Author: bharati
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भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक
भोपाल । भोपाल के जंबूरी मैदान में गुरुवार को भोजपाल गरबा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने भजन गायन भी किया और प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से सभी के सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति परंपराओं और विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए उसे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। जिन समाजों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है वे विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। यहां कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी नारायणी हैं और शक्ति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस पराक्रम और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं। शक्ति की भक्ति में ही सभी का कल्याण निहित है। नवरात्रि का पर्व केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें अपनी परंपराओं को समझने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करता है।मुख्यमंत्री ने लोगों से समाज में सद्भाव बढ़ाने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों की सार्थकता तभी है जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो। लोगों को गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाने का संकल्प भी लेना चाहिए। भोजपाल गरबा महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भोजपाल महोत्सव मेला समिति के संयोजक विकास वीरानी और समिति के अध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भोजपाल गरबा महोत्सव लगातार भव्य और व्यापक होता गया है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। गरबा केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह शक्ति की आराधना से मिलने वाली शांति खुशी और उत्साह को सामूहिक रूप से व्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि लोग स्वस्थ और सक्रिय रह सकें।डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में प्रमुख त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक उत्साह के साथ मनाए जाएं। मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सर्दियों में भोपाल उत्सव और जन्माष्टमी जैसे आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर देते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत के बढ़ते मान सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा जताई कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव का परचम पूरी दुनिया में ऊंचा रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों को आगामी दशहरे की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। भोजपाल गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति उल्लास और सांस्कृतिक गौरव के माहौल में हुआ। -

इंदौर में साइबर ठगों का जाल, निवेश के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी, दूसरे मामले में खाते से 51 हजार रुपए गायब
इंदौर । इंदौर में ऑनलाइन ठगी के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में इंटरनेशनल शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर एक युवक से 8 लाख 70 हजार रुपए ठग लिए गए। आरोपी महिला ने युवक को अपने झांसे में लेकर अलग अलग बैंक खातों में नौ बार रकम ट्रांसफर कराई। जब युवक ने निवेश की रकम और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उससे और पैसे मांगे जाने लगे। इसके बाद उसे ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस तथा साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। दूसरे मामले में राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक युवक को पत्नी के मोबाइल पर रिचार्ज कराने के दौरान पता चला कि उसके बैंक खाते से करीब 51 हजार रुपए कट चुके हैं। दोनों मामलों में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।चंदन नगर पुलिस के मुताबिक ताप्ती परिसर निवासी जय कुमार बडोनिया ने शिकायत में बताया कि अप्रैल में उनके पास एक अज्ञात महिला का फोन आया था। महिला ने इंटरनेशनल शेयर मार्केट में निवेश करने का प्रस्ताव दिया और भरोसा दिलाया कि कम समय में अच्छी खासी कमाई की जा सकती है। अधिक मुनाफे की उम्मीद में जय कुमार उसकी बातों में आ गए। इसके बाद महिला ने उन्हें अलग अलग बैंक खातों की जानकारी दी और उनमें रकम जमा कराने को कहा। युवक ने कुल नौ बार में 8 लाख 70 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने अपनी जमा रकम और मुनाफा वापस लेने की कोशिश की तो उनसे अतिरिक्त पैसे मांगे जाने लगे। इस स्थिति से उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि ठगी की रकम बैंक ऑफ इंडिया बंधन बैंक और एक स्मॉल फाइनेंस बैंक के खातों में पहुंची थी। शिकायत में हिंदूस ट्रेडर्स एम इंटरप्राइजेस कलिता इंटरप्राइजेस विलेस एआई टेक्नोलॉजी इंटरप्राइजेस और सोहन वुडन कार्ड सहित कई नामों से जुड़े खातों का उल्लेख किया गया है। पुलिस इन खातों की जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची। मामले में फोन करने वाली महिला सहित अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।दूसरी घटना राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र की है। चोइथराम मंडी के पास राजरानी नगर निवासी करण कोटिया ने पुलिस को बताया कि वह काम से घर लौटे थे। इस दौरान उनकी पत्नी मनीषा ने मोबाइल का बैलेंस खत्म होने की बात कही। करण जब रिचार्ज कराने लगे तो उन्हें बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने का संदेश मिला। इसके बाद उन्होंने खाते से जुड़े भुगतान और लेनदेन की जानकारी जांची तो करीब 51 हजार रुपए कटने का पता चला। यह देखकर वह हैरान रह गए। उन्होंने बैंक में शिकायत दर्ज कराने के साथ साइबर हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया। पुलिस ने इस मामले में भी अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।दोनों घटनाएं ऑनलाइन लेनदेन के दौरान सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करती हैं। शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी और निवेश मंच की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। कम समय में निश्चित या असाधारण मुनाफे का वादा करने वालों से सावधान रहना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अलग अलग खातों में पैसे भेजने से बचना चाहिए। खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। पुलिस अब दोनों मामलों में लेनदेन के रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जांच कर रही है ताकि ठगी में शामिल लोगों तक पहुंचा जा सके। -

