Author: bharati

  • जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से रह सकते हैं बाहर, टीम मैनेजमेंट ने टेस्ट क्रिकेट के लिए बनाई खास रणनीति

    जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से रह सकते हैं बाहर, टीम मैनेजमेंट ने टेस्ट क्रिकेट के लिए बनाई खास रणनीति


    नई दिल्ली ।
    भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की वनडे सीरीज में खेलते नजर नहीं आ सकते हैं। उनके इस सीरीज से बाहर रहने की संभावित वजह चोट नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की रणनीति बताई जा रही है। बुमराह पूरी तरह फिट हैं और फिलहाल टेस्ट क्रिकेट की तैयारी पर ध्यान दे रहे हैं।

    भारतीय टीम उन्हें आगामी महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों के लिए तरोताजा और पूरी तरह तैयार रखना चाहती है।टीम प्रबंधन की योजना के अनुसार, बुमराह को वनडे सीरीज में उतारने के बजाय लाल गेंद से खेले जाने वाले क्रिकेट के लिए तैयार किया जा सकता है। वह अहमदाबाद में टेस्ट क्रिकेट की तैयारी शुरू कर चुके हैं। अक्टूबर के आखिर में उनके भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचने की संभावना है। इसके बाद वह न्यूजीलैंड रवाना हो सकते हैं। हालांकि, वनडे सीरीज में उनकी अनुपस्थिति को लेकर अंतिम स्थिति टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

    वर्कलोड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान
    लंबे अंतरराष्ट्रीय दौरे और लगातार होने वाले मुकाबलों को देखते हुए बुमराह के कार्यभार का प्रबंधन भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण है। वह टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उनकी फिटनेस को ध्यान में रखते हुए खेलने के कार्यक्रम की योजना बना रहा है।

    बुमराह को आगामी टेस्ट मुकाबलों से पहले मैच अभ्यास दिलाने के लिए इंडिया ए की टीम के साथ मैदान पर उतारने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, उन्हें 6 नवंबर से शुरू होने वाले इंडिया ए के तीसरे मुकाबले में खेलने का मौका मिल सकता है। इससे उनके कार्यभार को धीरे-धीरे बढ़ाने और टेस्ट क्रिकेट के लिए लय हासिल करने में मदद मिल सकती है।इसके बाद 19 नवंबर से वेलिंगटन में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मुकाबले से पहले उन्हें पर्याप्त आराम और तैयारी का समय मिल सकता है। टीम प्रबंधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुमराह महत्वपूर्ण टेस्ट मैचों में अपनी पूरी क्षमता के साथ गेंदबाजी कर सकें।

    चोट के बाद टेस्ट क्रिकेट पर नजर
    बुमराह को इस साल की शुरुआत में घुटने की चोट के कारण श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों से बाहर रहना पड़ा था। इसके बाद उनकी फिटनेस और आगामी मुकाबलों में उपलब्धता को लेकर टीम प्रबंधन सावधानी बरत रहा है। बुमराह ने पिछले साल घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पिछला बहुदिवसीय मुकाबला खेला था। ऐसे में टेस्ट प्रारूप में वापसी के लिए उनकी तैयारी को अहम माना जा रहा है।उनके खेलने के कार्यक्रम को लेकर टीम से जुड़े अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि तेज गेंदबाज को किस तरह पर्याप्त अभ्यास, आराम और मैच खेलने का अवसर दिया जाए, ताकि लंबे प्रारूप में उनकी उपलब्धता बनी रहे।

    ऑस्ट्रेलिया सीरीज और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर नजर
    भारतीय टीम की रणनीति केवल न्यूजीलैंड दौरे तक सीमित नहीं है। अगले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को भी ध्यान में रखा जा रहा है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।इसी वजह से टीम मैनेजमेंट उन्हें हर द्विपक्षीय सीरीज में खिलाने के बजाय महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों के लिए सुरक्षित रखने की रणनीति अपना सकता है। वनडे सीरीज में उनकी संभावित अनुपस्थिति को इसी योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।

    टीम चयन पर जल्द साफ होगी तस्वीर
    भारत की वनडे और टेस्ट टीमों की घोषणा आने वाले दिनों में होने की संभावना है। चयनकर्ता हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों की फिटनेस तथा उपलब्धता से जुड़ी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद टीम संयोजन को अंतिम रूप दिया जा सकता है। बुमराह के वनडे सीरीज में खेलने या आराम दिए जाने पर भी आधिकारिक घोषणा के बाद स्थिति साफ होगी।

  • स्मृति मंधाना की कप्तानी में नए सफर पर निकलेगी टीम इंडिया, जिम्बाब्वे से पहली बार द्विपक्षीय सीरीज, जानें मैच का समय और लाइव स्ट्रीमिंग

    स्मृति मंधाना की कप्तानी में नए सफर पर निकलेगी टीम इंडिया, जिम्बाब्वे से पहली बार द्विपक्षीय सीरीज, जानें मैच का समय और लाइव स्ट्रीमिंग


