Author: bharati

  • मीठी तुलसी के चमत्कारी फायदे ,गर्मियों में शरीर को देगी ठंडक और सेहत

    मीठी तुलसी के चमत्कारी फायदे ,गर्मियों में शरीर को देगी ठंडक और सेहत


    नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में तुलसी का विशेष महत्व रहा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मीठी तुलसी भी गुणों से भरपूर एक औषधीय पौधा है। आयुर्वेद में इसे बेहद उपयोगी माना गया है और खासकर गर्मियों में इसका सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

    मीठी तुलसी को स्टीविया के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से मीठी होती है और इसकी मिठास सामान्य चीनी से कई गुना अधिक होती है। खास बात यह है कि इसमें ग्लूकोज या सुक्रोज नहीं होता, इसलिए यह रक्त शर्करा को नहीं बढ़ाती। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीज सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं।

    आयुर्वेद के अनुसार, मीठी तुलसी पित्त को शांत करने में मदद करती है। गर्मियों में जब शरीर में गर्मी और एसिडिटी बढ़ जाती है, तब इसके पत्तों से बना शरबत या काढ़ा पेट को ठंडक देता है और जलन को कम करता है। यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी सहायक होती है।

    मीठा खाने की इच्छा को नियंत्रित करने में भी स्टीविया काफी कारगर है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है, जिससे यह वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है। जो लोग डाइटिंग कर रहे हैं या वजन घटाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प बन सकती है।

    इसके अलावा, मीठी तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो दांतों को कैविटी और सड़न से बचाने में मदद करते हैं। जहां रिफाइंड शुगर दांतों के लिए नुकसानदायक होती है, वहीं स्टीविया एक सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आती है।

    ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी यह उपयोगी मानी जाती है। खासकर गर्मियों में लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर इसका सेवन लाभकारी हो सकता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देती है।

    त्वचा के लिए भी मीठी तुलसी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं कम होती हैं।

    कुल मिलाकर, मीठी तुलसी केवल स्वाद में ही नहीं बल्कि गुणों में भी बेहद समृद्ध है। इसे अपनी डाइट में शामिल कर आप गर्मियों में सेहतमंद और संतुलित जीवन की ओर एक आसान कदम बढ़ा सकते हैं।

  • शुरुआती लोगों के लिए बेस्ट योग रूटीन, रोज 15 मिनट ,में पाएं फिट बॉडी और शांत मन

    शुरुआती लोगों के लिए बेस्ट योग रूटीन, रोज 15 मिनट ,में पाएं फिट बॉडी और शांत मन


    नई दिल्ली । अगर आप योग की शुरुआत करना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं पा रहे कि कौन से आसन से शुरुआत करें, तो आयुष मंत्रालय की सलाह आपके लिए एक बेहतरीन गाइड साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों के लिए ताड़ासन, वज्रासन और भुजंगासन सबसे सरल और प्रभावी योगासन हैं, जिन्हें घर पर आसानी से किया जा सकता है।

    योग विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना केवल 10 से 15 मिनट इन आसनों का अभ्यास करने से शरीर लचीला बनता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। योग की शुरुआत हमेशा धीरे-धीरे करनी चाहिए और सांसों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित अभ्यास से जल्दी ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।

    ताड़ासन योग का सबसे बुनियादी आसन है, जो शरीर को संतुलन और मजबूती देता है। इसमें सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर उठाया जाता है और पूरे शरीर को खींचा जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है, शरीर की मुद्रा सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। शुरुआत में इसे 20 से 30 सेकंड तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

    वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है और शरीर को सीधा रखा जाता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, पेट की समस्याओं में राहत देता है और ध्यान के लिए आदर्श मुद्रा मानी जाती है। शुरुआती लोग इसे 3 से 5 मिनट तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

    भुजंगासन पीठ और रीढ़ के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें पेट के बल लेटकर छाती को ऊपर उठाया जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और तनाव को कम करता है। इसे 15 से 20 सेकंड तक रोककर 3 से 5 बार दोहराना चाहिए।

    इन तीनों आसनों का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आप लंबे समय तक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते हैं।

  • लिवर को रखना है मजबूत, तो डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड फल और पत्ते

    लिवर को रखना है मजबूत, तो डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड फल और पत्ते


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खानपान का सबसे ज्यादा असर हमारे लिवर पर पड़ रहा है, जो शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। लिवर न केवल खून को साफ करता है बल्कि पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है।

    हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को लिवर की सेहत के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय के अनुसार, अगर सही खानपान और प्राकृतिक चीजों को डाइट में शामिल किया जाए तो लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ फल और पत्ते लिवर के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। इनमें सबसे पहले आता है आंवला, जिसे लिवर का सबसे बड़ा दोस्त माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। रोजाना आंवला या इसका जूस पीना बेहद फायदेमंद होता है।

    पपीता भी लिवर के लिए काफी लाभकारी है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और लिवर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा अनार का सेवन लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है और खून को शुद्ध रखने में सहायक होता है।

    अंगूर में पाए जाने वाले प्राकृतिक कंपाउंड लिवर की सूजन को कम करते हैं और उसे डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। वहीं संतरा और नींबू विटामिन सी से भरपूर होते हैं। सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से लिवर को साफ रखने में मदद मिलती है।

    फलों के साथ-साथ कुछ पत्ते भी लिवर के लिए बेहद उपयोगी माने जाते हैं। माकोय के पत्ते आयुर्वेद में लिवर टॉनिक के रूप में जाने जाते हैं और लिवर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। वहीं मोरिंगा के पत्तों में पोषक तत्वों की भरमार होती है, जो लिवर को मजबूत बनाने और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक होते हैं।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि इन प्राकृतिक चीजों को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करें। साथ ही तला-भुना और जंक फूड से दूरी बनाएं, शराब का सेवन सीमित करें, नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। इन आसान आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रखा जा सकता है।

  • 18 अप्रैल का राशिफल: प्रीति योग और अश्विनी नक्षत्र का असर, इन राशियों के रिश्तों में आएगी मिठास

    18 अप्रैल का राशिफल: प्रीति योग और अश्विनी नक्षत्र का असर, इन राशियों के रिश्तों में आएगी मिठास


    नई दिल्ली । आज 18 अप्रैल, शनिवार का दिन है। इस दिन भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन अश्विनी नक्षत्र और प्रीति योग का संयोग बन रहा है, जिसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। कुछ राशियों के लिए दिन शुभ रहेगा, जबकि कुछ को सावधानी बरतने की जरूरत है।

    मेष से मीन तक जानें दिन का हाल-

    मेष राशि
    आज थोड़ा थकान महसूस हो सकती है, लेकिन प्रेम संबंधों में नजदीकियां बढ़ेंगी। काम में लाभ होगा, बस खर्चों पर नियंत्रण रखें। थोड़ा आराम करना फायदेमंद रहेगा।

    वृषभ राशि
    करियर में सुधार दिखेगा और लव लाइफ भी संतुलित रहेगी। ऑफिस में विवाद से बचें और सेहत को नजरअंदाज न करें। शांत स्वभाव दिन को आसान बनाएगा।

    मिथुन राशि
    दिन खुशी और अच्छी खबर लेकर आ सकता है। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। काम में व्यस्तता रहेगी, लेकिन परिणाम आपके पक्ष में रहेगा।

    कर्क राशि

    थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। सेहत का ध्यान रखें और रिश्तों में सोच-समझकर बात करें। धैर्य से हालात बेहतर होंगे।

    सिंह राशि

    आज जोखिम लेने से बचें। परिवार और पार्टनर का सहयोग मिलेगा। काम धीरे-धीरे सही दिशा में बढ़ेगा।

    कन्या राशि
    गले या नाक से जुड़ी परेशानी हो सकती है। काम में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन परिवार का साथ मिलेगा। खानपान पर ध्यान दें।

    तुला राशि
    दिन सामान्य रहेगा, लेकिन पेट संबंधी दिक्कत हो सकती है। काम का दबाव रहेगा और रिश्तों में हल्की खटास आ सकती है। ओवरथिंकिंग से बचें।

    वृश्चिक राशि
    आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। अनावश्यक खर्च या नुकसान हो सकता है। विवादों से दूरी बनाए रखें।

    धनु राशि
    विरोधियों पर बढ़त मिलेगी और काम में अवसर मिलेंगे। मन थोड़ा अस्थिर रह सकता है, इसलिए सकारात्मक सोच बनाए रखें।

    मकर राशि
    मन परेशान रह सकता है और रिश्तों में बहस की स्थिति बन सकती है। बड़े फैसले टालना बेहतर रहेगा। शांति से सोचने पर समाधान मिलेगा।

    कुंभ राशि
    घर में तनाव हो सकता है और मां की सेहत को लेकर चिंता रहेगी। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट बनाकर चलें।

    मीन राशि
    मन में घबराहट रह सकती है और रिश्तों में तनाव आ सकता है। सेहत का ध्यान रखें और खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें।

  • अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ योग सोना खरीदने का सबसे शुभ समय और पूजा तरीका

    अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ योग सोना खरीदने का सबसे शुभ समय और पूजा तरीका


    नई दिल्ली । अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा का फल अक्षय होता है, यानी उसका कभी क्षय नहीं होता। इस वर्ष अक्षय तृतीया 2026 का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर रवि योग, त्रिपुष्कर योग, सौभाग्य योग और आयुष्मान योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि में होने से मालव्य महापुरुष राजयोग और गजकेसरी योग का निर्माण भी हो रहा है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:48 बजे शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। इस अवधि को अत्यंत शुभ माना गया है और इस दौरान किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

    इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और इसका संबंध सतयुग एवं त्रेतायुग की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है। महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को दिया गया अक्षय पात्र भी इसी दिन की महिमा से जुड़ा माना जाता है।

    पूजा विधि के अनुसार घर में चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले कलश स्थापना कर उनका आह्वान करें। गंगाजल से स्नान कराकर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। पीले वस्त्र, फल, मिठाई और विशेष रूप से खीर या सत्तू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद मंत्र जप और आरती करें।

    सोना खरीदने के लिए इस दिन कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। 19 अप्रैल को सुबह 10:49 से 20 अप्रैल की सुबह 05:51 तक सोना खरीदना शुभ माना गया है। इसके अलावा 20 अप्रैल को दोपहर 02:26 से 03:52 तक अमृत मुहूर्त और 02:30 से 03:22 तक विजय मुहूर्त भी बेहद शुभ माना गया है। इस समय किया गया निवेश और खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है।

  • भीमेश्वर मंदिर : प्रकृति और इतिहास का संगम, महाबली भीम ने स्वयं की थी स्थापना..

    भीमेश्वर मंदिर : प्रकृति और इतिहास का संगम, महाबली भीम ने स्वयं की थी स्थापना..

    नई दिल्ली:   कर्नाटक के शिमोगा जिले के सागर क्षेत्र में स्थित भीमेश्वर मंदिर आस्था, प्रकृति और प्राचीन इतिहास का एक अनूठा संगम माना जाता है। घने जंगलों और हरियाली से घिरे पश्चिमी घाट की गोद में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे एक ऐसा स्थान मानते हैं जहां आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य दोनों का अनुभव एक साथ मिलता है।

    इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान पांडवों के अज्ञातवास से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इसी क्षेत्र में पांडवों ने कुछ समय के लिए आश्रय लिया था और इसी दौरान भीम ने यहां भगवान शिव की आराधना से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्थल की स्थापना की थी। इसी मान्यता के कारण इस स्थान का नाम भीमेश्वर पड़ा।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी और भगवान शिव की पूजा के लिए इस स्थल को पवित्र रूप दिया गया था। इसके साथ ही एक मान्यता यह भी है कि अर्जुन ने अपने बाण से यहां एक जलधारा उत्पन्न की थी, जो आज भी एक झरने के रूप में बहती हुई देखी जाती है और मंदिर की पवित्रता को और अधिक विशेष बनाती है। यह जलधारा आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।

    मंदिर का निर्माण काले पत्थरों से किया गया है और इसकी वास्तुकला प्राचीन दक्षिण भारतीय शैली को दर्शाती है। मंदिर परिसर में मजबूत स्तंभों पर बनी आकृतियां और धार्मिक प्रतीक इसकी ऐतिहासिकता को और गहराई प्रदान करते हैं। यहां भगवान शिव के साथ भगवान गणेश, नंदी और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इस स्थल की धार्मिक विविधता को दर्शाती हैं।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसे चालुक्य काल से भी जोड़ा जाता है। समय के साथ यह स्थान प्राकृतिक परिवेश में स्थित होने के कारण अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक पहचान आज भी मजबूत बनी हुई है। यहां सावन माह और शिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    जंगलों के बीच स्थित होने के कारण इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा और ट्रैकिंग का सहारा लेना पड़ता है, जो इसे एक रोमांचक तीर्थ यात्रा का अनुभव भी बना देता है। निकटतम रेलवे स्टेशन से लेकर सड़क मार्ग तक पहुंचने के बाद भी मंदिर तक लगभग दो किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जिससे यह स्थान और अधिक प्राकृतिक और शांत वातावरण में स्थित प्रतीत होता है।

    भीमेश्वर मंदिर आज भी आस्था और प्रकृति के बीच संतुलन का एक जीवंत उदाहरण है, जहां प्राचीन कथाएं, धार्मिक विश्वास और प्राकृतिक सौंदर्य एक साथ मिलकर एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं।

  • ‘उड़ता तीर’ में पहली बार साथ नजर आएंगे सारा अली खान और आयुष्मान खुराना..

    ‘उड़ता तीर’ में पहली बार साथ नजर आएंगे सारा अली खान और आयुष्मान खुराना..

    नई दिल्ली:   बॉलीवुड में एक नई और हाई-एनर्जी एंटरटेनमेंट फिल्म ‘उड़ता तीर’ को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। इस फिल्म में पहली बार सारा अली खान और आयुष्मान खुराना की जोड़ी बड़े पर्दे पर नजर आएगी, जिससे दर्शकों के बीच उत्साह और बढ़ गया है। फिल्म की घोषणा के साथ ही इसकी कहानी और स्टारकास्ट को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बातचीत तेज हो गई है।

    यह फिल्म एक स्पाई कॉमेडी जॉनर पर आधारित है, जिसमें जासूसी की गंभीर दुनिया को हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश किया जाएगा। कहानी में एक्शन और कॉमेडी का मिश्रण देखने को मिलेगा, जिससे इसे एक अलग तरह का सिनेमाई अनुभव माना जा रहा है। आयुष्मान खुराना अपनी अनोखी कॉमिक टाइमिंग और अलग किरदारों के चयन के लिए जाने जाते हैं, जबकि सारा अली खान अपने चुलबुले और एनर्जेटिक अंदाज से कहानी में ताजगी जोड़ती नजर आएंगी।

    फिल्म के जरिए निर्देशक आकाश ए कौशिक निर्देशन की दुनिया में कदम रख रहे हैं। यह उनके करियर का पहला बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसमें उन्होंने कहानी को लिखने और निर्देशित करने दोनों की जिम्मेदारी संभाली है। फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे एक मल्टी-प्रोडक्शन सहयोग के तहत बनाया जा रहा है, जिसमें कई अनुभवी निर्माता जुड़े हुए हैं।

    ‘उड़ता तीर’ की रिलीज डेट भी तय कर दी गई है और यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिलीज डेट सामने आने के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। खासकर आयुष्मान और सारा की नई ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में काफी चर्चा हो रही है।

    इसी साल दोनों कलाकारों की एक और फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ भी रिलीज होने वाली है, जिससे यह साफ है कि यह जोड़ी लगातार दर्शकों के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। लगातार दो प्रोजेक्ट्स में साथ नजर आने से उनकी केमिस्ट्री और स्क्रीन प्रेजेंस को लेकर भी उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    फिल्म ‘उड़ता तीर’ को एक मनोरंजक और ताज़ा कहानी के रूप में देखा जा रहा है, जो दर्शकों को कॉमेडी और स्पाई थ्रिलर का अनोखा मिश्रण देने का वादा करती है।

  • कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

    कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

    नई दिल्ली /बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में हुए भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी सहित कुल 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लंबे समय से चल रहे इस चर्चित प्रकरण में अदालत के फैसले के बाद मामले ने एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। अदालत ने अपने आदेश में इस घटना को गंभीर आपराधिक साजिश से जुड़ा मामला मानते हुए कड़ी सजा का आधार तैयार किया।

    विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और जांच रिपोर्ट यह दर्शाते हैं कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश की भूमिका सामने आई है। अदालत ने विनय कुलकर्णी को इस पूरे प्रकरण का प्रमुख सूत्रधार मानते हुए हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

    यह घटना 15 जून 2016 की है, जब धारवाड़ में भाजपा नेता और जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम परिसर में हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे बढ़ते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा। विस्तृत जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया और अदालत में सुनवाई शुरू हुई।

    विनय कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। हालांकि वर्ष 2025 में अदालत ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के आरोपों और सबूतों की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया और तेज हो गई थी।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार की संगठित आपराधिक गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। इसलिए दोषियों को कठोर सजा देना आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    सभी दोषियों को हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ आर्थिक दंड भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित धाराओं में अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गई हैं, जो कानून के अनुसार साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मृतक के परिवार को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।

    इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वर्षों पुराने इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है।

  • भारत श्रीलंका रिश्तों में नया अध्याय उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दो दिवसीय यात्रा पर

    भारत श्रीलंका रिश्तों में नया अध्याय उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दो दिवसीय यात्रा पर


    नई दिल्ली ।
    भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 19 और 20 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका जाएंगे। यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह उपराष्ट्रपति के रूप में उनका पहला द्विपक्षीय श्रीलंका दौरा होगा और इससे दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    इस दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री डॉ हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह अन्य वरिष्ठ नेताओं अधिकारियों और श्रीलंका में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे।

    भारत और श्रीलंका के संबंध ऐतिहासिक सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद मजबूत रहे हैं। श्रीलंका भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” और “विजन महासागर” नीति का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में यह दौरा हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करेगा।

    इस बीच वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की स्थिति ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका असर श्रीलंका पर भी पड़ा जहां ईंधन संकट की स्थिति बनने लगी थी। ऐसे समय में भारत ने आगे बढ़कर मदद करते हुए 38 000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति की जिससे श्रीलंका को राहत मिली।

    भारत की इस सहायता के लिए श्रीलंका के नेताओं ने आभार व्यक्त किया। सांसद नमल राजपक्षे ने भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत संकट के समय हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने श्रीलंका सरकार को भारत की आर्थिक नीतियों विशेष रूप से फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट मॉडल को अपनाने की सलाह भी दी।

    वहीं राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत हुई थी जिसमें उन्होंने ईंधन संकट की स्थिति साझा की थी और भारत ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई। कुल मिलाकर उपराष्ट्रपति का यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह दोनों देशों के बीच सहयोग विश्वास और साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी

    सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी

    नई दिल्ली: झारखंड में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 90 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस भर्ती का उद्देश्य राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभागों में शिक्षकों की कमी को पूरा करना और उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।

    जारी जानकारी के अनुसार इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 अप्रैल 2026 से शुरू होगी और उम्मीदवार 12 मई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 14 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में पात्र उम्मीदवारों से ऑनलाइन माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित सुपर स्पेशियलिटी विषय में डीएम, एमसीएच या डीएनबी जैसी उच्च स्तरीय योग्यता होना अनिवार्य है। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा के लिए निर्धारित अन्य मानकों को भी पूरा करना आवश्यक होगा। यह नियुक्तियां राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में की जाएंगी, जिससे शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार संभव हो सकेगा।

    आयु सीमा के अनुसार न्यूनतम आयु 30 वर्ष रखी गई है, जबकि अधिकतम आयु श्रेणी के अनुसार निर्धारित नियमों के तहत अलग अलग होगी। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी, जिससे अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।

    चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और साक्षात्कार के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और इंटरव्यू प्रदर्शन को प्रमुख आधार माना जाएगा।

    यह भर्ती चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे सुपर स्पेशियलिटी विभागों में विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे न केवल मेडिकल कॉलेजों की क्षमता में सुधार होगा बल्कि छात्रों को बेहतर और उन्नत प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सकेगा।