Author: bharati

  • भारत के 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित…. जानिए उनका अब तक का सफर

    भारत के 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित…. जानिए उनका अब तक का सफर


    नई दिल्ली।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) को नया मुखिया मिल जाएगा। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित (Air Marshal Ashutosh Dixit)( देश के 29वें वायुसेना प्रमुख (Air Force Chief) बनेंगे। मौजूदा प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Amarpreet Singh) 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। दीक्षित अभी उप प्रमुख हैं। एक बात इस नियुक्ति को और खास बनाती है। अपने बैच में वह अकेले अफसर हैं जो वायुसेना के शीर्ष ओहदों तक पहुंचे।

    दीक्षित को दिसंबर 1986 में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ। उनके नाम 3500 घंटे से ज्यादा की उड़ान दर्ज है। वह 20 से ज्यादा तरह के विमान उड़ा चुके हैं। टेस्ट पायलट और फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर की भूमिका भी निभाई है। ऑपरेशन सिंदूर के वक्त वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ थे। इसके बाद जुलाई 2026 में उप प्रमुख बने। सरकारी आदेश के मुताबिक उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।


    कौन हैं आशुतोष दीक्षित

    एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का नाम भारतीय वायुसेना में उन अधिकारियों में शामिल है, जिन्हें स्वदेशी रक्षा तकनीक और देश में बने लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देने के प्रयासों से जोड़कर देखा जाता है। लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस समेत दूसरे स्वदेशी विमान कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में उनके वायुसेना प्रमुख बनने के बाद रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की विदाई की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। उन्हें अब तक तीन आधिकारिक विदाई समारोह दिए जा चुके हैं। इनमें एक समारोह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित किया गया था। हालांकि, उनका अंतिम विदाई समारोह शनिवार को आयोजित होगा, जिसमें उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। 31 अक्टूबर उनके कार्यकाल का आखिरी दिन होगा।


    1986 में वायुसेना में हुए थे शामिल

    एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर काफी लंबा और अनुभवों से भरा रहा है। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं। उनके पास 3,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है, जो उनके लंबे परिचालन और विमानन अनुभव को दर्शाता है।

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अहम परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 विमानों से लैस करने की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम लड़ाकू वायुसेना स्टेशन और दक्षिणी क्षेत्र में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली।


    एयर डिफेंस से लेकर एयर हेडक्वार्टर तक संभाली अहम जिम्मेदारियां

    एयर मार्शल दीक्षित दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर के पद पर भी तैनात रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने नई दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालय (वायु भवन) में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। इनमें असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे अहम पद शामिल हैं। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्हें वायुसेना की परिचालन जरूरतों, भविष्य की योजनाओं, सैन्य परियोजनाओं और आधुनिक तकनीक से जुड़े मामलों पर काम करने का अनुभव मिला।


    मिल चुके हैं कई बड़े सैन्य सम्मान

    देश के प्रति विशिष्ट सेवाओं और सैन्य योगदान के लिए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें साल 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। अब 31 अक्टूबर को वह भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने बदलते सुरक्षा हालात के बीच वायुसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने जैसी अहम चुनौतियां होंगी।

  • भारत की अंतरिक्ष में एक और लंबी छलांग… ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह

    भारत की अंतरिक्ष में एक और लंबी छलांग… ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह


    श्रीहरिकोटा।
    अंतरिक्ष (Space) के क्षेत्र में भारत (India) ने एक और लंबी छलांग (Another Giant Leap) लगाई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) (Indian Space Research Organisation – ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में पहुंचा दिया है। यह भारत की अंतरिक्ष और तकनीकी ताकत को दिखाता है।

    आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल (लॉन्च पैड) से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने शुक्रवार रात 11:51 बजे उड़ान भरी। यह अपने साथ 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह लेकर गया।

    मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसरो ने 24 घंटे की उलटी गिनती शुरू की थी। यह उलटी गिनती गुरुवार रात 11:51 बजे शुरू हुई थी। जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट 50 मीटर ऊंचा है। इसका वजन 420 टन है। यह तीन चरणों वाला रॉकेट है।

