Author: bharati

  • दक्षिण एशियाई देशों में भारत की वैश्विक छवि पर प्यू रिसर्च सर्वे, श्रीलंका में भारत के प्रति सर्वाधिक सकारात्मक दृष्टिकोण

    दक्षिण एशियाई देशों में भारत की वैश्विक छवि पर प्यू रिसर्च सर्वे, श्रीलंका में भारत के प्रति सर्वाधिक सकारात्मक दृष्टिकोण

    नई दिल्ली ।अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा दक्षिण एशिया के चार प्रमुख देशों भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में किए गए एक ताजा सर्वेक्षण के आंकड़े सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण में अंतरराष्ट्रीय संबंधों, पड़ोसी देशों की धारणाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर वयस्कों की राय ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका दक्षिण एशिया का एकमात्र ऐसा मुल्क उभरकर सामने आया है, जहां के नागरिक भारत के प्रति अत्यधिक सकारात्मक रुख रखते हैं।

    सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका में 79 प्रतिशत लोगों ने भारत के पक्ष में अपनी राय दी है, जबकि 63 प्रतिशत श्रीलंकाई नागरिकों ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश माना है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में केवल सात प्रतिशत लोगों ने ही भारत के प्रति सकारात्मक भावना व्यक्त की। बांग्लादेश में 42 प्रतिशत लोगों का रुख भारत के प्रति सकारात्मक पाया गया, हालांकि वहां भारत को खतरा मानने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय रही।

    रिपोर्ट में बांग्लादेश और भारत के बीच द्विपक्षीय धारणाओं में आई गिरावट को भी रेखांकित किया गया है। वर्तमान में केवल 25 प्रतिशत भारतीय बांग्लादेश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान दोनों देशों के बीच जनता के स्तर पर धारणा में कमी दर्ज की गई है। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, वर्ष 2024 में जहां 57 प्रतिशत बांग्लादेशी भारत के पक्ष में थे, वहीं भारत में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

    भारत और पाकिस्तान के बीच पारस्परिक संबंधों पर सर्वे से स्पष्ट हुआ है कि दोनों देशों की बहुसंख्यक आबादी एक-दूसरे को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानती है। वहीं वैश्विक सहयोगियों के प्रश्न पर 36 प्रतिशत भारतीयों ने रूस को अपना सबसे प्रमुख और भरोसेमंद सहयोगी बताया, जबकि 16 प्रतिशत ने अमेरिका का नाम लिया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विदेश नीति विशेषज्ञों की नजरें इस रणनीतिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

    वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव को लेकर अमेरिका में किए गए अध्ययन में 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रभाव स्थिर बना हुआ है। वहीं 30 प्रतिशत अमेरिकियों ने माना कि भारत का प्रभाव वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ा है। राजनीतिक आधार पर अमेरिकी डेमोक्रेट्स के बीच भारत के प्रति समर्थन अधिक देखने को मिला। यह सर्वेक्षण दक्षिण एशिया में बदलते कूटनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों की एक स्पष्ट झलक पेश करता है।

  • नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा, छह साल से अटके भविष्य को लेकर भोपाल में धरना; बोले लिखित आश्वासन के बिना नहीं हटेंगे

    नर्सिंग छात्रों का फूटा गुस्सा, छह साल से अटके भविष्य को लेकर भोपाल में धरना; बोले लिखित आश्वासन के बिना नहीं हटेंगे


    भोपाल । भोपाल के नीलम पार्क में सोमवार को नर्सिंग छात्रों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। मध्यप्रदेश के अलग अलग जिलों से पहुंचे हजारों B.Sc. Nursing और GNM के छात्र छात्राओं ने राज्य स्तरीय धरना देकर अपनी लंबित समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नर्सिंग शिक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और न्यायिक प्रक्रिया के कारण उनका भविष्य पिछले करीब छह साल से अधर में है। समय पर परीक्षाएं नहीं होने डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं होने तथा छात्रवृत्ति में देरी ने विद्यार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

