Author: bharati

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास की पूर्णिमा सनातन परंपरा में अत्यंत पावन मानी गई है। इसे वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा होती है और इस दिन भगवान Vishnu माता Lakshmi भगवान Narasimha तथा Radha Krishna की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से सुख समृद्धि सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक लगने के कारण पूजा में बाधा रहेगी इसलिए 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक शुभ माना गया है।

    फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन स्नान दान जप और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे धन धान्य में वृद्धि होती है और कुंडली में चंद्र दोष होने पर मानसिक शांति मिलती है। व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान अवश्य करना चाहिए तभी व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
    फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि
    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। घर में स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। तिलक पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भोग लगाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। अगले दिन दान पुण्य अवश्य करें।

    विशेष मंत्र और महाउपाय

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है।यह दिन भक्ति श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। विधि विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें

    Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खगोलीय घटना इसलिए खास है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। भारत में भी यह ग्रहण देखा जा सकेगा। आइए ग्रहण से जुड़े 15 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल भाषा में समझते हैं।

    चंद्र ग्रहण कब लगेगा?

    3 मार्च 2026 मंगलवार को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण का समय क्या रहेगा? भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में यह मुख्यतः चंद्रोदय के समय दिखाई देगा।

    क्या यह पूरे भारत में दिखेगा?

    हाँ, पूरे भारत में देखा जा सकेगा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसका अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा। पूर्वोत्तर राज्यों में दृश्य अधिक स्पष्ट रहेगा।

    सूतक काल कब से लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक मान्य होगा।

    ब्लड मून क्या होता है?

    पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँचती, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर लाल प्रकाश चंद्रमा तक जाता है। इससे चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखता है इसे ही ब्लड मून कहते हैं।

    क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं?

    हाँ, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।

    क्या इसे देखने के लिए चश्मा जरूरी है?
    नहीं। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।

    क्या गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए?
    वैज्ञानिक रूप से कोई हानिकारक प्रभाव सिद्ध नहीं है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    क्या ग्रहण के दौरान खाना खा सकते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टि से खाना खाने पर कोई रोक नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल में भोजन न करने की परंपरा है।

    मंदिर कब बंद होंगे?
    अधिकांश मंदिर सूतक काल से ही बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण के पश्चात खुलते हैं।

    क्या ग्रहण का असर राशियों पर पड़ता है?
    ज्योतिष के अनुसार कुछ राशियों पर प्रभाव बताया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

    ग्रहण कितनी देर का होगा?
    कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी, लेकिन भारत में पूरा चरण दिखाई नहीं देगा।

    क्या यह साल का इकलौता चंद्र ग्रहण है?
    नहीं, 2026 में अन्य ग्रहण भी लग सकते हैं, लेकिन 3 मार्च का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।

    ग्रहण क्यों लगता है?
    जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।

    यह घटना क्यों खास है?
    पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का लाल रंग में बदलना एक दुर्लभ और आकर्षक दृश्य होता है, जिसे देखने के लिए खगोल प्रेमी विशेष इंतजार करते हैं। 3 मार्च की शाम आसमान में दिखने वाला ब्लड मून विज्ञान और आस्था दोनों के लिए खास अनुभव होगा। यदि मौसम साफ रहा तो यह नजारा बेहद मनमोहक होगा।

  • डालर चने के दाम पर किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टरों से हाईवे जाम

    डालर चने के दाम पर किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टरों से हाईवे जाम


    खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में डालर चने के कम दाम को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। किसानों ने बावड़ी बस स्टैंड के पास चित्तौड़गढ़-भुसावल राजमार्ग पर ट्रैक्टर खड़े कर रास्ता जाम कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि डालर चने का उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। वर्तमान में 6 से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी हो रही है, जबकि उनकी मांग है कि भाव कम से कम 10 से 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। किसानों के मुताबिक उत्पादन लागत, बीज, खाद और मजदूरी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए मौजूदा दर घाटे का सौदा साबित हो रही है।

