Author: bharati

  • शहर के करीब तेंदुए की मूवमेंट से मचा हड़कंप, सिंधिया छत्री पर बैठा दिखा Leopard; वन विभाग सतर्क

    शहर के करीब तेंदुए की मूवमेंट से मचा हड़कंप, सिंधिया छत्री पर बैठा दिखा Leopard; वन विभाग सतर्क


    शिवपुरी शिवपुरी में एक बार फिर तेंदुए की मूवमेंट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार को बाजा हाउस के पास स्थित सिंधिया छत्री की दीवार पर एक तेंदुआ बैठा हुआ दिखाई दिया। तेंदुए को देखकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें तेंदुआ कुछ देर तक छत्री की दीवार पर बैठा नजर आता है और इसके बाद जंगल की ओर भाग जाता है। शहर के रिहायशी इलाके के इतने करीब तेंदुआ दिखाई देने से स्थानीय लोगों के साथ सुबह की सैर करने वालों में भी डर का माहौल है।

    बताया जा रहा है कि सुबह के समय दो बत्ती चौराहे से लेकर बाजा हाउस तक बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक के लिए निकलते हैं। इसी रास्ते के नजदीक तेंदुए की मौजूदगी सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर इस इलाके में सुबह के समय लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में वन्यजीव के दिखाई देने के बाद लोग सतर्क हो गए हैं और कई लोगों ने सुबह अकेले निकलने से भी परहेज करना शुरू कर दिया है।

    बाजा हाउस और सिंधिया छत्री का क्षेत्र माधव टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। जंगल से नजदीकी होने के कारण इस इलाके में वन्यजीवों की आवाजाही पहले भी सामने आती रही है। हालांकि इस बार तेंदुआ शहर के ज्यादा आबादी वाले और रिहायशी इलाके के करीब दिखाई दिया है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों में इसे लेकर ज्यादा चिंता देखी जा रही है। तेंदुए के दिखाई देने का वीडियो सामने आने के बाद आसपास के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

    शिवपुरी में तेंदुए की मौजूदगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले नॉन कोल्हू की पुलिया और झांसी लिंक रोड के आसपास भी तेंदुए को देखे जाने की सूचना सामने आ चुकी है। इन इलाकों में कई बार तेंदुए की मूवमेंट दर्ज होने के बाद वन विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की अपील की थी। जंगल से लगे इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह देता रहा है।

    वन विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में लोगों से कहा गया है कि यदि तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर दिखाई दे तो उसके करीब जाने की कोशिश बिल्कुल न करें। वन्यजीव को देखने के लिए भीड़ लगाने से भी बचना चाहिए। कई बार लोग मोबाइल से वीडियो बनाने के लिए जानवर के काफी करीब पहुंच जाते हैं जिससे वन्यजीव खुद को खतरे में महसूस कर सकता है और हमला करने की स्थिति बन सकती है।

    विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि तेंदुए को घेरने पकड़ने या उसका रास्ता रोकने का प्रयास न करें। वन्यजीव दिखाई देने की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखना और संबंधित विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित कदम है। सिंधिया छत्री के आसपास तेंदुआ नजर आने के बाद स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    खासकर सुबह और देर शाम के समय जंगल से सटे इलाकों में अकेले जाने से बचने और बच्चों को ऐसे स्थानों पर अकेले न भेजने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल तेंदुआ सिंधिया छत्री की दीवार से जंगल की ओर चला गया लेकिन रिहायशी इलाके के करीब उसकी मौजूदगी ने लोगों को सतर्क कर दिया है। अब स्थानीय लोगों की नजर वन विभाग की गतिविधियों और तेंदुए की अगली मूवमेंट पर बनी हुई है।

  • ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर इनाम घोषित किया, महिला के लिए राशि दोगुनी होगी

    ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर इनाम घोषित किया, महिला के लिए राशि दोगुनी होगी

    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरानी सेना की ओर से अमेरिकी सैनिकों को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने घोषणा की है कि किसी अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने वाले व्यक्ति को 30 हजार डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण स्थिति और गंभीर हो गई है।

    अमीर हातमी के मुताबिक, यदि किसी अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई किसी महिला द्वारा की जाती है तो इनाम की राशि दोगुनी होकर 60 हजार डॉलर हो जाएगी। हालांकि, इस घोषणा के तहत इनाम हासिल करने की प्रक्रिया, पात्रता और भुगतान से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    ईरानी सेना का यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने की दिशा में बातचीत को लेकर कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। ऐसे माहौल में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए आर्थिक इनाम की घोषणा को ईरान के कड़े रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। लंबे समय तक समुद्री यातायात बाधित रहने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव का प्रमुख कारण बताया जाता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान की सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय प्रभाव को सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच मतभेद केवल सैन्य मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रभाव से जुड़े व्यापक विवाद भी इसमें शामिल हैं।

    अमीर हातमी का बयान उस समय सामने आया है जब ईरान के भीतर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ समर्थन और प्रतिक्रिया का माहौल बना हुआ है। बताया गया है कि अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वित्तीय सहायता से संबंधित बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हुए थे। इसी पृष्ठभूमि में इनाम की घोषणा किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि घोषित इनाम के तहत किसी अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कोई कार्रवाई हुई है या नहीं। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ऐसी किसी कार्रवाई के बाद संबंधित व्यक्ति तक इनाम की राशि किस प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचाई जाएगी।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

    ईरानी सेना की इस घोषणा ने दोनों देशों के बीच संघर्ष को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। एक तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयानों से सैन्य टकराव और तीखा होने की आशंका बढ़ती है। फिलहाल संघर्ष को समाप्त करने और समुद्री मार्गों पर सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में किसी ठोस समाधान का इंतजार बना हुआ है।

  • भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण अधिकारियों की बैठक, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु सहयोग के लिए साझा रणनीति पर बनेगी सहमति

    भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण अधिकारियों की बैठक, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु सहयोग के लिए साझा रणनीति पर बनेगी सहमति

    नई दिल्ली ।भारत सोमवार 17 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह यानी ईडब्ल्यूजी के वरिष्ठ अधिकारियों तथा जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की बैठक की मेजबानी करेगा। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा होगी।

    बैठक की शुरुआत वरिष्ठ अधिकारियों के उद्घाटन सत्र से होगी। इसके बाद ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर संपर्क समूह की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करना और सहयोग को और मजबूत करना होगा।

    इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मंगलवार को ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे। दोनों बैठकों के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों पर सामूहिक दृष्टिकोण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

    भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए इस बार की व्यापक थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है। पर्यावरण क्षेत्र में इस थीम के तहत सदस्य देशों के बीच ऐसे क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा, जिनका संबंध जलवायु परिवर्तन से निपटने, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से है।

    बैठक में अंतिम दस्तावेज से जुड़े संभावित परिणामों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा पर्यावरण से संबंधित अन्य प्राथमिक विषयों पर विचार किया जाएगा। इन चर्चाओं के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह की स्थापना वर्ष 2015 में मॉस्को में हुई पहली ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर नियमित रूप से सहयोग करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना था। इसके माध्यम से देश अपने अनुभव साझा करने, प्रभावी कार्यप्रणालियों को एक-दूसरे तक पहुंचाने और संयुक्त पर्यावरणीय कार्रवाई को मजबूत करने पर काम करते रहे हैं।

    वहीं जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की स्थापना वर्ष 2024 में की गई थी। इसका उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर सहयोग के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना है। यह समूह जलवायु संबंधी प्राथमिकताओं पर संवाद और समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है।

    नई दिल्ली में होने वाली बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक नीति विमर्श के प्रमुख विषय बने हुए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से साझा नीतिगत अनुभवों और व्यावहारिक उपायों के आदान-प्रदान को गति मिलने की उम्मीद है। बैठकों में होने वाली चर्चा आगे की सामूहिक प्राथमिकताओं और सहयोग के क्षेत्रों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • गाजा में युद्धविराम के लिए ट्रंप का कूटनीतिक दांव, जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेताओं से की अहम बातचीत

    गाजा में युद्धविराम के लिए ट्रंप का कूटनीतिक दांव, जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेताओं से की अहम बातचीत

    नई दिल्ली । गाजा में जारी इजराइल-हमास संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व मामलों के दूत जेरेड कुशनर ने मिस्र में हमास के नेताओं के साथ अहम बातचीत की। इस बैठक का केंद्र गाजा में युद्धविराम, संघर्ष समाप्त करने की प्रक्रिया और युद्ध के बाद क्षेत्र के प्रशासन को लेकर प्रस्तावित अमेरिकी योजना रही। बातचीत को ट्रंप प्रशासन की ओर से तैयार किए जा रहे शांति रोडमैप को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    बैठक में हमास के राजनीतिक नेता खलील अल-हया भी शामिल रहे। अमेरिका की ओर से कुशनर ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी योजना का समर्थन नहीं किया जाएगा, जिसमें गाजा के लोगों को उनकी जमीन से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जाए। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित व्यवस्था में गाजा की आबादी को वहीं रखते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है।

    बैठक में युद्ध के बाद गाजा के प्रशासन को लेकर भी चर्चा हुई। अमेरिकी प्रस्ताव के तहत एक नई राष्ट्रीय समिति को क्षेत्र की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही हमास को शासन व्यवस्था से अलग रखने और उसके हथियार तथा सैन्य ढांचा समाप्त करने की मांग सामने रखी गई है। यह मुद्दा बातचीत की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील शर्तों में शामिल है।

    मिस्र में हुई वार्ता में केवल अमेरिका और हमास ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। मिस्र, कतर और तुर्की के अधिकारियों ने बातचीत में हिस्सा लिया। मिस्र के खुफिया प्रमुख हसन रशद, कतर के राजनयिक अली अल-थवादी और तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वार्ता में भाग लिया। बोर्ड ऑफ पीस के दूत निकोले म्लादेनोव और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी कुशनर के साथ मौजूद रहे।

    कुशनर की मिस्र और इजराइल यात्रा ऐसे समय हुई है, जब गाजा को लेकर अमेरिकी प्रस्ताव पर वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही प्रस्तावित योजना को इजराइल के लिए स्वीकार्य नहीं बता चुके हैं। ऐसे में हमास और क्षेत्रीय पक्षों के साथ कुशनर की बातचीत को कूटनीतिक सहमति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    वार्ता के बाद हमास ने ट्रंप की योजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने की तैयारी जताई। संगठन ने मध्यस्थ देशों और बोर्ड ऑफ पीस से इजराइल पर समझौते की शर्तें लागू कराने के लिए दबाव बनाने की अपील की। हमास ने युद्धविराम के उल्लंघन रोकने, इजराइली सैन्य कार्रवाई बंद करने और दूसरे चरण के क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग भी रखी।

    गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण युद्धविराम की किसी भी पहल के सामने कई जटिल चुनौतियां बनी हुई हैं। एक तरफ हमास के हथियार और भविष्य की राजनीतिक भूमिका का सवाल है, वहीं दूसरी तरफ इजराइल की सुरक्षा चिंताएं और गाजा के प्रशासन का स्वरूप महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की की भागीदारी से बातचीत को क्षेत्रीय समर्थन देने की कोशिश हो रही है।

    अब आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष युद्धविराम की शर्तों, गाजा के प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी सहमति बना पाते हैं। कुशनर की यह पहल ट्रंप प्रशासन के लिए गाजा संघर्ष को राजनीतिक समाधान की दिशा में ले जाने की एक अहम कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है।

  • Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा

    Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा


    नई दिल्ली । 
    यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यमनी सरकारी सेना ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे के दौरान हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में 181 सैन्य ऑपरेशन किए। इन कार्रवाइयों में ड्रोन, तोप और रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    यमनी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल माजिद अल-नुजैली के अनुसार, सैन्य अभियान के दौरान हूती ठिकानों, हथियारों के भंडार, सैन्य वाहनों और उन सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल हमलों के लिए किया जा रहा था। सेना ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों में हूती समूह के कई सदस्य मारे गए या घायल हुए हैं।

    सरकारी सेना के मुताबिक सात प्रांतों में हूती विद्रोहियों के सैन्य उपकरणों को भी नष्ट किया गया। हालांकि, सेना ने कार्रवाई में मारे गए या घायल हुए लोगों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में अभियान के मानवीय प्रभाव को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    यमनी सेना ने अपनी कार्रवाई को हाल के हूती हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। सेना के अनुसार सरकारी सैनिकों के साथ-साथ नागरिक ढांचे, आर्थिक प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों को भी हाल के दिनों में निशाना बनाया गया है। इन हमलों के कारण सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    इस बीच हूती विद्रोहियों ने शनिवार शाम तेल संपदा वाले मारिब प्रांत की राजधानी मारिब शहर को निशाना बनाने का दावा किया। सरकार समर्थक मीडिया के अनुसार शहर के रिहायशी इलाकों की दिशा में तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। शुरुआती जानकारी में किसी व्यक्ति के हताहत होने या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक मिसाइल हमलों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। मारिब लंबे समय से यमन के संघर्ष में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां ऊर्जा संसाधनों और भौगोलिक स्थिति के कारण सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष का असर विशेष रूप से देखा जाता रहा है।

    यमन के अलावा हूती गतिविधियों का असर पड़ोसी सऊदी अरब तक भी पहुंचा है। हाल के हफ्तों में हूती समूह ने यमन के सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों के साथ-साथ सऊदी अरब में मौजूद ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ाने का दावा किया है। सऊदी अरब यमनी सरकार का प्रमुख समर्थक है और लंबे समय से इस संघर्ष में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों के लिए समुद्री प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद संगठन की ओर से लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के दावे भी सामने आए। इन घटनाओं से क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

    यमन में मौजूदा संघर्ष की जड़ें 2014 में हुए हूती कब्जे से जुड़ी हैं। विद्रोहियों ने उस दौरान उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिसमें राजधानी सना भी शामिल थी। इसके बाद 2015 में यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया।

    करीब एक दशक से जारी संघर्ष ने यमन को गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट में धकेला है। हालिया सैन्य कार्रवाइयों और मिसाइल हमलों के बीच तनाव फिर बढ़ने से नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की शांति प्रक्रिया को लेकर नई चुनौतियां पैदा होने की आशंका है।

  • पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन

    पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन


    इंदौर। 15 अगस्त का लॉन्ग वीकेंड गुजर चुका है लेकिन इंदौर और आसपास के पर्यटकों के लिए बारिश के मौसम की सबसे खास सैर यानी पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस समय पातालपानी का झरना पूरे वेग से बह रहा है। पहाड़ घने हरे रंग में ढके हैं और घाटियों में बादलों का खूबसूरत डेरा नजर आ रहा है। ऐसे मौसम में पर्यटक इस ऐतिहासिक ट्रेन के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेलवे भी अब ट्रेन संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। हेरिटेज ट्रेन का पूरा रैक मेंटेनेंस के बाद बीकानेर से इंदौर पहुंच चुका है और रविवार सुबह यह लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पहुंचा।

    अब रेलवे इस रैक को महू के रास्ते पातालपानी ले जाएगा। वहां क्रेन की मदद से कोचों को ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद कोचों को इंजन के साथ जोड़कर उनकी अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इन तैयारियों के बाद रेलवे की ओर से ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान रैक की स्थिति के साथ ट्रैक संचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को परखा जाएगा। यदि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती हैं तो यात्री संचालन की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन शुरू करने की है।

    इस साल ट्रेन के शुरू होने में हुई देरी की मुख्य वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान पातालपानी और कालाकुंड का इलाका पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। बारिश के साथ यहां की प्राकृतिक खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने घने जंगल घुमावदार रेल ट्रैक और बादलों से घिरी घाटियां इस सफर को रोमांचक बना देती हैं। यही वजह है कि हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार हर साल पर्यटकों को रहता है।

    पिछले साल हेरिटेज ट्रेन का संचालन 26 जुलाई से शुरू होकर 16 नवंबर 2025 तक हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यात्री सेवा शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में अब रैक के इंदौर पहुंचने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही ट्रायल रन पूरा कर ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू किया जा सकता है। हालांकि अंतिम तारीख रेलवे की ओर से आधिकारिक घोषणा और ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगी।

    पातालपानी-कालाकुंड रेलखंड सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं बल्कि इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। करीब 155 साल पुराने इस रेलखंड की शुरुआत वर्ष 1870 में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की पहल से हुई थी। वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत इसका निर्माण पूरा हो गया था। बाद में यह रेलखंड राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। समय के साथ आसपास की कई मीटरगेज रेल लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया लेकिन पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह रेलखंड अपनी पुरानी पहचान के साथ सुरक्षित रहा।

    रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रैक को संरक्षित रखते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन शुरू की थी। पातालपानी से कालाकुंड तक करीब 9.5 किलोमीटर का यह सफर छोटा जरूर है लेकिन रोमांच से भरपूर है। इस मार्ग में चार सुरंगें करीब 24 तीखे मोड़ छह बड़े और 35 छोटे पुल आते हैं। ट्रेन जैसे ही पहाड़ों के बीच आगे बढ़ती है एक तरफ घने जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं जबकि दूसरी ओर गहरी घाटियां सफर को रोमांचक बना देती हैं।

    मानसून के दौरान इस पूरे रेलखंड का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पातालपानी का झरना तेज बहाव के साथ नजर आता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। घाटियों में तैरते बादल और घुमावदार ट्रैक यात्रियों के लिए यादगार अनुभव बनते हैं। अब मेंटेन रैक के इंदौर पहुंचने के बाद पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल रन और आधिकारिक संचालन तारीख पर टिकी है। अगर तकनीकी और सुरक्षा जांच तय मानकों के अनुसार पूरी होती है तो अगले शनिवार से पातालपानी-कालाकुंड की खूबसूरत हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरी पर दौड़ती नजर आ सकती है।

  • यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र से रोस्तोव तक कई ठिकानों पर मची तबाही

    यूक्रेन का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को क्षेत्र से रोस्तोव तक कई ठिकानों पर मची तबाही

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार 16 अगस्त को हवाई हमलों का अब तक का सबसे बड़ा दौर देखने को मिला। यूक्रेन ने रूस के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि रातभर में 822 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट किए गए। हमलों के कारण कई क्षेत्रों में आग, नुकसान और जनहानि की खबर सामने आई है।

    मॉस्को क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमलों का बड़ा असर दिखाई दिया। पोडोल्स्क इलाके में ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज के एक गोदाम को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। हमले के बाद गोदाम में भीषण आग लग गई और आसमान में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में 83 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए।

    मॉस्को क्षेत्र के अधिकारियों ने इसे युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। पोडोल्स्क के अलावा आसपास के इलाकों में भी ड्रोन गतिविधियों की सूचना मिली। हमले के चलते स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।

    यूक्रेन ने रूस के रोस्तोव क्षेत्र में मिसाइल ईंधन बनाने वाली एक सुविधा को भी निशाना बनाने का दावा किया। इस कार्रवाई को रूसी सैन्य ढांचे को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि हमले से हुए नुकसान का पूरा आकलन तत्काल सामने नहीं आया। दोनों पक्षों के दावों के बीच हमले की व्यापकता और प्रभाव को लेकर स्थिति लगातार स्पष्ट हो रही है।

    दक्षिणी रूस के बेलगोरोद क्षेत्र के पास भी ड्रोन हमले की जानकारी सामने आई। एक बस को निशाना बनाए जाने के बाद एक व्यक्ति की मौत होने की बात कही गई है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि युद्ध से जुड़े हवाई हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गए हैं और नागरिक इलाकों पर भी उनका असर पड़ रहा है।

    इस बीच रूस ने भी यूक्रेन के कई हिस्सों पर रातभर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, एक स्टील प्लांट को हुए नुकसान में दो लोगों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। हमले के कारण बिजली उत्पादन और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचा तथा संयंत्र की कुछ उत्पादन गतिविधियां आंशिक रूप से प्रभावित हुईं।

    कीव में भी रूसी मिसाइल हमलों के कारण कई इलाकों में आग लगने की जानकारी सामने आई। शहर के कम से कम दो जिलों में नुकसान की खबर मिली। राजधानी और आसपास के क्षेत्र में कई लोग घायल हुए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल बताया गया। हमलों के बाद आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।

    हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य और आर्थिक ढांचे पर हमले तेज किए हैं। यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सैन्य उपयोग से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर रूस यूक्रेन के शहरों, ऊर्जा ढांचे और बंदरगाहों पर लगातार हमले कर रहा है।

    काला सागर और डेन्यूब क्षेत्र में भी युद्ध का असर बढ़ा है। रूस ने पिछले सप्ताह रोमानियाई सीमा के पास डेन्यूब नदी पर स्थित यूक्रेन के प्रमुख अनाज निर्यात बंदरगाह को निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम के बीच रोमानिया के ऊपर एक ड्रोन गिराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमले युद्ध के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ा रहे हैं। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे की सैन्य क्षमता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। 16 अगस्त की घटनाओं ने इस संघर्ष में हवाई हमलों के बढ़ते पैमाने और उससे जुड़े मानवीय नुकसान को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • शादी में आई नहीं, परिवार से संपर्क भी नहीं था, फिर भी दहेज केस में आरोपी बनी साध्वी; कोर्ट ने आरोप किए निरस्त

    शादी में आई नहीं, परिवार से संपर्क भी नहीं था, फिर भी दहेज केस में आरोपी बनी साध्वी; कोर्ट ने आरोप किए निरस्त


    इंदौर । इंदौर में दहेज प्रताड़ना के एक मामले में अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पुलिस जांच और आरोप तय करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले में शिकायतकर्ता महिला के पति की बहन को भी दहेज प्रताड़ना का आरोपी बनाया गया था जबकि बचाव पक्ष के मुताबिक वह महिला वर्ष 1980 में ही बाल साध्वी के रूप में सांसारिक जीवन छोड़ चुकी थी। वैराग्य अपनाने के बाद उसका अपने परिवार से लंबे समय तक कोई संपर्क नहीं रहा। यहां तक कि वह शिकायतकर्ता की शादी में भी शामिल नहीं हुई थी। इसके बावजूद एरोड्रम पुलिस ने उसे मामले में आरोपी बनाकर चालान कोर्ट में पेश कर दिया।

    मामला अदालत पहुंचने के बाद साध्वी समेत अन्य आरोपियों ने कार्रवाई को चुनौती दी। अपर सत्र न्यायालय ने 13 अगस्त को निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों का रिकॉर्ड देखा और उन्हें निरस्त कर दिया। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि साध्वी जेठ या जेठानी ने शिकायतकर्ता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया था। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि कथित प्रताड़ना कब कहां और किस तरह हुई इसका स्पष्ट आधार रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।

    मामला उस समय सामने आया जब शिकायतकर्ता महिला ने एरोड्रम थाने में दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में पति के राजस्थान में रहने वाले भाई भाभी और उसकी बहन को भी आरोपी बनाया गया। परिवार की ओर से पुलिस को यह जानकारी दिए जाने का दावा किया गया कि संबंधित रिश्तेदारों का शिकायतकर्ता से कोई संपर्क नहीं रहा था। इसके बावजूद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और आरोपियों के खिलाफ चालान कोर्ट में पेश कर दिया।

    इसके बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने चालान के आधार पर आरोप तय कर दिए। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए बचाव पक्ष ने अपर सत्र न्यायालय का रुख किया। आरोपी पक्ष की ओर से एडवोकेट महेंद्र मौर्य ने अदालत में तर्क दिया कि पति की बहन ने वर्ष 1980 में ही बाल साध्वी के रूप में वैराग्य अपना लिया था। सांसारिक जीवन छोड़ने के बाद वह परिवार से अलग रही और उसका शिकायतकर्ता से कोई नियमित संपर्क नहीं था।

    बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि संबंधित साध्वी शिकायतकर्ता की शादी में शामिल तक नहीं हुई थी। ऐसे में शादी के समय दहेज को लेकर किसी तरह की मांग या प्रताड़ना में उसकी भूमिका होने का सवाल ही नहीं उठता। इसी तरह मामले में आरोपी बनाए गए जेठ और जेठानी भी राजस्थान में रहते थे और वे भी शिकायतकर्ता की शादी में शामिल नहीं हुए थे। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और प्रत्येक आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका की पर्याप्त जांच किए बिना ही कार्रवाई आगे बढ़ाई।

    मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश मनीष लोवंशी की अदालत में हुई। कोर्ट ने केस रिकॉर्ड और उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद पाया कि साध्वी जेठ और जेठानी द्वारा शिकायतकर्ता को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने का कोई ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है। अदालत के सामने यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कथित आरोपियों ने शिकायतकर्ता को कब कैसे और कहां दहेज के लिए प्रताड़ित किया।

    अदालत ने माना कि केवल आरोप लगाए जाने के आधार पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त ठोस आधार जरूरी है। रिकॉर्ड में आरोपियों की कथित भूमिका को लेकर पर्याप्त सामग्री नहीं मिलने के कारण निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने में त्रुटि हुई। इसके बाद अपर सत्र न्यायालय ने साध्वी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ तय किए गए आरोपों को निरस्त कर दिया।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अदालत के सामने आरोपी महिला की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति से जुड़े तथ्य भी सामने आए। वर्ष 1980 में वैराग्य अपना चुकी साध्वी के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया गया जबकि बचाव पक्ष के अनुसार वह शिकायतकर्ता की शादी में शामिल नहीं हुई थी और लंबे समय से परिवार से अलग जीवन जी रही थी। अदालत के फैसले ने फिलहाल उसके खिलाफ तय आरोपों को खत्म कर दिया है और मामले में आरोपियों की वास्तविक भूमिका के लिए ठोस साक्ष्य की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

  • बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी

    बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी


    इंदौर । इंदौर में बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों के घरों और रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कभी घर के कमरे में सांप दिखाई देता है तो कभी कार ऑफिस गार्डन या किसी खाली जगह पर उसके निकलने की सूचना मिलती है। ऐसे में जब भी किसी के घर या आसपास सांप दिखाई देता है तो लोगों के बीच घबराहट फैल जाती है। लेकिन 65 वर्षीय कैलाशनाथ ऐसे लोगों के लिए मदद का भरोसा बन चुके हैं। पिछले 53 वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ आज भी फोन आते ही अपना सामान उठाकर मौके की ओर निकल पड़ते हैं। समय दिन का हो या रात के 2 या 3 बजे का उनका प्रयास रहता है कि जरूरतमंद तक जल्द पहुंचा जा सके।

    कैलाशनाथ ने महज 12 साल की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर सांप पकड़ना शुरू किया था। उन्होंने अपने माता पिता को सांप पकड़ते हुए देखा और धीरे धीरे इसी काम को सीखते चले गए। समय के साथ उन्होंने सांपों की अलग अलग प्रजातियों को पहचानने और उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने का अनुभव हासिल किया। आज उम्र 65 वर्ष हो चुकी है लेकिन सांपों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का उनका सिलसिला जारी है। बारिश के दिनों में उन्हें रोजाना करीब 2 से 4 सांपों के रेस्क्यू के लिए फोन आ रहे हैं।

    कैलाशनाथ के अनुसार इंदौर में बारिश के दौरान रोजाना करीब 40 सांपों के निकलने की सूचनाएं सामने आ सकती हैं। इनमें ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। उनके और उनके समुदाय के अन्य लोगों का काम सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना है। उनका कहना है कि सांप को देखकर घबराने के बजाय लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ज्यादातर घटनाओं में सांप खुद इंसान पर हमला नहीं करता बल्कि खतरा महसूस होने पर प्रतिक्रिया करता है।

    कैलाशनाथ के रेस्क्यू करियर में कई ऐसे मामले भी आए हैं जिन्हें वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। किला मैदान में एक बार करीब 12 फीट लंबा सांप मिला था। आकार बड़ा होने के कारण वह आसानी से काबू में नहीं आ रहा था। उसे सुरक्षित पकड़ने में करीब 30 मिनट तक प्रयास करना पड़ा। कैलाशनाथ बताते हैं कि लगातार कोशिश के दौरान उनकी सांस तक फूल गई थी लेकिन आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से काबू में कर लिया गया और बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

    कैलाशनाथ कहते हैं कि सांप देखकर ज्यादातर लोग डर जाते हैं और ऐसे समय में उन्हें किसी अनुभवी व्यक्ति की जरूरत होती है। उनका कहना है कि लोगों की परेशानी उनके लिए सबसे पहले है इसलिए रात के 2 या 3 बजे भी फोन आए तो वे मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। उनके लिए समय देखकर काम करना संभव नहीं है। उनका सबसे बड़ा संदेश यही है कि सांप दिखने पर उसे छेड़ने या मारने की कोशिश न करें बल्कि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।

    सांप को पकड़ने के लिए कैलाशनाथ परिस्थिति के अनुसार अलग अलग उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। यदि सांप एक जगह बैठा हो या धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हो तो छड़ी की मदद से उसके शरीर को नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद उसे सावधानी से पकड़कर सुरक्षित थैली में रखा जाता है। अगर सांप तेजी से भाग रहा हो तो कैचर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं यदि सांप किसी छेद बिल या सामान के पीछे छिपा हो तो आसपास की चीजों को धीरे धीरे हटाकर उसे बाहर आने दिया जाता है और फिर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाता है। उनके मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा तब पैदा होता है जब लोग खुद सांप को पकड़ने या डंडे से दबाने की कोशिश करते हैं।

