Author: bharati

  • संजय राउत बोले CJI से माफी मांगने को तैयार, चुनाव चिह्न के मामले में अब तक नहीं मिला न्याय

    संजय राउत बोले CJI से माफी मांगने को तैयार, चुनाव चिह्न के मामले में अब तक नहीं मिला न्याय


    नई दिल्ली। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर माफी मांगने की पेशकश की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जवाब मांगे जाने के बाद राउत ने कहा कि यदि गुस्से में उनके मुंह से कोई अनुचित शब्द निकल गया है तो वह दस बार माफी मांगने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि उन्होंने इसके साथ ही कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा करना भी न्यायपालिका की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और न्यायिक हलकों में विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
    मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि वह शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर पिछले चार साल से न्याय की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक इस मामले में लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा करने के कारण उनके भीतर नाराजगी है। इसी गुस्से में यदि उनसे कोई अनुचित टिप्पणी हो गई है तो वह उसके लिए माफी मांगने को तैयार हैं। राउत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अदालत की अवमानना करना नहीं था और न्यायपालिका के प्रति उनका सम्मान बना हुआ है।
    यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद बढ़ा जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ संजय राउत की टिप्पणियों पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
    राउत ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट को न्याय की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए आखिरी सहारा बताया। उन्होंने कहा कि वह न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणियों को चुनाव में कथित अनियमितताओं राजनीतिक दलों में दलबदल और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर जनता में मौजूद असंतोष के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
    विवाद की पृष्ठभूमि में विपक्षी नेताओं और मुख्य न्यायाधीश के बीच मुलाकात से जुड़ा घटनाक्रम भी है। खबरों के मुताबिक राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहता था। बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश की आलोचना की और न्यायाधीशों तथा राजनीतिक नेताओं के बीच कथित बातचीत को लेकर भी टिप्पणियां कीं।
    इन बयानों के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राउत और निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति मांगी। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राउत की याचिका पर प्रारंभिक रूप से विचार करने की सहमति जताई थी। हालांकि उनसे अपने आचरण को लेकर स्पष्टीकरण देने की बात भी कही गई।
    संजय राउत ने दोहराया कि उन्हें न्यायपालिका से गलत कामों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है। उन्होंने माफी मांगने की तत्परता जताने के साथ लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा भी उठाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्पष्टीकरण पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को लेकर आगे क्या निर्णय होता है।

  • दिल्ली में तिरंगा मार्च के बाद बढ़ा विवाद, तिहाड़ में हाई सिक्योरिटी के बीच रखे गए CJP नेता, CCTV से हर वक्त नजर

    दिल्ली में तिरंगा मार्च के बाद बढ़ा विवाद, तिहाड़ में हाई सिक्योरिटी के बीच रखे गए CJP नेता, CCTV से हर वक्त नजर


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तार किए गए कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं को अलग-अलग सेल में रखा गया है और उनकी गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे नजर रखी जा रही है। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेल के बाहर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। साथ ही जेल प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि वे दूसरे कैदियों के संपर्क में न आएं।
    बताया गया है कि 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। पुलिस का कहना है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद वे कथित तौर पर शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जेल में दाखिल होने के बाद दोनों नेताओं को अलग-अलग कैदी नंबर दिए गए हैं। आशुतोष रांका को कैदी नंबर 1784 जबकि सौरव दास को 3752 आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है। शुरुआत में दोनों को जेल नंबर दो में रखा गया था लेकिन बाद में रांका को जेल नंबर चार में स्थानांतरित कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों को ऐसे ब्लॉक में रखा गया है जहां कैदियों की संख्या अन्य ब्लॉकों के मुकाबले कम है।
    जेल सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दोनों की सेल में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। निगरानी का एक उद्देश्य उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी संभावित आत्मघाती कदम को रोकना भी बताया गया है। इसके अलावा दूसरे वार्डों में रहने वाले कैदियों को उनके पास जाने की अनुमति नहीं है। गुरुवार को CJP के संयोजक अभिजीत दीपके और संगठन की लीगल हेड रत्ना सिंह उनसे मिलने तिहाड़ पहुंचे थे।
    रिपोर्ट के अनुसार सौरव दास को जेल नंबर दो में रखा गया है। इसी जेल में उमर खालिद भी बंद हैं और पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी यहां रखा गया था। वहीं आशुतोष रांका जेल नंबर चार में हैं। बताया जाता है कि इस जेल का इस्तेमाल पहले विपश्यना ध्यान के लिए भी किया जाता था।
    इस पूरे मामले का संबंध दिल्ली में हुए तिरंगा मार्च और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा सहित करीब 150 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया। इन हिरासतों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए जबकि केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शन को युवाओं के इस्तेमाल के जरिए अराजकता फैलाने की कोशिश बताया गया।
    प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में मार्च निकाला और कई जगह जय हिंद के नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान भी गाया। इसके बाद छात्रों और आइसा तथा एसएफआई के सदस्यों ने मंडी हाउस में प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को वापस लेना और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को वापस लेना शामिल था।
    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़पों की भी खबर सामने आई। मौके पर मौजूद कुछ स्वतंत्र यूट्यूब पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और हूटिंग किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। वामपंथी नेताओं और सांसदों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। फिलहाल यह मामला राजनीतिक विरोध प्रदर्शन पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तार नेताओं की न्यायिक हिरासत को लेकर चर्चा में बना हुआ है।

