Author: bharati

  • आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे

    आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे


    पुणे।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग (IAF fighter jet Hard Landing) के कारण आधी रात को पुणे एयरपोर्ट (Pune Airport) ही बंद करना पड़ गया। पुणे एयरपोर्ट पर शुक्रवार की रात को इंडियन एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट की हार्ड लैंडिंग हुई. इसके कारण ही रनवे को बंद कर दिया गया। राहत की बात है कि पायलट सुरक्षित है और किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

    अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारतीय वायुसेना का एक फाइटर जेट के हार्ड लैंडिंग से जुड़ी घटना के बाद शुक्रवार को पुणे एयरपोर्ट का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. उसने कहा कि रनवे को फिर से चालू करने के प्रयास जारी हैं।

    इंडियन एयरफोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘ भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण पुणे का रनवे अस्थायी रूप से बंद है. विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है.’ उसने कहा, ‘रनवे को फिर से चालू करने और जल्द से जल्द सामान्य परिचालन शुरू करने के प्रयास जारी हैं.’

    यह पुणे एयरपोर्ट यानी हवाई अड्डा ‘दोहरे उपयोग वाले मॉडल’ पर काम करता है. इसमें आम नागरिकों की कमर्शियल उड़ानों को एक सक्रिय वायु सेना स्टेशन के साथ जोड़ा जाता है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वायुसेना के एक विमान की ‘हार्ड लैंडिंग’ हुई, लेकिन उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी देने से मना कर दिया।

    पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार की रात करीब 10:25 बजे लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान का अंडरकैरिज (पहिए) खराब हो गया. इसके चलते हार्ड लैंडिंग हुई और फिर पूरा रनवे बंद हो गया. उन्होंने कहा, ‘भारतीय वायुसेना के ATC के अनुसार रनवे को साफ करने और सामान्य परिचालन बहाल करने में 4-5 घंटे लगेंगे.’


    केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा

    केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हवाई अड्डे पर रनवे का परिचालन रोके जाने की पुष्टि की. मुरलीधर मोहोल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘शुक्र है कि विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. एयरलाइंस को सूचित कर दिया गया है और रनवे पर सामान्य परिचालन बहाल करने में लगभग 5 घंटे लग सकते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं हवाई अड्डे के निदेशक और वायु सेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थिति जल्द से जल्द सुलझ जाए।

  • दिनभर AC में रहने से स्किन हो रही ड्राई? ये आसान टिप्स बनाएंगे आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग

    दिनभर AC में रहने से स्किन हो रही ड्राई? ये आसान टिप्स बनाएंगे आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग

    नई दिल्ली : गर्मी से बचने के लिए आजकल लोग ज्यादातर समय एसी (AC) वाले कमरों में बिताते हैं, चाहे ऑफिस हो या घर। ठंडी हवा भले ही राहत देती है, लेकिन इसका सीधा असर हमारी स्किन पर पड़ता है। लगातार एसी में रहने से त्वचा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे स्किन ड्राई, बेजान और खिंची हुई महसूस हो सकती है। कई लोगों को चेहरे पर रूखापन, हल्की सफेद परत और ग्लो कम होने जैसी समस्याएं भी दिखने लगती हैं।

    एसी की ठंडी और सूखी हवा त्वचा की प्राकृतिक नमी को सोख लेती है, जिससे स्किन डिहाइड्रेट हो जाती है। ऐसे में स्किन को सही देखभाल की जरूरत होती है ताकि उसका ग्लो और सॉफ्टनेस बरकरार रहे।

    सबसे पहले स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए एसी में बैठने से पहले और दौरान हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। जेल बेस्ड या हयालूरोनिक एसिड युक्त मॉइश्चराइजर स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करता है और ड्राईनेस को कम करता है।

    दूसरा और सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी पीना। एसी में रहने पर अक्सर प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी स्किन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। दिनभर में पर्याप्त पानी, नारियल पानी और ताजे फलों के जूस का सेवन त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखता है।

    इसके अलावा स्किन को समय-समय पर हल्के फेस मिस्ट या गुलाब जल से रिफ्रेश करना भी फायदेमंद होता है। यह त्वचा को तुरंत ताजगी देता है और ड्राईनेस कम करता है।

