Author: bharati

  • खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस

    खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस


    कुशीनगर । कुशीनगर जिले में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अभियान को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा था उसी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन ने पूरे मामले को अचानक सुर्खियों में ला दिया है

    और इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से जिले में अवैध खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा था जिसमें नदी घाटों से लेकर खनन के संभावित और संदिग्ध क्षेत्रों तक लगातार छापेमारी की जा रही थी।

    इस दौरान बिना वैध परमिट चल रहे वाहनों और ओवरलोड ट्रकों पर भी सख्त कार्रवाई की गई थी जिससे अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क में हड़कंप की स्थिति बन गई थी। खासकर बिहार सीमा से आने वाले ट्रकों पर निगरानी बढ़ाए जाने के बाद इस अवैध कारोबार पर प्रशासन का दबाव काफी बढ़ गया था और कई स्थानों पर जुर्माना जब्ती और कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।

    इन कार्रवाइयों के चलते यह संकेत मिल रहा था कि प्रशासन इस बार अवैध खनन के खिलाफ पूरी सख्ती के मूड में है। लेकिन इसी बीच अचानक अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन की कार्रवाई ने पूरे अभियान की दिशा और उसकी मंशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि जब अवैध खनन पर कार्रवाई का असर साफ तौर पर दिखाई देने लगा था

    और माफिया नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा था तो ऐसे समय में कार्रवाई करने वाले अधिकारी को ही क्यों हटाया गया। जनपद में यह भी माना जा रहा है कि अवैध खनन का यह पूरा कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक तंत्र और प्रभावशाली संरक्षण का नेटवर्क सक्रिय रहता है जो लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को संचालित और सुरक्षित करता आया है।

    ऐसे में जब किसी अधिकारी की सख्ती से करोड़ों के इस अवैध कारोबार पर सीधा असर पड़ता है तो कई बड़े हित प्रभावित होना स्वाभाविक माना जाता है। फिलहाल स्थिति यह है कि जहां एक ओर अवैध खनन से जुड़े तत्वों में राहत की भावना देखी जा रही है वहीं दूसरी ओर अभियान का नेतृत्व करने वाला अधिकारी खुद प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन और खनन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या अवैध कारोबार पर सख्ती दिखाने की कोई कीमत भी चुकानी पड़ती है।

    अब पूरे मामले में शासन स्तर पर अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि यह मामला केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं बल्कि अवैध खनन के खिलाफ चल रही पूरी मुहिम की विश्वसनीयता और उसके भविष्य से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

  • दक्षिण भारतीय सुपरस्टार धनुष और अभिनेत्री मृणाल ठाकुर के अलग होने की खबरें तेज, फिल्म गलियारों में ब्रेकअप की रिपोर्ट से प्रशंसक निराश

    दक्षिण भारतीय सुपरस्टार धनुष और अभिनेत्री मृणाल ठाकुर के अलग होने की खबरें तेज, फिल्म गलियारों में ब्रेकअप की रिपोर्ट से प्रशंसक निराश


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत के दो बड़े और लोकप्रिय कलाकारों, दक्षिण भारतीय सुपरस्टार धनुष और बॉलीवुड अभिनेत्री मृणाल ठाकुर के निजी संबंधों को लेकर फिल्म गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मीडिया की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, काफी समय से एक-दूसरे के करीब माने जा रहे इन दोनों कलाकारों ने अब अपने रास्ते पूरी तरह अलग कर लिए हैं। दोनों के कथित तौर पर अलग होने की इस खबर ने सोशल मीडिया और फिल्मी हलकों में हलचल मचा दी है, जिससे उनके प्रशंसक काफी निराश नजर आ रहे हैं। हालांकि, दोनों सितारों की तरफ से इस अलगाव की असल वजहों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    सिनेमाई सूत्रों और प्रतिष्ठित मीडिया घरानों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, धनुष और मृणाल ठाकुर पिछले कई महीनों से अपने कथित प्रेम संबंधों को लेकर लगातार मीडिया की सुर्खियों में बने हुए थे। फिल्मी गलियारों में चर्चा थी कि दोनों अपने इस रिश्ते को लेकर काफी गंभीर हैं। हालांकि, दोनों ही कलाकारों ने सार्वजनिक तौर पर कभी भी अपने इस रिश्ते को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया था और हमेशा इसे महज एक अफवाह करार दिया था। इसके बावजूद, सार्वजनिक आयोजनों और फिल्म प्रीमियर के दौरान दोनों की एक साथ मौजूदगी और केमिस्ट्री को देखकर मीडिया और प्रशंसकों द्वारा उनके रिश्ते को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे थे।

