Author: bharati

  • आज का राशिफल 18 अगस्त 2026: 3 राशियों को मिलेगा पैसा और सफलता का लाभ, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल

    आज का राशिफल 18 अगस्त 2026: 3 राशियों को मिलेगा पैसा और सफलता का लाभ, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल


    नई दिल्ली । 18 अगस्त 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। ग्रहों की चाल में बनने वाली विशेष स्थिति का असर लोगों के कामकाज धन संबंधी मामलों पारिवारिक जीवन और करियर पर देखने को मिल सकता है। कुछ राशियों के लिए आज आर्थिक लाभ के नए अवसर बन सकते हैं जबकि कुछ जातकों को अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। कारोबार करने वालों के लिए दिन महत्वपूर्ण रह सकता है और नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा 18 अगस्त का दिन।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन मेहनत के परिणाम देने वाला रह सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने की उम्मीद है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आमदनी बढ़ाने का कोई नया रास्ता सामने आ सकता है। हालांकि जल्दबाजी में निवेश करने से बचना बेहतर रहेगा।

    वृषभ राशि के जातकों को आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। कारोबारियों के लिए दिन सामान्य रहेगा लेकिन नई योजना पर काम शुरू करने से पहले अच्छी तरह विचार करना लाभकारी होगा।

    मिथुन राशि के लिए आज का दिन सकारात्मक संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी में तरक्की या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। व्यापार में भी लाभ की संभावना है। किसी पुराने संपर्क से आर्थिक फायदा मिल सकता है। परिवार में माहौल खुशनुमा रहेगा।

    कर्क राशि वालों को आज भावनाओं पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन समझदारी से परिस्थितियों को संभालने में सफलता मिलेगी। धन से जुड़े फैसले सोच समझकर लें। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन खास रह सकता है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति से आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। नौकरी और कारोबार में नई उपलब्धि मिल सकती है। किसी पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ सकती है।

    कन्या राशि वालों को आज अपने काम पर पूरा ध्यान देना होगा। छोटी गलती परेशानी पैदा कर सकती है। हालांकि मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने के संकेत हैं। धन की स्थिति सामान्य रहेगी और परिवार में किसी सदस्य की मदद करनी पड़ सकती है।

    तुला राशि के लिए आज का दिन धन लाभ के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। व्यापार में कोई बड़ा सौदा लाभ दे सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि वालों को आज करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। नई जिम्मेदारी मिलने से व्यस्तता बढ़ सकती है लेकिन इसका फायदा भविष्य में मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बनाई गई योजना सफल हो सकती है।

    धनु राशि के जातकों को आज भाग्य का साथ मिल सकता है। यात्रा से जुड़े काम में लाभ मिलने के संकेत हैं। विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा रहेगा। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सकारात्मक खबर मिल सकती है।

    मकर राशि वालों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहेगा। धन आएगा लेकिन खर्च भी बढ़ सकता है। किसी करीबी से मतभेद होने की संभावना है इसलिए बातचीत में संयम रखें। कार्यक्षेत्र में मेहनत जारी रखने से सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि के जातकों को आज अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है। रुका हुआ काम पूरा होने से राहत मिलेगी। व्यापार में नई डील मिलने की संभावना है। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी।

    मीन राशि वालों के लिए आज का दिन नई उम्मीद लेकर आ सकता है। करियर में बदलाव की योजना बना रहे हैं तो समय अनुकूल रह सकता है। धन संबंधी मामलों में फायदा मिल सकता है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन प्रसन्न कर सकती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 18 अगस्त को बनने वाली ग्रह स्थिति कुछ राशियों के लिए आर्थिक रूप से विशेष फलदायी रह सकती है। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय आकलन पर आधारित होता है। किसी भी बड़े आर्थिक या व्यक्तिगत फैसले से पहले अपनी परिस्थितियों और विशेषज्ञ सलाह को ध्यान में रखना उचित रहेगा।

  • ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद, लेकिन सुरक्षा पर भी सवाल, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका-उत्तर कोरिया में फिर बातचीत की जताई उम्मीद

    ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद, लेकिन सुरक्षा पर भी सवाल, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका-उत्तर कोरिया में फिर बातचीत की जताई उम्मीद


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास में कटौती के फैसले से कोरियाई प्रायद्वीप में एक ओर अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच बातचीत की उम्मीद जगी है, तो दूसरी ओर दक्षिण कोरिया में सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है। ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का हवाला देते हुए सैन्य अभ्यास कम करने का आदेश दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम किम के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की कोशिश का हिस्सा है।