    ट्रैक्टरों से रोका यातायात

    आक्रोशित किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क पर खड़े कर हाईवे पूरी तरह जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात बाधित हो गया। यात्री बसें, ट्रक और अन्य वाहन घंटों फंसे रहे। स्थिति की जानकारी मिलते ही एसडीएम वीरेंद्र कटारे और कर्नाटक टीआई बीएल मंडलोई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश की। बाद में किसानों और प्रशासन के बीच मंडी परिसर में बातचीत शुरू हुई।

    वाजिब दाम नहीं तो आंदोलन तेज होगा
    प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि डालर चने के दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। फिलहाल प्रशासन किसानों से संवाद कर रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है। हालांकि किसानों के तेवर देखते हुए यह मुद्दा क्षेत्र में बड़ा आंदोलन बन सकता है।

  • मिडिल ईस्ट संकट का असर, दुबई एयरपोर्ट तीन दिन से बंद-3,000 से अधिक फ्लाइट रद्द

    मिडिल ईस्ट संकट का असर, दुबई एयरपोर्ट तीन दिन से बंद-3,000 से अधिक फ्लाइट रद्द


    नई दिल्ली। सोमवार को दुनिया भर में हवाई यात्रा पर संकट जारी रहा। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद सैकड़ों उड़ानें रद्द की गईं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सोमवार सुबह तक 1,239 उड़ानें पहले ही रद्द हो चुकी थीं। शनिवार को लगभग 2,800 और रविवार को 3,156 उड़ानें रद्द हुई थीं। फ्लाइट रेडार 24 के अनुसार ईरान, इराक, कुवैत, इज़राइल, बहरीन, यूएई और कतर के ऊपर हवाई क्षेत्र लगभग खाली दिख रहा था।

    दुबई और खाड़ी के हवाई अड्डों पर सबसे बड़ा असर


    मध्य पूर्व के प्रमुख हवाई अड्डों को सबसे अधिक झटका लगा है। दुबई एयरपोर्ट तीसरे दिन भी बंद रहा। अबू धाबी और दोहा के एयरपोर्ट या तो पूरी तरह बंद रहे या सीमित सेवाओं के साथ ही संचालित हुए। एमिरेट्स ने दुबई से सभी निर्धारित उड़ानें निलंबित कर दीं, एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी के लिए सेवाएं रोक दीं, और कतर एयरवेज ने कतर के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उड़ान संचालन स्थगित किया। इन तीनों एयरलाइंस ने मिलकर सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द कीं।

    भारत और एशिया पर असर


    संकट का असर भारत पर भी पड़ा। एयर इंडिया ने दिल्ली, मुंबई और अमृतसर से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दीं। यूरोप और एशिया तक कनेक्टिंग फ्लाइट्स बाधित होने से यात्री बाली से फ्रैंकफर्ट तक फंसे हुए हैं। रविवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से 100 उड़ानें रद्द की गईं।

    अनिश्चितता और विमानन उद्योग पर दबाव

    विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचेगा, विमानन उद्योग को वित्तीय नुकसान बढ़ता जाएगा। पायलट और क्रू अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं, जिससे हवाई क्षेत्र खुलने के बाद भी सेवाओं को तुरंत बहाल करना चुनौतीपूर्ण होगा। लेबनान तक संघर्ष फैलने और बेरूत में हवाई हमलों के कारण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बंद हवाई क्षेत्र में तब्दील हो गया।

    वैश्विक प्रभाव


    मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक टकराव, बंद हवाई क्षेत्र और बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक हवाई यात्रा को फिर अस्थिर कर दिया है। यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए यह कोविड-19 महामारी के बाद का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इस संकट की लंबी अवधि में वैश्विक यात्रा की नियमितता पर गंभीर असर पड़ सकता है, और उद्योग को वित्तीय तथा परिचालन दोनों प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ेगा।
  • जन्मदिन पर अपराधी को कंधे पर बैठाया, टीआई दर्शन शुक्ला निलंबित; सीएम डॉ. मोहन यादव की सख्त कार्रवाई

