Author: bharati

  • देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक

    देवदास: एक प्रेम कहानी जिसने दर्द को अमर बना दिया, 16 साल तक लिखने से डरते रहे लेखक


    नई दिल्ली। भारतीय साहित्य और सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जो समय की सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है ‘देवदास’। एक ऐसा किरदार, जिसके दर्द को दर्शकों ने अपना दर्द समझा, जिसकी अधूरी मोहब्बत ने लाखों दिलों को छुआ और जिसकी त्रासदी ने उसे अमर बना दिया।

    देवदास का जन्म वर्ष 1901 में महान साहित्यकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कल्पना में हुआ था। कहा जाता है कि यह कहानी कहीं न कहीं उनके अपने जीवन के अनुभवों और भावनाओं से प्रेरित थी। लेकिन लेखक को इस किरदार को लेकर एक डर था। उन्हें लगता था कि उनका नायक आदर्शवादी नहीं है। वह प्रेम में असफल होता है, शराब का सहारा लेता है और अंततः दुखद मृत्यु को प्राप्त होता है। शायद इसी वजह से शरत चंद्र ने इस रचना को करीब 16 वर्षों तक प्रकाशित नहीं किया।

    आखिरकार 1917 में जब ‘देवदास’ उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो उसने साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। लोगों को इस कहानी में अपना दर्द दिखाई देने लगा। देवदास की अधूरी प्रेम कहानी, पारो के प्रति उसका समर्पण और समाज की बंदिशों के आगे उसकी हार ने पाठकों को भावुक कर दिया।

    साहित्य से निकलकर जब देवदास सिनेमा के पर्दे पर पहुंचा, तो उसकी लोकप्रियता कई गुना बढ़ गई। वर्ष 1928 में इस पर पहली मूक फिल्म बनी। इसके बाद 1936 में महान गायक-अभिनेता के.एल. सहगल ने देवदास को पर्दे पर जीवंत कर दिया। लेकिन 1955 में दिलीप कुमार ने जिस गहराई और संवेदनशीलता से इस किरदार को निभाया, उसने देवदास को भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया।

    साल 2002 में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने इस क्लासिक कहानी को भव्य अंदाज में पेश किया। फिल्म में शाहरुख खान ने देवदास, ऐश्वर्या राय ने पारो और माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया। फिल्म के भावनात्मक दृश्यों और भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद 2009 में अनुराग कश्यप ने आधुनिक अंदाज में ‘देव डी’ बनाकर इस कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

    आज तक ‘देवदास’ पर 14 से अधिक फिल्में और रूपांतरण बन चुके हैं। शायद यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है कि एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह किरदार लोगों के दिलों में जिंदा है। प्रेम, विरह, त्याग और आत्मसंघर्ष का यह प्रतीक भारतीय साहित्य और सिनेमा की सबसे अमर धरोहरों में गिना जाता है।

    देवदास सिर्फ एक पात्र नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है, जो हर उस इंसान को छूती है जिसने कभी प्रेम किया हो, खोया हो या दर्द को करीब से महसूस किया हो।

  • किशोर कुमार का सबसे विवादित गाना: 8 महिला गायिकाओं के बीच अकेले गाया गीत, अश्लीलता के आरोप में हुआ था बैन

    किशोर कुमार का सबसे विवादित गाना: 8 महिला गायिकाओं के बीच अकेले गाया गीत, अश्लीलता के आरोप में हुआ था बैन


    नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं, जिन्होंने अपनी लोकप्रियता के साथ-साथ विवादों के कारण भी खास पहचान बनाई। ऐसा ही एक गीत था फिल्म ‘विधाता’ का ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी, फरियाद सुनाए घड़ी-घड़ी’, जिसे महान गायक किशोर कुमार ने आठ महिला गायिकाओं के साथ मिलकर गाया था। यह गीत अपने समय में इतना चर्चित हुआ कि इसके कुछ बोलों को लेकर विवाद खड़ा हो गया और बाद में इसे दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

