Author: bharati

  • ग्वालियर-इटावा हाईवे पर सुरक्षा का 'कवच': पेड़ों पर चमकेंगे रेडियम रिफ्लेक्टर, बेसहारा पशुओं को भी पहनाई जाएगी सुरक्षा बेल्ट

    ग्वालियर-इटावा हाईवे पर सुरक्षा का 'कवच': पेड़ों पर चमकेंगे रेडियम रिफ्लेक्टर, बेसहारा पशुओं को भी पहनाई जाएगी सुरक्षा बेल्ट


    भिंड । ग्वालियर-इटावा नेशनल हाईवे 719 पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और वाहन चालकों के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए भिंड यातायात पुलिस ने एक सराहनीय मुहिम शुरू की है। हाईवे किनारे स्थित जानलेवा बन चुके पेड़ों के कारण होने वाले हादसों को देखते हुए अब उन पर ट्री स्टर्ड रेडियम रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही हाईवे पर अक्सर हादसों का कारण बनने वाले बेसहारा पशुओं की सुरक्षा और उनसे होने वाली टक्करों को रोकने के लिए भी विशेष योजना तैयार की गई है।

    हादसे से सबक लेकर शुरू हुआ अभियान इस विशेष अभियान की शुरुआत हाल ही में हुए एक सड़क हादसे से सबक लेते हुए की गई है। दरअसल, कुछ दिनों पहले ग्वालियर-इटावा हाईवे पर एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे एक विशाल पेड़ से टकरा गई थी। गनीमत रही कि कार के एयरबैग समय पर खुल गए और उसमें सवार महिला की जान बच गई। इस घटना के बाद यातायात पुलिस ने उन सभी स्थानों और पेड़ों को चिह्नित किया, जो रात के अंधेरे या धुंध में वाहन चालकों को नजर नहीं आते और हादसों का सबब बनते हैं।

    क्वारी नदी पुल से सूर्या होटल तक बिछाया सुरक्षा जाल यातायात पुलिस द्वारा संचालित यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इटावा रोड स्थित क्वारी नदी पुल से लेकर ग्वालियर रोड स्थित सूर्या होटल तक के क्षेत्र में सड़क किनारे खड़े पेड़ों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। ये रिफ्लेक्टर रात के समय वाहनों की लाइट पड़ते ही चमक उठते हैं, जिससे चालक को दूर से ही सड़क की सीमा और किनारे लगे पेड़ों का आभास हो जाता है। इससे तेज रफ्तार वाहनों के सड़क से उतरकर टकराने की आशंका काफी कम हो गई है।

    पशुओं पर भी लगेगा रेडियम, सुरक्षित होगा सफर पेड़ों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा घूमने वाले मवेशी भी एक बड़ी चुनौती हैं। पुलिस प्रशासन ने निर्णय लिया है कि हाईवे पर विचरण करने वाले बेसहारा पशुओं के गले या सींगों पर भी रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट लगाए जाएंगे। अक्सर रात में काले या गहरे रंग के पशु सड़क के बीच में बैठे होने पर दिखाई नहीं देते, जिससे भीषण दुर्घटनाएं होती हैं। रेडियम बेल्ट लगने से दूर से ही चालक को पशु की मौजूदगी का पता चल जाएगा। यातायात पुलिस का यह दोहरा सुरक्षा चक्र हाईवे पर होने वाली जनहानि को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा।

  • सीतानदी अभयारण्य में बिखरी जैव विविधता की छटा: शावकों संग अठखेलियां करते दिखे तेंदुए, दुर्लभ वीडियो ने मोह लिया मन

    सीतानदी अभयारण्य में बिखरी जैव विविधता की छटा: शावकों संग अठखेलियां करते दिखे तेंदुए, दुर्लभ वीडियो ने मोह लिया मन

