Author: bharati

  • US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा

    US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा


    वॉशिंगटन।
    छह जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल (American Capitol) पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) के बैंक खातों को बंद किए जाने का मामला फिर चर्चा में है। जेपीमॉर्गन चेज (JPMorgan Chase) ने पहली बार अदालत में स्वीकार किया है कि फरवरी 2021 में ट्रंप और उनकी कुछ कंपनियों के खाते बंद किए गए थे। यह स्वीकारोक्ति उस मुकदमे के दौरान सामने आई है जिसमें ट्रंप ने बैंक और उसके प्रमुख जेमी डाइमोन पर 5 अरब डॉलर का दावा ठोका है। ट्रंप का आरोप है कि उनके खाते राजनीतिक कारणों से बंद किए गए, जिससे उनके कारोबार को नुकसान हुआ।

    दायर हलफनामे में बैंक के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डैन विल्कनिंग ने लिखा कि फरवरी 2021 में निजी बैंक और कमर्शियल बैंक से जुड़े कुछ खाते बंद करने की सूचना दी गई थी। अब तक बैंक केवल सामान्य तौर पर खाते बंद करने की नीतियों पर बात करता रहा था, लेकिन यह पहली बार है जब उसने सीधे तौर पर ट्रंप के खातों के बंद होने की पुष्टि की है। बैंक ने पहले कहा था कि यह मुकदमा बेबुनियाद है।


    ट्रंप ने क्या आरोप लगाए

    ट्रंप ने यह मुकदमा पहले फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया था, जहां अब उनका मुख्य निवास है। उनका कहना है कि बैंक ने ‘ट्रेड लाइबल’ किया और फ्लोरिडा के अनुचित और भ्रामक व्यापार कानून का उल्लंघन किया। मुकदमे में आरोप है कि जब खाते बंद किए जा रहे थे, तब ट्रंप ने जेमी डाइमोन से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और उन्होंने मामले को देखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    ट्रंप के वकीलों ने आरोप लगाया है कि बैंक ने राष्ट्रपति और उनकी कंपनियों को एक ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाल दिया। उनका कहना है कि इस सूची का उपयोग अन्य बैंक भी करते हैं। इससे भविष्य में नए खाते खोलने या सेवाएं लेने में दिक्कत आती है। वकीलों का दावा है कि इससे ट्रंप परिवार और उनके कारोबार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।


    डीबैंकिंग को लेकर फिर बहस तेज

    यह मामला तथाकथित ‘डीबैंकिंग’ की बहस को फिर से तेज कर रहा है। डीबैंकिंग तब होता है जब बैंक किसी ग्राहक के खाते बंद कर देता है या उसे सेवाएं देने से मना कर देता है। पिछले कुछ वर्षों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कई रूढ़िवादी नेताओं का आरोप रहा है कि 6 जनवरी की घटना के बाद ‘जोखिम’ के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जेपीमॉर्गन अब इस केस को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहा है, जहां खाते संचालित होते थे। यह ट्रंप का किसी बड़े बैंक के खिलाफ पहला मामला नहीं है। मार्च 2025 में ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने क्रेडिट कार्ड कंपनी कैपिटल वन पर भी इसी तरह का मुकदमा दायर किया था, जो अभी लंबित है।

  • China: स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में छाए ह्यूमनॉइड रोबोट… एक साल में बदली तस्वीर

    China: स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में छाए ह्यूमनॉइड रोबोट… एक साल में बदली तस्वीर


    बीजिंग।
    जो ह्यूमनॉइड रोबोट (Humanoid Robots) एक साल पहले सार्वजनिक प्रदर्शनों में गिरते-पड़ते नजर आते थे और जिनकी तकनीकी क्षमता पर संदेह जताया जाता था, वही अब कुंग फू फ्लिप्स (Kung Fu Flips), जिम्नास्टिक (Gymnastics) और हाई-प्रिसिजन डांस मूव्स (High-precision dance moves) के साथ चीन के स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में छा गए हैं। दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले इस टीवी शो में चीनी स्टार्टअप्स के रोबोट्स ने यह साफ कर दिया कि तकनीक कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है।

    इस प्रदर्शन ने जहां दर्शकों को रोमांचित किया, वहीं अमेरिका-चीन टेक रेस, नौकरियों के भविष्य और एआई आधारित मशीनों की बढ़ती ताकत पर वैश्विक बहस भी तेज कर दी है। हालांकि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि असली परीक्षा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल और जटिल मानवीय वातावरण में विश्वसनीय प्रदर्शन की होगी।

    एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में इस बार कई स्टार्टअप कंपनियों के ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने हिस्सा लिया। इन रोबोट्स ने कुंग फू स्टंट, समन्वित नृत्य और जिम्नास्टिक जैसे जटिल प्रदर्शन किए। यह प्रस्तुति 2025 के गाला से बिल्कुल अलग रही, जब अपेक्षाकृत कम उन्नत रोबोट्स रूमाल घुमाते हुए लोकनृत्य करते नजर आए थे और उनकी चाल अस्थिर दिखी थी। पिछले वर्ष अप्रैल में आयोजित एक रोबोट मैराथन भी सुर्खियों में रहा था, जहां कई रोबोट ठोकर खाते, गिरते या तकनीकी खराबी के कारण रुक जाते देखे गए थे। उस समय इन मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे। लेकिन केवल एक वर्ष में तकनीकी सुधार ने धारणा बदल दी है। इस संबंध में सेमीएनालिसिस के विश्लेषक रेक नूटसेन ने कहा कि अब इन रोबोट्स को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उनके अनुसार स्प्रिंग गाला के प्रदर्शन के बाद रोबोट पहले से अधिक संतुलित, लचीले और सक्षम दिखे हैं।


    निर्माण और तैनाती में चीन की शुरुआती बढ़त

    बार्कलेज के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दुनिया भर में लगभग 15,000 ह्यूमनॉइड रोबोट इंस्टॉलेशन हुए, जिनमें से 85 प्रतिशत से अधिक चीन में थे, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत रही। बार्कलेज की थीमैटिक एफआईसीसी रिसर्च प्रमुख जोर्नित्सा तोदोरोवा के मुताबिक चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी लगभग पूर्णतः वर्टिकली इंटीग्रेटेड रोबोटिक्स वैल्यू चेन है, रेयर अर्थ खनिजों और उच्च- प्रदर्शन मैग्नेट से लेकर भौतिक पुर्जों और बैटरियों तक।

    अमेरिका में टेस्ला का ऑप्टिमस रोबोट प्रमुख ह्यूमनॉइड परियोजनाओं में से एक है। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने जनवरी 2025 की अर्निंग कॉल में कहा, यदि वार्षिक उत्पादन 10 लाख इकाइयों तक पहुंचता है तो उत्पादन लागत 20,000 डॉलर से नीचे लाई जा सकती है, हालांकि अंतिम कीमत बाजार मांग पर निर्भर करेगी।

  • तमिलनाडु और बंगाल से 8 आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली में बड़े हमले की कर रहे थे प्लानिंग

    तमिलनाडु और बंगाल से 8 आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली में बड़े हमले की कर रहे थे प्लानिंग


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में आतंकी हमले (Terrorist attacks) का अलर्ट जारी है. इस बीच बड़ी आतंकी साजिश बेनकाब हुई है. पुलिस ने बड़े आतंकी हमले की प्लानिंग बनाने वाले 8 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है. ये आरोपी पाकिस्तान (Pakistan) की ISI और बांग्लादेश (Bangladesh) के आतंकी संगठनों (Terrorist Organizations) के इशारे पर काम कर रहे थे.

    दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक ऑपरेशन के तहत, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से इन 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. अब पुलिस इन आरोपियों को अब दिल्ली लेकर आ रही है. गिरफ्तार हुए आरोपियों में बांग्लादेश के नागरिक भी शामिल हैं. उनके पास से 8 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं. आरोपियों के नाम मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबत, उमर, मोहम्मद लितान, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्जल हैं।

    बताया जा रहा है कि ये लोग फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. पुलिस ने पश्चिम बंगाल से भी 2 आरोपी गिरफ्तार किए हैं, इनमें एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल है. इस आतंकी मॉड्यूल ने 8 फरवरी को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों और मेट्रो में भड़काऊ पोस्टर लगाए थे, जिनमें कश्मीर से जुड़ी बातें भी लिखी गई थीं. भड़काऊ पोस्टर में FREE KASHMIR जैसी बातें लिखी हुई थीं.

    जब दिल्ली पुलिस ने पोस्टर को लेकर जांच शुरू की तो इस आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ. इसके बाद पुलिस ने इन सभी को तिरुप्पुर जिले के उथुकुली (2), पल्लडम (3) और तिरुमुरुगनपूंडी (1) स्थित गारमेंट यूनिट्स से गिरफ्तार किया.