    वर्ष 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘विधाता’ उस दौर की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार, संजीव कुमार, शम्मी कपूर, संजय दत्त और अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे जैसे सितारे नजर आए थे। प्रसिद्ध फिल्मकार सुभाष घई द्वारा निर्देशित इस फिल्म का संगीत भी दर्शकों को खूब पसंद आया। फिल्म के सभी गीत सुपरहिट रहे, लेकिन ‘सात सहेलियां खड़ी-खड़ी’ ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं।

    इस गीत की खास बात यह थी कि इसमें किशोर कुमार अकेले पुरुष गायक थे, जबकि उनके साथ आठ महिला गायिकाओं ने अपनी आवाज दी थी। इनमें हेमलता, कंचन, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम, अलका याज्ञनिक, पद्मिनी कोल्हापुरे, उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे और शक्ति कपूर की पत्नी शिवांगी कपूर शामिल थीं। बताया जाता है कि जब किशोर कुमार रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे और वहां एक साथ इतनी महिला गायिकाओं को देखा तो वे चौंक गए। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि वे तो फंस गए हैं। हालांकि संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी और अभिनेता शम्मी कपूर के समझाने पर उन्होंने यह गीत रिकॉर्ड किया।

    गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बक्शी ने लिखे थे। रिकॉर्डिंग के बाद इसे फिल्माया गया और दर्शकों के सामने पेश किया गया। लेकिन रिलीज के बाद गीत के कुछ अंतरों को लेकर आपत्ति जताई गई। आलोचकों ने इसे अश्लील बताया और इसके प्रसारण पर सवाल उठाए। विवाद इतना बढ़ा कि ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने इस गीत के प्रसारण पर रोक लगा दी। हालांकि फिल्म की लोकप्रियता पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।

    दिलचस्प बात यह रही कि जिस गीत को कभी अश्लील बताकर बैन किया गया था, वही समय के साथ हिंदी फिल्म संगीत की चर्चित धरोहर बन गया। आज भी संगीत प्रेमी इस गीत को याद करते हैं और इसे किशोर कुमार के सबसे अनोखे और दुर्लभ गीतों में गिना जाता है। यह गीत न केवल अपनी धुन और प्रस्तुति के लिए बल्कि एक साथ इतनी महिला गायिकाओं के साथ रिकॉर्ड होने के कारण भी संगीत इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

  • Khatron Ke Khiladi 15: टॉप-2 फाइनलिस्ट के नाम लीक! करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच होगी खिताबी जंग?

    Khatron Ke Khiladi 15: टॉप-2 फाइनलिस्ट के नाम लीक! करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच होगी खिताबी जंग?


    नई दिल्ली। रोहित शेट्टी का लोकप्रिय स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। शो का प्रसारण अभी शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में इससे जुड़े कई बड़े अपडेट सामने आने लगे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार शो के टॉप-2 फाइनलिस्ट के नाम भी लीक हो गए हैं, जिसने फैंस की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

    करण वाही और फरहाना भट्ट पहुंचे फाइनल में!
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीजन के टॉप-2 फाइनलिस्ट करण वाही और फरहाना भट्ट बताए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि दोनों कंटेस्टेंट्स ने पूरे सीजन में शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक अपनी जगह बनाने में सफल रहे। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अभिनेता अविनाश मिश्रा फाइनल की रेस में मजबूती से बने हुए थे, लेकिन अंतिम चरण में वह जगह नहीं बना सके। यदि ये दावे सही साबित होते हैं तो ट्रॉफी के लिए सीधी टक्कर करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच देखने को मिल सकती है।

    फिनाले भारत में होने की चर्चा
    एक और बड़ा अपडेट यह सामने आया है कि इस बार शो का ग्रैंड फिनाले दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में नहीं बल्कि भारत में आयोजित किया जा सकता है। हालांकि शो की शूटिंग फिलहाल केप टाउन में ही चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार विजेता की घोषणा शो के टेलीविजन प्रसारण के अंतिम चरण में भारत में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान की जाएगी।