    एसी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के लिए स्किन केयर रूटीन को नियमित रखना बेहद जरूरी है। सही देखभाल से न सिर्फ त्वचा का ग्लो बना रहता है, बल्कि वह हेल्दी और सॉफ्ट भी दिखाई देती है।

  • विपक्ष ने दिया BJP को बड़ा चुनावी मुद्दा… LS में पास नहीं होने दिया महिला आरक्षण बिल

    विपक्ष ने दिया BJP को बड़ा चुनावी मुद्दा… LS में पास नहीं होने दिया महिला आरक्षण बिल


    नई दिल्ली।
    महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) के खिलाफ 230 विपक्षी सांसदों (Opposition MPs) ने वोट किया. लोकसभा (Lok Sabha) में बिल पास नहीं हो सका. इसका असर समझें. भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की. विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तो यहां तक कहा था कि क्रेडिट भले ले लीजिए, लेकिन इसे पास होने दीजिए. यानी भाजपा अब हमलावर होगी तो विपक्ष बचाव की मुद्रा में रहेगा. विपक्ष कैसे महिलाओं को समझा पाएगा, यह तो विपक्षी रणनीतिकार ही बता पाएंगे. पर, पहली नजर में विपक्ष इस मुद्दे पर फंसा नजर आता है।


    महिलाएं हित-अहित समझती हैं

    महिलाएं अब 50 साल पहले वाली नहीं रहीं. शिक्षित होने के साथ ही वे हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं. इसे ऐसे समझें। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की कामकाजी (रोजगार + स्वरोजगार) महिलाओं की संख्या लगभग 20 करोड़ (200 मिलियन) के आसपास है, (PLFS 2023-24 के अनुसार). यह संख्या महिलाओं की करीब 50-52 प्रतिशत आबादी में से है. जाहिर है कि कामकाजी महिलाएं थोड़ी-बहुत शिक्षित तो होंगी ही .उन्हें महिला हित-अहित की समझ भी होगी।


    महिलाएं नाराज हो सकती हैं

    अब जरा इन आंकड़ों पर गौर फरमाएं. 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल वोट पड़े थे 64,64,20,869 (लगभग 64.64 करोड़). NDA और INDIA गठबंधन के बीच वोटों का अंतर 1,49,57,501 यानी करीब 1.5 करोड़ का था. NDA को 28,26,68,733 (43.80 प्रतिशत) वोट मिले थे एनडीए ने 293 सीटें जीतीं. विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को 2,67,71,1,232 (41.48 प्रतिशत) वोट मिले. सफलता मिली 234 पर. भाजपा की सीटें 2024 में घट गईं तो उसने ऐसे ही तरीके खोज कर सुधार की कोशिशें शुरू कर दीं।

    भाजपा का योजना बद्ध एक्शन

    2024 और अभी की स्थितियों में कोई बड़ा फर्क नहीं आया है. सिवा इसके कि भाजपा 2814 और 2019 के मुकाबले 2024 में कमजोर पड़ी, लेकिन उसके बाद हुए राज्यों के चुनाव में भाजपा और उसके नेतृत्व में बना एनडीए लगातार जीतता रहा है. एनडीए की लीडर भाजपा ने अपनी कमजोरी खोज कर 2019 से आगे निकलने की रणनीति पर काम कर रही है. विपक्ष अपवाद छोड़ कर आदतन इसे बढ़ाने के बजाय घटाने की जुगत में ही लगा है।

    भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

    करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है. किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता. बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है. अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया. जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

    महिलाएं आरक्षण समझती हैं

    महिलाएं परिसीमन नहीं समझतीं. पुरुषों की तरह ही उन्हें भी सिर्फ इतनी ही समझ है कि इधर-उधर से कांट-छांट कर एमपी-एमएलए की सीट बढ़ जाएंगी. बहुसंख्यक महिलाओं को सियासी दांव-पेंच से क्या मतलब! अलबत्ता वे इसे अधिक समझेंगी कि आरक्षण बिल पास हो जाने पर सैकड़ा 33 महिलाएं विधानसभा और लोकसभा में बढ़ जातीं. 543 सीटों वाली लोकसभा में अभी 74 (13.6 प्रतिशत) महिला सांसद हैं. महिला आरक्षण बिल पास हो जाने पर यह संख्या दोगुनी से अधिक होने की बाध्यता रहती .विपक्ष ने रोड़ा अंटका दिया।