    जन्मदिन पर अपराधी को कंधे पर बैठाया, टीआई दर्शन शुक्ला निलंबित; सीएम डॉ. मोहन यादव की सख्त कार्रवाई


    भोपाल/मुरैना। मध्यप्रदेश में पुलिस की छवि को धक्का पहुंचाने वाले एक वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्रीमोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए मुरैना जिले के जौरा थाना प्रभारी निरीक्षक दर्शन शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में टीआई शुक्ला कथित बाइक चोर गिरोह के सरगनालवकुश शर्मा के कंधे पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। बताया गया कि यह वीडियो थाना परिसर में मनाए गए जन्मदिन समारोह का है, जहां केक काटा गया और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे।

    सीएम के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई
    मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कड़ी नाराजगी जताई और शासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश के बाद मुरैना एसपी कार्यालय से निलंबन आदेश जारी किया गया। आदेश में उल्लेख है कि 28 फरवरी 2026 को थाना प्रभारी जौरा निरीक्षक दर्शन शुक्ला अपने जन्मदिन समारोह के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति लवकुश शर्मा के साथ उपस्थित थे।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लवकुश शर्मा पर थाना कोतवाली क्षेत्र में मोटरसाइकिल चोरी और थाना जौरा क्षेत्र में शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसे मामले दर्ज हैं। ऐसे व्यक्ति के साथ थाना परिसर में जश्न मनाना पुलिस आचरण संहिता के विपरीत माना गया।

    पुलिस रेगुलेशन का उल्लंघन
    आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह आचरण मध्यप्रदेश पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(3)(11) का उल्लंघन है और इससे पुलिस की निष्पक्ष छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसी आधार पर निरीक्षक दर्शन शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

    निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र, मुरैना निर्धारित किया गया है। उन्हें बिना लिखित अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और प्रत्येक गणना में उपस्थित रहना अनिवार्य रहेगा। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

    कर्तव्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या आपराधिक तत्वों से निकटता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई पुलिस महकमे के लिए कड़ा संकेत मानी जा रही है कि शासन अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी को स्वीकार नहीं करेगा।

  • नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट, लोक देवता भीलट देव से समृद्धि की कामना

    नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट, लोक देवता भीलट देव से समृद्धि की कामना


    भोपाल/बड़वानी। किसान कल्याण वर्ष के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश सरकार की पहली कृषि कैबिनेट की शुरुआत आस्था और परंपरा के वातावरण में हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्रि परिषद के सदस्यों ने बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित भीलट देव मंदिर में निमाड़ मालवा के लोक देवता भीलट देव के दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख समृद्धि की कामना की। सतपुड़ा की सुरम्य पहाड़ियों पर बसे इस तपोभूमि में आयोजित कैबिनेट बैठक ने विकास और संस्कृति के समन्वय का संदेश दिया।

    दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निमाड़ मालवा क्षेत्र के आराध्य भीलट देव के आशीर्वाद से जो भी निर्णय लिए जाएंगे, वे किसानों और प्रदेशवासियों के हित में होंगे। मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र को मां नर्मदा का वरदान बताते हुए कहा कि नर्मदा के जल से सिंचित यह भूमि किसानों को समृद्ध और प्रगतिशील बना रही है। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से बड़वानी सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र में खेती को नई मजबूती मिली है।

    उन्होंने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उत्पादन कम हो सकता है, लेकिन इससे मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि होगी। किसानों की आर्थिक उन्नति को ही प्रदेश की समग्र उन्नति का आधार बताते हुए उन्होंने कृषि सुधारों को सरकार की प्राथमिकता बताया।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की भव्यता और सकारात्मक ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि सतपुड़ा की वादियों में बसा नागलवाड़ी का यह धाम आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण है। मंदिर के जीर्णोद्धार में संत श्री सियाराम बाबा के योगदान का भी उन्होंने स्मरण किया। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रि परिषद सदस्यों ने सामूहिक रूप से मंदिर परिसर में फोटो भी खिंचवाया।