    इन दोनों कलाकारों के बीच नजदीकियों की खबरें पहली बार तब सार्वजनिक चर्चा में आई थीं, जब अभिनेता धनुष को मृणाल ठाकुर की एक आगामी बड़ी फिल्म के विशेष प्रीमियर शो के दौरान देखा गया था। उस दौरान जब मीडिया ने अभिनेत्री से धनुष की उपस्थिति को लेकर सवाल पूछे थे, तो उन्होंने बेहद चतुराई से जवाब देते हुए कहा था कि उन्हें फिल्म के मुख्य अभिनेता द्वारा आमंत्रित किया गया था। दोनों कलाकारों ने हमेशा मीडिया के कैमरों के सामने अपने रिश्ते को केवल एक अच्छी दोस्ती तक ही सीमित रखने का प्रयास किया था, लेकिन अंदरखाने चल रही चर्चाओं ने कभी उनका पीछा नहीं छोड़ा।

    निजी जीवन के मोर्चे पर बात करें तो अभिनेता धनुष हमेशा से ही अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को चकाचौंध और मीडिया की लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते हैं। इससे पहले वर्ष 2022 में उन्होंने सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या के साथ अपनी शादीशुदा जिंदगी को समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा की थी। दोनों ने लगभग 18 वर्षों के एक लंबे वैवाहिक जीवन के बाद आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया था, जिसने उस समय भी पूरे फिल्म उद्योग को स्तब्ध कर दिया था। उस अलगाव के बाद से ही धनुष का नाम कई मौकों पर अलग-अलग चर्चाओं का हिस्सा बनता रहा है।

    मध्य प्रदेश। वर्तमान में दोनों ही कलाकार अपने-अपने पेशेवर करियर और आगामी प्रोजेक्ट्स पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अभिनेता धनुष जहां अपनी आगामी एक्शन और ड्रामा फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त हैं, वहीं मृणाल ठाकुर के करियर का ग्राफ भी इन दिनों काफी तेजी से ऊपर जा रहा है। इस वर्ष उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शित हो चुकी हैं और आने वाले समय में वे देश के कई बड़े निर्देशकों और बहुभाषी फिल्मों में शीर्ष अभिनेताओं के साथ मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली हैं। इस व्यस्त दिनचर्या के बीच दोनों के निजी जीवन में आए इस कथित मोड़ पर फिल्म समीक्षकों और प्रशंसकों की पैनी नजरें बनी हुई हैं।

  • 'गदर' के 25 वर्ष पूरे होने पर अमीषा पटेल का बड़ा खुलासा, सनी देओल संग उम्र के फासले के कारण फिल्म न करने की मिली थी सलाह

    'गदर' के 25 वर्ष पूरे होने पर अमीषा पटेल का बड़ा खुलासा, सनी देओल संग उम्र के फासले के कारण फिल्म न करने की मिली थी सलाह

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और सफल फिल्मों में शुमार ‘गदर: एक प्रेम कथा’ की रिलीज को हाल ही में 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर फिल्म की मुख्य अभिनेत्री अमीषा पटेल ने अपने शुरुआती करियर और फिल्म की कास्टिंग से जुड़े कई अनसुने व चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया है। एक साक्षात्कार के दौरान अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को साइन किया था, तब फिल्म उद्योग और उनके आसपास के कई लोगों ने उन्हें इस फिल्म का हिस्सा न बनने की सख्त सलाह दी थी। विरोध की सबसे बड़ी वजह उनके और अभिनेता सनी देओल के बीच उम्र का एक लंबा फासला था, जिसे उस दौर के सिनेमाई पैमानों पर जोखिम भरा माना जा रहा था।