    महिलाओं की ताकत सभी जानते

    विपक्ष महिलाओं की ताकत से अनजान नहीं है. बिहार में नीतीश कुमार के साथ महिलाओं की ताकत का एहसास सभी राजनीतिक दलों को है. जेडीयू की साथी भाजपा भी महिलाओं में उतनी पैठ नहीं बना पाई है. नीतीश ने 2005 से ही महिला वोट बैंक तैयार किया है. यह वोट बैंक इतना मजबूत है कि 2024 के संसदीय चुनाव में जब बड़े-बड़े विश्लेषक और चुनावी पंडित मात खा गए. प्रशांत किशोर भी मात खा गए. जेडीयू में कुछ दिन रहने के बावजूद उन्हें यह भान नहीं हुआ कि नीतीश की असली ताकत आधी आबादी यानी महिलाएं हैं. वे जेडीयू के 5 सीटों पर सिमट जाने की शर्त लगाने लगे. उनके बुढ़ापे का मज़ाक़ उड़ाया जाने लगा. विपक्ष उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार बनाता-बताता रहा. इसके बावजूद नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भाजपा से कम पर लड़ कर भाजपा के बराबर लोकसभा की 12 सीटें जीत लीं।


    राज्यों में दिखी महिलाओं की शक्ति

    दिल्ली, हरियाणा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बंगाल और झारखंड के बाद बिहार में भी विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं की मिली अहमियत उनकी ताकत का इजहार करती है. सबने महिलाओं पर ही दांव लगाया. महिलाओं ने जिन पर ज्यादा भरोसा किया, उन्होंने बाजी मारी ली. बीजेपी ने भी फ्री बीज की रणनीति अपना ली. भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में फ्री बीज से एंटी इनकम्बैंसी को प्रो इनकम्बैंसी बदल दिया. ममता और हेमंत सोरेन महिलाओं की बदौलत ही कामयाब हो पाए. नुकसान की समझ होते हुए भी विपक्ष ने यह मौका गंवा दिया.


    भाजपा के जाल में उलझा विपक्ष

    भाजपा ने बड़े कायदे से महिला आरक्षण के मुद्दे को भुना लिया. जानिए, कैसे भुनाया. भाजपा जानती थी कि यह बिल इतने विवादों में रहा है कि इसका पास होना आठवां आश्चर्य ही होगा. दूसरे कि भाजपा अपनी 2/3 बहुमत न होने की सच्चाई से भी वाकिफ थी .फिर भी बिल पेश कर दिया और इसे सियासी इवेंट बना दिया. विपक्ष भाजपा की इस चाल को समझ नहीं पाया. भाजपा और मोदी विरोध के नाम पर विपक्ष ने बिल का विरोध कर एक जरूरी काम को नकार दिया। विपक्ष का दांव उल्टा पड़ गया.

  • नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा

    नोएडा में श्रमिक सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट…. 1.16 करोड़ जुर्माना भी लगा


    नोएडा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (Noida and Greater Noida) में हाल के श्रमिक प्रदर्शनों, श्रम कानूनों के उल्लंघन और कंपनियों में बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासन ने एक साथ कई बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ श्रम विभाग (Labor Department) ने 24 कंपनियों को मैनपावर सप्लाई करने वाली 203 एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को राहत देते हुए 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि का ऐलान किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जांच में प्रदर्शन के पीछे साजिश और बाहरी कनेक्शन के संकेत भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।


    203 मैनपावर एजेंसियों पर गाज

    श्रम विभाग ने गौतमबुद्ध नगर में श्रम कानूनों का पालन न करने वाली 203 मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ये एजेंसियां 24 कंपनियों में श्रमिक उपलब्ध कराती थीं, लेकिन जांच में सामने आया कि इन्होंने कर्मचारियों को मिलने वाले कई वैधानिक लाभ नहीं दिए।

    इन एजेंसियों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और इनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। श्रमिकों के बकाया भुगतान के लिए 1,16,05,067 रुपये का नोटिस भी जारी किया गया है, जबकि अन्य एजेंसियों की पहचान का काम जारी है।
    राकेश द्विवेदी, अपर श्रमायुक्त


    1 मई से लागू होगी 21 प्रतिशत वेतन वृद्धि

    श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने वेतन बढ़ोतरी की सिफारिश की है। इसके तहत गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत श्रमिकों के वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी और मई में 7 से 10 तारीख के बीच भुगतान किया जाएगा। यह बढ़ोतरी संविदा और स्थायी दोनों प्रकार के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती ही मान्य होगी, इसके अलावा किसी भी अन्य कटौती पर सख्त कार्रवाई होगी।


    सड़कों पर उतरे कर्मचारी

    नोएडा के सेक्टर-8 स्थित एक कंपनी के बाहर शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महिला और पुरुष कर्मचारी कंपनी गेट पर इकट्ठा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया।

    इसी तरह यमुना सिटी के सेक्टर-24ए स्थित एक बड़ी मोबाइल निर्माण कंपनी में भी कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आवाज उठाई। शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली।


    उच्चस्तरीय समिति का दौरा और निरीक्षण

    श्रमिकों के आंदोलन को देखते हुए शासन द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की। समिति के सदस्य डॉ. एमकेएस सुन्दरम ने इकोटेक-3 स्थित एक फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जहां कर्मचारियों को दी जा रही सुविधाओं और स्किल डिवेलपमेंट ट्रेनिंग का जायजा लिया गया। इस दौरान यह भी देखा गया कि किस प्रकार कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।


    प्रदर्शन के पीछे साजिश के संकेत, जांच तेज

    श्रमिक प्रदर्शनों को लेकर पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि यह प्रदर्शन अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ा गया था, जिन्हें तमिलनाडु और कर्नाटक से संचालित किया जा रहा था।

    इन ग्रुपों के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर श्रमिकों को उकसाया गया। सीसीटीवी फुटेज में 8 से 9 संदिग्ध लोगों को हुलिया बदलकर भीड़ में घुसते हुए देखा गया है। जांच में कुछ मोबाइल नंबर नेपाल से जुड़े पाए गए हैं, जबकि अन्य संदिग्ध कनेक्शनों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि कई आरोपियों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।

  • PM मोदी का वैश्विक लोकप्रियता में दबदबा कायम… सर्वे में शीर्ष पर बरकरार…

    PM मोदी का वैश्विक लोकप्रियता में दबदबा कायम… सर्वे में शीर्ष पर बरकरार…


    नई दिल्ली।
    वैश्विक लोकप्रियता सर्वे (Global Popularity Survey) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अभी भी शीर्ष पर बरकरार हैं। अमेरिकी ओपिनियन रिसर्च इंस्टीट्यूट मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से जारी हालिया सर्वेक्षण के नतीजों में यह बात सामने आई है। सर्वे में यह भी कहा गया कि वैश्विक राजनीति में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का दबदबा साबित कर दिया है। करीब 24 लोकतांत्रिक देशों में किए गए इस सर्वे में शामिल 70 फीसदी लोगों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

    सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ अन्य वैश्विक नेताओं की तुलना में काफी ऊंचा है। वहीं, दूसरी ओर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज इस मामले में पिछड़ गए हैं, उन्हें दुनिया का सबसे अलोकप्रिय नेता आंका गया है। इस सूची में दूसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग (63 फीसदी) और तीसरे स्थान पर चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिस (55 फीसदी) रहे। लेकिन मोदी शीर्ष पर रहे।
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    मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में यह भी कहा गया कि एक ओर जहां भारतीय प्रधानमंत्री की वैश्विक स्वीकार्यता और मजबूत हो रही है। वहीं, यूरोप के प्रमुख देशों के नेताओं को जनता के विरोध और अविश्वास का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति की लोकप्रियता का स्तर भी गिर गया है।

    मैक्रों और ट्रंप की स्थिति
    लोकप्रियता के मामले में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दूसरे सबसे अलोकप्रिय नेता हैं, जिनसे 75% जनता असंतुष्ट है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सूची में नीचे से 10वें स्थान पर हैं। ईरान के साथ संघर्ष जैसी चुनौतियों के बावजूद, लगभग 38% अमेरिकियों ने ट्रंप के कामकाज का समर्थन किया है। बता दें, 2025 में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता रेटिंग लगभग 47-51% के बीच थी। अप्रैल 2026 तक इसका स्तर -18 के पास पहुंच गया, जिससे वे आधुनिक समय के सबसे कम लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक बन गए।

  • MP: नीमच में ट्रैक पर रखे पत्थरों से टकराई रतलाम-उदयपुर ट्रेन, जोरदार धमाके से अटकी यात्रियों की सांसें …

    MP: नीमच में ट्रैक पर रखे पत्थरों से टकराई रतलाम-उदयपुर ट्रेन, जोरदार धमाके से अटकी यात्रियों की सांसें …


    नीमच।
    शुक्रवार शाम रतलाम से उदयपुर (Ratlam to Udaipur) जा रही ट्रेन के यात्रियों की सांसें उस वक्त अटक गईं, जब साजिश के तहत ट्रैक पर रखे गए भारी पत्थरों से ट्रेन टकरा गई। तेज रफ्तार ट्रेन के पहियों के नीचे पत्थरों के आने से हुए जोरदार धमाके (Loud bangs) और झटकों से पूरी बोगियां दहल उठीं। गनीमत रही कि ट्रेन की गति अधिक होने के कारण बड़ा हादसा टल गया और इंजन सुरक्षित रहा। घटना के बाद ट्रेन 12 मिनट तक ट्रैक पर खड़ी रही, जिससे यात्रियों में भारी दहशत फैल गई।


    क्या है पूरा मामला

    मिली जानकारी के अनुसार रतलाम से शाम 5:10 बजे रवाना हुई उदयपुर सिटी एक्सप्रेस (Udaipur City Express.) जैसे ही नीमच जिले (Neemuch district) के हरकिया खाल क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी किसी अज्ञात शरारती तत्व द्वारा मुख्य ट्रैक पर रखे बड़े पत्थरों के ट्रेन से टकराकर चकनाचूर होने से तेज धमाका हुआ। आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग भी सहम गए।

    ट्रेन के अचानक झटके से रुकने और तेज धमाके की आवाज सुनकर अंदर बैठे यात्रियों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी सीटों से नीचे गिर गए। महिला और बच्चे घबराकर रोने-चिल्लाने लगे। यात्रियों को लगा कि ट्रेन पटरी से उतर गई है या कोई बड़ा धमाका हुआ है।

    लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद सुरक्षा की जांच की गई। करीब 12 मिनट की मशक्कत और पटरी के मुआयने के बाद जब सब कुछ सामान्य पाया गया, तब जाकर ट्रेन को आगे रवाना किया गया। इस दौरान यात्रियों की सांसें हलक में अटकी रहीं।

    सूचना मिलते ही आरपीएफ और स्थानीय पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है। ट्रैक पर पत्थर किसने रखे और इसके पीछे मंशा क्या थी? यह जांच का विषय है। घटना ने एक बार फिर रेल सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि साजिश रचने वालों की पहचान की जा सके।

  • अक्षय तृतीया 2026 पर बन रहा अक्षय योग इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    अक्षय तृतीया 2026 पर बन रहा अक्षय योग इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    नई दिल्ली । हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला अक्षय तृतीया इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। वर्ष 2026 में इस दिन ‘अक्षय योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशियों में रहेंगे, जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह स्थिति धन, करियर, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम देने वाली मानी जाती है।

    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस शुभ योग का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।

    सबसे पहले मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में उन्नति का संकेत दे रहा है। नौकरी में कार्यों की सराहना होगी और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। हालांकि, थोड़ी आर्थिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन जीवनसाथी के सहयोग से स्थिति संतुलित रहेगी। इस दौरान स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी होगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय राहत और खुशियों से भरा रहने वाला है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों में कमी आएगी और परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है और यात्रा या घूमने का अवसर भी मिल सकता है।

    धनु राशि के लिए यह समय भाग्यवृद्धि का संकेत दे रहा है। कम मेहनत में अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं। छात्रों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी, जबकि जीवनसाथी का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ाएगा। आर्थिक स्थिति में सुधार और नए कार्यों की शुरुआत के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।

    ज्योतिषियों के अनुसार इस अक्षय योग का असर मुख्य रूप से करियर, धन, शिक्षा और पारिवारिक जीवन पर देखने को मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ रिश्तों में मधुरता और मानसिक शांति भी बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर यह समय कई लोगों के लिए नई संभावनाओं और सकारात्मक बदलावों की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।

  • बेसन, दही और हल्दी से बनाएं आसान और असरदार होममेड फेसवॉश..

    बेसन, दही और हल्दी से बनाएं आसान और असरदार होममेड फेसवॉश..

    नई दिल्ली :आजकल स्किन केयर हर किसी की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। लोग अपने चेहरे को साफ, फ्रेश और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए कई तरह के फेसवॉश इस्तेमाल करते हैं, लेकिन केमिकल वाले प्रोडक्ट्स कई बार त्वचा को रूखा या संवेदनशील बना सकते हैं। ऐसे में किचन में मौजूद प्राकृतिक चीजों से बना होममेड फेसवॉश एक सुरक्षित और असरदार विकल्प माना जाता है।

    इस नेचुरल फेसवॉश को बनाने के लिए किसी महंगे प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती। घर में आसानी से मिलने वाली चीजें जैसे बेसन, दही, हल्दी और गुलाब जल त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करती हैं। बेसन स्किन से गंदगी और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है, दही त्वचा को नमी देता है, हल्दी एंटीसेप्टिक गुणों से स्किन को सुरक्षित रखती है और गुलाब जल चेहरे को ताजगी प्रदान करता है।

    इसे बनाने के लिए एक साफ बाउल में दो चम्मच बेसन लें और उसमें एक चम्मच दही मिलाएं। इसके बाद इसमें एक चुटकी हल्दी और थोड़ा सा गुलाब जल डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें। इस बात का ध्यान रखें कि मिश्रण न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा, ताकि इसे आसानी से चेहरे पर लगाया जा सके।

    तैयार फेसवॉश को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाकर एक से दो मिनट तक मसाज करें। इससे त्वचा की गहराई से सफाई होती है और रोमछिद्रों में जमी गंदगी बाहर निकलने में मदद मिलती है। इसके बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें और हल्के हाथों से सुखा लें।

    इस घरेलू फेसवॉश का नियमित उपयोग त्वचा को साफ, मुलायम और नेचुरल ग्लो देने में मदद कर सकता है। यह खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी स्किन संवेदनशील है या जो केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचना चाहते हैं।

  • समर स्किन केयर रूटीन त्वचा को ठंडा और चमकदार रखने के सबसे आसान घरेलू तरीके

    समर स्किन केयर रूटीन त्वचा को ठंडा और चमकदार रखने के सबसे आसान घरेलू तरीके


    नई दिल्ली । गर्मियों में तेज धूप, पसीना और बढ़ती गर्मी त्वचा पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इस मौसम में चेहरा अक्सर चिपचिपा, बेजान और थका हुआ दिखने लगता है। ऐसे में स्किन को ठंडक देना और उसका प्राकृतिक निखार बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू और प्राकृतिक उपाय त्वचा को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

    त्वचा की देखभाल के लिए सबसे पहले आता है एलोवेरा, जिसे एक प्राकृतिक कूलिंग एजेंट माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और हाइड्रेटिंग गुण सनबर्न और जलन को कम करने में मदद करते हैं। धूप से लौटने के बाद ताजा एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को तुरंत राहत मिलती है और रात में लगाने पर यह त्वचा को गहराई से मॉइश्चराइज करता है।

    गर्मियों में त्वचा को ठंडा और फ्रेश रखने के लिए खीरा और गुलाब जल का मिश्रण भी बेहद उपयोगी है। खीरे का रस त्वचा को हाइड्रेट करता है, जबकि गुलाब जल त्वचा के pH संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में भरकर फेस मिस्ट की तरह इस्तेमाल करने से चेहरा पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है।

    मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक भी गर्मियों में ऑयली स्किन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करता है, रोमछिद्रों को साफ करता है और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह त्वचा को ठंडक देकर टैनिंग को भी हल्का करता है।

    त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए दही और शहद का मिश्रण एक बेहतरीन उपाय है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड डेड स्किन को हटाने में मदद करता है, जबकि शहद त्वचा को मुलायम और मॉइश्चराइज करता है। इसे हफ्ते में दो बार लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार देखा जा सकता है।

    इसके साथ ही शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीना और तरबूज, खीरा और संतरा जैसे फलों को डाइट में शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। सही आहार और पर्याप्त पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की चमक पर दिखाई देता है।

    कुल मिलाकर, इन सरल और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर गर्मियों में त्वचा को न केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि बिना किसी खर्च के प्राकृतिक ग्लो भी पाया जा सकता है।

    गर्मियों में तेज धूप, पसीना और बढ़ती गर्मी त्वचा पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इस मौसम में चेहरा अक्सर चिपचिपा, बेजान और थका हुआ दिखने लगता है। ऐसे में स्किन को ठंडक देना और उसका प्राकृतिक निखार बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू और प्राकृतिक उपाय त्वचा को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

    त्वचा की देखभाल के लिए सबसे पहले आता है एलोवेरा, जिसे एक प्राकृतिक कूलिंग एजेंट माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और हाइड्रेटिंग गुण सनबर्न और जलन को कम करने में मदद करते हैं। धूप से लौटने के बाद ताजा एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को तुरंत राहत मिलती है और रात में लगाने पर यह त्वचा को गहराई से मॉइश्चराइज करता है।

    गर्मियों में त्वचा को ठंडा और फ्रेश रखने के लिए खीरा और गुलाब जल का मिश्रण भी बेहद उपयोगी है। खीरे का रस त्वचा को हाइड्रेट करता है, जबकि गुलाब जल त्वचा के pH संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में भरकर फेस मिस्ट की तरह इस्तेमाल करने से चेहरा पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है।

    मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक भी गर्मियों में ऑयली स्किन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करता है, रोमछिद्रों को साफ करता है और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह त्वचा को ठंडक देकर टैनिंग को भी हल्का करता है।

    त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए दही और शहद का मिश्रण एक बेहतरीन उपाय है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड डेड स्किन को हटाने में मदद करता है, जबकि शहद त्वचा को मुलायम और मॉइश्चराइज करता है। इसे हफ्ते में दो बार लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार देखा जा सकता है।

    इसके साथ ही शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीना और तरबूज, खीरा और संतरा जैसे फलों को डाइट में शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। सही आहार और पर्याप्त पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की चमक पर दिखाई देता है। कुल मिलाकर, इन सरल और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर गर्मियों में त्वचा को न केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि बिना किसी खर्च के प्राकृतिक ग्लो भी पाया जा सकता है।

  • विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी

    विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना और कम धूप के संपर्क में आना शरीर में विटामिन D की कमी का बड़ा कारण बन रहा है। हैरानी की बात यह है कि धूप से भरपूर देश में भी बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। विटामिन D हड्डियों की मजबूती, इम्यूनिटी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन इसकी कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक होता है और उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले वे लोग जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं और जिनकी त्वचा पर पर्याप्त धूप नहीं पड़ती। इसके अलावा गहरी त्वचा (डार्क स्किन) वाले लोगों में भी यह कमी अधिक देखी जाती है क्योंकि उनकी त्वचा में मेलेनिन अधिक होने से विटामिन D बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

    50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वहीं मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह विटामिन शरीर की फैट कोशिकाओं में फंस जाता है, जिससे इसकी उपलब्धता कम हो जाती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इसकी अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि इस दौरान शरीर की जरूरतें बढ़ जाती हैं।

    शाकाहारी या वीगन लोगों में भी विटामिन D की कमी आम है क्योंकि इसके प्रमुख प्राकृतिक स्रोत जैसे मछली और अंडे उनके आहार में शामिल नहीं होते। इसके अलावा किडनी या पाचन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में भी शरीर विटामिन D को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे कमी की संभावना बढ़ जाती है।

    विटामिन D की कमी के लक्षणों में लगातार थकान, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग शामिल हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है और इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह या दिन के समय थोड़ी देर धूप लेना, आहार में मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, अंडे की जर्दी और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि सप्लीमेंट लेने से पहले ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है, क्योंकि अधिक मात्रा में विटामिन D शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। कुल मिलाकर, सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर जांच के जरिए विटामिन D की कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।