  • दिल्ली में ट्यूशन टीचर की शर्मनाक करतूत, दो साल तक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप, गर्भवती होने पर खुला राज

    दिल्ली में ट्यूशन टीचर की शर्मनाक करतूत, दो साल तक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप, गर्भवती होने पर खुला राज


    नई दिल्ली। दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में दसवीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। छात्रा ने अपने ट्यूशन टीचर पर करीब दो साल तक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पीड़िता के गर्भवती होने के बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म मारपीट और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और उनके भरोसे का फायदा उठाकर किए जाने वाले अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    पुलिस के मुताबिक पीड़िता अपने परिवार के साथ जहांगीरपुरी क्षेत्र में रहती है और स्थानीय सरकारी स्कूल में दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है। उसके पिता फैक्ट्री में काम करते हैं जबकि मां घरों में साफ सफाई का काम करके परिवार का सहयोग करती हैं। बेटी की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले मंथन नाम के ट्यूशन टीचर से संपर्क किया था। आरोपी करीब तीन साल से छात्रा को पढ़ा रहा था। परिवार को उस पर भरोसा था लेकिन छात्रा की शिकायत के अनुसार इसी भरोसे का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया।
    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले आरोपी उसे प्रैक्टिकल की पढ़ाई कराने के बहाने जीटीबी नगर स्थित एक होटल में ले गया था। वहां उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और वीडियो भी बनाया गया। छात्रा का आरोप है कि आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर वीडियो वायरल करने और परीक्षा में फेल कराने की धमकी दी थी। इस डर के कारण वह लंबे समय तक चुप रही। शिकायत के मुताबिक आरोपी उसे बार बार होटल ले जाता था और उसके साथ यौन शोषण करता था। छात्रा ने इस स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश भी की लेकिन धमकियों के कारण वह अपने परिजनों को पूरी बात बताने का साहस नहीं जुटा सकी।
    इस दौरान छात्रा ने ट्यूशन जाने से इनकार करना शुरू कर दिया था। हालांकि परिजनों को शुरुआत में लगा कि वह पढ़ाई से बचने के लिए ऐसा कर रही है। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि बेटी किसी गंभीर परेशानी से गुजर रही है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव को गंभीरता से लेना और उनसे सहज तरीके से बात करना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि वे बिना डर के अपनी परेशानी साझा कर सकें।
    पीड़िता के मुताबिक आरोपी उसे आखिरी बार 30 सितंबर को जीटीबी नगर स्थित होटल ले गया था। इसके कुछ दिन बाद 3 अक्टूबर को उसे पेट में दर्द होने लगा। परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे जहां जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की जानकारी मिली। इसके बाद परिवार को मामले की गंभीरता का पता चला और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। गुरुवार को छात्रा ने मुखर्जी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। मामले में जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    इसी बीच दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस इलाके में घरेलू सहायिका के साथ कथित दुष्कर्म का एक अलग मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार असम के शोणितपुर जिले की रहने वाली 22 वर्षीय युवती को प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से करीब 20 दिन पहले संदेश विहार स्थित एक फ्लैट में घरेलू काम के लिए रखा गया था। युवती का आरोप है कि फ्लैट मालिक के 58 वर्षीय बेटे राजेश करनानी ने मंगलवार को उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद युवती फ्लैट से निकलकर अपने परिचितों के पास पहुंची और बुधवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    दिल्ली में सामने आए इन दोनों मामलों में पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान और निजता की रक्षा करना जरूरी है। बच्चों को सुरक्षित माहौल देना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की धमकी या शोषण की आशंका होने पर समय रहते पुलिस और संबंधित सहायता सेवाओं तक पहुंचना जरूरी है।

  • 75 हजार साल पुराने कत्ल का खुला राज, गुफा में मिले कंकाल के कंधे में छेद ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