    पहले हफ्ते में नहीं होगा एलिमिनेशन!
    सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार शो के पहले सप्ताह में किसी भी कंटेस्टेंट का एलिमिनेशन नहीं होगा। वहीं दूसरे सप्ताह में सोशल मीडिया स्टार ओरी (ओरहान अवात्रामणि) के बाहर होने की चर्चा है। हालांकि चैनल या मेकर्स की ओर से अभी तक इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    कौन-कौन हैं इस बार प्रतियोगी?
    इस सीजन में कई लोकप्रिय टीवी सितारे और सोशल मीडिया हस्तियां हिस्सा ले रही हैं। प्रतियोगियों की सूची में गौरव खन्ना, रुबीना दिलैक, करण वाही, अविनाश मिश्रा, फरहाना भट्ट, जैस्मिन भसीन, रित्विक धनजानी, अविका गौर, विशाल आदित्य सिंह, हर्ष गुजराल, ओरी, शगुन शर्मा और रुहानिका धवन जैसे नाम शामिल हैं।

  • 21 जून का राशिफल: किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी आर्थिक सावधानी, जानें पूरे दिन का ज्योतिषीय संकेत

    21 जून का राशिफल: किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी आर्थिक सावधानी, जानें पूरे दिन का ज्योतिषीय संकेत


    नई दिल्ली । 21 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार विभिन्न राशियों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आने वाला है। कुछ राशि के जातकों को करियर और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं, जबकि कुछ को आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम बढ़ाने की आवश्यकता होगी। पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य, निवेश और सामाजिक संबंधों पर भी ग्रहों का प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पुराने प्रयासों का लाभ प्राप्त हो सकता है। मित्रों और परिवार का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। व्यापारिक गतिविधियों में भी अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास सफलता दिला सकता है।

    वृष राशि वालों के लिए दिन धीरे-धीरे बेहतर परिणाम देने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से अटके कार्यों में प्रगति के संकेत हैं। प्रशासनिक और सरकारी मामलों में राहत मिल सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से पेशेवर जीवन में मजबूती आएगी। आर्थिक स्थिति में भी सुधार की संभावना है।

    मिथुन राशि के जातकों को कार्यस्थल पर सक्रियता बनाए रखनी होगी। समय पर लिए गए निर्णय भविष्य में लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। सहयोगियों के साथ बेहतर तालमेल कार्यक्षमता बढ़ा सकता है।

    कर्क राशि वालों के लिए अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन लाभकारी रहेगा। पारिवारिक वातावरण संतुलित रहेगा और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सुधार दिखाई दे सकता है। करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं, हालांकि जोखिम भरे निर्णय लेने से पहले पूरी समीक्षा करना आवश्यक रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए दिन उपलब्धियों वाला रह सकता है। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर पाएंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है। अनुशासन बनाए रखना सफलता की कुंजी रहेगा।

    कन्या राशि वालों को वित्तीय मामलों में विशेष सतर्कता रखने की आवश्यकता होगी। खर्चों पर नियंत्रण और बजट प्रबंधन पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा। कार्यक्षेत्र में सामान्य प्रगति बनी रहेगी, लेकिन मेहनत का उचित परिणाम मिलने की संभावना है। विरोधियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखना उचित रहेगा।

    तुला राशि के लिए व्यापार और करियर के क्षेत्र में अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। प्रतिस्पर्धी माहौल में बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा। नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आ सकती है और आर्थिक मामलों में सकारात्मक गति बनी रह सकती है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन सफलता और उत्साह से भरा रहने के संकेत दे रहा है। व्यापारिक योजनाओं को गति मिल सकती है। परिवार और मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। सकारात्मक सोच और संतुलित व्यवहार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दिला सकता है।

    धनु राशि के जातकों को भाग्य का सहयोग मिलने की संभावना है। दीर्घकालिक योजनाओं में प्रगति होगी और आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा। भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना अधिक लाभकारी रहेगा।

    मकर राशि वालों को निवेश और लेन-देन से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जल्दबाजी में किसी अनुबंध या आर्थिक निर्णय से बचना चाहिए। स्वास्थ्य और निजी संबंधों पर ध्यान देना आवश्यक रहेगा। शाम के बाद परिस्थितियां अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती हैं।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए साझेदारी और व्यवसाय से जुड़े नए अवसर सामने आ सकते हैं। सहयोगियों के साथ संबंध मजबूत होंगे। हालांकि दिन के उत्तरार्ध में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, इसलिए महत्वपूर्ण कार्य पहले ही निपटाना बेहतर रहेगा।

