Author: bharati

  • वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के पास कितना है पेट्रोल भंडार? मंत्री पुरी ने दी जानकारी

    वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के पास कितना है पेट्रोल भंडार? मंत्री पुरी ने दी जानकारी


    नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लगभग 74 दिन तक देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। पुरी ने कहा कि तेजी से विकास कर रहे भारत के लिए सुरक्षित और व्यवहार्य तेल भंडार बेहद जरूरी है, ताकि वैश्विक संकट की स्थिति में देश कमजोर न पड़े। उन्होंने बताया कि भारत के पश्चिमी और पूर्वी तट दोनों पर तेलशोधक संयंत्र मौजूद हैं, जो आपूर्ति बनाए रखने में मदद करते हैं।

    भारत की वैश्विक स्थिति

    अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश के पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी शोधन क्षमता है, जो वर्तमान में लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष है और बढ़कर 32 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी। भारत दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक भी है।

    पुरी ने बताया कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक स्तर पर किसी भी उथल-पुथल की स्थिति में देश अपनी जरूरतों को पूरा कर सके। आईईए के मुताबिक, आदर्श रूप से 90 दिनों का भंडार होना चाहिए।

    वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

    पुरी ने कहा कि वर्तमान में भारत के कुल भंडार लगभग 74 दिन तक पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा, “मंत्री के रूप में मैं 74 दिनों के भंडार के साथ सुरक्षित महसूस करता हूं, लेकिन भविष्य में इसे और बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

    पुरी ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड के तहत तीन जगहों पर 53.3 लाख मीट्रिक टन की कुल क्षमता वाले भंडार स्थापित किए गए हैं, जिनमें उपलब्ध कच्चे तेल की मात्रा बाजार की स्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। पुरी ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता का भी अहम घटक है।

  • 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी

    300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन तथा शिव के भक्ति, साधना और उपवास से जुड़े अनगिनत धार्मिक महत्वों से संपन्न है। इस वर्ष महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग के साथ जोड़ा जा रहा है, जिसे करीब 300 साल बाद बन रहा शुभ योग माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन कई प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें सूर्य, बुध और शुक्र के संयोग जैसे दुर्लभ ग्रह-योग शामिल हैं, जो जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले बताए जा रहे हैं। इसी के साथ चंद्रमा का मकर राशि में गोचर, बुध का शतभिषा से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश और मंगल का श्रवण से धनिष्ठा नक्षत्र में जाना भी इसी दिन विशेष शुभ माना जा रहा है।

    आधिकारिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से आरंभ होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी, और इस दिन भक्त शिवलिंग पर विधिवत पूजा, रुद्राभिषेक और निशीथ-काल में जागरण कर भोलेनाथ का आह्वान करते हैं। इस रात को शिव के तत्त्वों का प्रभाप्रवाह बढ़ा हुआ माना जाता है, जिससे शिवभक्ति, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष फल प्राप्त होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नक्षत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसका प्रभाव साधक के जीवन में दिव्य ऊर्जा को प्रेरित कर सकता है। इस संयोग को सर्वार्थ सिद्धि योग भी कहा जा रहा है, जिसमें साधना, पूजा, व्रत और दान-पुण्य का असर असाधारण फल प्रदान कर सकता है।

    शास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दूध-दही-गंगा जल का समर्पण, बेलपत्र-धतूरा चढ़ाना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ध्यान करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इससे कष्टों का निवारण, मनोकामना की सिद्धि, मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक बदलाव और समृद्धि की संभावनाओं में वृद्धि होती है।

    विशेष रूप से यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर जो साधक श्रद्धा, भक्ति और संतुलित साधना के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसे भगवान शिव की आशीर्वाद से आध्यात्मिक उन्नति, कठिनाइयों से मुक्ति तथा जीवन की हर मनोकामना की पूर्ति के मार्ग खुलते दिखाई देते हैं। यह दिन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, कर्म-निवृति और शिव-तत्त्व से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

  • चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

    चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का सबसे बड़ा कारक माना गया है। चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति की मानसिक अवस्था से लेकर सेहत और निर्णय क्षमता तक को प्रभावित करती है। यही कारण है कि चंद्रमा के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा सबसे तेज गति से चलने वाले ग्रह हैं और लगभग ढाई दिन में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इस बार चंद्रमा का गोचर कुछ राशियों के लिए चिंता और चुनौतियां लेकर आ रहा है।

    ज्योतिषियों के अनुसार वर्तमान समय में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान हैं और 10 फरवरी को देर रात 1 बजकर 11 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वृश्चिक राशि चंद्रमा की नीच राशि मानी जाती है। नीच अवस्था में चंद्रमा का प्रभाव मन को अस्थिर कर सकता है। इससे तनाव बढ़ता है और व्यक्ति छोटी छोटी बातों को लेकर भी मानसिक दबाव महसूस करता है। ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक तनाव को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। बीती बातों को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है। मन अशांत रहेगा और स्वयं को थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इस समय किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आवश्यक होगा। पारिवारिक या कार्यस्थल से जुड़ी किसी बात पर बहस की स्थिति बन सकती है। प्रेम संबंधों में भी संयम बरतने की आवश्यकता रहेगी। धैर्य और समझदारी से काम लेना इस समय सबसे जरूरी होगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए चंद्रमा का यह गोचर कुछ उलझनें लेकर आ सकता है। किसी नए रिश्ते में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मतभेद बढ़ सकते हैं। नौकरी परिवर्तन या यात्रा को लेकर मन में असमंजस बना रह सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं इसलिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी होगा। कला और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को किसी बात को लेकर मानसिक दबाव महसूस हो सकता है।

    धनु राशि के जातकों को इस समय सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी होगी। थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है जिससे रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मनचाहे परिणाम पाने के लिए अपेक्षा से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी होगा और अहंकार से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मानसिक बेचैनी और अनावश्यक चिंताएं परेशान कर सकती हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सोच विचार करना लाभकारी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्रमा का यह गोचर स्थायी प्रभाव नहीं डालेगा लेकिन इन कुछ दिनों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। ध्यान योग और सकारात्मक सोच से इस प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही निर्णय और संयम से इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

  • विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा

    विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा


    नई दिल्ली ।  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की विजया एकादशी 13 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी, जो कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि पर पड़ती है। विजया शब्द का अर्थ ही विजय है और इस पावन दिन का महत्व प्राचीन धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंका-यात्रा से पूर्व उसी एकादशी का व्रत रखकर विजय प्राप्त की थी, इसी से इस दिन का नाम विजया एकादशी पड़ा।

    धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत कर लेने से जीवन में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आंतरिक विजय प्राप्त होती है। भक्त सुबह स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा सुनकर दिनभर साधना में लीन रहते हैं। पारण व्रत समाप्ति 14 फरवरी को द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय में किया जाता है, जो विशेष मान्यता रखता है।

    इस पावन दिन तुलसी के साथ किए गए उपायों को भी बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी का पौधा भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है और पूजा में उसकी महिमा वर्णित है। धार्मिक परंपरा के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी के पास दीपक जलाना, फल-भोग अर्पित करना और परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। तुलसी के पास घी का दीपक प्रज्वलित करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा मिटती है और सुख-शांति तथा धन-समृद्धि में वृद्धि होती है।

    भक्त भगवान विष्णु को भोग में फल और मिठाई अर्पित करते हैं और उसमें तुलसी के कुछ पत्थर भी शामिल करते हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साक्षात आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में विजय-आत्मबल और बाधा-उन्मूलन की मान्यता जुड़ी हुई है।

    पौराणिक आस्था के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी की पूजा के समय तुलसी के 7 या 11 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान तुलसी के मंत्रों का जप और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना चाहिए। ऐसा करने से कहा जाता है कि मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इच्छित फल मिलने में सहायता मिलती है।

    विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के आराधना का एक अवसर भी है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा कर अपने जीवन में धन, समृद्धि, भय मोचन और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
    धार्मिक परंपरा में यह भी कहा जाता है कि तुलसी को जल न देना चाहिए क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी स्वयम् निर्जला व्रत करती हैं, इसलिए तुलसी को जल देना वर्जित माना जाता है। पूजा के दौरान तुलसी को छूना भी वर्जित बताया जाता है, और आसपास की जगह को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि पवित्रता बनी रहे और व्रत के शुभ फल प्राप्त हों

  • मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन

    मध्य प्रदेश में अगले 2 दिन गर्माहट बढ़ाएगी राहत, फिर पहाड़ों में बर्फ पिघलते ही लौटेगी ठिठुरन


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मौसम में अगले दो दिनों तक आम नागरिकों को सर्दी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने का अनुमान है। हालांकि, पहाड़ों से गुजरने वाले साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बर्फ पिघलने के बाद ठंडी हवाओं के लौटने से फिर से ठिठुरन बढ़ सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, फरवरी महीने में तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। फिलहाल प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पहाड़ों में बर्फबारी तथा बारिश की वजह से अगले दो दिन तक प्रदेश में तापमान बढ़ेगा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई हिस्सों में सोमवार को तेज धूप रही, जिससे दिन का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया। रात और अलसुबह ठंड का असर अभी भी महसूस होगा।

    आगे बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग ने बताया कि जब साइक्लोनिक सिस्टम गुजर जाएगा और पहाड़ों की बर्फ पिघलेगी, तो 13, 14 और 15 फरवरी को ठंड का असर फिर से बढ़ेगा। इस दौरान उत्तर से ठंडी हवाओं का प्रभाव भी महसूस होगा।

    13 शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से कम

    रविवार और सोमवार की रात में प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। सबसे ठंडा स्थान कटनी का करौंदी रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस था। अन्य ठंडे स्थानों में शहडोल (6.4), पचमढ़ी (7.4), अमरकंटक (7.8), दतिया (8.1), रीवा (8.3), राजगढ़ (8.6), उमरिया (8.8), शिवपुरी (9), मंडला (9.4), मलाजखंड (9.5) और नौगांव (9.8) डिग्री सेल्सियस दर्ज किए गए। पांच प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा: भोपाल 10.2, इंदौर 11.2, ग्वालियर 10.6, उज्जैन 12.4 और जबलपुर 11.4 डिग्री सेल्सियस।

    अगले 2 दिन मौसम का हाल

    11 फरवरी: दिन में तेज धूप और तापमान में बढ़ोतरी, रात और सुबह ठंड महसूस होगी।
    12 फरवरी: तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ेगा, दिन में धूप जारी रहेगी।

  • धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

    धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास की अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 16 फरवरी, 2026 की शाम 05:34 बजे से प्रारंभ होकर 17 फरवरी, 2026 की सायं 05:30 बजे तक रहेगी, इसलिए साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।

    धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा अर्चना, तर्पण पिंडदान और दान पुण्य कर्म से पितृ दोष होने पर भी मुक्ति प्राप्त होती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। यह अवसर आत्मिक शुद्धि, मृत्यु के बाद के कर्जों का निवारण तथा परिवार में सुख शांति, समृद्धि और संतुलन लाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

    सबसे पहले पवित्र स्नान करना शुभफलदायी होता है। ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर आप पवित्र नदी जैसे गंगा में स्नान करें। यदि नदी का स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल में तिल, कुश और काले तिल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने पूर्वजों को पितृ तर्पण और पिंडदान करना चाहिए, जिसमें जल, तिल, अन्न और शुद्ध मन से प्रार्थना शामिल हो।

    तर्पण करते समय दक्षिण की ओर मुख करके जल को कंठ के पास से बहाते हुए ॐ पितृभ्यो नमः जैसे मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिससे पूर्वजों को शांति स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है। पिंडदान में शुद्ध अन्न और तिल से बनाए गए पिंड को गंगा यमुना जैसे पवित्र नदी के तट पर या किसी पवित्र स्थान पर अर्पित करें। इससे पितृलोक में निवास करने वाले पूर्वजों को संतुष्टि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    अमावस्या तिथि में दान पुण्य का भी विशेष महत्व है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को अन्न, वस्त्र, मसाले, दाल चावल आदि दान करना तथा गो दैनिक सेवा या पशु पक्षियों को पानी भोजन देना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और संपन्नता आती है।

    शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसके चारों ओर सात परिक्रमा करना लाभकारी होता है। इससे पितरों की शांति और परिवार में सुख समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही गृहस्थ जीवन में बाधाएँ कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या पितरों से जुड़ी तिथि है, इसलिए इस दिन स्नान, दान पुण्य, तर्पण पिंडदान तथा मंत्र जाप करने से पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।

  • Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि

    Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि


    नई दिल्ली । साल 2026 की महाशिवरात्रि इस बार केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को पड़ रही है और इस दिन तीन प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव होगा। मंगल श्रवण नक्षत्र से निकलकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, चंद्रमा शनि की राशि मकर में गोचर करेगा और बुध ग्रह रात में शतभिषा नक्षत्र से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेगा। खास बात यह है कि इस दिन बुध दक्षिणावर्ती से उत्तरवर्ती होंगे, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है।इन ग्रहों के गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन विशेष रूप से सात राशियों के लिए यह दिन बेहद फलदायी रहेगा। कहा जाता है कि इस अवसर पर शिव की विशेष कृपा इन राशियों पर रहेगी और उनके जीवन में धन, सफलता और समृद्धि के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई ऊर्जा और सकारात्मक अवसर लेकर आएगा। करियर और व्यवसाय में अचानक लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से रुके काम इस समय पूरे हो सकते हैं और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा। धन की स्थिति मजबूत रहेगी और आपकी मेहनत का फल जल्दी दिखाई देगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन लंबे काम और तनाव से बचने के लिए आराम जरूरी है। किसी नए निवेश या पैसे से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें, ताकि भविष्य में फायदे के अवसर बनें।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय बदलाव और सफलता लेकर आएगा। नौकरी या व्यवसाय में बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास सफल रहेंगे और मनोवांछित परिणाम मिलेंगे। परिवार में प्रेम और सहयोग बना रहेगा और मानसिक तनाव कम होगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस समय नए कौशल सीखना या किसी प्रशिक्षण में भाग लेना भविष्य में फायदेमंद रहेगा।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। घरेलू मामलों में मनचाही सफलता मिलेगी और माता-पिता या बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और पुराने आर्थिक तनाव दूर होंगे। यात्रा के लिए समय अनुकूल है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन समय-समय पर आराम लेना आवश्यक है। परिवार के साथ अधिक समय बिताने से मानसिक शांति बढ़ेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में लाभ और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने वाला रहेगा। पुराने निवेश या संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है। शिक्षा और बच्चों के मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। मित्र और परिवार का सहयोग सहायक रहेगा। व्यापार या नौकरी में नए प्रस्तावों पर ध्यान दें, क्योंकि इस समय लाभ की संभावना अधिक है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसर और खुशियाँ लेकर आएगा। जीवनसाथी और परिवार के साथ संबंध मजबूत होंगे। व्यापार या पेशेवर क्षेत्र में नई योजनाएं सफल होंगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा और मानसिक संतुलन बना रहेगा। यात्रा और शौक के लिए समय अनुकूल है। इस समय अपने लक्ष्यों को लिखकर प्राथमिकता देना लाभकारी रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक और आर्थिक रूप से सशक्त रहने वाला है। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। धन लाभ के नए अवसर सामने आएंगे और नए काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। दोस्तों और सामाजिक संपर्कों में वृद्धि होगी। अपने विचारों और योजनाओं को लिखकर उनका पालन करना लाभकारी रहेगा।

    मीन राशि

    मीन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। नौकरी या व्यवसाय में बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। पुराने कर्ज या परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। शिक्षा और कौशल क्षेत्र में सफलता मिलेगी और मित्र व परिवार का सहयोग सहायक साबित होगा। वित्तीय मामलों में साफ-सफाई और रिकॉर्ड रखना भविष्य में फायदे का कारण बनेगा। इस समय अपने प्रयासों को सही दिशा में लगाने से लंबे समय के लिए लाभ सुनिश्चित होगा।

  • राजा बेटा कहकर पाल रहे हैं तो सावधान भारतीय पेरेंटिंग की यह आदत बहुओं और समाज पर डाल रही बोझ

    राजा बेटा कहकर पाल रहे हैं तो सावधान भारतीय पेरेंटिंग की यह आदत बहुओं और समाज पर डाल रही बोझ

    नई दिल्ली :भारतीय परिवारों में राजा बेटा शब्द अक्सर प्यार और गर्व के साथ बोला जाता है। मां बाप को लगता है कि बेटे को हर सुविधा देना और हर जिम्मेदारी से दूर रखना उनका फर्ज है। लेकिन मनोवैज्ञानिक अब चेतावनी दे रहे हैं कि यही सोच आगे चलकर बच्चों खासकर बेटों के भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस व्यवहार को विशेषज्ञ राजा बेटा सिंड्रोम का नाम दे रहे हैं।

    मनोवैज्ञानिकों के अनुसार राजा बेटा सिंड्रोम कोई मेडिकल बीमारी नहीं बल्कि एक व्यवहारिक स्थिति है। यह तब विकसित होती है जब माता पिता बेटे से कभी जवाबदेही की उम्मीद नहीं करते। उसे घर के कामों से दूर रखा जाता है। उसकी गलतियों को यह कहकर टाल दिया जाता है कि वह अभी बच्चा है। नतीजा यह होता है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर तो बड़ा हो जाता है लेकिन मानसिक परिपक्वता विकसित नहीं हो पाती।

    सोशल मीडिया पर साइकोलॉजिस्ट स्नोई राही का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है। इस वीडियो में उन्होंने इस सिंड्रोम की जड़ पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने एक असल अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह एक घर में गईं जहां एक पूरी तरह वयस्क बेटा सोफे पर लेटा हुआ था। न उसने मेहमान का अभिवादन किया और न ही अपनी जगह से हिला। मां ने प्यार से उसके सिर को चूमा तो उसका जवाब था कि उसे गेम खेलने दिया जाए। यह दृश्य बताता है कि कैसे जरूरत से ज्यादा लाड़ प्यार सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को खत्म कर देता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि राजा बेटा सिंड्रोम का सबसे गहरा असर शादी के बाद सामने आता है। ऐसे पुरुष शादी के बाद भी अपने रोजमर्रा के कामों के लिए पत्नी पर निर्भर रहते हैं। खाना बनाना हो घर संभालना हो या छोटी छोटी जिम्मेदारियां निभानी हों वे अक्सर यह कहकर बच निकलते हैं कि उन्हें यह सब नहीं आता। समस्या यह नहीं कि वे सीख नहीं सकते बल्कि यह है कि उनसे कभी सीखने की उम्मीद ही नहीं की गई।

    इस विषय पर इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई है। कई लोग अपनी निजी कहानियां साझा कर रहे हैं। किसी ने लिखा कि उनके भाई की परवरिश भी बिल्कुल इसी पैटर्न पर हुई है। एक यूजर ने बताया कि एक कामकाजी व्यक्ति हर पंद्रह दिन में अपने गंदे कपड़ों का सूटकेस मां के पास धुलवाने के लिए लेकर आता है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कई बार माता पिता अपनी निजी जिंदगी के खालीपन को भरने के लिए बेटे को जरूरत से ज्यादा केंद्र में रख लेते हैं जिससे आगे चलकर बहू के प्रति असंतोष और टकराव पैदा होता है।

    मनोवैज्ञानिक साफ कहते हैं कि प्यार जरूरी है लेकिन बिना जिम्मेदारी के प्यार नुकसानदेह है। अगर बेटे को हर चीज तैयार मिलती रही तो वह एक सक्षम वयस्क नहीं बन पाएगा। जिम्मेदारी उठाना सीखना आत्मनिर्भर बनने की पहली सीढ़ी है। सही परवरिश वही है जिसमें प्यार और अनुशासन के बीच संतुलन हो ताकि बच्चा सिर्फ राजा बेटा नहीं बल्कि एक जिम्मेदार इंसान बन सके।

  • ई-कचरा नियमन पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के लिए छह देशों के प्रतिनिधि भारत पहुंचे

    ई-कचरा नियमन पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के लिए छह देशों के प्रतिनिधि भारत पहुंचे


    नई दिल्ली।
    देश में आज से 13 फरवरी तक होने वाले ई-कचरा के नियमन और रीसाइक्लिंग (Regulation and Recycling of E-Waste) पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन (International Studies) के लिए छह देशों के प्रतिनिधि भारत (India) पहुंचे हैं। कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) और दूरसंचार विभाग कर रहा है।

    केंद्रीय संचार मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में कोलंबिया, डोमिनिकन गणराज्य, भारत, मलेशिया, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि शामिल हैं। पहले दिन करीब 40 प्रतिभागी मौजूद रहे। संचार मंत्रालय ने बताया कि कार्यक्रम में 09 से 11 फरवरी तक तकनीकी कार्यशाला होगी। इसमें ई-कचरा से जुड़े कानून, उत्पादक की जिम्मेदारी और डिजिटल निगरानी प्रणाली पर चर्चा होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार क्षेत्र में सर्कुलर मॉडल पर भी फोकस रहेगा।