    सुबह से ही नीलम पार्क में छात्रों का पहुंचना शुरू हो गया था। हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे विद्यार्थियों ने सरकार से उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के लिए वर्षों मेहनत की लेकिन परीक्षा डिग्री और रजिस्ट्रेशन जैसी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। इसका सीधा असर उनकी आगे की पढ़ाई नौकरी और करियर पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण में समय लगाया है उन्हें अब अपने भविष्य को लेकर लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

    छात्रों ने कॉलेजों की मान्यता से जुड़े विवाद को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि किसी कॉलेज को मान्यता देना या उसकी वैधता की जांच करना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी नहीं है। यदि किसी संस्थान को नियमों के विपरीत मान्यता दी गई है या मान्यता प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित शासन प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की तय होनी चाहिए। विद्यार्थियों का कहना है कि व्यवस्था की किसी गलती का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने साफ कर दिया कि वे केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने मांगों के समाधान को लेकर सरकार से लिखित आश्वासन देने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रखने पर वे अड़े रहेंगे। प्रदर्शन में मनोज रजक समेत कई छात्रों ने सरकार से तत्काल निर्णय लेकर विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की अपील की।

    नर्सिंग छात्रों की प्रमुख मांगों में मामले की जल्द सुनवाई और छात्रों के हित में समाधान शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने नर्सिंग मामले की स्पेशल बेंच के माध्यम से जल्द सुनवाई कराने की मांग की है। इसके साथ ही B.Sc. Nursing और GNM के सभी श्रेणियों के विद्यार्थियों की परीक्षाएं बिना देरी एक साथ कराने की मांग रखी गई है। इसमें suitable और unsuitable विद्यार्थियों के साथ ग्वालियर क्षेत्र के 56 कॉलेजों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।

    छात्रों ने बैच 2020-21 के विद्यार्थियों को दिसंबर 2026 तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण करने और नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़ी अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार को पूरे मामले में जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि वर्षों से परीक्षा डिग्री और रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे हजारों छात्रों को राहत मिल सके और उनका करियर आगे बढ़ सके।

  • ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा

    ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा


    नई दिल्ली ।
    डार्विन के मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में बांग्लादेश ने बड़ा उलटफेर करते हुए मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से पराजित कर दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बांग्लादेश ने टेस्ट श्रृंखला का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया है। खेल के हर विभाग में ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा भड़क उठा है। पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और मैथ्यू हेडन ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए टीम प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मार्क वॉ ने इस हार को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करार दिया है। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में इतना बड़ा उलटफेर नहीं देखा। वॉ ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश की टीम अपने दो प्रमुख तेज गेंदबाजों के बिना मैदान पर उतरी थी, इसके बावजूद उसने ऑस्ट्रेलिया की पूरी तरह से मजबूत टीम को पछाड़ दिया। उनके अनुसार, यह पराजय गाबा में वेस्टइंडीज के हाथों मिली हार से भी अधिक चौंकाने वाली है।

    दूसरी ओर पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने इस हार को बेहद शर्मनाक बताते हुए टीम में बड़े बदलावों की वकालत की है। पोंटिंग का मानना है कि अब समय आ गया है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि टीम को तुरंत नए सलामी बल्लेबाज और नंबर 3 के स्थान पर बदलाव करने की आवश्यकता है। पहले व्यापक बदलावों के पक्ष में न रहने वाले पोंटिंग ने स्वीकार किया कि इस करारी हार ने पूरी स्थिति बदल दी है।

    इसी बीच पूर्व दिग्गज मैथ्यू हेडन ने भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की नाकामी पर चिंता जताई और सलाह दी कि ट्रेविस हेड को पुनः नंबर 5 के स्थान पर भेजा जाना चाहिए। मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने भी बांग्लादेशी टीम के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की और अपनी टीम की नाकामियों को स्वीकार किया। मध्य प्रदेश सहित दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों की नजरें अब आगामी मुकाबले पर टिकी हैं।

    श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम पर मानसिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व दिग्गजों के कड़े रुख और मीडिया में हो रही आलोचनाओं के बाद आगामी मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग-11 में बड़े बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रबंधन इन दिग्गजों के सुझावों पर किस तरह अमल करता है।

