Author: bharati
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बैरागढ़ में मासूम की हत्या पर उबाल, आरोपी को सख्त सजा दिलाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, मुख्य मार्ग पर लगा जाम
भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के मामले ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग बैरागढ़ थाने के बाहर जमा हुए और आरोपी मोबिन को उनके हवाले करने के साथ उसे फांसी देने की मांग करने लगे। प्रदर्शन के दौरान लोगों का गुस्सा बढ़ता गया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने थाने के भीतर जाने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने थाने के गेट बंद कर दिए और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने और हालात नियंत्रित करने में जुटे रहे।बच्ची की हत्या की खबर सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मासूम के साथ हुई घटना बेहद गंभीर है और आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर लोग थाने के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग पर जाम लग गया जिससे आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए स्थिति पर नजर रखी। लोग आरोपी को उनके हवाले करने की मांग पर अड़े रहे जबकि पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की।जानकारी के मुताबिक बैरागढ़ क्षेत्र में रहने वाली 12 वर्षीय बच्ची गुरुवार रात घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की। शुक्रवार को बच्ची का शव कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक सुनसान खंडहर में मिला। शव मिलने की खबर से इलाके में सनसनी फैल गई। बच्ची कबाड़ बीनने का काम करती थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास के लोगों से पूछताछ की।जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। परिजनों से मिली जानकारी और अन्य शुरुआती तथ्यों के आधार पर 23 वर्षीय मोबिन को हिरासत में लिया गया। खबर के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में उसके द्वारा अपराध स्वीकार करने की बात सामने आई है। हालांकि मामले में आरोपों की पुष्टि और अपराध से जुड़े तथ्यों को स्थापित करना पुलिस की जांच तथा कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। पुलिस साक्ष्य जुटाने और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में लगी है।घटना के बाद लोगों में बच्ची के लिए न्याय की मांग तेज हो गई है। शनिवार को थाने के बाहर जमा भीड़ ने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने थाने के गेट तक पहुंचकर अंदर जाने का प्रयास किया। भीड़ की संख्या बढ़ने और तनाव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया। अधिकारियों की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो और कानून व्यवस्था कायम रहे।इस मामले में बच्ची के शव की बरामदगी के बाद सामने आई परिस्थितियों ने भी लोगों को विचलित किया है। शुरुआती खबरों के मुताबिक बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था और उसके शरीर पर चोट से जुड़े कुछ संकेत मिले थे। इन तथ्यों की विस्तृत पुष्टि जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी। पुलिस के लिए अब जरूरी है कि घटना से जुड़े सभी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जाए।बैरागढ़ में जारी प्रदर्शन के बीच लोगों की मांग है कि बच्ची को जल्द न्याय मिले और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। हालांकि किसी भी आरोपी को सजा देने का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस इलाके की स्थिति पर नजर रखे हुए है। इस संवेदनशील मामले में आगे की जांच और प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। -

इथेनॉल बनाने में अब नहीं होगा चीनी का इस्तेमाल… दाम बढ़ने के बाद सरकार का बड़ा कदम…
नई दिल्ली। भारत सरकार (India Government) ने चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) पर काबू पाने और घरेलू बाजार में इसकी सप्लाई बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तेल कंपनियों (Oil Companies) को निर्देश दिया है कि साल 2026-27 के सप्लाई में चीनी से इथेनॉल (Ethanol) बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल शून्य किया जाए। इसके तहत गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस (गुड़ बनाने की प्रक्रिया में बचने वाला गाढ़ा लिक्विड पदार्थ) से बने इथेनॉल की खरीद के लिए ताजा टेंडर में बोली नहीं मांगी गई है।
क्या है डिटेल
शुक्रवार को जारी टेंडर के मुताबिक, तेल कंपनियां नवंबर से शुरू होने वाले सप्लाई वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल खरीदने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, इस बार कंपनियां मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे गए अतिरिक्त चावल से बने इथेनॉल की सप्लाई के लिए बोली लगा सकती हैं।
चीनी की कीमतों पर काबू पाने की कोशिश
