Author: bharati

  • SIR के बाद 6 राज्यों की वोटर लिस्ट जारी… गुजरात में सबसे ज्यादा 68 लाख और MP में हटाए गए 34.25 लाख नाम

    SIR के बाद 6 राज्यों की वोटर लिस्ट जारी… गुजरात में सबसे ज्यादा 68 लाख और MP में हटाए गए 34.25 लाख नाम


    नई दिल्ली।
    भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों (Voter lists) के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव दर्ज किए गए हैं। लाखों की संख्या में अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    एसआईआर के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली गिरावट गुजरात में देखी गई है। यहां कुल 68,12,711 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले गुजरात में मतदाताओं की संख्या 5,08,43,436 थी, जो अब घटकर 4,40,30,725 रह गई है। यह कुल मतदाता संख्या में 13.40% की भारी गिरावट है। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश में भी मतदाता सूची में बड़ी शुद्धि की गई है। यहां 34,25,078 नाम हटाए गए, जिससे मतदाताओं की संख्या 5,74,06,143 से कम होकर 5,39,81,065 (-5.97%) पर आ गई है।


    कहां कितनी हुई कटौती?

    – राजस्थान: मतदाताओं की संख्या 5,46,56,215 से घटकर 5,15,19,929 हो गई। 31,36,286 नाम काटे गए।
    – छत्तीसगढ़: यहां मतदाता सूची 2,12,30,737 से घटकर 1,87,30,914 रह गई। 24,99,823 नाम काटे गए।
    – केरल: सूची से 8,97,211 नाम हटाए गए, जिसके बाद अब कुल मतदाता 2,69,53,644 हैं।
    – गोवा: मतदाताओं की संख्या में 1,27,468 की गिरावट दर्ज की गई।

    केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति
    – पुडुचेरी: 77,367 मतदाताओं के नाम हटाए गए।
    – अंडमान और निकोबार: 52,364 नामों की कटौती की गई।
    – लक्षद्वीप: यहां सबसे कम केवल 206 नामों में बदलाव हुआ है।

    चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव ‘नेट चेंज’ को दर्शाता है, जिसमें अपात्र मतदाताओं की संख्या में से नए जुड़े पात्र मतदाताओं को घटाया गया है। सूची से नाम हटाने के प्राथमिक कारणों में मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरण, एक से अधिक जगहों पर नाम और अन्य पात्रता संबंधी मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची को अपडेट करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

    उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की बारी
    निर्वाचन आयोग ने देश के 12 राज्यों में इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास की शुरुआत की थी। दूसरे चरण के 12 राज्यों में से अब केवल तीन राज्य शेष हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का डेटा इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा। आयोग ने शेष राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भी प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

    SIR प्रक्रिया का अगला चरण अप्रैल में शुरू होने वाला है, जो मतदाता सूची के सत्यापन के देशव्यापी अभियान का हिस्सा होगा। फिलहाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा और अंडमान-निकोबार के लिए अंतिम मतदाता सूचियां आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दी गई हैं।

  • PM मोदी आज देश के इस क्षेत्र को देंगे हाईस्पीड रीजनल ट्रेन और मेट्रो की सौगात

    PM मोदी आज देश के इस क्षेत्र को देंगे हाईस्पीड रीजनल ट्रेन और मेट्रो की सौगात


    मेरठ ।
    क्रांति की धरती मेरठ (Meerut.) एक बार फिर ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) रविवार को मेरठ के 135 मिनट के प्रवास के दौरान ‘नमो भारत’ (RRTS) और ‘मेरठ मेट्रो’ (Meerut Metro) की बड़ी सौगात देंगे। यह न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि वैश्विक स्तर पर परिवहन तकनीक का एक अनूठा उदाहरण भी है। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जा रही इस परियोजना की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे देश के अन्य शहरों से अलग बनाती हैं।

    भारत में पहली बार एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रैक पर ‘नमो भारत’ (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और ‘मेरठ मेट्रो’ का संचालन होगा। मेरठ मेट्रो देश की सबसे तेज मेट्रो सेवाओं में से एक होगी, जिसकी डिजाइन स्पीड 135 किमी/घंटा और ऑपरेशनल स्पीड 120 किमी/घंटा तक हो सकती है। साहिबाबाद से मेरठ के बीच का सफर अब मिनटों में तय होगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर और मेरठ के बीच की दूरी का अहसास खत्म हो जाएगा। नमो भारत और मेट्रो के स्टेशनों को विश्व स्तरीय सुविधाओं जैसे—प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSDs), हाई-स्पीड वाईफाई और स्मार्ट टिकटिंग से लैस किया गया है।


    सीएम योगी ने किया निरीक्षण

    उद्घाटन कार्यक्रम से एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने मेरठ पहुंचकर रैपिड के प्रोजेक्ट साइट शताब्दीनगर, मेरठ साउथ स्टेशन और कार्यक्रम स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। दोनों स्टेशनों का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री ने जनसभा स्थल पर अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कॉरिडोर न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा। Xइस कॉरिडोर के शुरू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी बचत होगी, बल्कि इसके बहुआयामी प्रभाव भी देखने को मिलेंगे।

    उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यातायात और बुनियादी ढांचे के इतिहास में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) यानी ‘रैपिड मेट्रो’ के नए खंड का भव्य उद्घाटन करेंगे। इस कॉरिडोर के शुरू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी बचत होगी, बल्कि इसके बहुआयामी प्रभाव भी देखने को मिलेंगे।


    जनसभा और संबोधन

    उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। लगभग 50 मिनट के इस भाषण में वह मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भविष्य के विजन को साझा करेंगे। मेरठ आगमन से लेकर प्रस्थान तक प्रधानमंत्री 105 मिनट मेरठ की धरती पर रहेंगे, जो शहर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है।


    रूट डायवर्जन

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर मेरठ में रविवार को रूट डायवर्जन रहेगा। सुबह छह से शाम छह बजे तक दिल्ली-देहरादून हाइवे पर गाजियाबाद-मेरठ के बीच वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर वाहन चलते रहेंगे। मेरठ से गाजियाबाद जाने वाले वाहनों को हापुड़ होकर गाजियाबाद भेजा जाएगा। एटीएस, एसटीएफ और इंटेलिजेंस यूनिट को अलर्ट पर रखा गया है।


    मेरठ से दिल्ली जाने वाले वाहन

    – मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन दिल्ली रोड नहीं जाएंगे। सभी वाहन मेरठ शहर से मोदीपुरम पुल, सरधना पुल, रोहटा पुल, बागपत पुल से एनएच-58 से होकर काशी टोल प्लाजा से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे होते हुए जा सकेंगे।
    – मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन बिजली बंबा चौराहे से होते हुए हापुड़ से दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे से दिल्ली जा सकेगे।


    दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन

    – दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन एक्सप्रेस-वे से काशी टोल प्लाजा से एनएच-58 होते हुए मेरठ शहर आ सकेंगे।
    – दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन दिल्ली मुरादाबाद हाईवे होते हुए हापुड से बिजली बंबा चौराहे से मेरठ शहर में आ सकेंगे।
    – मेरठ से दिल्ली आने/जाने वाले वाहन परतापुर इन्टरचेंज से दिल्ली रोड होते हुए मेरठ शहर मे प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
    – यातायात प्रबंधन के दौरान किसी भी प्रकार की आपात कालीन सेवाएं एंव एम्बुलेंस बाधित नहीं रहेगी।
    – मोदीनगर से मेरठ की ओर भी कोई भी वाहन नहीं आने दिया जाएगा। सभी वाहन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से जाएंगे।
    – एनएच-58 पर परतापुर इंटरचेंज से मोदीनगर-दिल्ली की ओर कोई वाहन नहीं जाएगा। सभी वाहन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से आएंगे-जाएंगे।


    एटीएस और एसटीएफ समेत इंटेलिजेंस यूनिट अलर्ट

    एटीएस, एसटीएफ और इंटेलिजेंस यूनिट को अलर्ट किया गया है। सुरक्षा का पूरा जिम्मा एसपीजी ने संभाला हुआ है। लोकल इनपुट को लेकर टीम और स्थानीय पुलिस अलर्ट है। सभास्थल के आसपास का इलाका पूरी तरह पुलिस की निगरानी में रखा जाएगा।

  • रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया

    रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली । रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि नियमित वेतन बंद होने के बाद घर का खर्च कैसे चलेगा। जिन लोगों ने पहले से पेंशन या निवेश की ठोस योजना नहीं बनाई होती, उनके लिए यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार की एक लोकप्रिय और सुरक्षित योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर सामने आती हैसीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम। यह योजना खासतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियमित आय मिलती रहे और पूंजी भी सुरक्षित रहे।

    एक सरकारी बचत योजना है, जिसमें निवेश करने पर आकर्षक ब्याज दर के साथ हर तीन महीने में ब्याज का भुगतान किया जाता है। यही तिमाही ब्याज वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन जैसी नियमित आय का काम करता है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह सरकार समर्थित योजना है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, जिससे यह और अधिक आकर्षक बन जाती है।

    इस योजना में निवेश करने के लिए सामान्यतः 60 वर्ष या उससे अधिक आयु होना आवश्यक है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच के वे लोग भी निवेश कर सकते हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली हो, बशर्ते वे निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश करें। खाता व्यक्तिगत रूप से या जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है, लेकिन प्राथमिक खाताधारक की आयु पात्रता के अनुरूप होनी चाहिए।

    निवेश सीमा की बात करें तो SCSS में न्यूनतम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है और राशि 1,000 के गुणांक में ही जमा करनी होती है। अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपए है। यदि पति और पत्नी दोनों अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक निवेश संभव है। ध्यान रहे कि इस योजना में निवेश एकमुश्त करना होता है, किस्तों में जमा करने का विकल्प नहीं है। कई लोग रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पीएफ, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की राशि को इसमें लगाकर सुरक्षित और नियमित आय सुनिश्चित करते हैं।

    वर्तमान में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज दर मिल रही है, जो तिमाही आधार पर खाते में जमा होती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 30 लाख रुपए निवेश करता है, तो उसे सालाना लगभग 2.46 लाख रुपए ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपए और औसतन लगभग 20,500 रुपए प्रतिमाह के बराबर नियमित आय प्राप्त होगी। यह राशि रिटायरमेंट के बाद घरेलू खर्च, दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मददगार साबित हो सकती है।

    खाता देश के अधिकृत बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है। इसके लिए आयु प्रमाण, पहचान पत्र, पैन कार्ड और निवेश राशि के साथ आवेदन करना होता है। कुल मिलाकर, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम उन लोगों के लिए मजबूत विकल्प है जो रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के साथ नियमित और सुनिश्चित आय चाहते हैं।

  • फरवरी के अंत में आसमान में सजेगी ‘ग्रहों की परेड’, 6 ग्रह एक साथ; इन राशियों के लिए खुलेगा भाग्य का द्वार

    फरवरी के अंत में आसमान में सजेगी ‘ग्रहों की परेड’, 6 ग्रह एक साथ; इन राशियों के लिए खुलेगा भाग्य का द्वार


    नई दिल्ली । फरवरी माह का अंतिम चरण एक बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है। इस दौरान आकाश में छह प्रमुख ग्रह एक साथ विशेष स्थिति में नजर आएंगे। पृथ्वी से देखने पर ये ग्रह एक सीध में कतारबद्ध दिखाई देंगे जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘ग्रहों की परेड’ कहा जाता है। इस अद्भुत नजारे में बुध शुक्र बृहस्पति शनि यूरेनस और नेपच्यून शामिल होंगे। अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार सूर्यास्त के तुरंत बाद ये ग्रह क्षितिज के पास दिखाई देंगे। हालांकि साफ मौसम होने पर भी इनमें से केवल चार ग्रह बुध शुक्र बृहस्पति और शनि नंगी आंखों से स्पष्ट दिख सकेंगे जबकि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ सकती है।

    यह घटना वैज्ञानिक दृष्टि से जितनी महत्वपूर्ण है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उतनी ही प्रभावशाली भी मानी जा रही है। जब कई बड़े ग्रह एक ही दिशा में सक्रिय होते हैं तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। वर्तमान ग्रह स्थिति के अनुसार गुरु मिथुन राशि में शनि मीन राशि में और बुध-शुक्र राहु के साथ कुंभ राशि में स्थित बताए जा रहे हैं। फरवरी के अंत तक मंगल और चंद्रमा के भी कुंभ राशि में पहुंचने से ऊर्जा उत्साह और भावनात्मक शक्ति में वृद्धि के संकेत हैं। ग्रहों की यह विशेष व्यवस्था सोच निर्णय धन जिम्मेदारी और भाग्य से जुड़े मामलों में तेजी से बदलाव ला सकती है। कई लोगों को अचानक अवसर नए संपर्क और आर्थिक लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। सही दिशा में किया गया प्रयास उल्लेखनीय सफलता दिला सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में तेजी से उछाल लेकर आ सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और परिवार का सहयोग मनोबल को मजबूत करेगा। मिथुन राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने के संकेत हैं। गुरु का प्रभाव दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा नए संपर्क लाभदायक सिद्ध होंगे और नई नौकरी या पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं। सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला है। व्यापार में विस्तार साझेदारी से लाभ और प्रभावशाली लोगों से सहयोग मिलने की संभावना है। वहीं कन्या राशि वालों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार पुराने विवादों का समाधान और निवेश से अच्छे रिटर्न के योग बन रहे हैं।

    फरवरी के अंत में बनने वाला यह दुर्लभ ग्रह संयोग न केवल आकाश में एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करेगा बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के जीवन में नई ऊर्जा और संभावनाओं का संचार भी कर सकता है। सूर्यास्त के बाद साफ आसमान में इस अद्भुत नजारे को देखने का अवसर विशेष रहेगा।

  • NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्‍या रही वजह?

    NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्‍या रही वजह?



    नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने बहुप्रतीक्षित मून मिशन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। एजेंसी मानवयुक्त फ्लाइबाइ मिशन आर्टेमिस-2 को मार्च में लॉन्च करने की तैयारी में थी, लेकिन ऐन वक्त पर सामने आई तकनीकी समस्या के कारण रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया। जानकारी के अनुसार रॉकेट में हीलियम लीक की समस्या पाई गई, जिसके चलते मिशन को टालने का निर्णय लिया गया।

    नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम रिसाव का पता चला है। इस तकनीकी खामी के कारण अब मार्च में मिशन की लॉन्चिंग संभव नहीं होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस फैसले से पूरी टीम निराश है, क्योंकि मिशन की तैयारी में लंबे समय से कड़ी मेहनत की जा रही थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बड़े और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में सावधानी सर्वोपरि होती है। 1960 के दशक में भी जब नासा ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की थीं, तब कई चुनौतियों और देरी का सामना करना पड़ा था।

    रॉकेट सिस्टम में हीलियम की अहमियत
    किसी भी रॉकेट प्रणाली में हीलियम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह प्रोपेलेंट टैंक में आवश्यक दबाव बनाए रखने और इंजन के संचालन में मदद करता है। हीलियम में आई गड़बड़ी को देखते हुए अब एसएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ले जाया जाएगा, जहां विस्तृत जांच और सुधार का काम किया जाएगा।

    क्या था मिशन का उद्देश्य
    आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे केबिन में काम करने वाले थे। पृथ्वी की निचली कक्षा में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में अधिक रेडिएशन का सामना करना पड़ता, हालांकि इसे सुरक्षित दायरे में माना गया था। मिशन की योजना के अनुसार वापसी के दौरान अंतरिक्ष यात्री वायुमंडल से गुजरते हुए एक चुनौतीपूर्ण रिएंट्री का अनुभव करते और अमेरिका के पश्चिमी तट से दूर प्रशांत महासागर में लैंडिंग करते।

    गौरतलब है कि इसके बाद लक्ष्य चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित करना है। आगे चलकर आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 मिशनों के जरिए ‘गेटवे’ नामक एक छोटा स्पेस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जो चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा।

    उल्लेखनीय है कि नासा ने आखिरी बार 1960 और 1970 के दशक में अपोलो कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। अब आर्टेमिस कार्यक्रम के जरिए एजेंसी चंद्रमा पर दीर्घकालिक और स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, हालांकि फिलहाल तकनीकी अड़चन ने उसकी रफ्तार पर अस्थायी विराम लगा दिया है।

  • Braj Holi Celebration: फूलों की होली से गूंजा मथुरा, भक्तिमय रंग में रंगी ब्रजभूमि

    Braj Holi Celebration: फूलों की होली से गूंजा मथुरा, भक्तिमय रंग में रंगी ब्रजभूमि


    नई दिल्ली।ब्रजभूमि में होली का रंग अब पूरी तरह चढ़ने लगा है। उत्तर प्रदेश के Mathura स्थित Raman Reti Ashram में 21 फरवरी से भव्य होली महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यहां पारंपरिक अंदाज में फूलों और गुलाल के साथ होली खेली जा रही है। देश-विदेश से आए श्रद्धालु, स्थानीय भक्त और पर्यटक इस आयोजन का हिस्सा बनकर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव का आनंद ले रहे हैं।

    फूलों की होली बनी आकर्षण का केंद्र
    रमणरेती आश्रम में आयोजित होली महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत है फूलों की होली। यहां रंगों के साथ-साथ पुष्पवर्षा की जाती है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और रंगीन वातावरण में डूब जाता है। हल्के गुलाल की बौछार और रंग-बिरंगे फूलों की बारिश के बीच भजन-कीर्तन का आयोजन माहौल को और भी आध्यात्मिक बना देता है।

    श्रद्धालु भगवान के जयकारों के साथ रंगों में सराबोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और भजनों की धुन पर पूरा आश्रम होली के उल्लास में झूमता नजर आ रहा है।

    ब्रज में 40 दिनों तक चलता है रंगोत्सव

    ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव करीब 40 दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है। ब्रज मंडल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में यह पर्व केवल रंगों का नहीं बल्कि भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।

    इसी कड़ी में मथुरा का रमणरेती आश्रम हर साल विशेष होली महोत्सव आयोजित करता है, जहां श्रद्धालु रंगों के साथ आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते हैं। आने वाले दिनों में बरसाना और नंदगांव में लठमार होली जैसे आयोजन भी उत्साह को चरम पर पहुंचाएंगे।

    श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
    21 फरवरी से शुरू हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। सुबह से ही आश्रम परिसर में भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है। आरती, भजन और रंग-गुलाल के बीच श्रद्धालु उत्सव का आनंद ले रहे हैं।

    सुरक्षा और व्यवस्थाएं
    आयोजन को देखते हुए आश्रम प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं। आगंतुकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है ताकि उत्सव की गरिमा बनी रहे।

    ब्रज की यह होली केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि श्रद्धा, प्रेम और परंपरा का अद्भुत संगम है। आने वाले दिनों में ब्रज की गलियां और अधिक रंगों और उल्लास से भर उठेंगी।

  • नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत


    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया एआई इम्पैक्ट शुक्रवार को एक ऐतिहासिक मोड़ पर संपन्न हुआ, जब 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणापत्र ने न केवल एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के भविष्य को दिशा देने का काम किया, बल्कि भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया।

    भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
    भारत के लिए यह समझौता एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। पिछले साल पेरिस में हुए ‘एआई एक्शन समिट’ में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने यूरोपीय नियामक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। लेकिन नई दिल्ली में भारत ने इन सभी देशों को एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की। भारत का मुख्य उद्देश्य एआई का “लोकतंत्रीकरण” करना है, ताकि यह तकनीक केवल कुछ बड़ी कंपनियों या व्यक्तियों के हाथों में न रहे, बल्कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन के मुख्य पहलू
    इस घोषणापत्र के माध्यम से हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति जताई है, जो एआई के प्रभाव और उपयोग को वैश्विक स्तर पर बेहतर और सुरक्षित बनाएंगे:

    डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर:
    इस चार्टर के तहत एआई के बुनियादी संसाधनों तक सभी की पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही स्थानीय नवाचारों को भी समर्थन मिलेगा।

    ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स:
    यह एक व्यावहारिक मंच होगा जो एआई के सफल उपयोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनाने और पुनरावृत्त करने में मदद करेगा।

    ट्रस्टेड एआई कॉमन्स:
    एआई प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों, बेंचमार्क और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा संग्रह बनाया जाएगा।

    इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स:
    वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा।

    समाज के उत्थान के लिए एआई का उपयोग
    इस घोषणापत्र में इस बात को स्वीकार किया गया है कि एआई समाज के सभी वर्गों के उत्थान की क्षमता रखता है। इसके लिए सोशल एम्पॉवरमेंट प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों को एआई के लाभ मिल सकें। साथ ही, एआई के कारण बदलते रोजगार स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, ‘रीस्किलिंग’ और कार्यबल विकास के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर भी सहमति बनी है।

    आगे की चुनौतियाँ और कार्यान्वयन
    हालांकि 88 देशों ने इस डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को वास्तविकता में बदलना होगी, क्योंकि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक प्रकृति की हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने शुरुआत में इस घोषणापत्र के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र के (UN) चार्टर से मिलते-जुलते थे। हालांकि, भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सहयोगी मानते हुए, यूरोपीय संघ अंततः इस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया।

  • मंगल का कुंभ राशि में महागोचर: ग्रहों के अनूठे संयोग से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, बरसेगा धन और वैभव

    मंगल का कुंभ राशि में महागोचर: ग्रहों के अनूठे संयोग से चमकेगी इन 4 राशियों की किस्मत, बरसेगा धन और वैभव


    नई दिल्ली/भोपाल। अंतरिक्ष में ग्रहों की चाल एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। आगामी 23 फरवरी 2026 को सुबह 7:27 बजे ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाने वाला मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभ राशि में पहले से ही ग्रहों का एक दुर्लभ जमावड़ा लगा हुआ है। वर्तमान में यहाँ सुख-वैभव के प्रदाता शुक्र, बुद्धि के देवता बुध और छाया ग्रह राहु विराजमान हैं। ऐसे में मंगल का आगमन न केवल ‘अंगारक योग’ जैसी स्थितियां बनाएगा, बल्कि शुक्र और मंगल की युति आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खोलेगी। ज्योतिष में मंगल की ऊर्जा और शुक्र के ऐश्वर्य का मिलन भौतिक सुखों में वृद्धि करने वाला माना जाता है।

    इस गोचर का सबसे सकारात्मक प्रभाव मिथुन राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मिथुन राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। इन्हें न केवल परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी नए और सुनहरे अवसर प्राप्त होंगे। धन आवक के नए स्रोत खुलने से बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी और प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। हालांकि, इन जातकों को सलाह दी गई है कि वे अति उत्साह में अपनी सेहत को नज़रअंदाज न करें और व्यर्थ के विवादों से दूरी बनाए रखें।

    वहीं, वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल का यह परिवर्तन कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता लेकर आ रहा है। नौकरीपेशा लोगों को अपने वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा और पदोन्नति मिल सकती है। प्रोफेशनल लाइफ में आपका दबदबा बढ़ेगा और सामाजिक दायरे में भी विस्तार होगा। इस दौरान बनने वाले नए संपर्क भविष्य में बड़े आर्थिक लाभ का कारण बन सकते हैं। दोस्तों की मदद से आपके रुके हुए कठिन कार्य भी आसानी से पूरे हो जाएंगे।

    मकर राशि के जातकों के लिए यह गोचर आत्मविश्वास और जोश का संचार करने वाला साबित होगा। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है, उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर आपका झुकाव बढ़ेगा। शिक्षा या ट्रेनिंग के सिलसिले में की गई यात्राएं सुखद और परिणामी रहेंगी। कुल मिलाकर मकर राशि वालों के लिए यह सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय है।

    अंततः, चूंकि यह गोचर कुंभ राशि में ही हो रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों को इसका सीधा और सर्वाधिक लाभ मिलना तय है। कारोबारियों के लिए नए व्यावसायिक समझौते लाभकारी सिद्ध होंगे और समाज में आपकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगेंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति के साथ-साथ आपका स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहेगा। हालांकि, मंगल की तप्त ऊर्जा को संतुलित करने के लिए ज्योतिषियों ने कुंभ राशि वालों को पर्याप्त जल सेवन करने की सलाह दी है। ग्रहों का यह अद्भुत मेल अगले कुछ दिनों तक इन चार राशियों के जीवन में खुशहाली और सफलता की नई इबारत लिखेगा।

  • ढुण्ढिराज चतुर्थी 2026: बाधाओं के नाश और मनोकामना पूर्ति का पावन दिन, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    ढुण्ढिराज चतुर्थी 2026: बाधाओं के नाश और मनोकामना पूर्ति का पावन दिन, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली ढुण्ढिराज चतुर्थी इस वर्ष 21 फरवरी 2026 शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार यह तिथि भगवान श्री गणेश को समर्पित है जिन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। मत्स्य पुराण में इस चतुर्थी को ‘मनोरथ चतुर्थी’ के नाम से भी वर्णित किया गया है क्योंकि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। कहा जाता है कि जीवन में आ रही बाधाओं रुकावटों और मानसिक अशांति को दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है।

    इस बार ढुण्ढिराज चतुर्थी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन शुभ योगों का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन शुभ शुक्ल और रवि योग का निर्माण हो रहा है जो धार्मिक कार्यों और पूजन-अर्चन के लिए अत्यंत अनुकूल माने जाते हैं। ऐसे शुभ संयोग में भगवान गणेश की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

    पूजा के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा जो साधना और जप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 मिनट तक रहेगा जिसमें किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा जो पूजन के लिए शुभ है। वहीं निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 9 मिनट से 1 बजे तक रहेगा जो विशेष साधना और मंत्र जप के लिए उत्तम माना गया है।

    ढुण्ढिराज चतुर्थी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। गणपति को लाल पुष्प दूर्वा मोदक और सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से दूर्वा और मोदक भगवान को अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप या गणेश स्तोत्र का पाठ करने से बुद्धि विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ की गई आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलने लगती है।

    मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से न केवल आर्थिक समृद्धि आती है बल्कि पारिवारिक सुख-शांति भी बनी रहती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि भगवान गणेश को बुद्धि और विद्या का देवता कहा गया है। जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन उपवास रखकर पूजा-अर्चना करता है उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अधूरे कार्य पूर्ण होने लगते हैं।

    ढुण्ढिराज चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मविश्वास और आस्था को मजबूत करने का अवसर भी है। शुभ योगों से युक्त इस पावन दिन पर भगवान गणेश की आराधना कर अपने जीवन से विघ्नों को दूर करने और सफलता की ओर कदम बढ़ाने का यह श्रेष्ठ अवसर है।

  • होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…

    होंठों के कालेपन का कारण चाय या कुछ और? विशेषज्ञों ने बताया असली सच…


    नई दिल्ली।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का हिस्सा है सुबह की शुरुआत से लेकर ऑफिस ब्रेक और शाम की थकान तक कई लोग दिन में तीन से चार बार या उससे भी अधिक चाय पीते हैं ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ज्यादा चाय पीने से होंठ काले हो जाते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब नहीं है

    चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन हल्का दाग छोड़ सकते हैं खासकर दांतों पर लेकिन ये तत्व सीधे तौर पर होंठों को स्थायी रूप से काला नहीं करते असली समस्या तब शुरू होती है जब व्यक्ति बहुत अधिक गर्म चाय बार बार पीता है गर्म पेय का लगातार संपर्क होंठों की नाजुक त्वचा को प्रभावित करता है इससे त्वचा की ऊपरी परत सूखने लगती है और धीरे धीरे पपड़ी बनती है लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो होंठों का रंग गहरा दिखाई देने लगता है

    विशेषज्ञ बताते हैं कि होंठों के कालेपन के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक बड़ा कारण है जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता तो होंठ सूखकर बेजान हो जाते हैं और उनका प्राकृतिक गुलाबी रंग फीका पड़ने लगता है

    धूम्रपान या तंबाकू सेवन भी होंठों की रंगत बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निकोटीन और अन्य रसायन पिगमेंटेशन को बढ़ाते हैं जिससे होंठ धीरे धीरे काले हो सकते हैं इसी तरह बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहना भी हानिकारक है सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा में मेलानिन का स्तर बढ़ा सकती हैं जिससे होंठों का रंग गहरा हो जाता है

    लिप केयर की अनदेखी भी एक बड़ी वजह है बार बार होंठ चाटना सस्ते या घटिया गुणवत्ता वाले लिप प्रोडक्ट्स का उपयोग करना या रात में मॉइस्चराइज न करना होंठों की सेहत पर असर डालता है कुछ मामलों में एलर्जी या हार्मोनल बदलाव भी रंग में परिवर्तन का कारण बन सकते हैं

    स्वास्थ्य संबंधी सामान्य मार्गदर्शन के अनुसार संतुलित जीवनशैली और नियमित देखभाल से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है वैश्विक स्तर पर भी त्वचा और होंठों की सुरक्षा को दैनिक स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा माना गया है जैसा कि World Health Organization अपने स्वास्थ्य संरक्षण के व्यापक सिद्धांतों में त्वचा सुरक्षा पर जोर देता है

    अगर आप होंठों की प्राकृतिक रंगत बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं दिनभर पर्याप्त पानी पिएं SPF युक्त लिप बाम का उपयोग करें अत्यधिक गर्म चाय या कॉफी से बचें धूम्रपान से दूरी रखें और सोने से पहले होंठों पर अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं

    यदि होंठों का रंग अचानक बहुत ज्यादा गहरा हो जाए जलन सूजन या दर्द महसूस हो तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहतर होता है क्योंकि कभी कभी यह किसी आंतरिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है