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    डार्विन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक हार, मार्क वॉ और रिकी पोंटिंग ने प्रबंधन पर दागे तीखे सवाल

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव, सुबह 11:30 से शुरू होगी सेवा; छुट्टियों में रात 8:30 बजे तक दौड़ेगी ट्रेन


    भोपाल  भोपाल मेट्रो अब नई समय सारणी के साथ यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ गई है। सोमवार से भोपाल मेट्रो का नया शेड्यूल लागू हो गया है। इसके तहत यात्रियों को सप्ताह के सभी दिनों में हर 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। नई व्यवस्था के मुताबिक सोमवार से शनिवार तक मेट्रो कुल 62 फेरे लगाएगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में ट्रेनों के 70 फेरे संचालित किए जाएंगे। मेट्रो के नए समय को इस तरह तय किया गया है कि यात्रियों को पूरे परिचालन समय के दौरान नियमित अंतराल पर ट्रेन मिल सके।

    नए शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 11:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन एम्स की ओर जाएगी। वहीं एम्स स्टेशन से पहली मेट्रो दोपहर 12 बजे सुभाष नगर के लिए रवाना होगी। सोमवार से शनिवार तक मेट्रो सेवा सुबह 11:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक उपलब्ध रहेगी। सुभाष नगर स्टेशन से इन दिनों आखिरी मेट्रो शाम 7 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम ट्रेन शाम 7:30 बजे चलेगी। इस अवधि में दोनों दिशाओं को मिलाकर कुल 62 फेरे लगाए जाएंगे।

    रविवार और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में यात्रियों को मेट्रो की सुविधा एक घंटे ज्यादा समय तक मिलेगी। इन दिनों सेवा सुबह 11:30 बजे शुरू होकर रात 8:30 बजे तक जारी रहेगी। सुभाष नगर से आखिरी मेट्रो रात 8 बजे रवाना होगी जबकि एम्स स्टेशन से अंतिम मेट्रो रात 8:30 बजे चलेगी। रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों पर दोनों दिशाओं में कुल 70 ट्रिप संचालित किए जाएंगे। इस तरह छुट्टी वाले दिनों में मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय और ज्यादा ट्रिप का फायदा मिलेगा।

    भोपाल मेट्रो का संचालन अब दोनों ट्रैक पर किया जा रहा है। नई समय सारणी में ट्रेनों के बीच 15 मिनट का समान अंतराल रखा गया है। इससे यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खासकर नियमित रूप से मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी माना जा रहा है। यात्री अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार आसानी से बना सकेंगे।

    मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों के लिए स्टेशन पहुंचने और सुरक्षा जांच से जुड़ी व्यवस्था को भी स्पष्ट किया है। पहली मेट्रो के निर्धारित प्रस्थान समय से करीब 15 मिनट पहले यात्रियों के लिए स्टेशन खोले जाएंगे। इससे यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश करने सुरक्षा जांच पूरी करने और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। टिकटिंग की सुविधा भी निर्धारित प्रवेश और निकास द्वार पर उपलब्ध रहेगी।

    सुभाष नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 केंद्रीय विद्यालय स्टेशन पर गेट नंबर 3 बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 एमपी नगर स्टेशन पर गेट नंबर 3 रानी कमलापति स्टेशन पर गेट नंबर 2 डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट नंबर 3 अलकापुरी स्टेशन पर गेट नंबर 3 और एम्स स्टेशन पर गेट नंबर 1 पर मैनुअल टिकटिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी। नई टाइमिंग और नियमित 15 मिनट के अंतराल से भोपाल मेट्रो सेवा के इस्तेमाल को आसान बनाने की कोशिश की गई है। अब यात्रियों को सप्ताह के अधिकांश दिनों में तय अंतराल पर ट्रेन मिलेगी जबकि रविवार और सार्वजनिक अवकाश पर अतिरिक्त परिचालन समय का लाभ भी मिलेगा।

  • श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का आज से शुभारंभ, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भगवती नगर से दिखाएंगे हरी झंडी