    75 हजार साल पुराने कत्ल का खुला राज, गुफा में मिले कंकाल के कंधे में छेद ने वैज्ञानिकों को चौंकाया


    नई दिल्ली। इराक की एक प्राचीन गुफा में मिला 75 हजार साल पुराना मानव कंकाल इतिहास की एक रहस्यमयी घटना की ओर इशारा कर रहा है। पुरातत्वविदों ने इस कंकाल का अध्ययन करने के बाद आशंका जताई है कि प्राचीन मानव की मौत किसी नुकीले हथियार से लगी चोट के कारण हुई हो सकती है। कंकाल के कंधे की हड्डी में मिला गोल छेद इस संभावना को मजबूत करता है कि व्यक्ति पर भाले जैसी किसी वस्तु से वार किया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मामला इंसानी इतिहास में जानबूझकर की गई हिंसा के सबसे पुराने संभावित उदाहरणों में शामिल हो सकता है। हालांकि शोधकर्ता अभी निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि यह हत्या थी या किसी अन्य परिस्थिति में लगी जानलेवा चोट। इस खोज ने प्राचीन मानवों के जीवन और उनके बीच होने वाली हिंसक घटनाओं को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है।
    यह कंकाल इराक की प्रसिद्ध शानिदार गुफा में मिला था। यह स्थान नेअंडरथल मानवों के अवशेषों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहले भी ऐसे अवशेष मिले हैं जो बताते हैं कि प्राचीन मानव अपने मृतकों के साथ विशेष व्यवहार करते थे और संभवतः उन्हें दफनाने की परंपरा भी निभाते थे। शोधकर्ताओं ने इस नए कंकाल को शनिदार ए नाम दिया है। हालांकि इसके सभी अंग सुरक्षित नहीं मिले हैं। अवशेषों में दायां हाथ लगभग पूरा है जबकि तीन पसलियां छह दांत और बाएं कंधे की हड्डी भी शामिल हैं। इन्हीं हड्डियों की जांच के दौरान वैज्ञानिकों को ऐसी चोट का निशान मिला जिसने पूरे अध्ययन को खास बना दिया।
    शोधकर्ताओं की नजर कंधे की हड्डी के किनारे मौजूद लगभग 1.5 सेंटीमीटर व्यास वाले गोल छेद पर पड़ी। इसके आसपास हड्डी का एक छोटा गोल टुकड़ा भी मिला जो ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी नुकीली वस्तु के दबाव से बाहर की ओर धकेला गया हो। वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि यह छेद व्यक्ति की मृत्यु के बाद जमीन में दबे रहने के कारण बना या चोट जीवनकाल के अंतिम समय में लगी थी। चोट की बनावट और उसके आसपास मौजूद निशानों के अध्ययन से यह संभावना सामने आई कि नुकसान मृत्यु के आसपास के समय हुआ होगा। इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि किसी भाले या दूसरे नुकीले हथियार से वार किया गया हो सकता है।
    वैज्ञानिकों के अनुसार हमला सामने की ओर से हुआ हो सकता है और हथियार सीने या कंधे के क्षेत्र तक पहुंचा होगा। यह भी संभव है कि भाला फेंककर मारा गया हो या नजदीक से जोर लगाकर शरीर में घोंपा गया हो। यदि यह हमला जानबूझकर किया गया था तो यह प्राचीन मानवों के बीच गंभीर हिंसा का एक महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकता है। लेकिन शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि हमलावर कोई दूसरा नेअंडरथल था या चोट शिकार के दौरान हुए हादसे में लगी थी। इसलिए इस घटना को निश्चित रूप से इतिहास का सबसे पुराना कत्ल कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इसे प्राचीन काल में संभावित जानलेवा हिंसा के एक अहम मामले के रूप में देखा जा रहा है।
    इस खोज का महत्व केवल संभावित हत्या तक सीमित नहीं है। कंकाल के दांतों की जांच से भी उस व्यक्ति के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। उसके छह दांत काफी घिस चुके थे और सामने का एक दांत जीवनकाल में ही टूटकर दो हिस्सों में बंट गया था। दांत पर जमा मोटी परत से संकेत मिलता है कि वह टूटने के बाद भी लंबे समय तक जीवित रहा होगा। अनुमान है कि वह कम से कम एक साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहा हो सकता है। चेहरे और जबड़े पर पुरानी चोट लगने की संभावना भी जताई गई है। इससे पता चलता है कि प्राचीन मानवों को चोट लगने के बाद भी लंबे समय तक जीवन बिताना पड़ता था और उनकी शारीरिक स्थिति का अध्ययन उनके जीवन की परिस्थितियों को समझने में मदद करता है।
    शानिदार गुफा में इससे पहले भी गंभीर चोटों वाले नेअंडरथल के अवशेष मिले हैं। वर्ष 2009 में मिले एक वयस्क पुरुष के कंकाल की पसली पर कट का निशान पाया गया था। ऐसे प्रमाण बताते हैं कि प्राचीन मानवों का जीवन केवल भोजन जुटाने और जीवित रहने के संघर्ष तक सीमित नहीं था बल्कि उन्हें चोटों दुर्घटनाओं और संभावित हिंसक टकरावों का भी सामना करना पड़ता था। इराक की इस गुफा से मिला नया कंकाल हजारों साल पुराने जीवन की अनकही कहानी सामने लाता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों और उनकी व्याख्या को सावधानी से समझना जरूरी है।