    मीन राशि वालों के लिए दिन मेहनत और धैर्य के बल पर सफलता दिलाने वाला साबित हो सकता है। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और पेशेवर जीवन में स्थिरता बनी रहेगी। बातचीत और समझौते के मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी मामलों में लापरवाही से बचना आवश्यक होगा।

    कुल मिलाकर 21 जून का दिन अधिकांश राशियों के लिए अवसरों और सावधानियों का संतुलित मिश्रण लेकर आ रहा है। सोच-समझकर लिए गए निर्णय, संयमित व्यवहार और सकारात्मक दृष्टिकोण दिन को अधिक सफल और लाभकारी बना सकते हैं।

  • क्रिस्पी और चीजी पराठा चिली गार्लिक फ्लेवर, से भरपूर आसान रेसिपी

    क्रिस्पी और चीजी पराठा चिली गार्लिक फ्लेवर, से भरपूर आसान रेसिपी


    नई दिल्ली । सुबह के नाश्ते में अगर रोजाना के सादे पराठों से बोरियत हो गई है तो चिली चीज गार्लिक पराठा एक बेहतरीन और टेस्टी विकल्प हो सकता है। यह पराठा अपने तीखे स्वाद लहसुन की खुशबू और चीज के मेल से इतना स्वादिष्ट बनता है कि इसे बच्चे हों या बड़े सभी बहुत पसंद करते हैं। खासकर सुबह के समय इसे झटपट बनाकर परिवार के लिए एक खास ब्रेकफास्ट तैयार किया जा सकता है।

    इस पराठे को बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं का आटा लेकर उसमें नमक और थोड़ा सा घी मिलाकर अच्छे से गूंथ लें। पानी की मदद से नरम आटा तैयार करें और इसे दस से पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि यह अच्छी तरह सेट हो जाए। इस बीच पराठे का स्वाद बढ़ाने के लिए दो अलग अलग मिश्रण तैयार किए जाते हैं।

    पहले मिश्रण में पिघला हुआ मक्खन बारीक कटा हुआ लहसुन और हरा धनिया मिलाया जाता है जिससे एक फ्लेवरफुल गार्लिक बटर तैयार होता है। दूसरे मिश्रण में कद्दूकस किया हुआ मोजेरेला चीज बारीक कटी हरी मिर्च चिली फ्लेक्स और हरा धनिया मिलाकर स्टफिंग तैयार की जाती है। यह स्टफिंग पराठे को स्पाइसी और चीजी स्वाद देती है।

    अब गूंथे हुए आटे से छोटी लोई बनाकर उसे सूखे आटे की मदद से गोल बेल लें। बेली हुई रोटी पर पहले तैयार किया गया गार्लिक बटर चारों तरफ अच्छे से लगा दें। इसके बाद बीच में तैयार की गई चीज और मिर्च की स्टफिंग भर दें। अब रोटी के किनारों को उठाकर बीच में लाकर पोटली की तरह बंद कर दें ताकि स्टफिंग बाहर न निकले।

    इसके बाद इस पोटली को हल्के हाथों से फिर से बेलकर पराठे का आकार दें। अब तवा गर्म करें और इस पर बेली हुई रोटी डालें। मध्यम आंच पर पराठे को दोनों तरफ से सेकें। जब एक तरफ हल्का सुनहरा रंग आ जाए तो उसे पलट दें और दोनों तरफ मक्खन लगाकर अच्छे से क्रिस्पी होने तक सेकें।

    पराठा जब गोल्डन ब्राउन और क्रिस्पी हो जाए तो इसे तवे से उतार लें। आपका चिली चीज गार्लिक पराठा अब पूरी तरह तैयार है। इसे गर्मागर्म हरी चटनी दही या सॉस के साथ परोसा जा सकता है। इसका तीखा और चीजी स्वाद सुबह के नाश्ते को खास बना देता है और पूरे परिवार को पसंद आता है।

