Author: bharati

  • सीएनजी पर एक्साइज ड्यूटी हटाने की सिफारिश से ईंधन को सस्ता और अधिक किफायती बनाने की बड़ी पहल

    सीएनजी पर एक्साइज ड्यूटी हटाने की सिफारिश से ईंधन को सस्ता और अधिक किफायती बनाने की बड़ी पहल

    नई दिल्ली: स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन को सस्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है, जिसके तहत एक उच्चस्तरीय समिति ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी हटाने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सीएनजी को अधिक किफायती और आकर्षक ईंधन विकल्प बनाना है, ताकि देश में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को तेजी से बढ़ाया जा सके।

    समिति के अनुसार वर्तमान में सीएनजी पर लगभग 14 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगती है, जिससे इसकी कीमत कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है। इस टैक्स को हटाने से सीएनजी की लागत में कमी आएगी और यह पेट्रोल तथा डीजल के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी। इसके साथ ही सीएनजी वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को इस ईंधन की ओर आकर्षित किया जा सके।

    यह पहल देश के उस दीर्घकालिक लक्ष्य से भी जुड़ी है जिसके तहत वर्ष 2030 तक कुल ईंधन खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि करों में राहत मिलने से न केवल सीएनजी की मांग बढ़ेगी बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से अपनाया जाएगा।

    समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सीएनजी और पेट्रोल के बीच मूल्य अंतर को बनाए रखा जाए, ताकि उपभोक्ता पेट्रोल की जगह सस्ते और स्वच्छ विकल्प के रूप में सीएनजी को प्राथमिकता दें। इससे बड़ी संख्या में परिवारों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

    वर्तमान स्थिति में कुछ राज्यों में अतिरिक्त करों के कारण सीएनजी की कीमत अधिक हो जाती है, जिससे इसकी लोकप्रियता पर असर पड़ता है। प्रस्तावित कर राहत से इस असंतुलन को दूर करने और पूरे देश में समान रूप से सीएनजी को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

    इसके साथ ही सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस को भी बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय है। बड़ी संख्या में नए कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे घरेलू ऊर्जा उपयोग में स्थिरता और सुविधा दोनों बढ़ रही हैं।

    देश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक क्षेत्रों तक प्राकृतिक गैस की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह नेटवर्क अब देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है और शहरी के साथ साथ अर्ध शहरी क्षेत्रों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है।

    सरकार की यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक लाभ के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है तो इससे देश में स्वच्छ ईंधन की खपत को नई गति मिल सकती है और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

  • पीसी शर्मा का सरकार पर तीखा वार महिला आरक्षण को बताया इवेंट मैनेजमेंट और तबादलों को उद्योग

    पीसी शर्मा का सरकार पर तीखा वार महिला आरक्षण को बताया इवेंट मैनेजमेंट और तबादलों को उद्योग


    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल परिसीमन तबादला नीति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया।

    पीसी शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है वह सही प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक पहले जनगणना होनी चाहिए उसके बाद परिसीमन और फिर आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जो कुछ किया जा रहा है वह नारी सम्मान के नाम पर केवल दिखावा है

    और इसका उद्देश्य आगामी चुनावों में महिलाओं के वोट हासिल करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत और नगरीय निकायों में महिला आरक्षण पहले से लागू है जिसे दिग्विजय सिंह की सरकार के समय और राजीव गांधी के 73 और 74वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया जा चुका है।

    तबादला नीति को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में एक बार फिर तबादला उद्योग शुरू होने वाला है। उनके अनुसार ट्रांसफर प्रक्रिया में पैसों का लेनदेन बढ़ेगा और इसका सीधा असर प्रशासनिक पारदर्शिता पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस व्यवस्था का उपयोग अपने हितों के लिए करती है।

    कानून व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। हाल ही में सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों में कानून का डर खत्म हो गया है। उनका आरोप था कि अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है जिससे आम जनता में असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