    डिजिटल संचार आयोग के सदस्य रुद्र नारायण पलई ने कहा कि भारत ई-कचरा रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि सही प्रबंधन से हरित रोजगार बनेंगे और कच्चे माल की कमी घटेगी। कोलंबिया के राजदूत डॉ विक्टर ह्यूगो एचेवेरी जारामिलो ने कहा कि यह दौरा केवल तकनीकी कार्यक्रम नहीं है। यह देशों के बीच भरोसा और दीर्घकालिक सहयोग का मंच है।

    दूरसंचार विभाग के सलाहकार शुभेंदु तिवारी ने कहा कि मजबूत नियमों के साथ उद्योग की भागीदारी जरूरी है। आधुनिक रीसाइक्लिंग ढांचे में निवेश पर जोर दिया गया।

    12 फरवरी को प्रतिनिधि राजस्थान के अलवर में स्थित ई-कचरा रीसाइक्लिंग इकाई का दौरा करेंगे। 13 फरवरी को आईटीयू क्षेत्रीय कार्यालय और नवाचार केंद्र का भ्रमण होगा। यह अध्ययन दौरा अक्टूबर 2025 में कोलंबिया में हुए पहले आदान-प्रदान के बाद हो रहा है। अगला अध्ययन दौरा अप्रैल 2026 में दक्षिण अफ्रीका में होगा। उल्लेखनीय है कि दुनिया में हर साल 6.2 करोड़ टन ई-कचर निकलता है। केवल 22.3 प्रतिशतक कचरा ही औपचारिक रूप से एकत्र और रिसाइकिल किया जाता है।

  • भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग

    भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेशम और वस्त्र उद्योग (Indian Silk and Textile Industry) के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के केंद्रीय रेशम बोर्ड और प्रमुख भारतीय उद्यमियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वियतनाम का पांच दिवसीय आधिकारिक दौरा किया।

    वस्त्र मंत्रालय के अनुसार हनोई स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रेशम उत्पादन, हथकरघा और तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

    यात्रा के दौरान, केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त सचिव (तकनीकी) डॉ. नरेश बाबू एन. ने वियतनाम के अग्रणी वस्त्र निर्माता और निर्यातकों में शामिल बिटेक्सको नाम लॉन्ग जॉइंट स्टॉक कंपनी के अध्यक्ष को फाइव-इन-वन सिल्क स्टोल (छोटे शॉल) भेंट कर सम्मानित किया और कंपनी को भारत टेक्स 2026 में भाग लेने का न्यौता दिया। उन्होंने वियतनाम टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन (वीआईटीएएस) को भी भारत टेक्स 2026 के लिए आमंत्रित किया और वियतनाम एसोसिएशन ऑफ क्राफ्ट विलेजेज के साथ हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने, उत्पादों के विकास, ग्राम स्तरीय रेशमी वस्त्र उत्पादन, निर्यात और नीतिगत समर्थन पर चर्चा की। वियतनामी एसोसिएशन ने इस पर सहयोग में गहरी रुचि दिखाई।

    प्रतिनिधिमंडल ने हनोई में भारत के राजदूत शेरिंग वांगचुक शेरपा से मुलाकात कर रेशम और वस्त्र क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर गहन चर्चा की। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच व्यापार-से-व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।

    ​भारतीय दल ने हनोई के ऐतिहासिक वान फुक सिल्क क्राफ्ट विलेज का दौरा किया। यहां के बुनाई, डिजाइन और फैशन के एकीकृत मॉडल का अध्ययन किया गया, जिससे भारत में ‘रेशम उत्पादन-पर्यटन’ मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, दल ने स्वचालित रीलिंग इकाइयों और शहतूत के खेतों का भी निरीक्षण किया।

    ​वियतनाम में आयोजित दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों—वियतनाम इंटरनेशनल वैल्यू चेन एग्जिबिशन 2026 और वियतनाम ग्लोरियस स्प्रिंग फेयर 2026 में केंद्रीय रेशम बोर्ड के स्टॉल भी लगाया गया। भारतीय रेशम उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाया।

    इस यात्रा के समापन पर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और वियतनाम के बीच इस सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आधुनिक सिलाई तकनीकों का आदान-प्रदान होगा, उत्पाद विविधीकरण के नए अवसर मिलेंगे, ​दोनों देशों के बीच संवहनीय विकास और वैश्विक बाजार संबंधों को मजबूती मिलेगी।