Author: bharati

  • 71 रन की पारी के दौरान चोटिल हुईं लिचफील्ड, तीसरे वनडे से हुईं बाहर, न्यूजीलैंड सीरीज से भी कट सकता है पत्ता

    71 रन की पारी के दौरान चोटिल हुईं लिचफील्ड, तीसरे वनडे से हुईं बाहर, न्यूजीलैंड सीरीज से भी कट सकता है पत्ता


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम की सलामी बल्लेबाज फोएबे लिचफील्ड कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण बुधवार को खेले जा रहे तीसरे वनडे की प्लेइंग इलेवन से बाहर हो गईं। उनकी चोट ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार से शुरू होने वाली टी20 सीरीज में भी उनके खेलने पर संशय बना हुआ है। फिलहाल उनकी चोट की गंभीरता और मैदान पर वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऑस्ट्रेलिया को उम्मीद होगी कि यह चोट ज्यादा गंभीर न हो और लिचफील्ड जल्द ही टीम में वापसी कर सकें।

    23 वर्षीय बाएं हाथ की बल्लेबाज को रविवार को बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। उस मैच में उन्होंने 71 रन की शानदार पारी खेली थी। हालांकि इसी पारी के दौरान उनके कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया। इसके बाद उनकी फिटनेस पर नजर रखी जा रही थी लेकिन तीसरे वनडे से पहले उन्हें खेलने के लिए फिट नहीं माना गया। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के लिए लिचफील्ड की फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। रविवार को होने वाले पहले टी20 मुकाबले से पहले उनकी स्थिति पर फैसला लिया जा सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया की कार्यवाहक कप्तान ताहलिया मैकग्राथ ने टॉस के दौरान लिचफील्ड की चोट की जानकारी दी। उनकी अनुपस्थिति में ऑलराउंडर निकोला कैरी को तीन मैचों की वनडे सीरीज में पहली बार प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज बेथ मूनी को पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। तीसरा वनडे मूनी के लिए भी खास है क्योंकि यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 100वां वनडे मुकाबला है। ऐसे में वह इस उपलब्धि को यादगार बनाने के साथ टीम को एक और जीत दिलाने की कोशिश करेंगी।

    ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए चोटों की समस्या ऐसे समय में सामने आई है जब टीम पहले से ही खिलाड़ियों की कमी से जूझ रही है। हिप की परेशानी से जूझ रहीं सोफी मोलिनक्स और क्वाड्रिसेप्स की चोट से उबर रहीं लूसी हैमिल्टन भी उपलब्ध नहीं हैं। इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के कारण बांग्लादेश के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए मेजबान टीम के पास केवल 12 खिलाड़ी उपलब्ध थे। लगातार चोटों ने टीम के विकल्प सीमित कर दिए हैं और आगामी टी20 सीरीज से पहले खिलाड़ियों की फिटनेस ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

    इस बीच ग्रेस हैरिस को कवर के तौर पर टीम से जुड़ने के लिए ब्रिस्बेन भेजा गया है। ऑस्ट्रेलिया की टी20 टीम में जगह नहीं बना पाने के बाद वह गुरुवार को ब्रिस्बेन हीट के टी20 स्प्रिंग चैलेंज अभियान में वापसी करेंगी। हालांकि मौजूदा वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन शानदार रहा है। टीम ने पहले मुकाबले में बांग्लादेश को सात विकेट से हराया था जबकि दूसरे वनडे में नौ विकेट से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। अब तीसरे मुकाबले में टीम की नजर क्लीन स्वीप पर है जबकि लिचफील्ड की चोट और उनकी संभावित वापसी आगामी न्यूजीलैंड सीरीज से पहले चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

  • रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

    रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

     
    उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। समाज ने आयोजकों से सवाल किया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर में दशहरा उत्सव से पहले धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।उज्जैन  ।

    जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर उज्जैन में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इससे पहले अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए संबंधित आयोजक समितियों को नोटिस जारी कराया है। महाकाल मंदिर के पुजारी और संगठन के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। जिन चार समितियों को नोटिस भेजा गया है उनमें लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति शामिल हैं।