    कैबिनेट बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र की कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती के प्रभावी मॉडल, वोकल फॉर लोकल, केला विकास मॉडल, डॉलर चना की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल को उभरती फसल के रूप में प्रोत्साहन, गन्ना आधारित आर्थिक मॉडल, मिशन सिकलसेल उन्मूलन और वन्य ग्राम समृद्धि अभियान जैसी थीम प्रस्तुत की गईं। बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह ने विभिन्न कृषि पहलों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया।

    नागलवाड़ी में आयोजित यह पहली कृषि कैबिनेट केवल प्रशासनिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकार परंपरा, प्रकृति और प्रगति को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। लोक आस्था के आंगन से शुरू हुआ यह संकल्प किसानों की समृद्धि और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास

    रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास


    नई दिल्ली। देशभर में 4 मार्च को होली का उल्लास छाएगा। जहां उत्तर भारत में यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, वहीं दक्षिण भारत में इसका संबंध भगवान शिव और कामदेव की कहानी से माना जाता है। यहां होली को अहंकार के नाश और आत्मशुद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    गर्भगृह में साथ विराजते हैं शिव और कामदेव


    कर्नाटक का Rama Lingeshwara Kamanna Temple अपनी अनोखी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह दक्षिण भारत का पहला मंदिर है, जहां गर्भगृह में भगवान शिव के साथ कामदेव की प्रतिमा स्थापित है। शिवलिंग के समीप ध्यान मुद्रा में विराजमान कामदेव की मूर्ति इस मंदिर को विशेष बनाती है। मान्यता है कि होली के दिन यहां दोनों के एक साथ दर्शन करने से पापों का नाश होता है और जीवन से अहंकार दूर होता है।

    कामदेव और शिव की कथा

    पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामबाण चलाया। तप भंग होने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपना तीसरा नेत्र खोला, जिसकी ज्वाला से कामदेव भस्म हो गए। यह घटना अहंकार के अंत का प्रतीक मानी जाती है।

    राख से खेली जाती है होली


    इसी कथा की स्मृति में इस मंदिर में होली के दिन रंगों की जगह राख का प्रयोग किया जाता है। श्रद्धालु माथे पर राख लगाते हैं, जिसे कामदेव के दहन और अहंकार के नाश का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि शक्ति या सौंदर्य का घमंड क्षणभर में मिट सकता है।

    पांच दिन चलता है उत्सव


    रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का उत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं। भक्त चांदी की वस्तुएं, खासकर चांदी का पालना अर्पित करते हैं। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति अगर श्रद्धा से चांदी का झूला चढ़ाते हैं तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।
  • इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी

    इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के हालिया इजराइल दौरे के बाद ईरान पर हुए हमलों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम मोदी 25 और 26 फरवरी को इजराइल के दौरे पर थे और ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर स्ट्राइक की। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत को पहले से इस ऑपरेशन की जानकारी थी।

    भारत में इजराइल के राजदूतरूवेन अजार ने इन सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीएम मोदी को इस हमले की पूर्व जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन की मंजूरी 28 फरवरी की सुबह दी गई तब तक प्रधानमंत्री मोदी अपना दौरा पूरा कर भारत लौट चुके थे।

    न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना लक्ष्य
    राजदूत अजार ने कहा कि इजराइल का मुख्य उद्देश्य ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। उनका आरोप है कि ईरान दशकों से मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित करने की कोशिश कर रहा है और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्र में अपने प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग हथियार और तकनीक मुहैया कराता है। इजराइल के अनुसार ईरान ने 2027 तक इजराइल को खत्म करने की धमकी दी थी। जून में भी इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे और अब सहयोग से इनकार के बाद फिर ऑपरेशन शुरू किया गया।

