Author: bharati

  • तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

    तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे युवा, इंदौर में भाजपा की यात्रा में दिखा जोरदार उत्साह..

     मध्य प्रदेश:  के इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बड़ी तिरंगा यात्रा निकाली गई। टंट्या भील चौराहे से शुरू हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, युवा, नेता और आम नागरिक शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लेकर लोग देशभक्ति के नारे लगाते हुए शहर की सड़कों से आगे बढ़े।

    यात्रा के दौरान कई स्थानों पर तिरंगे नजर आए और माहौल में देशभक्ति का रंग दिखाई दिया। आयोजन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी की ओर से बड़े जनसंपर्क और संगठनात्मक सक्रियता के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।

    इंदौर में यह यात्रा ऐसे समय निकाली गई, जब शहर का टंट्या भील चौराहा पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां युवाओं की ओर से शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा की तिरंगा यात्रा को राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    हालांकि यात्रा में किसी एक मुद्दे को केंद्र में रखने के बजाय राष्ट्रभक्ति को प्रमुख विषय बनाया गया। कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण शहर में कई जगह आयोजन को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।

    यात्रा में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अलावा विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत कई नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम नागरिक भी यात्रा का हिस्सा बने। इससे आयोजन का दायरा केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा।

    तिरंगा यात्रा में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में युवा तिरंगा लेकर आगे बढ़ते नजर आए। भाजपा की ओर से युवाओं की इस भागीदारी को संगठन के प्रति समर्थन और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।

    टंट्या भील चौराहे पर हाल में हुए प्रदर्शन के बाद भाजपा की ओर से निकाली गई यह यात्रा शहर की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। एक ओर जहां युवाओं से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर भाजपा ने तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रभक्ति को केंद्र में रखते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। सड़क पर तिरंगा लेकर चल रहे लोगों और देशभक्ति के नारों से माहौल में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भाजपा ने संगठन की सक्रियता के साथ युवाओं और आम लोगों की भागीदारी को भी सामने रखा।

    इंदौर में स्वतंत्रता दिवस के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के बीच भाजपा की यह तिरंगा यात्रा राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से चर्चा में रही। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक रूप दिया और शहर में राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के बीच इसकी अलग पहचान बनी।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित


    मध्य प्रदेश:
    के उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह दशहरा मैदान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई। इसके बाद प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने ध्वजारोहण किया। तिरंगा फहराए जाने के बाद राष्ट्रगान हुआ और परेड का आयोजन किया गया।

    ध्वजारोहण के बाद प्रभारी मंत्री ने परेड की सलामी ली। समारोह में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्कूली विद्यार्थी और शहर के नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया गया।

    दशहरा मैदान पर ध्वजारोहण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, डीआईजी नवनीत भसीन, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और सांसद अनिल फिरोजिया सहित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके परिजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    ध्वजारोहण के बाद समारोह में परेड निरीक्षण और मार्च पास्ट हुआ। इसके साथ ही परेड कमांडरों से परिचय कराया गया। कार्यक्रम में हर्ष फायर के बाद राष्ट्रगान और मध्य प्रदेश गान भी हुआ। स्वतंत्रता दिवस समारोह की निर्धारित गतिविधियों के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

    समारोह में स्कूली विद्यार्थियों ने पीटी का प्रदर्शन किया। इसके बाद बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति गीतों पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति का संदेश दिया।

    कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। इसके अलावा कारगिल शहीदों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया। देहदान करने वाले लोगों के परिजनों का भी समारोह में सम्मान किया गया।

    सम्मान समारोह स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। शहीद परिवारों और अन्य सम्मानित लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम और देश के लिए योगदान देने वाले लोगों को याद किया गया।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय भावना, देश के लिए बलिदान और सामाजिक योगदान से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    दशहरा मैदान पर आयोजित समारोह में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी भी शामिल हुए। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और परेड के कारण कार्यक्रम में विविध गतिविधियां देखने को मिलीं।

    उज्जैन के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह को एक साथ शामिल किया गया। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की और परेड की सलामी ली। इसके बाद विभिन्न प्रस्तुतियों और सम्मान कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा।

    इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों और कारगिल शहीदों के परिवारों का सम्मान कर उनके योगदान को याद किया गया। स्कूली बच्चों ने पीटी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए समारोह में भागीदारी की। बड़ी संख्या में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मौजूदगी में उज्जैन का मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह संपन्न हुआ।

  • अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री व संगीतकार सबा आजाद के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अटकलें तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों कलाकारों के रिश्ते में बदलाव को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं की मुख्य वजह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई कुछ कथित तस्वीरें और प्रोफाइल बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर एक नेटवर्किंग ऐप से जुड़े प्रोफाइल की तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन की तस्वीर और उनके पेशे का विवरण दर्ज है। इन वायरल तस्वीरों के आधार पर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि अभिनेता और सबा आजाद के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, प्रसारित की जा रही इन जानकारियों और तस्वीरों की सत्यता तथा प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ऑनलाइन मंचों पर इन खबरों के सामने आने के बाद प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग इन अफवाहों के आधार पर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेता के कई प्रशंसकों ने उनका बचाव किया है। प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना अनुचित है और संभव है कि यह किसी फर्जी प्रोफाइल या पुरानी जानकारी का परिणाम हो।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन और सबा आजाद के बीच संबंधों की खबरें पहली बार वर्ष 2021 के अंत में सामने आई थीं। इसके बाद वर्ष 2022 की शुरुआत में दोनों को कई सार्वजनिक स्थलों और कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर आधिकारिक रूप से बातें सामने आईं। दोनों कलाकारों को अक्सर विभिन्न फिल्म समारोहों, पारिवारिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा जाता रहा है, जहां उनकी बॉन्डिंग की काफी सराहना भी की जाती थी।

    ऋतिक रोशन के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2000 में सुजैन खान से विवाह किया था। हालांकि, वर्ष 2014 में दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया था। इसके बाद से ही ऋतिक रोशन अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सबा आजाद भी फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं, जो अभिनय के साथ-साथ संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

    वर्तमान में प्रसारित हो रही इन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया दावों पर ऋतिक रोशन या सबा आजाद की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दोनों ही कलाकारों ने इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटीज के व्यक्तिगत जीवन को लेकर अक्सर इस तरह की निराधार अफवाहें उड़ती रहती हैं और जब तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को महज एक अटकलबाजी ही माना जाना चाहिए।

  • मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    मिस वर्ल्ड की ग्लैमरस छवि बदलकर ऐश्वर्या राय को बनाया ताल की मानसी, निर्देशक सुभाष घई ने पुरानी यादें कीं ताजा

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शुमार संगीत आधारित रोमांटिक ड्रामा फिल्म ताल के प्रदर्शन को 27 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। इस अवसर पर फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म निर्माण और कलाकारों के चयन से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने संस्मरण साझा किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से अभिनेत्री ऐश्वर्या राय और अभिनेता अक्षय खन्ना की कास्टिंग के दौरान आई चुनौतियों और अनुभवों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

    सुभाष घई ने बताया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार मानसी के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो न केवल अभिनय में निपुण हो बल्कि जटिल नृत्य शैलियों को भी सहजता से पर्दे पर उतार सके। उस समय ऐश्वर्या राय मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने के बाद सौंदर्य और ग्लैमर जगत में एक स्थापित पहचान बना चुकी थीं। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान ने सुभाष घई को इस भूमिका के लिए ऐश्वर्या राय का नाम सुझाया था।

    फिल्म में ऐश्वर्या राय के किरदार को प्रामाणिक बनाने के लिए सुभाष घई ने उनकी सौंदर्य प्रतियोगिता वाली छवि को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया था। उन्होंने अभिनेत्री से कहा था कि फिल्म के शुरुआती हिस्से में उन्हें बिना किसी मेकअप के एक साधारण और सहज ग्रामीण युवती के रूप में दिखना होगा। इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य उनकी ग्लैमरस छवि को हटाकर दर्शक का ध्यान पूरी तरह उनके अभिनय और किरदार की गहराई पर केंद्रित करना था।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में अक्षय खन्ना के चयन का किस्सा भी काफी दिलचस्प है। सुभाष घई के अनुसार, अक्षय खन्ना के पिता और दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना उन्हें अपने साथ लेकर आए थे। अक्षय खन्ना के चेहरे की गंभीरता और उनके अभिनय में मौजूद गहराई को देखते हुए सुभाष घई ने उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुन लिया। उस समय अक्षय खन्ना अपने करियर के शुरुआती चरण में थे, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया।