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम शुक्रवार 16 अक्टूबर से जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में अपने नए सफर की शुरुआत करेगी। इस सीरीज में स्मृति मंधाना कप्तान के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगी। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में होने वाला पहला मुकाबला भारतीय टीम के लिए अपनी तैयारियों को परखने और खेल के कमजोर पहलुओं में सुधार करने का अवसर होगा। भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच यह पहली द्विपक्षीय सीरीज है। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला खास महत्व रखता है।
    भारतीय टीम ने हाल के समय में कई उपलब्धियां हासिल की हैं और घरेलू मैदान पर वनडे विश्व कप जीतकर अपनी क्षमता भी साबित की है। हालांकि टी20 प्रारूप में टीम को अब भी कुछ क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है। पिछले दो टी20 विश्व कप में भारत का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। इसलिए जिम्बाब्वे के खिलाफ यह सीरीज केवल जीत दर्ज करने का मौका नहीं बल्कि आगामी बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम संयोजन और रणनीति को मजबूत करने का अवसर भी है।
    भारतीय बल्लेबाजी की बात करें तो स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा टीम को तेज शुरुआत देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन मध्य ओवरों में लगातार रन बनाने और विकेट बचाए रखने की चुनौती टीम के सामने रही है। तीसरे नंबर पर भरोसेमंद बल्लेबाज की तलाश भी अहम होगी। पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर की फॉर्म पर भी नजर रहेगी। अब वह विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में खेलेंगी और उनसे मध्यक्रम को मजबूती देने की उम्मीद होगी। ऋचा घोष निचले क्रम में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखती हैं लेकिन टीम को उनके साथ अन्य बल्लेबाजों से भी बड़े शॉट लगाने की उम्मीद होगी।
    गेंदबाजी में भारत की स्पिन ताकत अहम भूमिका निभा सकती है। दीप्ति शर्मा का अनुभव और उनकी ऑफ स्पिन टीम के लिए उपयोगी है। युवा श्री चरणी ने भी अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। प्रेमा रावत को मध्य ओवरों में विकेट लेने के अवसर मिल सकते हैं। तेज गेंदबाजी में नंदनी शर्मा सहित अन्य गेंदबाजों को अपनी लाइन और लेंथ के साथ बेहतर नियंत्रण दिखाना होगा। क्षेत्ररक्षण में सुधार करना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। टीम में निकी प्रसाद और जिंतिमानी कलिता जैसे युवा चेहरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है।
    दूसरी ओर जिम्बाब्वे की महिला टीम इस दौरे को अपनी अंतरराष्ट्रीय क्षमता साबित करने के अवसर के रूप में देखेगी। टीम की कप्तानी जोसेफिन नकोमो करेंगी। जिम्बाब्वे ने हाल में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे मुकाबले में जीत हासिल की थी जिससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। हालांकि टी20 प्रारूप में भारतीय टीम को चुनौती देने के लिए उसे बल्लेबाजी गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों विभागों में अनुशासित प्रदर्शन करना होगा।
    भारत और जिम्बाब्वे के बीच पहला महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 16 अक्टूबर को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होगा और टॉस शाम 6:30 बजे होने की जानकारी दी गई है। भारत में मुकाबले का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर और लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध होगी। सीरीज के अगले दो टी20 मुकाबले 18 और 20 अक्टूबर को रायपुर में खेले जाएंगे। इसके बाद दोनों टीमें वडोदरा में तीन वनडे मैचों की सीरीज में आमने-सामने होंगी।
    स्मृति मंधाना के नेतृत्व में भारतीय टीम के सामने अब चुनौती अपने मजबूत पक्षों को बरकरार रखते हुए कमजोरियों को दूर करने की होगी। जिम्बाब्वे के खिलाफ यह सीरीज युवा खिलाड़ियों को मौका देने और आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए सही संयोजन तैयार करने में अहम साबित हो सकती है।

  • ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की जिंदगी के 10 रोचक राज, धर्मेंद्र के साथ हिट जोड़ी, शाहरुख खान की फिल्म से जुड़ा निर्देशन का किस्सा

    ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी की जिंदगी के 10 रोचक राज, धर्मेंद्र के साथ हिट जोड़ी, शाहरुख खान की फिल्म से जुड़ा निर्देशन का किस्सा