    दरअसल, किम जोंग उन अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को उत्तर कोरिया पर संभावित हमले की तैयारी के तौर पर देखते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते परमाणु हथियारों और रूस के साथ सैन्य सहयोग के चलते उत्तर कोरिया अब पहले से अधिक आत्मविश्वास में है। ऐसे में अमेरिका से बड़ी रियायतें मिले बिना किम के बातचीत की मेज पर लौटने की संभावना कम मानी जा रही है।

    11 दिन का सैन्य अभ्यास शुरू, कटौती पर स्थिति साफ नहीं
    दक्षिण कोरिया और अमेरिका का 11 दिवसीय उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास सोमवार सुबह तय कार्यक्रम के मुताबिक शुरू हो गया। हालांकि, अभ्यास के किन हिस्सों में कटौती की जाएगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रंप के ऐलान से दक्षिण कोरिया में हैरानी है, क्योंकि उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे के बीच अमेरिका उसका प्रमुख सुरक्षा सहयोगी है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सैन्य अभ्यास महंगा होने के साथ उत्तर कोरिया को गलत और आक्रामक संकेत भी देता है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उत्तर कोरिया ने कोई खतरा पैदा नहीं किया और सम्मानजनक रवैया अपनाया। ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को अभ्यास में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया है।

    दक्षिण कोरिया को बातचीत से शांति की उम्मीद
    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि ट्रंप और किम के बीच दोस्ताना बातचीत अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच सार्थक संवाद की शुरुआत कर सकती है। इससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है। दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह इसके लिए जरूरी कूटनीतिक प्रयास करेगा।

    राष्ट्रपति ली जे म्युंग उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने के पक्षधर हैं। सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने सीमा पर लगाए गए लाउडस्पीकर बंद करने समेत कई कदम उठाए हैं। इन लाउडस्पीकरों से पहले पॉप गाने और अंतरराष्ट्रीय खबरें प्रसारित की जाती थीं।

    परमाणु हथियार और रूस से बढ़ता सहयोग चिंता का कारण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु हथियार और रूस के साथ मजबूत होते सैन्य संबंध उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में केवल सैन्य अभ्यासों में कटौती से किम जोंग उन को बातचीत के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा।

    दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया और अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सैन्य सहयोग पर भी बातचीत कर रहे हैं। इससे साफ है कि ट्रंप के फैसले के बावजूद दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

  • रीवा-बालाघाट समेत 14 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, पूर्वी MP में स्ट्रॉन्ग सिस्टम

    रीवा-बालाघाट समेत 14 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, पूर्वी MP में स्ट्रॉन्ग सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम के चलते रीवा और बालाघाट समेत 14 जिलों में मंगलवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, अगले तीन दिन प्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। 24 घंटे के दौरान कुछ जिलों में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है।

    रीवा-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट
    मंगलवार को रीवा और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इसके अलावा टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, कटनी, शहडोल, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, डिंडौरी, सतना, मऊगंज, मैहर, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    पहली बार खुलेंगे बरगी बांध के 9 गेट
    मंडला, डिंडौरी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते इस साल पहली बार बरगी बांध के गेट खोले जाएंगे। मंगलवार 18 अगस्त को सुबह 11 बजे बांध के 9 गेट 0.78 मीटर की औसत ऊंचाई तक खोले जाएंगे। इससे 1,031 क्यूमेक पानी छोड़ा जाएगा। 17 अगस्त की रात 8 बजे बांध का जलस्तर 420.80 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि बांध में पानी की आवक 1,620 क्यूमेक बनी हुई थी।

    40 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी और टीकमगढ़ में सामान्य से 4% से 58% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 1% से 49% तक कम बारिश हुई है।

    15 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    IMD के अनुसार, अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, राजगढ़ और गुना में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    कई मौसम प्रणालियां सक्रिय
    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। इसके अलावा ऊपरी हिस्से में दो अन्य चक्रवाती परिसंचरण बने हुए हैं और दक्षिणी हिस्से से शीयर जोन गुजर रहा है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में तेज बारिश का दौर बना हुआ है। मौसम विभाग ने 17 से 21 अगस्त के दौरान प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई है।

  • छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सरकार, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द; जांच के भी आदेश

    छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सरकार, JSSC-CGL समेत कई परीक्षाएं रद्द; जांच के भी आदेश

    रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मैराथन बैठक के बाद सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। मंत्रियों के साथ तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में टीडीपीएल की ओर से आयोजित परीक्षा को रद्द करने, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की जांच कराने और पुरानी परीक्षाओं की भी समीक्षा करने का निर्णय लिया गया।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से युवाओं की नियुक्ति होती है और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    TDPL की परीक्षा रद्द

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई शिकायतों और अनियमितताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    उन्होंने कहा कि परीक्षा किस तरह और किन नियमों के तहत आयोजित होनी चाहिए, इसे लेकर सरकार सुधार की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए बनाए गए रिफॉर्म पोर्टल में अब अभिभावकों को भी जोड़ा जाएगा।


    रिटायर्ड जज करेंगे JSSC-CGL की जांच

    सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मामले की जांच एसआईटी और सीआईडी की टीम भी कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में सामने आ रहे कुछ तथ्य चौंकाने वाले हैं। उन्होंने दावा किया कि सीजीएल परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़े लोगों तथा कुछ कंपनियों के बीच बड़े नेटवर्क की बात सामने आई है।

    2014 से अब तक की परीक्षाओं की होगी जांच

    सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने का भी फैसला लिया है। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया, नियुक्तियों और उससे जुड़ी एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।

    हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार ने मजबूत कानून बनाए हैं और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की मंशा भी रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

    रिफॉर्म के लिए बनी कमेटी

    परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता से जुड़े सुझाव देगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि परीक्षाएं निर्धारित एसओपी के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाएं तो गड़बड़ी की आशंका काफी कम हो सकती है।

    सरकार के प्रमुख फैसले

    बैठक के बाद सरकार की ओर से सामने आए प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं-

    • TDPL द्वारा आयोजित परीक्षा रद्द की जाएगी।
    • JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच होगी।
    • मामले की जांच SIT और CID भी कर रही है।
    • वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं की जांच की जाएगी।
    • JSSC-CGL से जुड़ी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
    • 14वीं JPSC परीक्षा तथा 2023/25 की बैकलॉग परीक्षा रद्द करने की बात कही गई है।
    • परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित रिफॉर्म कमेटी काम करेगी।
    • रिफॉर्म पोर्टल में अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा।

    सरकार के इन फैसलों को लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जांच के निष्कर्ष और आगे की परीक्षा प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

  • भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश, वैश्विक उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज

    नई दिल्ली ।भारत का मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार के अनुसार भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत योगदान करता है। जलीय कृषि उत्पादन के मामले में भी भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि झींगा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है।

    मत्स्य क्षेत्र का विस्तार सीधे तौर पर बड़ी आबादी की आजीविका से जुड़ा हुआ है। सरकार के मुताबिक देश में करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य किसानों की आजीविका इस क्षेत्र पर निर्भर है। मछली पकड़ने और उत्पादन के अलावा प्रसंस्करण, परिवहन, भंडारण, विपणन और निर्यात जैसी गतिविधियों के जरिए भी मत्स्य मूल्य शृंखला में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होते हैं।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2015 से अब तक मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास और आधुनिकीकरण के लिए 39,272 करोड़ रुपये का संचयी निवेश किया गया है। यह निवेश ब्लू रिवोल्यूशन, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से किया गया है।

    इन योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मत्स्य किसानों को बेहतर बाजार, तकनीक और आय के अवसर उपलब्ध हो सकें।

    मत्स्य क्षेत्र में युवाओं और उद्यमशील किसानों की भागीदारी को भी सरकार महत्वपूर्ण मान रही है। आधुनिक जलीय कृषि तकनीक, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड चेन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे पारंपरिक मत्स्य गतिविधियों को अधिक संगठित और बाजार आधारित बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

    सरकार का मानना है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती दे सकती है। मत्स्य उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता बढ़ने से ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2024 में मंजूरी दी थी। यह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है और वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए लागू की जा रही है। इसके लिए करीब 6,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। इसका उद्देश्य वित्तीय और तकनीकी सहायता के जरिए मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक कमियों को दूर करना, संस्थागत सुधारों को बढ़ावा देना, उत्पादकता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक को अपनाने में मदद करना है।