    वर्ष 1999 में रिलीज हुई फिल्म ताल न केवल अपनी मनोरम कहानी और शानदार अभिनय के लिए जानी जाती है, बल्कि एआर रहमान द्वारा तैयार किए गए इसके सदाबहार संगीत ने भी इतिहास रचा था। अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के अभिनय से सजी इस फिल्म को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारी व्यावसायिक सफलता मिली थी। फिल्म के गीत आज भी दर्शकों और संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

    इस कल्ट क्लासिक फिल्म के 27 साल पूरे होने के अवसर पर सुभाष घई द्वारा साझा की गई इन यादों ने एक बार फिर हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर को ताजा कर दिया है। ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना के करियर के लिए यह फिल्म एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, जिसने उन्हें उद्योग में एक मजबूत पहचान दिलाई।

  • 'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..

    'कौन हैं आप और कहां जा रहे हैं?' केबीसी में अमिताभ बच्चन ने खोला धर्मेंद्र के घर का बड़ा राज..


    नई दिल्ली। 
    टेलीविज़न के लोकप्रिय ज्ञान आधारित शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन के दौरान भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने प्रिय मित्र और दिवंगत दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद करते हुए एक बेहद भावुक और दिलचस्प संस्मरण साझा किया। उन्होंने शो में धर्मेंद्र के सरल स्वभाव, आतिथ्य सत्कार और उनके विशाल हृदय की जमकर सराहना की।

    अमिताभ बच्चन ने बताया कि धर्मेंद्र का निवास स्थान हमेशा हर किसी के लिए खुला रहता था। उनके घर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत बेहद अपनेपन और आत्मीयता के साथ किया जाता था। धर्मेंद्र की इसी दरियादिली का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब खुद धर्मेंद्र को भी अपने घर में आने-जाने वाले मेहमानों की पूरी संख्या का अंदाजा नहीं रहता था।

    संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने बताया कि एक बार धर्मेंद्र ने अपने ही घर की सीढ़ियों पर चार-पांच अनजान लोगों को चढ़ते हुए देखा। जब उन्होंने उत्सुकता से उनसे पूछा कि वे कौन हैं और कहां जा रहे हैं, तो उन लोगों ने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि वे गांव से आए हैं। धर्मेंद्र के घर का माहौल ऐसा था जहां कोई भी व्यक्ति बिना किसी हिचकिचाहट के आ-जा सकता था और उनका घर सबके लिए हमेशा खुला रहता था।

    भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की जोड़ी को हमेशा से ही गहरी दोस्ती की मिसाल माना जाता रहा है। यद्यपि धर्मेंद्र फिल्म उद्योग में अमिताभ बच्चन से वरिष्ठ थे, लेकिन दोनों के बीच का संबंध बेहद आत्मीय रहा। दोनों कलाकारों ने कई यादगार फिल्मों में एक साथ अभिनय किया है। विशेष रूप से 1975 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में जय और वीरू के उनके किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि आज भी सच्ची दोस्ती की मिसाल देने के लिए इन्हीं किरदारों का नाम लिया जाता है।

    गौरतलब है कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन नवंबर 2025 में हुआ था। उनके जाने से न केवल उनका परिवार, बल्कि संपूर्ण फिल्म उद्योग और उनके करोड़ों प्रशंसक गहरे शोक में डूब गए थे। हिंदी सिनेमा के कई बड़े कलाकार धर्मेंद्र को अपने अभिभावक और पिता समान मानते थे, और उनकी कमी आज भी पूरी इंडस्ट्री में महसूस की जाती है।

    हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज हुई फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में भी धर्मेंद्र के पुत्र और अभिनेता सनी देओल ने अपने पिता को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की है। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस भावुक फिल्म की शुरुआत में ही महान अभिनेता को याद किया गया है।

    अमिताभ बच्चन द्वारा शो के दौरान साझा की गई यह याद दर्शाती है कि धर्मेंद्र केवल पर्दे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक महान और बड़े दिल वाले इंसान थे, जिनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में तरोताजा हैं।

  • सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं

    सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं


    नई दिल्ली। 
    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के विभाजन की त्रासदी और मानवीय संवेदनाओं को उजागर करने वाली नई बॉलीवुड फिल्म बंटवारा 1947 सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने आ चुकी है। प्रसिद्ध निर्देशक राजकुमार संतोषी के कुशल निर्देशन में तैयार की गई यह फिल्म भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौर पर आधारित एक बेहद संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म प्रसिद्ध नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई’ पर आधारित है और इसमें ऐतिहासिक परिदृश्य के साथ मानवीय रिश्तों की मिसाल पेश की गई है।

    कहानी की शुरुआत 14 अगस्त 1947 के घटनाक्रम से होती है, जब देश की आजादी की घोषणा के समय मेरठ में रहने वाला सिकंदर मिर्जा का परिवार जश्न की तैयारियों में जुटा होता है। हालांकि, अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कारण मिर्जा को अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लाहौर पलायन करने का कठिन फैसला लेना पड़ता है। लाहौर पहुंचने पर शहर की राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच उन्हें हबीब अंसारी नामक मित्र का सहयोग मिलता है, जिनकी मदद से मिर्जा परिवार को रहने के लिए एक हवेली मिल जाती है।

    इस हवेली में पहले से ही एक बुजुर्ग हिंदू महिला रह रही होती है। फिल्म का मुख्य ताना-बाना इसी बुजुर्ग महिला, जिन्हें परिवार प्यार से माई कहकर संबोधित करता है, और मुस्लिम मिर्जा परिवार के बीच विकसित होते आत्मीय संबंधों के इर्द-गिर्द बुना गया है। विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक दबाव के बावजूद सिकंदर मिर्जा उस बुजुर्ग महिला की रक्षा का जिम्मा उठाते हैं। यह कहानी दर्शकों को बेहद भावुक करती है और स्क्रीन पर विभाजन का दर्द तथा मानवीय आत्मीयता को बखूबी उकेरा गया है।

    अभिनय के दृष्टिकोण से मुख्य कलाकार सनी देओल अपने चिरपरिचित तेवर और संजीदा अंदाज में नजर आए हैं। उन्होंने अपने किरदार के माध्यम से जहां एक तरफ गुस्सा और दृढ़ता दिखाई है, वहीं माई के प्रति सुरक्षात्मक रवैया भी बखूबी निभाया है। लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी अपनी प्रभावी भूमिका से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। दोनों ही कलाकारों का अभिनय कहानी को एक मजबूती प्रदान करता है।

    वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने फिल्म में माई का केंद्रीय किरदार निभाया है। बंटवारे की हिंसा में अपनों को खोने का दुख और अपना घर न छोड़ने की जिद्द को उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से जीवित कर दिया है। इसके अलावा, अली फजल ने एक शायर और शांतिप्रिय नागरिक के रूप में प्रभावशाली काम किया है, जो हर विषम परिस्थिति में अमन की बात करता है। वहीं नकारात्मक भूमिका में नजर आए अभिमन्यु सिंह ने अपने सशक्त प्रदर्शन से खलनायक के रूप में गहरी छाप छोड़ी है।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के पुत्र करण देओल भी नजर आते हैं, हालांकि उनका स्क्रीन टाइम अपेक्षाकृत कम रखा गया है। फिल्म का पहला हाफ जहां कहानी की पृष्ठभूमि और भावुक लम्हों को स्थापित करता है, वहीं दूसरे हाफ में सनी देओल का ट्रेडमार्क एक्शन देखने को मिलता है। एक्शन दृश्यों में बग्गी की दौड़ और दुश्मनों से मुकाबले के सीन शामिल हैं, जो एक्शन प्रेमियों को पसंद आ सकते हैं।

    सिनेमाई निर्माण और प्रस्तुतीकरण के लिहाज से फिल्म दर्शकों को बोर नहीं होने देती। संवाद अदायगी और पटकथा लेखन में ऐतिहासिक गंभीरता बनाए रखी गई है। विभाजन के उस भयावह दौर को बड़े पर्दे पर एक भावुक और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में निर्माण टीम पूरी तरह सफल नजर आ रही है।