भारत दुनिया में चीनी की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में शामिल है। पिछले कुछ समय से देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की चिंता बनी हुई है। वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना प्रोडक्शन राज्यों में कम बारिश के कारण चीनी प्रोडक्शन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि गन्ने और चीनी का ज्यादा हिस्सा घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध रहे। इसी वजह से इथेनॉल बनाने में चीनी के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया गया है।
मक्का और चावल से बने इथेनॉल को मिलेगा मौका
सरकार के नए टेंडर में इथेनॉल बनाने के लिए मक्का, टूटे चावल और अतिरिक्त चावल के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इससे चीनी आधारित कच्चे माल के बजाय अनाज से इथेनॉल बनाने पर जोर बढ़ सकता है। इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। भारत ने इसी दिशा में इस साल देशभर में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य यानी E20 लागू किया है। हालांकि, कुछ वाहन चालकों ने चिंता जताई है कि ज्यादा इथेनॉल मिला पेट्रोल पुराने वाहनों के इंजन और उनके पुर्जों पर असर डाल सकता है।
मक्का से बने इथेनॉल की खरीद कीमत भी घटाई
तेल कंपनियों ने मक्का से बने इथेनॉल के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन में भी कटौती की है। टेंडर के मुताबिक, यह प्रोत्साहन 5.79 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर रह गई है। इस बदलाव से इथेनॉल उत्पादकों की कमाई और उत्पादन से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है।
पहले भी चीनी उत्पादन बढ़ाने पर हो रहा था विचार
इससे पहले अगस्त में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की मात्रा सीमित करने पर विचार कर रही थी। इसका मकसद चीनी उत्पादन बढ़ाना और कीमतों को काबू में लाना था। अब ताजा टेंडर में चीनी आधारित कच्चे माल से बने इथेनॉल की खरीद को शामिल नहीं किया गया है। इससे साफ है कि फिलहाल सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दे रही है। -

Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव
इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के पंजाब प्रांत (Punjab Province) में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद मुस्लिम भीड़ ने उसके घर और दुकान में आग लगा दी. घटना के बाद हिंसा (Violence) की आशंका से 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों (Christian families) को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस्लामाबाद में 16 अक्टूबर को एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना पंजाब के घड़ियाल कलां गांव की है, जहां 40 वर्षीय ईसाई व्यक्ति कामरान मसीह एक छोटी फार्मेसी चलाते हैं।रिपोर्ट के अनुसार, घटना से एक दिन पहले पुलिस ने कामरान मसीह को गिरफ्तार किया था. स्थानीय मुसलमानों ने उन पर व्हाट्सऐप ग्रुप में ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो साझा करने का आरोप लगाया था. ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल-मॉर्निंग स्टार न्यूज’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि मसीह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके परिवार और गांव के अन्य ईसाई परिवार भीड़ के हमले के डर से घर छोड़कर भागने लगे. सूत्र के मुताबिक, कई मुसलमान मसीह की दुकान और घर के पास इकट्ठा हुए, विरोध प्रदर्शन किया और दोनों इमारतों में आग लगा दी।
पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों पर उठे सवाल
‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की आलोचना की है. उनका कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल निजी विवादों और दूसरे झगड़ों में किया जा सकता है, जिसका सबसे बुरा असर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ता है. 22 जुलाई को एक प्रमुख अल्पसंख्यक समूह ने पाकिस्तान पर इन कानूनों के दुरुपयोग को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था. समूह ने झूठे आरोपों, आरोपियों के खिलाफ भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यकों को ऐसी घटनाओं के नतीजों से बचाने में नाकामी का मुद्दा उठाया।
मानवाधिकार संगठन ने न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल
‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक हैं. संगठन का कहना है कि इनका धार्मिक अल्पसंख्यकों पर गहरा असर पड़ता है और सरकारी संस्थाएं इनके दुरुपयोग को रोकने में लगातार विफल रही हैं. वीओपीएम ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक यह है कि वह निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से बचाने में सक्षम नहीं रही है. संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियां ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही हैं. उसके मुताबिक, झूठे आरोप लगाने वालों को जवाबदेह नहीं ठहराए जाने से ऐसा संदेश जाता है कि इस तरह की हरकतें बिना किसी परिणाम के जारी रह सकती हैं. इससे कानूनी व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर होता है।