    धमतरी । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित ‘सीतानदी अभयारण्य’ एक बार फिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्य जीवन के कारण सुर्खियों में है। सोमवार को इस अभयारण्य क्षेत्र से वन्यजीवों के कुछ ऐसे दुर्लभ और मनोहारी वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों को उत्साहित कर दिया है। इन वीडियो में जंगल की गहराई में छिपी जैव विविधता की एक शानदार झलक देखने को मिल रही है, जहाँ वन्य प्राणी अपने प्राकृतिक आवास में बेखौफ विचरण करते नजर आ रहे हैं।

    तेंदुए के कुनबे ने खींचा सबका ध्यान सामने आए वीडियो में सबसे खास नजारा एक तेंदुए के परिवार का है। वीडियो में दो वयस्क तेंदुए अपने शावक के साथ दिखाई दे रहे हैं। शावक को अपनी माँ के साथ सुरक्षित माहौल में अठखेलियां करते देखना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सीतानदी का यह घना जंगल वन्यजीवों के प्रजनन और उनके वंश वृद्धि के लिए पूरी तरह अनुकूल है। तेंदुओं का इस तरह अपने परिवार के साथ दिखना दुर्लभ माना जाता है और यह क्षेत्र में बेहतर ईको-सिस्टम का संकेत देता है।

    स्वच्छंद विचरण करते वन्य जीव सोशल मीडिया और वन विभाग के गलियारों में चर्चा का विषय बने इन वीडियो में केवल तेंदुए ही नहीं, बल्कि जंगल के अन्य बाशिंदे भी अपने स्वाभाविक व्यवहार में नजर आ रहे हैं। कहीं कुछ वन्य प्राणी तेजी से जंगल की पगडंडियों को पार करते दिख रहे हैं, तो कहीं शांति से चरते हुए। कैमरों में कैद यह गतिविधियां बताती हैं कि मानवीय हस्तक्षेप कम होने और वन विभाग की मुस्तैदी के कारण यहाँ का वन्य जीवन सुरक्षित और खुशहाल है।

    पर्यटन और संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के वीडियो सामने आने से न केवल सीतानदी अभयारण्य के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में ईको-टूरिज्म को भी नया आयाम मिलेगा। जैव विविधता की यह झलक यह संदेश देती है कि यदि वनों को संरक्षित रखा जाए, तो लुप्तप्राय प्रजातियां भी फल-फूल सकती हैं। यह वीडियो वर्तमान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सफलता की एक छोटी सी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बानगी है।

  • बीजापुर में माओवादियों की साजिश का शिकार हुआ मासूम: IED विस्फोट की चपेट में आने से 20 वर्षीय आदिवासी युवक की मौत

    बीजापुर में माओवादियों की साजिश का शिकार हुआ मासूम: IED विस्फोट की चपेट में आने से 20 वर्षीय आदिवासी युवक की मौत


    बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में माओवादियों द्वारा बिछाए गए बारूदी जाल ने एक और मासूम ग्रामीण की जान ले ली है। जिले के कस्तुरीपाड गांव के पास हुए एक शक्तिशाली आईईडी IED विस्फोट में एक 20 वर्षीय आदिवासी युवक की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर बस्तर के अंदरूनी इलाकों में ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। माओवादियों द्वारा सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए लगाए गए ये विस्फोटक अब स्थानीय आदिवासियों के लिए काल बन रहे हैं।

    दैनिक कार्यों के दौरान हुआ हादसा पुलिस अधीक्षक एसपी कार्यालय से सोमवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना रविवार को घटित हुई। कस्तुरीपाड निवासी आयता कुहरामी 20 वर्ष अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए गांव के पास ही स्थित जंगली इलाके की ओर गया था। इसी दौरान रास्ते में माओवादियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए एक प्रेशर आईईडी पर उसका पैर पड़ गया। पैर पड़ते ही एक जबरदस्त धमाका हुआ, जिसकी चपेट में आने से आयता की मौके पर ही मौत हो गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के पेड़ों को भी नुकसान पहुँचा है।