  • धरती का सबसे लंबा दिन ,21 जून के पीछे खगोलीय और धार्मिक महत्व

    धरती का सबसे लंबा दिन ,21 जून के पीछे खगोलीय और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । हर साल 21 जून को पृथ्वी पर सबसे लंबा दिन माना जाता है और इस दिन सूर्य सबसे अधिक समय तक आकाश में दिखाई देता है। यह केवल एक सामान्य खगोलीय घटना नहीं है बल्कि इसके पीछे पृथ्वी की गति और उसकी संरचना से जुड़ा गहरा वैज्ञानिक कारण है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में दिन सबसे लंबा होता है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में साल की सबसे लंबी रात दर्ज की जाती है। भारत समेत कई देशों में इस दिन को ग्रीष्म संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है और साथ ही अपनी धुरी पर भी घूमती रहती है। लेकिन पृथ्वी अपनी धुरी पर सीधी नहीं बल्कि लगभग साढ़े तेईस डिग्री झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण वर्षभर दिन और रात की लंबाई में बदलाव होता रहता है और ऋतुओं का निर्माण होता है। जब पृथ्वी अपने परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ते हुए 21 जून के आसपास की स्थिति में आती है तब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिकतम झुकाव पर होता है।

    इस स्थिति में सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लगभग नब्बे डिग्री के कोण पर पड़ती हैं जिसके कारण उत्तरी गोलार्ध को अधिक समय तक सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है। इसी वजह से भारत अमेरिका यूरोप और एशिया के कई हिस्सों में दिन की अवधि सामान्य दिनों की तुलना में काफी लंबी हो जाती है और रात सबसे छोटी हो जाती है। इस दिन सूर्य लगभग चौदह घंटे तक आकाश में दिखाई देता है जिससे इसे वर्ष का सबसे लंबा दिन कहा जाता है।

    21 जून से जुड़ी एक और रोचक घटना भी सामने आती है जिसे जीरो शैडो डे कहा जाता है। इस दिन दोपहर के समय कुछ स्थानों पर सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है जिससे वस्तुओं की परछाई लगभग गायब हो जाती है या बहुत छोटी दिखाई देती है। यह घटना पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और सूर्य की स्थिति के कारण होती है और इसे खगोलीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    दूसरी ओर इसी समय दक्षिणी गोलार्ध में पूरी तरह विपरीत स्थिति होती है। वहां सूर्य की रोशनी सबसे कम समय के लिए मिलती है और रात सबसे लंबी होती है। इस समय वहां सर्दियों की शुरुआत मानी जाती है जबकि उत्तरी गोलार्ध में गर्मी अपने चरम पर होती है।

    भारतीय परंपरा और हिंदू पंचांग के अनुसार 21 जून के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं। इसे एक आध्यात्मिक परिवर्तन के रूप में भी देखा जाता है। दक्षिणायन की अवधि को योग ध्यान और तपस्या के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है जबकि उत्तरायण को शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। यह विभाजन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    इसी खगोलीय घटना से जुड़े सांस्कृतिक महत्व के कारण 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस समय शरीर और मन अधिक संतुलित रहते हैं और ध्यान योग साधना के लिए वातावरण अनुकूल होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी समय भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का ज्ञान दिया था जिससे उन्हें आदियोगी और आदिगुरु कहा गया। इस प्रकार 21 जून केवल एक लंबा दिन नहीं बल्कि विज्ञान खगोल और संस्कृति का अद्भुत संगम है जो पृथ्वी की गति से लेकर मानव जीवन की परंपराओं तक गहरा प्रभाव डालता है।

  • घंटी बजाने के सही नियम ,से घर में बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा

    घंटी बजाने के सही नियम ,से घर में बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व माना गया है और घर के मंदिर में नियमित रूप से पूजा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। पूजा के दौरान घंटी बजाना एक महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मानी जाती है। इसे केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम भी माना जाता है। घर के लगभग हर मंदिर में घंटी रखी जाती है और भक्त पूजा आरंभ करते समय भगवान को भोग लगाते समय और आरती के समय इसे बजाते हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार घंटी की ध्वनि से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। ऐसा माना जाता है कि घंटी की आवाज से मन एकाग्र होता है और ध्यान भटकता नहीं है। पूजा के समय मन का स्थिर होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि पूजा का उद्देश्य मन को शांति और भक्ति की ओर ले जाना होता है। घंटी की ध्वनि इसे आसान बनाती है और व्यक्ति का ध्यान सीधे भगवान की ओर केंद्रित हो जाता है।