    सांप के काटने की स्थिति में भी लोगों को झाड़ फूंक और घरेलू नुस्खों से बचने की जरूरत है। काटे गए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधना घातक हो सकता है। घाव को काटना या जहर चूसने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शांत रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना जरूरी है।

    इधर नाग पंचमी को देखते हुए इंदौर वन विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन दल बनाए गए हैं। नवलखा भंवरकुआं रिंग रोड और आसपास के इलाकों की जिम्मेदारी कोमल पालीवाल को दी गई है। राजबाड़ा विजय नगर और शहरी क्षेत्र की निगरानी आशीष यादव संभालेंगे। वहीं अन्नपूर्णा लाबरिया भेरू और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेदारी महेश सोनगरा को दी गई है। वन विभाग की टीमें शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी निगरानी करेंगी। ऐसे में नाग पंचमी के दौरान सांपों के साथ किसी भी तरह का प्रदर्शन या उन्हें लेकर घूमने की गतिविधि सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

  • आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान

    आज से बदलेगा बारिश का नक्षत्र, मघा में बरसेंगे बादल; कई क्षेत्रों में भारी वर्षा के योग का ज्योतिषीय अनुमान


    भोपाल । सोमवार 17 अगस्त से वर्षा मघा नक्षत्र में प्रवेश करेगी और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव 31 अगस्त तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिष मठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य एवं भविष्यवक्ता पंडित विनोद गौतम के अनुसार सिंह राशि में आने वाला मघा नक्षत्र बारिश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में मध्यप्रदेश समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश के योग बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि मघा नक्षत्र में वर्षा के स्वामी मंगल माने जाते हैं और इसके चलते बारिश का स्वरूप कई जगह अलग अलग हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में खंड वर्षा देखने को मिल सकती है जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने के योग बन सकते हैं।

    ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मघा नक्षत्र का वाहन चातक यानी पपीहा माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र को वर्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रभाव से कई स्थानों पर पर्याप्त बारिश होने के साथ कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा भी हो सकती है। खास बात यह है कि जिन क्षेत्रों में अब तक अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है वहां भी इस अवधि में वर्षा के योग बनने की बात कही गई है। ऐसे में मघा नक्षत्र का यह दौर किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मघा नक्षत्र को लेकर प्रचलित लोक कहावत ‘मघा देगा अघा’ भी बारिश की इसी विशेषता की ओर संकेत करती है। इसका अर्थ माना जाता है कि मघा नक्षत्र में होने वाली बारिश से तालाब ताल तलैया और अन्य जलस्रोत पानी से भर सकते हैं। पंडित विनोद गौतम ने एक अन्य लोक कहावत ‘मघा न बरसे भरे ना खेत माता न परसे भरे ना पेट’ का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय लोक परंपरा में मघा की बारिश का संबंध सीधे खेती और जल उपलब्धता से जोड़ा गया है। इस दौरान होने वाली बारिश का असर खेतों और जलस्रोतों पर दिखाई देने की मान्यता है।

    हालांकि बारिश के स्वरूप को लेकर ज्योतिषीय अनुमान एक समान नहीं होते। कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य रह सकती है जबकि कुछ जगहों पर तेज वर्षा के दौर बन सकते हैं। इसलिए मघा नक्षत्र के दौरान अलग अलग स्थानों पर बारिश की स्थिति में अंतर रहने की संभावना बताई गई है। मौसम की वास्तविक स्थिति के लिए वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान और मौसम विभाग की चेतावनियों को प्राथमिक आधार माना जाना चाहिए।

    पंडित गौतम ने 28 अगस्त को होने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार एक पखवाड़े के भीतर सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना ज्योतिषीय दृष्टि से प्राकृतिक घटनाओं और भूकंप जैसी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण के प्रभाव से देश और दुनिया में प्राकृतिक घटनाओं की आशंका के योग बताए हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और परंपरागत गणनाओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मौसम या भूकंप पूर्वानुमान नहीं माना जाता है।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त से शुरू हो रहा मघा नक्षत्र 31 अगस्त तक बारिश के लिहाज से चर्चा में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में कई स्थानों पर अच्छी और कहीं तेज बारिश के योग बन सकते हैं। वहीं किसानों और आम लोगों के लिए वास्तविक बारिश की स्थिति जानने के लिए स्थानीय मौसम विभाग के अपडेट और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखना अधिक उपयोगी रहेगा।