रेलवे ट्रैक के लिए ढाई लाख पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चोरल के जंगलों में वन्यजीवों और पर्यावरण को लेकर जताई गई चिंता
इंदौर । इंदौर के चोरल जंगलों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। सिमरोल से चोरल होते हुए बड़वाह तक प्रस्तावित रेलवे ट्रैक के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। गुरुवार को चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोकजे और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे और वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस परियोजना के कारण ढाई लाख से अधिक छोटे बड़े पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत में चोरल के जंगलों के पर्यावरणीय महत्व को सामने रखा। दलील दी गई कि ये जंगल इंदौर और मालवा क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। निमाड़ की ओर से आने वाली गर्म हवाओं को रोकने में भी इन जंगलों का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ ही भूजल स्तर में गिरावट और बारिश के प्राकृतिक चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई गई।याचिका में क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले पांच वर्षों से गर्मियों के दौरान इंदौर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे हालात में यदि ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होती है तो मालवा और निमाड़ के पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। अदालत में रेलवे ट्रैक के डिजाइन में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि पहले के डिजाइन में लगभग 40 से 50 हजार पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान था लेकिन बाद में डिजाइन बदलने से पेड़ों की कटाई का दायरा काफी बढ़ गया।सुनवाई के दौरान रेलवे ट्रैक के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। रेलवे की ओर से ढलान अधिक होने और सिमरोल से बड़वाह तक यात्रा में 30 से 40 मिनट अतिरिक्त लगने जैसी व्यावहारिक समस्याओं का हवाला दिए जाने की बात अदालत में रखी गई। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या वास्तव में परियोजना के लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना जरूरी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी।याचिकाकर्ता ने चोरल जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। अदालत में पेश दलीलों के मुताबिक क्षेत्र में बाघों के 37 और तेंदुओं के 89 पगमार्क दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा चीतल सांभर लोमड़ी मोर और जंगली खरगोश जैसे वन्यजीव भी यहां पाए जाते हैं। आशंका जताई गई कि जंगलों का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि क्षेत्र में लगभग 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियां दुर्लभ होती जा रही हैं और सलाई जैसे पेड़ों का दायरा भी घट रहा है।सुनवाई के दौरान जस्टिस विनय सराफ ने जबलपुर खंडपीठ के एक पुराने आदेश का उल्लेख किया। उस मामले में जंगलों की कटाई पर रोक लगाते हुए सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक छंटाई की अनुमति दी गई थी। इसी संदर्भ में चोरल जंगलों के मामले में भी पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने वन भूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई से जुड़े दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कराने के साथ ही वानिकी वन्यजीव पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। फिलहाल हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से प्रस्तावित कटाई पर विराम लग गया है। अब रेलवे और वन विभाग के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी। -

जेलर 2 के लिए रजनीकांत को मिल रहे 110 करोड़ रुपये, मोहनलाल की फीस 30 करोड़ और विद्या बालन को मिले 6 करोड़
नई दिल्ली । सुपरस्टार रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित एक्शन-कॉमेडी फिल्म ‘जेलर 2’ 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई थी। रिलीज के बाद इसके पहले दिन की कमाई के आंकड़े सामने आए, वहीं फिल्म में नजर आने वाले कलाकारों की फीस भी चर्चा का विषय बन गई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म में रजनीकांत को सबसे अधिक रकम मिलने की बात कही गई है। उनके अलावा मोहनलाल, विद्या बालन, शिवा राजकुमार और जैकी श्रॉफ समेत कई चर्चित कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं।फिल्म के बजट को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, ‘जेलर 2’ को बनाने में लगभग 240 करोड़ से 300 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, यह आंकड़ा आधिकारिक तौर पर पुष्ट बजट नहीं, बल्कि रिपोर्ट में बताया गया अनुमान है। फिल्म में रजनीकांत एक बार फिर अपने खास अंदाज में नजर आ रहे हैं। दर्शकों के बीच उनकी भूमिका को लेकर उत्साह देखने को मिला है और फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाओं की चर्चा भी हुई है।
रजनीकांत की फीस सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, रजनीकांत को ‘जेलर 2’ में अभिनय के लिए करीब 110 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें फिल्म के मुनाफे में भी हिस्सा मिलने की बात कही गई है। हालांकि, मुनाफे में हिस्सेदारी से जुड़ी शर्तों और उसके अनुपात का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। रजनीकांत फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं और उनकी लोकप्रियता को फिल्म की चर्चा का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।मोहनलाल और विद्या बालन को कितनी रकम मिली?