रिमशा मसीह का मामला भी उठाया
वीओपीएम ने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित पाकिस्तानी ईसाई लड़की रिमशा मसीह के मामले का भी जिक्र किया. उस पर कुरान के अपमान का आरोप लगाया गया था, लेकिन बाद में सामने आए सबूतों से आरोप गढ़े जाने की बात सामने आई. रिमशा को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, तब तक उसके परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ा था. संगठन का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि अदालत में तथ्यों की जांच होने से पहले ही कोई व्यक्ति ईशनिंदा जैसे गंभीर आरोपों का शिकार बन सकता है।रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।
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US: ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव को बताया बेहदअहम….. , बोले- मुझे उम्मीदवार समझकर करें वोटिंग
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने आगामी मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) को देश के लिए बेहद अहम बताया है. 16 अक्टूबर को जॉर्जिया के डाल्टन में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने समर्थकों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में वोट डालने की अपील की. ट्रंप ने कहा कि इस चुनाव में लोग ऐसा समझें, जैसे वह खुद भी बैलेट पर उम्मीदवार हों।ट्रंप ने कहा कि जब वह चुनाव लड़ते हैं, तब उन्हें 49 फीसदी ज्यादा वोट मिलते हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके उम्मीदवार न होने पर लोग उतनी संख्या में वोट करने नहीं पहुंचते. ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समर्थकों को मतदान करना होगा।
‘हमारे काम को हमसे छिनने नहीं दे सकते’
रैली में ट्रंप ने कहा कि यह शायद अमेरिका के इतिहास का सबसे अहम मिडटर्म चुनाव है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे काम किए हैं, जैसा पहले कभी नहीं हुआ. उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे वोट डालने जरूर जाएं. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को पहले से ज्यादा महान बनाया गया है. उनकी सरकार की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के लिए मतदान जरूरी है. उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती दो सालों को भी बेहद सफल बताया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दो साल पूरे होने में अभी चार महीने बाकी हैं।ट्रंप के संबोधन के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया. इस दौरान कई लोगों को कार्यक्रम स्थल से बाहर ले जाया गया. इसके बाद ट्रंप ने कहा कि ये लोग पैसे लेकर प्रदर्शन करने आए थे. उन्होंने कहा कि वे पैसे लेकर आए प्रदर्शनकारी हैं. हमारे यहां ऐसे दो या तीन लोग थे.
अर्थव्यवस्था और रोजगार पर किए दावे
ट्रंप ने रैली में अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए रोजगार, व्यक्तिगत आय और गरीबी दर को लेकर कई दावे किए. उन्होंने कहा कि देश में पहले से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं और व्यक्तिगत आय अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका में गरीबी दर ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में नई फैक्ट्रियां बन रही हैं. उनके मुताबिक, कार और दवा कंपनियां भी बड़े निवेश कर रही हैं।रैली के दौरान ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ रखने को लेकर भी मजाक किया. उन्होंने कहा कि उनके पास गोल्फ कोर्स और झील है और अब वह एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी चाहते हैं. ट्रंप ने इस विचार को एक मजाकिया अंदाज में पेश किया और कहा कि अब केवल एक महासागर की कमी है. रैली में ट्रंप का मेन मैसेज आगामी मिडटर्म चुनाव में वोटिंग को लेकर था. उन्होंने समर्थकों से वोट डालने की अपील करते हुए कहा कि चुनाव में उनकी सरकार के कामकाज का भविष्य दांव पर है।
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तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दीपके पर शिकंजा, हिरासत के बाद आज मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई शुरू की है। शनिवार को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या अभिजीत दीपके को भी पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तरह तिहाड़ जेल भेजा जा सकता है। हालांकि फिलहाल उनके मामले में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है और आगे की कार्रवाई मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर करेगी।रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को अभिजीत दीपके को झंडेवालान इलाके से उस समय हिरासत में लिया जब वह लहरा दो तिरंगा प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे। इसी दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारु रखने के लिए कई अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया था।