    योजना के तहत बाजार तक पहुंच मजबूत करने और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बेहतर भंडारण और कोल्ड चेन सुविधाओं का विस्तार भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य पालन विभाग ने योजना के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मानित करना और सरकारी योजनाओं से मिले बदलावों को सामने लाना था। भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता, आधुनिक तकनीक और निर्यात संभावनाओं को देखते हुए मत्स्य क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की ब्लू इकोनॉमी और ग्रामीण रोजगार का अहम आधार बन सकता है।

  • विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह मंगलवार से पूर्ण निर्यात-आयात संचालन के साथ अपने विकास के नए चरण में प्रवेश करेगा। भारत के पहले गहरे पानी वाले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के रूप में विकसित किए गए विझिंजम में अब ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों के साथ प्रत्यक्ष वाणिज्यिक व्यापार संचालन भी शुरू होगा। इसे केरल की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    पूर्ण निर्यात-आयात संचालन की शुरुआत के अवसर पर सुबह 10:45 बजे पहले निर्यात कंटेनर को रवाना किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस शुरुआत के साथ केरल के निर्यातकों को अपने माल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए दूसरे ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

    अब तक विझिंजम मुख्य रूप से ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर विकसित किया गया है। नई व्यवस्था के बाद यहां से केरल और देश के अन्य हिस्सों के निर्यातक सीधे विदेशी बाजारों के लिए कंटेनर भेज सकेंगे। इससे कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे पारंपरिक ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के जरिए माल भेजने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है। इसका असर परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    विझिंजम की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी प्राकृतिक समुद्री गहराई और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति शामिल है। बंदरगाह में करीब 20 से 24 मीटर की प्राकृतिक गहराई है, जिससे यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित हुई है। यह अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग कॉरिडोर से लगभग 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार के प्रमुख मार्गों तक इसकी पहुंच मजबूत होती है।

    परीक्षण संचालन के दौरान स्पेन के वालेंसिया भेजा गया पहला निर्यात कंटेनर इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। अब नियमित निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद कृषि उत्पाद, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, हथकरघा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

    बंदरगाह के विस्तार का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सहायक सुविधाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

    राज्य सरकार इस अवसर के साथ बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास को गति देने के लिए मिशन समुद्र शुरू कर रही है। इसके तहत विझिंजम मैरीटाइम इकोनॉमिक रीजन विकसित करने की योजना है। इसमें आठ औद्योगिक क्लस्टर और तीन नए शहरों को विकसित करने के साथ केरल की करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने इस पहल के लिए 400 करोड़ रुपये का कैटेलिटिक फंड निर्धारित किया है। इसका इस्तेमाल बंदरगाह और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक क्लस्टर, नए शहरों, कार्यक्रम प्रबंधन और क्षमता निर्माण से जुड़ी 14 उप-योजनाओं में किया जाएगा। वर्ष 2031 तक निजी निवेश के जरिए सार्वजनिक निवेश की तुलना में कई गुना अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा करने की उम्मीद जताई गई है।

    विझिंजम के संचालन का जिम्मा अदाणी पोर्ट्स के पास है। मजबूत सड़क और रेल संपर्क के साथ बंदरगाह के विस्तार से केरल के विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। पूर्ण निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद विझिंजम केवल ट्रांसशिपमेंट केंद्र नहीं, बल्कि केरल के लिए वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास का प्रमुख द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा

    बीजेपी ने नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठन मजबूत किया, जानिए राष्ट्रीय अध्यक्ष से बूथ स्तर तक कैसे चलता है पार्टी का ढांचा


    नई दिल्ली : 
    भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में तैयार की गई इस टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बीएल संतोष संगठन महामंत्री के पद पर बने हुए हैं। नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल किए गए हैं।

    नई टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे धीरे तेज हो रही हैं। संगठन में उत्तर प्रदेश के आठ पदाधिकारियों को जगह मिली है। इसके अलावा दिल्ली से 10, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान और उत्तराखंड से चार चार तथा पंजाब और बिहार से दो दो चेहरों को स्थान मिला है। इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।

    बीजेपी की सबसे बड़ी संगठनात्मक विशेषता उसका बहुस्तरीय ढांचा है। पार्टी की संरचना राष्ट्रीय स्तर से शुरू होकर राज्य, जिला, मंडल और बूथ तक जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर तय रणनीति को स्थानीय स्तर तक पहुंचाना और बूथ स्तर से मिलने वाले फीडबैक को ऊपर तक ले जाना है।