    मंदिर प्रबंधन को लेकर भी पीसी शर्मा ने सुझाव दिया कि सरकार को मंदिरों की व्यवस्था सुधारनी है तो सरकारी जमीन मंदिरों के नाम की जानी चाहिए और जो जमीनों पर कब्जा है उसे वापस दिलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर धार्मिक शिक्षा से जुड़े कोर्स शुरू किए जाते हैं तो सभी धर्मों के लिए समान रूप से प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

    शिक्षकों के आंदोलन पर समर्थन जताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षकों के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ऐसी हैं जिससे पद खाली कर अपने लोगों को अवसर दिया जा सके। कुल मिलाकर कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते हुए इसे जनहित के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए उठाए गए कदम बताया है।

  • गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच निर्णायक भिड़ंत, अहमदाबाद में KKR के सामने पहली जीत का दबाव

    गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच निर्णायक भिड़ंत, अहमदाबाद में KKR के सामने पहली जीत का दबाव


    नई दिल्ली: 
     इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के 25वें मुकाबले में आज गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने सामने होंगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाने वाला यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गुजरात टाइटंस जहां अपने संतुलित प्रदर्शन को जारी रखते हुए अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहेगी वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स इस सीजन की अपनी पहली जीत हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। दोनों टीमों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह मुकाबला प्रतिस्पर्धा और दबाव से भरपूर होने की उम्मीद है।

    गुजरात टाइटंस ने इस सीजन में अब तक संतुलित और योजनाबद्ध खेल का प्रदर्शन किया है। टीम ने चार मैचों में दो जीत दर्ज कर यह साबित किया है कि उसके पास हर विभाग में मजबूती है। बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम ने निरंतरता दिखाई है और टीम को मजबूत शुरुआत दी है। जोस बटलर ने अपनी शानदार फॉर्म से टीम को मजबूती प्रदान की है जबकि कप्तान शुभमन गिल भी अच्छी लय में नजर आ रहे हैं। गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया है और महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए हैं।

    दूसरी ओर कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए यह सीजन अब तक निराशाजनक रहा है। टीम ने पांच मुकाबलों में चार हार का सामना किया है जबकि एक मैच पूरा नहीं हो सका। इस कारण टीम अंकतालिका में पिछड़ गई है और उस पर जीत हासिल करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। बल्लेबाजी में टीम के प्रमुख खिलाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं जिससे टीम की स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि अंगकृष रघुवंशी ने कुछ अच्छी पारियां खेलकर उम्मीद बनाए रखी है लेकिन उन्हें अन्य बल्लेबाजों का सहयोग नहीं मिल पाया है।

    दोनों टीमों के बीच अब तक के मुकाबलों में गुजरात टाइटंस का पलड़ा भारी रहा है। पिछले मैचों में गुजरात ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए अधिकतर मुकाबले अपने नाम किए हैं जिससे टीम का आत्मविश्वास मजबूत है। इसके अलावा घरेलू मैदान का फायदा भी गुजरात को मिल सकता है क्योंकि अहमदाबाद की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है और यहां बड़े स्कोर बनने की संभावना रहती है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को कुछ मदद मिल सकती है लेकिन बाद में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान हो जाता है।

    मौसम की बात करें तो अहमदाबाद में आज गर्मी का असर अधिक रहने की संभावना है और तापमान काफी ऊंचा रह सकता है। ऐसी परिस्थितियों में खिलाड़ियों की फिटनेस और सहनशक्ति की परीक्षा होगी। हालांकि बारिश की कोई संभावना नहीं है जिससे पूरे मुकाबले के खेले जाने की उम्मीद है।

    मुकाबले के विश्लेषण में गुजरात टाइटंस अधिक संतुलित और आत्मविश्वासी टीम के रूप में नजर आती है जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए यह मैच वापसी का महत्वपूर्ण अवसर है। टीम को जीत के लिए हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन करना होगा और दबाव में सही रणनीति अपनानी होगी।

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    गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच यह मुकाबला संतुलन और संघर्ष का प्रतीक है जहां एक टीम अपनी लय बनाए रखना चाहती है और दूसरी अपनी पहली जीत की तलाश में है।

  • मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी कमजोर, टीम को जल्द सुधार की जरूरत..

    मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी कमजोर, टीम को जल्द सुधार की जरूरत..


    नई दिल्ली: 
     इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन इस समय लगातार गिरता हुआ नजर आ रहा है। टीम को एक के बाद एक हार का सामना करना पड़ रहा है और इसी बीच सबसे बड़ी चिंता का कारण जसप्रीत बुमराह का विकेट न ले पाना बन गया है। पिछले छह मुकाबलों में विकेट हासिल करने में नाकाम रहने के कारण उनकी फॉर्म पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। टीम के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि बुमराह लंबे समय से गेंदबाजी आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते रहे हैं और इस सीजन उनका प्रभावी प्रदर्शन नहीं आ पा रहा है।

    मैच के बाद टीम के मुख्य कोच ने स्थिति पर सफाई देते हुए बताया कि बुमराह शुरुआती मैचों में हल्की चोट के साथ खेल रहे थे। इस वजह से उनकी गेंदबाजी की गति और लय पर असर पड़ा। कोच के अनुसार शुरुआती चरण में उन्हें पूरी तरह फिट होने के लिए समय दिया गया ताकि उनकी स्थिति को धीरे धीरे बेहतर किया जा सके। अब वह पहले की तुलना में बेहतर महसूस कर रहे हैं और उनकी गति में भी सुधार देखने को मिला है। टीम प्रबंधन का मानना है कि जैसे ही वह पूरी तरह अपनी लय में लौटेंगे, उनका प्रदर्शन भी पहले जैसा प्रभावी हो जाएगा।

    कोच ने यह भी माना कि केवल बुमराह को ही जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा क्योंकि टीम की पूरी गेंदबाजी यूनिट अपेक्षित दबाव बनाने में असफल रही है। टी20 क्रिकेट में शुरुआती ओवरों में विपक्षी टीम पर दबाव बनाना बेहद जरूरी होता है लेकिन इस सीजन मुंबई इंडियंस के गेंदबाज लगातार पावरप्ले में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि विपक्षी बल्लेबाज आसानी से सेट होकर बड़े स्कोर की ओर बढ़ रहे हैं और गेंदबाजों के पास विकेट लेने के मौके कम हो जा रहे हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि कई बार गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन करते हैं लेकिन उन्हें उसका परिणाम विकेट के रूप में नहीं मिलता। बुमराह के साथ भी कुछ ऐसा ही देखा जा रहा है जहां वह अपनी गेंदबाजी में अनुशासन बनाए हुए हैं लेकिन सफलता उनके पक्ष में नहीं आ रही है। टीम प्रबंधन का मानना है कि एक या दो सफल स्पेल उन्हें फिर से आत्मविश्वास दे सकते हैं और उसके बाद उनका प्रभाव और भी खतरनाक हो सकता है।

    मुंबई इंडियंस की मौजूदा स्थिति टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में असंतुलन नजर आ रहा है। लगातार हार के कारण टीम पर दबाव बढ़ गया है और रणनीति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गेंदबाजी में शुरुआती विकेट न मिलना और मध्य ओवरों में रन रोकने में असफलता टीम की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है।

    टीम को उम्मीद है कि आने वाले मुकाबलों में परिस्थितियां बदलेंगी और खिलाड़ी अपने पुराने लय में लौटेंगे। बुमराह की वापसी और उनका फॉर्म में आना मुंबई इंडियंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनकी गेंदबाजी टीम के पूरे आक्रमण को दिशा देने की क्षमता रखती है।

  • LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा

    LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा


    सीधी । सीधी जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा उस समय खुलकर सामने आ गया जब महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर मंत्री राधा सिंह के काफिले का रास्ता रोक दिया। यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह “नारी शक्ति वंदन रैली” में शामिल होने सीधी पहुंची थीं।