    भारत से हुई बातचीत

    राजदूत ने बताया कि इजराइल के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से फोन पर बात की थी। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए संवाद और स्थिरता का समर्थन किया।

    भारत लगातार कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि मौजूदा संकट का हल केवल बातचीत और डिप्लोमेसी से ही संभव है।

    नेतन्याहू की भूमिका
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका भी चर्चा में है। इजराइल ने इन हमलों को प्रिएंपटिव स्ट्राइक बताया है। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इन हमलों में अमेरिका की भागीदारी की पुष्टि की।

    इजराइल में माहौल
    राजदूत अजार के मुताबिक इजराइल में सुरक्षा को लेकर गंभीर माहौल है। उनका कहना है कि देश लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को लेकर भी इजराइल में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। भारत ने साफ किया है कि वह शांति और स्थिरता का पक्षधर है तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

  • इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक

    इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंभीर चिंता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद चिंताजनक हैं और मौजूदा संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है और विश्व में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा जब दो लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और भी मजबूत हो जाती है। वर्तमान संकट का हल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकलेगा इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

    पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नेतन्याहू से फोन पर बातचीत

    इससे पहले सोमवार देर रात प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई और उन्होंने दुश्मनी को जल्द समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन लगातार संपर्क में हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

    जोशी ने चिंतित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार पहले भी संकटग्रस्त देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकाल चुकी है जैसे यूक्रेन संकट के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा जहां भी भारतीय नागरिक हैं उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। घबराने की जरूरत नहीं है सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

    मिडिल ईस्ट में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत का रुख स्पष्ट है संवाद कूटनीति और शांति का मार्ग। अब वैश्विक समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्षेत्र में हालात कब सामान्य होते हैं और तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • हिंसा और ब्लैकआउट: ईरान में बढ़ता मौत का आंकड़ा, दुनिया से कटा देश

    हिंसा और ब्लैकआउट: ईरान में बढ़ता मौत का आंकड़ा, दुनिया से कटा देश


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार को संघर्ष का तीसरा दिन है और राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, Iranian Red Crescent Society ने पुष्टि की है कि देशभर में हुए हमलों में कम से कम 555 लोगों की जान गई है।

    इंटरनेट बंद, बाहरी दुनिया से कटा देश

    साइबर मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks ने बताया है कि ईरान में 48 घंटे से अधिक समय से इंटरनेट सेवाएं ठप हैं। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह शटडाउन सरकार की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में आंशिक कनेक्टिविटी की बात भी कही गई है।

    तेहरान और सनंदाज में ताजा हमले

     मीडिया के अनुसार, पश्चिमी शहर सनंदाज पर मिसाइलों की बौछार की गई, जिसमें रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। समाचार एजेंसी Tasnim News Agency ने मलबे में राहत और बचाव कार्य की तस्वीरें जारी की हैं।

    वहीं सरकारी एजेंसी Islamic Republic News Agency (आईआरएनए) ने बताया कि सनंदाज में तीन लोगों की मौत हुई है। राजधानी तेहरान में भी एक अस्पताल को नुकसान पहुंचने की खबर है। सरकारी ब्रॉडकास्टर Islamic Republic of Iran Broadcasting (आईआरआईबी) द्वारा जारी फुटेज में अस्पताल के बाहर मलबा और टूटी खिड़कियां देखी गईं।

    चीन ने की नागरिक की मौत की पुष्टि


    इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि तेहरान में एक चीनी नागरिक की मौत हुई है। प्रवक्ता माओ निंग ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना जताई और बताया कि 2 मार्च तक लगभग 3,000 चीनी नागरिकों को ईरान से निकाला जा चुका है।

    लगातार हो रहे हमलों और इंटरनेट बंदी के बीच ईरान के हालात पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, इस पर वैश्विक चिंता बनी हुई है।