    इलाके में दहशत का माहौल इस घटना के बाद से कस्तुरीपाड और आसपास के गांवों में मातम और दहशत का माहौल व्याप्त है। मृतक आयता महज 20 वर्ष का था और अपने परिवार का सहारा था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि माओवादी अक्सर सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचाने के लिए रास्तों और पगडंडियों पर विस्फोटक लगा देते हैं, लेकिन इनकी पहचान करना आम नागरिकों के लिए असंभव होता है। आए दिन होने वाले इन धमाकों के कारण अब ग्रामीण अपने ही खेतों और जंगलों में जाने से कतराने लगे हैं।

    पुलिस की अपील और सर्च ऑपरेशन घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षाबल मौके पर पहुँचे और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस प्रशासन ने इस कायराना हरकत की कड़ी निंदा की है। सुरक्षा अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगलों में अनजान रास्तों पर जाने से बचें और किसी भी संदिग्ध वस्तु दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। फिलहाल, इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है ताकि अन्य संभावित विस्फोटकों को समय रहते नष्ट किया जा सके।

  • धमतरी में ऑटोमेटिक ई-चालान का आतंक: 'उटपटांग' कट रहे चालानों से जनता त्रस्त, अब कलेक्टर करेंगे राहत की पहल

    धमतरी में ऑटोमेटिक ई-चालान का आतंक: 'उटपटांग' कट रहे चालानों से जनता त्रस्त, अब कलेक्टर करेंगे राहत की पहल

    धमतरी । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए लागू की गई हाईटेक ई-चालान प्रणाली अब आम जनता के लिए गले की फांस बन गई है। आरटीओ और यातायात विभाग द्वारा शुरू किए गए ऑटोमेटिक ऑनलाइन ई-चालान सिस्टम से वाहन चालक इस कदर परेशान हैं कि शिकायतों का अंबार लग गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के संकेत दिए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों से खुद जिला कलेक्टर भी असहज महसूस कर रहे हैं और उन्होंने आम जनता को इस ‘तकनीकी प्रताड़ना’ से राहत दिलाने के लिए पहल शुरू कर दी है।

    तकनीक का अजीब व्यवहार और चालान की मार शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए हाईटेक कैमरे वाहन चालकों के लिए खौफ का कारण बन गए हैं। यह सिस्टम चलते वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर स्वतः ही चालान जनरेट कर देता है। वाहन चालकों का आरोप है कि यह प्रणाली कई बार बिना किसी ठोस यातायात उल्लंघन के ही भारी-भरकम चालान काट रही है। सोमवार को अपनी व्यथा सुनाते हुए कई चालकों ने बताया कि उन्हें ऐसे अपराधों के लिए उटपटांग चालान भेजे जा रहे हैं, जो उन्होंने किए ही नहीं। जब अचानक मोबाइल पर चालान का मैसेज पहुंचता है, तो वाहन चालक यह समझ ही नहीं पाते कि आखिर उनसे गलती कहाँ हुई।

    बढ़ता जन आक्रोश और प्रशासनिक सक्रियता बिना मानवीय हस्तक्षेप के कट रहे इन ऑनलाइन चालानों ने लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। कई मामलों में तो कैमरे की तकनीकी खराबी के कारण भी गलत चालान जारी होने की बात सामने आई है। रोजमर्रा के काम से घर से निकलने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह सिस्टम एक बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी बन चुका है। कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुँच रही शिकायतों की बाढ़ ने प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    कलेक्टर की पहल से जगी उम्मीद मामले की गंभीरता और जनता की नाराजगी को देखते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे इस सिस्टम की समीक्षा करेंगे। शिकायतों के निवारण के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने और गलत तरीके से कटे चालानों को रद्द करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। कलेक्टर की इस सक्रियता से अब धमतरी की जनता को उम्मीद बंधी है कि उन्हें कैमरों की इस मनमानी से जल्द निजात मिलेगी और यातायात नियमों के नाम पर हो रही इस तकनीकी धांधली पर अंकुश लगेगा।

  • मैहर में नशे पर बड़ी कार्रवाई: 40 लाख का गांजा जब्त, भूंसे के नीचे छिपाकर रखा था चार क्विंटल मादक पदार्थ