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में 21वीं श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का सोमवार से विधिवत शुभारंभ हो रहा है। केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सुबह जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को पुंछ में स्थित पवित्र धाम के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह धार्मिक यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    यात्रा की पूर्व संध्या पर रविवार को जम्मू के अभिनव थिएटर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कार भारती तथा कला, भाषा एवं संस्कृति अकादमी की ओर से आयोजित इस भजन संध्या में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने औपचारिक रूप से यात्रा समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धालुओं और कलाकारों के ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भगवान शिव सत्य, एकता और आध्यात्मिक शक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बूढ़ा अमरनाथ यात्रा पर निकलने वाले श्रद्धालुओं का प्रत्येक कदम समाज को निरंतर उन्नति और सद्भाव की दिशा में ले जाता है। बाबा के दर्शन से प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा समाज में आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

    उपराज्यपाल ने सभी नागरिकों से धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ठहरने, भोजन, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के कड़े और पुख्ता इंतजाम किए हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए संपूर्ण यात्रा मार्ग और पुंछ क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

    भजन संध्या के दौरान गायिका रितिमा और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत भक्ति भजनों ने समां बांध दिया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में संत शिरोमणि दिनेश भारती, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता शक्तिदास शर्मा, सतपाल शर्मा, जम्मू के मंडलायुक्त रमेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेने के लिए जम्मू पहुंचे हैं।

  • होर्मुज का इंतजार छोड़ दुनिया खोज रही नया रास्ता, साइबेरिया के ऊपर से होगा व्यापार; भारत भी भेजेगा जहाज

    होर्मुज का इंतजार छोड़ दुनिया खोज रही नया रास्ता, साइबेरिया के ऊपर से होगा व्यापार; भारत भी भेजेगा जहाज


    नई दिल्ली । होर्मुज और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता ने दुनिया के सामने वैकल्पिक व्यापारिक रास्तों की जरूरत बढ़ा दी है। इसी बीच रूस के साइबेरियाई तट के ऊपर से गुजरने वाले आर्कटिक समुद्री मार्ग यानी नॉर्दर्न सी रूट को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं। चीन यूरोप के साथ व्यापार के लिए इस बर्फीले रास्ते का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी में है। वहीं भारत भी इस मार्ग की संभावनाओं को देखते हुए 2027 में परीक्षण के लिए अपना जहाज भेजने की योजना बना रहा है।

    वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा समुद्री मार्गों पर निर्भर है। लाल सागर और स्वेज नहर क्षेत्र में तनाव के कारण पहले ही जहाजों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे हालात में किसी एक रास्ते पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक मार्ग विकसित करना रणनीतिक जरूरत बनता जा रहा है।

    नॉर्दर्न सी रूट रूस के आर्कटिक तट के साथ चलता है और पूर्वी एशिया को यूरोप से जोड़ता है। चीन से उत्तरी यूरोप तक समुद्री यात्रा इस रास्ते से करीब 18 से 20 दिनों में पूरी होने की संभावना बताई जाती है। इसके मुकाबले स्वेज नहर के रास्ते यात्रा में लगभग 40 दिन तक लग सकते हैं जबकि अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते जहाजों को करीब 50 दिन तक का समय लग सकता है। कम दूरी का मतलब ईंधन और परिचालन लागत में संभावित कमी भी हो सकता है।

    फिलहाल चीन से यूरोप जाने वाले कंटेनर जहाज हिंद महासागर अरब सागर लाल सागर और स्वेज नहर से होते हुए भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं। आर्कटिक मार्ग में जहाज चीन के उत्तरी हिस्से से निकलकर रूस के साइबेरियाई तट के ऊपर से आर्कटिक महासागर में प्रवेश करते हैं और फिर यूरोप की ओर बढ़ते हैं। यही वजह है कि चीन इस मार्ग को आइस सिल्क रोड के नाम से भी देख रहा है।

    चीन के लिए इस मार्ग की अहमियत केवल समय और लागत तक सीमित नहीं है। चीन लंबे समय से अपने व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए कुछ समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंतित रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य को लेकर उसकी रणनीतिक चिंता को मलक्का दुविधा कहा जाता है। ऐसे में वैकल्पिक समुद्री मार्ग चीन को व्यापारिक जोखिम कम करने का विकल्प दे सकता है।