फिल्म में मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल गैंगस्टर मैथ्यू की भूमिका में नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस किरदार के लिए उन्हें लगभग 30 करोड़ रुपये फीस दी गई है। वहीं, विद्या बालन फिल्म में खलनायक की भूमिका निभा रही हैं। उन्हें कथित तौर पर 6 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी दी गई है। इस फिल्म के जरिए विद्या बालन ने तमिल सिनेमा में अपना पदार्पण किया है। उनकी मौजूदगी भी फिल्म के चर्चित पहलुओं में शामिल है।
शिवा राजकुमार, राम्या कृष्णन और जैकी श्रॉफ की फीस
कन्नड़ अभिनेता शिवा राजकुमार फिल्म में नरसिम्हा के किरदार को दोबारा निभाते नजर आ रहे हैं। कहानी में उनका किरदार कर्नाटक के गैंगस्टर के रूप में दिखाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें इस भूमिका के लिए करीब 8 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं, राम्या कृष्णन की फीस लगभग 5 करोड़ रुपये बताई गई है।जैकी श्रॉफ को फिल्म में काम करने के लिए करीब 4 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा मिथुन चक्रवर्ती को लगभग 3.5 करोड़ रुपये फीस दिए जाने की बात कही गई है। मलयालम अभिनेता सूरज वेंजारामूडु भी फिल्म का हिस्सा हैं और रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें अपनी भूमिका के लिए करीब 1 करोड़ रुपये मिल रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर फिल्म की कलाकारों की फीस में काफी अंतर दिखाई देता है, हालांकि सभी रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पहले दिन की कमाई ने खींचा ध्यान
‘जेलर 2’ की रिलीज से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि यह तमिल सिनेमा की बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल हो सकती है। वर्ष 2023 में रिलीज हुई रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर’ की सफलता के बाद इसके दूसरे भाग को लेकर दर्शकों में खास दिलचस्पी थी। नई फिल्म में रजनीकांत के अंदाज और अभिनय की तारीफ किए जाने की चर्चा है।फिल्म की पहले दिन की कमाई को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में 59.50 करोड़ रुपये का आंकड़ा बताया गया है। यह आंकड़ा शुरुआती बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट पर आधारित है। फिल्म का अंतिम प्रदर्शन उसकी आगे की कमाई और दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल ‘जेलर 2’ की फीस, अनुमानित बजट और शुरुआती कमाई को लेकर फिल्म जगत में चर्चा बनी हुई है।
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रीढ़ की सर्जरी से डरने की जरूरत नहीं, इंदौर में 80 डॉक्टरों और मरीजों ने साइकिल चलाकर बताया कैसे लौट सकती है सामान्य जिंदगी
इंदौर । इंदौर में वर्ल्ड स्पाइन डे के अवसर पर रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्पाइन हेल्थ अवेयरनेस साइक्लोथॉन का आयोजन किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 70 से 80 वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन स्पाइन सर्जन और एनेस्थेटिस्ट ने हिस्सा लिया। डॉक्टरों के साथ स्पाइन सर्जरी करा चुके कुछ मरीज भी साइकिल चलाते नजर आए। इस पहल के जरिए लोगों को नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। साथ ही रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर और भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की गई।इस साइक्लोथॉन का आयोजन इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन यानी ISSA की ओर से किया गया। कार्यक्रम में शामिल चिकित्सकों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी शरीर की महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है। इसकी सेहत का असर व्यक्ति की चाल और शारीरिक गतिविधियों से लेकर रोजमर्रा के कामकाज तक पर पड़ता है। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना शारीरिक गतिविधियों की कमी और फिटनेस पर ध्यान नहीं देना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी है। साइक्लोथॉन के माध्यम से डॉक्टरों ने लोगों को अपनी सेहत के लिए समय निकालने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने का संदेश दिया।कार्यक्रम की खास बात यह रही कि हाल ही में स्पाइन सर्जरी करा चुके एक-दो मरीजों ने भी डॉक्टरों के साथ साइकिल चलाई। उनकी भागीदारी का उद्देश्य यह बताना था कि उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिकवरी होने के बाद कई मरीज फिर से सक्रिय जीवनशैली अपना सकते हैं। हालांकि सर्जरी के बाद हर मरीज की स्थिति अलग होती है और व्यायाम या साइकिल चलाने जैसी गतिविधियां शुरू करने का समय इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए।ISSA के सचिव डॉ. अविनाश जैन ने बताया कि समाज में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग यह सोचकर ऑपरेशन कराने से बचते हैं कि इसके बाद वे सामान्य जीवन नहीं जी पाएंगे या उनकी शारीरिक गतिविधियां हमेशा के लिए सीमित हो जाएंगी। ऐसे डर के कारण कई बार लोग समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से भी हिचकते हैं। सर्जरी करा चुके मरीजों को साइकिल चलाते देखना उन लोगों के लिए भरोसा बढ़ाने वाला संदेश है जो इलाज को लेकर असमंजस में रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सही जांच उचित उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया से कई मरीजों को अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लौटने में मदद मिल सकती है।साइक्लोथॉन का नेतृत्व इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एसके लूनावत उपाध्यक्ष डॉ. प्रसाद पटगांवकर और सचिव डॉ. अविनाश जैन ने किया। एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स ऑफ इंदौर के सचिव डॉ. प्रणव महाजन भी आयोजन में शामिल हुए। वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मसंद और डॉ. मनचंदा सहित अन्य चिकित्सकों ने भी अपनी भागीदारी निभाई। आयोजन में शहर के सक्रिय साइकिल राइडर्स ने भी हिस्सा लिया।कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में इंदौर यातायात पुलिस ने सहयोग दिया। आयोजन के अंत में एसोसिएशन की ओर से चिकित्सकों एनेस्थीसिया क्लब के सदस्यों साइकिल राइडर्स और प्रशासन के प्रति आभार जताया गया। वर्ल्ड स्पाइन डे पर आयोजित इस पहल ने रीढ़ की हड्डी की सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सर्जरी के बाद सामान्य जीवन में लौटने की संभावनाओं पर सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि वे नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं और रीढ़ से जुड़ी परेशानी होने पर खुद इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें। -

मुंबई के मॉल में गरबा देखकर भावुक हुईं रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा, बोलीं- भारत छोड़ने पर इन खूबसूरत पलों को बहुत याद करूंगी
नई दिल्ली । नवरात्रि के दौरान मुंबई के एक मॉल में गरबा कर रहे लोगों को देखकर रोमानिया की मारिया एलेक्जेंड्रा भावुक हो गईं। पारंपरिक कपड़ों में सजे लोगों, ढोल की थाप पर थिरकते कदमों और मां दुर्गा की भक्ति से भरे माहौल ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इस अनुभव के दौरान उनकी आंखें भर आईं और उन्हें एहसास हुआ कि जब वह भारत से जाएंगी, तो यहां की संस्कृति और त्योहारों से जुड़े ऐसे यादगार पलों को बहुत याद करेंगी। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।मारिया नवरात्रि के दौरान मुंबई के एक मॉल में आयोजित गरबा कार्यक्रम देख रही थीं। वहां बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक परिधानों में एक साथ नृत्य कर रहे थे। कोई गोल घेरे में घूमकर गरबा कर रहा था, तो कोई संगीत की लय के साथ अपने कदम मिला रहा था। चारों ओर उत्सव का माहौल था। मारिया ने इस दृश्य का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में वह सफेद कुर्ते और झुमकों में दिखाई दे रही हैं। हालांकि, लोगों का ध्यान उनके पहनावे से ज्यादा उस भावुक प्रतिक्रिया पर गया, जो गरबा देखते समय उनके चेहरे पर नजर आई।
मारिया ने बताया कि उस समय उन्हें खुद भी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था कि वह इतनी भावुक क्यों हो गईं। भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव, भारत छोड़ने का विचार या फिर बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ खुशी मनाते देखना, इनमें से कोई भी वजह उनकी भावनाओं से जुड़ी हो सकती थी। उनके लिए यह केवल किसी उत्सव को देखने का अनुभव नहीं था, बल्कि भारत के साथ बने उनके भावनात्मक जुड़ाव को महसूस करने का एक खास अवसर था।
उन्होंने कहा कि इस पल ने उन्हें एहसास कराया कि भारत छोड़ने के बाद वह ऐसे नजारों को बहुत याद करेंगी। त्योहार के दौरान लोगों की खुशी, एक-दूसरे के साथ उनका जुड़ाव और पूरे वातावरण में दिखाई देने वाली उमंग उनके लिए खास बन गई। किसी दूसरे देश में रहकर वहां की संस्कृति को करीब से देखना और उसके भावनात्मक पक्ष को महसूस करना उनके लिए यादगार अनुभव रहा।
मारिया ने गरबा के धार्मिक महत्व पर भी बात की। उनके अनुसार, गरबा केवल संगीत पर किया जाने वाला नृत्य नहीं है, बल्कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के प्रति आस्था व्यक्त करने का माध्यम भी है। इस आयोजन में लोगों की खुशी और उनकी धार्मिक श्रद्धा एक साथ दिखाई देती है। नृत्य करते हुए लोग अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हैं और सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं। मारिया को यही मेल विशेष रूप से प्रभावित कर गया कि यहां उत्सव और भक्ति को एक साथ अनुभव किया जा सकता है।
वीडियो के साथ उन्होंने यह भी लिखा कि इस अनुभव ने उन्हें याद दिलाया कि उन्हें भारत से प्यार क्यों हुआ था। उन्होंने नवरात्रि मनाने वाले लोगों से पूछा कि उनके लिए इस त्योहार का क्या अर्थ है। उनकी इस बात से पता चलता है कि वह केवल उत्सव का दृश्य देखने तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं, बल्कि उसके पीछे की आस्था और परंपरा को भी समझना चाहती थीं।
मारिया के वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने उनकी भावनाओं की सराहना की और कहा कि किसी संस्कृति को समझने का अर्थ उसके रीति-रिवाजों के साथ-साथ उनसे जुड़ी भावनाओं को जानना भी है। कुछ लोगों ने उनके अनुभव को प्रेरणादायक बताया, जबकि अन्य ने उन्हें भारत के दूसरे त्योहारों को देखने की सलाह दी। इनमें दुर्गा पूजा और दिवाली का अनुभव लेने के सुझाव भी शामिल थे।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में त्योहारों को विविध परंपराओं और तरीकों से मनाया जाता है। मारिया के लिए मुंबई के मॉल में गरबा देखना ऐसा ही एक अनुभव बना, जिसने उन्हें भारतीय संस्कृति से अपने जुड़ाव का एहसास कराया। उनकी भावुक प्रतिक्रिया ने यह दिखाया कि कभी-कभी किसी जगह के लोगों को खुशी मनाते देखना भी ऐसी याद बना सकता है, जिसे वहां से दूर जाने के बाद लंबे समय तक याद किया जाए।
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सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग
इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण जलसंकट की आशंका अभी से गहराने लगी है। गर्मी का मौसम आने से पहले ही शहर के हजारों परिवारों को पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इंदौर नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक करीब 85 हजार परिवारों की पानी संबंधी जरूरतें पूरी करने में परेशानी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 52 हजार 262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा जल नहीं पहुंच रहा है। वहीं 33 हजार 37 परिवार ऐसे हैं जिन्हें पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। निगम का यह सर्वे 14 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार वार्ड नंबर 36 के मायाखेड़ी अरंडिया निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे इलाकों में पानी की समस्या अधिक गंभीर बताई गई है। इन क्षेत्रों में करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा जल के कनेक्शन नहीं हैं। मायाखेड़ी और निपानिया में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से सप्लाई भी शुरू कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि शहर के कुछ इलाकों में गर्मी शुरू होने से पहले ही वैकल्पिक जल व्यवस्था की जरूरत पड़ रही है। वार्ड नंबर 16 में भी करीब साढ़े सात हजार परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित बताए गए हैं।नगर निगम की रिपोर्ट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उन परिवारों से जुड़ा है जिनके क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे परिवारों को भी टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है। सर्वे के अनुसार शहर में 33 हजार 37 परिवार इस श्रेणी में आते हैं। वार्ड नंबर 37 में करीब दो हजार परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड 45 में 1800 परिवार वार्ड 51 में 1300 और वार्ड 28 में 1200 परिवारों को टैंकर से पानी देने की जरूरत बताई गई है। वार्ड नंबर 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जलापूर्ति की चुनौती केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां नर्मदा पाइपलाइन नहीं पहुंची है। कुछ इलाकों में नेटवर्क होने के बावजूद जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।