    नोटिस में आयोजकों से कहा गया है कि वे स्पष्ट करें कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध किए जाने का उल्लेख किस धार्मिक ग्रंथ में मौजूद है। समाज ने संबंधित समितियों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने का अनुरोध भी किया है। नोटिस के अनुसार सात दिन के भीतर शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं किया गया तो आगे कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। इसमें संभावित कार्रवाई से जुड़े हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी भी आयोजक समितियों पर डालने की बात कही गई है। हालांकि इस मामले में आयोजक समितियों का पक्ष सामने आने के बाद ही उनकी प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन के नाम पर ब्राह्मण समाज का अपमान नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रावण दहन की परंपरा के दौरान ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आयोजक समितियों से सवाल किया कि यदि रावण दहन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है तो उसके समर्थन में शास्त्रीय प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। महेश पुजारी का कहना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करते समय किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

    महेश पुजारी ने यह भी कहा कि अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज देश की विभिन्न संस्थाओं से रावण दहन बंद करने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए ब्राह्मणों की शिखा और यज्ञोपवीत के अपमान की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि धार्मिक आयोजनों में किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए।

    फिलहाल उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर आयोजन समितियों की तैयारियां जारी हैं तो दूसरी ओर युवा ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय प्रमाण और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब सात दिन की समयसीमा में समितियां क्या जवाब देती हैं और इस विवाद पर प्रशासन या आयोजकों की ओर से क्या रुख सामने आता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा

    कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा


    उज्जैन । महाकाल से रामलला तक दिग्विजय सिंह की पदयात्रा, पांच पवित्र नदियों का जल लेकर जाएंगे अयोध्या
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर से सत्य-सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश होंगे जिन्हें विशेष रूप से तैयार किए जा रहे रथ में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा। करीब 950 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का समापन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करने की योजना है। यात्रा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी उनके साथ पैदल चलेंगी। आयोजकों के मुताबिक यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
    यात्रा को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को शिप्रा गार्डन में आयोजित बैठक में आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। यात्रा के शुभारंभ के दिन 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन-अर्चन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें दिग्विजय सिंह के साथ हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद पदयात्रा अपने गंतव्य अयोध्या की ओर रवाना होगी।
    आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल के झंडे और बैनर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य सत्य धर्म न्याय सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया गया है। इसके साथ ही चंदा चोरी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग भी यात्रा के दौरान उठाई जाएगी। आयोजक इसे किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय सामाजिक और धार्मिक जनजागरण की पहल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
    यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह और अमृता राय प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। आयोजकों की योजना के अनुसार यात्रा में लगभग 2000 से 3000 लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग पड़ावों पर यात्रा से जुड़ने के लिए लोगों ने पंजीकरण भी कराया है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए नियमित रूप से पैदल चलने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि लंबे सफर के दौरान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा जा सके।
    उज्जैन जिले में यात्रा का प्रवास पांच दिनों का प्रस्तावित है। पहला पड़ाव कनिपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा सिंदूरिया तराना और कनासिया से होते हुए शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क के जरिए यात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।
    यात्रा के लिए विशेष रथ तैयार किया जा रहा है जिसमें पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश स्थापित किए जाएंगे। भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा रथ निर्माण का काम कर रहे हैं। इसी क्रम में शिप्रा नदी का जल कल्याणपुरा घाट से एकत्र किया गया। सुरेंद्र सुहाने अभिषेक गौर योगेंद्र सिंह परिहार भरत पोरवाल और नासिर पटेल ने इस प्रक्रिया में भाग लिया। शिप्रा नदी से लाया गया जल फिलहाल राजेंद्र वशिष्ठ के निवास स्थित मंदिर में सुरक्षित रखा गया है। यात्रा के शुभारंभ पर इसे विशेष रथ में स्थापित किया जाएगा। अब सभी की निगाहें 20 अक्टूबर को होने वाले शुभारंभ और उज्जैन से अयोध्या तक निकलने वाली इस लंबी पदयात्रा पर टिकी हैं।
  • श्मशान घाट पर मिली जख्मी महिला को बनाया मां, कभी गरीबी में गुजारा करते थे सुदेश लहरी, आज आलीशान जिंदगी जीते हैं कॉमेडियन

    श्मशान घाट पर मिली जख्मी महिला को बनाया मां, कभी गरीबी में गुजारा करते थे सुदेश लहरी, आज आलीशान जिंदगी जीते हैं कॉमेडियन