    मैहर में नशे पर बड़ी कार्रवाई: 40 लाख का गांजा जब्त, भूंसे के नीचे छिपाकर रखा था चार क्विंटल मादक पदार्थ


    मैहर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार पर बड़ी चोट करते हुए गांजे की भारी खेप बरामद की है। उचेहरा थाना क्षेत्र के सखौंहा खुर्द गांव में की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने भूंसे के नीचे छिपाकर रखा गया करीब चार क्विंटल गांजा जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 40 लाख रुपये बताई जा रही है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उचेहरा थाना पुलिस को लंबे समय से क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना मिल रही थी। इसी कड़ी में मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात विशेष टीम गठित कर सखौंहा खुर्द गांव में छापा मारा गया। यह कार्रवाई गांव निवासी रामाधार चौधरी के घर पर की गई, जहां मादक पदार्थ छिपाए जाने की आशंका जताई गई थी।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने घर के एक हिस्से में रखे भूंसे को हटाकर तलाशी ली, तो उसके नीचे प्लास्टिक की 15 बोरियां रखी हुई मिलीं। जब बोरियों को खोलकर देखा गया, तो उनमें गांजा भरा हुआ पाया गया। तौल करने पर कुल गांजे का वजन करीब चार क्विंटल निकला। इतनी बड़ी मात्रा में गांजा मिलने से पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने मौके से आरोपी रामाधार चौधरी को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के बाद उसे एनडीपीएस एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से गांजे के अवैध कारोबार में संलिप्त था और इसे आसपास के जिलों सहित अन्य राज्यों में खपाने की तैयारी में था। हालांकि पुलिस अभी यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है और आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप का माहौल है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि गांव में इतनी बड़ी मात्रा में गांजा लंबे समय से छिपाकर रखा गया था, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल उचेहरा थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी का संबंध किसी अंतरराज्यीय नशा तस्करी गिरोह से है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।

  • मैहर में मानवता शर्मसार: घूमने निकली 14 वर्षीय किशोरी से तीन दरिंदों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, जंगल में बनाया बंधक

    मैहर में मानवता शर्मसार: घूमने निकली 14 वर्षीय किशोरी से तीन दरिंदों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, जंगल में बनाया बंधक

    मैहर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक बेहद सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है जहाँ एक 14 वर्षीय किशोरी सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई है। अमरपाटन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके में तीन अज्ञात बदमाशों ने किशोरी को बंधक बनाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद से क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।दोस्तों के साथ गई थी घूमने जानकारी के अनुसार, कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली किशोरी शनिवार को अपने दो दोस्तों के साथ घर से घूमने के लिए निकली थी। इसी दौरान रास्ते में तीन अज्ञात युवकों ने उन्हें रोक लिया। आरोपियों ने डरा-धमकाकर किशोरी के दोस्तों को वहां से भगा दिया या उन्हें किनारे कर किशोरी को जबरन बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपी उसे पास के एक घने जंगल की ओर ले गए।

    जंगल में दरिंदगी और जख्मी हालत में वापसी पीड़िता के अनुसार, सुनसान जंगल का फायदा उठाकर तीनों अज्ञात युवकों ने उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। दरिंदगी की इस घटना के बाद आरोपी पीड़िता को गंभीर हालत में छोड़कर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद दहशत और सदमे में डूबी किशोरी किसी तरह अगले दिन यानी रविवार को लहूलुहान और जख्मी हालत में अपने घर पहुंची। अपनी बेटी की हालत देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई जिसके बाद किशोरी ने आपबीती सुनाई। पुलिस की कार्रवाई और मेडिकल जांच परिजनों ने तत्काल इसकी सूचना अमरपाटन थाना पुलिस को दी।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट POCSO Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पीड़िता को तत्काल उपचार और मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि संदिग्धों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं और घटना स्थल के आसपास के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दरिंदों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उन्हें कठोरतम सजा दी जाए।
  • भोपाल में युवती से मारपीट का आरोप: मदरसे के सामने स्कूटी खड़ी करने पर विवाद, भाई को सिर में गंभीर चोट