जलसंकट की स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। गुरुवार को हुई बैठक में उन्होंने पर्याप्त हाइड्रेंट बनाने और टैंकरों में पानी भरने की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए। महापौर ने यह भी बताया कि नए टैंकर खरीदने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को मांग भेजी गई है। इससे उन इलाकों में पानी की सप्लाई बेहतर करने की कोशिश की जा रही है जहां लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है।इस बार इंदौर में कम बारिश को भी जलसंकट की आशंका की बड़ी वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। इस स्थिति को देखते हुए महापौर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक भी हुई। अब शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और टैंकर व्यवस्था मजबूत करने के उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में बारिश की कमी और मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था के बीच इंदौर के सामने बड़ी चुनौती बनी रह सकती है। -

गरबा एंट्री फीस को लेकर उज्जैन में विवाद, पांडाल में विरोध के बीच भगदड़ जैसे हालात, प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश शुल्क लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से निशुल्क आयोजन की शर्त पर अनुमति दिए जाने के बावजूद कुछ पांडालों में प्रवेश के लिए 150 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक के पास बेचे जाने की शिकायत सामने आई है। गुरुवार रात इस मुद्दे पर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने कई आयोजनों को लेकर विरोध जताया। मित्तल होटल में कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद हंगामा हुआ और आयोजकों ने सभी के लिए प्रवेश निशुल्क करने की बात कही। वहीं दूसरी ओर दो आयोजकों ने अपने कार्यक्रम निरस्त कर दिए। मामले के बाद गरबा आयोजनों की प्रवेश व्यवस्था और प्रशासन की अनुमति की शर्तों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।मित्तल होटल में आयोजित केसरिया रास कार्यक्रम के दौरान हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रवेश पास को लेकर आपत्ति जताई। मौके पर एक युवक ने कार्यकर्ताओं को 1500 रुपये के पास दिखाए। इसके अलावा अलग-अलग दिनों के पास भी सामने आए। जानकारी के मुताबिक यहां प्रवेश के लिए 150 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के पास बेचे जाने की शिकायत भी थी। हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य अर्जुन सिंह भदौरिया ने आरोप लगाया कि आयोजन स्थल पर दो प्रवेश द्वार बनाए गए थे। एक गेट से लोगों को निशुल्क प्रवेश दिया जा रहा था जबकि दूसरे गेट से पास खरीदने वालों को अंदर जाने दिया जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने इसे अनुमति की शर्तों के विपरीत बताते हुए विरोध किया। इसके बाद सभी के लिए प्रवेश निशुल्क करने की बात कही गई।हालांकि केसरिया रास के आयोजक कपिल कसेरा ने पास बेचने के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि सभी पास निशुल्क बांटे गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर सनातनी कार्यक्रम को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह एक ओर कार्यकर्ताओं ने प्रवेश शुल्क वसूले जाने का आरोप लगाया तो दूसरी ओर आयोजक ने पास निशुल्क बांटने की बात कही। ऐसे में पास वितरण और प्रवेश व्यवस्था को लेकर उठे विवाद की पूरी स्थिति संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।उज्जैन के नागदा बायपास स्थित राजाराम रिसोर्ट में भी गरबा आयोजन को लेकर विवाद सामने आया। यहां 13 अक्टूबर से डांडिया बीट नाम से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। इस आयोजन को भी निशुल्क प्रवेश की शर्त पर अनुमति दी गई थी। बुधवार रात बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद प्रवेश द्वार पर भीड़ बढ़ गई और भगदड़ जैसे हालात बनने की जानकारी सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कार्यक्रम बंद करा दिया। इसके बाद आयोजन की अनुमति भी निरस्त कर दी गई। आयोजकों का दावा है कि उन्होंने पास निशुल्क बांटे थे। हालांकि भीड़ के प्रबंधन और प्रवेश व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया।नवरात्रि के दौरान होटल मित्तल एवेन्यू के अलावा राजमहल राजाराम रिसोर्ट आस्था गार्डन परमेश्वरी गार्डन और श्रीराम वन में भी गरबा आयोजन के लिए प्रवेश शुल्क लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हिंदू जागरण मंच ने इन आयोजनों को लेकर विरोध जताया है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निशुल्क आयोजन की अनुमति मिलने के बाद आयोजक प्रवेश के लिए शुल्क नहीं ले सकते।एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि कोठी महल क्षेत्र में गरबा आयोजन की अनुमति के लिए आए आवेदनों में शुल्क या निशुल्क प्रवेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। सभी आयोजकों को शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि कोई भी आयोजक सशुल्क आयोजन नहीं कर सकता और यदि कोई प्रवेश पास बेच रहा है तो पुलिस को उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल उज्जैन में गरबा आयोजनों को लेकर उठे विवाद के बाद प्रवेश व्यवस्था और अनुमति की शर्तों के पालन पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। -

उज्जैन के सती माता मंदिर में पेड़ों पर टंगी सैकड़ों तस्वीरें, शत्रुनाश साधना की मान्यता से जुड़ी अनोखी परंपरा
उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में धार्मिक आस्था और तंत्र साधना से जुड़ी मान्यताओं के बीच एक ऐसा मंदिर चर्चा में है जहां पेड़ों पर महिला और पुरुषों की तस्वीरें टंगी दिखाई देती हैं। कुछ तस्वीरों पर कीलें ठुकी हैं तो कहीं सैंडल और कपड़ों से बने पुतले भी नजर आते हैं। भैरवगढ़ क्षेत्र में विक्रांत भैरव मंदिर के पास स्थित इस स्थान को सती माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे मेलडी माता मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां शत्रुनाश से जुड़े कर्मकांड कराए जाते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर और यहां दिखाई देने वाली इन वस्तुओं को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है।सती माता मंदिर उज्जैन के ओखलेश्वर रोड पर काल भैरव मंदिर के नजदीक स्थित है। मंदिर परिसर के आसपास पेड़ों पर तस्वीरें और दूसरी वस्तुएं टंगी दिखाई देती हैं। मौके पर पहुंची दैनिक भास्कर की टीम को आधा दर्जन से अधिक पेड़ों पर महिला और पुरुषों की तस्वीरें मिलीं। कुछ जगह कपड़े और सैंडल लटक रहे थे तो कहीं नींबू-मिर्च और कपड़ों से बनाए गए पुतले नजर आए। कुछ तस्वीरों पर कीलें भी ठुकी हुई थीं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच इन वस्तुओं को शत्रुनाश से जुड़ी मान्यताओं के साथ देखा जाता है। हालांकि इन कर्मकांडों के पीछे हर व्यक्ति का उद्देश्य एक जैसा है या नहीं इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।सोशल मीडिया पर भी किसी विरोधी की तस्वीर पेड़ पर टांगने को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती रहती हैं। ऐसी सामग्री देखने के बाद कुछ लोग इस स्थान के बारे में जानने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि तस्वीर टांगने या किसी विशेष कर्मकांड से किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस तरह की मान्यताओं को धार्मिक विश्वास और लोक परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी तस्वीर पर कील ठोकने या कपड़े का पुतला टांगने से किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन पर असर पड़ता है ऐसा प्रमाणित नहीं है।तांत्रिक भय्यू महाराज के अनुसार यहां आने वाले कुछ लोग निजी और पारिवारिक विवादों से परेशान रहते हैं। इनमें सास-बहू के झगड़े और विवाहेतर संबंधों से जुड़े विवाद जैसे मामले भी शामिल बताए जाते हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग अपने विरोधियों से छुटकारा पाने की इच्छा लेकर यहां पूजन कराते हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र प्रमाण या आंकड़े सामने नहीं आए हैं। इसलिए मंदिर में होने वाले प्रत्येक कर्मकांड को किसी एक उद्देश्य से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।भय्यू महाराज का यह भी कहना है कि मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग यहां पहुंचते हैं। गुजरात में कुछ तांत्रिक कर्मकांडों पर पाबंदियों के बाद वहां से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने का दावा भी किया गया है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया। उज्जैन का भैरवगढ़ क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां विक्रांत भैरव और काल भैरव मंदिर जैसे धार्मिक स्थल हैं। इसके आसपास चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर जैसे श्मशान घाट भी स्थित हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में भैरव उपासना और श्मशान से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन स्थलों की निकटता अपने आप में यहां होने वाले सभी कर्मकांडों को तंत्र साधना साबित नहीं करती।