    इसरो के अनुसार, उपग्रह की तय कक्षा में पृथ्वी से सबसे कम दूरी (निकटतम) 170 किलोमीटर होगी। वहीं, पृथ्वी से इसकी सबसे अधिक दूरी (अधिकतम) 37,023 किलोमीटर होगी। इसके बाद उपग्रह अपनी कक्षा को आगे बढ़ाएगा। यह 32.5 डिग्री पूर्व में अपने अंतिम निर्धारित स्थान पर पहुंचेगा।

    जीटीओ एक अंडाकार कक्षा होती है। इसका इस्तेमाल उपग्रहों को एक कक्षा से दूसरी कक्षा में पहुंचाने के लिए किया जाता है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा से भूस्थिर कक्षा तक पहुंचने का बीच का रास्ता है।


    नेविगेशन को बनाएगा और सटीक

    एनवीएस-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। यह भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (एनएवीआईसी) का अहम हिस्सा है। इसे भारत का अपना जीपीएस भी कहा जा सकता है। इसका इस्तेमाल कई जरूरी सेवाओं में होता है। इनमें लोकेशन पता करना, रास्ता खोजना और सही समय की जानकारी देना शामिल है।

    यह उपग्रह भारत और उसकी सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर दूर तक के इलाके में सटीक जानकारी देने में मदद करेगा। इससे लोकेशन, रास्ते और समय का पता लगाने की सुविधा मिलेगी।


    एनवीएस-03 की क्या है खासियत?

    इस उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगी स्वदेशी परमाणु घड़ी है। इसे भारत में ही बनाया गया है। यह बेहद सटीक समय बताने का काम करती है। इसके अलावा, इसमें नया एल1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। इससे आम लोगों के स्मार्टफोन और गाड़ियों में नेविगेशन सेवाएं और बेहतर होंगी। इससे रास्ता खोजने में ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकेगी।


    ‘एक देश, एक समय’ पहल को मिलेगी गति

    यह मिशन केंद्र सरकार की ‘एक देश, एक समय’ पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार ने 29 अगस्त को विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 अधिसूचित किए थे। ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, सटीक और एक समान समय बहुत जरूरी है। यह दूरसंचार, डिजिटल वित्तीय लेनदेन, बिजली ग्रिड, परिवहन और डेटा केंद्रों के सुरक्षित संचालन का आधार है। एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण देश को समय की जानकारी के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में अहम कदम है।


    पिछली विफलता से क्या सीखा?

    इसरो ने इस मिशन में एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। जनवरी 2025 में एनवीएस-02 मिशन के दौरान एक कनेक्टर में खराबी आ गई थी। इस बार ऐसी समस्या से बचने के लिए उपग्रह में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा, एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षा से जुड़े सुधार भी लागू किए गए हैं।

  • दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब

    दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब


    नई दिल्ली। पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में 30 अक्टूबर को आयोजित उनके कॉन्सर्ट के दौरान CJP प्रोटेस्ट और फिल्म सतलुज को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। दिलजीत ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ। उनके इस बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से जुड़े अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अभिजीत ने दिलजीत के प्रति अपना सम्मान जाहिर करते हुए कहा कि एक मुद्दे पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उनके मन में सिंगर के लिए सम्मान कम हो गया है।

    दिल्ली में दिलजीत दोसांझ का औरा इंडिया टूर 2026 का कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने संगीत से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही पिछले कुछ समय से चल रही आलोचनाओं पर भी बात की। विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब NEET पेपर लीक से जुड़े आंदोलन के दौरान दिलजीत ने कहा था कि उन्हें इस मुद्दे से दूर रखा जाए क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया हुई थी। CJP से जुड़े अभिजीत दिपके ने भी उस समय सिंगर की आलोचना की थी।

    अब दिल्ली के कॉन्सर्ट में दिलजीत ने इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वह सभी लोगों से प्यार करते हैं क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह चुप हैं तो उन्हें चुप ही रहने दिया जाए। वह सभी का समर्थन करते हैं लेकिन पंजाबियों को लड़ना न सिखाया जाए। उन्होंने फिल्म सतलुज का जिक्र करते हुए कहा कि जिस फिल्म का मंच पर मजाक उड़ाया जा रहा है वह जसवंत सिंह खालड़ा से जुड़ी कहानी है और उस फिल्म के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया है। दिलजीत ने यह भी कहा कि अगर कोई उनसे नफरत करता है तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है क्योंकि उनकी तरफ से सभी के लिए प्यार है।