पुलिस ने दीपके के खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना है। वहीं CJP ने उनकी हिरासत के दौरान परिवार के सदस्यों वकीलों और पार्टी के लोगों को उनसे संपर्क करने में परेशानी होने का आरोप लगाया था। इस मामले में अब मजिस्ट्रेट की सुनवाई और पुलिस की ओर से रखे जाने वाले तथ्यों पर सबकी नजर है।अभिजीत दीपके के लिए यह पहली कानूनी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ हिरासत में लिया गया था। अगले दिन तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय तीनों को 50-50 हजार रुपये के जमानत-सह-मुचलके पर रिहा किया गया था। उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने की शर्त स्वीकार की थी।लेकिन कुछ ही दिनों बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को फिर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया और पहले से लागू शांति संबंधी शर्तों का उल्लंघन किया। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं। इसी घटनाक्रम के कारण अब अभिजीत दीपके के पुराने बॉन्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।शांति बनाए रखने के लिए लिया जाने वाला बंधपत्र एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत संबंधित व्यक्ति से तय अवधि तक शांति भंग नहीं करने और अच्छा आचरण बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। यदि पुलिस को बाद में शर्तों के उल्लंघन की आशंका होती है तो वह कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और अदालत में उसका साबित होना अलग-अलग बातें हैं। अभिजीत दीपके के मामले में भी यह तय होना बाकी है कि पुलिस की नई कार्रवाई किन तथ्यों पर आधारित है और क्या पुराने बॉन्ड की किसी शर्त का उल्लंघन हुआ है।BNSS की धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र से संबंधित है। इसके तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने का बंधपत्र भरने को कह सकता है। वहीं धारा 170 संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए कुछ परिस्थितियों में पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी की शक्ति देती है। इस प्रावधान के तहत हिरासत की अवधि और आगे की कार्रवाई कानून में तय शर्तों के अधीन होती है।दूसरी ओर नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया है। इस तरह दोनों की हिरासत के बाद कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ी है। अब अभिजीत दीपके की पेशी में यह महत्वपूर्ण होगा कि मजिस्ट्रेट पुलिस की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर क्या रुख अपनाते हैं। उन्हें तिहाड़ जेल भेजा जाएगा या कोई अन्य आदेश दिया जाएगा यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। -

यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें
सना। यमन (Yemen) के बंदरगाह शहर अदन ( Port City Aden) के एयरपोर्ट (Airport) पर शुक्रवार रात दो मिसाइलों से हमला हुआ. स्थानीय पुलिस ने इसके लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) को जिम्मेदार ठहराया है. अधिकारियों का कहना है कि हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. दस दिन से भी कम समय में एयरपोर्ट पर यह दूसरा हमला बताया गया है।
विमान से करीब 500 मीटर दूर गिरीं मिसाइलें
यमन सरकार के सूचना मंत्री ने बताया कि मिसाइलें यमनिया एयरवेज के एक प्लेन से करीब 500 मीटर दूर गिरीं. यह विमान उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था. एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि विमान में सवार यात्रियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी सबा ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि समूह ने एयरपोर्ट के पास स्थित एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था. अधिकारी के मुताबिक, इस ठिकाने पर सऊदी नेतृत्व वाली सेना का कमांड सेंटर और हथियारों का भंडार है।
दो दिन में अदन में दूसरा बड़ा हमला
अदन में दो दिन के अंदर यह दूसरा बड़ा हमला है. इससे पहले गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन के परिसर पर हमला किया था. यह परिसर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का केंद्र है. उस हमले में पांच लोगों की मौत हुई थी. अधिकारियों के मुताबिक, 7 अक्टूबर को भी अदन एयरपोर्ट पर दो मिसाइलें दागी गई थीं. उस हमले में भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।यमन के परिवहन मंत्रालय ने हमले को जरूरी बुनियादी ढांचे और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश बताया. मंत्रालय ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोहियों की कार्रवाई से आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
दरअसल, यमन में हाल के महीनों में लड़ाई फिर तेज हुई है. यह संघर्ष व्यापक ईरान युद्ध से जुड़े तनाव के बीच बढ़ा है. हूती विद्रोहियों ने पड़ोसी सऊदी अरब के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाया है.