    कुल मिलाकर, बंटवारा 1947 एक ऐसी सिनेमाई कृति है जो केवल अतीत के जख्मों को याद नहीं दिलाती, बल्कि संकट के समय इंसानियत की मिसाल भी पेश करती है। बेहतरीन अभिनय, मजबूत निर्देशन और एक्शन का संतुलन इसे एक बार देखने लायक फिल्म बनाता है।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा श्रृंगार किया गया। शनिवार तड़के हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया, सफेद और हरे रंगों से सजाया गया। इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंदिर के कपाट तड़के 2.30 बजे खोले गए। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत से अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न हुई।

    पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक और पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार शुरू हुआ। इस दौरान भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों के साथ भगवान का अलंकरण किया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के कारण इस बार श्रृंगार में तिरंगे के रंगों को प्रमुखता दी गई। बाबा महाकाल के मस्तक पर केसरिया, सफेद और हरे रंग का तिरंगा त्रिपुंड लगाया गया। इसके साथ रजत मुकुट पर भारत के तिरंगे का प्रतीक भी सजाया गया।

    श्रृंगार के दौरान भगवान के दोनों ओर हाथी के आभूषण लगाए गए। इसके अलावा रंग-बिरंगी पुष्प मालाओं से भी बाबा महाकाल का अलंकरण किया गया। भस्म आरती की धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजन और श्रृंगार की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

    भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को विभिन्न रजत आभूषणों से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इसके साथ पुष्प मालाओं और सुगंधित फूलों से भी भगवान का श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया और फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए इस विशेष श्रृंगार में धार्मिक परंपरा के साथ तिरंगे रंगों की झलक देखने को मिली।

    मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के बीच श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन किए।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने नंदी के कान के समीप अपनी मनोकामना व्यक्त की और आशीर्वाद मांगा।

    आरती के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे रंगों में सजे बाबा महाकाल के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए इस दिन के धार्मिक आयोजन की खास झलक रहे।

  • भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प


    मध्य प्रदेश
    : में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तिरंगा फहराया और इसके बाद परेड की सलामी ली। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे और पूरे आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण के बाद देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अमर शहीदों को नमन किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ध्वजारोहण और परेड की सलामी समारोह के प्रमुख कार्यक्रम रहे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे।

    मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी लेकर समारोह में शामिल दलों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में परेड को विशेष महत्व दिया गया। अनुशासन और राष्ट्रीय भावना से जुड़े इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

    भोपाल में आयोजित इस समारोह के दौरान नागरिकों की मौजूदगी भी देखने को मिली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्य समारोह में शामिल होने के लिए लोग लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन करते हुए उन्होंने प्रदेश के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प मुख्यमंत्री के संबोधन और कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में तिरंगा फहराए जाने के बाद परेड की सलामी का कार्यक्रम हुआ। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह होने के कारण यहां सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ स्वतंत्रता दिवस का यह महत्वपूर्ण अवसर साझा किया।

    समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। आयोजन स्थल और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तिरंगा फहराने के बाद परेड की सलामी ली और अमर शहीदों को नमन करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

  • पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief

    पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने शनिवार से पेट्रोल, डीजल (Petrol, Diesel) और हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले तेल एविएशन टर्बाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel) यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall tax) को कम कर दिया है। यह जानकारी सरकार के एक आधिकारिक आदेश से मिली है। इस आदेश के अनुसार, डीजल निर्यात पर शुल्क को घटाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर से 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, पेट्रोल निर्यात पर पहले 3.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगता था, अब इसे पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। एटीएफ के निर्यात पर भी शुल्क में कमी की गई है, जो 22 रुपये से घटकर 19.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


    आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

    टैक्स में इस कमी से आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस कटौती से निर्यातक कंपनियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में भी संशोधन जारी रह सकते हैं।

    गौरतलब है कि भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया था, ताकि तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाले असाधारण मुनाफे पर नियंत्रण पाया जा सके। दो साल बाद इसे समाप्त कर दिया गया था, लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतें फिर से बढ़ गईं, जिसके चलते इस कर को दोबारा लागू करना पड़ा।

