2025 का निवेश सिलसिला जारी
वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड
एशिया ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
सभी क्षेत्रों में बढ़त
गिरावट के बावजूद निवेश जारी
निवेश को सहारा देने वाले कारक

2025 का निवेश सिलसिला जारी
वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड
एशिया ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
गिरावट के बावजूद निवेश जारी

अब तक भारत में जमा बीमा के लिए समान दर प्रणाली लागू थी, जो 1962 से चला आ रही थी। इसके तहत सभी बैंक अपने जमा पर प्रति 100 रुपये पर 12 पैसे का प्रीमियम जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम को देते थे। बैंक कितना सुरक्षित है या उसकी वित्तीय स्थिति कैसी है, इसका इस दर पर कोई असर नहीं पड़ता था। आरबीआई का मानना है कि यह व्यवस्था बैंकों को बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित नहीं करती थी, इसलिए इसमें बदलाव जरूरी था।
क्या है नया जोखिम आधारित प्रीमियम मॉडल
नए मॉडल के तहत बैंकों को उनकी वित्तीय सेहत और जोखिम प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके लिए पूंजी पर्याप्तता, एनपीए, लाभप्रदता, तरलता और पर्यवेक्षण रेटिंग जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। अप्रैल 2026 से बैंकों को ए, बी, सी और डी-चार जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। कम जोखिम वाले सुरक्षित बैंक कम प्रीमियम चुकाएंगे, जबकि अधिक जोखिम वाले बैंकों को ज्यादा प्रीमियम देना होगा।
कितनी होगी प्रीमियम दर
सबसे सुरक्षित बैंकों को अब प्रति 100 रुपये जमा पर सिर्फ आठ पैसे का प्रीमियम देना पड़ सकता है, जो मौजूदा दर से करीब 33 फीसदी कम है। श्रेणी बी के बैंक 10 पैसे, श्रेणी सी के बैंक 11 पैसे और श्रेणी डी (सबसे अधिक जोखिम) के बैंक 12 पैसे प्रीमियम का भुगतान करेंगे। इसका सीधा फायदा मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंकों को मिलेगा, जबकि कमजोर बैंकों पर दबाव बढ़ेगा।
बैंकों के जोखिम का आकलन कैसे होगा
जोखिम आकलन के लिए दो मॉडल अपनाए जाएंगे। टियर-1 मॉडल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) पर लागू होगा, जिसमें पर्यवेक्षी रेटिंग, कैमल्स मानक और जमा बीमा कोष पर संभावित नुकसान को आधार बनाया जाएगा। टियर-2 मॉडल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों के लिए होगा, जिसमें मात्रात्मक संकेतकों और संभावित नुकसान पर ध्यान दिया जाएगा।
पुराने और स्थिर बैंकों को अतिरिक्त राहत
आरबीआई ने इस व्यवस्था में एक ‘विंटेज इंसेंटिव’ भी जोड़ा है। जिन बैंकों का रिकॉर्ड लंबे समय तक स्थिर रहा है और जिन पर कोई बड़ा नियामकीय प्रतिबंध या पुनर्गठन नहीं हुआ है, उन्हें अतिरिक्त छूट मिलेगी। यह छूट सालाना एक फीसदी तक हो सकती है और अधिकतम 25 फीसदी तक जा सकती है।
जो बैंक इस ढांचे से बाहर रहेंगे
लोकल एरिया बैंक और पेमेंट्स बैंक जोखिम-आधारित प्रीमियम व्यवस्था से बाहर रहेंगे और पहले की तरह ₹100 जमा पर 12 पैसे की समान दर चुकाते रहेंगे। डेटा सीमाओं के कारण इनके लिए सटीक जोखिम मॉडलिंग संभव नहीं है। कुल प्रीमियम संग्रह में इनका योगदान 1% से भी कम है।
जमाकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
इस बदलाव से जमाकर्ताओं की जमा सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जमा बीमा कवर की सीमा और भुगतान प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। यानी बैंक डूबने की स्थिति में जमाकर्ताओं को मिलने वाली बीमा राशि में कोई कटौती नहीं होगी। हालांकि, मजबूत बैंकों के लिए लागत घटने से आगे चलकर इसका अप्रत्यक्ष लाभ ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम क्या है
जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम, भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था है। यह भारत में बैंक जमाकर्ताओं को जमा बीमा सुरक्षा प्रदान करता है, जो वर्तमान में प्रति जमाकर्ता ₹पांच लाख तक है। जमा बीमा योजना आरबीआई द्वारा लाइसेंस प्राप्त सभी बैंकों (वाणिज्यिक और सहकारी) के लिए अनिवार्य है। 31 मार्च, 2025 तक पंजीकृत बीमित बैंकों की संख्या 1,982 थी।
– आपकी जमा पहले की तरह सुरक्षित रहेगी, जमा बीमा कवर में कोई बदलाव नहीं।
– मजबूत बैंकों में भरोसा और बढ़ेगा।
– बैंक लागत घटने से बढ़ा सकते हैं ब्याज दर, यानी बेहतर एफडी दर और लोन पर कम ब्याज दर।
– कमजोर बैंकों पर बढ़ेगा दबाव।
– बैंक चुनते समय सतर्कता बढ़ेगी।
– बैंकिंग सिस्टम ज्यादा सुरक्षित होगा।

