Author: bharati

  • शाहरुख खान ने अनिल कपूर की आंखों के सामने खरीदा था मन्नत, बंगले में हुई थी फिल्म तेजाब की शूटिंग..

    शाहरुख खान ने अनिल कपूर की आंखों के सामने खरीदा था मन्नत, बंगले में हुई थी फिल्म तेजाब की शूटिंग..

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर ने शाहरुख खान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि शाहरुख खान ने जिस बंगले को आज मन्नत के नाम से जाना जाता है, उसे खरीदने से पहले वहां उनकी फिल्म तेजाब की शूटिंग हुई थी। अनिल कपूर के मुताबिक, उन्होंने अपनी आंखों के सामने शाहरुख खान को यह प्रॉपर्टी खरीदते हुए देखा था। यह किस्सा दोनों अभिनेताओं के पुराने संबंधों और उनके करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा है।

    एक रियलिटी शो के दौरान अनिल कपूर ने शाहरुख खान के साथ अपनी दोस्ती और मन्नत से जुड़े अनुभवों को याद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि शाहरुख खान ने 2000 के दशक में इस बंगले को खरीदा था। हालांकि, इससे पहले उस प्रॉपर्टी पर फिल्म तेजाब की शूटिंग हो चुकी थी। अनिल कपूर ने कहा कि जब उन्होंने वहां शूटिंग की थी, तब तक शाहरुख खान ने वह बंगला नहीं खरीदा था। बाद में उन्होंने अपनी आंखों के सामने शाहरुख को उस प्रॉपर्टी का मालिक बनते देखा।

    दरअसल, शो में अनिल कपूर प्रतियोगियों से सवाल कर रहे थे कि अगर वे एक करोड़ रुपये जीत जाते हैं तो उस रकम का क्या करेंगे। इस पर एक महिला प्रतियोगी ने कहा कि वह शाहरुख खान के घर मन्नत जैसा बंगला खरीदना चाहेंगी। इसी जवाब के बाद अनिल कपूर ने मन्नत और शाहरुख खान से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं।

    अनिल कपूर ने शाहरुख खान के साथ अपने रिश्ते को काफी पुराना और करीबी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। अभिनेता ने उस समय को भी याद किया, जब शाहरुख खान उनसे मिलने आए थे। उस दौरान अनिल कपूर फिल्म बेनाम बादशाह की शूटिंग कर रहे थे। अनिल कपूर के मुताबिक, पहली मुलाकात में ही उन्हें शाहरुख खान की आंखों में एक अलग चमक दिखाई दी थी। उन्हें तभी महसूस हो गया था कि शाहरुख आगे चलकर बड़े स्टार बनेंगे। इसी मुलाकात से दोनों के बीच संबंधों की शुरुआत हुई और समय के साथ उनकी दोस्ती मजबूत होती चली गई।

    अनिल कपूर ने यह भी बताया कि मन्नत खरीदने से पहले शाहरुख खान कार्टर रोड स्थित एक फ्लैट में अपने दोस्तों के साथ रहते थे। दोनों की मुलाकात अक्सर कार्टर रोड पर होती थी। उस समय शाहरुख खान का सपना समुद्र के किनारे एक बड़ा बंगला खरीदने का था। अनिल कपूर ने कहा कि शाहरुख ने जो सपना देखा था, वह बाद में पूरा हुआ और उन्होंने मन्नत को अपना घर बना लिया।

    दोनों कलाकारों ने वर्ष 1995 में फिल्म त्रिमूर्ति में भी साथ काम किया था। हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद दोनों के व्यक्तिगत संबंधों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और उनकी दोस्ती बनी रही।

    मुंबई के बांद्रा इलाके में समुद्र के किनारे स्थित मन्नत शाहरुख खान के सबसे चर्चित आवासों में शामिल है। इस बंगले का पुराना नाम विला वियना बताया जाता है। शाहरुख खान ने वर्ष 2001 में इसे लगभग 13 करोड़ रुपये में खरीदा था। समय के साथ यह बंगला उनकी पहचान का अहम हिस्सा बन गया। प्रशंसकों के बीच भी मन्नत को लेकर खास आकर्षण बना रहता है।