    नई दिल्ली: मनोरंजन की दुनिया में अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसाने वाले सुदेश लहरी की जिंदगी संघर्ष, मेहनत और सफलता की कहानी है। आज उनकी पहचान एक लोकप्रिय कॉमेडियन के रूप में है, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। जीवन में एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके जीवन से जुड़ा एक भावुक प्रसंग भी चर्चा में रहा है, जिसमें उन्होंने श्मशान घाट पर जख्मी हालत में मिली एक महिला को सहारा दिया और उसे मां का दर्जा दिया। इस घटना ने उनके जीवन के संवेदनशील पहलू को सामने रखा।
    सुदेश लहरी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर मनोरंजन जगत में पहचान बनाई। कॉमेडी के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग शैली विकसित की, जिससे दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई। उनके हास्य अंदाज ने उन्हें छोटे पर्दे पर खास जगह दिलाई। हालांकि, उनकी आज की पहचान और सफलता के पीछे लंबे समय तक किया गया संघर्ष रहा है। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आर्थिक स्थिति भी हमेशा मजबूत नहीं रही। इसके बावजूद उन्होंने अपने हुनर को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा।
    सुदेश के जीवन से जुड़ा श्मशान घाट वाला प्रसंग उनके मानवीय स्वभाव की ओर ध्यान खींचता है। बताया जाता है कि उन्हें वहां एक महिला जख्मी हालत में मिली थी। उस महिला की स्थिति देखकर उन्होंने उसे अपने घर लाने और सहारा देने का फैसला किया। उन्होंने महिला को केवल मदद देने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे मां का सम्मान दिया। यह प्रसंग उनके जीवन की उन घटनाओं में शामिल है, जो उनकी सार्वजनिक छवि से अलग उनके भावनात्मक पक्ष को सामने लाती हैं। हालांकि, इस घटना से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
    समय के साथ सुदेश लहरी को अपने काम के जरिए आगे बढ़ने के अवसर मिले। उनकी कॉमेडी ने दर्शकों का मनोरंजन किया और उन्हें पहचान दिलाई। टेलीविजन पर उनकी मौजूदगी और हास्य प्रस्तुतियों ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। मनोरंजन की दुनिया में जगह बनाने के बाद उनकी जिंदगी में भी बदलाव आया। कभी सीमित साधनों के बीच जीवन बिताने वाले सुदेश अब बेहतर सुविधाओं वाली जिंदगी जीते हैं। उनकी सफलता को उनके लंबे संघर्ष और लगातार काम करने के परिणाम के रूप में देखा जाता है।
    सुदेश लहरी की आलीशान जीवनशैली भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी रहती है। उनके घर को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, वह चार बेडरूम वाले आलीशान मकान में रहते हैं। यह बदलाव उनके जीवन के उस सफर को दर्शाता है, जिसमें आर्थिक कठिनाइयों से निकलकर उन्होंने बेहतर जीवन स्तर हासिल किया। हालांकि, उनकी संपत्ति और जीवनशैली से जुड़े सभी वित्तीय विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं।
    सुदेश लहरी की कहानी में दो पहलू सामने आते हैं। एक तरफ उनकी कॉमेडी और करियर की सफलता है, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। दूसरी तरफ उनके जीवन से जुड़ा महिला को मां का दर्जा देने वाला प्रसंग है, जो संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार की ओर ध्यान खींचता है। उनकी यात्रा यह दिखाती है कि मनोरंजन जगत में पहचान बनाने के लिए प्रतिभा के साथ मेहनत भी महत्वपूर्ण होती है।
  • उज्जैन में रावण दहन की तैयारियां तेज, 8 कारीगर 25 दिन से बना रहे विशाल पुतले, खराब मौसम का भी नहीं होगा ज्यादा असर

    उज्जैन में रावण दहन की तैयारियां तेज, 8 कारीगर 25 दिन से बना रहे विशाल पुतले, खराब मौसम का भी नहीं होगा ज्यादा असर