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी अपनी खूबसूरती शानदार अदाकारी और शास्त्रीय नृत्य के लिए दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज करती आई हैं। फिल्मों में अपनी खास पहचान बनाने वाली हेमा मालिनी ने अभिनय के साथ निर्देशन नृत्य और राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनके 78वें जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन और करियर से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प पहलू चर्चा में हैं जो उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे अलग अभिनेत्रियों में शामिल करते हैं। उनका सफर केवल फिल्मों की सफलता तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने भारतीय संस्कृति और कला को भी लगातार आगे बढ़ाया है।
    हेमा मालिनी ने हिंदी फिल्मों में पहचान बनाने से पहले तमिल सिनेमा में काम किया था। वर्ष 1961 में आई फिल्म इथु साथियाम उनके शुरुआती अभिनय सफर का हिस्सा रही। हालांकि इस फिल्म से उन्हें बड़ी पहचान नहीं मिली लेकिन इसने उनके फिल्मी करियर की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और अपनी अदाकारी तथा आकर्षक व्यक्तित्व से दर्शकों का ध्यान खींचा। 1970 के दशक और 1980 के शुरुआती वर्षों में वह हिंदी फिल्मों की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं। यह उपलब्धि उस दौर में उनकी लोकप्रियता और स्टारडम को दर्शाती है।
    हेमा मालिनी की पहचान बनाने में उनकी कई फिल्मों का बड़ा योगदान रहा। सीता और गीता में उनके अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया जबकि शोले में बसंती का किरदार आज भी बेहद लोकप्रिय है। धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। पर्दे पर वीरू और बसंती की केमिस्ट्री हिंदी सिनेमा के यादगार पलों में शामिल हो गई। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और बाद में विवाह भी किया। उनकी जोड़ी की लोकप्रियता आज भी फिल्मों के शौकीनों के बीच बनी हुई है।
    उनके करियर की एक दिलचस्प बात यह भी है कि उन्होंने कपूर परिवार की अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों के साथ काम किया। राज कपूर शम्मी कपूर शशि कपूर रणधीर कपूर और ऋषि कपूर जैसे अभिनेताओं के साथ उनका फिल्मी सफर हिंदी सिनेमा के कई दौरों से जुड़ता है। इस तरह उन्होंने बदलते समय के साथ अपनी पहचान कायम रखी और अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
    अभिनय के अलावा हेमा मालिनी एक प्रशिक्षित शास्त्रीय नृत्यांगना भी हैं। उन्होंने भरतनाट्यम के साथ कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम का प्रशिक्षण लिया है। देश और विदेश के मंचों पर उन्होंने अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया। भारतीय पारंपरिक नृत्य को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने नाट्य विहार कलाकेंद्र की स्थापना भी की। वर्ष 2024 में अयोध्या के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर उन्होंने रामायण पर आधारित नृत्य नाटिका में माता सीता की भूमिका निभाई थी।
    हेमा मालिनी का जीवन फिल्मों और नृत्य से आगे भी फैला हुआ है। जानवरों के प्रति उनके लगाव और संरक्षण से जुड़े प्रयासों के लिए पेटा इंडिया ने वर्ष 2011 में उन्हें पर्सन ऑफ द ईयर सम्मान दिया था। उन्होंने राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। वह वर्ष 2003 से 2009 तक राज्यसभा की सदस्य रहीं और बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति में काम किया।
    उन्हें ड्रीम गर्ल का नाम वर्ष 1977 में आई फिल्म ड्रीम गर्ल से खास तौर पर लोकप्रिय हुआ। उनकी सुंदरता और पर्दे पर प्रभावशाली मौजूदगी ने इस उपनाम को उनकी स्थायी पहचान बना दिया। उन्होंने टेलीविजन पर दूरदर्शन के कार्यक्रम रंगोली की प्रस्तोता के रूप में भी काम किया और कई धारावाहिकों के निर्माण तथा निर्देशन से जुड़ी रहीं।
    निर्देशन के क्षेत्र में भी हेमा मालिनी ने अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1992 में आई फिल्म दिल आशना है का निर्देशन उन्होंने किया था। फिल्म में शाहरुख खान और दिव्या भारती मुख्य भूमिकाओं में थे। शाहरुख खान ने यह फिल्म दीवाना से पहले साइन की थी लेकिन दीवाना पहले रिलीज हुई और इसी से उनका हिंदी फिल्मी पदार्पण हुआ।
    इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हेमा मालिनी ने शाहरुख खान को सुपरस्टार बनाया लेकिन उनकी फिल्म शाहरुख के शुरुआती करियर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण किस्सा जरूर है। बाद में हेमा मालिनी ने टेल मी ओ खुदा का भी निर्देशन और निर्माण किया। उनका बहुआयामी सफर बताता है कि ड्रीम गर्ल की पहचान केवल खूबसूरती तक सीमित नहीं बल्कि अभिनय नृत्य निर्देशन और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान से बनी है।

  • शनि की साढ़ेसाती 2027 में मीन राशि वालों की बढ़ा सकती है मुश्किलें, करियर, धन और रिश्तों में बरतनी होगी सावधानी

    शनि की साढ़ेसाती 2027 में मीन राशि वालों की बढ़ा सकती है मुश्किलें, करियर, धन और रिश्तों में बरतनी होगी सावधानी

    नई दिल्ली । ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती को जीवन का एक महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि में व्यक्ति को अपने कामकाज, जिम्मेदारियों और फैसलों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। शनि को कर्मों के अनुसार फल देने वाला ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि साढ़ेसाती के दौरान कुछ लोगों को काम में रुकावटों, बढ़ती जिम्मेदारियों और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इस अवधि में हर व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना ही पड़े। मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी से अपने दायित्व निभाना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    वर्ष 2027 में शनि की साढ़ेसाती तीन राशियों पर अलग-अलग चरणों में प्रभावी रहेगी। कुंभ राशि के जातकों के लिए इसका अंतिम चरण जून तक रहने की बात कही गई है। मेष राशि पर पहला चरण और मीन राशि पर दूसरा यानी मध्य चरण रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में साढ़ेसाती के मध्य चरण को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान जिम्मेदारियां बढ़ने और कार्यक्षेत्र में चुनौतियां आने की आशंका जताई जाती है। ऐसे में मीन राशि के जातकों को अपने निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    मीन राशि: प्रेम संबंधों और करियर में सावधानी
    मीन राशि के जातकों के लिए वर्ष 2027 में कुछ समय चुनौतीपूर्ण रह सकता है। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, 3 जून 2027 तक और फिर 20 अक्टूबर के बाद रिश्तों तथा नौकरी से जुड़े मामलों में सतर्क रहने की जरूरत हो सकती है। प्रेम संबंधों में छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ने की आशंका जताई गई है। ऐसे में बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने और एक-दूसरे की बात समझने का प्रयास करना बेहतर रहेगा।

    करियर के मामले में भी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। काम में अपेक्षित परिणाम पाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने और काम में लापरवाही से बचने की सलाह दी जाती है। कारोबार करने वालों को नए निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए। जल्दबाजी में लिया गया फैसला परेशानी बढ़ा सकता है।