    फिल्म के निर्माण के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि उस वक्त उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी, जबकि स्थापित सुपरस्टार सनी देओल 43 वर्ष के थे। इस बड़े आयु अंतर को लेकर केवल बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि खुद वे भी शुरुआत में थोड़ी आशंकित थीं। एक नवागंतुक कलाकार के तौर पर उनके मन में यह स्वाभाविक सवाल था कि क्या दर्शकों को पर्दे पर यह जोड़ी स्वीकार्य होगी या नहीं। हालांकि, फिल्म की पटकथा और उसके गहरे विषय ने बाद में इस उम्र के फासले को पूरी तरह से पर्दे पर न्यायसंगत साबित किया, जिसने बाद में बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।

    सिनेमाई संरचना पर बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग को उम्र के अंतर वाले किरदारों के रोमांस को पर्दे पर दिखाना जारी रखना चाहिए, बशर्ते कहानी में उसकी कोई ठोस और तार्किक वजह मौजूद हो। आजकल दर्शकों द्वारा कुछ फिल्मों को नापसंद किए जाने का एक मुख्य कारण यह भी है कि कहानियों में बिना किसी मजबूत संदर्भ के ऐसी कास्टिंग थोप दी जाती है। ‘गदर’ के मामले में यह अंतर कागजी तौर पर भले ही अजीब लग रहा था, लेकिन जब फिल्म परदे पर उतरी तो किरदारों के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश ने इस अंतर को एक खूबसूरत मोड़ दे दिया।

    कहानी के दृष्टिकोण से यह फासला बेहद सटीक बैठता था क्योंकि फिल्म एक ऐसे सीधे-साधे और कम पढ़े-लिखे स्थानीय युवक तारा सिंह की कहानी थी, जिसे एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली संभ्रांत परिवार की युवती सकीना से प्रेम हो जाता है। तारा सिंह के लिए सकीना एक ऐसी राजकुमारी की तरह थी, जिसे पाना सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद कठिन था। दोनों किरदारों के बीच धर्म, शिक्षा और जीवनशैली का एक बड़ा अंतर था, जिसे इस आयु वर्ग के अंतर ने और अधिक गहराई प्रदान की। यही कारण था कि दर्शकों ने दोनों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को बहुत शिद्दत से महसूस किया।

    मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक प्रेम कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती यही थी कि दोनों किरदारों ने एक-दूसरे के परिवेश को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था। जहां सकीना ने भारतीय संस्कृति और तारा सिंह के परिवार को ससम्मान अपनाया, वहीं तारा सिंह भी अपने परिवार की खुशी के लिए सीमा पार जाने को सहर्ष तैयार हो गया। वह केवल उसी परिस्थिति में उग्र रूप धारण करता है जब उसकी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय पहचान पर प्रहार किया जाता है। अभिनेत्री के इन ताजा बयानों ने एक बार फिर 25 वर्ष पुरानी यादों को ताजा कर दिया है और यह साबित किया है कि एक मजबूत पटकथा किसी भी रूढ़िवादी सिनेमाई मानदंड को बदलने की पूरी क्षमता रखती है।

  • फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के प्रसिद्ध गीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ा अनूठा इतिहास, तकनीक की कमी के कारण लता मंगेशकर ने बाथरूम में गाया था यह गाना

    फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के प्रसिद्ध गीत की रिकॉर्डिंग से जुड़ा अनूठा इतिहास, तकनीक की कमी के कारण लता मंगेशकर ने बाथरूम में गाया था यह गाना

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी फिल्मों और गीतों का निर्माण हुआ है, जिन्होंने न केवल दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी बल्कि तकनीकी और कलात्मक स्तर पर भी नए कीर्तिमान स्थापित किए। ऐसा ही एक अविस्मरणीय उदाहरण वर्ष 1960 में रिलीज हुई महान निर्देशक के. आसिफ की भव्य फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और सदाबहार गीत ‘प्यार किया तो डरना क्या’ आज भी संगीत प्रेमियों के बीच खासा पसंद किया जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर द्वारा गाए गए इस ऐतिहासिक गीत की रिकॉर्डिंग के पीछे एक बेहद दिलचस्प और अनोखा संघर्ष छिपा हुआ है, जिसने उस दौर की तकनीकी सीमाओं को मात देकर इतिहास रच दिया था।