    भोपाल में युवती से मारपीट का आरोप: मदरसे के सामने स्कूटी खड़ी करने पर विवाद, भाई को सिर में गंभीर चोट


    भोपाल । राजधानी भोपाल से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सनसनी मचा दी है, जिसमें एक हिंदू युवती अपने साथ हुई मारपीट और अपमान का आरोप लगा रही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। वीडियो में युवती खुद को भोपाल के कल्पना नगर इलाके की निवासी बता रही है। उसका कहना है कि घर के सामने स्थित एक मदरसे के बाहर स्कूटी खड़ी करने को लेकर विवाद हुआ था।
    युवती के अनुसार, इसी बात को लेकर कुछ लोगों ने पहले बहस की और फिर देखते ही देखते मामला मारपीट में बदल गया। युवती का आरोप है कि उसके साथ न सिर्फ गाली-गलौज की गई, बल्कि उसके बाल भी उखाड़े गए। युवती ने वीडियो में यह भी बताया कि जब उसके भाई और दोस्त ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन पर भी हमला किया गया। आरोप है कि युवती के भाई के सिर पर गंभीर चोट आई है, जिससे उसे काफी खून बहा और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। वहीं, युवती के दोस्त के साथ भी मारपीट किए जाने की बात कही जा रही है। घटना के बाद से पीड़ित परिवार दहशत में है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    यह पूरा मामला जिस स्थान का बताया जा रहा है, वहां एक मदरसा स्थित है। इसी कारण से सोशल मीडिया पर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशें भी देखी जा रही हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और वीडियो व अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। भोपाल पुलिस का कहना है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि मामला सांप्रदायिक है या किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाकर हिंसा की गई है, तो संबंधित धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि यह सामान्य विवाद का मामला पाया जाता है, तो भी मारपीट और चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ संगठनों ने पीड़ित युवती के समर्थन में कार्रवाई की मांग की है, जबकि प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर फैल रहे किसी भी भ्रामक या भड़काऊ संदेश पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा भी प्रशासन की ओर से दिया गया है।

  • ट्रंप से पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति कर चुके हैं ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश…

    ट्रंप से पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति कर चुके हैं ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश…

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो (Venezuelan President Maduro) को उनके किले से उठाकर न्यूयॉर्क की अदालत में पेश करवाने वाले ट्रंप का अगला सपना ग्रीनलैंड को अमेरिकी आधिपत्य में लाने का है। यूरोप समेत पूरी दुनिया इसका विरोध कर रही है, लेकिन ट्रंप अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र और अमेरिकी धरती की रक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा होना बहुत जरूरी है। इस कब्जे के लिए वह साम, दाम, दंड भेद सभी प्रकार की नीति अपनाने के लिए भी तैयार हैं। लेकिन इतिहास उठाने पर पता चलता है कि ग्रीनलैंड का ख्वाब सजाने वाले ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं। इसके पहले भी कई राष्ट्रपतियों का मन इसको लेकर ललचा चुका है। हालांकि, किसी को भी यह हासिल नहीं हुआ।

    ग्रीन लैंड की जमीन का आधुनिक अमेरिका द्वारा दिखाया गया लालच का पहला उदाहरण वर्ष 1867 में सामने आता है। यह वह समय था, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूस से अलास्का को खरीदा था। ऐसे में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री विलियम एच. सिवार्ड ने डेनमार्क को भी लगे हाथ आइसलैंड और ग्रीनलैंड खरीदने का ऑफर दे डाला। अलास्का डील में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्कालीन अमेरिकी ट्रेजरी सचिव रॉबर्ट जे वॉकर ने कहा था कि ग्रीनलैंड अगर अमेरिका के हिस्से में आ जाता है, तो यह बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होगा। इससे अमेरिका व्यापारिक दुनिया पर नियंत्रण हासिल कर पाएगा। हालांकि, इस समय पर भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड को लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और यह आगे नहीं बढ़ पाया।


    1946 में 100 मिलियन डॉलर का दिया था ऑफर

    लगभग 9 दशक तक अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने का सपना मन में दबाए रखा। इस बीच पहला विश्व युद्ध भी समाप्त हो गया। अब बारी आई दूसरे विश्वयुद्ध की। इसमें नाजी जर्मनी ने डेनमार्क पर हमला बोल दिया। ग्रीनलैंड की रक्षा करने की जिम्मेदारी अमेरिका के कंधों पर आ गई। इसी दौर में अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति को बढ़ाया और इस आर्कटिक द्वीप की रक्षा की। इसके बाद युद्ध समाप्त हुआ, लेकिन अमेरिका का ग्रीनलैंड प्यार एक बार फिर से जाग गया। वर्ष1946 में जब इस द्वीप को खाली करने की बारी आई, तो अमेरिका ने अपने पैसे की ताकत को दिखाना चाहा। दूसरे विश्वयुद्ध में बर्बाद हो चुके डेनमार्क के लिए 100 मिलियन डॉलर की राशि एक बड़ी बात थी, हालांकि इसके बाद भी डेनमार्क ने इस पेशकश को ठुकरा दिया और अमेरिका को मायूस होकर यहां से हटना पड़ा।


    सैन्य बेस बनाने में कामयाब रहा अमेरिका

    इसके बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड अमेरिका की छत्र छाया में नाटो के तहत शामिल हो गए। अमेरिका को अपनी मनचाही मुराद भी मिल गई। कोल्ड वॉर के समय से ही अमेरिका ने रूस को काउंटर करने के लिए ग्रीनलैंड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। डेनमार्क ने भले ही ग्रीनलैंड अमेरिका को देने से इनकार कर दिया हो, लेकिन नाटो में शामिल होने के नाते वह अमेरिकी सेना को इसके इस्तेमाल से नहीं रोक सकती थी। ऐसे में अमेरिका ने यहां पर 1943 से संचालित पिटफिक स्पेस बेस को और भी ज्यादा मजबूत कर लिया और यहां पर अपनी सैन्य उपस्तिथि को बढ़ा दिया।

    तमाम कोशिशों के बाद भी अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने में नाकामयाब रहा। हाालंकि, सैन्य बेस स्थापित करने से उसके मनसूबे कुछ हद तक कामयाब होते हुए भी नजर आए। इसके बाद आई 21वीं सदी। अमेरिका के राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप, अपने पहले कार्यकाल के आखिर में ट्रंप ने खुले तौर पर ग्रीनलैंड को खरीदने की पेशकश की। उनकी यह पेशकश, अमेरिकी सुरक्षा से ज्यादा ग्रीनलैंड की जमीन के नीचे दबी अपार खनिज संपदा को लेकर थी। हालांकि, उस समय पर भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने ही इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया कि उनका यह क्षेत्र बिकाऊ नहीं है।

    इसके बाद ट्रंप को सत्ता से जाना पड़ा और बात आई-गई हो गई। लेकिन 2025 में ट्रंप एक बार फिर से सत्ता में लौटे। इस बार ज्यादा आक्रामक होकर। आते ही उन्होंने ऐलान कर दिया कि अब ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनना ही होगा। 2025 में अमेरिकी कांग्रेस के एक संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि हम इसे (ग्रीनलैंड) को किसी तरह हासिल कर ही लेंगे। किसी न किसी तरह हम इसे जरूर हासिल करेंगे।”

    अमेरिका पैसे की दम पर पिछली दो सदी से ग्रीनलैंड को अपना हिस्सा बनाने की बात कर रहा है। लेकिन हर बार डेनमार्क और ग्रीनलैंड इससे इनकार कर देते हैं। इसबार भी ट्रंप के लिए ग्रीनलैंड को खरीदना आसान नहीं होगा। हालांकि, ट्रंप इस मामले में थोड़ा अलग रुख भी अपना रहे हैं, अभी तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड हासिल करने के लिए सैन्य अभियान चलाने की बात नहीं कही है, लेकिन ट्रंप ने यह विकल्प भी खुला रखा है।

