Author: bharati

  • शतक लगाने के बाद मैदान पर रो पड़े अभिषेक पोरेल, जमानत पर बाहर आने के बाद भावुक हुए बंगाल के विकेटकीपर

    शतक लगाने के बाद मैदान पर रो पड़े अभिषेक पोरेल, जमानत पर बाहर आने के बाद भावुक हुए बंगाल के विकेटकीपर


    नई दिल्ली:
    बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल ने रणजी ट्रॉफी मुकाबले में शतक लगाने के बाद मैदान पर भावुक प्रतिक्रिया दी। पारी के दौरान उन्होंने अपना शतक पूरा किया तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। हाल के दिनों में निजी जीवन में मुश्किल दौर से गुजर रहे पोरेल के लिए यह पारी खास रही। दुष्कर्म के आरोप से जुड़े एक मामले में जमानत मिलने के कुछ दिन बाद उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर वापसी की थी। शतक पूरा करने के बाद उनकी भावुकता ने सबका ध्यान खींचा। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभवों और बीते दिनों के मानसिक दबाव को लेकर भी बात की।

    पोरेल ने रणजी ट्रॉफी में बंगाल की ओर से खेलते हुए महत्वपूर्ण पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके पोरेल के लिए यह प्रदर्शन ऐसे समय आया, जब वह कानूनी मामले के कारण चर्चा में थे। जमानत पर रिहा होने के बाद मैदान पर उतरना उनके लिए आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उन्होंने खेल पर ध्यान केंद्रित करते हुए शतक बनाया। पारी पूरी होने के बाद उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए। यह भावुक क्षण उनके लिए क्रिकेट में वापसी और मुश्किल परिस्थितियों के बीच प्रदर्शन करने के महत्व को दर्शाता है।

    पोरेल से जुड़े मामले में उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। इस मामले में उन्हें जमानत मिली है, लेकिन जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से मुक्त होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया अपने अनुसार आगे बढ़ेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। ऐसे मामलों में आरोप और दोषसिद्धि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। पोरेल की ओर से अपनी भावनाओं और हालात को लेकर की गई बातों ने उनके निजी संघर्ष को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस मामले से जुड़े आरोपों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

    बंगाल की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का प्रदर्शन अहम होता है। पोरेल ने अपने शतक के जरिए टीम के लिए उपयोगी योगदान दिया। विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर उनकी भूमिका केवल विकेट के पीछे जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय रन बनाना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है। इस पारी ने दिखाया कि निजी चुनौतियों के बीच भी उन्होंने मैदान पर अपना योगदान देने की कोशिश की। हालांकि, किसी एक पारी के आधार पर उनके भविष्य या मामले से जुड़े घटनाक्रम के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    शतक के बाद पोरेल का भावुक होना उनके लिए इस उपलब्धि के व्यक्तिगत महत्व को दर्शाता है। हालिया परिस्थितियों के बीच मैदान पर लौटकर रन बनाना उनके लिए एक महत्वपूर्ण पल रहा। खेल में खिलाड़ियों को प्रदर्शन के साथ-साथ निजी जीवन की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। लेकिन कानूनी मामले की गंभीरता को देखते हुए क्रिकेट प्रदर्शन और आरोपों से जुड़ी प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल पोरेल की रणजी ट्रॉफी पारी चर्चा में है, जबकि उनके खिलाफ चल रहे मामले का नतीजा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

  • ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मैचों से बाहर, युवा विकेटकीपर कुमार कुशाग्र को मिला मौका

    ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मैचों से बाहर, युवा विकेटकीपर कुमार कुशाग्र को मिला मौका


    नई दिल्ली:
    भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड दौरे पर इंडिया ए के शुरुआती दो मैचों से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को टीम में शामिल किया गया है। पंत को यह चोट ईरानी कप के दौरान लगी थी, जब वह रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी कर रहे थे। उनके बाएं हिस्से में खिंचाव आने के बाद न्यूजीलैंड दौरे के लिए उनकी उपलब्धता फिटनेस पर निर्भर थी। अब वह शुरुआती दो मुकाबलों में नहीं खेल पाएंगे। हालांकि, तीसरे मैच में उनकी वापसी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है और इस पर आगे उनकी फिटनेस का आकलन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