    जानकारी के अनुसार, मंत्री का काफिला पूजा पार्क से सम्राट चौक, सराफा बाजार और गांधी चौक होते हुए पैदल मार्च के रूप में आगे बढ़ रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी उनके साथ चल रही थीं और “नारी शक्ति, राष्ट्र शक्ति” के नारे लगाए जा रहे थे। लेकिन इसी बीच पढ़ैनिया गैस एजेंसी के पास कुछ महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर विरोध शुरू कर दिया और मंत्री के काफिले को रोक दिया।

    प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बुकिंग कराने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। कुछ महिलाओं ने कहा कि इंडेन कनेक्शन होने के बावजूद सप्लाई नियमित नहीं है, जबकि प्रताप गैस एजेंसी से भी समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

    वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर मंत्री राधा सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में कहीं कोई किल्लत नहीं है और कुछ लोग जानबूझकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला आरक्षण लागू होने जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बधाई दी।

    घटना के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही, हालांकि कुछ ही मिनटों में मौके पर रखे गए सिलेंडर हट गए और प्रदर्शनकारी वहां से हट गए। बताया जा रहा है कि मंत्री अपने काफिले से बाहर नहीं उतरीं और स्थिति सामान्य होने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। इस घटना ने एक बार फिर गैस आपूर्ति व्यवस्था और जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी…

    आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल की पहली ऑन-स्क्रीन जोड़ी…

    नई दिल्ली:   बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज डेट आखिरकार तय कर दी गई है, जिससे लंबे समय से इंतजार कर रहे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। कई बार शेड्यूल बदलने के बाद अब यह फिल्म 21 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    यह मेगा प्रोजेक्ट अपने भव्य पैमाने और स्टारकास्ट की वजह से पहले ही सुर्खियों में रहा है। फिल्म में आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इन तीनों बड़े सितारों का एक साथ आना फिल्म को खास बनाता है और इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

    फिल्म की रिलीज डेट को लेकर पहले कई बदलाव किए गए थे। शुरुआत में इसे क्रिसमस 2025 पर रिलीज करने की योजना थी, जिसके बाद इसे आगे बढ़ाकर 2026 के अलग-अलग स्लॉट में शिफ्ट किया गया। अब निर्माताओं ने इसे 2027 की शुरुआत में रिलीज करने का अंतिम निर्णय लिया है, ताकि फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा सके।

    फिल्म के सेट से सामने आई तस्वीरों ने पहले ही दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ा दी थी, जहां रणबीर कपूर और विक्की कौशल को एयरफोर्स यूनिफॉर्म में देखा गया था। फाइटर जेट के पास शूट किए गए दृश्य और उनका लुक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने थे।

    ‘लव एंड वॉर’ को एक भावनात्मक प्रेम कहानी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें एक प्रेम त्रिकोण की कहानी दिखाई जाएगी। इसमें रणबीर और विक्की एयरफोर्स अधिकारियों की भूमिका निभाएंगे, जबकि आलिया भट्ट का किरदार भावनाओं, रिश्तों और कर्तव्य के बीच संघर्ष करता हुआ नजर आएगा।

    यह पहली बार होगा जब आलिया भट्ट, रणबीर कपूर और विक्की कौशल एक साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देंगे। साथ ही रणबीर कपूर और संजय लीला भंसाली की यह दूसरी फिल्म होगी, जिसने उनके शुरुआती करियर से जुड़ी यादों को फिर से ताजा कर दिया है। फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में भी बड़ी उम्मीदें जताई जा रही हैं और इसे एक भव्य सिनेमाई अनुभव माना जा रहा है।

  • टीआरपी रैंकिंग में बड़ा बदलाव, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना नंबर वन…

    टीआरपी रैंकिंग में बड़ा बदलाव, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ बना नंबर वन…

    नई दिल्ली : टीवी दर्शकों की पसंद में इस हफ्ते बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां लोकप्रिय धारावाहिकों की रैंकिंग में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। टेलीविजन की दुनिया में लंबे समय से चर्चा में बना रहने वाला शो ‘अनुपमा’ इस बार चौथे स्थान पर खिसक गया है, जबकि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने मजबूत वापसी करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है।