    भारत भी आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रूस के साथ ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों के अलावा यूरोप तक बेहतर समुद्री संपर्क भारत के लिए इस मार्ग को महत्वपूर्ण बनाता है। इसी संभावनाओं को परखने के लिए भारत 2027 में इस रास्ते पर परीक्षण के लिए अपना जहाज भेजने की तैयारी कर रहा है। इससे भारत को इस मार्ग की व्यावहारिक चुनौतियों और संभावित आर्थिक फायदे को समझने का मौका मिलेगा।

    हालांकि आर्कटिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह आसान विकल्प मानना जल्दबाजी होगी। यहां अत्यधिक ठंड बर्फ की स्थिति और मौसम संबंधी चुनौतियां जहाजों के संचालन को कठिन बना सकती हैं। विशेष प्रकार के जहाज और बेहतर नेविगेशन व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। इसके बावजूद समुद्री व्यापार में विविधता लाने और पारंपरिक मार्गों पर निर्भरता घटाने की दिशा में यह रास्ता आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    अगर आर्कटिक मार्ग का व्यावसायिक इस्तेमाल बड़े स्तर पर बढ़ता है तो एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के समीकरण बदल सकते हैं। चीन के साथ रूस की साझेदारी और भारत की संभावित भागीदारी इस पूरे मार्ग को केवल व्यापार का विकल्प नहीं बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना सकती है।

  • एक्सरसाइज के बावजूद क्यों नहीं घट रहा फैट, विशेषज्ञों ने ओवरट्रेनिंग और हार्मोनल असंतुलन पर जताई चिंता

    एक्सरसाइज के बावजूद क्यों नहीं घट रहा फैट, विशेषज्ञों ने ओवरट्रेनिंग और हार्मोनल असंतुलन पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।नियमित रूप से कड़ा व्यायाम करने और खानपान पर ध्यान देने के बावजूद वजन नियंत्रित न होना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वजन घटाने के प्रयास में अक्सर लोग अत्यधिक पसीना बहाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के विपरीत मिलते हैं। इस स्थिति के पीछे केवल आहार ही मुख्य वजह नहीं होती, बल्कि शरीर को पर्याप्त आराम न देना, खराब नींद और जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करना भी एक बड़ा कारण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि व्यायाम के बाद मांसपेशियों की रिकवरी के लिए शरीर को पर्याप्त समय मिलना अत्यंत आवश्यक है। जब कोई व्यक्ति लगातार भारी वर्कआउट करता है और रात में गहरी नींद नहीं ले पाता, तो शरीर में अंदरूनी तनाव बढ़ने लगता है। यह स्थिति ऊर्जा स्तर, पाचन क्रिया और दैनिक कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। अत्यधिक शारीरिक परिश्रम के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त हो सकता है और हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे फैट घटने के बजाय जमा होने लगता है।

    क्रॉनिक डिजीज विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना किसी विश्राम दिवस के रोज कड़ा व्यायाम करने से शरीर में क्रॉनिक लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन यानी अंदरूनी सूजन और तनाव उत्पन्न होता है। यह अंदरूनी तनाव हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित करता है, जिससे विशेष रूप से पेट के आसपास फैट जमा होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके अलावा, ओवरट्रेनिंग के कारण महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमतिता जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं, जो कि शरीर द्वारा अत्यधिक थकान का स्पष्ट संकेत है।

    व्यायाम से शरीर पूरी तरह थक जाने के बाद भी यदि रात में नींद न आने की समस्या हो रही है, तो यह ओवरट्रेनिंग और एड्रिनल ग्लैंड पर पड़ रहे अत्यधिक दबाव को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में शरीर थायरॉइड और चयापचय दर को धीमा कर देता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक जाती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस के लिए हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही कसरत करनी चाहिए।

    एक स्वस्थ जीवन शैली और प्रभावी वजन नियंत्रण के लिए केवल कठिन वर्कआउट ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ संतुलित आहार, समय पर पर्याप्त आराम और प्रतिदिन कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेना अनिवार्य है। शरीर को अत्यधिक थका देने के बजाय संयमित दिनचर्या अपनाकर ही टिकाऊ फिटनेस और सही वजन प्राप्त किया जा सकता है।

  • मौसम 17 अगस्त 2026: MP में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम 17 अगस्त 2026: MP में फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश 17 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश में मानसून का असर एक बार फिर तेज दिखाई दे सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसम अधिक सक्रिय रहने के संकेत हैं जहां 17 अगस्त को बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए 17 अगस्त को Very Heavy Rain का अलर्ट जारी किया है। इसके बाद भी 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

    मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में भी बारिश से राहत मिलने के संकेत हैं। IMD के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में 15 से 17 अगस्त के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 15 से 21 अगस्त के दौरान कई क्षेत्रों में व्यापक बारिश का दौर बने रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में 17 अगस्त को बारिश का असर केवल एक-दो जिलों तक सीमित रहने के बजाय राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है।

    राजधानी भोपाल की बात करें तो 17 अगस्त को आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। स्थानीय पूर्वानुमान में सोमवार को बादल और बीच-बीच में बारिश की स्थिति बताई गई है। तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी के संकेत नहीं हैं। ऐसे में राजधानी में मौसम सुहावना रहने के साथ कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हो सकती है।

    इंदौर में भी 17 अगस्त को मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद नहीं है। IMD के शहर आधारित पूर्वानुमान के अनुसार इंदौर में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और बारिश या गरज-चमक की संभावना बनी रहेगी। अधिकतम तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। ऐसे में शहरवासियों को दिन के दौरान अचानक बारिश के लिए तैयार रहना होगा।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसम का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। IMD के चेतावनी बुलेटिन में 17 अगस्त को बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति का संकेत दिया गया है। बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने और सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने की संभावना रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने तथा नदी नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी पर भी नजर रखना जरूरी होगा। ऐसे मौसम में लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की सलाह दी जाती है।

    देश के स्तर पर भी 17 अगस्त को मानसून काफी सक्रिय रहने का अनुमान है। IMD के अनुसार 15 से 21 अगस्त के बीच कई राज्यों में व्यापक बारिश की स्थिति बन सकती है। पूर्वी और मध्य भारत के अलावा देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इसका असर सड़क और रेल यातायात के साथ स्थानीय जनजीवन पर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त को मध्य प्रदेश में मौसम राहत और चुनौती दोनों लेकर आ सकता है। भोपाल और इंदौर में बादल और बारिश की संभावना है जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। तेज बारिश के दौरान बिजली चमकने और हवाओं की स्थिति को देखते हुए खुले मैदानों में जाने से बचना और पेड़ों के नीचे खड़े न होना बेहतर रहेगा। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

  • बंबई उच्च न्यायालय लिपिक भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप, अभ्यर्थियों का छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन

    बंबई उच्च न्यायालय लिपिक भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप, अभ्यर्थियों का छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन


    नई दिल्ली ।
    बंबई उच्च न्यायालय में लिपिक पद के लिए आयोजित ऑनलाइन टाइपिंग परीक्षा के दौरान तकनीकी और सर्वर संबंधी गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में आई बाधाओं से आक्रोशित कई अभ्यर्थियों ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रणालीगत कमियों के कारण कई उम्मीदवारों को बिना किसी गलती के अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है।

    प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके प्रभावित उम्मीदवारों से मिलने सुराणा नगर स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे। अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए दीपके ने परीक्षा को नए सिरे से दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित अभ्यर्थियों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे इस संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे। दीपके ने अधिकारियों पर अभ्यर्थियों की शिकायतों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।

    परीक्षार्थियों के अनुसार, सुबह के सत्र में परीक्षा के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन में पीलापन आने और कीबोर्ड द्वारा काम करना बंद कर देने जैसी गंभीर समस्याएं आईं। कई केंद्रों पर सर्वर की सुस्ती के कारण अभ्यर्थी अपना मूल्यांकन कार्य सुचारू रूप से पूरा नहीं कर सके। अभ्यर्थियों ने आशंका जताई है कि इन तकनीकी खामियों के कारण उनके भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए प्रभावित सत्र की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई जानी चाहिए।