    आपको बता दें, ग्रीनलैंड की सरकार और डेनमार्क को दरकिनार करते हुएस अमेरिका ने सीधे ग्रीनलैंड की जनता को ही पैसा देने की पेशकश की थी,हालांकि उन्होंने भी इससे इनकार कर दिया। रॉयटर्स के मुताबिक ग्रीनलैंड के लोगों ने इस बात को अपमानजनक माना और पूरी तरह से खारिज कर दिया।

    राष्ट्रपति ट्रंप भले ही ग्रीनलैंड को जीतने के लिए कुछ भी कर जाने के तैयार दिख रहे हों, लेकिन ग्रीनलैंड की जनता और यूरोपीय देश इस पर राजी नहीं दिखते। ट्रंप के ग्रीनलैंड प्रस्ताव के विरोध में यूरोपीय देश खड़े हुए हैं। प्रतीकात्मक रूप से ही सही लेकिन जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों ने अपनी सेना को ग्रीनलैंड में भेजा है। इससे नाराज ट्रंप ने इन देशों के ऊपर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, यह भी कहा कि अगर यह देश नहीं मानते तो जून से यह टैरिफ 25 फीसदी हो जाएगा।

  • बजट 2026 को लेकर नई चर्चा… पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा

    बजट 2026 को लेकर नई चर्चा… पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) से पहले टैक्स को लेकर एक नई चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार शादीशुदा लोगों के लिए ‘संयुक्त कराधान’ यानी ज्वाइंट टैक्सेशन (Joint taxation) का विकल्प पेश कर सकती है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पति और पत्नी (Husband and wife) मिलकर एक साथ आयकर रिटर्न (Income tax return) भर सकेंगे। इससे खासकर उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जहां कमाई का जिम्मा एक ही व्यक्ति पर है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो खासकर एकल कमाई वाले परिवारों को Tax में लाखों रुपये की बचत हो सकती है।

    बजट से पहले इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने वित्त मंत्रालय को बजट को लेकर एक खास सलाह दी है। उसने पति-पत्नी को संयुक्त रिटर्न फाइल का विकल्प देने की सलाह दी है। अभी पति और पत्नी को अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है।

    फिलहाल नई कर व्यवस्था ही आयकर रिटर्न के लिए डिफॉल्ट व्यवस्था है। हालांकि, करदाता पुरानी कर व्यवस्था को भी चुन सकते हैं। दोनों में ही टैक्स की अलग-अलग स्लैब हैं जहां आमदनी बढ़ने के साथ-साथ कर की दर बढ़ती हैं। नई टैक्स व्यवस्था के तहत जहां तीन लाख रुपये सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं है, वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये सालाना के लिए लागू है। दोनों में ही यह सीमा परिवार के हर एक सदस्य पर अलग-अलग लागू है।


    विवाहितों पर बढ़ता है बोझ

    बहुत से घर ऐसे होते हैं जहां एक ही व्यक्ति नौकरी या काम करता है। दूसरा जीवनसाथी घर, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करता है। यह काम भले ही बहुत अहम हो, लेकिन कर प्रणाली में इसकी कोई कीमत नहीं मानी जाती है। नतीजा यह होता है कि ऐसे परिवारों पर कर का बोझ ज्यादा पड़ता है।

    मौजूदा समय में भारत में हर व्यक्ति को अपनी आय पर अलग-अलग कर देना होता है। चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो। पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग बेसिक छूट, स्लैब और कटौतियां मिलते हैं। इस वजह से शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे जीवनसाथी को कर छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता है।


    क्या है ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम

    इसका मतलब है कि शादीशुदा जोड़े अपनी कमाई को जोड़कर एक साथ आयकर रिटर्न फाइल करें। इसके लिए दोनों के पास पैन कार्ड होना जरूरी होगा। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है।

    जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को तीन लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा छह लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मध्यम वर्गीय परिवार को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, हेल्थ इंश्योरेंस और दूसरी कटौतियों को भी बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग मानक कटौती मिलने की बात कही जा रही है।


    सरचार्ज पर भी राहत संभव

    साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी 50 लाख रुपये से ज्यादा आय पर सरचार्ज लगता है, लेकिन संयुक्त कराधान में इसकी सीमा 75 लाख रुपये या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे उच्च कर दायरे में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा। इससे कुल करयोग्य आय कम हो जाएगी और परिवार के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे।


    इन देशों में है ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम

    अमेरिका, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल जैसे कई देशों में शादीशुदा जोड़ों को संयुक्त कर रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलती है। वहां परिवार को एक आर्थिक इकाई माना जाता है। भारत भी ऐसी प्रणाली अपनाकर अपने कर कानूनों को आसान और आधुनिक बना सकता है।

  • स्पेन में भीषण रेल हादसा… दो ट्रेनों की जोरदार भिड़ंत में 21 लोगों की मौत, 75 घायल

    स्पेन में भीषण रेल हादसा… दो ट्रेनों की जोरदार भिड़ंत में 21 लोगों की मौत, 75 घायल


    मैड्रिड।
    स्पेन (Spain) में भीषण रेल हादसे (Terrible ऊrain Accident) में 21 लोगों की मौत हो गई और 75 घायल हैं। कोर्डोबा (Cordoba) के पास एडमुज गांव के नजदीक यह दुर्घटना हुई। मलागा से मैड्रिड जा रही निजी कंपनी इर्यो की हाई-स्पीड ट्रेन का पिछला हिस्सा अचानक पटरी से उतर गया। इसके बाद यह दूसरी दिशा से आ रही ट्रेन से टकरा गई। हादसा रविवार शाम 7:45 बजे हुआ, जिसमें पहली ट्रेन में लगभग 300 और दूसरी में 200 यात्री सवार थे। स्पेन के परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंटे (Transport Minister Oscar Puente) ने मौतों की संख्या 21 बताई। उन्होंने कहा कि सभी जीवित बचे लोगों को निकाल लिया गया है, हालांकि कुछ और शव बाकी हो सकते हैं।

    आंदालूसिया के क्षेत्रीय अध्यक्ष जुआनमा मोरेनो ने बताया कि 75 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें 15 की हालत गंभीर है। बचावकर्मी पूरी रात मलबे से शव निकालने में जुटे रहे। यह हादसा बेहद असामान्य बताया जा रहा है क्योंकि यह सपाट और हाल ही में मई में नवीनीकृत ट्रैक पर हुआ। पटरी से उतरने वाली ट्रेन चार साल से कम पुरानी थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि रेनफे ट्रेन के पहले दो डिब्बे पटरी से उतरकर 4 मीटर नीचे ढलान पर जा गिरे, जिससे उसके आगे के हिस्से को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।

    ‘ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो’
    एक यात्री और पत्रकार साल्वाडोर जिमेनेज ने बताया कि क्षण भर में ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। यात्रियों ने इमरजेंसी हैमर से खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। घटनास्थल दूरदराज होने के कारण पहुंचना मुश्किल था, फिर भी स्थानीय लोग कंबल और पानी लेकर मदद के लिए पहुंचे। स्पेनिश सेना, रेड क्रॉस और अन्य एजेंसियों ने बचाव अभियान में हिस्सा लिया।

    सदी का स्पेन का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा
    स्पेन में यूरोप का सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है, जिसमें 3100 किलोमीटर से अधिक ट्रैक हैं। यह काफी सुरक्षित माना जाता है। 2024 में रेनफे की हाई-स्पीड ट्रेनों में 2.5 करोड़ से अधिक यात्रियों ने सफर किया। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, राजा फेलिप VI और रानी लेटिजिया ने शोक व्यक्त किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी संवेदना जताई। जांच में एक महीने तक लग सकता है। सोमवार को मैड्रिड और आंदालूसिया के बीच ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी गई हैं। यह इस सदी का स्पेन का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा है।