    दिल्ली में बड़े आतंकी हमले का अलर्ट

    हाल ही में जानकारी मिली कि पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा दिल्ली में बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने वाला है. संगठन भीड़भाड़ वाले इलाके और धार्मिक स्थलों को निशाना बना सकता है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा भारत के बड़े शहरों में IED ब्लास्ट की साजिश रच रहा है.


    लाल किला-चांदनी चौक में कड़ी सुरक्षा

    आतंकी हमले के हाई अलर्ट के बाद पुरानी दिल्ली में लाल किला के आसपास और चांदनी चौक की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं. भीड़भाड़ वाले इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. पुलिस ने स्थानीय लोगों और व्यापारियों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने के निर्देश दिए हैं.

  • J&K और पंजाब को दहलाने की थी साजिश….. अलग-अलग स्थानों पर मिली संदिग्ध IED, बढ़ाई सुरक्षा

    J&K और पंजाब को दहलाने की थी साजिश….. अलग-अलग स्थानों पर मिली संदिग्ध IED, बढ़ाई सुरक्षा


    चंडीगढ़/पंजाब
    । जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) और पंजाब (Punjab) में सुरक्षा एजेंसियों (Security Agencies.) ने अलग-अलग स्थानों पर संदिग्ध आईईडी (IED) मिलने के बाद सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों घटनाओं के बाद इलाकों को घेरकर यातायात रोका गया और बम निरोधक दस्तों ने विस्फोटकों को निष्क्रिय किया। सबसे पहले जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिला में शनिवार को गांदरबल–सफापोरा रोड पर संदिग्ध आईईडी मिलने से हड़कंप मच गया। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने तुरंत क्षेत्र को घेर लिया और एहतियातन यातायात रोक दिया।


    बम निरोधक दस्ते ने नष्ट किया

    बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट किया। घाटी में आतंकवादी अक्सर वीआईपी, सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के काफिलों को निशाना बनाने के लिए सड़कों किनारे आईईडी लगाने की कोशिश करते रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए सेना और अर्धसैनिक बल नियमित रूप से सुबह गश्त कर मार्गों की जांच करते हैं। आईईडी वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती माने जाते हैं। इन्हें सामान्य औद्योगिक रसायनों या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से तैयार किया जा सकता है, जिससे इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इनका आकार छोटे पैकेट से लेकर वाहन-आधारित बड़े विस्फोटक तक हो सकता है।


    पंजाब में पुलिस चौकी के पास रखे बैग में मिला आईईडी

    उधर, पंजाब के अमृतसर ग्रामीण क्षेत्र के रैया इलाके में एक पुलिस चौकी के पास बैग में रखा आईईडी बरामद किया गया। सुहैल कासिम मीर ने बताया कि पुलिस ने तुरंत क्षेत्र को सील कर बम निरोधक दस्ते की मदद से विस्फोटक निष्क्रिय किया। इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अब तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि पुलिस संदिग्धों की पहचान कर आगे की जांच में जुटी है।

  • Super Sunday: आज दो बड़े मैच खेलेगी टीम इंडिया.. बांग्लादेश को लड़कियां और SA को लड़के सिखाएंगे सबक

    Super Sunday: आज दो बड़े मैच खेलेगी टीम इंडिया.. बांग्लादेश को लड़कियां और SA को लड़के सिखाएंगे सबक


    नई दिल्ली।
    क्रिकेट फैन्स (Cricket fans) के लिए संडे सच में सुपर होने वाला है. एक ही दिन में टीम इंडिया (Team India) दो बड़े मुकाबलों में मैदान पर उतर रही है. पहले एशिया कप राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट (Asia Cup Rising Stars Tournament) के फाइनल में भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) बांग्लादेश से भिड़ेगी, और उसके बाद टी20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में भारतीय पुरुष टीम का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा। यानी दिन की शुरुआत महिला टीम के खिताबी मुकाबले से होगी और शाम को नजरें टी20 विश्व कप के सुपर-8 मुकाबले पर टिकी रहेंगी।