मंदिर के नाम को लेकर भी स्थानीय स्तर पर अलग-अलग बातें सामने आती हैं। भय्यू महाराज के मुताबिक इसका मूल नाम सती माता मंदिर है और यहां सती माता की चरण पादुकाओं के साथ मेलडी माता की प्रतिमा भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इसे मुख्य रूप से सती माता मंदिर कहा जाता था लेकिन बाद में मेलडी माता नाम का प्रचलन बढ़ा। मंदिर के नाम में यह बदलाव कब और क्यों हुआ इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है।गुजरात की कुछ लोक मान्यताओं में मेलडी माता से जुड़ी एक कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार देवी पार्वती ने अमुहा नाम के राक्षस का वध करने के लिए मेलडी माता का रूप धारण किया था। कुछ परंपराओं में उन्हें मां मसान मेलडी भी कहा जाता है और मसान शब्द को श्मशान से जोड़ा जाता है। ये धार्मिक लोककथाएं और आस्थाएं हैं जिन्हें प्रमाणित ऐतिहासिक घटना नहीं माना जा सकता। उज्जैन का यह मंदिर अपनी अनोखी निशानियों और उनसे जुड़ी मान्यताओं के कारण चर्चा में बना हुआ है लेकिन शत्रुनाश के दावों को प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय विश्वास के रूप में समझना जरूरी है। -

भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
भोपाल । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की चार्जशीट में आरोपों में बदलाव के बाद जमानत याचिका पर नए कानूनी आधारों के साथ विचार किया जाएगा। पहले मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा लगाई गई थी लेकिन जांच के बाद आरोपपत्र में इसे हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया गया है। ऐसे में अब अदालत बदली हुई कानूनी स्थिति और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर जमानत आवेदन पर सुनवाई करेगी।इससे पहले जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने गिरिबाला सिंह को जमानत आवेदन में संशोधन करने की अनुमति दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में दहेज मृत्यु से संबंधित आरोप को हटाने और नए आरोप के अनुरूप जरूरी बदलाव करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इस संशोधन की अनुमति देते हुए कहा था कि बदली हुई परिस्थितियों के आधार पर जमानत पर बहस करने से पहले आवेदन में आवश्यक सुधार किया जाए। CBI की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का आरोप हटाकर धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया है।ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनकी ससुराल में हुई थी। 33 वर्षीय ट्विशा फंदे पर मिली थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। शुरुआती मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और क्रूरता सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। हालांकि ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।मामले में भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। इस आदेश को मृतका के परिजनों और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त कर दिया था। उस समय अदालत ने केस डायरी में दर्ज बयानों और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों सहित कई पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया।ट्विशा के परिजनों ने शुरुआती पोस्टमार्टम और जांच को लेकर सवाल उठाए थे और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दोबारा पोस्टमार्टम किया। CBI की चार्जशीट में शामिल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण फंदे से दम घुटना बताया गया और मृत्यु को आत्महत्या माना गया। रिपोर्ट में ऐसी महत्वपूर्ण चोटों के नहीं मिलने की बात भी कही गई जो हमले या संघर्ष का संकेत देती हों।CBI ने जांच के दौरान डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की। जांच से संबंधित रिपोर्टों में चैट और कॉल रिकॉर्ड सहित ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोपपत्र में कथित मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप रखे हैं। अब गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट बदले हुए आरोपों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करेगा। वहीं ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई संभावित बताई गई है। जमानत पर अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।