Author: bharati

  • स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम

    स्लीप-एपनिया की पहली दवा जल्द हो सकती है उपलब्ध: खर्राटों और सांस रुकने की समस्या से मिलेगा आराम


    नई दिल्ली।ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज AIIMS के अनुसार भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया OSA से पीड़ित हैं। यह गंभीर स्लीप डिसऑर्डर धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है।फिलहाल स्लीप एपनिया का इलाज मुख्य रूप से लाइफस्टाइल बदलाव और CPAP मशीन के जरिए किया जाता रहा है। लेकिन अमेरिका में विकसित नई ओरल पिल, थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल पूरी कर चुकी है और FDA अप्रूवल का इंतजार कर रही है।

    दवा का काम करने का तरीका रात को सोने से पहले ली जाएगी गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखेगी, जिससे नींद में सांस की नली बंद नहीं होगी ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता घटेगी CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए आसान विकल्प

    ट्रायल और असर
    फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में दवा ने स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई। हल्के साइड इफेक्ट में मुंह सूखना और नींद आने में थोड़ी कठिनाई देखने को मिली।

    भारत में उपलब्धता
    अभी यह दवा भारत में उपलब्ध नहीं होगी। अमेरिका या अन्य देशों में मंजूरी मिलने के बाद ही भारत में उपलब्ध हो सकेगी। संभावित समय 2027 की शुरुआत तक बताया जा रहा है।

    हेल्थ रिस्क अगर समय पर इलाज न हो
    हार्ट डिजीज

    हाई ब्लड प्रेशर

    स्ट्रोक

    डायबिटीज

    ब्रेन से जुड़ी समस्याएं

    इस नई दवा से स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो CPAP मशीन का नियमित इस्तेमाल नहीं कर पाते।

  • केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

    सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

    अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

    पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

    अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

    अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

    चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

    पूंजी की लागत घटाने पर जोर

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

    डेढ़ लाइन का सार:

    बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

  • सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशियों की खबर दी है। वित्त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, वेतन और पेंशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां, NABARD और RBI के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगासरकारी आंकड़ों के अनुसार इस फैसले से 46,322 कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी जबकि 23,570 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और 23,260 पारिवारिक पेंशनधारकों की आय में भी वृद्धि होगी

    PSU बीमा कंपनियों में इस संशोधन के लिए अनुमानित खर्च 8,170.30 करोड़ रुपये है जिसमें एरियर के लिए 5,822.68 करोड़ और पारिवारिक पेंशन के लिए 2,097.47 करोड़ रुपये शामिल हैंनाबार्ड के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन 1 नवंबर 2022 से लागू होगा इसके कारण सालाना 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा और बकाया भुगतान के लिए करीब 510 करोड़ रुपये खर्च होंगे

    RBI और NABARD के पेंशनर्स के लिए भी संशोधन किया गया है इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई भत्ते में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी साथ ही पात्र लाभार्थियों को बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगाइस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और पारिवारिक पेंशनधारकों की भी जीवनशली में सुधार होगा

  • 1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!

    1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!



    नई दिल्‍ली । पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट TD स्कीम इन दिनों खूब चर्चा में है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जहां कई बड़े बैंक एफडी पर ब्याज कम कर चुके हैं, वहीं डाकघर अब भी अच्छा और तय रिटर्न दे रहा है। साथ ही, इसमें सरकारी गारंटी भी मिलती है, जिससे लोगों को अपने पैसे की पूरी सुरक्षा का भरोसा रहता है।बढ़ती महंगाई और घटते बैंक ब्याज दरों के बीच अगर कोई इन्वेस्टमेंट ऑप्शन आम लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, तो वह डाकघर की बचत योजनाएं है। खासकर तब, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की और बैंकों ने अपनी एफडी की ब्याज दरें घटा दीं। ऐसे माहौल में पोस्ट ऑफिस की एक स्कीम निवेशकों के लिए किसी राहत से कम नहीं है, जिसमें न सिर्फ बेहतर रिटर्न मिल रहा है, बल्कि पैसा भी पूरी तरह सुरक्षित है।

    दरअसल, डाकघर की फिक्स्ड डिपॉजिट को टाइम डिपॉजिट TD कहा जाता है। यह योजना बैंकों की एफडी की तरह ही काम करती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत है केंद्र सरकार की सीधी गारंटी। पोस्ट ऑफिस में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के लिए टीडी अकाउंट खुलवाया जा सकता है। मौजूदा समय में डाकघर 1 साल की टीडी पर 6.9 प्रतिशत, 2 साल पर 7.0 प्रतिशत, 3 साल पर 7.1 प्रतिशत और 5 साल की टीडी पर 7.5 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज दे रहा है।