  • चांद का आकार हो रहा है छोटा, क्या धरती से ओझल हो जाएगा हमारा चंद्रमा, नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

    चांद का आकार हो रहा है छोटा, क्या धरती से ओझल हो जाएगा हमारा चंद्रमा, नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य


    नई दिल्ली। क्या आने वाले समय में चांद आसमान से गायब हो जाएगा? क्या उसका आकार लगातार छोटा होता जा रहा है? चंद्रमा को लेकर सामने आई एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने इन सवालों पर चर्चा तेज कर दी है। प्लेनेटरी साइंस जर्नल में 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित शोध के मुताबिक चंद्रमा धीरे धीरे सिकुड़ रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले लगभग 400 वर्षों में चंद्रमा के आकार में करीब 148 फीट की कमी आई है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि चांद जल्द ही गायब हो जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा का सिकुड़ना एक प्राकृतिक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो बेहद धीमी गति से जारी है। इस शोध में चंद्रमा की सतह पर होने वाले बदलावों और वहां आने वाले भूकंपों को समझने की कोशिश की गई है।
    इस अध्ययन का नेतृत्व स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम के सेंटर फॉर अर्थ एंड प्लेनेटरी स्टडीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक थॉमस आर वाटर्स ने किया। शोधकर्ताओं ने नासा के लूनर रिकॉन्सेंस ऑर्बिटर कैमरा से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों का विश्लेषण किया। करीब 17 वर्षों के दौरान जुटाई गई लाखों तस्वीरों की मदद से वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर होने वाले बदलावों का अध्ययन किया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि चंद्रमा के अंदरूनी हिस्से के ठंडा होने के कारण उसकी बाहरी परत किस तरह प्रभावित हो रही है। अध्ययन के अनुसार चंद्रमा का आंतरिक हिस्सा धीरे धीरे ठंडा हो रहा है जिससे उसकी संरचना में बदलाव आ रहा है और उसका आकार सिकुड़ रहा है।
    वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा के सिकुड़ने की गति बेहद कम है। अनुमान है कि यह हर दस लाख वर्षों में लगभग 6 से 11 सेंटीमीटर तक सिकुड़ सकता है। इतनी धीमी गति के कारण सामान्य परिस्थितियों में इसके आकार में होने वाले बदलाव को देख पाना संभव नहीं है। चंद्रमा का सिकुड़ना किसी अचानक होने वाली घटना का संकेत नहीं है बल्कि लंबे समय से चल रही प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए इस शोध के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि चंद्रमा निकट भविष्य में पूरी तरह गायब हो जाएगा। वैज्ञानिकों की दिलचस्पी इस बात में अधिक है कि इस प्रक्रिया से उसकी सतह और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
    चंद्रमा के सिकुड़ने का एक महत्वपूर्ण परिणाम उसकी सतह पर दरारों और छोटी पहाड़ियों जैसी संरचनाओं का बनना है। वैज्ञानिक इन्हें लोबेट स्कार्प्स कहते हैं। जब चंद्रमा की बाहरी परत सिकुड़ती है तो उसमें दबाव पैदा होता है। इस दबाव के कारण चट्टानों की परतें एक दूसरे के ऊपर खिसक सकती हैं और सतह पर ऊंचे ढाल जैसी आकृतियां बन सकती हैं। शोध में चंद्रमा की सतह पर मौजूद ऐसी संरचनाओं और दरारों का अध्ययन किया गया है। इन बदलावों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चंद्रमा पर आने वाले भूकंप अंतरिक्ष यात्रियों और भविष्य में बनाए जाने वाले ठिकानों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
    धरती पर अधिकांश भूकंपीय गतिविधियां टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं के आसपास होती हैं लेकिन चंद्रमा की संरचना इससे अलग है। चंद्रमा को एक ऐसी खगोलीय पिंड के रूप में देखा जाता है जिसकी बाहरी परत में प्लेटों जैसी सक्रिय व्यवस्था धरती की तरह नहीं है। इसके बावजूद वहां की सतह पर तनाव और दरारों के कारण अलग अलग क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियां हो सकती हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक चंद्रमा की सतह की संरचना को समझने पर जोर दे रहे हैं। भविष्य में जब नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां चंद्रमा पर मानव मिशन भेजेंगी तो लैंडिंग स्थल और संभावित ठिकानों का चयन करते समय इन जोखिमों को ध्यान में रखना होगा।
    कुल मिलाकर चंद्रमा का सिकुड़ना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है लेकिन इससे उसके जल्द गायब होने का खतरा नहीं है। नई स्टडी चंद्रमा के अंदरूनी हिस्से में होने वाले बदलावों और उसकी सतह पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद करती है। वैज्ञानिकों के लिए असली चुनौती यह जानना है कि ये बदलाव भविष्य के चंद्र अभियानों को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं। इस शोध से स्पष्ट होता है कि चंद्रमा आज भी भूवैज्ञानिक रूप से बदलावों से गुजर रहा है और उसकी सतह को समझना अंतरिक्ष विज्ञान के लिए लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

  • दिवाली के बाद इन 4 राशियों का बढ़ेगा आत्मविश्वास, मंगल गोचर से करियर में तरक्की के बनेंगे योग

    दिवाली के बाद इन 4 राशियों का बढ़ेगा आत्मविश्वास, मंगल गोचर से करियर में तरक्की के बनेंगे योग


    नई दिल्ली। दिवाली के बाद ग्रहों की चाल में होने वाला बदलाव ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह को साहस ऊर्जा पराक्रम भूमि और संपत्ति का कारक माना जाता है। जब मंगल अपनी राशि बदलते हैं तो इसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर अलग अलग रूप में देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक 12 नवंबर 2026 को मंगल कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और लगभग 9 मार्च 2027 तक इसी राशि में रहेंगे। मंगल के इस गोचर को करियर कारोबार आर्थिक स्थिति और आत्मविश्वास के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान चार राशियों के जातकों को आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि इन संभावनाओं को निश्चित भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय आकलन के रूप में देखना चाहिए।
    मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है जबकि सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं। ज्योतिष में मंगल और सूर्य के बीच मित्रता का संबंध माना गया है। इसी वजह से सिंह राशि में मंगल का प्रवेश साहस नेतृत्व क्षमता और कार्यक्षेत्र में सक्रियता से जोड़कर देखा जाता है। इस अवधि में कुछ लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है तो कुछ जातक लंबे समय से रुके कामों को पूरा करने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं। आइए जानते हैं किन चार राशियों के लिए मंगल का यह गोचर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    मेष राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जा रहा है। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में अपनी योग्यता साबित करने का मौका मिल सकता है। जो लोग लंबे समय से किसी काम में सफलता पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं उन्हें सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद रह सकती है। कारोबारियों के लिए नई योजनाओं पर काम शुरू करने और अपने काम का विस्तार करने के अवसर बन सकते हैं। हालांकि आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। किसी भी निवेश से पहले जोखिम और संभावित लाभ का आकलन करना बेहतर रहेगा।
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष महत्व रखता है क्योंकि मंगल इसी राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने के अवसर मिल सकते हैं। कारोबार करने वालों के लिए नए संपर्क फायदेमंद साबित हो सकते हैं। सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों को भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का मौका मिल सकता है। हालांकि गुस्से और अहंकार पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। परिवार में किसी तरह की गलतफहमी होने पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर करियर और आर्थिक मामलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकता है। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं इसलिए इस राशि के लिए यह परिवर्तन ज्योतिषीय नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है। नौकरी में नई संभावनाएं तलाश रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं। कारोबारियों को अपने काम में सुधार करने और आय के नए स्रोत खोजने की दिशा में सफलता मिलने की उम्मीद रह सकती है। लंबे समय से अटके कामों को पूरा करने के लिए भी प्रयास तेज किए जा सकते हैं। हालांकि किसी बड़े आर्थिक फैसले से पहले सभी जरूरी जानकारियां जुटाना और सोच समझकर कदम उठाना जरूरी होगा।
    कुंभ राशि के जातकों को मंगल के इस गोचर के दौरान मेहनत और अनुशासन पर विशेष ध्यान देना होगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और कारोबार में साझेदारी से जुड़े अवसर सामने आ सकते हैं। जो लोग अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाना चाहते हैं उन्हें आय और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। योजनाबद्ध तरीके से काम करने और समय का सही उपयोग करने से सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रह सकती है। किसी विवाद में जल्दबाजी से प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहकर स्थिति को समझना बेहतर रहेगा।
    मंगल गोचर के दौरान सभी राशियों के जातकों को अपने व्यवहार और फैसलों में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगल को ऊर्जा और आक्रामकता से जोड़कर देखा जाता है इसलिए गुस्से में निर्णय लेने और बिना योजना के धन खर्च करने से बचना चाहिए। नौकरी कारोबार और निवेश से जुड़े फैसले अपनी वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लेना जरूरी है। कुल मिलाकर 12 नवंबर 2026 को होने वाला मंगल गोचर मेष सिंह वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के लिए नई संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है। सही योजना मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ना ही सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