    अभी भारत हर दो सप्ताह में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन निर्यात शुल्कों में संशोधन करता है। लेटेस्ट रेट के अनुसार, 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 95.44 भारतीय रुपये के बराबर है।


    पिछली बार बढ़ा था विंडफॉल टैक्स

    पिछली बार 3 अगस्त को पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 15.5 रुपये से बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर हो गया था। इसमें लगभग 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। वहीं, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।


    जुलाई में डीजल-एटीएफ पर टैक्स बढ़ा, पेट्रोल का घटा

    गौरतलब है कि इससे पहले 16 जुलाई को हुई समीक्षा में सरकार ने डीजल और एटीएफ के शुल्क बढ़ाए थे, जबकि पेट्रोल पर शुल्क घटाया था। उस समय डीजल 8.5 से बढ़कर 15.5 रुपये, एटीएफ 7.5 से बढ़कर 14.5 रुपये, और पेट्रोल 4 रुपये से घटकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। इससे पहले की समीक्षा में पेट्रोल पर शुल्क 1.5 से बढ़ाकर 4 रुपये, डीजल 14 से घटाकर 8.5 रुपये और एटीएफ 12.5 से घटाकर 7.5 रुपये किया गया था।


    अप्रैल का क्या रहा हाल

    अगर हालिया बदलावों पर नजर डालें तो 30 अप्रैल को डीजल पर 23 रुपये और एटीएफ पर 33 रुपये का शुल्क लगाया गया था, जबकि पेट्रोल पर शून्य था। वहीं, 30 जून को पेट्रोल पर 4 रुपये, डीजल पर 8.5 रुपये और एटीएफ पर 7.5 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया था।

  • श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम

    श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम


    नई दिल्ली।
    इंडिया वर्सेस श्रीलंका (India vs Sri Lanka) दो मैच की टेस्ट सीरीज (Test series) का आगाज आज यानी शनिवार, 15 अगस्त से होने जा रहा है। सीरीज का पहला मैच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम (Indian team) के लिए यह टेस्ट मैच काफी खास रहने वाला है क्योंकि यह टीम इंडिया (Team India) के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का 600वां मैच होगा। भारत इस मुकाम तक पहुंचने वाला मात्र तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया से ज्यादा अभी तक सिर्फ दो ही देशों ने मैच खेले हैं, इस लिस्ट में क्रिकेट के इतिहास की दो सबसे पुरानी टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का नाम दर्ज है। इंग्लैंड के नाम तो सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है।


    इंग्लैंड के नाम 1000 से अधिक टेस्ट खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड

    क्रिकेट का जनक इंग्लैंड को कहा जाता है। उनके नाम इस खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। क्रिकेट इतिहास में इंग्लैंड एकमात्र टीम है जिसने 1000 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। जी हां, इंग्लैंड की टीम अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 1097 मैच खेल चुके हैं, जिसमें 405 में उन्हें जीत मिली 336 में हार का सामना करना पड़ा, जबकि 356 मैच ड्रॉ रहे।


    टॉप-2 में ऑस्ट्रेलिया भी

    इंग्लैंड के बाद अगर किसी टीम ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं तो वह है ऑस्ट्रेलिया की टीम। कंगारू टीम बांग्लादेश के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज में अपना 883वां मुकाबला खेल रही है। उनका जीत का रिकॉर्ड इंग्लैंड से काफी बेहतर रहा है। उन्होंने अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 426 मैच जीता है, 235 हारे हैं जबकि 219 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।

    भारत 600 टेस्ट खेलने वाला बनेगा तीसरा देश
    इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 600 टेस्ट मैच खेलने वाला तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया ने अभी तक इस फॉर्मेट में खेले 599 मुकाबलों में से 186 जीते, 188 हारे और 224 ड्रॉ रहे।


    वेस्टइंडीज बेहद नजदीक

    वेस्टइंडीज की टीम भी 600 टेस्ट मैच के रिकॉर्ड के बेहद नजदीक है। उन्होंने भी इस फॉर्मेट में अभी तक 596 मैच खेल लिए हैं। जबकि अन्य टीम अभी काफी पीछे हैं। न्यूजीलैं, पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका जैसी टीमों ने अभी तक 450 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। वहीं श्रीलंका ने अभी तक 350 टेस्ट मैच भी नहीं खेले हैं।