    संगठन के शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शक मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय और राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्थान आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन का सर्वोच्च पद होता है। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता तय है तथा कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। इसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पद शामिल होते हैं। राष्ट्रीय महासचिवों में संगठन महामंत्री का पद विशेष महत्व रखता है, क्योंकि संगठन के नियमित संचालन और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी इससे जुड़ी होती है।

    राष्ट्रीय स्तर के बाद राज्य संगठन पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करता है। राज्य परिषद और राज्य कार्यकारिणी इसके प्रमुख अंग हैं। राज्य परिषद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि राज्य कार्यकारिणी संगठन की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाती है।

    प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां करता है। राज्य स्तर पर संगठन महामंत्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और उसकी नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहमति आवश्यक होती है। इससे राष्ट्रीय और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल बनाए रखने की व्यवस्था मजबूत होती है।

    राज्य के नीचे जिला और मंडल स्तर का संगठन आता है। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण इकाई बूथ है। बीजेपी की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत रखना लंबे समय से प्राथमिकता रहा है। बूथ अध्यक्ष स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों का संचालन करता है, जबकि पन्ना प्रमुख मतदाता सूची के एक हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हुए मतदाताओं से सीधे संपर्क करता है।

    संगठनात्मक चुनावों के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,036 जिलों में से 978 में जिला अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका है। इसी तरह 17,743 मंडलों में से 16,469 मंडल अध्यक्ष चुने जा चुके हैं, जबकि 10,70,462 बूथों में से 7,88,197 बूथ अध्यक्षों का चुनाव पूरा हुआ है।

    बीजेपी में संगठन निर्माण की प्रक्रिया को संगठन पर्व कहा जाता है। इसमें बूथ से मंडल, जिला और प्रदेश स्तर होते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक क्रम आगे बढ़ता है। पार्टी के विभिन्न मोर्चे भी इसी ढांचे का हिस्सा हैं। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों के जरिए अलग अलग सामाजिक समूहों तक संगठन की पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। यही बहुस्तरीय व्यवस्था बीजेपी के चुनावी संगठन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।

  • आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर मांगी राय, जोखिम नियंत्रण और आंतरिक अनुपालन मजबूत करने पर जोर

    आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर मांगी राय, जोखिम नियंत्रण और आंतरिक अनुपालन मजबूत करने पर जोर

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी के तेजी से बढ़ते कारोबार और नए डिजिटल लेंडिंग मॉडल से जुड़े जोखिमों को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। केंद्रीय बैंक ने प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर एनबीएफसी से राय मांगी है। इसके साथ ही कंपनियों को मजबूत अनुपालन व्यवस्था, आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन ढांचे पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

    आरबीआई और एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठक में तेजी से विस्तार कर रहे लेंडिंग सेगमेंट से जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों से कहा कि नए उत्पादों और कारोबारी मॉडल से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जाए, ताकि किसी कमजोरी के बड़े संकट में बदलने से पहले उसे नियंत्रित किया जा सके।

    रिवॉल्विंग क्रेडिट ऐसे ऋण या क्रेडिट सुविधा से संबंधित है, जिसमें ग्राहक निर्धारित सीमा के भीतर जरूरत के अनुसार राशि का इस्तेमाल कर सकता है और भुगतान के बाद उपलब्ध क्रेडिट सीमा फिर से उपयोग कर सकता है। इस तरह के उत्पादों के विस्तार के साथ उनके जोखिम और नियामकीय अनुपालन को लेकर भी केंद्रीय बैंक का ध्यान बढ़ा है।

    आरबीआई ने एनबीएफसी के आंतरिक नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। इसके तहत कंपनियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने कारोबार में जोखिमों की नियमित समीक्षा करें और आंतरिक ऑडिट व्यवस्था को प्रभावी बनाएं। खासतौर पर तेजी से विकसित हो रहे तकनीक आधारित उत्पादों में जोखिम की निगरानी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    एनबीएफसी अक्सर टेक्नोलॉजी आधारित लेंडिंग उत्पादों और नए कारोबारी मॉडल को जल्दी अपनाने वाली वित्तीय संस्थाओं में शामिल होती हैं। डिजिटल माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंच, ऋण आवेदन, मूल्यांकन और सर्विसिंग की प्रक्रिया तेज हुई है। ऐसे में इन कंपनियों के अनुभव से मिलने वाली जानकारी भविष्य में उभरते वित्तीय क्षेत्रों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने में मददगार हो सकती है।

    केंद्रीय बैंक एनबीएफसी के नियामकीय ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और मजबूत बनाने पर भी विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनाए रखने के साथ नए कारोबारी मॉडल से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को समय रहते नियंत्रित करना है।

    बैठक में स्व-नियामक संगठनों यानी एसआरओ की भूमिका पर भी चर्चा हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एसआरओ को समानांतर नियामक के रूप में काम नहीं करना चाहिए। उनकी भूमिका उद्योग में नियमों के अनुपालन को बढ़ावा देने और उभरते जोखिमों की पहचान तथा समाधान में सहयोग करने की होनी चाहिए। उन्हें उद्योग की पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में प्रभावी भूमिका निभाने की अपेक्षा की गई है।

    ग्राहक शिकायतों के समाधान को लेकर भी एनबीएफसी को स्पष्ट सलाह दी गई है। कंपनियों से कहा गया है कि वे शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करें और ग्राहकों की शिकायतों का समाधान निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करें। डिजिटल लेंडिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहक सेवा और पारदर्शिता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके साथ ही एनबीएफसी को डिजिटल लेंडिंग से संबंधित मौजूदा नियामकीय ढांचे और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है। ग्राहकों को जोड़ने, ऋण का आकलन करने और सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का महत्व भी बढ़ गया है।

    आरबीआई की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब एनबीएफसी क्षेत्र में नए डिजिटल उत्पादों और कारोबारी मॉडलों का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर उद्योग की राय लेने के साथ केंद्रीय बैंक जोखिम आधारित निगरानी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन सुझावों और नियामकीय समीक्षा के आधार पर एनबीएफसी क्षेत्र के लिए अनुपालन और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

  • ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा

    ₹11200 करोड़ का जेवर एयरपोर्ट और भारी बारिश का दावा! वायरल तस्वीर के बाद सुरक्षा और जलनिकासी पर चर्चा


    नई दिल्ली । नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर ने बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की तैयारियों और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। तस्वीर में एयरपोर्ट के आसपास बड़े स्तर पर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है और पार्किंग तथा सड़क जैसे हिस्से भी जलमग्न नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि भारी बारिश के बाद जेवर एयरपोर्ट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया। हालांकि तस्वीर और उसके साथ किए जा रहे दावे की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    तस्वीर में एयरपोर्ट जैसी इमारत और उसके सामने बड़ी मात्रा में जमा पानी दिखाई देता है। कई वाहन पानी के बीच खड़े नजर आ रहे हैं जबकि आसपास के रास्ते भी जलभराव की चपेट में दिखाई दे रहे हैं। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे भारी बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था की परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ लोग तस्वीर की वास्तविकता पर सवाल उठा रहे हैं।

    जेवर में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इसे दिल्ली एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण एयर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण से क्षेत्र में कारोबार पर्यटन रोजगार और रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जाती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव से जुड़ी कोई भी तस्वीर स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।

    किसी भी बड़े एयरपोर्ट के लिए बारिश के पानी की निकासी बेहद महत्वपूर्ण होती है। रनवे टैक्सीवे पार्किंग एप्रन और यात्रियों के आवागमन वाले हिस्सों में जलभराव रोकना एयरपोर्ट संचालन की अहम जरूरत होती है। खासतौर पर मानसून के दौरान कम समय में होने वाली तेज बारिश के पानी को तेजी से बाहर निकालने के लिए प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम जरूरी होता है। अगर किसी एयरपोर्ट परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो इससे यातायात और संचालन के साथ बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।

    हालांकि वायरल तस्वीर को देखकर सीधे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि पूरा एयरपोर्ट जलमग्न हो गया या परियोजना की पूरी व्यवस्था विफल हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों के साथ कई बार गलत संदर्भ भी जोड़ दिए जाते हैं। तस्वीर पुरानी हो सकती है किसी दूसरे स्थान की हो सकती है या डिजिटल रूप से बदली गई हो सकती है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि के बिना बड़े दावे को तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि एयरपोर्ट प्रबंधन या संबंधित प्रशासन की ओर से बारिश और जलभराव को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। अगर वास्तव में परिसर के किसी हिस्से में पानी जमा हुआ है तो इसकी वजह और जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

    फिलहाल वायरल तस्वीर ने जेवर एयरपोर्ट की बारिश से निपटने की तैयारियों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। लेकिन तस्वीर के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय रिपोर्ट का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।