यादव महाराष्ट्र में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेकर भोपाल लौट रहे थे। जब वे पनवेल स्टेशन पर ट्रेन बदल रहे थे तब रेलवे स्टाफ और टीटीई ने उनके पास मौजूद पोल खेल उपकरण को लेकर आपत्ति जताई। टीटीई ने इसे ‘स्टील पाइप’ और असुरक्षित सामान करार देते हुए उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोक दिया।

    मेडल की भी नहीं की कद्र

    देव मीणा ने बताया कि उन्होंने रेलवे स्टाफ को अपनी पहचान बताई, अपने जीते हुए मेडल दिखाए और नेशनल रिकॉर्ड के प्रमाण भी दिए। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि वे एथलीट हैं और यह उनका खेल उपकरण है, न कि कोई कबाड़ या पाइप। इसके बावजूद टीटीई का रवैया अड़ियल बना रहा। लगभग 5 घंटे तक दोनों खिलाड़ियों को स्टेशन पर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

    वीडियो बनाकर बयां किया दर्द

    स्टेशन पर रोके जाने के दौरान देव मीणा ने एक वीडियो जारी कर अपना दुख साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया, “हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर हमारे जैसे सीनियर एथलीटों के साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, तो छोटे गांवों से आने वाले जूनियर खिलाड़ियों की क्या स्थिति होग अंत में, अपनी यात्रा जारी रखने के लिए दोनों खिलाड़ियों को मजबूरी में 1865 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें दूसरी ट्रेन में पोल ले जाने की अनुमति मिली, जिससे न केवल उनका समय बर्बाद हुआ बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

    कौन हैं देव मीणा

    19 वर्षीय देव कुमार मीणा मध्य प्रदेश के खातेगांव देवास जिला के रहने वाले हैं। उन्होंने पोल वॉल्ट में नेशनल रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश का नाम रोशन किया है और वे भारत के टॉप एथलीटों में शुमार हैं।