लाल सागर और बाब अल मंदेब स्ट्रेट पर भी तनाव
हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तटीय इलाकों में बाब अल मंदेब स्ट्रेट के पास भी अपनी पकड़ बढ़ाई है. यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और होर्मुज स्ट्रेट के विकल्पों में गिना जाता है.हूती विद्रोहियों को इस इलाके से हटाने और खोया हुआ क्षेत्र वापस लेने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इस बीच यमन के ताइज जैसे शहरों में आम नागरिकों को भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती लड़ाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे
बैतूल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में दूध और केला (Milk and Banana) का सेवन करने के बाद 32 बच्चों की तबीयत खराब (32 Children ill) हो गई है. बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों को परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिया गया था।मामला बैतूल के भीमपुर क्षेत्र का है जहां एक साथ 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया. दूध और केले का सेवन करने के बाद बच्चों को अचानक उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद सभी को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।
भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चिखली के ग्राम भाडरी का है. यहां परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले,.बरबटी के बीज दिया गया था. इनके सेवन के बाद 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।
SDM और CMHO सहित सीनियर अधिकारी भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और बच्चों के उपचार की जानकारी ली. राहत की खबर यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है. बैतूल सीएमएचओ संजीव शर्मा का कहना है कि परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिए गए थे। इसके सेवन के बाद बच्चों को उल्टियां होने लगीं, उन्हें भी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया है. फिलहाल सभी की स्थिति स्थिर है और दूध का सैंपल ले लिया गया है।
अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे सुमरत कास्दे का कहना है कि उसका बच्चा कुटीर गया था, जहां उसे दूध और केला दिया गया था. इसके बाद स्कूल गया, वहां उसने कुछ नहीं खाया और स्कूल से पता चला कि बच्चों को उल्टियां हो रही हैं तो उन्हें अस्पताल लेकर आए।
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Ind vs WI: पांचवां T20 मैच आज बेंगलुरु में… भारत हारा तो 24 साल बाद वेस्टइंडीज टीम रचेगी इतिहास
बेंगलुरु। भारत और वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज (Five-match T20 series) का निर्णायक मुकाबला शनिवार, 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम (M. Chinnaswamy Stadium, Bengaluru) में खेला जाएगा. सीरीज फिलहाल 2-2 से बराबर है, लेकिन इस मुकाबले से पहले मौसम ने टीम इंडिया की टेंशन बढ़ा दी है। बारिश (Rain) के कारण मैच में रुकावट आने की आशंका है. अगर भारत (India) यह मुकाबला हार जाता है, तो वेस्टइंडीज (West Indies) के पास 24 साल बाद भारतीय जमीन पर किसी भी फॉर्मेट की सीरीज जीतने का मौका होगा।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, शनिवार को बेंगलुरु में आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे. बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने के एक-दो दौर देखने को मिल सकते हैं। विभाग ने आकाशीय बिजली के साथ तूफान की चेतावनी भी दी है. मौसम विभाग के अनुसार, शहर में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री और अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
वहीं, BBC की मौसम रिपोर्ट के मुताबिक- उपलब्ध प्रति घंटा पूर्वानुमान में भी बारिश की आशंका काफी ज्यादा दिखाई गई है. शाम 5 बजे बारिश की संभावना 66 फीसदी है. शाम 6 बजे यह 68 फीसदी, 7 बजे 69 फीसदी और रात 8 बजे 70 फीसदी तक पहुंच जाती है. रात 9 बजे भी बारिश की संभावना 70 फीसदी और 10 बजे 69 फीसदी दिखाई गई है. ऐसे में मैच शुरू होने के समय और उसके बाद भी बारिश खलल डाल सकती है।
क्या बारिश धुलवा देगी पूरा मैच?