    कई लोग यह जानना चाहते हैं कि घर के मंदिर में घंटी कितनी देर तक बजानी चाहिए। धार्मिक शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार घंटी को लंबे समय तक लगातार बजाने की आवश्यकता नहीं होती है। इसे केवल कुछ क्षणों के लिए बजाना ही पर्याप्त माना गया है। जब भी पूजा आरंभ की जाती है या भगवान को भोग लगाया जाता है तभी घंटी बजानी चाहिए। इसे भक्ति भाव के साथ सीमित समय के लिए बजाना ही सही माना गया है।

    परंपरागत मान्यता के अनुसार घंटी को एक बार या तीन बार या पांच बार बजाना शुभ माना जाता है। इनमें से पांच बार घंटी बजाना सबसे अधिक शुभ माना जाता है। इसका उद्देश्य केवल ध्वनि उत्पन्न करना नहीं बल्कि भक्ति भावना को जागृत करना और वातावरण को पवित्र बनाना होता है। घंटी बजाते समय मन पूरी तरह शांत और श्रद्धा से भरा होना चाहिए ताकि उसका प्रभाव सकारात्मक रूप से वातावरण में फैल सके।

    घंटी बजाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक माना गया है। सबसे पहले यह जरूरी है कि व्यक्ति का मन शांत और स्थिर हो। जल्दबाजी या लापरवाही से घंटी नहीं बजानी चाहिए। इसे बहुत तेज आवाज में या बार बार बजाने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे पूजा का ध्यान भंग हो सकता है।

    घर के मंदिर में पूजा का मुख्य उद्देश्य मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना होता है। इसलिए घंटी बजाते समय भी इसी भावना को बनाए रखना चाहिए। घंटी की ध्वनि को केवल एक औपचारिकता के रूप में नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक साधन के रूप में देखना चाहिए। इससे घर का वातावरण शांत और पवित्र बना रहता है।

    जो लोग नियमित रूप से घर में पूजा करते हैं उनके लिए घंटी बजाना एक महत्वपूर्ण अभ्यास माना गया है। यह न केवल धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाता है बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को स्थिर और शांत बनाता है। सही विधि से और सही समय पर घंटी बजाने से पूजा का प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है और घर में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है।

  • होर्मुज से जहाजों की लंबी कतार, नियम सख्त कर ईरान ने संभाली स्थिति

    होर्मुज से जहाजों की लंबी कतार, नियम सख्त कर ईरान ने संभाली स्थिति


    नई दिल्ली । होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही एक बार फिर शुरू होते ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लंबे समय तक सीमित संचालन और सुरक्षा कारणों से बाधित रहने के बाद जब जहाजों को गुजरने की अनुमति मिली तो अचानक बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाज एक साथ कतार में लग गए। इससे समुद्री मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बन गई है और संचालन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं ताकि आवाजाही सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से हो सके।

    नए नियमों के तहत अब किसी भी जहाज को होर्मुज से गुजरने के लिए कम से कम अड़तालीस घंटे पहले ट्रांजिट आवेदन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही जहाज को पूरी यात्रा के दौरान संबंधित अथॉरिटी से लगातार संपर्क बनाए रखना होगा। यदि किसी भी स्तर पर संपर्क या प्रक्रिया में चूक होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज के मालिक और ऑपरेटर पर होगी। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी जहाजों को अपनी यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे मार्ग यात्रा समय माल की प्रकृति और संपर्क विवरण पहले से साझा करना होगा।

    होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद बड़ा है। यह वही मार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के प्रमुख तेल और गैस निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। वैश्विक स्तर पर खाड़ी देशों के बड़े हिस्से का ऊर्जा निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं। भारत के लिए भी कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आता है जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस जलमार्ग पर आवाजाही बेहद सीमित हो गई थी। कई जहाजों को सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया था और कुछ पर हमले का खतरा भी बना हुआ था। युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान समुद्र में माइन्स बिछाने जैसी घटनाओं ने भी जहाजों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी थी। अब जब धीरे धीरे संचालन बहाल किया जा रहा है तो एक साथ बड़ी संख्या में जहाजों के पहुंचने से दबाव बढ़ गया है।

    नई व्यवस्था के तहत पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने ट्रांजिट प्रक्रिया को डिजिटल और नियंत्रित प्रणाली से जोड़ दिया है। जहाजों को पहले से ऑनलाइन आवेदन करना होगा और यात्रा से जुड़ी सभी जानकारियां सही समय पर उपलब्ध करानी होंगी। इसके बाद ही उन्हें गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अथॉरिटी का कहना है कि यह कदम सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी दुर्घटना की संभावना को कम करने के लिए उठाया गया है।

    समझौते के अनुसार शुरुआती साठ दिनों तक किसी भी जहाज से मार्ग उपयोग के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि में सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी सभी लागत ईरान सरकार वहन करेगी ताकि व्यापारिक आवाजाही को सुचारू रूप से दोबारा स्थापित किया जा सके।

    हाल के दिनों में कुछ ही जहाज इस मार्ग से गुजर पाए हैं जबकि पहले की तुलना में यह संख्या बहुत कम रही थी। अब जब क्षेत्रीय स्थिति में बदलाव आ रहा है तो होर्मुज फिर से वैश्विक व्यापार का केंद्र बनता दिख रहा है लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा और प्रबंधन की चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं।

  • चुनावी हार और संगठनात्मक संकट के बीच TMC पर फंड का बड़ा झटका, 440 करोड़ रुपये वाले तीन बैंक खाते फ्रीज

    चुनावी हार और संगठनात्मक संकट के बीच TMC पर फंड का बड़ा झटका, 440 करोड़ रुपये वाले तीन बैंक खाते फ्रीज

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस को संगठनात्मक चुनौतियों के बीच अब वित्तीय संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के तीन बैंक खातों पर रोक लगाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संगठन के वित्तीय संचालन को लेकर भी नई बहस शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, पार्टी के जिन बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें बड़ी राशि जमा बताई जा रही है। यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब संगठन के भीतर नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर मतभेदों की खबरें पहले से ही राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बनी हुई हैं। पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बीच यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब पार्टी से जुड़े एक पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी ने बैंक प्रबंधन को पत्र लिखकर खातों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की। पत्र में संगठन के नेतृत्व और वित्तीय नियंत्रण को लेकर गंभीर मतभेदों का हवाला दिया गया। साथ ही यह आशंका भी जताई गई कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी के वित्तीय संसाधनों के उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है। इसी आधार पर खातों में किसी भी प्रकार के लेनदेन को अस्थायी रूप से रोकने का अनुरोध किया गया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े राजनीतिक दल के बैंक खातों पर रोक लगना एक असाधारण स्थिति मानी जाती है। विशेष रूप से तब, जब मामला पार्टी के भीतर नेतृत्व और अधिकारों के विवाद से जुड़ा हो। इस तरह की परिस्थितियां संगठन की प्रशासनिक और चुनावी गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती हैं, क्योंकि अधिकांश राजनीतिक दल अपने दैनिक संचालन और कार्यक्रमों के लिए संस्थागत वित्तीय संसाधनों पर निर्भर रहते हैं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्टी के पास बड़ी वित्तीय संपत्ति और निवेश मौजूद हैं। हाल के वर्षों में संगठन ने अपने कोष और संपत्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की थी। ऐसे में खातों पर रोक लगने का असर केवल बैंकिंग लेनदेन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह संगठन की रणनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।