    उज्जैन ।उज्जैन में दशहरा पर्व को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। 20 अक्टूबर को मनाए जाने वाले दशहरे पर इस बार शहर में 101 फीट ऊंचे दो विशाल रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। इन पुतलों को खास डिजाइन और आकर्षक स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। दशहरा मैदान और कार्तिक मेला परिसर में होने वाले रावण दहन के लिए दोनों पुतलों का निर्माण दशहरा मैदान में ही किया जा रहा है। फिलहाल कारीगर इन्हें अंतिम रूप देने में जुटे हैं। विशाल आकार के साथ 3D डिजाइन और वाटरप्रूफ बनावट इस बार के पुतलों की खास विशेषता होगी।
    रावण के पुतले तैयार करने वाले कारीगर राम लखन कहार के मुताबिक इस बार उन्होंने तीन स्थानों के लिए पुतले बनाए हैं। इनमें झाल स्कूल के लिए वाल्मीकि रावण का पुतला तैयार किया गया है। वहीं दशहरा मैदान और कार्तिक मेला परिसर के लिए 101 फीट ऊंचे विशाल रावण बनाए जा रहे हैं। दोनों बड़े पुतलों को अलग-अलग थीम और रूप देने की तैयारी की गई है ताकि दशहरा उत्सव के दौरान वे लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सकें।
    दशहरा मैदान में तैयार हो रहे रावण के पुतले को राक्षसी सेना के राजा का स्वरूप दिया जा रहा है। इसे सामान्य रावण की तरह दिखाने के बजाय एक विशाल और प्रभावशाली राजा के रूप में सजाया जा रहा है। इसके चेहरे पर राक्षसी छवि उभारी जा रही है। बड़े-बड़े दांत और मुकुट पर लगाए जा रहे सींग इसके स्वरूप को खास बनाएंगे। इस डिजाइन के कारण पुतले की ऊंचाई निर्धारित 101 फीट से कुछ अधिक भी हो सकती है। कारीगरों की कोशिश है कि रावण का स्वरूप दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करे और आयोजन की भव्यता बढ़ाए।
    इस बार पुतलों को फुल 3D डिजाइन में तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य रावण की आकृति को अधिक वास्तविक और आकर्षक रूप देना है। इसके साथ ही पुतलों को वाटरप्रूफ बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि बारिश या खराब मौसम के कारण निर्माण सामग्री पर कम से कम असर पड़े। दशहरा पर्व के दौरान मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए यह तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कार्तिक मेला परिसर के लिए तैयार किए जा रहे 101 फीट ऊंचे रावण को भी राजा जैसा रूप दिया गया है। उसके हाथ में कांटेदार पारंपरिक हथियार रहेगा जो पुतले के प्रभावशाली स्वरूप को और उभारेगा।
    दोनों विशाल पुतलों को तैयार करने के लिए आठ कारीगरों की टीम पिछले करीब 25 दिनों से लगातार काम कर रही है। पुतलों का ढांचा तैयार करने से लेकर उनके चेहरे की बनावट सजावट और अंतिम फिनिशिंग तक कई चरणों में काम किया जा रहा है। अब दोनों पुतलों को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। आयोजकों की तैयारी है कि दशहरा पर्व से पहले निर्माण का काम पूरा कर लिया जाए ताकि रावण दहन के आयोजन में किसी तरह की परेशानी न आए।
    इस बार उज्जैन में दशहरा मैदान और कार्तिक मेला परिसर में होने वाला रावण दहन विशाल पुतलों और उनकी खास डिजाइन के कारण चर्चा में है। 3D स्वरूप वाटरप्रूफ बनावट और राक्षसी सेना के राजा जैसी थीम आयोजन को अलग पहचान दे सकती है। दशहरा पर्व पर इन पुतलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
  • गरबा पंडालों में संदिग्ध युवकों की रैंडम चेकिंग, रात 2 बजे तक निगरानी, मंदिर जाने वाली महिलाओं के लिए भी विशेष पेट्रोलिंग

    गरबा पंडालों में संदिग्ध युवकों की रैंडम चेकिंग, रात 2 बजे तक निगरानी, मंदिर जाने वाली महिलाओं के लिए भी विशेष पेट्रोलिंग


    उज्जैन । नवरात्रि के दौरान उज्जैन में गरबा पंडालों में शामिल होने वाली महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। शहर में शक्ति स्क्वॉड अभियान के तहत गरबा स्थलों और आसपास के इलाकों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। उज्जैन पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 15 चीता पार्टी और 34 एफआरवी वाहनों में महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर लगाया गया है। पुलिस टीमें रात 8 बजे से सुबह 2 बजे तक गरबा स्थलों पर निगरानी रखेंगी। इसके अलावा सुबह मंदिर जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है।