    पंत फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मेडिकल टीम की देखरेख में हैं और उनकी चोट से उबरने की प्रक्रिया जारी है। चयनकर्ताओं ने उनकी जगह कुमार कुशाग्र को पहले दो मैचों के लिए टीम में शामिल करने का फैसला किया है। पंत की अनुपस्थिति में ध्रुव जुरेल इंडिया ए की कप्तानी करेंगे और विकेटकीपर की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। इस बदलाव से टीम की शुरुआती योजना में परिवर्तन हुआ है। न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में होने वाले बहुदिवसीय मुकाबले युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता दिखाने का अवसर हैं। ऐसे में पंत का बाहर होना टीम के लिए अहम बदलाव माना जा रहा है।

    झारखंड के 21 वर्षीय कुमार कुशाग्र ने हाल के घरेलू मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उन्होंने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए साउथ जोन के खिलाफ शतक लगाया था। इसके बाद उन्होंने पुदुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ इंडिया ए के लिए भी शतकीय पारी खेली और नाबाद 46 रन बनाए। लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मैचों में मौका मिला है। अब उनके पास इंडिया ए के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में अपनी उपयोगिता साबित करने का अवसर होगा। यह चयन उनके घरेलू क्रिकेट में किए गए प्रदर्शन के बाद आया है।

    इंडिया ए को न्यूजीलैंड ए के खिलाफ तीन बहुदिवसीय मुकाबले खेलने हैं। पहला मैच 24 से 28 अक्टूबर तक लिंकन में आयोजित होगा। दूसरा मुकाबला 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा, जबकि तीसरा और अंतिम मैच 7 से 10 नवंबर तक लिंकन में होगा। इन मैचों के जरिए खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में लाल गेंद से क्रिकेट खेलने का अनुभव मिलेगा। टीम में यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, साई सुदर्शन और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों की उपलब्धता पर सीमित ओवरों की अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के कार्यक्रम का असर पड़ सकता है।

    पंत की चोट को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू भारतीय सीनियर टीम के आगामी न्यूजीलैंड दौरे से जुड़ा है। भारत को 19 नवंबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला खेलनी है, जो 1 दिसंबर तक चलेगी। पंत की फिटनेस को लेकर फिलहाल इस श्रृंखला के लिए कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनकी उपलब्धता का निर्णय चोट से उबरने की प्रगति और मेडिकल टीम के आकलन के आधार पर लिया जाएगा। अभी तक उनके तीसरे इंडिया ए मैच में खेलने पर भी फैसला बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी फिटनेस पर नजर रहेगी, जबकि कुमार कुशाग्र को शुरुआती दो मैचों में मिले अवसर का लाभ उठाने की चुनौती होगी।

  • मुकेश अंबानी फिर बने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति, गौतम अडानी से छीना नंबर-1 का ताज

    मुकेश अंबानी फिर बने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति, गौतम अडानी से छीना नंबर-1 का ताज

    नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी एक बार फिर भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, अंबानी ने संपत्ति के मामले में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब चीन की कंपनी बाइटडांस के संस्थापक झांग यिमिंग के पास है। वहीं, दुनिया के अरबपतियों की सूची में एलन मस्क शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।

    फोर्ब्स के दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अनुमानित कुल संपत्ति 78.8 अरब डॉलर है। इसके साथ वह दुनिया के अमीरों की सूची में 25वें स्थान पर हैं। दूसरी ओर, गौतम अडानी की संपत्ति 74.9 अरब डॉलर आंकी गई है।

    भारत के टॉप-5 अरबपतियों में कौन-कौन?

    फोर्ब्स की सूची में भारत के प्रमुख अरबपतियों में सावित्री जिंदल, लक्ष्मी मित्तल और शिव नादर भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनकी अनुमानित संपत्ति इस प्रकार है।

    • मुकेश अंबानी: 78.8 अरब डॉलर

    • गौतम अडानी: 74.9 अरब डॉलर

    • सावित्री जिंदल: 36.6 अरब डॉलर

    • लक्ष्मी मित्तल: 30.6 अरब डॉलर

    • शिव नादर: 27.4 अरब डॉलर


    सावित्री जिंदल दुनिया के अरबपतियों की सूची में 64वें स्थान पर बताई गई हैं। इन आंकड़ों के आधार पर अंबानी और अडानी के बीच संपत्ति का अंतर 3.9 अरब डॉलर है।

    अंबानी-अडानी को पछाड़कर झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स

    भारत के दोनों दिग्गज उद्योगपतियों को पीछे छोड़ते हुए चीन की कंपनी बाइटडांस के संस्थापक झांग यिमिंग एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। बाइटडांस टिकटॉक की मूल कंपनी है।

    दिए गए आंकड़ों के अनुसार, झांग यिमिंग की अनुमानित संपत्ति 84 अरब डॉलर है। एशिया के अमीरों की सूची में मुकेश अंबानी दूसरे और गौतम अडानी तीसरे स्थान पर हैं।

    वहीं, एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। <Entity value=”फोर्ब्स रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट” category=”other” disambig=”अरबपतियों की अनुमानित संपत्ति और रैंकिंग”/> के आंकड़ों के अनुसार, मस्क की संपत्ति एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक बताई गई है। <Cite refs={[“turn299138search2″,”turn299138search10”]}/>

    हर दिन कैसे बदलती है अरबपतियों की संपत्ति?

    फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट दुनिया के अरबपतियों की अनुमानित संपत्ति में होने वाले बदलावों पर नजर रखती है। इसमें उनकी नेटवर्थ, वैश्विक रैंकिंग और पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले संपत्ति में हुई बढ़ोतरी या गिरावट दिखाई जाती है।

    अरबपतियों की संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनियों में शेयरों के रूप में निवेश किया गया होता है। इसलिए शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का उनकी अनुमानित नेटवर्थ पर सीधा असर पड़ता है।

    उदाहरण के लिए, यदि किसी अरबपति के पास किसी कंपनी के 10 करोड़ शेयर हैं और प्रत्येक शेयर की कीमत 1,000 रुपये है, तो उसकी हिस्सेदारी का बाजार मूल्य 10,000 करोड़ रुपये होगा। शेयर की कीमत बढ़कर 1,100 रुपये होने पर यह मूल्य 11,000 करोड़ रुपये हो जाएगा।

    इस तरह शेयर की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से हिस्सेदारी के मूल्य में 1,000 करोड़ रुपये का इजाफा हो जाएगा। हालांकि, यह कागजों पर संपत्ति के मूल्य में हुई बढ़ोतरी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अरबपति के बैंक खाते में इतनी नकदी जमा हो गई है।

    हर पांच मिनट में अपडेट होती है नेटवर्थ

    फोर्ब्स के मुताबिक, शेयर बाजार खुले रहने के दौरान सार्वजनिक कंपनियों में अरबपतियों की हिस्सेदारी के मूल्य को हर पांच मिनट में अपडेट किया जाता है। हालांकि, शेयरों की कीमतों के आंकड़ों में लगभग 15 मिनट की देरी हो सकती है। <Cite refs={[“turn299138search0″,”turn299138search10”]}/>

    इसी वजह से शेयर बाजार में तेजी या गिरावट आने पर अरबपतियों की अनुमानित संपत्ति और उनकी रैंकिंग भी बदल सकती है। शेयरों के भाव बढ़ने से नेटवर्थ में इजाफा होता है, जबकि कीमतें गिरने पर संपत्ति का अनुमानित मूल्य कम हो जाता है।

    इसलिए मुकेश अंबानी, गौतम अडानी और दूसरे उद्योगपतियों की रैंकिंग को स्थायी नहीं माना जा सकता। यह बाजार की चाल और उनकी कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन के साथ बदलती रहती है।

  • CJP के दो पदाधिकारियों का पता नहीं चलने का दावा, दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप

    CJP के दो पदाधिकारियों का पता नहीं चलने का दावा, दिल्ली पुलिस पर अवैध हिरासत के आरोप


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली पुलिस पर अपने दो पदाधिकारियों को हिरासत में लेने के बाद उनके ठिकाने की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और सह सचिव बालकृष्णन शुक्ला को रविवार शाम कनॉट प्लेस से हिरासत में लिया गया था। पार्टी का दावा है कि इसके बाद से दोनों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इस मामले में पुलिस का पक्ष इन आरोपों से अलग है।

    इस बीच, सीजेपी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन की तारीख बताने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। इससे पहले शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।

    रत्ना सिंह ने पुलिस से मांगी जानकारी

    सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दोनों पदाधिकारियों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधीर सांगवान और सह सचिव बालकृष्णन शुक्ला को शाम के समय कनॉट प्लेस से हिरासत में लिया गया था, लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

    रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि दोनों को हिरासत में रखने की वजह और उनके ठिकाने की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से तत्काल यह बताने की मांग की कि दोनों को कहां रखा गया है और उनके मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए।

    उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि कानून से ऊपर उठकर काम करना।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का आरोप

    पार्टी के शीर्ष नेताओं में शामिल सौरभ दास ने भी दोनों पदाधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दोनों को हिरासत में लिया गया और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिशें सफल नहीं हुईं। दास के अनुसार, बालकृष्णन के भाई को भी उनकी सुरक्षा की चिंता सता रही है।

    दास ने आरोप लगाया कि दोनों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है। उनका दावा है कि उन्हें न तो परिवार के सदस्यों से बात करने दी जा रही है और न ही अपनी पसंद का वकील उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यदि दोनों के ठिकाने की जानकारी तत्काल नहीं दी गई, तो पार्टी के वकील अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।

    ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं। इनके संबंध में पुलिस का विस्तृत पक्ष इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आवश्यक है।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का इंतजार

    सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने सोमवार को कहा कि पार्टी दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की तारीख पूछ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस जल्द तारीख तय करेगी। रांका के मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर प्रदर्शन के लिए जुटेगी।

    उन्होंने राजधानी में पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली को जिस तरह बंद किया गया है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उनके अनुसार, इससे लोगों और कारोबारियों को परेशानी हो रही है, जबकि त्योहारों का समय भी नजदीक है। उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शन के लिए कोई निर्धारित स्थान क्यों नहीं दिया जा रहा है।

    ‘अब पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा’

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शन के लिए जगह नहीं दी गई, तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।

    दीपके ने आशंका जताई कि मौजूदा हालात जारी रहने पर एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब देश से लोकतंत्र को ही हटा दिया जाए। वहीं, सौरभ दास ने कहा कि सरकार का जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का फैसला उन्हें मंजूर नहीं है और पार्टी इसे मनमाना मानती है।

    दादी के निधन के बाद दीपके की हिरासत पर भी विवाद

    शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके को भी हिरासत में लिया गया था। कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया। दादी के निधन की खबर मिलने के बाद वह अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर रवाना हो गए थे।

    दीपके ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनकी दादी की मौत की सूचना मिलने के बाद भी उन्हें रिश्तेदार को फोन करने के लिए मोबाइल उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने पुलिस पर असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।

    दिल्ली पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

    दिल्ली पुलिस ने दीपके के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। पुलिस की जनसंपर्क अधिकारी डीसीपी नेहा यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडियो फुटेज दिखाते हुए कहा कि दीपके को उनकी दादी के निधन और अंतिम संस्कार के समय की जानकारी समय पर और संवेदनशीलता के साथ दी गई थी।

    पुलिस के अनुसार, दीपके को परिवार से फोन पर बात करने का विकल्प दिया गया था। इसके अलावा अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गृह नगर जाने हेतु प्रशासनिक और यात्रा संबंधी सहायता की पेशकश भी की गई थी। पुलिस का दावा है कि दीपके ने इस पेशकश को स्वीकार नहीं किया।

    इस तरह, सीजेपी जहां अपने दो पदाधिकारियों के ठिकाने और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं दीपके की हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस ने पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।

  • कन्हैया कुमार कहां हैं? राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, छात्र संगठनों को मिली अहमियत

    कन्हैया कुमार कहां हैं? राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, छात्र संगठनों को मिली अहमियत


    नई दिल्ली।
    कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अपील के बाद विपक्षी दलों के साथ छात्र और नागरिक संगठन भी सड़कों पर उतर रहे हैं। इस दौरान अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा प्रदर्शन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। वहीं, कभी छात्र आंदोलनों के चर्चित चेहरों में शामिल रहे कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    हालांकि, कन्हैया कुमार सोमवार को बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल हुए थे, लेकिन वह कैमरों की नजर से दूर रहे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रभारी होने के नाते कन्हैया की भूमिका अब बदल गई है। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी से ज्यादा संगठन की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।


    राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा

    कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में नेहा बोरा और उनके साथियों की सक्रियता चर्चा में है। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान भी नेहा युवाओं की आवाज उठाती रही हैं। अब वह मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष के प्रदर्शन में सक्रिय दिखाई दे रही हैं।

    इंडिया गठबंधन के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में नेहा बोरा छात्र संगठनों के साथ शामिल हुईं। मार्च के दौरान कई मौकों पर राहुल गांधी एक हाथ से प्रियंका गांधी और दूसरे हाथ से नेहा बोरा का हाथ थामे नजर आए। इस दौरान प्रियंका गांधी को नेहा के नारों में आवाज मिलाते हुए भी देखा गया। विपक्ष के प्रमुख नेताओं के लिए तैयार किए गए ट्रक पर भी नेहा मौजूद थीं।

    इस भागीदारी ने छात्र संगठनों और नागरिक समूहों को विपक्ष के आंदोलन में मिल रही अहमियत को रेखांकित किया है।

    कहां हैं कन्हैया कुमार?

    कन्हैया कुमार भी बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में शामिल थे, लेकिन वह प्रमुख नेताओं की तरह कैमरों के सामने दिखाई नहीं दिए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, कन्हैया कुमार को एनएसयूआई की जिम्मेदारी दी गई है। इसलिए उनकी भूमिका केवल किसी प्रदर्शन में व्यक्तिगत तौर पर शामिल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र संगठन की भागीदारी सुनिश्चित करना भी है।

    कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में एनएसयूआई लगातार सक्रिय है। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि संगठन की मौजूदगी और भागीदारी को मजबूत करना भी इस राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    छात्र और नागरिक संगठनों पर जोर

    राजनीतिक रणनीतिकारों के अनुसार, पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का आंदोलन हो या मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा, नेहा बोरा इन मामलों में सक्रिय रही हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन के मार्च में छात्र संगठनों और नागरिक समूहों से जुड़े लोगों को प्रमुखता दी।

    इस रणनीति के पीछे यह संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है कि मतदाता सूची से जुड़ा मुद्दा केवल कांग्रेस या किसी एक विपक्षी नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यापक जनभागीदारी के साथ उठाया जा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि अपने अधिकारों से जुड़े सवालों पर विभिन्न संगठनों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।


    वोटर लिस्ट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विपक्ष

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका दायर करने वालों में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत 10 दलों के नेता शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, याचिका सोमवार शाम दाखिल की गई। इसमें विपक्ष की ओर से कुल 10 राहतों की मांग की गई है।

    याचिका दायर करने वाले नेताओं में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

    याचिका में मिलीं 14 खामियां

    सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 14 खामियां बताई गई हैं। अदालत की वेबसाइट पर इनका उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ताओं को कमियां दूर करने के लिए कहा गया है।

    प्रमुख खामियों में याचिका दाखिल करने के शुल्क का कम भुगतान किया जाना शामिल है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से 220 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जमा करने को कहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, खामियों को दूर करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।

    इस बीच, कथित वोट चोरी के खिलाफ विपक्ष का राजनीतिक आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया दोनों आगे बढ़ रहे हैं। प्रदर्शन में छात्र संगठनों की सक्रिय भागीदारी और कन्हैया कुमार की संगठनात्मक भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    राम मंदिर में अयोध्यावासियों के लिए अलग प्रवेश द्वार की तैयारी, आधार कार्ड से मिल सकता है सीधे दर्शन का लाभ

    अयोध्या। राम मंदिर में स्थानीय निवासियों को रामलला के सीधे दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर जल्द मंथन होगा। इसके तहत अयोध्यावासियों को आधार कार्ड के माध्यम से प्रवेश देने और संत-महंतों व गृहस्थों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव ने 15 अक्टूबर को धार्मिक न्यास समिति की बैठक बुलाई है। पहली बार भौतिक रूप से आयोजित होने वाली इस बैठक में अयोध्या के संत-महंतों और गृहस्थों को रामलला के दर्शन सुलभ कराने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा होगी। बैठक में तैयार रूपरेखा को दो दिसंबर को ट्रस्ट की कार्यकारिणी के समक्ष प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट की सहमति और सुझावों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अहम

    स्थानीय निवासियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था लागू करने से पहले पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की सकारात्मक रिपोर्ट जरूरी मानी जा रही है। 15 अक्टूबर को होने वाली बैठक में यह भी स्पष्ट होने की संभावना है कि संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट ट्रस्ट को मिली है या नहीं।

    यदि रिपोर्ट अनुकूल रही, तो स्थानीय लोगों के लिए सीधे दर्शन की सुविधा देने की योजना आगे बढ़ सकती है। इसके साथ ही संत-महंतों और गृहस्थों के लिए निर्धारित प्रवेश द्वार बनाने पर भी निर्णय लिया जा सकता है।

    यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलती है, तो स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए पहले से लागू व्यवस्था जारी रह सकती है। इसके तहत अयोध्या के निवासियों को आधार कार्ड के माध्यम से छह महीने की अवधि वाला नियमित दर्शन पास उपलब्ध कराया जाता है।

    अलग-अलग लेन बनाने की मांग

    राम मंदिर में स्थानीय दर्शनार्थियों के लिए अलग प्रवेश लेन बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। स्थानीय संत-महंतों का कहना है कि अलग लेन की व्यवस्था नहीं होने से दर्शन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय निवासियों, संत-महंतों और गृहस्थों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

    धार्मिक न्यास समिति की बैठक में इन समस्याओं और संभावित समाधानों पर विचार किया जाएगा। बैठक में बनने वाली रूपरेखा के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    15 अक्टूबर से निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक

    राम मंदिर की निर्माण समिति की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक भी 15 अक्टूबर से शुरू होगी। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या पहुंचेंगे। संभावना जताई जा रही है कि धार्मिक न्यास समिति की बैठक में उन्हें भी आमंत्रित किया जा सकता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश व्यवस्था से जुड़े विषय पर उनका सुझाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निर्माण समिति की बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव भी पहली बार हिस्सा लेंगे। इस दौरान निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निर्माण कार्यों का भी अवलोकन किया जाएगा।

    अब 15 अक्टूबर की बैठकों में स्थानीय निवासियों के लिए दर्शन व्यवस्था और मंदिर निर्माण से जुड़े विषयों पर होने वाली चर्चा के बाद आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • रजनीकांत की जेलर 2 की हिंदी रिलीज पर ओटीटी का पेंच, ऋतिक रोशन और मिथुन चक्रवर्ती जैसे सितारों के बावजूद स्क्रीनिंग पर सवाल

    रजनीकांत की जेलर 2 की हिंदी रिलीज पर ओटीटी का पेंच, ऋतिक रोशन और मिथुन चक्रवर्ती जैसे सितारों के बावजूद स्क्रीनिंग पर सवाल

    नई दिल्ली: रजनीकांत की बहुप्रतीक्षित फिल्म जेलर 2 की हिंदी रिलीज को लेकर ओटीटी पर आने की समय-सीमा के कारण विवाद की स्थिति सामने आई है। फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसमें रजनीकांत के साथ ऋतिक रोशन, मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्रॉफ और विद्या बालन जैसे चर्चित कलाकार भी नजर आएंगे। हिंदी सिनेमा के इन सितारों की मौजूदगी के कारण उत्तर भारत के दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। हालांकि, हिंदी संस्करण को बड़े मल्टीप्लेक्स में कितनी स्क्रीन मिलेंगी, इसको लेकर सवाल उठे हैं। फिल्म की रिलीज से पहले ओटीटी समझौते की समय-सीमा चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।

    विवाद की मुख्य वजह सिनेमाघरों में फिल्म रिलीज होने और उसके डिजिटल मंच पर उपलब्ध होने के बीच का अंतर बताया जा रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, जेलर 2 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लगभग चार सप्ताह बाद ओटीटी पर लाने की योजना है। इसके विपरीत, पीवीआर आईनॉक्स और सिनेपोलिस जैसी मल्टीप्लेक्स श्रृंखलाएं हिंदी फिल्मों के मामले में आमतौर पर लगभग आठ सप्ताह का अंतर चाहती हैं। ऐसे में चार सप्ताह के भीतर डिजिटल रिलीज की संभावना से हिंदी संस्करण की स्क्रीनिंग को लेकर मुश्किलें पैदा होने की बात कही गई। इस स्थिति ने फिल्म की हिंदी रिलीज और संभावित बॉक्स ऑफिस कमाई को लेकर चर्चा बढ़ा दी।

    फिल्म की उत्तर भारत की प्रचार टीम ने स्पष्ट किया है कि जेलर 2 का हिंदी संस्करण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगा। उत्तर भारत में फिल्म का वितरण पेन मरुधर एंटरटेनमेंट संभालेगा। इस घोषणा से हिंदी रिलीज को लेकर बनी अनिश्चितता कम हुई है। हालांकि, फिल्म की रिलीज की तारीख तय होने से यह जरूरी नहीं हो जाता कि सभी मल्टीप्लेक्स श्रृंखलाओं में इसे समान संख्या में स्क्रीन मिलेंगी। अलग-अलग सिनेमाघरों में शो की उपलब्धता और ओटीटी रिलीज की समय-सीमा को लेकर स्थिति फिल्म के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

    जेलर 2 में हिंदी फिल्म उद्योग के कई लोकप्रिय कलाकारों की मौजूदगी को उत्तर भारतीय बाजार के लिहाज से अहम माना जा रहा है। ऋतिक रोशन की विशेष भूमिका को लेकर दर्शकों में दिलचस्पी है। मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्रॉफ और विद्या बालन जैसे कलाकारों की मौजूदगी से फिल्म को हिंदी भाषी दर्शकों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यदि बड़े शहरों के मल्टीप्लेक्स में हिंदी शो सीमित रहते हैं, तो इससे दर्शकों की पहुंच और शुरुआती कमाई प्रभावित हो सकती है। महानगरों में मल्टीप्लेक्स बड़ी संख्या में दर्शकों के लिए मनोरंजन का प्रमुख माध्यम हैं, इसलिए वहां हिंदी संस्करण को मिलने वाली स्क्रीन की संख्या महत्वपूर्ण होगी।

    निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार की जेलर 2 वर्ष 2023 में आई फिल्म जेलर की अगली कड़ी है। पहली फिल्म में रजनीकांत ने टाइगर मुथुवेल पांडियन की भूमिका निभाई थी और फिल्म को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। अब इसके दूसरे भाग से भी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। हिंदी संस्करण की रिलीज से पहले ओटीटी विंडो को लेकर उठे सवालों ने फिल्म के प्रचार और संभावित कारोबार पर ध्यान खींचा है। फिलहाल 15 अक्टूबर को हिंदी रिलीज की पुष्टि की गई है। हालांकि, मल्टीप्लेक्स में फिल्म को कितनी स्क्रीन मिलेंगी और डिजिटल रिलीज की योजना का उसके प्रदर्शन पर कितना असर पड़ेगा, यह रिलीज के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद

    दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में लगे पोस्टर, मांस और बिरयानी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील पर विवाद


    नई दिल्ली:
    पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा के बीच मांस, बिरयानी और पूजा से जुड़ी सामग्री हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील वाले पोस्टर लगाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। शहर के कई इलाकों में दिखाई दिए इन पोस्टरों में लोगों से कहा गया है कि बिरयानी खाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसे हिंदू दुकानदारों से ही खरीदा जाए। इसी तरह मांस और पूजा की सामग्री भी हिंदू व्यापारियों से खरीदने की अपील की गई है। इन संदेशों ने त्योहार के दौरान धार्मिक पहचान, कारोबार और सामाजिक सौहार्द को लेकर बहस तेज कर दी है।

    ये पोस्टर सिलीगुड़ी के भारत नगर सहित कई स्थानों पर लगाए गए हैं। कुछ पोस्टर तरुण तीर्थ क्लब के दुर्गा पूजा आयोजन स्थल के आसपास की दीवारों पर भी दिखाई दिए। इन संदेशों में लोगों से हिंदू व्यापारियों का समर्थन करने और समुदाय के कारोबार को बढ़ावा देने की अपील की गई है। पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी हिंदू जागरण मंच ने ली है। संगठन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य हिंदुओं में एकता की भावना को मजबूत करना और त्योहार के दौरान हिंदू दुकानदारों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। संगठन के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि ये संदेश किसी तरह का आदेश नहीं, बल्कि लोगों से की गई अपील हैं।

    हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि अभिषेक दास के अनुसार, पोस्टर केवल भारत नगर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास भी लगाए गए हैं। संगठन इन संदेशों के जरिए हिंदू एकता का विचार सामने रखना चाहता है। मंच से जुड़े लोगों का तर्क है कि दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करते हैं और इस आर्थिक गतिविधि का लाभ हिंदू व्यापारियों को भी मिलना चाहिए। पोस्टरों में मांस और बिरयानी की दुकानों के अलावा पूजा सामग्री बेचने वाले कारोबारियों का भी उल्लेख किया गया है। इस तरह धार्मिक पहचान को खरीदारी के विकल्प से जोड़ने की कोशिश की गई है।

    हालांकि, इस अभियान को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया है। सिलीगुड़ी के पूर्व महापौर और वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह के संदेश समाज में धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े संगठनों पर धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच दूरी पैदा करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार के अभियान पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि दुर्गा पूजा बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस दौरान सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।

    इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उनके आवास के पास पूजा स्थल के आसपास पोस्टर किसने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टर लगाने वाले ही उनके उद्देश्य के बारे में बता सकते हैं। इस बयान के बाद भी पोस्टर अभियान को लेकर चर्चा जारी है। एक ओर संगठन इसे हिंदू व्यापारियों को प्रोत्साहित करने और समुदाय के भीतर एकजुटता बढ़ाने का प्रयास बता रहा है, वहीं आलोचक इसे धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी को प्रभावित करने वाला कदम मान रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान सामने आया यह मामला अब व्यापारिक हितों, व्यक्तिगत पसंद और बंगाल की सामाजिक परंपराओं से जुड़ी बहस का विषय बन गया है।

  • अल्डाब्रा द्वीप पर 1.83 लाख पहुंचे विशाल कछुए, सेशेल्स की इंसानी आबादी से भी ज्यादा हुई इनकी संख्या

    अल्डाब्रा द्वीप पर 1.83 लाख पहुंचे विशाल कछुए, सेशेल्स की इंसानी आबादी से भी ज्यादा हुई इनकी संख्या

    नई दिल्ली: हिंद महासागर में स्थित सेशेल्स के अल्डाब्रा एटोल पर विशाल कछुओं की आबादी करीब 1.83 लाख होने का अनुमान लगाया गया है। यह संख्या पूरे सेशेल्स की लगभग 1.35 लाख की मानव आबादी से भी अधिक है। हालिया वैज्ञानिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि अल्डाब्रा के विशाल कछुए दुनिया में प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से रहने वाले विशाल कछुओं की सबसे बड़ी आबादी बनाते हैं। कभी बड़े पैमाने पर शिकार के कारण इनकी संख्या घटकर 1,000 से भी कम रह गई थी। लंबे समय तक किए गए संरक्षण प्रयासों और निगरानी से इस प्रजाति को दोबारा फलने-फूलने का अवसर मिला है।

    इस सर्वेक्षण के लिए 2018 से 2022 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में वयस्क और लगभग वयस्क कछुओं की संख्या करीब 1.83 लाख आंकी गई है। यह 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में लगाए गए लगभग एक लाख कछुओं के पुराने अनुमान से काफी अधिक है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि नए आंकड़ों का यह अर्थ नहीं है कि वर्ष 1999 के बाद कछुओं की आबादी लगभग दोगुनी हो गई है। पुराने सर्वेक्षणों में घनी झाड़ियों और पेड़ों की छाया में छिपे कछुए अक्सर गिनती में शामिल नहीं हो पाते थे। इस बार वैज्ञानिकों ने उन कछुओं की संख्या का भी सांख्यिकीय अनुमान लगाया, जो सर्वेक्षण के दौरान सीधे दिखाई नहीं दिए।

    अल्डाब्रा के विशाल कछुओं की आबादी में सुधार के पीछे उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना गया है। 19वीं सदी में बड़े पैमाने पर शिकार और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद इस प्रजाति को बचाने के लिए संरक्षण के उपाय किए गए। वर्ष 1981 में अल्डाब्रा को सख्त सुरक्षा वाले प्राकृतिक आरक्षित क्षेत्र का दर्जा दिया गया। इसके अगले वर्ष, 1982 में, इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। लगातार संरक्षण और निगरानी से कछुओं को सुरक्षित वातावरण मिला। नए अध्ययन में यह भी सामने आया कि 2018 से 2022 के दौरान इनकी आबादी अपेक्षाकृत स्थिर रही।

    सर्वेक्षण के दौरान कछुओं की संख्या और उनके आवास के बीच संबंध भी सामने आया। वैज्ञानिकों ने पाया कि घास वाले क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी सबसे अधिक है। ऐसे क्षेत्रों को टॉरटॉइज टर्फ कहा जाता है। इसके बाद खुले भूभाग और कम घनी झाड़ियों वाले इलाकों में कछुओं का घनत्व अधिक पाया गया। इसके विपरीत, घनी झाड़ियों, मैंग्रोव और कुछ विशेष प्रकार की वनस्पतियों वाले क्षेत्रों में इन्हें देखना अधिक कठिन था। अलग-अलग प्राकृतिक परिस्थितियों में कछुओं की दृश्यता के अंतर को ध्यान में रखकर वैज्ञानिकों ने उनकी कुल आबादी का अधिक विश्वसनीय अनुमान तैयार किया।

    आबादी में सुधार के बावजूद अल्डाब्रा के विशाल कछुओं के सामने कई खतरे बने हुए हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में सूखे की अवधि लंबी और बार-बार होने की आशंका है। इससे कछुओं के लिए भोजन और छाया की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर एटोल के निचले हिस्सों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इसके अलावा, जंगली बिल्लियां और काले चूहे कछुओं के अंडों तथा नवजात बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं। जंगली बकरियों को वर्ष 2012 में यहां से हटाया जा चुका है, क्योंकि वे वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाती थीं। वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में आबादी में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए नियमित सर्वेक्षण जरूरी हैं। करीब 1.83 लाख कछुओं का नया अनुमान आगे की निगरानी के लिए आधार उपलब्ध कराएगा, जिससे पर्यावरणीय बदलावों और अन्य खतरों के प्रभाव का समय रहते आकलन किया जा सकेगा।