    पहले बांग्लादेश से खिताबी जंग

    एशिया कप राइजिंग स्टार्स के फाइनल में भारत और बांग्लादेश की महिला टीमें आमने-सामने होंगी. पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने संतुलित प्रदर्शन किया है. बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में टीम ने मजबूती दिखाई है, जिसके दम पर वह फाइनल तक पहुंची है. बांग्लादेश की टीम भी कम नहीं आंकी जा सकती. उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में वह हमेशा चुनौती पेश करती है. ऐसे में फाइनल मुकाबला रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है. भारतीय महिला टीम की कोशिश होगी कि वह दबाव के इस मुकाबले में संयम बनाए रखे और ट्रॉफी अपने नाम करे. दोनों टीमों के इस टूर्नामेंट के सफर पर अगर नजर डालें तो बांग्लादेश ने अपने 3 में से 3 मैच जीतकर फाइनल में जगह बनाई है. वहीं, भारत ने 3 में से 2 मैच जीते हैं और फाइनल में उसे जगह मिली है। भारत और बांग्लादेश के बीच ये फाइनल मैच बैंकॉक में दोपहर 2 बजे से खेला जाएगा।


    शाम को साउथ अफ्रीका से सुपर-8 की टक्कर

    महिला टीम के बाद बारी होगी पुरुष टीम की. टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा. कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में भारतीय टीम अब तक टूर्नामेंट में शानदार लय में दिखी है. ग्रुप स्टेज में टीम ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सुपर-8 में जगह बनाई. दक्षिण अफ्रीका की टीम भी संतुलित है और बड़े मैचों में कड़ी टक्कर देने के लिए जानी जाती है. ऐसे में यह मुकाबला सेमीफाइनल की राह तय करने में अहम साबित हो सकता है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम से तेज शुरुआत की उम्मीद होगी, जबकि गेंदबाजों को मध्य ओवरों में नियंत्रण बनाकर रखना होगा. टीम मैनेजमेंट संतुलित संयोजन के साथ मैदान पर उतरने की तैयारी में है. मुकाबला अहमदाबाद में शाम 7 बजे से शुरू होगा।


    डबल जीत की उम्मीद

    एक ही दिन में दो बड़े मुकाबले होने से क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है. अगर भारतीय महिला टीम बांग्लादेश को हराकर खिताब जीतती है और पुरुष टीम दक्षिण अफ्रीका को सुपर-8 में मात देती है, तो यह “सुपर संडे” यादगार बन सकता है. फैन्स की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीम इंडिया दोनों मोर्चों पर जीत दर्ज कर डबल डोज दे पाएगी।

  • AI के दौर में 80 लाख नौकरियों की दरकार, पी. चिदंबरम ने जताई सामाजिक विस्फोट की आशंका

    AI के दौर में 80 लाख नौकरियों की दरकार, पी. चिदंबरम ने जताई सामाजिक विस्फोट की आशंका


    नई दिल्ली । कृत्रिम मेधा एआई के तेजी से विस्तार के बीच भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार सृजन की है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने चेतावनी दी है कि देश को हर साल कम से कम 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी, जबकि वास्तविक आवश्यकता इससे भी अधिक हो सकती है। उनका कहना है कि आधिकारिक बेरोजगारी दर भले 5.1 प्रतिशत बताई जाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं अधिक गंभीर है। युवा बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और लगभग 55 प्रतिशत लोग स्वरोजगार या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं, जो अस्थिर आय और असुरक्षित भविष्य का संकेत है।

    चिदंबरम ने कहा कि एआई मानव क्षमताओं और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके साथ बड़े पैमाने पर रोजगार विस्थापन का खतरा भी जुड़ा है। उन्होंने डारियो अमोदेई के उस विश्लेषण का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि एआई अभूतपूर्व गति से श्रम बाजारों को बाधित कर सकता है और निकट भविष्य में वाइट कॉलर नौकरियों का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। टिकट चेकर, बस और ट्रेन कंडक्टर, रेल सिग्नलकर्मी, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट, बैंक कर्मचारी, अनुवादक और निजी शिक्षक जैसी पारंपरिक नौकरियां स्वचालन की चपेट में आ सकती हैं।