    मंगलवार रात शक्ति स्क्वॉड की टीम ने शहर के कई प्रमुख गरबा पंडालों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इस दौरान संदिग्ध नजर आने वाले युवकों की रैंडम चेकिंग की गई और उनसे पूछताछ भी की गई। पुलिस ने गरबा स्थलों पर सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया है। इसका उद्देश्य भीड़ के बीच संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और महिलाओं या युवतियों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ अथवा अभद्र व्यवहार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करना है।

    उज्जैन में शक्ति स्क्वॉड अभियान पिछले दो वर्षों से नवरात्रि के दौरान चलाया जा रहा है। इस बार अभियान का तीसरा वर्ष है। इसका मुख्य उद्देश्य गरबा खेलने के बाद देर रात घर लौटने वाली महिलाओं और युवतियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। नवरात्रि में गरबा आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस टीमों को नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    मंगलवार रात पुलिस ने दशहरा मैदान राजा राम सामाजिक न्याय परिसर इंजीनियरिंग कॉलेज और तारामंडल क्षेत्र के गरबा स्थलों पर पहुंचकर जांच की। इन स्थानों पर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और जरूरत के मुताबिक संदिग्धों से पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि इस तरह की औचक जांच का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और आयोजनों में शामिल महिलाओं तथा परिवारों के बीच सुरक्षा का भरोसा बनाए रखना है।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत शहर में 15 चीता पार्टियों और 34 एफआरवी वाहनों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। एफआरवी वाहनों में महिला अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। पुलिस के मुताबिक गरबा आयोजनों के दौरान रात 8 बजे से सुबह 2 बजे तक विशेष निगरानी रहेगी। वहीं सुबह 4 बजे से 8 बजे तक मंदिर जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए चार पेट्रोलिंग वाहन तैनात रहेंगे। इससे सुबह के समय भी प्रमुख रास्तों और मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पहले शामिल रहे लोगों पर भी पुलिस नजर रख रही है। इसके लिए संबंधित लोगों की सूची तैयार की गई है और शक्ति स्क्वॉड की टीमें गरबा पंडालों के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी कर रही हैं। पुलिस का उद्देश्य नवरात्रि के दौरान महिलाओं और युवतियों को ऐसा माहौल देना है जिसमें वे बिना डर के गरबा आयोजनों में शामिल हो सकें और सुरक्षित घर लौट सकें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि छेड़छाड़ या किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • रूस में हुआ प्यार, बिहार में शादी की तैयारी; राहुल के साधारण घर में रहने को तैयार हुईं जूली, परिवार की सहमति से बनेगी बात

    रूस में हुआ प्यार, बिहार में शादी की तैयारी; राहुल के साधारण घर में रहने को तैयार हुईं जूली, परिवार की सहमति से बनेगी बात

    नई दिल्ली: प्यार में दो लोगों के बीच देश और रहन-सहन का अंतर भी रिश्ते के आड़े नहीं आया। बिहार के भागलपुर जिले के राहुल यादव और रूस की रहने वाली जूली की प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा में है। दोनों की मुलाकात रूस में हुई थी, जहां राहुल काम करने के लिए गए थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और दोस्ती प्यार में बदल गई। अब जूली अपने परिवार के साथ रूस से बिहार पहुंच गई हैं। उनका उद्देश्य राहुल के साथ रहना और अपने रिश्ते को शादी तक पहुंचाना है।

    राहुल यादव बिहार के भागलपुर जिले के राजापुर गांव के रहने वाले हैं। वह रोजगार के सिलसिले में रूस गए थे। वहीं उनकी मुलाकात जूली से हुई। शुरुआती परिचय के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और समय के साथ उनका रिश्ता प्रेम में बदल गया। दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की इच्छा जताई। कुछ समय बाद राहुल भारत लौट आए, लेकिन उनके स्वदेश आने के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा। अलग-अलग देशों में रहने के बावजूद उनका रिश्ता कायम रहा और साथ रहने की इच्छा भी बनी रही।
    राहुल के भारत लौटने के करीब छह महीने बाद जूली ने उनसे मिलने के लिए बिहार आने का फैसला किया। वह अकेले भारत नहीं आईं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों को भी साथ लेकर पहुंचीं। जूली का इस तरह अपने परिवार के साथ राहुल के गांव पहुंचना इस प्रेम कहानी का खास पहलू बन गया है। दोनों के बीच रिश्ते को आगे बढ़ाने और शादी करने की इच्छा के चलते यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जूली के परिवार की मौजूदगी से भी यह स्पष्ट होता है कि वह इस रिश्ते को लेकर गंभीर हैं।