बारिश का खतरा जरूर है, लेकिन अभी पूरे मैच के धुलने की पुष्टि नहीं की जा सकती. अगर बारिश थोड़ी देर के लिए होती है, तो मैदान खेलने लायक होने पर मुकाबला देरी से शुरू हो सकता है. हालांकि, लगातार बारिश या गरज-चमक के कारण ओवर कम करने की नौबत भी आ सकती है।एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की ड्रेनेज व्यवस्था पानी निकालने में मदद करती है. इसके बावजूद लगातार बारिश होने पर मैच समय पर शुरू कराना चुनौती बन सकता है. सीरीज 2-2 से बराबर होने के कारण दोनों टीमें हर हाल में निर्णायक मुकाबला पूरा करना चाहेंगी।
बल्लेबाजों के लिए अच्छी पिच, ओस भी डाल सकती है असर
बेंगलुरु की पिच को आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार माना जाता है. IPL में भी यहां बड़े स्कोर देखने को मिलते हैं, बशर्ते पिच की तैयारी में कोई समस्या न हो. लेकिन इस बार खिलाड़ियों की रणनीति पर पिच से ज्यादा मौसम का असर पड़ सकता है।अगर मैच शुरू होकर देर शाम तक चलता है, तो ओस भी भूमिका निभा सकती है. गीली गेंद के कारण गेंदबाजों को ग्रिप बनाने और गेंद पर नियंत्रण रखने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को फायदा मिलने की संभावना रहेगी. टॉस के समय परिस्थितियों का आकलन करना दोनों टीमों के लिए अहम होगा।
24 साल बाद इतिहास रचने का मौका
वेस्टइंडीज ने 2002 के बाद से भारत में किसी भी फॉर्मेट की सीरीज नहीं जीती है. ऐसे में शनिवार का मुकाबला उसके लिए इस लंबे इंतजार को खत्म करने का मौका है. पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर होने के कारण दोनों टीमों के सामने जीत की चुनौती है।हालांकि, बारिश के कारण मुकाबला प्रभावित होता है, तो सीरीज का फैसला भी मौसम और मैच के नियमों पर निर्भर करेगा. फिलहाल भारत और वेस्टइंडीज दोनों की नजरें बेंगलुरु के आसमान पर रहेंगी. निर्णायक मुकाबले में बारिश सबसे बड़ा विलेन बन सकती है।
कैसा है भारत का बेंगलुरु में टी20 रिकॉर्ड
भारतीय टीम आखिरी बार जब बेंगलुरु में कोई टी20 इंटरनेशनल मैच खेली थी तो वो अफगानिस्तान के खिलाफ ‘डबल सुपर ओवर’ वाला मैच था. तब हमारी टीम ने जीत दर्ज की थी. उस मैच के करीब 2 साल बाद बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में टीम इंडिया के सामने वेस्ट इंडीज की टीम है, अभी सीरीज 2-2 से बराबरी पर है. अब शनिवार (17 अक्टूबर) को होने वाले मैच से यह तय होगा कि सीरीज कौन जीतेगा।भारतीय टीम यहां कुल मिलाकर 8 मैच खेली है, जिसमें उसने 4 मैच जीते (डबल सुपर वाला मैच भी शामिल) हैं, 3 मैच में हार मिली है और एक मैच बेनतीजा रहा है।
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बेल आउट पैकेज पर गुजारा करने वाला पाकिस्तान अब विश्व बैंक और IMF में बड़ी भूमिका में
इस्लामाबाद। IMF के बेल आउट पैकेज (Bailout package) से गुजर बसर करने वाला पाकिस्तान (Pakistan) अब बड़ी टेबल पर बैठता हुआ नजर आएगा। जी हां, IMF से 1.2 अरब डॉलर के पैकेज की मंजूरी का इंतजार कर रहा पाकिस्तान अब इस वैश्विक संस्था के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Global Institution Board of Governors) की अध्यक्षता करने जा रहा है। पाकिस्तान सरकार के मुताबिक 1953 के बाद यह पहली बार है, जब इस्लामाबाद इस पद पर बैठेगा। बता दें, इस पद के तहत पाकिस्तान उन बैठकों की अध्यक्षता करेगा, जिनमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर शामिल होते हैं। हालांकि कर्ज देने के मामले में पाकिस्तान की कोई सीधी भूमिका नहीं होगी।पाकिस्तान सरकार की तरफ से बताया गया कि बैंकॉक में हुए विश्व बैंक और IMF की वार्षिक बैठकों के दौरान वहां पाकिस्तान के गवर्नर अहद खान चीमा को 2027 के लिए आगामी अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। पाकिस्तान की तरफ से इस नियुक्ति को एक ऐतिहासिक पल करार दिया गाय है।
कर्ज लेकर पलने वाला देश अब बड़ी भूमिका में
पाकिस्तान अपनी स्थापना के बाद लगातार IMF से बेल आउट पैकेज ले चुका है। 1950 में IMF की स्थापना के बाद करीब 25 बार पाकिस्तान IMF की मदद लेकर अपना देश चलाने की कोशिश कर रहा है। बार-बार IMF के पास जाने से पता चलता है कि पाकिस्तान को अपनी बाहरी देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, देश में महंगाई और फंडिंग का दबाव भी बना हुआ है।वर्तमान की स्थिति में पाकिस्तान IMF से करीब 1.2 बिलियन डॉलर निकालने की जुगत में है। इसमें एक्सटेंटेड फंड फैसिलिटी और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए दी जाने वाली मदद शामिल है। लेकिन इस पैसे को निकालने के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है, जो कि अभी तक मिली नहीं है।
पाकिस्तान का अर्थव्यवस्था का मॉडल अस्थिर- विश्वबैंक