    इस सप्ताह की रेटिंग में दर्शकों की बदलती पसंद साफ नजर आई है। नए और रीमेक आधारित शोज ने जहां अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं कुछ लंबे समय से चल रहे कार्यक्रमों की लोकप्रियता में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। इससे टेलीविजन इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा और अधिक तीव्र हो गई है।

    इस हफ्ते ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने 2.0 रेटिंग के साथ पहला स्थान हासिल किया। शो में चल रहे नए ट्रैक और पारिवारिक कहानी को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। दूसरे स्थान पर ‘वसुधा’ रहा, जिसने 1.9 रेटिंग के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। तीसरे स्थान पर ‘गंगा माई की बेटियां’ रहा, जिसकी कहानी और भावनात्मक प्रस्तुति दर्शकों को आकर्षित कर रही है।

    दूसरी ओर, लंबे समय से टॉप पर बने रहने वाला शो ‘अनुपमा’ इस सप्ताह 1.4 रेटिंग के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस गिरावट को टीवी इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। शो के मौजूदा ट्रैक और नए किरदारों के बावजूद दर्शकों की रुचि में कमी देखने को मिली है।

    पांचवें स्थान पर भी 1.4 रेटिंग के साथ एक अन्य लोकप्रिय धारावाहिक रहा, जिसने टॉप रैंकिंग में अपनी जगह बनाए रखी है। इसके बाद छठे स्थान पर ‘तुम से तुम तक’, सातवें पर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’, आठवें पर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’, नौवें पर ‘उड़ने की आशा’ और दसवें स्थान पर ‘नागिन 7’ शामिल रहे हैं।

    इस हफ्ते की टीआरपी रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि टीवी दर्शकों की पसंद तेजी से बदल रही है। पुराने स्थापित शोज अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नए कॉन्सेप्ट और रीमेक आधारित शोज लगातार प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा रहे हैं।

  • मध्यप्रदेश में बड़ी बैंक डकैती सिंगरौली में दिनदहाड़े लूट से पुलिस अलर्ट

    मध्यप्रदेश में बड़ी बैंक डकैती सिंगरौली में दिनदहाड़े लूट से पुलिस अलर्ट


    सिंगरौली । सिंगरौली जिले में दिनदहाड़े उस समय सनसनी फैल गई जब हथियारबंद बदमाशों ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में घुसकर बड़ी डकैती को अंजाम दिया। जिला मुख्यालय वैढ़न स्थित इस बैंक में 4 से 5 नकाबपोश बदमाश फिल्मी अंदाज में दाखिल हुए और अचानक बंदूक की नोक पर बैंक कर्मचारियों तथा वहां मौजूद ग्राहकों को बंधक बना लिया।

    घटना के दौरान बदमाशों ने बेहद तेजी से पूरे बैंक परिसर को नियंत्रण में ले लिया और कुछ ही मिनटों में कैश काउंटर से लाखों रुपये समेट लिए। पूरी वारदात इतनी सुनियोजित और तेज थी कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लूट को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और बैंक परिसर को घेर लिया गया। पुलिस ने जांच के लिए बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले ली है।

    फिलहाल पूरे शहर में नाकेबंदी कर दी गई है और आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं। पुलिस आसपास के इलाकों और संभावित भागने के रास्तों पर लगातार जांच कर रही है। इस सनसनीखेज वारदात ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • हरिवंश नारायण सिंह का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना अनुभव और विश्वास की निरंतरता का प्रतीक

    हरिवंश नारायण सिंह का तीसरी बार उपसभापति चुना जाना अनुभव और विश्वास की निरंतरता का प्रतीक

    नई दिल्ली: राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर उच्च सदन का उपसभापति चुना गया है और यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल होगा। शुक्रवार को उनके निर्विरोध चयन की औपचारिक घोषणा की गई। विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण यह चयन पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था। इस घटनाक्रम को संसदीय परंपरा में निरंतरता और अनुभव पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

    यह पद उनके पिछले कार्यकाल की समाप्ति के बाद रिक्त हुआ था, जिसके बाद निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नामांकन और चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। तय समय सीमा के भीतर उनके समर्थन में कई प्रस्ताव दाखिल किए गए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि विपक्ष ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाकर अपनी असहमति दर्ज कराई, हालांकि सदन की औपचारिक प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हुई।

    उपसभापति के रूप में उनके चयन के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह लगातार तीसरी बार की जिम्मेदारी सदन के उनके प्रति गहरे विश्वास को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान सदन की कार्यवाही को संतुलित, व्यवस्थित और प्रभावी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बीच संतुलन बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक रहा है।

    प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने सदन में सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है और उनकी कार्यशैली ने संसदीय गरिमा को मजबूत किया है। अनुभव और संयम के साथ उनके द्वारा निभाई गई भूमिका ने सदन की कार्यवाही को अधिक सुचारु और प्रभावी बनाने में योगदान दिया है।

    संसदीय हलकों में भी उनके लगातार तीसरी बार चुने जाने को स्थिरता और निरंतरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके कार्यकाल में संवाद की गुणवत्ता और संसदीय अनुशासन को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है, जिससे विधायी कार्यों के संचालन में अधिक सहजता आई है।

    इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय संसदीय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है, जहां अनुभव, संतुलन और परंपरा को महत्व देते हुए नेतृत्व की निरंतरता को आगे बढ़ाया गया है।

  • सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की सुनवाई तेज, आस्था और समानता के बीच संतुलन को लेकर ऐतिहासिक निर्णय की संभावना

    सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की सुनवाई तेज, आस्था और समानता के बीच संतुलन को लेकर ऐतिहासिक निर्णय की संभावना

    नई दिल्ली:   केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े संवेदनशील और लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई एक बार फिर तेज हो गई है। नौ जजों की संविधान पीठ इस मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर विस्तार से विचार कर रही है। यह मामला अब केवल एक धार्मिक परंपरा का प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन की एक व्यापक संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह संकेत दिया कि धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं को केवल कानूनी दृष्टिकोण से देखना आसान नहीं होता, क्योंकि इनमें करोड़ों लोगों की भावनाएं और विश्वास जुड़े होते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी सामाजिक सुधार की प्रक्रिया में धार्मिक संरचनाओं की मूल भावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों से मामले की गंभीरता और जटिलता और अधिक स्पष्ट हो गई है।

    यह पूरा विवाद वर्ष 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इससे पहले 1991 में केरल उच्च न्यायालय ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को उचित माना था। 2018 के फैसले के बाद देशभर में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और इसके खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब विस्तार से सुनवाई जारी है।

    मंदिर के प्रबंधन से जुड़े पक्ष का कहना है कि यह परंपरा भगवान अयप्पा के ब्रह्मचारी स्वरूप की मान्यता पर आधारित है और सदियों से इसका पालन होता आ रहा है। उनके अनुसार यह मामला केवल प्रशासनिक व्यवस्था या सार्वजनिक अधिकारों का नहीं, बल्कि एक गहरी धार्मिक आस्था और परंपरा का हिस्सा है, जिसे सामाजिक संदर्भ में समझना आवश्यक है।

    सुनवाई के दौरान विभिन्न पक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया और कहा कि धार्मिक प्रथाओं के मूल स्वरूप में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि किसी भी प्रकार का लिंग आधारित प्रतिबंध समानता के अधिकार और मौलिक अधिकारों की भावना के खिलाफ है, इसलिए इसे संवैधानिक कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

    यह मामला केवल सबरीमाला मंदिर तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसी सुनवाई के दौरान धार्मिक स्थलों में महिलाओं की भूमिका, विभिन्न समुदायों की परंपराएं और धार्मिक संस्थाओं में लैंगिक समानता जैसे व्यापक मुद्दों पर भी विचार किया जा रहा है। इसमें विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े संवेदनशील प्रश्न भी शामिल हैं, जिससे यह मामला और अधिक व्यापक बन गया है।

    माना जा रहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आने वाला निर्णय न केवल धार्मिक परंपराओं की व्याख्या को प्रभावित करेगा, बल्कि देश में आस्था, समानता और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन की दिशा भी तय कर सकता है।