    इस घटनाक्रम ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को भी हवा दे दी है। विपक्षी दलों ने मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं और पार्टी के अंदरूनी हालात पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का दावा है कि यह घटनाक्रम संगठन के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों और प्रबंधन संबंधी समस्याओं को उजागर करता है। वहीं पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि आंतरिक मामलों का समाधान संगठनात्मक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, राजनीतिक दलों में नेतृत्व परिवर्तन, संगठनात्मक पुनर्गठन या आंतरिक विवाद नई बात नहीं है, लेकिन जब ऐसे विवाद वित्तीय संस्थानों और संपत्तियों के नियंत्रण तक पहुंच जाते हैं, तब उनका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक हो जाता है। ऐसे मामलों में कानूनी, प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

    फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि खातों पर लगी रोक कितने समय तक जारी रहेगी और नेतृत्व विवाद का समाधान किस रूप में सामने आएगा। यदि मामला कानूनी या संगठनात्मक स्तर पर लंबा खिंचता है, तो इसका असर पार्टी की भविष्य की गतिविधियों और राजनीतिक रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल वित्तीय विवाद नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व नियंत्रण की लड़ाई का भी संकेत देता है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाले फैसले और प्रतिक्रियाएं पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं। फिलहाल पार्टी के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और वित्तीय संचालन को सामान्य करने की दोहरी चुनौती खड़ी दिखाई दे रही है।

  • 20 साल पुराने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में नया मोड़, सभी आरोपी बरी होने के बाद CBI पहुंचाएगी मामला हाई कोर्ट

    20 साल पुराने पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में नया मोड़, सभी आरोपी बरी होने के बाद CBI पहुंचाएगी मामला हाई कोर्ट

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित पवनराजे निंबालकर हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। लगभग दो दशक पुराने इस मामले में मुंबई की सेशंस कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का निर्णय लिया है। इससे यह मामला एक बार फिर न्यायिक समीक्षा के दायरे में आने जा रहा है।

    यह मामला वर्ष 2006 में हुई उस सनसनीखेज घटना से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस से जुड़े नेता पवनराजे निंबालकर की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हमले में उनके वाहन चालक की भी जान चली गई थी। उस समय इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की थी और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच बाद में केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई थी।

    जांच के दौरान एजेंसी ने कई वर्षों तक साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान दर्ज करने और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का काम किया। लंबी जांच प्रक्रिया के बाद आरोपपत्र दायर किया गया, जिसमें कई आरोपियों के नाम शामिल किए गए। मामले में एक आरोपी को सरकारी गवाह बनाए जाने की भी चर्चा रही, जिसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया था।

    इसके बाद अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए तथा अनेक दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे गए। कई वर्षों तक चले इस मुकदमे के बाद अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए फैसला सुनाया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया गया।

    हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी इस निष्कर्ष से सहमत नहीं है। एजेंसी का मानना है कि जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य और गवाहियों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला पर्याप्त रूप से स्थापित किया गया था। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल के दौरान प्रस्तुत सामग्री को ध्यान में रखते हुए आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों का अलग मूल्यांकन आवश्यक है।

    इसी कारण एजेंसी ने अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब विस्तृत अपील तैयार की जाएगी, जिसमें ट्रायल कोर्ट के निर्णय पर विभिन्न आधारों पर सवाल उठाए जा सकते हैं। इसके बाद उच्च न्यायालय यह तय करेगा कि मामले में पुनर्विचार की आवश्यकता है या नहीं।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपराधिक मामलों में बरी होने के आदेश के खिलाफ अपील करना असामान्य नहीं है, विशेषकर तब जब जांच एजेंसी को लगता हो कि उपलब्ध साक्ष्यों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं हुआ है। ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय ट्रायल रिकॉर्ड, साक्ष्यों और कानूनी तर्कों का पुनः परीक्षण कर सकता है।

    पवनराजे निंबालकर हत्याकांड लंबे समय से महाराष्ट्र के चर्चित राजनीतिक और आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इस मामले में आए हालिया फैसले और उसके बाद अपील की तैयारी ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मामले में आगे किस दिशा में कानूनी प्रक्रिया बढ़ती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई न केवल इस मामले के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि लंबे समय से लंबित इस प्रकरण के कानूनी निष्कर्ष को भी नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई नई न्यायिक प्रक्रिया पर राजनीतिक और कानूनी दोनों वर्गों की नजर बनी हुई है।