आईएमएफ की तरफ से पाकिस्तान को लगातार एक अस्थिर अर्थव्यवस्था वाला देश कहा जाता रहा है। विश्व बैंक ने भी हाल में पाकिस्तान के विकास मॉडल को अस्थिर ही बताया था। विश्व बैंक की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में सार्वजनिक खपत का उच्च स्तर, कम उत्पादकता और भारी मात्रा में कर्ज लेना। अब असली चुनौती यह है कि क्या ये लोन ऐसे विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे भविष्य में किसी और ‘बेलआउट’ (आर्थिक मदद) की जरूरत न पड़े।पाकिस्तान शुरुआत से ही दुनिया के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरता रहता है। एक इस्लामिक देश, जिसके पास परमाणु हथियार है। वह अपने आप की मदद करने के लिए दुनिया को लगातार इस मामले में चैक पर रखता है कि वह आतंकवाद से लड़ रहा है। अगर उसकी मदद नहीं की गई, तो परमाणु हथियार खतरे में पड़ सकते हैं। इसलिए पश्चिम एशिया से लेकर अमेरिका तक पाकिस्तान और उसकी सेना का अपने मन मुताबिक उपयोग करके पैसे के जरिए इस्लामाबाद की सत्ता के संभाले रहते हैं।
शहबाज शरीफ की सरकार के आने के बाद IMF और सऊदी अरब ने खुले मन से पाकिस्तान की मदद की है। IMF का कहना है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद, पाकिस्तान ने अपनी व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है। इसमें मजबूत नीतियों और IMF के लोन कार्यक्रम के तहत मिली मदद ने अहम भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाहियों में वास्तविक GDP में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालाँकि, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में रुकावटों के कारण विकास की गति धीमी हो गई, जिससे पूरे साल के लिए विकास दर 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी … खरगे ने चर्चा के लिए PM मोदी से की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Opposition Leader Mallikarjun Kharge) ने परिसीमन (Delimitation) के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। खरगे की ओर से प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए लिखा गया यह चौथा पत्र है। इससे पहले वह 11 अप्रैल, 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं।
खरगे बोले- पहले चर्चा हो, फिर संसद में लाया जाए विधेयक
खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से कहा कि परिसीमन पर नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी दलों के साथ विस्तार से चर्चा कराई जाए। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक दलों को आपस में विचार-विमर्श करने और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।उन्होंने प्रधानमंत्री को आगाह करते हुए लिखा कि पहले की तरह किसी व्यापक संवैधानिक संशोधन विधेयक को संसद में जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश दोबारा नहीं होनी चाहिए। खरगे के मुताबिक, पहले भी ऐसी कोशिश की गई थी, लेकिन उसे संसद में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला था।
मॉनसून सत्र खत्म हुए 64 दिन, फिर भी दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं
खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त, 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ है। उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालांकि, विपक्षी दलों ने सत्रावसान में देरी पर सवाल उठाए हैं। उन्हें आशंका है कि सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
अप्रैल में भी उठाई थी सर्वदलीय बैठक की मांग
खरगे ने पत्र में बताया कि उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। उनके मुताबिक, सरकार ने उस मांग पर बैठक नहीं बुलाई।इसके बाद 14 अप्रैल, 2026 की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। 17 अप्रैल को परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। यह मोदी सरकार की ओर से लाया गया पहला संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसे संसद में हार का सामना करना पड़ा।
दोबारा विधेयक लाने की अटकलों के बीच बढ़ी सियासी हलचल
विधेयक गिरने के बाद से इस बात की अटकलें लगाई जाती रही हैं कि पर्याप्त संख्या बल जुटाने के बाद सरकार इसे दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि, खबर प्रकाशित होने तक विधेयक फिर से पेश नहीं किया गया था।खरगे ने अपने ताजा पत्र में एक बार फिर स्पष्ट किया कि परिसीमन के नए प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने और उन्हें संसद में विचार के लिए लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को चर्चा का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी दलों और संबंधित पक्षों को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है।