    इस प्रेम कहानी में सबसे अधिक चर्चा राहुल के साधारण घर और जूली के फैसले को लेकर हो रही है। राहुल का परिवार गांव में एक बेहद साधारण मकान में रहता है, जिसकी छत फूस से बनी हुई है। जूली को जब राहुल के घर और उनके रहन-सहन के बारे में जानकारी मिली, तब भी उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदला। वह राहुल के साथ उसी घर में रहकर जीवन बिताने के लिए तैयार हैं। उनके इस फैसले ने दोनों के रिश्ते को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। अलग-अलग देशों और परिस्थितियों से आने के बावजूद दोनों एक साथ रहने की इच्छा रखते हैं।

    जूली के फैसले को देखते हुए दोनों परिवारों के बड़े-बुजुर्ग भी इस रिश्ते को शादी में बदलने के लिए सहमत हो गए हैं। अब राहुल और जूली की शादी नवंबर 2026 में होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, दोनों की शादी की निश्चित तारीख और अन्य तैयारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विवाह की अंतिम योजना को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
    राहुल और जूली की कहानी में रोजगार के सिलसिले में हुई मुलाकात से लेकर शादी की तैयारी तक का सफर शामिल है। रूस में शुरू हुआ उनका रिश्ता अब बिहार में नए पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। जूली का अपने परिवार के साथ राहुल के गांव पहुंचना और उनके साधारण घर में रहने के लिए तैयार होना इस कहानी को खास बना रहा है। फिलहाल, दोनों परिवारों की सहमति के बाद नवंबर में शादी होने की संभावना पर सबकी नजरें टिकी हैं।
  • 80 वर्षीय बुजुर्ग को आया बैंक अधिकारी का वीडियो कॉल, सीनियर सिटीजन कार्ड का झांसा देकर खाते से उड़ाए 10 लाख

    80 वर्षीय बुजुर्ग को आया बैंक अधिकारी का वीडियो कॉल, सीनियर सिटीजन कार्ड का झांसा देकर खाते से उड़ाए 10 लाख