    सिनेमाई गलियारों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, उस दौर में गानों में गूंज यानी ‘ईको इफेक्ट’ पैदा करने के लिए आज की तरह आधुनिक सॉफ्टवेयर या डिजिटल तकनीक उपलब्ध नहीं हुआ करती थी। संगीत निर्देशक नौशाद इस गाने में एक खास तरह की प्राकृतिक गूंज और गहराई चाहते थे, जिसे सामान्य स्टूडियो रूम में हासिल करना नामुमकिन लग रहा था। इस विशेष ध्वनि प्रभाव को भौतिक रूप से प्राप्त करने के लिए काफी विचार-विमर्श किया गया और अंततः एक अनोखा प्रयोग करने का फैसला हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लता मंगेशकर ने इस गाने की विशिष्ट पंक्तियों और धुनों को स्टूडियो के एक बड़े बाथरूम में खड़े होकर रिकॉर्ड किया था ताकि आवाज में मनचाही गूंज पैदा की जा सके।

    यह केवल गायन और तकनीकी स्तर पर ही नहीं, बल्कि लेखन के मोर्चे पर भी एक बेहद कठिन सफर था। मशहूर गीतकार शकील बदायूंनी द्वारा लिखे गए इस गीत की पंक्तियों को तब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया, जब तक कि वे निर्देशक और संगीतकार की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरीं। बताया जाता है कि इस गाने के बोल को फाइनल करने से पहले करीब 105 बार बदला और संपादित किया गया था। इतनी कड़ी मेहनत और बार-बार के संपादन के बाद जब यह गीत बनकर तैयार हुआ, तो इसने रिलीज होते ही सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। इतने दशक बीत जाने के बाद भी इस गीत की लोकप्रियता में तनिक भी कमी नहीं आई है।

    इस फिल्म के निर्माण से जुड़े अन्य पहलू भी उतने ही कठिन और संघर्षपूर्ण थे। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री मधुबाला को इस ऐतिहासिक भूमिका और विशेष रूप से इस गाने के फिल्मांकन के लिए भारी शारीरिक कष्टों से गुजरना पड़ा था। उस दौर के हिसाब से उन्हें भारी-भरकम राशि तो जरूर मिली थी, लेकिन उनके पहनावे और असली लोहे व पीतल से बनी भारी आभूषणों की वजह से उन्हें गंभीर चोटें भी आई थीं। भारी चेन और पोशाकों के वजन के कारण कई बार वे सेट पर खड़ी भी नहीं हो पाती थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने अभिनय में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसने इस पूरे दृश्य को सिनेमाई परदे पर जीवंत बना दिया।

    मध्य प्रदेश। भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘मुगल-ए-आजम’ को बनने में लगभग 16 साल का एक लंबा समय लगा था, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। फिल्म के भव्य युद्ध दृश्यों के फिल्मांकन के लिए हजारों की संख्या में असली घोड़ों और ऊंटों का इस्तेमाल किया गया था, जो उस दौर के हिसाब से एक बेहद खर्चीला और जटिल कार्य था। इन तमाम ऐतिहासिक और अनूठे प्रयासों का ही परिणाम था कि फिल्म का हर एक दृश्य और लता मंगेशकर की अनूठी आवाज में रिकॉर्ड हुआ यह विशेष गीत आज भी भारतीय फिल्म जगत की सबसे मूल्यवान विरासतों में गिना जाता है।

  • दतिया दौरे पर योगी आदित्यनाथ ने पीतांबरा पीठ में की पूजा, सुरक्षा के चलते मंदिर खाली कराया गया

    दतिया दौरे पर योगी आदित्यनाथ ने पीतांबरा पीठ में की पूजा, सुरक्षा के चलते मंदिर खाली कराया गया


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मध्य प्रदेश के दतिया जिले पहुंचे जहां उनका दौरा धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। उनके आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था। दतिया हवाई पट्टी पर पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें बुके भेंट कर अभिनंदन किया।

