Author: bharati

  • ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी हादसा सरकार बोली सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर

    ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी हादसा सरकार बोली सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी में लगी आग के बाद ईंधन आपूर्ति को लेकर उठी चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस घटना का देश की फ्यूल सप्लाई पर बहुत कम असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि रिफाइनरी में लगी आग गंभीर जरूर थी, लेकिन उत्पादन काफी हद तक सामान्य बना हुआ है।

    प्रधानमंत्री अल्बानीज अपने ब्रुनेई और मलेशिया के आधिकारिक दौरे को बीच में छोड़कर वापस लौटे और Viva Energy की रिफाइनरी का निरीक्षण किया। यह रिफाइनरी जिलॉन्ग शहर के पास स्थित है, जो मेलबर्न से करीब 65 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है।

    बताया गया कि बुधवार रात उपकरण में खराबी के कारण रिफाइनरी में आग लग गई थी, जिसे गुरुवार दोपहर तक काबू में कर लिया गया। घटना के समय को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि उसी समय मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से प्रभावित है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की स्थिति नियंत्रण में है।

    रिफाइनरी के दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में अल्बानीज ने बताया कि डीजल और एविएशन फ्यूल का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन जारी है। वहीं पेट्रोल उत्पादन, जो देश की कुल सप्लाई का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा देता है, फिलहाल 60 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है और आने वाले दिनों में इसके बढ़ने की उम्मीद है।

    सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही शनिवार को फ्यूल स्टॉकपाइल के स्तर को लेकर नियमित साप्ताहिक अपडेट भी जारी किया जाएगा, जिससे स्थिति पर नजर रखी जा सके।

    गौरतलब है कि यह रिफाइनरी ऑस्ट्रेलिया की केवल दो सक्रिय रिफाइनरियों में से एक है, इसलिए इस तरह की घटना का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि शुरुआती आशंकाओं के विपरीत, उत्पादन पर सीमित असर की खबर ने राहत दी है। फायर और रेस्क्यू अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की वजह तकनीकी खराबी थी और घटना की जांच जारी है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा..

    वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा..


    नई दिल्ली:   क्रिकेट जगत में इन दिनों युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। अपनी आक्रामक और निडर बल्लेबाजी के दम पर उन्होंने कम समय में ही क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में उनके प्रदर्शन को देखकर पूर्व क्रिकेट प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ व्यक्ति ने उनकी प्रतिभा की जमकर तारीफ की, लेकिन साथ ही उनकी उम्र को लेकर भी हैरानी जताई। उनके अनुसार जिस तरह की परिपक्वता और ताकत के साथ वैभव बल्लेबाजी कर रहे हैं, वह उनकी बताई गई उम्र से कहीं अधिक अनुभवपूर्ण नजर आती है।

    इस बयान में यह भी कहा गया कि वैभव सूर्यवंशी का बल्लेबाजी अंदाज बेहद आक्रामक है और वह बड़े शॉट्स खेलने में किसी भी तरह की हिचक नहीं दिखाते। उनकी टाइमिंग और पावर हिटिंग क्षमता ने उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग पहचान दी है। खास बात यह है कि इतनी कम उम्र में दबाव भरे माहौल में भी उनका आत्मविश्वास लगातार बना रहता है, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

    हालांकि इसी तारीफ के बीच उनकी उम्र को लेकर उठी टिप्पणी ने चर्चा को और बढ़ा दिया है। यह सवाल इसलिए उठा क्योंकि उनका खेल स्तर और मैदान पर उनका व्यवहार काफी परिपक्व नजर आता है। इस तरह की टिप्पणियों ने सोशल मीडिया और क्रिकेट सर्कल में नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर लोग उनकी प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनकी उम्र और विकास को लेकर अलग अलग राय सामने आ रही है।

    वैभव सूर्यवंशी ने अपने छोटे से करियर में ही यह संकेत दे दिया है कि वह लंबे समय तक क्रिकेट में बड़ा नाम बन सकते हैं। उनकी बल्लेबाजी में निडरता और आक्रामकता का जो मिश्रण देखने को मिलता है, वह आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग के अनुरूप माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उन्हें सही मार्गदर्शन और निरंतर अवसर मिलते रहे तो वह आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के प्रमुख चेहरों में शामिल हो सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि आईपीएल जैसे मंच युवा खिलाड़ियों के लिए कितना बड़ा अवसर बन सकता है, जहां वे अपनी प्रतिभा के दम पर रातोंरात चर्चा में आ जाते हैं और क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना लेते हैं।

  • शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार

    शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार


    कटनी । कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम खमरिया में शिक्षा को लेकर एक पुरानी घोषणा आज भी अधूरी पड़ी है। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनदर्शन यात्रा के दौरान गांव में हाई स्कूल खोलने की घोषणा की थी, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी यह घोषणा जमीन पर उतरती नजर नहीं आई।

    तहसील मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में हाई स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बेटियों की शिक्षा पर इसका अधिक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कई परिवारों को मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    गांव में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ा कि पिछले विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार तक कर दिया था। उस समय भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने गांव पहुंचकर लोगों को आश्वासन दिया था कि चुनाव जीतने के बाद स्कूल खोलना उनकी प्राथमिकता होगी।

    विधायक बनने के बाद उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कटनी से लेकर भोपाल तक कई बार पत्राचार किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर मामला विधानसभा में भी उठाया। वहीं शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह भी पिछले कुछ वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग करती रही हैं।

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अधिकारियों की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकार की छवि प्रभावित होती है और जनता का विश्वास कमजोर होता है।

    इस मामले पर विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि उन्होंने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है और हाल ही में शिक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद आश्वासन मिला है कि आगामी नए शैक्षणिक सत्र में खमरिया में हाई स्कूल शुरू कर दिया जाएगा।

    वहीं शिक्षा विभाग के जबलपुर संभाग के संयुक्त संचालक अरुण इंगले ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाएगी और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।

    यह मामला न केवल एक अधूरी सरकारी घोषणा का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी किस तरह बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से लंबित यह वादा कब तक हकीकत में बदलता है।

  • ‘सन ऑफ सरदार 2’ को लेकर मृणाल ठाकुर के खुलासे से फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा तेज..

    ‘सन ऑफ सरदार 2’ को लेकर मृणाल ठाकुर के खुलासे से फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा तेज..

    नई दिल्ली:   बॉलीवुड अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने अपनी फिल्म ‘सन ऑफ सरदार 2’ को लेकर एक अनुभव साझा किया है, जिसमें उन्होंने शूटिंग प्रक्रिया और किरदार से जुड़ी कुछ परिस्थितियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनके अनुसार फिल्म के निर्माण के दौरान कुछ फैसलों की जानकारी उन्हें शुरुआती स्तर पर पूरी तरह नहीं दी गई थी, जिससे बाद में उन्हें अपने किरदार को लेकर अलग तरह का अनुभव महसूस हुआ।

    अभिनेत्री ने बताया कि फिल्म में उनके ऑन-स्क्रीन पति के किरदार को लेकर जो चयन किया गया, वह उनके लिए पहले से स्पष्ट नहीं था। जब उन्हें बाद में इस बारे में जानकारी मिली, तो उन्हें लगा कि यह उनके किरदार की सोच और अपेक्षाओं से अलग दिशा में था। इस कारण उन्होंने इसे एक असहज अनुभव के रूप में महसूस किया।

    मृणाल ठाकुर ने यह भी संकेत दिया कि फिल्म के कुछ हिस्सों में बाद में बदलाव किए गए, जिससे उनके किरदार की स्क्रीन पर मौजूदगी पर असर पड़ा। इन परिवर्तनों के कारण कहानी में उनके रोल की गहराई अपेक्षाकृत कम हो गई, जिससे उन्हें थोड़ी निराशा हुई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर प्रोजेक्ट में ऐसे अनुभव सीखने का हिस्सा होते हैं।

    ‘सन ऑफ सरदार 2’ एक मल्टीस्टारर फिल्म है जिसमें कॉमेडी और इमोशनल ड्रामा का मिश्रण देखने को मिलता है। कहानी रिश्तों, गलतफहमियों और परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव पर आधारित है, जिसमें हर किरदार का अपना महत्व है। मृणाल ठाकुर का किरदार भी कहानी के भावनात्मक पहलू को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाता है।

    इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग प्रक्रिया और कलाकारों के साथ संवाद को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है। माना जा रहा है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी कलाकारों के प्रदर्शन और अनुभव दोनों को बेहतर बना सकती है।

  • नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट

    नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट


    नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह प्रेरणा और उत्साह का केंद्र बन गया। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में जिले में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले 52 विद्यार्थियों को जिला पंचायत सभागार में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विधायक डॉ सीताशरन शर्मा मौजूद रहे।

    कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राधा पटेल, जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र चौकसे और सीईओ हिमांशु जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे बड़ा अस्त्र है, जो व्यक्ति को हर चुनौती से लड़ने की क्षमता देता है। उन्होंने कहा कि 10वीं कक्षा जीवन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव होती है, जहां से भविष्य की नींव मजबूत होती है। इसके बाद 12वीं, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

    विधायक डॉ सीताशरन शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा जीवन के दो बड़े टर्निंग पॉइंट होते हैं। 10वीं के बाद विषयों का चयन और 12वीं के बाद करियर का निर्णय व्यक्ति के पूरे भविष्य को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता से उनके परिवारों में गर्व और खुशी का माहौल है।

    इस वर्ष के परीक्षा परिणामों में खास बात यह रही कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद इन छात्रों ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता हासिल की, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

    पथरौटा के सरकारी स्कूल की छात्रा रितिका कुरुचि ने 12वीं होम साइंस में टॉप कर एक मिसाल पेश की। माता-पिता के साये के बिना दादा-दादी और चाचा-चाची के सहयोग से पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। वहीं तारारोड़ा गांव की आंशिक सराठे ने आर्ट्स संकाय में 93.2 प्रतिशत अंक लाकर पहला स्थान प्राप्त किया। उनके पिता सैलून चलाते हैं, जिससे यह सफलता और भी प्रेरणादायक बन जाती है।

    उत्कृष्ट विद्यालय की शेख जोया ने आर्ट्स में दूसरा स्थान हासिल किया, जिनके पिता बाइक मैकेनिक हैं। गणित में अवनी गोहिया और रशिका राय, विज्ञान में आदित्य लोवंशी और नमामि बसेड़िया, कृषि में कनक चौरे और कॉमर्स में निखिल सोनी तथा शिफा शाह ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। 10वीं कक्षा में नैना यादव, सोनम परिहार और प्रिंसी साहू टॉपर रहीं।

    जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी नारायण प्रजापति के अनुसार, जिले का 10वीं का परिणाम 78 प्रतिशत और 12वीं का 81 प्रतिशत रहा, जिससे नर्मदापुरम को प्रदेश में 16वीं रैंक प्राप्त हुई है। यह समारोह केवल सम्मान का मंच नहीं बल्कि उन संघर्षों और सफलताओं की कहानी भी है, जो यह बताती हैं कि मेहनत और संकल्प से किसी भी परिस्थिति को पार किया जा सकता है।

  • बैंकिंग शेयरों में दबाव और कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार पर बना रहा नकारात्मक असर

    बैंकिंग शेयरों में दबाव और कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार पर बना रहा नकारात्मक असर

    नई दिल्ली: वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। निवेशकों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के इंतजार का असर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए।

    शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ 77,976 के स्तर के आसपास खुला, जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ 24,166 के करीब पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे निवेशकों का रुख पहले से ही सतर्क बना हुआ था और बाजार में भरोसे की कमी दिखाई दी।

    बाजार की इस कमजोरी का असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ा, जहां प्रमुख बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश रणनीति अपना रहे हैं। वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने बाजार की चाल को और कमजोर किया।

    वैश्विक स्तर पर भी मिश्रित संकेत देखने को मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है, जहां कई प्रमुख सूचकांक कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर दिखाई नहीं दिया।

    कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत का संकेत है। इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और बाजार में सतर्कता बनी हुई है।

    डॉलर की मजबूती भी बाजार पर दबाव बना रही है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे उभरते बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है।

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन निवेशक अभी भी किसी ठोस परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। प्रमुख देशों के बीच चल रही बातचीत का सीधा असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है, इसलिए बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और सोच-समझकर निवेश निर्णय लें।

  • लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर निशिकांत दुबे का तंज, बोले माइकल जैक्शन का डांस याद आ गया’

    लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर निशिकांत दुबे का तंज, बोले माइकल जैक्शन का डांस याद आ गया’


    नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल पर मतदान से पहले लोकसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जाति जनगणना को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उनके भाषण पर तीखा कटाक्ष किया।

    निशिकांत दुबे ने साधा निशाना

    इस पर जवाब देते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब जातिगत जनगणना क्यों नहीं कराई गई। साथ ही उन्होंने पुराने परिसीमन और नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले इसका विरोध किया था। राहुल गांधी के भाषण पर तंज कसते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि महिला मुद्दों पर गंभीर चर्चा सुनने को मिलेगी लेकिन भाषण देखकर उन्हें माइकल जैक्शन का डांस याद आ गया।

    अखिलेश यादव से हुई तीखी नोकझोंक

    बहस के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी हस्तक्षेप किया और दुबे से कहा कि वे इतिहास में ज्यादा न जाएं और मुद्दे पर बात करें। इस पर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वे कन्नौज में एक मंदिर गए थे और उनके लौटने के बाद मंदिर को गंगाजल से धुलवाया। निशिकांत दुबे ने कहा कि जिसने भी ऐसा किया वो गलत है और मंदिर धुलवाने वाले को कानून के हिसाब से सजा मिलनी चाहिए।

    निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक जातिगत जनगणना के खिलाफ रही है। उन्होंने सोनिया गांधी और पी. चिदंबरम के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने पहले इस मुद्दे को संविधान और सामाजिक एकता के खिलाफ बताया था।

  • संगीतकार ने गरारे की ध्वनि को रिकॉर्ड करके फिल्म का सबसे यादगार और डरावना पार्श्व संगीत तैयार किया था।

    संगीतकार ने गरारे की ध्वनि को रिकॉर्ड करके फिल्म का सबसे यादगार और डरावना पार्श्व संगीत तैयार किया था।


    नई दिल्ली: 
     भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल शानदार कहानियों और अभिनय तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे तकनीकी नवाचारों और संगीत की अद्भुत दुनिया छिपी हुई है। अस्सी के दशक की एक ऐसी ही कल्ट क्लासिक फिल्म ने दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। इस फिल्म में नायक के एक नकारात्मक और रहस्यमयी हमशक्ल पात्र के पर्दे पर आगमन के समय बजने वाले डरावने पार्श्व संगीत ने उस दौर में सिनेमाघरों में बैठे लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। दशकों तक इस विशिष्ट ध्वनि को लेकर फिल्म प्रेमियों के मन में कौतूहल बना रहा कि इसे किस आधुनिक वाद्य यंत्र या तकनीक से बनाया गया होगा। अब इस संगीत के पीछे की वास्तविकता सामने आई है जो यह स्पष्ट करती है कि एक महान कलाकार के लिए पूरी दुनिया ही संगीत का एक मंच है और वह साधारण वस्तुओं से भी असाधारण कला का सृजन कर सकता है।

    फिल्म में जब उस खूंखार पात्र का प्रवेश होता है तो पृष्ठभूमि में एक अजीब सी गूंज और कंपन सुनाई देता है जो दर्शकों के मन में भय का संचार करता है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि यह किसी विदेशी तकनीक या महंगे सिंथेसाइज़र का परिणाम है। वास्तविकता यह है कि संगीत जगत के उस दिग्गज जादूगर ने इस भयावह प्रभाव को पैदा करने के लिए किसी पारंपरिक साज का सहारा नहीं लिया था। उन्होंने इस ध्वनि को उत्पन्न करने के लिए पानी के साथ गरारे करने की क्रिया का उपयोग किया था। संगीतकार ने गरारे करते समय निकलने वाली आवाज को रिकॉर्ड किया और फिर उसे अपनी संगीत समझ के साथ इस तरह ढाला कि वह सिनेमाई इतिहास का सबसे चर्चित और डरावना बैकग्राउंड स्कोर बन गया। यह प्रयोग उनकी उस मौलिक सोच को दर्शाता है जहां वे रोजमर्रा की ध्वनियों में भी संगीत ढूंढ लेते थे।

    पंचम दा के नाम से मशहूर इस संगीतकार की यह विशेषता रही थी कि वे हमेशा लीक से हटकर सोचने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में कई बार कांच की बोतलों को टकराने रसोई के बर्तनों या फिर कागज फटने जैसी ध्वनियों को सुपरहिट गीतों का हिस्सा बनाया था। इस विशेष फिल्म के लिए उन्होंने गरारे की आवाज को इसलिए चुना क्योंकि वे उस नकारात्मक पात्र की क्रूरता और रहस्य को एक अलग पहचान देना चाहते थे। जब इस रचनात्मक रहस्य का खुलासा हुआ तो संगीत के जानकार भी हैरान रह गए। यह किस्सा आज भी फिल्म निर्माण की कक्षाओं में एक उदाहरण के रूप में सुनाया जाता है कि कैसे एक कलाकार अपनी कल्पनाशीलता के बल पर बहुत ही सीमित और साधारण संसाधनों से वैश्विक स्तर का प्रभाव पैदा कर सकता है।

    उस समय के सिनेमा में अमिताभ बच्चन जैसे महानायक की उपस्थिति फिल्म के हर पक्ष से सर्वश्रेष्ठ की मांग करती थी। संगीतकार ने इस मांग को बखूबी समझा और न केवल मधुर गीतों की रचना की बल्कि पार्श्व संगीत के जरिए फिल्म के तनावपूर्ण दृश्यों में प्राण फूंक दिए। नायक के सौम्य व्यक्तित्व और उसके खतरनाक हमशक्ल के बीच का मानसिक द्वंद्व पर्दे पर स्पष्ट करने में इस डरावनी ध्वनि का बहुत बड़ा योगदान था। आज के आधुनिक दौर में जहां कंप्यूटर के जरिए लाखों तरह की ध्वनियां बनाई जा सकती हैं वहां अस्सी के दशक के ये मौलिक प्रयोग यह याद दिलाते हैं कि तकनीक केवल एक साधन है असली जादू तो कलाकार के मस्तिष्क और उसकी रचनात्मकता में होता है।

    सिनेमा की यह विरासत हमें यह संदेश देती है कि महान कलाकृतियां केवल महंगे उपकरणों की मोहताज नहीं होतीं। कभी-कभी एक साधारण विचार और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग ही इतिहास रचने के लिए काफी होता है। दशकों बीत जाने के बाद भी जब दर्शक उस फिल्म के उस विशेष दृश्य को देखते हैं तो वही पुराना रोमांच महसूस करते हैं। यह कहानी न केवल एक संगीतकार की सफलता को बयां करती है बल्कि भारतीय फिल्म संगीत के उस स्वर्णिम काल को भी समर्पित है जहां कलाकार नए-नए प्रयोगों से दर्शकों को आश्चर्यचकित करने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देते थे।

  • महिला आरक्षण पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, कहा- यह असली वुमन बिल नहीं, दादी इंदिरा का किया जिक्र

    महिला आरक्षण पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, कहा- यह असली वुमन बिल नहीं, दादी इंदिरा का किया जिक्र

    नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए एक निजी अनुभव साझा किया और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में डर का सामना करना सिखाया था।

    सुनाया बचपन का किस्सा

    राहुल गांधी ने बताया कि बचपन में एक बार उनकी दादी उन्हें घर से बाहर ले गईं और कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया। वहां मौजूद कुत्तों और लोगों के कारण वे डर गए थे। जब इंदिरा गांधी वापस आईं और उन्होंने अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने समझाया कि डर असल में उनके मन में था। राहुल ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें जिंदगी में डर से लड़ना सिखाया।

    महिलाओं से हर कोई सीखता है

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में महिलाओं से सीखता है चाहे वह मां हो बहन हो या अन्य कोई भूमिका। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई कड़वी होती है लेकिन उसका सामना करना जरूरी है। हालांकि उन्होंने मौजूदा महिला आरक्षण विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तव में महिलाओं के हितों का बिल नहीं है।

    विधेयक की मंशा पर उठाए सवाल

    राहुल गांधी ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने संकेत दिया था कि इसे 10 साल बाद लागू किया जा सकता है। उनके अनुसार यह महिलाओं को तत्काल लाभ देने वाला कदम नहीं है।

    चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश

    कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश के इलेक्टोरल मैप को बदलने की कोशिश की जा रही है जो महिला आरक्षण के मूल मुद्दे से अलग है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा राजनीतिक सवाल है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    जाति जनगणना का भी उठाया मुद्दा

    लोकसभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने इस पर बात तो की लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इसके आंकड़ों का उपयोग आरक्षण तय करने में होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है तो कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी।

    सरकार पर डर की राजनीति का आरोप

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार डर की राजनीति कर रही है और देश की राजनीतिक संरचना को बदलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों को उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम होने का संकेत दिया जा रहा है जिसे विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दलित और ओबीसी समुदायों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी ने अंत में कहा कि उनकी पार्टी देश के लोगों के प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी वर्ग के अधिकारों पर आंच नहीं आने दी जाएगी और हर हमले का मजबूती से विरोध किया जाएगा।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड निवेश में पारदर्शिता और सुविधा का बढ़ता रुझान..

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड निवेश में पारदर्शिता और सुविधा का बढ़ता रुझान..


    नई दिल्ली :
     अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सोना खरीदने की पारंपरिक परंपरा अब डिजिटल रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसी कड़ी में एक प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने अपने यूजर्स को 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीदने का आसान और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराया है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो बिना किसी भौतिक झंझट के निवेश करना चाहते हैं और तकनीक के माध्यम से अपनी बचत को बढ़ाना चाहते हैं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूजर्स 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाला डिजिटल गोल्ड सीधे ऐप के माध्यम से खरीद सकते हैं। यह गोल्ड विश्वसनीय और प्रमाणित प्लेटफॉर्म्स के जरिए उपलब्ध कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इस व्यवस्था के तहत ग्राहकों को भरोसेमंद निवेश का अनुभव मिलता है और उन्हें गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती।

    डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए कई पेमेंट विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और वॉलेट जैसे माध्यम शामिल हैं। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को उनकी सुविधा के अनुसार भुगतान करने की स्वतंत्रता देती है और पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाती है।

    इस प्लेटफॉर्म की एक खास विशेषता यह है कि ग्राहक बहुत छोटी राशि से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। मात्र 10 रुपये से शुरुआत कर धीरे धीरे निवेश बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा नियमित निवेश के लिए दैनिक या मासिक आधार पर निवेश करने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ता समय के साथ अपनी बचत को व्यवस्थित तरीके से बढ़ा सकते हैं।

    डिजिटल गोल्ड की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी लिक्विडिटी है। उपयोगकर्ता जब चाहें अपना गोल्ड बेच सकते हैं और राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकते हैं। इससे यह निवेश पारंपरिक सोने की तुलना में अधिक लचीला और सुविधाजनक बन जाता है।

    देशभर में बड़ी संख्या में लोग इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, जिससे डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। यह विकल्प विशेष रूप से उन लोगों के बीच तेजी से स्वीकार किया जा रहा है जो डिजिटल माध्यमों के जरिए निवेश करना पसंद करते हैं।

    अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर यह सुविधा पारंपरिक विश्वास और आधुनिक तकनीक का संतुलित मेल प्रस्तुत करती है, जहां लोग आसानी से सुरक्षित निवेश कर सकते हैं और अपनी वित्तीय योजनाओं को मजबूत बना सकते हैं।