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है जहां सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 80 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल के बैंक खाते से 10 लाख रुपये निकाल लिए। आरोपी ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताकर बुजुर्ग से वॉट्सऐप वीडियो कॉल पर बातचीत की और इसी दौरान ATM कार्ड का नंबर पिन बैंक खाते की जानकारी तथा जन्मतिथि हासिल कर ली। कुछ समय बाद बुजुर्ग को ठगी का संदेह हुआ तो उन्होंने पड़ोसी को घटना की जानकारी दी और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। हालांकि तब तक उनके खाते से तीन बार में पूरी रकम निकाली जा चुकी थी। माधव नगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    पुलिस के अनुसार फरियादी सनत कुमार जैन उज्जैन के निर्माण नगर सेठीनगर क्षेत्र के निवासी हैं। वह आईटीआई कॉलेज में प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 11 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे उनके वॉट्सऐप नंबर पर एक अनजान मोबाइल नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग से पूछा कि क्या वह सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाना चाहते हैं। बुजुर्ग ने जब इसमें रुचि दिखाई तो आरोपी ने कार्ड बनवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही।
    इसी बहाने आरोपी ने उनसे ATM कार्ड का नंबर पिन बैंक खाते से संबंधित जानकारी और जन्मतिथि पूछ ली। बुजुर्ग को लगा कि बैंक से जुड़ी औपचारिकता पूरी की जा रही है इसलिए उन्होंने मांगी गई जानकारी साझा कर दी। जानकारी हासिल करने के बाद कॉल करने वाले ने उन्हें कुछ देर इंतजार करने के लिए कहा और फिर फोन काट दिया। इसके कुछ समय बाद सनत कुमार जैन को आशंका हुई कि उनके साथ धोखाधड़ी हो सकती है। उन्होंने तुरंत अपने पड़ोसी संजय शंकमनिरकर को पूरी घटना बताई। पड़ोसी ने भी इसे साइबर ठगी का मामला होने की आशंका जताई और शिकायत करने की सलाह दी।
    इसके बाद बुजुर्ग ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। हालांकि खाते में हुए लेनदेन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जब उन्होंने बैंक पासबुक में एंट्री कराई तो पता चला कि खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकाली गई है। पहले खाते से 5 लाख रुपये निकाले गए। इसके बाद 3 लाख रुपये और फिर 2 लाख रुपये का लेनदेन हुआ। इस तरह कुल 10 लाख रुपये खाते से निकल गए। घटना के सामने आने के बाद परिवार और आसपास के लोगों में भी चिंता का माहौल है।
    माधव नगर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस उस मोबाइल नंबर की जानकारी जुटा रही है जिससे बुजुर्ग को वीडियो कॉल किया गया था। साथ ही खाते से निकाली गई रकम किन खातों में पहुंची और लेनदेन में किन लोगों की भूमिका रही इसकी भी पड़ताल की जा रही है। जांच के जरिए ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
    यह घटना बुजुर्गों को निशाना बनाकर की जाने वाली साइबर ठगी के तरीकों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी बताती है। बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले किसी अनजान व्यक्ति को ATM कार्ड का नंबर पिन या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। सीनियर सिटीजन कार्ड या किसी अन्य बैंकिंग सुविधा के नाम पर जानकारी मांगे जाने पर संबंधित बैंक की आधिकारिक शाखा या हेल्पलाइन से पुष्टि करना जरूरी है।

  • जबलपुर के अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ का आरोप, एक्सपायरी दवाओं का जखीरा मिला, युवक की मौत की जांच तेज

    जबलपुर के अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ का आरोप, एक्सपायरी दवाओं का जखीरा मिला, युवक की मौत की जांच तेज


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में बिना आवश्यक रजिस्ट्रेशन के संचालित किए जा रहे एक अस्पताल में जांच के दौरान एक्सपायरी दवाएं मिलने का मामला सामने आया है। बेलखाड़ू के पास स्थित अश्वनी अस्पताल में मंगलवार शाम ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में जांच की। करीब एक घंटे चली कार्रवाई के दौरान अस्पताल से 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं। इनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं। टीम ने लगभग 12 हजार रुपये की दवाएं जब्त की हैं। शुरुआती जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल संचालिका सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की मान्य डिग्री भी नहीं थी। आरोप है कि इसके बावजूद वह लंबे समय से मरीजों का इलाज कर रही थीं।

    यह मामला 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद सामने आया है। तीन दिन पहले युवक की मौत के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया था। मंगलवार को जांच के लिए अस्पताल खुलवाया गया तो वहां बच्चों और गर्भवती महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी मिलीं। इससे अस्पताल में इलाज की प्रक्रिया और दवाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि दवाओं की स्थिति और युवक की मौत के बीच सीधा संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जानकारी के मुताबिक बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ले में रहने वाले शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक तेज पेट दर्द हुआ था। परिजन उसे खैरी गांव स्थित अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां सुबह तक इलाज कराने के बाद वे उसे घर ले आए। लेकिन घर पहुंचने के कुछ समय बाद ही शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। उसकी बिगड़ती हालत देखकर परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही की आशंका जताई और पुलिस से शिकायत की।

    समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि अस्पताल संचालिका सरिता साहू के कहने पर उनके मददगार सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन उसे फिर इंजेक्शन दिया गया और ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई। परिजनों के मुताबिक ड्रिप चढ़ने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। पुलिस को घटनास्थल से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी। इसके बाद आधी भरी बोतल ड्रिप निडिल इंजेक्शन की खाली शीशी और दवाइयों के रैपर जब्त किए गए थे।

    मंगलवार को ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल बीएमओ डॉ. श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा की टीम ने अस्पताल में रखी दवाओं की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक यहां 23 तरह की एलोपैथिक दवाएं मिलीं जिनमें एक्सपायरी दवाएं और ग्लूकोज की ड्रिप भी शामिल थी। यह आशंका भी जांच के दायरे में है कि शेखर को चढ़ाई गई ड्रिप में मिलाया गया इंजेक्शन एक्सपायरी हो सकता है। इसकी पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही होगी।