  • पाटेकर की दरियादिली का भावुक किस्सा, दोस्त की फीस बढ़वाने के लिए प्रोड्यूसर्स को दो घंटे खड़ा रखा

    पाटेकर की दरियादिली का भावुक किस्सा, दोस्त की फीस बढ़वाने के लिए प्रोड्यूसर्स को दो घंटे खड़ा रखा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनसे जुड़े किस्से लगातार सामने आ रहे हैं। पर्दे पर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में भी अपनी बेबाकी और दरियादिली के लिए पहचाने जाते थे। उनके करीबी दोस्त और अभिनेता शिवाजी साटम ने नाना को याद करते हुए ऐसे भावुक किस्से साझा किए हैं जो उनकी शख्सियत के एक अलग पहलू को सामने लाते हैं। शिवाजी साटम के मुताबिक नाना केवल उनके दोस्त नहीं थे बल्कि जीवन के कठिन समय में एक सगे भाई की तरह उनके साथ खड़े रहे। खास तौर पर पत्नी के कैंसर से जूझने के दौरान नाना ने जिस तरह उनकी मदद की उसे याद करते हुए शिवाजी भावुक हो गए।
    मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी एल देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में नाना पाटेकर की याद में आयोजित अठवणीतले नाना नाम की शोक सभा में शिवाजी साटम ने अपनी करीब 40 साल पुरानी दोस्ती के कई किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि नाना के साथ उनका रिश्ता बेहद खास था और हिंदी फिल्मों में काम करने का अवसर दिलाने में भी नाना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिवाजी साटम ने कहा कि जब उन्होंने नाना के निधन की खबर सुनी तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। दोनों के बीच लंबे समय से गहरी दोस्ती थी और नाना ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
    शिवाजी साटम ने बताया कि उनकी पहली हिंदी फिल्म यशवंत में काम करने के पीछे भी नाना पाटेकर का बड़ा योगदान था। फिल्म में पुलिस अधिकारी की भूमिका के लिए निर्माताओं ने शिवाजी से संपर्क किया था लेकिन शुरुआत में वह इस किरदार को निभाने के लिए तैयार नहीं थे। जब उन्होंने मना कर दिया तो निर्माताओं ने नाना से बात की। इसके बाद नाना ने अपने खास अंदाज में दोस्त को समझाया और उन्हें फिल्म करने के लिए राजी कर लिया। शिवाजी के मुताबिक नाना चाहते थे कि उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुरूप हिंदी सिनेमा में अवसर मिलें और वह अपनी पहचान बना सकें।
    दोस्ती का एक और दिलचस्प किस्सा उनकी फीस से जुड़ा है। शिवाजी साटम ने बताया कि जब नाना को पता चला कि उन्हें फिल्म के लिए कितनी रकम दी जा रही है तो वह नाराज हो गए। उनका मानना था कि शिवाजी को अपनी मेहनत के हिसाब से बेहतर पारिश्रमिक मिलना चाहिए था। नाना ने इस मामले में खुद पहल की और निर्माताओं से बात की। शिवाजी ने बताया कि उन्होंने नाना को ऐसा करने से रोकने की कोशिश की थी लेकिन वह नहीं माने। नाना ने निर्माताओं को करीब दो घंटे तक खड़ा रखा और अपने दोस्त के लिए उचित फीस की बात रखी। इस घटना से साफ होता है कि नाना अपने करीबी लोगों के हितों के लिए खुलकर आवाज उठाते थे।
    हालांकि नाना की दोस्ती का सबसे भावुक पहलू उस समय सामने आया जब शिवाजी साटम की पत्नी को कैंसर होने का पता चला। उस दौरान शिवाजी फिल्म गुलाम-ए-मुस्तफा की शूटिंग कर रहे थे। परिवार पर आए इस संकट के कारण उनके लिए काम और पत्नी की देखभाल के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया था। उन्होंने फिल्म छोड़ने तक का विचार कर लिया था लेकिन नाना ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने निर्देशक पार्थो घोष और फिल्म से जुड़े लोगों से बात की ताकि शिवाजी को शूटिंग के बाद घर लौटने का पर्याप्त समय मिल सके। इसके बाद उनका शेड्यूल इस तरह तय किया गया कि वह दोपहर 12 बजे शूटिंग पर पहुंचकर रात 8 बजे तक घर जा सकें।
    शिवाजी साटम ने भावुक होकर कहा कि नाना ने उनके लिए जितना किया उतना शायद उनका सगा भाई भी नहीं कर पाता। उन्होंने बताया कि नाना कभी भी अचानक फोन करके उन्हें अपने फार्म पर बुला लेते थे और दोस्ती को हमेशा सहज बनाए रखते थे। शिवाजी की इन यादों से यह बात सामने आती है कि नाना पाटेकर के लिए दोस्ती केवल साथ काम करने तक सीमित नहीं थी बल्कि मुश्किल समय में जिम्मेदारी निभाने का नाम थी। यही वजह है कि उनके जाने के बाद भी उनके चाहने वाले और करीबी उन्हें केवल एक महान अभिनेता के रूप में नहीं बल्कि एक संवेदनशील और मददगार इंसान के तौर पर याद कर रहे हैं।