    हाल के घटनाक्रम भी इस आशंका को बल देते हैं। Microsoft के सीईओ ने संकेत दिया है कि कई भूमिकाओं में स्वचालन बढ़ेगा और कंपनी ने 2025 में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की। इसी तरह Tata Consultancy Services ने पुनर्गठन के तहत बारह हजार से अधिक कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की। टेक निवेशक विनोद खोसला का मानना है कि एआई के कारण आईटी सेवाएं और बीपीओ उद्योग आने वाले वर्षों में बुनियादी बदलाव से गुजरेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई को भविष्य और समृद्धि का माध्यम बताया है, लेकिन चिदंबरम का तर्क है कि भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना विकसित देशों से भिन्न है। यहां उच्चतर माध्यमिक स्तर पर नामांकन में गिरावट देखी जाती है और उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात 45-50 प्रतिशत के बीच है। अधिकांश स्नातक डिग्रीधारी रोजगार योग्य कौशल से वंचित रहते हैं, जिससे उपयुक्त नौकरी पाना कठिन हो जाता है।

    उन्होंने आगाह किया कि यदि शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार सिमटने लगे और शिक्षित युवाओं को आईटी व अन्य कुशल क्षेत्रों में अवसर न मिलें, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। समाधान के तौर पर उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रबंधन में बड़े निवेश, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा, गैर-रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समीक्षा और स्थानीय बाजारों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। एमएसएमई क्षेत्र को सबसे बड़ा रोजगार सृजक बताते हुए उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग इन उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने में किया जाए, न कि केवल लागत घटाने में।

    चिदंबरम का निष्कर्ष स्पष्ट है तकनीक को अपनाना अनिवार्य है, लेकिन इसके साथ रोजगार सृजन की सामाजिक जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। अन्यथा, काम से वंचित समाज असंतुलन और असंतोष की ओर बढ़ सकता है। एआई का प्रभाव आने वाले वर्षों में और स्पष्ट होगा, इसलिए अभी से ठोस नीतिगत कदम उठाने का समय है।

  • नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार

    नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार


    बीजिंग।
    नेपाल (Nepal) की राजधानी काठमांडो के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले रिहायशी इलाके बालुवाटार में 16 फरवरी को पाकिस्तान और चीन के अधिकारियों (Pakistani and Chinese officials) की एक सीक्रेट बैठक (Secret Meeting) आयोजित की गई। इस बैठक में चीन और पाकिस्तान के आला अधिकारी मौजूद थे। खास बात यह रही कि इस बैठक में नेपाल स्थित पाकिस्तान दूतावास में तैनात पाकिस्तानी डिफेंस अटैची कर्नल हफीज उर रहमान भी शामिल हुए।

    इस बैठक में भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के नाम पर साजिश का एक रोडमैप तैयार किया गया। इसके लिए बाकायदा चीन और पाकिस्तान में नेपाल के स्थानीय पत्रकारों से लेकर समाजसेवियों व दक्षिणी नेपाल के मधेशिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों को चिन्हित कर टास्क देने की पूरी योजना बनाई गई। केंद्रीय खुफिया एजेंसी को लगातार मिल रहे इनपुट के आधार पर इस बात के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं कि भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए चीन और पाकिस्तान नेपाल की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान और चीन के सात प्रमुख अधिकारी शामिल थे। तकरीबन पौने दो घंटे चली इस बैठक में चीन की ओर से भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का जिक्र किया गया। बैठक 20 फरवरी को मनाए जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर माहौल खराब करने के लिए की गई थी। इसके लिए बाकायदा चीन ने 23 स्थानीय लोगों का चयन किया था।


    एक्सचेंज प्रोग्राम की आड़ में भड़काने की योजना

    इस योजना के तहत नेपाल के उन लोगों को चयनित किया गया था जो कि चीन के अलग-अलग हिस्सों में बीते दो वर्षों के दौरान यात्रा करके आए थे। हालांकि यह बात अलग है चीन और पाकिस्तान की बड़ी साजिश जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तवांग को अपना हिस्सा बताने का नैरेटिव सेट करने की थी पूरी तरह फ्लॉप हो गई। इसमें योजना यह बनाई गई थी कि नेपाल के इन 23 लोगों में से कुछ लोगों को भारत भेजा जाएगा। अभी भी इसमें से 14 लोगों को नॉर्थ ईस्ट जाकर पूरी जानकारियां इकट्ठा करने के लिए भेजने की योजना बनाई जा रही है।

    केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर इस बात की भी पुष्टि हुई है कि इस पूरी योजना के पीछे चीन के चेंगदू स्थित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पश्चिमी थिएटर कमान के कुछ अधिकारियों की पूरी साजिश थी। दरअसल दिसंबर 2024 से चीन ने नेपाल के ललितपुर और कीर्तिपुर में अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धरोहरों के साथ अपनी भाषा के प्रचार के लिए दो केंद्र स्थापित किए हैं।