    अधिकारियों के अनुसार अस्पताल का आवश्यक रजिस्ट्रेशन नहीं मिला और संचालिका के पास एलोपैथिक इलाज करने की मान्य डिग्री भी नहीं थी। जांच टीम ने सरिता साहू को कई बार मौके पर बुलाया लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के संचालन दवाओं की वैधता और युवक की मौत के कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं की कोई भूमिका थी या नहीं और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

  • डबरा से भोपाल और बैतूल तक फैला फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क, 70 पासपोर्ट की जांच, विदेश गए लोगों का पता लगाने में जुटी STF

    डबरा से भोपाल और बैतूल तक फैला फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क, 70 पासपोर्ट की जांच, विदेश गए लोगों का पता लगाने में जुटी STF


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट दिलाने वाले नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने इस मामले में मुख्य आरोपी रियाल चौधरी और उसके साथी सम्यक बौधी को जेल से वापस पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। दोनों से की जा रही पूछताछ के दौरान पुलिस इस नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों और विदेश यात्राओं से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाने में लगी है। जांच के दो प्रमुख बिंदु हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में पैसा कहां से आया और संदिग्ध पासपोर्ट के जरिए कितने लोग विदेश गए।
    एसटीएफ की जांच में सम्यक बौधी के बैंक खाते अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। अधिकारियों ने उसके बैंक खातों के स्टेटमेंट हासिल कर लिए हैं और अब उनमें हुए लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खातों में रकम किन लोगों ने जमा कराई और किस उद्देश्य से पैसे ट्रांसफर किए गए। इसके साथ ही नकद निकासी का विवरण भी खंगाला जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के बदले किसे कितना कमीशन मिला और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
    इस मामले में गुलाब राय गौतम का बैंक खाता भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रियाल चौधरी कथित तौर पर कमीशन देकर इस खाते का इस्तेमाल करता था और इसमें लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। एसटीएफ अब बैंक रिकॉर्ड और पूछताछ से मिली जानकारी को जोड़कर आर्थिक लेनदेन की पूरी कड़ी तैयार कर रही है। इससे कथित नेटवर्क के वित्तीय संचालन और उसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
    जांच का दूसरा बड़ा पहलू विदेश यात्राओं से जुड़ा है। एसटीएफ ने 70 संदिग्ध पासपोर्ट धारकों का पूरा रिकॉर्ड हासिल करने के लिए पासपोर्ट कार्यालय से डेटा मांगा है। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि इन पासपोर्ट के आधार पर कितने लोग विदेश गए और उनमें से कितने वापस भारत लौटे। यदि कोई व्यक्ति विदेश जाने के बाद वापस नहीं आया है तो उसकी यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
    जांच में यह भी सामने आया है कि सम्यक बौधी ने कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय बताने के लिए उन्हें दो साल से जानने संबंधी शपथ पत्र दिए थे। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि रियाल चौधरी और सम्यक बौधी की मुलाकात कैसे हुई और कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने की योजना किसने तैयार की। इन दस्तावेजों के आधार पर पहचान और निवास संबंधी प्रमाणपत्र कैसे हासिल किए गए इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
    बताया गया है कि डबरा भोपाल और बैतूल के कुछ बौद्ध विहारों तथा मठों के पते इस मामले में सामने आए हैं। एसटीएफ जांच कर रही है कि इन पतों का इस्तेमाल संदिग्ध पासपोर्ट बनवाने के लिए किस तरह किया गया। आधार कार्ड मूल निवासी प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र तैयार कराने में किसी व्यक्ति या सरकारी कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। स्थानीय पुलिस सत्यापन और पासपोर्ट शाखा में दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया भी अधिकारियों के रडार पर है।
    अब बैंक खातों के लेनदेन और पासपोर्ट कार्यालय से मिलने वाले यात्रा रिकॉर्ड के आधार पर एसटीएफ जांच की अगली दिशा तय करेगी। इन जानकारियों से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मददगारों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि मामले में किसकी क्या भूमिका रही है इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।