    आर्थिक मामलों में बरतें सावधानी
    मीन राशि के जातकों को आर्थिक फैसले लेते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। निवेश करने से पहले जोखिम और संभावित परिणामों को समझना जरूरी होगा। शेयर बाजार में पैसा लगाने की योजना बना रहे लोगों को सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। सट्टेबाजी से दूरी बनाए रखने और किसी को बड़ी रकम उधार देने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन करने की सलाह दी जाती है।ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शॉर्टकट अपनाने के बजाय मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ना बेहतर माना जाता है। नौकरी, कारोबार और धन से जुड़े मामलों में दूसरों के दबाव में आकर फैसला लेने से बचना चाहिए।

    स्वास्थ्य और दिनचर्या पर दें ध्यान
    इस अवधि में मीन राशि के जातकों को अपनी सेहत और दिनचर्या का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। थकान, तनाव, उदासी, पैरों से जुड़ी परेशानी या नींद की कमी जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सोना, संतुलित खानपान अपनाना और नियमित व्यायाम करना लाभकारी आदतें हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

    शनि की साढ़ेसाती में किन गलतियों से बचें?
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मीन राशि के जातकों को 3 जून तक और फिर 20 अक्टूबर के बाद बड़े फैसले लेते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे ध्यानपूर्वक पढ़ना जरूरी है। नौकरी, कारोबार और आर्थिक मामलों में बिना पूरी जानकारी के कदम नहीं उठाना चाहिए। अपने काम के प्रति ईमानदार रहना, जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करना और धैर्य बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • विजय माल्या के कर्ज विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट ने 6203 करोड़ की वसूली और शेयरों को लेकर क्या कहा, जानिए पूरा मामला

    विजय माल्या के कर्ज विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट ने 6203 करोड़ की वसूली और शेयरों को लेकर क्या कहा, जानिए पूरा मामला


    नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की आलीशान जीवनशैली और वित्तीय अनुशासन को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का ध्यान मेहनत और वित्तीय अनुशासन से हटकर अहंकार और अत्यधिक भोग-विलास पर केंद्रित हो जाता है तो दशकों की मेहनत भी बर्बाद हो सकती है। अदालत की यह टिप्पणी किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमोटर विजय माल्या से जुड़े शेयर विवाद की सुनवाई के दौरान सामने आई। मामले में डियाजियो होल्डिंग्स नीदरलैंड्स बीवी और भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह के बीच यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड के उन शेयरों को लेकर विवाद था जिन्हें एक ऋण के सिलसिले में गिरवी रखा गया था।
    जस्टिस डीके सिंह और जस्टिस टीएम नदाफ की पीठ ने मामले में राहत देते हुए शेयरों पर दावों की प्राथमिकता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि संबंधित शेयरों पर डियाजियो का दावा बैंकों के कंसोर्टियम के दावे की तुलना में पहले और अधिक मजबूत है। इस फैसले का संबंध शेयरों पर अधिकार और ऋण से जुड़े दावों की कानूनी स्थिति से है। अदालत की टिप्पणी ने एक बार फिर विजय माल्या के कारोबारी मामलों और किंगफिशर एयरलाइंस पर बकाया कर्ज के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
    सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्तीय अनुशासन और व्यक्तिगत जीवनशैली के बीच संतुलन के महत्व पर जोर दिया। अदालत के अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने काम और आर्थिक जिम्मेदारियों के बजाय व्यक्तिगत अहंकार और अत्यधिक भोग-विलास को प्राथमिकता देने लगता है तो उसके लंबे समय के प्रयास भी निष्फल हो सकते हैं। अनुशासन की जगह दिखावे और खुद को बड़ा साबित करने की प्रवृत्ति हावी हो जाए तो आर्थिक संकट गहरा सकता है। अदालत की इस टिप्पणी को विजय माल्या के कारोबारी सफर और किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े विवादों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
    विजय माल्या कभी देश के चर्चित उद्योगपतियों में शामिल रहे हैं। किंगफिशर एयरलाइंस को एक प्रीमियम विमानन ब्रांड के रूप में पेश किया गया था और कंपनी की पहचान उसकी भव्य छवि तथा खर्चीली शैली से जुड़ी रही। हालांकि बाद में एयरलाइन गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई और बैंकों के कर्ज की वसूली एक बड़ा मुद्दा बन गई। माल्या के खिलाफ बैंकों का बकाया चुकाने और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मामले लंबे समय से चर्चा में हैं। इसी पृष्ठभूमि में अदालत की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 6203 करोड़ रुपये के मूल ऋण के मुकाबले अब तक 14131.6 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति बरामद कर ली है। यह आंकड़ा वसूली की प्रक्रिया और बैंकों की ओर से प्राप्त संपत्तियों के मूल्य को दर्शाता है। शेयर विवाद में अदालत के फैसले का मुख्य प्रश्न यह था कि संबंधित गिरवी रखे गए शेयरों पर किस पक्ष का दावा प्राथमिकता रखता है।
    इस मामले में अदालत की टिप्पणी केवल एक कारोबारी विवाद तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने वित्तीय जिम्मेदारी और अनुशासित आर्थिक व्यवहार के महत्व को भी रेखांकित किया। हालांकि शेयरों पर दावों की प्राथमिकता से जुड़ा फैसला और विजय माल्या की जीवनशैली पर अदालत की टिप्पणी अलग-अलग पहलू हैं। मामले का कानूनी महत्व इस बात में है कि संबंधित संपत्तियों पर अधिकार किस पक्ष का पहले माना जाएगा और ऋण वसूली से जुड़े दावों का निपटारा किस आधार पर होगा।