    इसके बाद सीएम योगी सीधे मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ पीतांबरा पीठ पहुंचे जहां उन्होंने मां बगलामुखी देवी के दर्शन कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। मंदिर परिसर में ही स्थित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक भी उन्होंने किया और देश तथा प्रदेश की समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही और वीआईपी मूवमेंट के चलते पूरे मंदिर क्षेत्र को आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी रूप से खाली करा दिया गया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई जिससे दूर दराज से आए भक्तों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
    कई श्रद्धालु एक घंटे से अधिक समय तक बाहर इंतजार करते रहे और तेज धूप में खड़े रहने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। इस व्यवस्था को लेकर कुछ श्रद्धालुओं में नाराजगी भी देखने को मिली। वहीं दौरे के दौरान मीडिया कर्मियों को भी मुख्यमंत्री के करीब जाने की अनुमति नहीं दी गई और कवरेज को सीमित रखा गया।
    पूजा संपन्न होने के बाद सीएम योगी बिना मीडिया से बातचीत किए सीधे हवाई पट्टी की ओर रवाना हो गए। पूरा दौरा सुरक्षा और प्रोटोकॉल के सख्त घेरे में संपन्न हुआ जिससे एक ओर प्रशासनिक सतर्कता दिखी तो दूसरी ओर आम श्रद्धालुओं की असुविधा भी सामने आई।

  • नौ महीने बाद प्रतिस्पर्धी ट्रैक पर लौटे नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो में रहे चौथे पायदान पर, श्रीलंका के रुमेश पथिरागे बने नए चैंपियन

    नौ महीने बाद प्रतिस्पर्धी ट्रैक पर लौटे नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो में रहे चौथे पायदान पर, श्रीलंका के रुमेश पथिरागे बने नए चैंपियन

    नई दिल्ली । भारतीय खेल जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक, जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा की नौ महीने के लंबे अंतराल के बाद प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में वापसी पदक के साथ नहीं हो सकी। दोहा डायमंड लीग के पुरुष जेवलिन थ्रो फाइनल मुकाबले में भारतीय स्टार महज 30 सेंटीमीटर के अंतर से पोडियम पर स्थान बनाने से चूक गए। प्रतियोगिता में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रयास 85.69 मीटर दर्ज किया गया, जिसके चलते उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। इस बेहद कड़े मुकाबले में श्रीलंका के उभरते हुए खिलाड़ी रुमेश पथिरागे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि ग्रेनाडा और अमेरिका के एथलीट क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

    मुकाबले की तकनीकी शुरुआत भारतीय एथलीट के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुई। नीरज चोपड़ा का पहला प्रयास फाउल रहा, जिससे वे शुरुआती रैंकिंग में काफी पिछड़ गए थे। हालांकि, उन्होंने दूसरे प्रयास में 82.77 मीटर का थ्रो कर ट्रैक पर शानदार वापसी के संकेत दिए। इसके बाद अपने तीसरे प्रयास में नीरज ने पूरी ताकत झोंकते हुए भाले को 85.69 मीटर की दूरी पर फेंका, जिससे वे सीधे शीर्ष तीन खिलाड़ियों की कतार में शामिल हो गए थे। इस प्रदर्शन के बाद खेल प्रशंसकों को उनसे एक बार फिर पदक की उम्मीद बंध गई थी, लेकिन आगे के चक्रों में वे इस प्रदर्शन को और बेहतर नहीं कर सके।

    प्रतियोगिता का रुख चौथे दौर में पूरी तरह बदल गया जब श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.68 मीटर का एक विशाल थ्रो फेंककर अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। इस दूरी के करीब विश्व का कोई भी अन्य जेवलिन थ्रोअर नहीं पहुंच सका और श्रीलंका के इस खिलाड़ी ने आसानी से चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। वहीं दूसरी ओर, नीरज चोपड़ा ने अपने चौथे प्रयास में 83.45 मीटर की दूरी तय की, जबकि उनका पांचवां प्रयास एक बार फिर फाउल हो गया। नियमानुसार अंतिम दौर में केवल शीर्ष तीन खिलाड़ियों को ही मौका दिया जाना था, जिसके कारण नीरज छठे प्रयास के लिए क्वालिफाई नहीं कर सके और उनका सफर पांचवें दौर के बाद ही समाप्त हो गया।