  • पूरी रात हिरासत में रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, रिहाई के बाद बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव

    पूरी रात हिरासत में रहीं AISA अध्यक्ष नेहा बोरा, रिहाई के बाद बोलीं- आम नागरिकों से खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव


    नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार तड़के रिहा कर दिया। रिहाई के बाद नेहा ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को दिन या शाम के समय हिरासत में लेकर पूरी रात रखा जाता है और अगले दिन छोड़ा जाता है।

    दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को 16 अक्टूबर की शाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया था। पूरी रात हिरासत में रहने के बाद शनिवार सुबह उन्हें रिहा किया गया।

    ‘किस कानून के तहत पूरी रात हिरासत में रखना जायज?’

    समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में नेहा बोरा ने कहा कि हर तरह से कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ खूंखार अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से ऐसा चलन बना हुआ है, जिसमें लोगों को दिन हो या शाम, कभी भी हिरासत में ले लिया जाता है और पूरी रात रखने के बाद अगले दिन सुबह या शाम को छोड़ा जाता है।

    नेहा ने सवाल उठाया कि किस अधिकार, कानून या आदेश के तहत किसी व्यक्ति को पूरी रात हिरासत में रखना उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कानून के मुताबिक सूर्यास्त के बाद महिलाओं को हिरासत में लेने पर प्रतिबंध संबंधी नियम हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी कार्रवाई हो रही है।

    ‘अराजकता का नैरेटिव फैलाने वाले पहले खुद देखें’

    नेहा बोरा ने दिल्ली में यातायात और आम लोगों की आवाजाही को लेकर भी पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अराजकता और अव्यवस्था का नया नैरेटिव फैलाया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर अराजकता कैसी और किसकी ओर से फैलाई जा रही है?

    उन्होंने आरोप लगाया कि सेंट्रल दिल्ली में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और काम पर जाने के लिए चुने जाने वाले रास्ते बंद मिलते हैं। नेहा ने कहा कि पूरे देश में अव्यवस्था का माहौल बनाया जा रहा है और आम लोगों को राहत मिलनी चाहिए।

    ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग और SIR रोकने की मांग

    AISA अध्यक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अपनी मांग दोहराई। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने की मांग की।

    नेहा ने कहा कि ऐसा होने से आम नागरिक चैन से रह सकेंगे और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। यह मांग CJP के प्रस्तावित मार्च और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संदर्भ में उठाई गई।

    ‘5-6 घंटे तक वकील से संपर्क की कोशिश करती रही’

    नेहा बोरा ने हिरासत के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे नाम, पता और अन्य जानकारियां मांगीं, लेकिन काफी देर तक उन्हें अपनी बात रखने या किसी वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई।

    उन्होंने कहा कि उनके वकील 5-6 घंटे तक उनसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे। बाद में किसी तरह फोन पर संपर्क हो पाने के बाद ही वकील को उनसे मिलने की अनुमति मिली। नेहा ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई लंबे समय से की जा रही है।

    फिलहाल, हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार और कानूनी प्रक्रिया को लेकर नेहा बोरा की ओर से लगाए गए आरोपों पर दिल्ली पुलिस का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।

  • MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम

    MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम


    उज्जैन। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। उज्जैन के पास माकड़ोन फंटे पर बाइक सवारों को बचाने के प्रयास में शर्मा ट्रैवल्स की बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में उतर गई। हादसे में दो बाइक सवारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    वहीं, मैहर जिले में शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे एक ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इससे ट्रक बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़ी बस से टकरा गया। हादसे में चालक की मौत हो गई।