    फिलहाल मन्नत में नवीनीकरण का काम चल रहा है। इसी वजह से शाहरुख खान अपने परिवार और स्टाफ के साथ पास के एक किराए के घर में रह रहे हैं। अनिल कपूर द्वारा साझा किया गया यह किस्सा बताता है कि मन्नत से उनका जुड़ाव शाहरुख खान के वहां रहने से भी पहले का है। एक समय जिस प्रॉपर्टी पर उन्होंने फिल्म की शूटिंग की थी, वही बाद में उनके करीबी दोस्त शाहरुख खान का चर्चित आशियाना बन गई।

  • OTT पर रिलीज हुई झाड़-फूंक, काले जादू और तंत्र विद्या की रहस्यमयी कहानी में छिपा अंधविश्वास का खतरनाक सच

    OTT पर रिलीज हुई झाड़-फूंक, काले जादू और तंत्र विद्या की रहस्यमयी कहानी में छिपा अंधविश्वास का खतरनाक सच

    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए झाड़-फूंक नाम की फिल्म रिलीज हुई है। 1 घंटे 53 मिनट की यह फिल्म काले जादू, तंत्र विद्या और अंधविश्वास जैसे विषयों पर आधारित है। फिल्म की कहानी में कुल पांच प्रमुख किरदार हैं और पूरी फिल्म की शूटिंग केवल एक घर में की गई है। सीमित किरदारों और एक ही स्थान पर आधारित कहानी के जरिए फिल्म डर और रहस्य का माहौल तैयार करने की कोशिश करती है।

    फिल्म की कहानी आस्था (सुंबुल तौकीर खान) और राजवीर के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। आस्था गर्भवती है और राजवीर के साथ उत्तराखंड के जंगलों से होते हुए दिल्ली जा रही होती है। इसी दौरान उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। हादसे के बाद जब आस्था को होश आता है तो वह खुद को एक अनजान दंपती के बीच पाती है। यह घटना उसकी जिंदगी में एक अप्रत्याशित मोड़ लेकर आती है।

    मोहन ठाकुर (यशपाल शर्मा) और कामिनी ठाकुर (पद्मिनी कोल्हापुरे) आस्था को अपने घर ले आते हैं। शुरुआत में दोनों उसके प्रति काफी अपनापन और स्नेह दिखाते हैं। उनके व्यवहार से आस्था भी धीरे-धीरे उनसे जुड़ने लगती है। हालांकि, कहानी आगे बढ़ने के साथ मोहन ठाकुर के इरादों से जुड़े रहस्य सामने आने लगते हैं। जिस घर में आस्था को सहारा मिलता दिखाई देता है, वहीं धीरे-धीरे उसके सामने कई असामान्य परिस्थितियां पैदा होने लगती हैं।

    फिल्म में एक छोटे बच्चे का किरदार भी अहम है। बच्चा किसी अजीब खतरे से घिरा हुआ है। उसे उस स्थिति से बाहर निकालने के लिए मोहन ठाकुर काले जादू और तांत्रिक विद्या का सहारा लेता है। इसी घटनाक्रम के माध्यम से फिल्म में अंधविश्वास, रहस्यमयी गतिविधियों और तंत्र-मंत्र से जुड़े पहलुओं को दिखाया गया है। पांच किरदारों के बीच आगे बढ़ने वाली कहानी में घर का वातावरण और वहां होने वाली घटनाएं रहस्य को बनाए रखने का काम करती हैं।

    फिल्म की शुरुआत प्रभावशाली है। शुरुआती हिस्से में डर और रहस्य का माहौल दर्शकों का ध्यान खींचता है। कहानी जिस तरह आगे बढ़ती है, उससे घटनाओं के पीछे छिपे सच को जानने की उत्सुकता पैदा होती है। हालांकि, फिल्म जैसे-जैसे क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ती है, उसका डराने वाला प्रभाव कम होने लगता है। शुरुआत में जो घटनाएं रोमांच पैदा करती हैं, आगे चलकर उनका असर उतना मजबूत नहीं रह जाता।

    फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है, लेकिन कहानी के अंतिम हिस्से में रोमांच बनाए रखने में कमी दिखाई देती है। इसका क्लाइमेक्स भी अपेक्षाकृत कमजोर और साधारण महसूस होता है। संगीत की बात करें तो इसमें एक रोमांटिक गाना शामिल किया गया है। इसके अलावा बैकग्राउंड म्यूजिक के माध्यम से डर और रहस्य का वातावरण बनाने की कोशिश की गई है। शुरुआती हिस्से में इसका प्रभाव बेहतर दिखाई देता है, लेकिन आगे चलकर कहानी की गति और डर का स्तर कमजोर पड़ता है।

    फिल्म का निर्देशन राजन वर्मा ने किया है। वह इसके लेखक और निर्माता भी हैं। उन्हें जीसस जोरदार, धमन: द सेवियर और पानी: एक प्रेम कहानी जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। फिल्म के अंत में अंधविश्वास को लेकर एक सामाजिक संदेश दिया गया है। कहानी यह दिखाने की कोशिश करती है कि अंधविश्वास के प्रभाव में आकर लोग किस तरह गलत फैसले ले सकते हैं और इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। फिल्म के माध्यम से यह बात भी सामने रखी गई है कि भारत में अंधविश्वास के कारण कई लोगों की जान तक चली जाती है।

    कुल मिलाकर झाड़-फूंक में हॉरर, रहस्य, काला जादू और तंत्र विद्या को एक सीमित कहानी के भीतर पेश किया गया है। इसकी शुरुआत और विषय दर्शकों की रुचि जगा सकते हैं, हालांकि कमजोर क्लाइमेक्स और बाद के हिस्से में कम होता डर फिल्म के प्रभाव को सीमित करता है। अंधविश्वास पर आधारित हॉरर कहानियां पसंद करने वाले दर्शक इसे देखने पर विचार कर सकते हैं।

  • शनिवार के दिन इन नियमों का रखें विशेष ध्यान, शनिदेव की पूजा से दूर हो सकती हैं जीवन की परेशानियां

    शनिवार के दिन इन नियमों का रखें विशेष ध्यान, शनिदेव की पूजा से दूर हो सकती हैं जीवन की परेशानियां


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन उनकी पूजा और कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शनिदेव की आराधना करने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से जीवन में सुख शांति और सकारात्मकता आती है। कई लोग शनिवार को व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर शनिदेव के दर्शन करते हैं। हालांकि इस दिन पूजा के साथ अपने व्यवहार और कर्मों पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    शनिवार को सुबह जल्दी उठकर करें ये काम

    धार्मिक परंपरा के अनुसार शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर घर के मंदिर में दीपक जलाएं और शनिदेव का स्मरण करें। यदि संभव हो तो शनिदेव के मंदिर जाकर दर्शन करें। पूजा के दौरान शनि मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को अपने जीवन में अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

    सरसों के तेल का दीपक जलाने की मान्यता

    शनिवार को शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। कुछ लोग पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। दीपक जलाते समय स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान काले तिल और उड़द की दाल अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।

    जरूरतमंदों की मदद करना माना जाता है शुभ

    शनिवार के दिन दान और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार काले तिल कंबल उड़द की दाल और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में जरूरतमंदों की सहायता को शनिदेव की प्रसन्नता से जोड़कर देखा जाता है। इसके साथ ही पशु-पक्षियों को भोजन देना और श्रमिकों तथा बुजुर्गों का सम्मान करना भी अच्छे कर्मों में शामिल माना जाता है।

    शनिवार को किन बातों से बचें

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को किसी के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए। गरीबों कमजोर लोगों और मेहनतकश व्यक्तियों का अपमान करने से बचना चाहिए। इस दिन झूठ बोलने धोखा देने और किसी का हक छीनने जैसे काम नहीं करने चाहिए। गुस्से और विवाद से दूर रहकर शांत व्यवहार अपनाना चाहिए। कुछ परंपराओं में शनिवार को बाल और नाखून काटने तथा लोहे की वस्तुएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ये मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं।

    कर्मों को सुधारने का संदेश देता है शनिवार

    शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए शनिवार का महत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह दिन ईमानदारी मेहनत और अनुशासन के साथ जीवन जीने की सीख भी देता है। इस दिन जरूरतमंदों की मदद करना और किसी के प्रति गलत व्यवहार न करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धा और अच्छे कर्मों के साथ शनिवार के नियमों का पालन करने से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर सकता है।

  • उज्जैन में तमन्ना भाटिया की शिवभक्ति, महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुईं शामिल

    उज्जैन में तमन्ना भाटिया की शिवभक्ति, महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री तमन्ना भाटिया शनिवार सुबह उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य भी साथ मौजूद रहे। सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना पारंपरिक साड़ी में नजर आईं। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे तक भस्म आरती के दर्शन किए। मंदिर परिसर में अभिनेत्री पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना करती दिखाई दीं।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त तड़के मंदिर पहुंचते हैं। तमन्ना भाटिया ने भी सुबह की इस विशेष आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। उनके साथ उनकी मां भी मौजूद थीं। अभिनेत्री अपनी मां को भगवान महाकाल के दर्शन कराने के लिए उज्जैन लेकर आई थीं। परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा की और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन

    भस्म आरती के दौरान तमन्ना नंदी हॉल में बैठीं और करीब दो घंटे तक आरती में शामिल रहीं। इस दौरान उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। आरती संपन्न होने के बाद उन्होंने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त नंदी के कान में अपनी इच्छा या प्रार्थना कहते हैं। मान्यता है कि नंदी महाराज भक्तों की मनोकामना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए तमन्ना ने भी नंदी महाराज के कान में अपनी प्रार्थना कही।

    मंदिर समिति ने किया सम्मान

    दर्शन के दौरान महाकाल मंदिर समिति की ओर से अभिनेत्री तमन्ना भाटिया और उनके परिवार का सम्मान किया गया। मंदिर में दर्शन के बाद तमन्ना ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि सुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए बेहद आनंद का अनुभव है। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां को भी भगवान महाकाल के दर्शन कराने के लिए लेकर आई थीं। मां के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करना उनके लिए बेहद खुशी का पल रहा।

    उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां हर दिन देश और दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। फिल्म और मनोरंजन जगत की हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाती रही हैं। तमन्ना भाटिया का अपनी मां और परिवार के साथ भस्म आरती में शामिल होना भी इसी आस्था से जुड़ा एक खास अवसर रहा। दर्शन के दौरान अभिनेत्री ने धार्मिक माहौल में समय बिताया और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।

  • दीपावली से पहले वेतन-बोनस के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की हुंकार, 55 जिलों में 2 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन

    दीपावली से पहले वेतन-बोनस के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की हुंकार, 55 जिलों में 2 नवंबर को सौंपेंगे ज्ञापन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के शासकीय विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों ने दीपावली से पहले वेतन और बोनस के भुगतान की मांग तेज कर दी है। त्योहार के मद्देनजर कर्मचारियों को आर्थिक राहत दिलाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत 2 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में श्रम आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। संगठन की प्रमुख मांग है कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को 5 नवंबर तक वेतन और दीपावली बोनस का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

    संगठन के जिला अध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी रविंद्र जायसवाल और जिला महामंत्री अनुपम वर्मा ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को लंबे समय से आर्थिक और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। त्योहार के समय भी कई विभागों में वेतन और बोनस के भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाने और दीपावली की तैयारियां करने में परेशानी आ रही है। संगठन का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों से लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिल सके।

    22 अक्टूबर को भी दिया गया था ज्ञापन

    संगठन के पदाधिकारियों के मुताबिक इससे पहले 22 अक्टूबर को भी सहायक श्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपकर वेतन और बोनस का भुगतान कराने की मांग की गई थी। इसके बाद जबलपुर शहर के कई विभागों में कर्मचारियों को नियमित वेतन और बोनस मिला है। संगठन ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से कुछ विभागों में भुगतान की स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि प्रदेश के कई अन्य जिलों और विभागों में अब भी कर्मचारियों का भुगतान बाकी है। इसी वजह से संगठन ने दोबारा प्रदेशव्यापी स्तर पर अपनी मांग उठाने का निर्णय लिया है।

    5100 रुपए बोनस का मुद्दा भी उठाया

    आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने 5100 रुपए बोनस राशि को लेकर भी प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और विभिन्न दिशा-निर्देशों के तहत कुछ विभागों में इस राशि का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद कई विभागों में बोनस को लेकर अब तक लिखित आदेश या स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं। संगठन चाहता है कि संबंधित विभाग इस मामले में स्पष्ट निर्णय लें और पात्र कर्मचारियों को समय पर बोनस का भुगतान किया जाए।

    ट्रेड यूनियन के रूप में पंजीकृत हुआ संगठन

    संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन अब ट्रेड यूनियन के रूप में पंजीकृत हो चुका है और उसे पंजीकरण क्रमांक भी मिल गया है। संगठन का कहना है कि पंजीकरण मिलने से आउटसोर्स कर्मचारियों को अपनी समस्याएं संगठित तरीके से शासन और प्रशासन के सामने रखने में मदद मिलेगी। कर्मचारी वेतन में देरी बोनस भुगतान और अन्य कार्य संबंधी समस्याओं को लेकर एक मंच से आवाज उठा सकेंगे।

    अब 2 नवंबर को प्रदेश के सभी 55 जिलों में ज्ञापन सौंपकर संगठन प्रशासन का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की ओर आकर्षित करेगा। कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग दीपावली से पहले भुगतान को लेकर क्या कदम उठाते हैं और 5 नवंबर तक वेतन तथा बोनस देने की मांग पर कितना अमल हो पाता है।

  • मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए

    मप्र हाईकोर्ट को मिलेंगे 12 नए जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 7 वकीलों और 5 न्यायिक अधिकारियों के नाम सुझाए


    जबलपुर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी दूर करने और लंबित मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की है। प्रस्तावित नामों में सात वकील और पांच न्यायिक अधिकारी शामिल हैं। यदि सभी नियुक्तियों को मंजूरी मिल जाती है तो हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी। इससे जबलपुर स्थित मुख्य पीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से की गई इस सिफारिश को मध्यप्रदेश की न्याय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी का मुद्दा सामने आता रहा है। ऐसे में 12 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मुकदमों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलने की संभावना है।

    पांच न्यायिक अधिकारियों के नाम शामिल

    कॉलेजियम ने न्यायिक सेवा कोटे से पांच वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की है। इनमें रेणुका कंचन कृष्णमूर्ति मिश्रा वीरेंद्र सिंह राजपूत ममता जैन और अशिता श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। ये सभी न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी हैं और अब इनके नामों पर नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    बार कोटे से सात वकीलों की सिफारिश

    वकीलों के कोटे से जिन सात नामों की सिफारिश की गई है उनमें डॉ. विवेक शरण राजेश कुमार शुक्ला कनकलता सिंह भक्ति व्यास श्रेयस पंडित मृणाल केलकर और अविनाश जरगर शामिल हैं। इन नामों को कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया के अगले चरण में भेजा जाएगा। इस तरह न्यायिक सेवा और बार दोनों वर्गों से नए न्यायाधीशों के चयन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगी नियुक्ति

    कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब नियुक्ति की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंत्रालय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियुक्ति से जुड़ी फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी जाएगी। राष्ट्रपति की मंजूरी और नियुक्ति वारंट जारी होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।

    इसके बाद मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण और कार्यभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो जाएगी।

    नई नियुक्तियों का असर केवल जबलपुर की मुख्य पीठ तक सीमित नहीं रहेगा। इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ में भी न्यायिक कामकाज को इससे मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि लंबित मुकदमों की संख्या कम होने और सुनवाई की गति बढ़ने का वास्तविक असर नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब सभी की नजर नियुक्ति की अगली प्रक्रिया पर टिकी है।

  • धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर उठी दुकानें बंद कराने की मांग, दूध के बढ़ते दामों पर भी जताई नाराजगी

    धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर उठी दुकानें बंद कराने की मांग, दूध के बढ़ते दामों पर भी जताई नाराजगी


    जबलपुर । जबलपुर में देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के नाम पर संचालित मांस और मछली की दुकानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू धधार्मिकर्म सेना ने ऐसी दुकानों के नाम पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े नामों का इस्तेमाल मांस और मछली की दुकानों के लिए किया जाना उचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर संगठन के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दुकानों के नाम बदलवाने के साथ ही दूध की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने की मांग भी उठाई गई।

    हिंदू धर्म सेना के अध्यक्ष नीरज राजपूत ने कहा कि शहर के घंटाघर सहित कई इलाकों में मांस और मछली बेचने वाली दुकानों के नाम देवी-देवताओं और पवित्र प्रतीकों से जुड़े हुए हैं। संगठन के मुताबिक ऐसे नामों से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। ज्ञापन में घंटाघर क्षेत्र की शुभ नॉनवेज दुकान और एक अन्य स्थान पर संचालित लक्ष्मी चिकन दुकान का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। संगठन ने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाने की मांग की है।

    संगठन की मांग है कि शहर में ऐसी सभी दुकानों की सूची तैयार कराई जाए जिनके नाम धार्मिक मान्यताओं और देवी-देवताओं से जुड़े हैं। इसके बाद संबंधित दुकान संचालकों को नोटिस जारी कर नाम बदलने के लिए कहा जाए। हिंदू धर्म सेना का कहना है कि भविष्य में मांस और मटन की दुकानों के नाम रखने के दौरान भी धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संगठन ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे आगे इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

    ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन ने चेतावनी भी दी कि यदि प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो हिंदू धर्म सेना खुद कदम उठाने के लिए मजबूर होगी। हालांकि संगठन की ओर से उठाई गई मांगों पर प्रशासन की ओर से किसी कार्रवाई या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है। अब इस मामले में प्रशासन क्या रुख अपनाता है इस पर सभी की नजर रहेगी।

    ज्ञापन में केवल दुकानों के नाम का मुद्दा ही नहीं उठाया गया बल्कि आम लोगों से जुड़ी एक दूसरी समस्या पर भी ध्यान दिलाया गया। संगठन ने दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से दाम नियंत्रित करने की मांग की। नीरज राजपूत ने कहा कि दूध के दाम अचानक बढ़ने से आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। दूध रोजमर्रा की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने का असर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी पर पड़ता है।

    संगठन का कहना है कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है। इसलिए प्रशासन को इस दिशा में भी जरूरी कदम उठाने चाहिए। हिंदू धर्म सेना ने मांग की है कि दूध के दामों की समीक्षा कर आम उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। अब जबलपुर प्रशासन के सामने एक ही ज्ञापन के जरिए धार्मिक भावनाओं और आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े दो मुद्दे रखे गए हैं। इन मांगों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।

  • बेटी को परेशान करने से रोका तो पिता पर चाकू से हमला, घायल पिता को लेकर आधी रात थाने पहुंची बेटी

    बेटी को परेशान करने से रोका तो पिता पर चाकू से हमला, घायल पिता को लेकर आधी रात थाने पहुंची बेटी


    जबलपुर । जबलपुर में बेटी को कथित रूप से परेशान करने का विरोध करना एक पिता को भारी पड़ गया। आरोप है कि दो युवकों ने रास्ते में रोककर उन पर चाकू से हमला कर दिया। घायल पिता को लेकर उनकी 22 वर्षीय छोटी बेटी शुक्रवार देर रात करीब एक बजे सिविल लाइन थाने पहुंची और पुलिस के सामने अपनी शिकायत रखी। युवती ने आरोप लगाया कि वह इससे पहले भी आरोपियों के खिलाफ चार बार एफआईआर दर्ज करवा चुकी है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से आरोपियों के हौसले बढ़ते गए और अब उन्होंने उसके पिता पर हमला कर दिया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    जानकारी के मुताबिक हाउसिंग बोर्ड निवासी हीरालाल साहनी शुक्रवार रात मुकादमगंज से अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। रात करीब 12 बजे रास्ते में हेमंत सिंह राजपूत और अभिनव यादव ने उन्हें रोक लिया। युवती का आरोप है कि दोनों ने उनके पिता पर चाकू से हमला किया और उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी मच गई। छोटी बेटी अपने घायल पिता को लेकर सीधे सिविल लाइन थाने पहुंची और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    युवती ने पुलिस को बताया कि करीब पांच साल पहले उसकी बड़ी बहन की हेमंत सिंह राजपूत से दोस्ती थी। बाद में जब उसकी बहन ने उससे बातचीत बंद कर दी तो हेमंत कथित तौर पर उसे परेशान करने और धमकाने लगा। युवती का आरोप है कि बहन के इनकार करने के बाद उसके साथ मारपीट भी की गई। इतना ही नहीं परिवार को डराने के लिए घर के सामने बम फेंकने की घटना भी हुई थी।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों और परेशानियों के कारण घर के लोग भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं। युवती ने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत की प्रताड़ना से परेशान होकर उसकी बड़ी बहन ने आत्महत्या की कोशिश की थी और फांसी लगाने तक की नौबत आ गई थी। परिवार के मुताबिक करीब एक सप्ताह पहले उसके भाई मोहित साहनी पर भी हेमंत और उसके साथियों ने हमला कर उसे घायल कर दिया था।

    युवती ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि वह पहले चार बार शिकायत और एफआईआर दर्ज करवा चुकी है लेकिन आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। युवती ने दावा किया कि आरोपी हेमंत की बहन कंचन सिंह राजपूत पुलिस विभाग में टीआई हैं। इसी वजह से सिविल लाइन पुलिस पर दबाव होने और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि ये सभी आरोप युवती की शिकायत पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में सीएसपी सोनू कुर्मी ने बताया कि युवती की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हमला करने वाले आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीम भेजी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि युवती ने पहले भी शिकायतें की थीं और उन पर कार्रवाई नहीं हुई तो इस पहलू की भी जांच कराई जाएगी।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब यह पता लगाया जाएगा कि पिता पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और पहले दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई थी। पीड़ित परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • दिल्ली की वोट बचाओ रैली के लिए ग्वालियर कांग्रेस का बड़ा प्लान, 90 कारों और 10 बसों से रवाना होंगे कार्यकर्ता

    दिल्ली की वोट बचाओ रैली के लिए ग्वालियर कांग्रेस का बड़ा प्लान, 90 कारों और 10 बसों से रवाना होंगे कार्यकर्ता


    ग्वालियर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की वोट बचाओ-देश बचाओ रैली को लेकर ग्वालियर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस रैली में शामिल होने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शनिवार को दिल्ली रवाना होंगे। पार्टी नेताओं का दावा है कि ग्वालियर से हजारों कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचेंगे। इसके लिए 90 कारों और 10 बसों के साथ रेल और हवाई मार्ग से भी दिल्ली पहुंचने की योजना बनाई गई है। कांग्रेस ने रास्ते में वाहनों को रोके जाने की आशंका को देखते हुए कार्यकर्ताओं को अलग-अलग माध्यमों से दिल्ली पहुंचाने की रणनीति तैयार की है।

    कांग्रेस नेताओं के मुताबिक दिल्ली में होने वाली रैली को सफल बनाने के लिए संगठन स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। दोपहर से ही कार्यकर्ताओं के दिल्ली रवाना होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी-4 की बैठक में यात्रा और व्यवस्थाओं को लेकर योजना बनाई गई है। इसमें कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर रामलीला मैदान पहुंच सकें।

    पार्टी आलाकमान की ओर से भी संगठन को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के तहत ग्वालियर में शहर और ग्रामीण कांग्रेस के नेताओं ने संयुक्त रूप से तैयारियों की समीक्षा की। बीते सप्ताह एआईसीसी पर्यवेक्षक चंद्रकांत हांडोरे पूर्व सांसद प्रताप भानु शर्मा और प्रदेश प्रभारी पीसी शर्मा भी ग्वालियर पहुंचे थे। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों को रैली से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

    इस रैली के जरिए कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भाजपा की ओर से कथित वोट चोरी की जा रही है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनाव व्यवस्था में निष्पक्षता जरूरी है।

    ग्वालियर कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली पहुंचने के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाने का फैसला किया है। उनका दावा है कि इतनी बड़ी रैली में शामिल होने जा रहे कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोके जाने की आशंका है। कांग्रेस नेताओं को डर है कि सड़क मार्ग से आने वाले वाहनों को दिल्ली के बाहरी इलाकों में ही रोकने की कोशिश की जा सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए केवल बसों और कारों पर निर्भर रहने के बजाय रेल मार्ग से भी कार्यकर्ताओं को भेजने की योजना बनाई गई है।

    इसके अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी हवाई मार्ग से भी दिल्ली पहुंचेंगे। कांग्रेस का मानना है कि अलग-अलग माध्यमों से रवाना होने पर कार्यकर्ताओं के रामलीला मैदान तक पहुंचने में आसानी होगी। हालांकि रास्ते में रोकने की आशंका पार्टी नेताओं का दावा है और इस संबंध में किसी आधिकारिक प्रतिबंध की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल ग्वालियर कांग्रेस का पूरा जोर दिल्ली की रैली में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर है। 90 कारों 10 बसों और रेल तथा हवाई मार्ग से कार्यकर्ताओं के रवाना होने की तैयारी के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि ग्वालियर से कितने कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचते हैं और रामलीला मैदान में होने वाली रैली में पार्टी अपनी कितनी ताकत दिखा पाती है।

  • इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर

    इंदौर आ रहे दो ब्रांच मैनेजरों की दर्दनाक मौत, साथियों का इंतजार करते समय तेज रफ्तार क्रेन ने मारी टक्कर


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई। दोनों युवक एक फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और झाबुआ से इंदौर में आयोजित मीटिंग में शामिल होने के लिए निकले थे। एयरपोर्ट रोड पर नावदापंथ ब्रिज के पास रात करीब 9 बजे तेज रफ्तार क्रेन वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। घटना की खबर मिलते ही कंपनी के कर्मचारियों और साथियों में शोक छा गया।

    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को फाइनेंस कंपनी के चार कर्मचारी दो बाइकों पर सवार होकर झाबुआ से इंदौर आ रहे थे। सभी को कंपनी की मीटिंग में शामिल होना था। रास्ते में दूसरी बाइक पर सवार उनके दो साथी कुछ पीछे रह गए। इसके बाद आगे चल रहे दोनों युवकों ने अपनी बाइक रोक दी और साथियों का इंतजार करने लगे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे क्रेन वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि दोनों युवक सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

    हादसे के वक्त पीछे आ रहे दोनों साथियों ने घटना को अपनी आंखों से देखा। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद करने में जुट गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। हालांकि गंभीर चोटों के चलते दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने साथ आए कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया।

    मृतकों की पहचान रोहित मीणा निवासी सुगांव और नौशाद निवासी शाजापुर जिले के करई के पास स्थित एक गांव के रूप में हुई है। दोनों फाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। शनिवार दोपहर दोनों के शवों का अलग-अलग अस्पतालों में पोस्टमार्टम कराया गया। रोहित का शव एमवाय अस्पताल भेजा गया था जबकि नौशाद का शव जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखा गया।

    कंपनी में उनके साथ काम करने वाले राहुल ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलने के बाद वे चंदन नगर थाने पहुंचे। इसके बाद अस्पताल जाकर साथियों के बारे में जानकारी ली। घटना की खबर फैलने पर कंपनी के अन्य कर्मचारी भी अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में अपने साथियों को खोने का दुख कर्मचारियों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।

    दोनों युवक काम के सिलसिले में इंदौर आ रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में साथियों का इंतजार करने के दौरान यह हादसा हो जाएगा। एक ही कंपनी में काम करने वाले चार कर्मचारी साथ निकले थे लेकिन इस सफर का अंत दो परिवारों के लिए बेहद दुखद साबित हुआ।

    फिलहाल पुलिस हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्रेन वाहन किस गति से आ रहा था और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क पर तेज रफ्तार और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है।