    44,995 का फिक्स रिटर्न

    अगर कोई निवेशक 5 साल की टीडी स्कीम में ₹1,00,000 जमा करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे कुल ₹1,44,995 मिलते हैं। यानी सीधे ₹44,995 का फिक्स ब्याज। मौजूदा हालात में देश का कोई भी बड़ा बैंक 5 साल की एफडी पर इतना हाई ब्याज दर नहीं दे रहा है। यही वजह है कि पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम निवेशकों के बीच तेजी से फेमस हो रही है।

    सभी निवेशकों को समान ब्याज

    डाकघर की टीडी स्कीम का एक और अहम पहलू यह है कि इसमें सभी आयु वर्ग के निवेशकों को समान ब्याज दर मिलती है। हालांकि, बैंकों की तरह इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक्स्ट्रा ब्याज का लाभ नहीं दिया जाता। इसके बावजूद, सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न इसे सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए बेहतरीन ऑप्शन बनाता है।

    ब्याज दरों पर सरकारी कंट्रोल

    खास बात यह भी है कि डाकघर की बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों की समीक्षा हर तीन महीने में की जाती है और इन्हें वित्त मंत्रालय द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इससे निवेशकों को यह भरोसा रहता है कि उनका पैसा सुरक्षित हाथों में है।

  • कुबरेश्वर धाम में भिखारियों से ठगी नकली नोट देकर हजारों की चिल्लर ले उड़े शातिर

    कुबरेश्वर धाम में भिखारियों से ठगी नकली नोट देकर हजारों की चिल्लर ले उड़े शातिर


    सीहोर मध्य प्रदेश के सीहोर जिले स्थित प्रसिद्ध कुबरेश्वर धाम में ठगी की एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है जहां मंदिर परिसर में जीवनयापन करने वाले गरीब वृद्ध और दिव्यांग भिखारियों को शातिर ठग ने अपना शिकार बनाया आरोपी ने नकली दो सौ रुपये के नोट देकर उनसे हजारों रुपये की चिल्लर ऐंठ ली और मौके से फरार हो गयायह मामला मंडी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है जानकारी के अनुसार सोमवार देर शाम कुछ अज्ञात लोग कुबरेश्वर धाम परिसर में पहुंचे और वहां मौजूद भिखारियों से बातचीत करने लगे इसी दौरान काले कोट में आए एक व्यक्ति ने कहा कि उसकी पत्नी मंदिर में चिल्लर चढ़ाना चाहती है और उसे छोटे नोटों व सिक्कों की जरूरत है

    भिखारियों ने उसकी बातों पर भरोसा कर लिया आरोपी ने उन्हें दो सौ रुपये के नकली नोट थमाए और बदले में उनसे करीब आठ से दस हजार रुपये की चिल्लर ले ली इसके बाद वह तेजी से वहां से निकल गयाकुछ समय बाद जब पीड़ितों ने उन नोटों का उपयोग करने की कोशिश की तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ एक भिखारी जब नाश्ता खरीदने दुकान पर पहुंचा तो दुकानदार ने नोट को नकली बताकर लौटा दिया इसके बाद अन्य भिखारियों ने भी अपने पास मौजूद नोटों की जांच की तो सभी नोट नकली निकले

    पीड़ितों का कहना है कि आरोपी ने उनकी मजबूरी और लाचारी का फायदा उठाया उन्होंने बताया कि गरीबी असहायता और डर के कारण वे पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करा सके जिससे आरोपी बेखौफ होकर भाग निकलास्थानीय लोगों का कहना है कि कुबरेश्वर धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं इसी भीड़ में कई गरीब लोग भीख मांगकर गुजारा करते हैं और इसी भीड़ का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व अपराध को अंजाम देते हैं

    घटना के बाद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने कुबरेश्वर धाम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और गरीबों को न्याय मिल सकेइस मामले में मंडी थाना प्रभारी सुनील मेहर ने बताया कि अभी तक किसी भी भिखारी की ओर से थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है हालांकि पुलिस क्षेत्र में निगरानी बढ़ाएगी ताकि ऐसे शातिरों पर नजर रखी जा सके

  • RJD में बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत, तेजस्वी यादव को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी, कल फैसले के आसार

    RJD में बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत, तेजस्वी यादव को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी, कल फैसले के आसार


    नई दिल्‍ली। राष्ट्रीय जनता दल RJD में जल्द ही बड़ा फैसला लिया जा सकता है। तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, 25 जनवरी को होने वाली RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि यह निर्णय होता है, तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में यह एक अहम बदलाव माना जाएगा।

    पूरा मामला क्या है

    आजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक 25 जनवरी को पटना स्थित होटल मौर्या में सुबह 11:30 बजे आयोजित होने वाली है। इस बैठक को पार्टी के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार किया जा सकता है। यदि प्रस्ताव रखा गया तो उस पर अंतिम फैसला RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की सहमति से लिया जाएगा। पार्टी के अंदरखाने में यह चर्चा तेज है कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए तेजस्वी यादव संगठन की कमान और मजबूत रूप से अपने हाथ में लेना चाहते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम RJD के नेतृत्व को स्पष्ट करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।

    तेजस्वी यादव की सुरक्षा में हालिया बदलाव

    हाल ही में तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया था। बिहार के कई प्रमुख नेताओं की सुरक्षा श्रेणी की समीक्षा केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर की गई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इस कदम को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक मंशा से जुड़ा बताया था। वहीं सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह फैसला पूरी तरह खतरे के आकलन और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।

    तेजस्वी यादव फिलहाल बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव आरजेडी के लिए निराशाजनक रहा था, जहां एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों के बाद तेजस्वी यादव को सदन में विपक्ष का नेता चुना गया।

    गौरतलब है कि चुनाव के बाद लालू परिवार के भीतर मतभेद भी सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने भाई तेजस्वी यादव पर तीखी टिप्पणी की थी, जिससे राजनीतिक और पारिवारिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी दौरान तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव को चुनाव से पहले ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद तेज प्रताप ने अलग राजनीतिक दल बनाकर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिल पाई।

  • कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी

    कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं ताजा बयान में उन्होंने कनाडा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका के बजाय चीन के साथ नजदीकी बढ़ाई तो वह एक साल के भीतर ही उसे निगल जाएगा

    ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब कनाडा ने अमेरिका के प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम का विरोध किया यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित बताया जा रहा है और ग्रीनलैंड के ऊपर तैनात किए जाने की योजना है अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि यह सिस्टम न केवल अमेरिका बल्कि कनाडा की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैडोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि कनाडा ग्रीनलैंड के ऊपर बनने वाले गोल्डन डोम के खिलाफ है जबकि यह सिस्टम कनाडा को भी सुरक्षा प्रदान करेगा इसके बजाय कनाडा ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के समर्थन में रुख अपनाया है जो आने वाले एक साल में ही उसे खत्म कर देगा

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि गोल्डन डोम ग्रीनलैंड को पूरी तरह कवर करे उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र पर नियंत्रण से अमेरिका को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगीइससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा था कि कनाडा को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है

    हालांकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कार्नी ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी जरूर है लेकिन कनाडा की प्रगति का श्रेय अमेरिका को नहीं दिया जा सकता उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दबदबे पर आधारित वैश्विक व्यवस्था टूटने की कगार पर हैकार्नी के इस बयान के बाद ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें अपने बोर्ड ऑफ पीस से बाहर कर दिया यह बोर्ड दुनिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से ट्रंप द्वारा शुरू किया गया था

    बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग साठ देशों को आमंत्रण भेजा था इजरायली मीडिया के अनुसार इनमें से पच्चीस देशों ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान कतर तुर्किए मिस्र इंडोनेशिया अर्जेंटीना और मंगोलिया समेत कई देश शामिल हैंट्रंप का यह बयान और कदम एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है

  • पीरियड्स के दर्द सूजन और ऐंठन से दिलाएंगे राहत ये आसान योगासन

    पीरियड्स के दर्द सूजन और ऐंठन से दिलाएंगे राहत ये आसान योगासन


    नई दिल्ली।नेशनल गर्ल चाइल्ड डे बेटियों की ताकत हिम्मत और आत्मविश्वास का प्रतीक है यह दिन लड़कियों के महत्व को रेखांकित करता है जीवन के अलग अलग पड़ावों पर लड़कियों को कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इन्हीं में से एक है पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द ऐंठन और सूजन जो अक्सर उनके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है

    विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स के समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनकी वजह से दर्द मूड स्विंग्स और थकान महसूस होती है ऐसे में योगासन एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आते हैं योग से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है जो प्राकृतिक पेन किलर की तरह काम करता है इससे दर्द कम होता है और मन को भी शांति मिलती हैयोग एक्सपर्ट मानते हैं कि पीरियड्स के दौरान भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए और केवल हल्के और आरामदायक योगासन करने चाहिए इससे पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और ऐंठन में कमी आती है नियमित योगाभ्यास से पीरियड्स की समस्याएं धीरे धीरे कम हो सकती हैं