  • दिवाली से पहले शुक्र का उदय, मेष समेत पांच राशियों के लिए धन, नौकरी और कारोबार में बन सकते हैं लाभ के अवसर

    दिवाली से पहले शुक्र का उदय, मेष समेत पांच राशियों के लिए धन, नौकरी और कारोबार में बन सकते हैं लाभ के अवसर

    नई दिल्ली ।वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, धन, सुख-सुविधाओं, वैवाहिक जीवन और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में शुक्र की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ सकता है। जब शुक्र अस्त अवस्था से निकलकर उदित होते हैं, तो इस खगोलीय स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में दिवाली से पहले 30 अक्टूबर को शुक्र तुला राशि में उदित होंगे। इस बदलाव को पांच राशियों के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
    ज्योतिषीय आकलन के मुताबिक, शुक्र उदय का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग हो सकता है। हालांकि, मेष, मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक स्थिति, नौकरी, कारोबार और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में सकारात्मक संभावनाएं जताई गई हैं। इन राशियों के लोगों को इस अवधि में नए अवसर मिलने की उम्मीद हो सकती है।
    मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र का उदय आर्थिक मामलों में राहत देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना जताई गई है। इस दौरान जरूरी काम पूरे हो सकते हैं और कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है। कारोबार करने वालों को अपने कामकाज में सुधार देखने को मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में सहयोग मिलने और वैवाहिक संबंधों में आपसी तालमेल बेहतर होने की उम्मीद है।
    मिथुन राशि वालों के लिए यह अवधि नए अवसरों से जुड़ी हो सकती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान उनके व्यक्तित्व में निखार आने और लोगों के बीच पहचान मजबूत होने की संभावना है। आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं। पहले से चल रहे कामों से भी लाभ मिलने की उम्मीद है। निवेश से संबंधित फैसलों में अवसर सामने आ सकते हैं। सामाजिक स्तर पर मान-सम्मान बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।
    कन्या राशि के जातकों के लिए शुक्र उदय आर्थिक परेशानियों से राहत मिलने का संकेत माना जा रहा है। मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है और कारोबार से जुड़े लोगों की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। जरूरी फैसले लेने में आसानी हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों के काम पर वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान जा सकता है। उनके प्रयासों की सराहना होने और कार्यस्थल पर वरिष्ठों का सहयोग मिलने की संभावना है।
    तुला राशि के जातकों के लिए शुक्र का उदय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि शुक्र इसी राशि में उदित होंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कारोबार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आय बढ़ाने के नए अवसर सामने आ सकते हैं। नौकरी करने वालों के लिए पदोन्नति या वेतन वृद्धि की संभावना जताई गई है। व्यापारियों को भी अपने कामकाज में लाभ मिल सकता है। परिवार में अच्छी खबर आने से खुशी का माहौल बन सकता है और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने की उम्मीद है।
    कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय सुख-सुविधाओं में वृद्धि और आर्थिक अवसरों से जुड़ा हो सकता है। साझेदारी में कारोबार करने वालों को लाभ मिलने की संभावना है। पुराने विवादों या कानूनी मामलों में राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है। नौकरीपेशा लोगों को अपनी योग्यता प्रदर्शित करने के अवसर मिल सकते हैं, जिससे करियर में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। इस अवधि में धन लाभ के मौके भी सामने आने की संभावना है।
    ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी संभावनाएं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक जीवन में नौकरी, कारोबार और आर्थिक स्थिति से जुड़े परिणाम व्यक्ति के प्रयासों, निर्णयों और परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं।

  • ऑरोरा के हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की साजिश से बढ़ी चिंता, मंदिरों की सुरक्षा पर उठे सवाल, नेताओं ने दिया एकजुटता का संदेश

    ऑरोरा के हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की साजिश से बढ़ी चिंता, मंदिरों की सुरक्षा पर उठे सवाल, नेताओं ने दिया एकजुटता का संदेश