    उज्जैन में बाइक सवारों को बचाने में खाई में उतरी बस
    जानकारी के अनुसार, बस क्रमांक MP-70-P-0161 आगर से उज्जैन आ रही थी। बस माकड़ोन फंटे के पास पहुंची, तभी उज्जैन से माकड़ोन की ओर जा रहे एक बाइक सवार ने अचानक मोड़ ले लिया। उसे बचाने के प्रयास में बस बाइक से टकरा गई और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद बस सड़क किनारे खाई में जा गिरी। इस दौरान एक अन्य बाइक सवार भी बस की चपेट में आ गया।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही घोंसला क्षेत्र के ग्रामीण और राघवी थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। घायलों को एंबुलेंस की मदद से घट्टिया अस्पताल पहुंचाया गया।

    दो बाइक सवारों की मौके पर मौत, कई यात्री घायल
    हादसे में जान गंवाने वाले बाइक सवारों की पहचान महेश, पिता बापू, और मोहन, पिता मांगीलाल, के रूप में हुई है। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गोपाल सिंह नाम का एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुआ है। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। राघवी थाना पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

    मैहर में चालक की तबीयत बिगड़ी, खड़ी बस से टकराया ट्रक
    दूसरा हादसा शुक्रवार शाम मैहर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में हुआ। सीमेंट फैक्ट्री से क्लिंकर लेकर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जा रहा ट्रक रामवन पथ गमन रोड पर उमरी पैला के पास पहुंचा था। इसी दौरान चालक नीरज सिंह (33) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इससे वाहन पर से उसका नियंत्रण हट गया और ट्रक सड़क किनारे खड़ी बस से जा टकराया। हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई। मृतक उत्तर प्रदेश के रायबरेली का निवासी था।

    टायर पंचर होने के कारण सड़क किनारे खड़ी थी बस
    जानकारी के मुताबिक, बस डिंडौरी की ओर जा रही थी। उसमें सवार यात्री चित्रकूट से आंखों का इलाज कराकर लौट रहे थे। रास्ते में बस का टायर पंचर हो गया था, जिसके कारण चालक ने उसे सड़क किनारे रोक दिया था। टायर बदले जाने के दौरान ही बेकाबू ट्रक बस से टकरा गया।

    दोनों हादसों में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। उज्जैन में बस हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, जबकि मैहर में ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ने को दुर्घटना की वजह बताया जा रहा है।

  • MP में दो चक्रवात से बदलेगा मौसम, आज 21 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    MP में दो चक्रवात से बदलेगा मौसम, आज 21 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून भले ही विदा हो चुका है, लेकिन सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश का दौर जारी है। पिछले दो दिनों से ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम केंद्र भोपाल ने शनिवार को प्रदेश के 21 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, रतलाम, झाबुआ, धार, आलीराजपुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश हो सकती है।

    दो चक्रवाती परिसंचरण से चार दिन तक बदला रहेगा मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग के जिलों में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    18 और 19 अक्टूबर को नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सीधी, मऊगंज, सिंगरौली, सिवनी और बालाघाट में बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, 20 अक्टूबर से मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने लगेगी। इसके बाद प्रदेश में तेज बारिश की संभावना कम हो जाएगी।

    उज्जैन और चंबल संभाग के जिलों में पहले भी हुई बारिश

    इससे पहले गुरुवार को चंबल और उज्जैन संभाग के पांच जिलों—श्योपुर, भिंड, मुरैना, नीमच और मंदसौर में बारिश दर्ज की गई थी। शुक्रवार को भी कई इलाकों में मौसम बदला रहा। बारिश के बीच प्रदेश के कुछ जिलों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

    अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस रहा। छिंदवाड़ा में 17.4 डिग्री, इंदौर में 17.6 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18 डिग्री और बैतूल में 18.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इससे रात और सुबह के समय ठंडक महसूस होने लगी है।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी, लेकिन मौसम प्रणालियों की सक्रियता के कारण प्रदेश में एक बार फिर बारिश होने लगी है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के जिलों में भी आंधी और बारिश का असर देखने को मिल रहा है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप नजर आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप निकलने लगी थी, लेकिन अब कई जिलों में बारिश हो रही है और रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिनों तक सक्रिय रहा।

    प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच का 95.9 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में औसत के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई।

    क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसूनी बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो गया है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    इस तरह प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का वितरण असमान रहा। अब मानसून की विदाई के बाद भी सक्रिय मौसमी प्रणालियों के चलते अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है।