तेहरान में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अपनी परमाणु नीति किसी से डरकर नहीं बदलेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दर्शकों के सामने कहा कि यूरेनियम संवर्धन उनके लिए गैर-समझौते वाला मुद्दा है।अराघची ने कहा, “हम संवर्धन क्यों करते हैं और इसे छोड़ने से इंकार क्यों करते हैं, भले ही युद्ध का खतरा हो? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।”
अमेरिका पर भरोसा नहीं
समझौते के लिए ईरान की शर्तें

बीती रात प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 10.4 डिग्री, इंदौर में 10.6 डिग्री, ग्वालियर में 11.2 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और जबलपुर में 11.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।
प्रदेश के सबसे ठंडे इलाके कटनी का करौंदी और शहडोल का कल्याणपुर रहे। करौंदी में न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री और कल्याणपुर में 6.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा पचमढ़ी, उमरिया और खजुराहो में 8.4 डिग्री, राजगढ़ में 8.5 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, रीवा और मलाजखंड में 9.1 डिग्री, नौगांव में 9.5 डिग्री, मंडला में 9.6 डिग्री और दतिया में 9.8 डिग्री तापमान रहा।
रविवार सुबह ग्वालियर-चंबल अंचल में हल्का कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल कोहरा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। दिन के समय तेज धूप खिलेगी, लेकिन भोपाल, सीहोर, गुना, ग्वालियर, भिंड, मुरैना सहित कई जिलों में सर्द हवाएं चलती रहेंगी। देर रात और तड़के ठंड का असर ज्यादा रहेगा।
आगे कैसा रहेगा मौसम

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे। समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों ने समुद्र से अमृत और कई रत्नों के साथ-साथ हलाहल विष निकाला, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर भारी पड़ने लगा। इस विष को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में हलाहल विष पी लिया, जिससे उनका शरीर जलने लगा। इस संकट की घड़ी में वासुकी ने भी महादेव का साथ दिया और विष के प्रभाव को सहने में उनकी मदद की। वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपने गले में धारण करने का वरदान दिया और तभी से वासुकी अमर हो गए। यही कारण है कि भगवान शिव अपने गले में सांपों की माला धारण करते हैं।
शिव और नाग के इस संबंध का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इन ग्रंथों में शिव-नाग की कथा का विस्तार से वर्णन है और इसे भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शिव के साथ नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष और पितृ दोष से राहत मिलती है। खासकर महाशिवरात्रि या सोमवार के दिन चांदी के नाग-नागिन की जोड़ी अर्पित करने से राहु-केतु शांत होते हैं और जीवन में बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
महाशिवरात्रि के दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और बेलपत्र अर्पित करते हैं। वहीं नाग-नागिन की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। इस महापर्व के दिन भक्त विशेष व्रत रखते हैं और रात भर जागरण करके शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शिव-प्रसाद का आयोजन होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

. इसी महीने में आमलकी एकादशी भी पड़ रही है. इस एकादशी के व्रत से सभी पापों का नाश होता है. फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जानते हैं. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास होता है. इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा से भगवान विष्णु के पूजन का फल मिलता है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि 26 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा.