    नई दिल्ली। अमेरिका के इलिनॉय राज्य के ऑरोरा शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश सामने आने के बाद हिंदू समुदाय में चिंता बढ़ गई है। इस मामले ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और नस्लीय तथा धार्मिक नफरत से प्रेरित हिंसा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। हिंदू स्वयंसेवक संघ-अमेरिका ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए पूरे देश में मंदिरों और सामुदायिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। संगठन ने राजनीतिक नेताओं से भी हिंदुओं और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नफरत तथा भेदभाव की स्पष्ट रूप से निंदा करने का आग्रह किया है।
    संगठन के बयान के मुताबिक धार्मिक स्वतंत्रता और बिना किसी डर के पूजा करने का अधिकार अमेरिकी समाज के बुनियादी सिद्धांतों में शामिल है। ऐसे में किसी मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश केवल हिंदू समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए चिंताजनक है जो धार्मिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास करते हैं। संगठन ने हिंदू समुदायों से शांत रहने और एकजुटता बनाए रखने की अपील की है। साथ ही मंदिर प्रबंधन समितियों और परिवारों को स्थानीय पुलिस तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के संपर्क में रहने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की सलाह दी है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धमकी की सूचना तुरंत अधिकारियों को देने पर भी जोर दिया गया है।
    रिपोर्ट के अनुसार शिकागो के पास पैलेटाइन में 19 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया गया। उस पर ऑरोरा स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर में सामूहिक गोलीबारी की योजना बनाने का आरोप है। बताया गया है कि घटना के दौरान उसकी बंदूक जाम हो गई और वह गोली नहीं चला सका। इस तरह कथित हमले की कोशिश नाकाम रही। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत होना है।
    घटना पर अमेरिकी सांसदों ने भी चिंता और आक्रोश जताया। सांसद जेमी रस्किन ने कहा कि मंदिर में सामूहिक गोलीबारी की कथित योजना के खिलाफ लोगों को एकजुट होकर श्वेत वर्चस्ववादी सोच और हिंसा का विरोध करना चाहिए। उन्होंने मंदिरों के साथ-साथ यहूदी प्रार्थना स्थलों चर्चों और मस्जिदों को निशाना बनाने वाली हिंसा की भी निंदा की। सांसद रिच मैककॉर्मिक ने धार्मिक पहचान राजनीतिक विचार या नस्ल के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ हिंसा को गलत बताया।
    कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना ने भी घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म अहिंसा की शिक्षा देता है और किसी धार्मिक समुदाय को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। सांसद अमी बेरा ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि जब कथित साजिश सामने आई तब राजा कृष्णमूर्ति और उनका परिवार मंदिर में पूजा कर रहा था। उन्होंने कहा कि यह घटना हिंदू समुदाय समेत धार्मिक और नस्लीय नफरत का सामना कर रहे अन्य समुदायों के लिए मौजूद खतरे को उजागर करती है। उन्होंने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए और कदम उठाने की जरूरत बताई।
    सांसद श्री थानेदार ने भी कांग्रेस से हिंदुओं के खिलाफ हमलों का मुकाबला करने की अपील की। वहीं हेली स्टीवंस ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर नफरत से प्रेरित हिंसा की घटनाएं रुकनी चाहिए और किसी भी अमेरिकी को अपने धर्म का पालन करते समय सुरक्षा को लेकर डर नहीं होना चाहिए। सांसद प्रमिला जयपाल ने स्थानीय पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत और नस्लवाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और सार्वजनिक जीवन में सामने आने वाली नफरत समुदायों को मानसिक आघात पहुंचाती है।
    ऑरोरा के मेयर जॉन लाश ने भी घटना के बाद कहा कि शहर की ताकत उसकी विविधता में है। उन्होंने सभी नागरिकों को सुरक्षित रहने और अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिए जाने पर जोर दिया। हिंदू स्वयंसेवक संघ-अमेरिका ने दूसरे धार्मिक और सामुदायिक संगठनों से भी हिंदू समुदाय के साथ खड़े होने की अपील की है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि धार्मिक स्थलों को सुरक्षित बनाने और नफरत से प्रेरित हिंसा रोकने के लिए समुदायों तथा प्रशासन के बीच सहयोग किस तरह मजबूत किया जाए।

  • दृश्यम के विलेन से नफरत करने लगी थीं दर्शक, चप्पल से मारने की बात सुन घबराए कमलेश सावंत, पत्नी ने समझाया सच

    दृश्यम के विलेन से नफरत करने लगी थीं दर्शक, चप्पल से मारने की बात सुन घबराए कमलेश सावंत, पत्नी ने समझाया सच

    नई दिल्ली।बॉलीवुड फिल्म दृश्यम में इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वाले अभिनेता कमलेश सावंत ने अपने करियर से जुड़ा एक दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साझा किया है। फिल्म में उनके सख्त पुलिस अधिकारी के किरदार को दर्शकों ने इतनी गंभीरता से लिया कि कुछ लोग उनसे वास्तविक जिंदगी में भी नाराज हो गए थे। एक महिला ने तो उनसे यहां तक कह दिया था कि वह चप्पल से उनका मुंह तोड़ना चाहती है। इस प्रतिक्रिया से कमलेश सावंत घबरा गए थे और वहां से निकलने की कोशिश करने लगे। हालांकि उनकी पत्नी ने उन्हें समझाया कि लोगों की नाराजगी असल में कमलेश से नहीं बल्कि फिल्म में निभाए गए गायतोंडे के किरदार से है।
    अमर उजाला से बातचीत में कमलेश सावंत ने बताया कि दृश्यम में इंस्पेक्टर गायतोंडे की भूमिका मिलना उनके लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं था। वह इससे पहले निर्देशक निशिकांत कामत के साथ कई प्रोजेक्ट में काम कर चुके थे। फिल्म के लिए उन्हें लुक टेस्ट देने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने पहले अपने निर्माता से बात करने के लिए दो दिन का समय मांगा और फिर ऑडिशन दिया। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी उनका चयन हो जाएगा। लुक टेस्ट के करीब 12 दिन बाद फोन आया कि उन्हें गायतोंडे के किरदार के लिए चुन लिया गया है। यह खबर उनके लिए बेहद खास थी।
    अभिनेता ने बताया कि शूटिंग से कुछ समय पहले उन्हें करीब 290 पन्नों की स्क्रिप्ट मिली थी। अगले दिन शूटिंग होनी थी इसलिए पूरी स्क्रिप्ट पढ़ना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने अपने किरदार से जुड़े हिस्से अलग किए और करीब 90 पन्ने पढ़े। थिएटर में अपने गुरु विजय लक्ष्मण खानोलकर के साथ काम करने का अनुभव उनके लिए काफी मददगार साबित हुआ। थिएटर के दौरान उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन और दूसरे तकनीकी पहलुओं को भी समझा था। इससे उन्हें दृश्यों की जरूरत और दूसरे कलाकारों के संवादों को समझने में आसानी हुई।
    दृश्यम रिलीज होने के बाद गायतोंडे के किरदार को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। फिल्म में बच्चों के साथ सख्ती दिखाने वाले इस पुलिस अधिकारी से कुछ दर्शक इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने अभिनेता को ही उस किरदार से जोड़ लिया। कमलेश सावंत ने बताया कि जब एक महिला ने चप्पल से उनका मुंह तोड़ने की बात कही तो वह डर गए। उन्हें लगा कि कहीं कोई उनके साथ बदसलूकी न कर दे। उन्होंने अपने ड्राइवर से वहां से निकलने को कहा। इसी दौरान उनकी पत्नी ने उन्हें समझाया कि दर्शक कमलेश सावंत को नहीं बल्कि गायतोंडे को गालियां दे रहे हैं। पत्नी की बात से उन्हें एहसास हुआ कि दर्शकों की नाराजगी दरअसल उनके अभिनय की प्रभावशीलता का संकेत भी हो सकती है।
    कमलेश ने एक और भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में बच्चों के साथ सख्त व्यवहार वाले दृश्यों को देखकर करीब दो साल की एक बच्ची ने अपने पिता के फोन से उन्हें मैसेज किया था। बच्ची को विश्वास था कि स्वरा के पापा असल जिंदगी में बच्चों को नहीं मार सकते और फिल्म में उन्हें गलत दिखाया गया है। यह संदेश पढ़कर अभिनेता भावुक हो गए। उन्हें लगा कि छोटी उम्र के दर्शक भी पर्दे पर दिखने वाले किरदार और असल इंसान के बीच अंतर समझने की कोशिश करते हैं।
    फिल्म में अनु सालगांवकर का किरदार निभाने वाली बाल कलाकार मृणाल जाधव के साथ सख्त दृश्य करना भी उनके लिए आसान नहीं था। कमलेश के मुताबिक एक सीन में बच्ची को बार बार गिरना पड़ा था। वह ऐसे दृश्यों के बाद बच्चों से माफी भी मांगते थे ताकि उन्हें यह समझ आए कि यह सब अभिनय का हिस्सा है। असल जिंदगी में उन्हें बच्चों के साथ समय बिताना और उनके साथ खेलना पसंद है।
    कमलेश सावंत का मानना है कि दृश्यम ने उनके करियर को नई पहचान दी। वह पहले भी लगातार काम कर रहे थे लेकिन इस फिल्म के बाद दर्शक उन्हें गायतोंडे के नाम से पहचानने लगे। उनके मुताबिक फिल्म की सफलता से इंडस्ट्री में उनकी पहचान और काम के लिए मिलने वाले मेहनताने पर बातचीत करने की स्थिति बेहतर हुई। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि दर्शक आज भी उनके किरदार को याद रखते हैं और उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।

  • टाटा ट्रस्ट में बढ़ी कानूनी खींचतान, मेहली मिस्त्री की शिकायतों पर सुनवाई से पहले उठी अधिकार क्षेत्र की बहस

    टाटा ट्रस्ट में बढ़ी कानूनी खींचतान, मेहली मिस्त्री की शिकायतों पर सुनवाई से पहले उठी अधिकार क्षेत्र की बहस


    नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन ने मेहली मिस्त्री की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों धर्मार्थ संस्थानों ने चैरिटी कमिश्नर कार्यालय में दाखिल हलफनामों में दावा किया है कि मिस्त्री का ट्रस्टी के रूप में कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को ही समाप्त हो गया था। ऐसे में अब उन्हें ट्रस्टों के प्रशासन और कामकाज को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। ट्रस्टों ने आग्रह किया है कि उनकी शिकायतों पर कोई जांच शुरू करने या आरोपों के गुण-दोष पर विचार करने से पहले यह तय किया जाए कि मिस्त्री की याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं।
    मेहली मिस्त्री दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के करीबी माने जाते रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए दोनों ट्रस्टों के प्रशासनिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनकी आपत्तियों में प्रशासनिक खामियों और हितों के टकराव की आशंकाओं का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि ट्रस्टों ने इन शिकायतों पर सीधे विचार करने से पहले मिस्त्री के अधिकार और संबंधित कार्यालय के क्षेत्राधिकार पर फैसला करने की मांग की है। अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
    सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट सर रतन टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन अलग-अलग सार्वजनिक धर्मार्थ संस्थान हैं। इनके संचालन संबंधी दस्तावेज बोर्ड संपत्तियां और खाते अलग-अलग हैं। ऐसे में सभी ट्रस्टों से जुड़े विवादों को एक ही कार्यवाही में सुनने की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। ट्रस्टों का कहना है कि उनकी अलग कानूनी पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही मामले पर विचार किया जाना चाहिए।
    विवाद का एक अहम पहलू बाई हीराबाई ट्रस्ट की ट्रस्ट डीड में शामिल पात्रता शर्तें भी हैं। ट्रस्ट ने मिस्त्री की ओर से डीड की धाराओं 6 और 18 की व्याख्या पर आपत्ति जताई है। ये प्रावधान ट्रस्टी बनने के लिए धर्म और निवास से संबंधित शर्तों से जुड़े हैं। ट्रस्ट का तर्क है कि इन प्रतिबंधों की व्याख्या मूल वसीयत और उससे जुड़े कोडिसिल के प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। मिस्त्री को दोनों ट्रस्टों की ओर से दाखिल हलफनामों पर जवाब देने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया गया है।
    इसी बीच बाई हीराबाई ट्रस्ट ने विजय सिंह के इस साल की शुरुआत में ट्रस्टी पद से हटने के बाद उनकी जगह नोएल टाटा को रिपोर्टिंग ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए आवेदन दिया है। इस प्रस्ताव ने विवाद को एक नया आयाम दे दिया है। मेहली मिस्त्री ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आवेदन किया है कि उप चैरिटी कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि नोएल टाटा 7 दिसंबर 1923 की ट्रस्ट डीड में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं।
    मिस्त्री के मुताबिक ट्रस्ट डीड में ट्रस्टी के पारसी समुदाय से होने और जोरास्ट्रियन धर्म का पालन करने के साथ मुंबई या नवसारी का स्थायी निवासी होने जैसी शर्तों का उल्लेख है। उन्होंने बाई हीराबाई ट्रस्ट के बोर्ड में कुछ ट्रस्टियों की पात्रता पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर सर रतन टाटा ट्रस्ट ने एक अलग सुनवाई में कहा है कि 15 मई के आदेश के कारण उसे कामकाज में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आदेश के तहत ट्रस्ट को बैठक करने से रोका गया है।
    कुल मिलाकर टाटा ट्रस्ट विवाद अब ट्रस्टी के कार्यकाल शिकायतों की सुनवाई और नए ट्रस्टी की पात्रता जैसे कई कानूनी सवालों पर केंद्रित हो गया है। आने वाले समय में चैरिटी कमिश्नर कार्यालय का रुख यह तय करने में अहम होगा कि मिस्त्री की आपत्तियों पर आगे सुनवाई किस आधार पर होगी और नोएल टाटा की प्रस्तावित नियुक्ति को लेकर उठे सवालों पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

  • महाकुंभ से मशहूर हुए IIT बाबा को लेकर सनसनीखेज दावा, मौत की खबर पर हरियाणा पुलिस ने तोड़ी चुप्पी

    महाकुंभ से मशहूर हुए IIT बाबा को लेकर सनसनीखेज दावा, मौत की खबर पर हरियाणा पुलिस ने तोड़ी चुप्पी



    नई दिल्ली। प्रयागराज महाकुंभ से देशभर में चर्चा में आए IIT बाबा उर्फ अभय सिंह को लेकर सोशल मीडिया पर फैली मौत की खबर ने लोगों के बीच हड़कंप मचा दिया। इंटरनेट पर दावा किया जाने लगा कि अभय सिंह का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस खबर को तेजी से साझा किया गया जिसके बाद उनके चाहने वालों और अन्य लोगों के बीच तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि हरियाणा की हिसार पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि IIT बाबा की मौत की खबर फर्जी है। पुलिस के मुताबिक एक अन्य व्यक्ति के शव मिलने की घटना को गलत तरीके से अभय सिंह से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा था।
    हिसार पुलिस के सोशल मीडिया प्रभारी अमरिंदर सिंह ने बताया कि करीब तीन दिन पहले हिसार के PLA इलाके में राहुल जैन नाम के व्यक्ति का शव मिला था। इसी घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई गई और शव को IIT बाबा का बताकर दावा किया जाने लगा। पुलिस ने स्पष्ट किया कि बरामद शव राहुल जैन का था और उसका अभय सिंह से संबंधित होने का दावा गलत है। अधिकारी ने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और बिना पुष्टि के ऐसी जानकारी को आगे साझा न करें। इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी खबरों और भ्रामक दावों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    IIT बाबा के नाम से मशहूर अभय सिंह पिछले साल प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान चर्चा में आए थे। उनकी पहचान इसलिए भी लोगों के बीच तेजी से बनी क्योंकि उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से शिक्षा हासिल करने के बाद आध्यात्म की राह चुनने की उनकी कहानी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। महाकुंभ के दौरान एक इंटरव्यू के बाद उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और देखते ही देखते वह सोशल मीडिया पर चर्चित चेहरा बन गए।
    रिपोर्टों के मुताबिक अभय सिंह ने पढ़ाई पूरी करने के बाद पेशेवर क्षेत्र में भी काम किया था। वह कनाडा में नौकरी कर चुके हैं और उन्होंने वहां अच्छी आमदनी होने की बात भी कही थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदलते हुए आध्यात्म की ओर रुख किया। उनके इस फैसले ने लोगों के बीच जिज्ञासा पैदा की कि आखिर एक उच्च शिक्षित युवा ने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर साधु जैसा जीवन क्यों चुना। महाकुंभ में उनकी मौजूदगी और बेबाक बातचीत ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
    अभय सिंह इस साल अपनी शादी को लेकर भी सुर्खियों में आए थे। उनकी शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसके बाद वह काफी समय तक सार्वजनिक चर्चाओं से दूर रहे। ऐसे में उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद लोगों ने इस दावे को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हालांकि हिसार पुलिस के बयान ने स्पष्ट कर दिया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा दावा गलत था।
    यह मामला बताता है कि किसी चर्चित व्यक्ति को लेकर फैलने वाली अपुष्ट खबरें कितनी तेजी से लोगों तक पहुंच सकती हैं। खासकर मौत जैसी संवेदनशील खबरों को साझा करने से पहले आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है। पुलिस ने भी लोगों से भ्रामक पोस्ट वायरल न करने की अपील की है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार IIT बाबा उर्फ अभय सिंह की मौत की खबर को हिसार पुलिस ने अफवाह बताया है और वायरल दावे को गलत करार दिया है।