    उच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से जारी एक आधिकारिक संदेश में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा का आयोजन तय एजेंसी के माध्यम से कराया गया था। हालांकि, प्रशासन ने माना कि औरंगाबाद और कल्याण जैसे कुछ केंद्रों पर तकनीकी बाधाएं दर्ज की गई हैं। एजेंसी द्वारा संचालित इस प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई के संबंध में उम्मीदवारों को आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की औरंगाबाद और नागपुर पीठ के अंतर्गत 1,300 लिपिकीय पदों के लिए यह परीक्षा तीन सत्रों में आयोजित की गई थी। इसके लिए पूरे राज्य से लगभग 13,000 उम्मीदवार पात्र पाए गए थे, जिनमें से अकेले मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के करीब 2,900 अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के केंद्रों पर भाग लिया था। मध्य प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञों की नजरें भी इस भर्ती मामले के आगामी प्रशासनिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

  • BRICS Summit 2026 से पहले दिल्ली में महामंथन, पर्यावरण पर 4 बड़े मुद्दों को लेकर बनेगी साझा रणनीति

    BRICS Summit 2026 से पहले दिल्ली में महामंथन, पर्यावरण पर 4 बड़े मुद्दों को लेकर बनेगी साझा रणनीति


    नई दिल्ली । ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली में सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्रियों की अहम बैठक होने जा रही है। भारत की अध्यक्षता में 18 अगस्त को आयोजित होने वाली इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक का मुख्य फोकस सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने जंगलों की आग से निपटने सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन के असर के प्रति बेहतर अनुकूलन की रणनीति तैयार करने पर रहेगा। माना जा रहा है कि बैठक के बाद इन मुद्दों को लेकर साझा बयान भी जारी किया जा सकता है।

    पर्यावरण मंत्रियों की बैठक से एक दिन पहले 17 अगस्त को पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं टिकाऊ विकास से जुड़े संपर्क समूह के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी होगी। इन बैठकों को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की व्यापक थीम सुदृढ़शीलता नवाचार सहयोग और सतत विकास से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास को लेकर सामूहिक सहयोग को और मजबूत करना है।

    बैठक में सबसे अहम मुद्दों में से एक सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था रहेगा। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ कचरे को कम करना और दोबारा उपयोग की संभावनाओं को बढ़ाना है। इसके लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व जैसे नीतिगत ढांचे को मजबूत करने और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में सदस्य देशों के अनुभव साझा किए जाएंगे। माना जा रहा है कि अलग अलग देशों में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं से सीख लेकर संसाधनों के कुशल उपयोग के लिए साझा रणनीति पर जोर दिया जाएगा।

    जंगल की आग का प्रबंधन भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। दुनियाभर में बढ़ती जंगल की आग पर्यावरण के साथ साथ वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। ऐसे में ब्रिक्स देश डेटा संग्रह निगरानी क्षमता निर्माण और समय रहते आग का पता लगाने जैसी व्यवस्थाओं पर सहयोग बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। रोकथाम से लेकर तैयारी और आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तक एक बेहतर व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

    तीसरा प्रमुख मुद्दा सतत जीवनशैली का है। संसाधनों के बढ़ते इस्तेमाल और पर्यावरण पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए लोगों की जीवनशैली में ऐसे बदलाव लाने पर जोर दिया जा रहा है जिससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रह सके। ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान साझा करने और सफल प्रयोगों को एक दूसरे तक पहुंचाने पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ऐसे नए और व्यावहारिक मॉडल विकसित करना है जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

    चौथा महत्वपूर्ण मुद्दा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अनुकूलन का रहेगा। इसमें समुदायों को केंद्र में रखकर जलवायु जोखिमों से निपटने की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय अनुभवों को आधुनिक उपायों के साथ जोड़कर जलवायु अनुकूलन को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।

    दिल्ली में होने वाली यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच साझा प्रयासों और नीतिगत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। बैठक के निष्कर्ष और संभावित साझा बयान से यह संकेत मिल सकता है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह की सामूहिक रणनीति को आगे बढ़ाना चाहता है।