    इस वैश्विक प्रतियोगिता में पदक न जीत पाने के बावजूद भारतीय खेमे के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। नीरज चोपड़ा ने अपने 85.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के बदौलत आगामी राष्ट्रमंडल खेल 2026 के लिए निर्धारित अनिवार्य क्वालिफिकेशन मार्क को आसानी से पार कर लिया है। इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने आगामी राष्ट्रमंडल खेलों के मुख्य दल में अपनी जगह पूरी तरह से सुरक्षित कर ली है, जो आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिहाज से भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के लिए एक राहत भरी खबर है।

    खेल विश्लेषकों का मानना है कि चोट और लगभग नौ महीने के लंबे विश्राम के बाद सीधे डायमंड लीग जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन में इस मुकाबले के दौरान निरंतरता की कुछ कमी अवश्य देखी गई, जिसके चलते उनके दो प्रयास फाउल रहे। इसके बावजूद पहली ही वापसी प्रतियोगिता में 85 मीटर से अधिक की दूरी हासिल करना उनके बेहतर शारीरिक स्तर और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है। खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों को पूरी उम्मीद है कि आगामी हफ्तों में अभ्यास के जरिए वे अपनी कमियों को सुधार कर आने वाले वैश्विक टूर्नामेंटों में एक बार फिर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब होंगे।

  • ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अत्यंत शुभ कालखंड की शुरुआत, बुध, गुरु और शुक्र के अनूठे संयोग से चमकेगी चार भाग्यशाली राशियों की किस्मत

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अत्यंत शुभ कालखंड की शुरुआत, बुध, गुरु और शुक्र के अनूठे संयोग से चमकेगी चार भाग्यशाली राशियों की किस्मत

    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और उनकी युति को मानव जीवन तथा पूरी सृष्टि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खगोलीय पंचांग की गणनाओं के अनुसार, आगामी 22 जून से अंतरिक्ष में एक बेहद दुर्लभ और महाशक्तिशाली ‘सरस्वती राजयोग’ का निर्माण होने जा रहा है। यह शुभ संयोग कर्क राशि में तीन प्रमुख ग्रहों की अनूठी युति के कारण बनने जा रहा है, जो आगामी 4 जुलाई तक पूरी तरह प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस अवधि में ज्ञान के कारक बृहस्पति, बुद्धि के दाता बुध और भौतिक सुखों के स्वामी शुक्र एक साथ आकर संसार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेंगे, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव मुख्य रूप से चार विशेष राशियों पर देखने को मिलेगा।

    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह खगोलीय घटना इसलिए भी अधिक प्रभावशाली मानी जा रही है क्योंकि इस समय देवताओं के गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर कर रहे हैं। जब भी गुरु, बुध और शुक्र जैसे नैसर्गिक रूप से शुभ माने जाने वाले ग्रह कुंडली के केंद्र या त्रिकोण भावों में मजबूत स्थिति में एक साथ आते हैं, तो इस बेहद कल्याणकारी योग का सृजन होता है। इस कालखंड के दौरान विशेष रूप से शिक्षा, रचनात्मक क्षेत्रों, व्यापार और नौकरीपेशा लोगों के जीवन में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिलती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ने के साथ-साथ इस योग के प्रभाव से बंपर आर्थिक लाभ और रुके हुए कार्यों में गति आने के मजबूत संकेत मिल रहे हैं।

    इस ज्योतिषीय परिवर्तन से सबसे अधिक लाभान्वित होने वाली राशियों में मेष राशि प्रमुखता से शामिल है। मेष राशि के जातकों के लिए यह समय सुख-सुविधाओं और भौतिक संसाधनों में वृद्धि कराने वाला साबित होगा। यदि इस राशि के लोगों ने भूतकाल में कोई निवेश किया है, तो इस अवधि में उन्हें उससे बड़ा वित्तीय मुनाफा होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति अथवा मनचाही जगह पर स्थानांतरण का सुख मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़े पुराने विवादों में भी इस दौरान बड़ी राहत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं, जिससे पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा।

    मिथुन और कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह समय किसी वरदान से कम नहीं होने वाला है। मिथुन राशि के लोगों के लिए विशेषकर वित्तीय मोर्चे पर यह अत्यधिक फलदायी सिद्ध होगा, जहां मीडिया, विपणन, कानून और शिक्षा जगत से जुड़े पेशेवरों को अपनी प्रतिभा दिखाने के शानदार अवसर मिलेंगे। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस आने से संचित कोष में बढ़ोतरी होगी। वहीं दूसरी ओर, चूंकि यह राजयोग कर्क राशि में ही घटित हो रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों के व्यक्तित्व में गजब का निखार आएगा। उनके व्यावसायिक निर्णयों की सराहना होगी और व्यापारिक क्षेत्र में बड़ा आर्थिक लाभ कमाने के नए मार्ग प्रशस्त होंगे।