    बालासन या चाइल्ड पोज पीरियड्स के दौरान बेहद लाभकारी माना जाता है इस आसन में घुटनों के बल बैठकर आगे झुकना होता है जिससे कमर और पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है यह दर्द सूजन और तनाव को कम करने में मदद करता हैसुप्त बद्ध कोणासन या रिलाइनिंग बटरफ्लाई पोज में पीठ के बल लेटकर पैरों के तलवे जोड़कर घुटनों को बाहर की ओर छोड़ा जाता है यह आसन पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है और ऐंठन के साथ सूजन में भी राहत देता है

    अपानासन पेट की ऐंठन और गैस की समस्या को शांत करने में सहायक है पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती से लगाने से पेट और कमर का दर्द कम होता हैमार्जरीआसन और बितिलासन यानी कैट काउ पोज रीढ़ को लचीला बनाता है इससे कमर का दर्द घटता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है यह आसन पीरियड्स के दौरान मूड स्विंग्स को भी नियंत्रित करता है

    सुप्त मत्स्येंद्रासन पेट की मरोड़ और सूजन को कम करता है यह आसन शरीर को रिलैक्स करता है और दर्द से राहत दिलाता हैयोगासन को दिनचर्या में शामिल कर पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है हालांकि इस दौरान शरीर पर अधिक दबाव न डालें और अगर दर्द या सूजन ज्यादा हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • चुनाव आयोग का कड़ा रुख: मतदाता सूची में गड़बड़ी की तो BLOs पर होगी सीधी FIR, ECI ने जारी किए सख्त निर्देश

    चुनाव आयोग का कड़ा रुख: मतदाता सूची में गड़बड़ी की तो BLOs पर होगी सीधी FIR, ECI ने जारी किए सख्त निर्देश

    नई दिल्ली/कोलकाता। भारत निर्वाचन आयोग ECI ने लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई ‘मतदाता सूची’ की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बूथ लेवल ऑफिसर्स BLOs द्वारा की गई किसी भी प्रकार की लापरवाही, जानबूझकर की गई गड़बड़ी या निर्देशों की अवहेलना को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, दोषी अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय जांच होगी, बल्कि आपराधिक कृत्य पाए जाने पर सीधे FIR भी दर्ज कराई जाएगी।

    गाइडलाइंस के मुख्य बिंदु: क्यों और कैसे होगी कार्रवाई

    आयोग ने उन परिस्थितियों को स्पष्ट किया है जिनके तहत BLOs पर गाज गिर सकती है गड़बड़ी के दायरे: मतदाता सूची की सटीकता को प्रभावित करना, ड्यूटी से नदारद रहना, दुर्व्यवहार, चुनाव कानूनों का उल्लंघन या आयोग के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करना। निलंबन और विभागीय जांच: जिला निर्वाचन अधिकारी DEO के पास दोषी BLO को तत्काल निलंबित करने का अधिकार होगा। संबंधित अनुशासनात्मक प्राधिकारी को 6 महीने के भीतर कार्यवाही पूरी कर रिपोर्ट देनी होगी।

    आपराधिक कार्यवाही FIR यदि गड़बड़ी आपराधिक श्रेणी की है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम RP Act 1950 की धारा 32 के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी CEO की अनुमति से तुरंत FIR दर्ज की जाएगी। निगरानी: CEO को यह अधिकार होगा कि वे स्वयं या DEO की रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करें। अनुशासनात्मक कार्यवाही का अंतिम निर्णय CEO की सहमति के बिना प्रभावी नहीं होगा।

    पश्चिम बंगाल: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद विशेष सतर्कता

    पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR 2026 के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग बेहद संवेदनशील है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: 19 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश के बाद, बंगाल के CEO मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों DM को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या धांधली को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। सुरक्षा और पारदर्शिता: बंगाल में पुनरीक्षण कार्य के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन को विशेष निर्देश दिए गए हैं ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपना नाम जुड़वा सकें या संशोधन करा सकें।

    BLO की भूमिका का महत्व

    एक BLO के पास औसतन 970 मतदाता या लगभग 300 घरों की जिम्मेदारी होती है। जमीनी स्तर पर यही अधिकारी तय करते हैं कि मतदाता सूची कितनी पारदर्शी है। आयोग का मानना है कि यदि नींव BLO स्तर मजबूत और ईमानदार होगी, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहेगा।