Author: bharati

  • बॉलीवुड में नहीं चला सिक्का, तो टीवी की दुनिया में रखा कदम, आज रोमांटिक स्टार बन गए मोहम्मद इकबाल खान

    बॉलीवुड में नहीं चला सिक्का, तो टीवी की दुनिया में रखा कदम, आज रोमांटिक स्टार बन गए मोहम्मद इकबाल खान

    नई दिल्‍ली । हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हर कलाकार का स्‍टार बनने का सपना पूरा नहीं होता। कई ऐसे चेहरे रहे हैं, जिन्हें फिल्मों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने करियर के लिए नया रास्ता चुना। इन्हीं में से एक नाम है अभिनेता मोहम्मद इकबाल खान का। आज, 10 फरवरी को अपना 44वां जन्मदिन मना रहे इकबाल खान ने भले ही फिल्मों में लंबी पारी न खेली हो, लेकिन टेलीविजन पर उन्होंने खुद को एक भरोसेमंद और लोकप्रिय रोमांटिक स्टार के रूप में स्थापित किया। छोटे पर्दे पर उनके निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं और वह लगातार टीवी इंडस्ट्री में सक्रिय बने हुए हैं।

    कम उम्र में ही अभिनेता बनने की ठानी

    कश्मीर में जन्मे और आज टीवी इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे बन चुके मोहम्मद इकबाल खान ने बहुत कम उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें अभिनय की दुनिया में ही अपना भविष्य बनाना है। स्कूल के दिनों में वह नाटकों और स्टेज परफॉर्मेंस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपनी एक्टिंग से सभी को प्रभावित भी करते थे। हालांकि पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई आकर करियर बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा। शुरुआती दौर में इकबाल ने मॉडलिंग के जरिए खुद के खर्च पूरे किए और परिवार पर निर्भर रहने से बचते रहे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वह पहली बार मुंबई पहुंचे, तब न तो रहने के लिए ढंग की जगह थी और न ही जेब में पर्याप्त पैसे। बावजूद इसके, उन्होंने अपने संघर्षों का जिक्र परिवार से कम ही किया और अकेले दम पर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे।

    ऐसे बदला कैरियर का रूख

    मुंबई में संघर्ष के बाद जब मोहम्मद इकबाल खान को फिल्मों में काम मिलने लगा, तो उम्मीदें भी बढ़ने लगीं। उन्हें बॉलीवुड में पहला मौका फिल्म कुछ दिल ने कहा से मिला। इसके बाद वह बुलेट: एक धमाका एक छोटी सी ईगो और फंटूस जैसी फिल्मों में नजर आए। हालांकि ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास असर नहीं छोड़ पाईं। इकबाल ने विद्या बालन के साथ फिल्म जलसा में भी काम किया, लेकिन बड़े पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए लगातार मुश्किल साबित हो रहा था। एक के बाद एक फ्लॉप फिल्मों ने उनके आत्मविश्वास को जरूर झटका दिया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नया रास्ता चुना। अभिनय को अलविदा कहने के बजाय इकबाल ने टेलीविजन की ओर रुख किया, जहां उन्हें लगातार लोकप्रिय शोज मिले और यहीं से उनके करियर ने नई उड़ान भरी।

    टेलीविजन की दुनिया में छा गए

    टेलीविजन की दुनिया में मोहम्मद इकबाल खान की एंट्री ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। उन्हें छोटे पर्दे पर पहला बड़ा ब्रेक रोमांटिक सीरियल कैसा ये प्यार है से मिला, जिसने उन्हें रातों-रात दर्शकों का चहेता बना दिया। शो की जबरदस्त सफलता के बाद इकबाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह लगातार करीब 19 टीवी धारावाहिकों का हिस्सा बने। काव्यांजलि में शौर्य और कहीं तो होगा में रघु जैसे किरदार निभाकर उन्होंने खासतौर पर युवा दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की।

    इसके अलावा वारिस दिल से दिल तक एक था राजा एक थी रानी और रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी में भी उनकी मौजूदगी ने खूब सुर्खियां बटोरीं। कोविड काल के दौरान इकबाल ने कुछ समय के लिए टीवी और सोशल मीडिया से दूरी जरूर बनाई, लेकिन इसके बाद उन्होंने सीरियल न उम्र की सीमा हो के जरिए शानदार वापसी की। आज भी वह टीवी इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के कई प्रोजेक्ट्स में नजर आकर अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए हैं।

  • नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की बड़ी छलांग चार पायदान सुधार के साथ 45वें स्थान पर पहुंचा देश

    नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की बड़ी छलांग चार पायदान सुधार के साथ 45वें स्थान पर पहुंचा देश


    नई दिल्ली :भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी डिजिटल और नेटवर्क से जुड़ी तैयारियों में एक बार फिर मजबूती दिखाई है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत ने चार पायदान की छलांग लगाते हुए 45वां स्थान हासिल किया है। यह जानकारी सरकार की ओर से साझा की गई है। इस रिपोर्ट में भारत ने न केवल अपनी रैंकिंग बेहतर की है बल्कि कई अहम वैश्विक संकेतकों में शीर्ष स्थान भी प्राप्त किया है।

    यह रिपोर्ट वॉशिंगटन डीसी स्थित स्वतंत्र और गैर लाभकारी शोध संस्थान पोर्टुलंस इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई है। इसमें दुनिया के 127 देशों की डिजिटल टेक्नोलॉजी नेटवर्क कनेक्टिविटी और शासन व्यवस्था की तैयारियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल स्कोर वर्ष 2024 में 53.63 था जो 2025 में बढ़कर 54.43 हो गया है।

    नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स में देशों का मूल्यांकन चार प्रमुख आधारों पर किया जाता है। इनमें टेक्नोलॉजी लोग शासन व्यवस्था और प्रभाव शामिल हैं। इन चार स्तंभों के अंतर्गत कुल 53 संकेतकों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने कई क्षेत्रों में दुनिया के अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत टेलीकॉम सेवाओं में सालाना निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैज्ञानिक शोध पत्र आईटी और संचार सेवाओं के निर्यात और ई कॉमर्स कानून जैसे क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहा है। इसके अलावा फाइबर इंटरनेट कनेक्शन देश के भीतर मोबाइल इंटरनेट उपयोग और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता के मामले में भारत को दूसरा स्थान मिला है। घरेलू बाजार के आकार और आय असमानता जैसे संकेतकों में भारत तीसरे स्थान पर रहा है।

    संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत की नेटवर्क से जुड़ी तैयारियां उसके आय स्तर से भी बेहतर हैं। कम आय वाले मध्यम वर्ग के देशों की श्रेणी में भारत दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि देश में डिजिटल समावेशन और तकनीकी पहुंच को दर्शाती है।

    केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में कहा था कि भारत में दुनिया का सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध है और डेटा का उपयोग भी वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक किया जा रहा है। मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश में 120 करोड़ से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जून तक 4जी नेटवर्क देश के हर गांव तक पहुंच जाए।

    सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने अब तक 97068 4जी साइट्स स्थापित की हैं जिनमें से 93511 साइट्स चालू हो चुकी हैं। बीएसएनएल आने वाले महीनों में अपने सभी 4जी टावरों को 5जी में बदलने की योजना पर काम कर रही है।

    देश में 5जी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5जी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और वर्तमान में ये सेवाएं देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं। टेलीकॉम कंपनियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कुल 5.08 लाख 5जी बेस ट्रांससीवर स्टेशन स्थापित किए हैं।नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की यह प्रगति डिजिटल इंडिया पहल मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क और तकनीकी नवाचार का प्रमाण है। यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल शक्ति को और मजबूत बनाती है।

  • महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

    महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

    नई दिल्‍ली । महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बाद अब जिला परिषद चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, भाजपा 145 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 85 सीटों पर और अजित पवार गुट की एनसीपी करीब 80 सीटों पर आगे चल रही है।

    बता दें कि राज्यभर में कुल 731 जिला परिषद और 1462 पंचायत समिति सीटों के लिए रविवार को मतदान कराया गया था, जिसमें लगभग 2 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह चुनाव पहले 5 फरवरी को प्रस्तावित थे, लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण इन्हें स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 8 फरवरी को मतदान संपन्न हुआ और अब इसके नतीजे सामने आ रहे हैं।

    भाजपा को सांगली, सतारा और पनवेल में बढ़त

    अब तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, भाजपा ने सांगली, सतारा और पनवेल जैसे अहम क्षेत्रों में बढ़त बना ली है। दूसरी ओर, अजित पवार का पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले बारामती इलाके में एनसीपी का प्रदर्शन मजबूत नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनसीपी को यह बढ़त अजित पवार के हालिया निधन के बाद बनी सहानुभूति के चलते मिली हो सकती है। अजित पवार को पुणे और मराठवाड़ा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में शुमार थे और इन इलाकों में उनकी गहरी पकड़ रही है। ऐसे में उनके निधन के बाद मतदाताओं में भावनात्मक जुड़ाव का असर चुनावी नतीजों में झलकता दिखाई दे रहा है।

    विपक्ष को करारा झटका

    731 जिला परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिख रही है। महायुति के सहयोगी दलों में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना दूसरे स्थान पर है, जबकि अजित पवार की एनसीपी तीसरे नंबर पर बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार संघर्ष कर रहे विपक्ष को इन नतीजों से एक बार फिर करारा झटका लगा है। कांग्रेस महज 30 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना केवल 21 सीटों पर ही बढ़त दर्ज कर पाई है। वहीं पुणे और सोलापुर जैसे प्रमुख जिलों में एनसीपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया है।

    सोलापुर-पुणे में एनसीपी का दबदबा, सतारा में BJP ने बनाई बढ़त

    जिला परिषद चुनावों के रुझानों में सोलापुर और पुणे जिलों में एनसीपी का प्रदर्शन काफी मजबूत नजर आ रहा है। सोलापुर में पार्टी अब तक 24 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस यहां अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही है। पुणे जिले में भी एनसीपी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक सहानुभूति लहर से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सतारा जिले में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त हासिल की है। यहां भाजपा 32 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एनसीपी 17 और शिवसेना 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

  • बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

    बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश


    इंदौर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर खंडपीठ से एक महत्वपूर्ण और दिशा-निर्देशात्मक फैसला सामने आया है, जिसमें बाइक का सार्वजनिक परिवहन जैसे उपयोग पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है। न्यायालय ने कहा है कि धारा 66 के तहत किसी भी वाहन को बिना परमिट सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल करना अवैध है और ऐसे उपयोग को रोकना राज्य सरकार और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है।

    मामला यह है कि इंदौर शहर सहित पूरे प्रदेश में ओला, उबर, रैपिडो जैसी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर कंपनियां दो-पहिया वाहनों बाइक का उपयोग सार्वजनिक परिवहन की तरह कर रही हैं, जबकि इन वाहनों के पास किसी भी प्रकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट परमिट नहीं है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयोग से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्री संरक्षण के मानकों को भी खतरा होता है।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे कानून के तहत परमिट नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और बिना वैध अनुमति वाले वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग से रोकें। आदेश में यह भी कहा गया कि परिवहन विभाग को नियमों के अनुरूप परमिट जारी करने, मॉनिटरिंग और अनुपालन की प्रक्रिया को सशक्त बनाना होगा, ताकि कानून का सही ढंग से पालन हो सके।

    दरअसल, मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक परिवहन के लिए वाहन का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वह वैध परिवहन परमिट/लाइसेंस धारक हो। बिना परमिट वाहन को जनता के आवागमन में शामिल करना गैरकानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे से भरा माना जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी वाहनों का सार्वजनिक परिवहन की तरह उपयोग कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही क्यों न होता हो।

    स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखें और किसी भी निजी वाहन के बिना परमिट पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन को रोका जाए। अदालत का यह आदेश राज्य में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा के मानकों की पूर्ति और सड़कों पर नियम-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

    विशेष रूप से हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इस तरह के वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में संचालित करने की अनुमति चाहता है, तो उसे परिवहन नियमों के अनुकूल वैध परमिट और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इलेक्ट्रॉनिक और ऐप-आधारित मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अदालत की यह टिप्पणी कानून-व्यवस्था और सड़क यातायात नियमों के स्पष्ट पालन को सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है।

  • महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश

    महिला से मारपीट मामले को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला: पीसी शर्मा बोले आरोपी बीजेपी के, सच छुपाने की कोशिश


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सीधी जिले में महिला के साथ मारपीट की घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री श्री पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी इस मामले में झूठ फैला रही है और वास्तविक आरोपियों को कांग्रेसी बताकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।

    श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। एक महिला को डंडों से पीटा जा रहा है और मौके पर मौजूद लोग ‘मारो-मारो’ के नारे लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाओं में शामिल लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें जबरन कांग्रेस से जोड़ा जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि ‘लाड़ली बहन’ और ‘लाड़ला भैया’ जैसी योजनाओं के दावे करने वाली सरकार में महिलाओं के साथ खुलेआम मारपीट हो रही है, जो बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए और जेल भेजा जाए।

    पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में बलात्कार, मारपीट और अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। भाजपा केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि ऐसे अहंकारी और हिंसक नेता उसी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

    नकल माफिया पर गंभीर आरोप

    पीसी शर्मा ने बोर्ड परीक्षाओं और नकल माफिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में वर्षों से संगठित रूप से नकल कराई जा रही है। हर साल पेपर लीक होते हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने ग्वालियर-चंबल, विंध्य और निमाड़ अंचल को नकल माफिया का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा प्रदेश के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

    निगम-मंडल नियुक्तियों पर सवाल
    उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में निगम और मंडल के पद भ्रष्टाचार की राजनीति के लिए भरे जाते हैं। बिना लेन-देन के कोई नियुक्ति नहीं होती। जिला प्रभारियों की नियुक्ति भी संभावित नुकसान को नियंत्रित करने के उद्देश्य से की गई है। पार्टी के भीतर पदों को लेकर गुटबाजी और टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसमें असली कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है।

    विजय शाह प्रकरण पर बयान
    विजय शाह मामले को लेकर पीसी शर्मा ने कहा कि उन्हें न्यायालय से बड़ी उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है और उन्हें विश्वास है कि न्याय होगा। उन्होंने कहा कि चार बार माफी मांगने के बावजूद विजय शाह को अपने पद से हाथ धोना ही पड़ेगा।

    संघ और जनसंख्या बयान पर प्रतिक्रिया

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख के तीन बच्चों वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है, रोजगार के अवसर नहीं हैं और ऐसे समय में जनसंख्या बढ़ाने की बात करना चिंताजनक है। उन्होंने संघ की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए इसे असंवेदनशील बताया।

    BLO और SIR को लेकर आरोप

    पीसी शर्मा ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है। जबरन नाम काटे और जोड़े जा रहे हैं। BLO पर दबाव बनाया जा रहा है और उनका वेतन भी रोका जा रहा है। उन्होंने इसे भाजपा की सुनियोजित साजिश करार दिया। कांग्रेस ने इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही तय करने और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है।

  • 8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल: APK फाइल से खाली हो सकते हैं खाते, पुलिस ने जारी की चेतावनी

    8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल: APK फाइल से खाली हो सकते हैं खाते, पुलिस ने जारी की चेतावनी


    इंदौर । मध्यप्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर पुलिस साइबर अपराधों को लेकर सतर्कता और जागरूकता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर साइबर ठग भी सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला 8वें वेतन आयोग में वेतन वृद्धि के नाम पर की जा रही साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर इंदौर क्राइम ब्रांच पुलिस को विधिवत एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर “8वें वेतन आयोग में आपकी सैलरी कितनी होगी” जैसे आकर्षक संदेश प्राप्त हो रहे हैं। इन संदेशों के साथ एक APK फाइल भी भेजी जा रही है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल फोन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ सकता है, जिससे बैंक अकाउंट, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से पैसे निकाले जाने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।

    इंदौर क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों की जिज्ञासा और वेतन वृद्धि की उम्मीद का दुरुपयोग किया जा रहा है। APK फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारियां, जैसे बैंक डिटेल्स, ओटीपी और पासवर्ड साइबर अपराधियों तक पहुंच सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित का बैंक खाता पूरी तरह खाली हो सकता है।

    इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एडिशनल डीसीपी श्री राजेश दंडोतिया ने बताया कि यह एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड है, जिससे बचाव के लिए जनजागरूकता बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर या स्रोत से प्राप्त APK फाइल को डाउनलोड न करें और न ही ऐसे संदेशों पर विश्वास करें।

    पुलिस द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि वेतन आयोग, वेतन वृद्धि या अन्य शासकीय लाभों से जुड़ी कोई भी आधिकारिक जानकारी केवल सक्षम शासकीय विभागों और अधिकृत पोर्टलों के माध्यम से ही साझा की जाती है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की फाइल या लिंक मोबाइल पर भेजे जाने की प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध मानी जानी चाहिए।

    क्राइम ब्रांच ने यह भी सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार का संदेश प्राप्त होता है, तो वह तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम सेल को इसकी सूचना दे। समय रहते सतर्कता बरतने से न केवल आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने में भी पुलिस को सहायता मिल सकती है। पुलिस प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें, किसी भी लालच भरे संदेश से दूर रहें और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन कर स्वयं को सुरक्षित रखें।

  • सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..

    सोने-चांदी के भाव में तेज उछाल भोपाल में आज के रेट में बड़ी बढ़त..


    नई दिल्ली :देशभर में सोने और चांदी के बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। खासकर इस शादी के सीजन में सोने और चांदी के भाव ने निवेशकों और खरीदारों की ध्यान खींचा है। पिछले दो हफ्तों में गोल्ड मार्केट ने ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की थी। इस गिरावट के दौरान सोने का भाव पिछले एक हफ्ते में 13 हजार रुपए सस्ता हुआ जबकि चांदी 94 हजार रुपए तक सस्ती हुई।

    इसी बीच आज बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है। भोपाल में आज 24 कैरेट सोने के दाम 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए हैं। वहीं चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है। यह बढ़त निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर है क्योंकि पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में हड़कंप मचा हुआ था।

    देशभर में आज सोने का भाव 157,530 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 260,040 रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव और घरेलू मांग में वृद्धि के कारण हो रहा है। निवेशक इस समय सोने और चांदी में तेजी से ट्रेडिंग कर रहे हैं और खरीदारी के लिए सावधानी बरत रहे हैं।

    सोने और चांदी के बाजार में निवेश करते समय हॉलमार्क पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स BIS हॉलमार्क निर्धारित करता है। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि सोना शुद्ध और मिलावट रहित हो। 24 कैरेट सोने में विशेष अंक होते हैं जिन्हें देखकर खरीदार असली सोना पहचान सकते हैं। बिना हॉलमार्क की गहने खरीदना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इसमें मिलावट होने की संभावना रहती है।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक या खरीदार बाजार की हलचल को देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव आम बात है और यह वैश्विक आर्थिक स्थिति, डॉलर के भाव और मांग पर निर्भर करता है। आज की बढ़त के बाद निवेशकों में थोड़ी राहत है और खरीदार सोने-चांदी की कीमतों को देखकर खरीदारी के अवसर तलाश रहे हैं।

    भोपाल में आज के रेट के अनुसार यदि आप सोने की खरीदी का विचार कर रहे हैं तो 24 कैरेट सोने का भाव 157,610 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 261,380 रुपए प्रति किलो है। यह कीमतें स्थानीय बाजार में थोड़ी अलग हो सकती हैं। इसके अलावा गहने खरीदते समय हमेशा हॉलमार्क जांचना और शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है।

    इस प्रकार इस समय सोने और चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। निवेशक और खरीदार दोनों को सावधानी बरतते हुए बाजार की खबरों पर नजर रखनी चाहिए। खरीदारी करने से पहले कीमतों और शुद्धता की पुष्टि करना जरूरी है। बाजार में आज की तेजी ने निवेशकों के बीच नई उम्मीद जगाई है और खरीदारों को फैसला लेने के लिए अवसर दिया है।

  • इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर जिला न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: गर्भस्थ शिशु को भी आश्रित मानते हुए मुआवजे का आदेश

    इंदौर । इंदौर जिला न्यायालय ने सड़क दुर्घटना से संबंधित एक प्रकरण में अत्यंत संवेदनशील, मानवीय एवं दूरदर्शी निर्णय पारित करते हुए न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने आरक्षक की मृत्यु के उपरांत मुआवजा निर्धारण करते समय उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु को भी मृतक का आश्रित मानते हुए मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है।

    यह मामला सीहोर जिले के जवरा थाना क्षेत्र में घटित एक भीषण सड़क दुर्घटना से संबंधित है। जानकारी के अनुसार आरक्षक सतीश, पिता कैलाश रुडेलें, जो उस समय झाबुआ जिले में पदस्थ थे, कार से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार एवं लापरवाही से चल रहे एक ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना की गंभीरता इतनी अधिक थी कि आरक्षक सतीश सहित एक अन्य व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

    दुर्घटना के समय मृतक की पत्नी रेखा सात माह की गर्भवती थीं। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया। इसके पश्चात पीड़ित परिवार की ओर से न्यायालय में मुआवजा प्राप्त करने हेतु दावा याचिका प्रस्तुत की् की गई।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीरता से लिया कि मृतक की पत्नी गर्भवती थी और गर्भ में पल रहा शिशु भी मृतक पर पूर्ण रूप से आश्रित माना जाना चाहिए। इस आधार पर न्यायालय ने गर्भस्थ शिशु को भी आश्रितों की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए मुआवजे का निर्धारण किया।

    अधिवक्ता श्री राजेश खंडेलवाल के अनुसार, न्यायालय ने मृतक की पत्नी, दो नाबालिग बच्चों, माता, गर्भस्थ शिशु तथा साथ रहने वाले छोटे भाई को आश्रित मानते हुए कुल 50 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया है। इसके अतिरिक्त 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ने पर यह राशि लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    कानूनी विशेषज्ञों ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह फैसला गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को न्यायिक मान्यता देने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। वहीं पीड़ित परिवार ने न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय उनके जीवन को पुनः स्थिरता देने में सहायक सिद्ध होगा। यह फैसला न केवल न्याय की भावना को सुदृढ़ करता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में स्थापित हुआ है।

  • 350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप

    350 करोड़ का मास्टरप्लान: इंदौर को मिलने जा रहा है नया एलिवेटेड कॉरिडोर 15 फरवरी से रखी जाएगी नींव जानिए क्या है पूरा रूट मैप


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले एबी रोड पर रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में शुमार पलासिया, गीता भवन और नवलखा जैसे क्षेत्रों में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और लंबे सिग्नलों से अब जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। इंदौर के बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है, जिसके तहत LIG चौराहे से लेकर नवलखा तक लगभग 7 किलोमीटर लंबा एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर आकार लेने जा रहा है। करीब 350 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही शहर की रफ्तार को एक नई दिशा मिलेगी।

    इस कॉरिडोर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में राजीव गांधी चौराहे से LIG तक का जो सफर भारी ट्रैफिक के कारण 40 से 45 मिनट ले लेता है, इस कॉरिडोर के बनने के बाद वह महज 15 मिनट में सिमट जाएगा। यह न केवल लोगों के कीमती समय की बचत करेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर LIG चौराहे से शुरू होकर गिटार चौराहा, पलासिया, गीता भवन, शिवाजी वाटिका और GPO जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के ऊपर से होते हुए सीधे नवलखा तक पहुंचेगा।

    प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो इस पूरे रूट पर तीन विशाल रोटरी बनाई जाएंगी, जो ट्रैफिक के सुगम प्रबंधन के लिए LIG, शिवाजी वाटिका और नवलखा पर स्थित होंगी। इसके अलावा, गिटार चौराहा और व्हाइट चर्च रोड जैसे महत्वपूर्ण जंक्शनों पर कनेक्टिंग आर्म्स (रैम्प) दिए जाएंगे, ताकि आसपास की कॉलोनियों और अंदरूनी सड़कों से आने वाला ट्रैफिक भी बिना किसी बाधा के सीधे कॉरिडोर पर चढ़ सके। हालांकि, पहले इसे 6 लेन बनाने का विचार था, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इसे 4 लेन करने का निर्णय लिया गया है।

    दिलचस्प बात यह है कि यह प्रोजेक्ट पिछले करीब 4 सालों से फाइलों और तकनीकी उलझनों में अटका हुआ था। साल 2009 में केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद कई बाधाएं आईं, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने इसे धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। वर्तमान में प्रस्तावित रूट पर मिट्टी की जांच (Soil Testing) का काम तेजी से चल रहा है और 15 फरवरी से कॉरिडोर की नींव रखने का मुख्य काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष मैनेजमेंट प्लान भी तैयार किया गया है।

    सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले 2 सालों के भीतर यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। इंदौर के विकास में यह एलिवेटेड रोड न केवल एक नई पहचान जोड़ेगी, बल्कि शहर के बढ़ते विस्तार और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।