    मध्य प्रदेश। मीन राशि के जातकों पर भी इस सरस्वती राजयोग की विशेष कृपा बरसने वाली है, जिससे उनका भाग्य पूरी तरह से सहायक भूमिका में नजर आएगा। इस राशि के लोगों को आकस्मिक धन लाभ होने के मजबूत योग बन रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक आर्थिक चिंताएं समाप्त होंगी। सामाजिक जीवन में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को प्रतिष्ठित संस्थानों से नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। संक्षेप में कहें तो, ग्रहों का यह आगामी राशि परिवर्तन देश के व्यापक जनमानस में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ विशेषकर इन चार राशि वाले जातकों के करियर और वित्तीय स्थिति को एक नई ऊंचाई प्रदान करने का कार्य करेगा।

  • धान रोपाई के दौरान बड़ा हादसा, करंट की चपेट में आकर दो किसानों की दर्दनाक मौत

    धान रोपाई के दौरान बड़ा हादसा, करंट की चपेट में आकर दो किसानों की दर्दनाक मौत


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है जहां खेत में करंट फैलने से दो किसानों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के हरपालपुर गांव की है जहां धान की रोपाई का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि खेत के पास लगे एक विद्युत पोल से अचानक केबल टूटकर पानी से भरे खेत में गिर गई जिससे पूरे खेत में करंट फैल गया।

    इसी दौरान किसान हीरालाल प्रजापति उम्र 52 वर्ष और रामबोध यादव उम्र 55 वर्ष काम कर रहे थे। करंट लगने से हीरालाल मौके पर ही गंभीर रूप से झुलस गए जबकि उन्हें बचाने पहुंचे रामबोध यादव भी करंट की चपेट में आ गए और दोनों बुरी तरह घायल हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगदीशपुर पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सूचना मिलने पर अमेठी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बिजली के तार की मरम्मत या रखरखाव में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई।  प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जांच के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दर्दनाक हादसे ने ग्रामीण क्षेत्र में बिजली सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • वनडे विश्व कप 2027 में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने पर सस्पेंस बरकरार, बीसीसीआई ने रणनीतिक फैसलों को सार्वजनिक करने से किया इनकार

    वनडे विश्व कप 2027 में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने पर सस्पेंस बरकरार, बीसीसीआई ने रणनीतिक फैसलों को सार्वजनिक करने से किया इनकार

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट जगत में इस समय सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि क्या स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा और दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली वर्ष 2027 में होने वाले आगामी वनडे विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा होंगे या नहीं। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में खिताबी जीत दर्ज करने के बाद से ही इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों के वनडे क्रिकेट में भविष्य को लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। इसी बीच भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, उनके इस बयान ने स्थिति को स्पष्ट करने के बजाय सस्पेंस को और अधिक बढ़ा दिया है क्योंकि उन्होंने साफ कर दिया है कि टीम की रणनीतियों से जुड़ी चर्चाएं पूरी तरह आंतरिक होती हैं।

    क्रिकेट बोर्ड के सचिव ने एक साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य, खिलाड़ियों की भूमिकाओं और आगामी विश्व कप की रूपरेखा को लेकर बोर्डरूम के भीतर नियमित तौर पर समीक्षा की जाती है। चयन समिति, क्रिकेट सलाहकार समिति, मुख्य कोच और कोचिंग स्टाफ के साथ-साथ खुद खिलाड़ियों के बीच भी एक मजबूत संवाद प्रणाली स्थापित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीम से जुड़े सभी बड़े और महत्वपूर्ण फैसले इसी निरंतर चलने वाली प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। लेकिन जब उनसे सीधे तौर पर इन दोनों पूर्व कप्तानों के अगले विश्व कप में खेलने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने रणनीतिक चर्चाओं का हवाला देते हुए इस पर सीधा जवाब देने से साफ तौर पर परहेज किया।

    बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, किसी भी बड़े टूर्नामेंट की दूरगामी रणनीतियों और सीनियर खिलाड़ियों के चयन संबंधी विचारों को मीडिया या आम जनता के सामने समय से पहले प्रकट करना उचित नहीं होता है। यह एक गोपनीय प्रशासनिक ढांचा है और इन पर चर्चा बोर्ड के आंतरिक दायरे में ही रहनी चाहिए। इस रहस्यमयी रुख से यह साफ जाहिर होता है कि बीसीसीआई फिलहाल इन दोनों दिग्गज बल्लेबाजों के भविष्य के रोडमैप को लेकर कोई भी जल्दबाजी में सार्वजनिक बयान या संकेत देने के मूड में नजर नहीं आ रहा है, जिससे क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है।

    दूसरी ओर, रोहित शर्मा और विराट कोहली विभिन्न मंचों पर इस बात के स्पष्ट संकेत दे चुके हैं कि वे खेल के इस पारंपरिक सीमित ओवरों के प्रारूप में अपनी सेवाएं जारी रखना चाहते हैं और उनकी नजरें अगले विश्व कप पर टिकी हुई हैं। चैंपियंस ट्रॉफी की ऐतिहासिक सफलता के बाद भी दोनों ही दिग्गजों ने वनडे क्रिकेट खेलते रहने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि, मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और मुख्य कोच गौतम गंभीर की अगुवाई वाले प्रबंधन ने भी अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक या ठोस आश्वासन मीडिया के सामने प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसे में आने वाले समय में इन दोनों सीनियर खिलाड़ियों का व्यक्तिगत प्रदर्शन और उनकी शारीरिक फिटनेस ही इस पूरी तस्वीर को साफ करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।

    मध्य प्रदेश। इसी बीच बोर्ड के सचिव ने राजनीतिक और कूटनीतिक परिस्थितियों के कारण स्थगित हुए भारत के पड़ोसी देशों के दौरों और द्विपक्षीय श्रृंखलाओं पर भी बोर्ड की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड किसी भी अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के आयोजन या विदेशी दौरों को लेकर पूरी तरह से भारत सरकार की गृह और विदेश नीतियों का अनुसरण करता है। खेल संस्था का राजनीति से कोई प्रत्यक्ष सरोकार नहीं है और सरकार की ओर से मिलने वाले दिशा-निर्देशों के आधार पर ही खेल से जुड़े कार्यक्रम तय किए जाते हैं। बहरहाल, वर्तमान में भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ जारी घरेलू वनडे श्रृंखला में बेहतर प्रदर्शन कर रही है और खेल प्रेमी आगामी समय में रोहित-विराट के भविष्य पर आने वाले हर मोड़ पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

  • योगी आदित्यनाथ का ललितपुर दौरा ,स्वास्थ्य शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

    योगी आदित्यनाथ का ललितपुर दौरा ,स्वास्थ्य शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ललितपुर जिले के दौरे पर रहेंगे जहां वे 1766 करोड़ रुपये की लागत से बने राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित कुल 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इस दौरे को बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाओं शिक्षा और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा कई धार्मिक और विकासात्मक कार्यक्रमों से जुड़ा रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीएम योगी सुबह मध्य प्रदेश के दतिया स्थित प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ मंदिर में विधि विधान से दर्शन पूजन करेंगे और आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके बाद वह राजकीय हेलीकॉप्टर से ललितपुर पहुंचेंगे जहां पुलिस लाइन हेलीपैड पर उनका आगमन होगा।

    वहां से वे सीधे तुवन मंदिर जाएंगे और दर्शन पूजन के बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना होंगे। इस पूरे दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ललितपुर की धरती वीरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है और आज यह विकास के एक नए अध्याय की साक्षी बनेगी। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का यह प्रयास बुंदेलखंड को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में मजबूत कदम साबित होगा।

    सीएम के अनुसार 1766 करोड़ की इन परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण से स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा और इलाज की सुविधाएं बढ़ेंगी जिससे लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके साथ ही 221 परियोजनाओं में सड़कें, भवन, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं जो क्षेत्र के समग्र विकास को गति देंगे।

    सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस दौरे को आगामी विकास योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।