    दिलजीत के इस बयान पर अभिजीत दिपके ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जून में जब प्रोटेस्ट चल रहा था तब दिलजीत की एक बात से उन्हें दुख पहुंचा था। हालांकि उनका कहना था कि यह नाराजगी किसी निजी वजह से नहीं थी। अभिजीत ने बताया कि वह हमेशा से दिलजीत को ऐसे कलाकार के रूप में देखते आए हैं जो जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। यही वजह थी कि उस समय उनकी बात उन्हें थोड़ी चुभ गई थी।

    अभिजीत ने अपने संदेश में यह भी बताया कि वह लंबे समय से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और आज भी उनका संगीत सुनते हैं। उन्होंने लिखा कि इस साल मई में भारत लौटने से पहले वह शिकागो में दिलजीत के कॉन्सर्ट में भी शामिल हुए थे। उनके मुताबिक वह केवल संगीत सुनने नहीं गए थे बल्कि एक इंसान के तौर पर दिलजीत के प्रति उनके मन में सम्मान भी रहा है।

    अभिजीत ने दिलजीत की तारीफ करते हुए उनके बेबाक अंदाज अपनी बात पर कायम रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की सराहना की। उन्होंने साफ किया कि किसी एक बात पर असहमति या गलतफहमी के कारण उनके मन में दिलजीत के लिए प्यार और सम्मान कम नहीं हुआ है। अंत में उन्होंने दिलजीत से छोटे भाई की गलती समझकर माफ करने की अपील भी की।

    इस तरह कॉन्सर्ट में दिलजीत के बयान और अभिजीत के जवाब के बाद यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों की बातों से साफ है कि असहमति के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश भी सामने आया है।

  • बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल

    बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल


    नई दिल्ली । देश में बैंकों के कर्ज वितरण के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बैंकों ने घर खरीदने वाले ग्राहकों की तुलना में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अधिक कर्ज दिया। 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने NBFCs को करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया, जबकि आवास क्षेत्र को 1.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया। इस अवधि में गोल्ड लोन भी तेजी से बढ़ा और खुदरा कर्ज की वृद्धि में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।

    आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने कुल 16.1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण वितरित किया। इसमें बड़े उद्योगों को 2.04 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मिला, जबकि NBFCs को 1.83 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। आवास क्षेत्र में यह राशि 1.35 लाख करोड़ रुपये रही। गोल्ड लोन के रूप में 1.15 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज दिया गया। व्यापार क्षेत्र को 1.02 लाख करोड़ रुपये और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 91,366 करोड़ रुपये का ऋण मिला।

    गोल्ड लोन में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई है। पिछले एक साल में इस श्रेणी का बकाया कर्ज 82.5 प्रतिशत बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही इसमें 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च से सितंबर के बीच बैंकों ने सोना गिरवी रखकर 1.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इस वृद्धि के साथ गोल्ड लोन बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ने वाले ऋण खंडों में शामिल हो गया है।

    अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुल गैर-खाद्य ऋण सितंबर के अंत तक सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत बढ़कर 229 लाख करोड़ रुपये हो गया। मार्च के मुकाबले इसमें 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस कुल ऋण में सेवाओं का हिस्सा 4.9 लाख करोड़ रुपये, व्यक्तिगत कर्ज का 4.5 लाख करोड़ रुपये, उद्योगों का 3.7 लाख करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र का 1.8 लाख करोड़ रुपये रहा। आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में उद्योग, सेवा और व्यक्तिगत कर्ज की मांग बनी हुई है।

    सेवा क्षेत्र को मिलने वाला कर्ज भी तेजी से बढ़ा है। इस क्षेत्र का कुल ऋण सालाना आधार पर 28.3 प्रतिशत बढ़कर 64.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण में सेवाओं की हिस्सेदारी 30.6 प्रतिशत रही। सेवा क्षेत्र में NBFCs को दिया गया कर्ज 41.8 प्रतिशत बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट क्षेत्र को दिए गए ऋण में 23.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    उद्योगों को मिलने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। औद्योगिक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 49.8 लाख करोड़ रुपये हो गया। बड़ी कंपनियों को दिया गया कर्ज 16 प्रतिशत बढ़कर 33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। मध्यम आकार की कंपनियों के लिए ऋण में 33.2 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के कर्ज में 24.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्योगों को दिए गए अतिरिक्त 3.7 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 2 लाख करोड़ रुपये और छोटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1.6 लाख करोड़ रुपये रही।

    कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 28.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 23.6 लाख करोड़ रुपये था। व्यापार क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में भी 23.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, व्यक्तिगत कर्ज 17.3 प्रतिशत बढ़कर 74.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले दिए जाने वाले कर्ज में भी उल्लेखनीय तेजी आई। इस श्रेणी में बैंकों का बकाया ऋण 53.3 प्रतिशत बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले छह महीनों में इसमें 28.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मार्च से सितंबर के दौरान बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले 47,471 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बैंकिंग क्षेत्र में NBFCs, गोल्ड लोन और जमा राशि के बदले मिलने वाले कर्ज की मांग तेजी से बढ़ी है।

  • अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    नई दिल्ली । अमेरिकी शेयर बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी निवेश पर अब निवेशकों के सवाल बढ़ने लगे हैं। बाजार में यह चिंता है कि कंपनियां जिस तेजी से AI तकनीक पर पूंजी खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे पर्याप्त कमाई और रिटर्न हासिल हो पाएगा। इसी अनिश्चितता का असर अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया है। अक्टूबर में नैसडैक अपने उच्चतम स्तर से 7.8 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

    इस गिरावट के दौरान नैसडैक का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 2 ट्रिलियन डॉलर घट गया। यह रकम एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के अनुमानित बाजार मूल्य के बराबर बताई जा रही है। अक्टूबर का प्रदर्शन मार्च 2025 के बाद नैसडैक के लिए सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा है। टेक कंपनियों के शेयरों में लगातार दबाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

    शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। नैसडैक कंपोजिट इंडेक्स 2.86 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.82 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों के लिए यह जून के बाद सबसे खराब कारोबारी दिन रहा। वहीं डाउ जोंस इंडेक्स भी 572 अंक यानी 1.1 प्रतिशत टूट गया। बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बड़ी टेक कंपनियों के AI निवेश को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता रही।

    मेटा, अल्फाबेट और अमेजन जैसी कंपनियां AI तकनीक के विकास, डेटा सेंटर और संबंधित बुनियादी ढांचे पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि इस निवेश से होने वाली कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ा पूंजीगत खर्च 2030 तक 5.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अकेले 2026 में इस क्षेत्र में करीब 900 अरब डॉलर खर्च होने की संभावना जताई गई है।

    चिप निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंटेल के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कंपनी का शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट गया। यह 1974 के बाद एक कारोबारी दिन में इंटेल के शेयरों की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। कंपनी ने चौथी तिमाही में कमजोर राजस्व का अनुमान जताया है। इसकी एक प्रमुख वजह मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता मांग में कमी आना बताई गई है।

    अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। अमेजन के शेयर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एनवीडिया का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इस गिरावट के बाद एनवीडिया बाजार पूंजीकरण के मामले में ऐपल से पीछे हो गई। अल्फाबेट और मेटा के शेयर अपने शीर्ष स्तर से करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट और स्पेसएक्स के नतीजों में AI पर किए गए निवेश से रिटर्न मिलने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन शुक्रवार को इनके शेयरों में भी कमजोरी रही।

    शेयर बाजार में आई गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति पर भी पड़ा है। एलन मस्क की नेटवर्थ में 48.5 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति घटकर 865 अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा जेफ बेजोस, लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, माइकल डेल, मार्क जकरबर्ग, लैरी एलिसन और जेंसन हुआंग की संपत्ति में भी गिरावट आई।

    अमेरिकी शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति ने AI क्षेत्र में निवेश की रफ्तार और उससे मिलने वाले संभावित मुनाफे को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कंपनियों के भारी खर्च और निवेशकों की रिटर्न संबंधी अपेक्षाओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। आने वाले समय में कंपनियों के वित्तीय नतीजे और AI कारोबार से होने वाली वास्तविक कमाई इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • धनतेरस से पहले महायोग…. 01 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र, इस अबूझ मुहूर्त का अक्षय तृतीया जैसा पुण्य

    धनतेरस से पहले महायोग…. 01 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र, इस अबूझ मुहूर्त का अक्षय तृतीया जैसा पुण्य


    नई दिल्ली।
    एक नवंबर को पड़ रहा रवि पुष्य नक्षत्र (Ravi Pushya Nakshatra) का मुहूर्त अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) जितना ही बहुत खास होने वाला है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक रविवार की सुबह 10:37 से लेकर अगले दिन दो नवंबर को सुबह 9.04 बजे तक जो मर्जी, वो खरीदें, इससे घर-परिवार में लंबे समय के लिए खुशहाली आएगी। खासतौर से उनके लिए जो किसी रस्म या शादी की खरीदारी करने जा रहे हैं।

    ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा बताते हैं कि रवि पुष्य (Ravi Pushya) अबूझ मुहूर्त (Auspicious Moment) है। ऐसे मुहूर्त अक्षय तृतीया और भटली नवमी भी होते हैं। इस दिन सोना-चांदी, घर, जमीन और गाड़ी खरीदना अच्छा है। स्थायी समृद्धि के लिए रवि पुष्य में खरीदारी अद्भुत लाभ देती है।

    ज्योतिषाचार्य प्रो. सुभाष पांडेय के मुताबिक एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र पर घर की साज-सज्जा और नए कपड़े खरीदने का सबसे उत्तम मुहूर्त है। इससे घर में समृद्धि और काम में स्थायित्व होगा। हालांकि चार नवंबर को आभूषण खरीदने का मुहूर्त बन रहा है। वहीं छह नवंबर को धनतेरस पर चांदी, सोना और पीतल के बर्तन खरीदने का बेहतर मुहूर्त तय किया गया है।


    अशुभ काल में खरीदने पर होता है नुकसान

    प्रो. पांडेय ने बताया कि प्रो. पांडेय के अनुसार, इंसान के जीवन में शरद ऋतु या ठंड के समय खरीद करना काफी उत्तम माना गया है। यह काल 21 अक्तूबर के बाद से ही शुरू हो चुका है जो कि दीपावली और बनारस में देव दीपावली तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र में तिथि, वार, नक्षत्र, योग से शुभ काल (मुहूर्त) तय करने की बात कही गई है। दरअसल, भौतिक या आध्यात्मिक जीवन में शुभ समय का बहुत बड़ा महत्व है। जिस तरह अनुष्ठानों में शुभ मुहूर्त की जरूरत होती है वैसे ही भौतिक वस्तुओं को शुभ मुहूर्त में खरीदने पर उसका स्थायित्व बढ़ जाता है। अशुभ काल में खरीदने पर नुकसान हो सकता है।


    सुबह 10:37 से शुरू होगा रवि पुष्य योग

    रवि पुष्य योग एक नवंबर को सुबह 10:37 से दो नवंबर को सुबह 09.04 तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग एक को सुबह 06:33 से दो को सुबह 04:30 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:42 से 12:27 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 05:36 बजे से 06:02 बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र पर बृहस्पति, शनि और चंद्रमा का प्रभाव होता है।

  • भारत की बड़ी कामयाबी… तेजी से घटी गरीबी…12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से आए बाहर

    भारत की बड़ी कामयाबी… तेजी से घटी गरीबी…12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से आए बाहर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी (Success) हासिल की है. विश्व बैंक (World Bank) की अक्टूबर 2026 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2023 के बीच 12 साल में देश में अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) तेजी से घटी है. साल 2011 में जहां भारत की 27.1 फीसदी आबादी बेहद गरीब थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 2.6 फीसदी रह गया. हालांकि, प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भारत को अभी और बेहतर करने की जरूरत है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी कम होने के बावजूद 2023 में करीब 7.5 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनकी रोजाना की आमदनी 3 डॉलर से कम थी।


    12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

    विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में गरीबी मापने के लिए दो पैमाने इस्तेमाल किए हैं. पहला है रोजाना 3 डॉलर की आय, जिसके आधार पर अत्यधिक गरीबी का आकलन किया जाता है. रोजाना तीन डॉलर आय का यह पैमाना 2021 की परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) यानी अलग-अलग देशों में चीजों की कीमतों और खरीदने की क्षमता के हिसाब से तय की गई है।

    दूसरा पैमाना रोजाना 4.20 डॉलर की आय है. विश्व बैंक इस सीमा का इस्तेमाल भारत जैसे निम्न-मध्यम आय (Lower Middle Income) वाले देशों में गरीबी मापने के लिए करता है. इस पैमाने पर भारत में गरीबी की दर 2011 में 57.7 फीसदी थी, जो 2023 में घटकर 16.1 फीसदी रह गई. इसका मतलब है कि इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए.


    गरीबी घटने के पीछे ये रहे बड़े कारण

    विश्व बैंक ने गरीबी घटने के पीछे तीन बड़ी वजहें बताई हैं. पहली, लोगों के घरेलू खर्च और खपत में बढ़ोतरी. दूसरी, देश में रोजगार के मौके बढ़ना और तीसरी, सरकारी योजनाओं का ज्यादा लोगों तक पहुंचना. इनमें मुफ्त राशन और अन्य तरह की सब्सिडी जैसी योजनाओं की भी अहम भूमिका रही. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2017 से 2023 के बीच करीब 13.4 करोड़ नई नौकरियां जुड़ीं. यह इस दौरान कामकाजी उम्र वाली आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुना है. ज्यादा लोगों को काम मिलने से परिवारों की कमाई बढ़ी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया।


    ग्रामीण महिलाओं ने भी बदली तस्वीर

    गरीबी घटाने में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई. बड़ी संख्या में महिलाएं पैसे कमाने वाले कामों से जुड़ीं. इससे कई परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में गरीबी घटने की रफ्तार शहरों के मुकाबले तेज रही है. इससे गांव और शहर के बीच गरीबी का अंतर भी कम हुआ है. हालांकि, आज भी ग्रामीण भारत में गरीबी की समस्या ज्यादा है. रिपोर्ट में दिए गए साल 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजाना 4.20 डॉलर की आय के पैमाने पर गांवों में 19.3 फीसदी लोग गरीब हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी है।


    यूपी से बंगाल तक के क्षेत्र में ज्यादा गरीबी

    देश में गरीबी कम करने के मामले में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन अब यह समस्या कुछ राज्यों और इलाकों में ज्यादा सिमट गई है. विश्व बैंक के मुताबिक, भारत के करीब 57 फीसदी गरीब उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक बड़े क्षेत्र में रहते हैं. इनमें बिहार, झारखंड, ओडिशा जैसे राज्य भी शामिल हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में गरीबी कम करने की लड़ाई में इन राज्यों की भूमिका सबसे अहम होगी. इन इलाकों में ऐसे रोजगार पैदा करने की जरूरत है, जिनसे लोगों को सिर्फ काम ही न मिले, बल्कि उनकी कमाई भी अच्छी हो।


    गरीबी का शिक्षा से सीधा कनेक्शन: रिपोर्ट

    विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा का स्तर भी गरीबी से जुड़ा हुआ है. जिन वयस्कों ने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, उनमें 21.3 फीसदी लोग गरीब थे. वहीं, उच्च शिक्षा यानी कॉलेज या उससे आगे की पढ़ाई करने वालों में गरीबी की दर सिर्फ 7.4 फीसदी थी. बच्चों पर भी गरीबी का असर ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 14 साल के बच्चों में गरीबी की दर 21.8 फीसदी रही, जो सभी उम्र के समूहों में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा, देश की 29.6 फीसदी आबादी को बुनियादी स्तर की स्वच्छता सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी. वहीं, 13.8 फीसदी लोगों के घर में किसी भी वयस्क ने प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं की थी।


    रोजगार तो बढ़ा, लेकिन अच्छी कमाई चुनौती

    विश्व बैंक ने रोजगार बढ़ने को गरीबी घटने की बड़ी वजह माना है, लेकिन साथ ही नौकरियों की गुणवत्ता पर चिंता भी जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा ऐसे कामों से आया, जिनमें कम कमाई होती है और उत्पादकता भी कम रहती है. इस दौरान महंगाई के असर को हटाकर देखी जाने वाली वास्तविक कमाई (Real Earnings) में भी खास बढ़ोतरी नहीं हुई. युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती अब भी बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी हो गई. ग्रामीण इलाकों की युवा महिलाएं इस बढ़ोतरी से ज्यादा प्रभावित हुईं।


    देश में आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती

    भारत में गरीबी भले ही तेजी से घटी है, लेकिन कमाई के मामले में अमीर और गरीब के बीच बड़ा अंतर अब भी बना हुआ है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की औसत कमाई, सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की तुलना में करीब 13 गुना थी. आसान भाषा में समझें तो अगर सबसे कम कमाने वाले वर्ग के एक कामगार की कमाई 1,000 रुपये मानी जाए, तो सबसे ज्यादा कमाने वाले वर्ग के कामगार की कमाई करीब 13,000 रुपये रही. यह दोनों समूहों की बीच कमाई (Median Earnings) में बड़ा अंतर दिखाता है. विश्व बैंक ने यह भी बताया है कि अमीर परिवारों की खपत को घरेलू सर्वे में पूरी तरह दर्ज करना मुश्किल हो सकता है. इस वजह से देश में अमीर और गरीब के बीच असमानता का वास्तविक स्तर रिपोर्ट में दिखाए गए आंकड़ों से ज्यादा हो सकता है. यानी गरीबी घटने की उपलब्धि के साथ यह चुनौती भी बनी हुई है कि देश में आर्थिक असमानता की खाई कैसे पाटी जाए और लोगों की आय कैसे बढ़ाई जाए।


    देश में 2028 तक और घट सकती है गरीबी

    विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत में आने वाले वर्षों में भी गरीबी घटेगी, लेकिन अब इसकी रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी हो सकती है. रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, रोजाना 4.20 डॉलर की आय वाली गरीबी दर 2026 में 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी रह सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी घटाने के मामले में भारत ने पिछले 12 साल में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अब अगली चुनौती यह है कि लोगों को ऐसे गुणवत्ता परक रोजगार मिलें, जिनसे उनकी कमाई लगातार बढ़े. इससे उनकी क्रय शक्ति में भी इजाफा होगा और जीवनस्तर भी सुधरेगा. खासकर उन राज्यों और ग्रामीण इलाकों में इस पर ध्यान देना होगा, जहां आज भी बड़ी आबादी गरीबी से जूझ रही है।

  • संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी

    संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म खलनायक के सीक्वल खलनायक रिटर्न्स को लेकर दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। साल 1993 में रिलीज हुई इस फिल्म में संजय दत्त ने बलराम प्रसाद उर्फ बल्लू का यादगार किरदार निभाया था। अब एक बार फिर संजय दत्त इसी किरदार के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करने की तैयारी में हैं। फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा सलमान खान के नाम की हो रही है। खबरें हैं कि सलमान खान भी इस फिल्म का हिस्सा बन सकते हैं और उन्हें एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में दिखाया जा सकता है। हालांकि फिल्म के निर्देशक और निर्माता सुभाष घई ने अभी इन खबरों पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुभाष घई अपनी राइटिंग टीम के साथ मिलकर फिल्म की कहानी पर काम कर रहे हैं। इसी दौरान सलमान खान के लिए एक खास किरदार तैयार किए जाने की चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि सलमान फिल्म में ऐसे पुलिसवाले की भूमिका निभा सकते हैं जो संजय दत्त के किरदार बल्लू की मदद करता नजर आएगा। यह किरदार कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और फिल्म की घटनाओं को नया मोड़ दे सकता है। हालांकि अभी तक सलमान खान की कास्टिंग आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है।

    फिल्म से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया है कि सलमान का संभावित किरदार केवल कैमियो तक सीमित नहीं होगा बल्कि उसका कहानी पर भी असर पड़ सकता है। इस भूमिका के लिए सलमान खान को उपयुक्त बताया जा रहा है। लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले अभी तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में मेकर्स पहले कहानी को अंतिम रूप देना चाहते हैं और उसके बाद ही कलाकारों की कास्टिंग को लेकर फैसला लिया जाएगा।

    सलमान खान की एंट्री को लेकर सुभाष घई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस समय कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि फिल्म की स्क्रिप्टिंग का काम जारी है। स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिल्म किस दिशा में आगे बढ़ेगी और कौन से कलाकार इसका हिस्सा होंगे। उनके बयान से साफ है कि फिलहाल सलमान खान की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अगर सलमान खान इस फिल्म में काम करते हैं तो यह सुभाष घई के साथ उनकी दूसरी फिल्म होगी। इससे पहले दोनों साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म युवराज में साथ काम कर चुके हैं। वहीं संजय दत्त और सलमान खान की जोड़ी को पर्दे पर देखना भी दर्शकों के लिए खास अनुभव हो सकता है। दोनों कलाकारों की अपनी अलग पहचान और मजबूत फैन फॉलोइंग है।

    खलनायक की बात करें तो यह फिल्म साल 1993 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजय दत्त के साथ जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके अलावा राखी गुलजार अनुपम खेर और राम्या कृष्णन जैसे कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए थे। फिल्म में बल्लू का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अब इसके सीक्वल को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    दूसरी ओर सलमान खान की आगामी फिल्म मातृभूमि को लेकर भी चर्चा जारी है। अपूर्वा लाखिया के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में सलमान के साथ चित्रांगदा सिंह नजर आएंगी। इसकी कहानी भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। फिलहाल इसकी रिलीज डेट की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में दर्शकों की नजरें अब खलनायक रिटर्न्स की स्क्रिप्ट और सलमान खान की संभावित एंट्री पर टिकी हैं।

  • 27 भारतीयों वाले जहाज पर चुंबक बम से हमला…. होर्मुज में पहली बार हुआ लिंपेट माइंस का इस्तेमाल

    27 भारतीयों वाले जहाज पर चुंबक बम से हमला…. होर्मुज में पहली बार हुआ लिंपेट माइंस का इस्तेमाल


    नई दिल्ली।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में समुद्री जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ता जा रहा है. 30 अक्टूबर को 27 भारतीय नाविकों (27 Indian Sailors) को लेकर जा रहे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT LOUISE 1 पर लिंपेट माइंस (चुंबक बम) (Limpet Mines -Magnetic Bombs) से हमला किया गया. धमाके के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और टैंकर कुछ समय के लिए काम करना बंद कर गया. हालांकि, सभी 27 भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित हैं. केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसकी पुष्टि की है.

    जानकारी के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज में चुंबक विस्फोट के इस्तेमाल से किया गया यह पहला सफल हमला है. हमले में एक छोटी नाव टैंकर के पास पहुंची और उसके बाहरी हिस्से पर दो लिंपेट माइंस चिपकाकर वहां से निकल गई. इसके बाद जहाज में आग लग गई. क्रू मेंबर्स ने आग पर काबू पा लिया. घटना में किसी के घायल होने या समुद्र में तेल फैलने की जानकारी नहीं है. आग बुझने के बाद टैंकर ने फिर से अपना सफर शुरू कर दिया.


    एक दिन पहले दूसरे टैंकर पर भी हुआ था हमला

    केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि 29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले बड़े तेल टैंकर MT ARZANAH पर भी होर्मुज में प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया था. इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक सवार थे. इस तरह दोनों जहाजों पर कुल 29 भारतीय नागरिक मौजूद थे और सभी सुरक्षित हैं। सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है. जहाजों का प्रबंधन करने वाली कंपनियों के साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है, ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके हालात का ध्यान रखा जा सके.


    ओमान के पास हुई घटना

    ब्रिटिश नौसेना से जुड़ी एजेंसी UKMTO के मुताबिक, गुरुवार को यह घटना ओमान के खासाब शहर से करीब 25 समुद्री मील यानी लगभग 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई. एजेंसी ने अपनी शुरुआती एडवाइजरी में जहाज का नाम नहीं बताया था. हालांकि, समुद्री सुरक्षा से जुड़े तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि हमला MT LOUISE 1 पर हुआ और जहाज के बाहरी हिस्से पर लिंपेट माइंस लगाई गई थीं। सूत्रों के मुताबिक, सितंबर में भी इसी तरह का हमला करने की कोशिश हुई थी, लेकिन उस समय विस्फोटक नहीं फटे थे. गुरुवार के हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।


    क्या होती हैं लिंपेट माइंस?

    लिंपेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें चुंबक की मदद से जहाज के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है. समुद्री सुरक्षा कंपनी Marisks के मुताबिक, इस क्षेत्र में 2017 से इनका इस्तेमाल किया जा रहा है. ये विस्फोटक अपेक्षाकृत सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं. छोटी नाव के जरिए इन्हें किसी चलते हुए जहाज पर लगाकर हमलावर आसानी से वहां से निकल सकते हैं।

  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।