रेलवे ने जानकारी दी है कि रानी कमलापति से दानापुर के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन (01667) 27 फरवरी और 2 मार्च 2026 को दोपहर 2:25 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 8:45 बजे दानापुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में गाड़ी संख्या 01668 दानापुर से 28 फरवरी और 3 मार्च को सुबह 11:15 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 8:55 बजे भोपाल पहुंचेगी। यह ट्रेन नर्मदापुरम, इटारसी, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।
रीवा और रानी कमलापति के बीच भी साप्ताहिक और द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। गाड़ी संख्या 02192, 28 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे रीवा से चलकर रात 9:15 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी। वापसी में 02191 उसी रात 10:15 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 7:30 बजे रीवा पहुंचेगी। इसी तरह द्वि-साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (02186/02185) 2 और 3 मार्च को चलेगी। इन ट्रेनों का ठहराव सतना, मैहर, कटनी मुड़वारा, दमोह, सागर, बीना और विदिशा स्टेशनों पर रहेगा।
इसके अलावा भोपाल से रीवा के बीच भी एक विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 01704, 5 मार्च को सुबह 10:30 बजे भोपाल से रवाना होकर रात 8:45 बजे रीवा पहुंचेगी। वापसी में 01703 उसी दिन रात 10:20 बजे रीवा से चलकर अगले दिन सुबह 9:05 बजे भोपाल पहुंचेगी। इस ट्रेन का ठहराव भी प्रमुख मध्य प्रदेश के स्टेशनों पर रहेगा।
रेल यात्रियों के लिए एक और बड़ी खबर यह है कि इंदौर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली इंदौर-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20957/20958) का मार्ग बढ़ाकर हरियाणा के हिसार तक कर दिया गया है। यह बदलाव 11 मार्च 2026 से लागू होगा। इसके बाद यह ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की जगह दिल्ली सफदरजंग होते हुए हिसार तक जाएगी। पुराने रूट के लिए बुकिंग 5 मार्च 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी, जबकि नए रूट की बुकिंग जल्द ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शुरू की जाएगी।
नए शेड्यूल के अनुसार गाड़ी संख्या 20957 इंदौर से प्रत्येक बुधवार, शुक्रवार और रविवार को शाम 4:45 बजे रवाना होगी, अगले दिन सुबह 4:52 बजे दिल्ली सफदरजंग और सुबह 9:20 बजे हिसार पहुंचेगी। वहीं गाड़ी संख्या 20958 हिसार से 12 मार्च 2026 से प्रत्येक सोमवार, गुरुवार और शनिवार को दोपहर 1:20 बजे चलेगी, शाम 6:15 बजे दिल्ली सफदरजंग पहुंचेगी और अगले दिन सुबह 6:45 बजे इंदौर पहुंचेगी। यह ट्रेन शकूर बस्ती, रोहतक, महम और हांसी स्टेशनों पर भी रुकेगी, जबकि कोटा, सवाई माधोपुर, भरतपुर और मथुरा जैसे पुराने स्टॉपेज पहले की तरह बने रहेंगे।
इसी बीच अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए उधना-अयोध्या कैंट-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (09093/09094) चलाने का भी निर्णय लिया गया है। यह ट्रेन 13 फरवरी से 27 मार्च 2026 तक हर शुक्रवार को उधना से सुबह 7:25 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 10:30 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन 14 फरवरी से 28 मार्च तक हर शनिवार को दोपहर 2:45 बजे अयोध्या से चलकर अगले दिन शाम 5:15 बजे उधना पहुंचेगी।
यह ट्रेन भरूच, वडोदरा, गोधरा, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, सीहोर, संत हिरदाराम नगर, बीना, झांसी, उरई, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ और बाराबंकी जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इससे भोपाल और सागर संभाग के यात्रियों को भी विशेष सुविधा मिलेगी।

सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई तरह के सवाल रहते हैं, क्या इसका असर जीवन पर पड़ेगा, क्या सावधानी रखनी चाहिए और किन राशियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का सूर्य ग्रहण कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण शाम 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर लगभग रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी।
फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव राशियों पर देखा जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और इसी राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी भी बताई जा रही है। यही कारण है कि इसे सामान्य ग्रहण की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।
ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा का प्रभाव मन, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता, उलझन या थकान का अनुभव हो सकता है, इसलिए इस समय शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।
इस बार सभी 12 राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन कर्क, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।
कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कोई पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। इस समय जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार या निवेश से जुड़े लोगों को नई डील या बड़ा निवेश फिलहाल टाल देना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।
कुंभ राशि में ही यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए इसका प्रभाव इस राशि के जातकों पर ज्यादा देखा जा सकता है। बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण मन में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत निवेश या जल्दबाजी में किया गया लेन-देन नुकसान दे सकता है। मानसिक थकान और तनाव महसूस हो सकता है, ऐसे में योग, ध्यान और परिवार के साथ समय बिताना फायदेमंद साबित हो सकता है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही।
दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना।
शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके।
विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।

कैसे होता है चुनाव
भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।’
RSS में कैसे होता है प्रमोशन
भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।
SC-ST से होगा प्रमुख?
भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है।
मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी
उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं ‘सबसे योग्य उम्मीदवार’ के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।’ भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है’। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।