    अब तक हो चुकीं कई बैठकें

    सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय से चीन और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच में काठमांडू में लगातार कई बैठकें आयोजित की जा चुकी है। इसमें कई बैठकें तो ऐसी भी आयोजित हुई हैं जिसमें दूतावास के कार्यक्रमों के बहाने पकिस्तान की आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी नेपाल पहुंचे। पिछले सोमवार को आयोजित हुई इस बैठक में पकिस्तान के डिफेंस अटैची समेत दूतावास के तीन प्रमुख अधिकारी भी शामिल थे।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान के अधिकारियों ने चीनी अधिकारियों के साथ बलूचिस्तान में हो रहे विद्रोह और उसके चलते पाकिस्तान में चीन की ओर से चलाई जाने वाले प्रोजेक्ट की पूरी रिपोर्ट की चर्चा की गई।

  • पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल

    पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल


    इस्लामाबाद/काबुल।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बार फिर अफगानिस्तान (Afghanistan.) के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई (Military Action) की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि सीमा पार सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया।

    इस्लामाबाद का कहना है कि ये ठिकाने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (ISKP) से जुड़े लोगों के थे. पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फितना अल खवारिज’ कहती है. बयान में कहा गया कि हाल के आत्मघाती हमलों, जिनमें इस्लामाबाद की इमाम बारगाह, बाजौर और बन्नू में धमाके शामिल हैं, के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई. रमजान के महीने में हुए ताजा हमले को भी इसका कारण बताया गया. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास पक्के सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और संचालकों के इशारे पर कराए गए. बयान में कहा गया कि जिम्मेदारी भी अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी और ISKP ने ली थी. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर चुने हुए ठिकानों पर की गई. इस हमले पर तालिबान ने कहा है कि अब वह सही समय पर जवाब देगा।

    बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कायर सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में ड्रोन और हवाई हमले किए. उनके मुताबिक इन हमलों में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाया गया, जहां मौजूद कुरान की प्रतियां भी नष्ट हो गईं. मीर यार बलोच ने इसे ‘दमनकारी सैन्य कार्रवाई’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता और नफरत को और बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने रमजान से पहले कार्रवाई की धमकी दी थी।


    तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में घुसकर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में बमबारी की. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं. मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान जमीन को निशाना बना रहा है और ऐसे कदम क्षेत्र में हालात और बिगाड़ेंगे।


    एयर स्ट्राइक से पहले दहला पाकिस्तान

    इस हमले से पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के अनुसार, एक खुफिया अभियान के दौरान सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही की मौत हो गई. सेना ने कहा कि पांच आतंकियों को मार गिराया गया, लेकिन एक विस्फोटक वाहन सेना की गाड़ी से टकरा गया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर में भी एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. उसमें 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी. एक बच्ची की भी जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान ने कहा कि हमलावर अफगान तालिबान की विशेष इकाई से जुड़ा था और टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।


    पाकिस्तान का क्या है आरोप?

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सरकार अपनी जमीन से टीटीपी को काम करने से रोकने में नाकाम रही है. बयान में कहा गया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए. पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अफगान अंतरिम सरकार को अपनी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।


    पहले भी किया है हमला

    यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने सीमा पार हमला किया हो. पिछले साल भी अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमलों की खबर आई थी. उस समय काबुल ने पाकिस्तान पर बमबारी का आरोप लगाया था, हालांकि इस्लामाबाद ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. दोनों देशों के रिश्ते 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते रहे हैं. सीमा पर झड़पें आम हो चुकी हैं।

  • SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया

    SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया


    नई दिल्ली/वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.।

    ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।


    1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?

    सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी.

    ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं।


    2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?

    इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा।

    हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।

    3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?

    रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा।

    अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है।


    4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?

    भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है।


    5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?

    ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।

  • ट्रेन टिकट बुकिंग का तरीका बदला… शॉर्टकट अपनाया तो ब्लॉक होगी IRCTC आईडी

    ट्रेन टिकट बुकिंग का तरीका बदला… शॉर्टकट अपनाया तो ब्लॉक होगी IRCTC आईडी


    नई दिल्ली।
    ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग (Online Train Ticket Booking) के दौरान शॉर्टकट (Shortcut) अपनाने से आपकी आईआरसीटीसी आईडी (IRCTC ID) ब्लॉक हो सकती है। समय से पहले बुकिंग प्रक्रिया पूरा करने पर यह कार्रवाई की जा सकती है। आईआरसीटीसी की नई तकनीक टिकट बुकिंग के दौरान टाइपिंग की गति से वैध-अवैध उपभोक्ताओं का पता लगा लेगी। इस सख्ती से आम जनता को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी।

    रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में नया एआई प्रीडेटर सिस्टम (एआई सॉफ्टवेयर) लागू कर दिया गया है। इस नई तकनीक का उद्देश्य अवैध सॉफ्टवेयर की मदद आईआरसीटीसी वेबसाइट में घुसपैठ कर कन्फर्म टिकट लेने वाले दलालों पर नकेल कसना है।

    एआई आधारित सिस्टम बुकिंग के दौरान प्रक्रिया से पहचान लेगा कि टिकट इंसान बुक कर रहा या कोई सॉफ्टवेयर। ऐसे रेल यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है जो टिकट बुक करते समय स्मार्ट ट्रिक्स (कट-पेस्ट) अपनाते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को संदिग्ध मानकर रेलवे का सिस्टम यूजर आईडी (अकाउंट) को ब्लॉक कर सकता है। यदि आम उपभोक्ता रात में थोक में नाम जोड़ते या हटाता है तो वह एआई के जद में आएंगे।


    फॉर्म कम समय में न भरे

    रेलवे का एल्गोरिदम टाइपिंग की गति मापता है। यदि पांच यात्रियों का विवरण (नाम, उम्र, जेंडर आदि) 4.2 सेकेंड से कम समय में भर दिया जाता है तो सिस्टम यूजर को रेड फ्लैग कर देगा।


    आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगिन न करें

    एक अधिकारी ने बताया, अगर उपभोक्ता एक आईडी से आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगइन या लॉगआउट करते हैं तो ऐसे अकाउंट को 24 घंटे के लिए बैन कर दिया जाएगा। इसके अलावा आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर एक ही क्षेत्र में होना चाहिए। अगर दोनों अलग-अलग हैं तो ट्रांजक्शन बीच में ही रुक जाएगा। एक महीने में 2.8 लाख ऐसे अकाउंट ब्लॉक किए गए हैं।


    रेलवन ऐप से अनारक्षित टिकट पर डिजिटल पेमेंट से मिलेगी छूट

    बता दें कि, भारतीय रेलवे यात्रियों को डिजिटल माध्यमों से अधिक सुविधा, पारदर्शिता और प्रोत्साहन देने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में रेलवे द्वारा संचालित रेलवन ऐप के माध्यम से अनारक्षित रेल टिकट बुकिंग पर मिलने वाली 3 प्रतिशत बोनस छूट की सुविधा का दायरा बढ़ा दिया गया है। यह व्यवस्था ट्रायल आधार पर 14 जनवरी 2026 से 14 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी। इस सुविधा की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। अब तक रेलवन ऐप पर अनारक्षित टिकट बुक करने पर केवल आर-वॉलेट से भुगतान करने पर ही 3 प्रतिशत बोनस कैशबैक की सुविधा उपलब्ध थी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तथा डिजिटल भुगतान को अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से रेलवे ने यह लाभ अब सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू करने का निर्णय लिया है।

    नई व्यवस्था के अंतर्गत रेलवन ऐप के जरिए अनारक्षित टिकट लेते समय यदि यात्री यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग अथवा अन्य स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग करते हैं, तो उन्हें टिकट मूल्य पर 3 प्रतिशत का लाभ प्राप्त होगा। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग में प्रत्यक्ष आर्थिक बचत होगी।

    रेलवे की यह पहल कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। विशेष रूप से दैनिक यात्रा करने वाले, अनारक्षित श्रेणी में सफर करने वाले आम नागरिकों और उपनगरीय क्षेत्रों के यात्रियों को इस सुविधा से सीधा लाभ मिलेगा।

    रेलवन ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर रेल कनेक्ट या यूटीएस मोबाइल ऐप के मौजूदा उपयोगकर्ता अपनी पहचान के प्रमाण के साथ सीधे लॉग इन कर सकते हैं। इस ऐप पर अनारक्षित टिकट, आरक्षित टिकट, प्लैटफॉर्म टिकट, ट्रेन एवं स्टेशन से संबंधित जानकारी, शिकायत निवारण सहित विभिन्न यात्री सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं।