Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में बढ़ेगी गर्मी की तपिश, तापमान 6 डिग्री तक चढ़ने का अनुमान

    मध्य प्रदेश में बढ़ेगी गर्मी की तपिश, तापमान 6 डिग्री तक चढ़ने का अनुमान

    भोपाल। मध्यप्रदेश में इस साल अप्रैल की शुरुआत तेज गर्मी के बजाय आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के साथ हुई। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम लगातार बदलता रहा। हालांकि अब यह दौर खत्म होने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार से प्रदेश में बारिश रुक जाएगी और गर्मी का असर तेजी से बढ़ेगा। इसके चलते दिन के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

    अप्रैल की शुरुआत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश में लगातार बदलाव देखने को मिला। गुरुवार को भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) सक्रिय रहा, जिससे पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में मौसम प्रभावित रहा। कहीं तेज आंधी चली, तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार से इन सिस्टम्स का असर समाप्त हो जाएगा। अगले पांच दिनों तक प्रदेश में कहीं भी बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान मौसम शुष्क रहेगा और तापमान लगातार बढ़ेगा। 15 अप्रैल के आसपास उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव मध्यप्रदेश में बहुत कम रहने की संभावना है।

    गर्मी के लिहाज से अप्रैल और मई सबसे अहम महीने माने जाते हैं। विभाग के अनुसार, जैसे दिसंबर-जनवरी सर्दी के और जुलाई-अगस्त बारिश के चरम महीने होते हैं, वैसे ही अप्रैल-मई में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस साल मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।

    आमतौर पर मार्च के अंतिम दिनों से तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से तापमान में गिरावट देखने को मिली। इसी कारण अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी प्रदेश में बारिश, ओले और आंधी का दौर जारी रहा। पिछले आठ दिनों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कहीं न कहीं बारिश दर्ज की जा रही थी।

  • कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसके बाद अब किसान 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला दुर्लभ मशरूम अपने खेतों में भी उगा सकेंगे। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित वातावरण में इस मशरूम की सफल खेती कर दिखाई है।

    जंगलों पर निर्भरता से मिली मुक्ति

    यह मशरूम मोरल्स या मोरचेला (स्थानीय नाम कंगाच) है, जो अब तक सिर्फ ऊंचे पहाड़ी जंगलों में बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता था। इसकी उपलब्धता बेहद सीमित और मुश्किल होने के कारण बाजार में इसकी कीमत बेहद अधिक रहती है।

    वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

    SKUAST के कुलपति प्रोफेसर नजीर अहमद गनई ने इस उपलब्धि को “गेम चेंजर” बताया है। उनके अनुसार, यह तकनीक जंगलों पर निर्भरता खत्म कर नियंत्रित उत्पादन का रास्ता खोलती है, जिससे किसानों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

    पांच साल की मेहनत से मिला परिणाम

    इस शोध में प्रोफेसर तारिक अहमद सोफी, उनके छात्र कमरान मुनीर और प्रोफेसर विकास गुप्ता शामिल रहे। टीम ने पिछले पांच वर्षों में 1000 से अधिक प्राकृतिक स्थलों से मोरचेला के नमूने एकत्र किए और उनके वातावरण, मिट्टी, नमी और पौधों का गहन अध्ययन किया।

    शोध के दौरान 10 किस्मों को चुना गया, जिनमें से 3 किस्मों में सफलतापूर्वक खेती संभव हो सकी।

    पॉलीहाउस से लेकर खुले खेत तक सफलता

    शुरुआत में इस मशरूम की खेती पॉलीहाउस में की गई, जबकि बाद में इसे खुले वातावरण में भी उगाने में सफलता मिली। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके लिए पेटेंट प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह प्रयोग बारामूला, अनंतनाग और श्रीनगर सहित कई क्षेत्रों में किया गया है।

    खास पर्यावरण की जरूरत वाला मशरूम

    मोरचेला की खेती हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि इसे विशेष तापमान, नमी और मिट्टी की स्थिति की आवश्यकता होती है। साथ ही अलग-अलग किस्मों के लिए अलग पौधों और प्राकृतिक वातावरण का संतुलन भी जरूरी होता है।

    किसानों के लिए नई आर्थिक संभावना

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के चलते यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन सकती है और जैव-अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकती है।

  • बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी

    बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के बक्सर (Buxar) से पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में सेंध पहुंचाने और हमले की साजिश में शामिल युवक अमन तिवारी (Aman Tiwari) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके लैपटॉप से विदेशी(दुश्मन देशों की) एजेंसियों को मैसेज भेजने का सबूत मिले हैं। उसकी गिरफ्तारी सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव से हुई है। इस मामले में पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जिसमें सिमरी के युवक के लैपटॉप से मैसेज मिला।

    पुलिस के अनुसार रुपये की चाहत में सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव निवासी अमन तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था। गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हुई। पुलिस के अनुसार बुधवार की दोपहर अमन किसी के घर पूजा कराने के लिए अपने पिता को छोड़ घर लौटा था। जिस वक्त वह घर में खाना खा रहा था‌ ठीक उसी वक्त पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि अमन के साथ तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद दो को छोड़ दिया गया जबकि सबूत मिलने के बाद अमन को गिरफ्तार कर लिया गया।

    एसपी ने कहा कि पीएम से संबंधित कोई मैसेज हैक नहीं हुआ है। अमन काफी समय से विदेशी एजेंसियों के संपर्क में था। रुपये के डिमांड के साथ अंतराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था कि वह पीएम की सुरक्षा को हानि पहुंचा सकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से संपर्क कर गोपनीय जानकारी के बदले रुपये की मांग कर रहा था। उसके मोबाइल और लैपटॉप को पुलिस ने जब्त कर खंगाला, तो रुपये के डिमांड से संबंधित मैसेज मिला।

    एसपी ने बताया कि अमन तिवारी ने वर्ष 2021 में कोलकाता एयरपोर्ट को उड़ाने की धमकी दी थी। इस मामले में कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुरुवार को पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित के घर से लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

    अमन की गिरफ्तारी के बाद उसके गांव में गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। युवक की करतूत से सभी ग्रामीण हैरान नजर आ रहे हैं। एसपी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अमन के संपर्क में और कौन कौन लोग हैं और उसका संपर्क किन एजेंसियों से हैं। अमन का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। उसकी नजह में और कौन-कौन वीआईपी हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

  • छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित

    छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित


    नई दिल्ली।
    फिरोजाबाद (Firozabad) में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योगों (Small and Medium Industries) का अस्तित्व गैस संकट के कारण खतरे में हैं। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है या बंद कर दिया है। इससे हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि फिरोजाबाद का संकट कैसे पूरे देश की कई इंडस्ट्रीज को प्रभावित कर रहा है।

    बेंगलुरु की कंपनी Mossant Craft Kombucha के को-फाउंडर शिशिर साथ्यान पिछले एक महीने से अपने प्रीमियम ड्रिंक्स के लिए कांच की बोतलें जुटाने में परेशान हैं। उनका कहना है कि बाजार में अब कांच के फ्लास्क मिल ही नहीं रहे हैं, जबकि गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक की मांग सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती लागत को संभालने के लिए कंपनी अब मार्केटिंग और डिस्काउंट बजट में कटौती करने पर मजबूर हो गई है।


    गैस सप्लाई में बड़ी कटौती का असर

    देश में कांच की कमी की सबसे बड़ी वजह गैस संकट है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए LPG और LNG की सप्लाई फैक्ट्रियों से हटाकर घरों की ओर मोड़ दी है। इसका सीधा असर कांच बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है, जो गैस पर निर्भर होते हैं।


    फिरोजाबाद बना संकट का केंद्र

    पिछले 400 साल से कांच उद्योग का केंद्र रहा उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बना है। यहां के कारखाने नेचुरल गैस से चलते हैं। कांच बनाने की भट्टियां 1500°C तापमान पर लगातार चलती रहती हैं। अगर ये ठंडी पड़ जाएं तो दोबारा चालू करने में हफ्तों का समय और अरबों रुपये का खर्च लगता है।

    प्रोडक्शन हुआ आधा, कीमतें 20% तक बढ़ीं
    गैस सप्लाई कम होने के कारण कई कंपनियों को उत्पादन 50% तक घटाना पड़ा है। कांच की कीमतें 20% तक बढ़ गई हैं। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और विस्तार योजनाएं रोक दी गई हैं। ग्लोबल कंपनियों को सप्लाई करने वाले उद्योग भी इस संकट से जूझ रहे हैं।


    हर सेक्टर पर असर: दवा, शराब, FMCG तक झटका

    कांच की कमी का असर सिर्फ बोतलों तक सीमित नहीं है। दूध की बोतलें, जैम के जार, दवाइयों की शीशियां, कॉस्मेटिक पैकेजिंग, सबकी सप्लाई प्रभावित हुई है। कुछ कंपनियों को पैकेजिंग लागत 30% तक बढ़ानी पड़ी है। एस आर ग्लास के प्रबंध निदेशक प्रांजल मित्तल को उम्मीद है कि कांच उत्पादन में यह रुकावट महीनों तक चलेगा। उनका कहना है, “अगर युद्ध एक सप्ताह बढ़ता है, तो हमारा कारोबार एक महीने के लिए गड़बड़ा जाता है। इसका मतलब है कि अभी अगले चार महीने बिगड़ चुके हैं।”


    भारत की क्या है कमजोरी

    भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लगभग 50% नेचुरल गैस आयात होती है। करीब 40% LNG सिर्फ कतर से आता है। LPG का लगभग 90% आयात मिडिल-ईस्ट से होता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है।

    रेस्टोरेंट और शादी सीजन भी प्रभावित: गैस की कमी का असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है। रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस भी LPG की कमी से जूझ रहे हैं। इसका असर शादी सीजन और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख रहा है।

    जल्दी राहत की उम्मीद कम: हालांकि सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे। ग्लास इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि अगर युद्ध एक हफ्ता भी बढ़ता है, तो इसका असर कई महीनों तक चलता है।

  • होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब

    होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क वसूलने की संभावित योजना को लेकर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। खबरों के अनुसार ईरान की संसद में मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 लाख डॉलर तक का टोल लगाया जा सकता है।

    भारत-ईरान टोल चर्चा पर सरकार का स्पष्ट बयान
    इस मुद्दे पर भारत सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ईरान के साथ इस तरह के किसी टोल टैक्स को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    होर्मुज में आंशिक संचालन की तैयारी

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को ईरानी अधिकारी ने संकेत दिए कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। यह मार्ग युद्ध के दौरान लगभग छह सप्ताह तक बाधित रहा था, हालांकि कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था।

    20 लाख डॉलर तक हो सकता है शुल्क

    सूत्रों के अनुसार ईरान स्थायी शांति व्यवस्था के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि यह शुल्क लगभग 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट तक हो सकता है, जो मौजूदा शिपिंग लागत के बराबर माना जा रहा है।

    ईरान और ओमान दोनों की भूमिका
    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिल सकता है। इस आय का उपयोग क्षेत्रीय पुनर्निर्माण और आर्थिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है।

    भारत को पहले मिली थी राहत
    युद्ध के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी शामिल रहा। उस समय कई भारतीय जहाज जैसे एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ और अन्य वेसल्स सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे थे।

    वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर नजर
    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का नया शुल्क या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • चीन ने ताइवान के आसपास का बड़ा हवाई क्षेत्र 40 दिन के लिए किया बंद… ?

    चीन ने ताइवान के आसपास का बड़ा हवाई क्षेत्र 40 दिन के लिए किया बंद… ?


    बीजिंग।
    चीन (China) ने ताइवान (Taiwan.) के आसपास बड़ा हवाई क्षेत्र (Large Airfield) नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया है। इस बार प्रतिबंधित क्षेत्र ताइवान से दोगुना बड़ा है। अधिकारियों ने इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (US Federal Aviation Administration.- FAA) ने 27 मार्च को विमान चालकों के लिए एक नोटिस (NOTAM) जारी किया, जो कुछ घंटों बाद प्रभावी हो गया। यह नोटिस 6 मई तक, यानी कुल 40 दिनों तक लागू रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र 73000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो ताइवान के कुल क्षेत्रफल (36,197 वर्ग किलोमीटर) से लगभग दोगुना है। यह क्षेत्र ताइवान से कुछ सौ किलोमीटर उत्तर में स्थित है और पीले सागर तथा पूर्वी चीन सागर के ऊपर फैला हुआ है।

    हालांकि चीन ने इस प्रतिबंध का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य उद्देश्य नहीं हो सकता। एएफपी को दिए गए बयान में सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने कहा कि इस तरह के हवाई क्षेत्र प्रतिबंध का सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य संभावित उपयोग नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण, हवाई अभ्यास या अन्य सैन्य गतिविधियों के लिए हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब चीन ने इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को इतने लंबे समय तक अचानक प्रतिबंधित किया है।

    विमानन और रक्षा सलाहकार एनएक्सटी के जेवियर टाइटेलमैन ने भी इस प्रतिबंध को ‘असामान्य’ बताया। उन्होंने कहा कि इसकी अवधि, आकार और ऊंचाई पर किसी भी प्रकार की सीमा न होने के कारण यह सामान्य NOTAM से अलग है। आमतौर पर NOTAM सैन्य अभ्यास, आग या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाओं के लिए जारी किए जाते हैं।

    नागरिक विमानों पर प्रतिबंध, सैन्य विमानों पर नहीं
    टाइटेलमैन ने बताया कि इस क्षेत्र को केवल नागरिक उड्डयन के लिए बंद किया गया है। सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन इस प्रतिबंध से प्रभावित नहीं होंगे। इसका मतलब है कि चीन सरकार ने अपने सैन्य उपयोग के लिए यह क्षेत्र आरक्षित कर लिया है। प्रतिबंध दो क्षेत्रों पर पीले सागर में (चीन-दक्षिण कोरिया के बीच) और तीन क्षेत्रों पर पीले सागर व पूर्वी चीन सागर के बीच (चीन-जापान के बीच) लागू है। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों के बीच लगभग 100 किलोमीटर चौड़े हवाई गलियारे छोड़े गए हैं, जिससे शंघाई तक नागरिक विमानों की आवाजाही संभव हो सके।


    क्या है ताइवान का आरोप?

    ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने आरोप लगाया है कि चीन मध्य पूर्व में अमेरिका के व्यस्त होने का फायदा उठाते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि चीन का मकसद अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों को डराना और हिंद-प्रशांत में अमेरिकी सैन्य प्रभाव को कमजोर करना है। सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने इसे चीन की ‘पहुंच से इनकार’ की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह चीन द्वारा अपने पड़ोसी देशों की भूमि और समुद्री सीमाओं पर दबाव बढ़ाने और कब्जा करने के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।

  • लौंग से लेकर नमक के पानी तक, इन घरेलू उपायों से पाएं दांतों का दर्द कम!

    लौंग से लेकर नमक के पानी तक, इन घरेलू उपायों से पाएं दांतों का दर्द कम!


    नई दिल्ली।दांत का दर्द किसी भी दिन की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। कभी ठंडा-गरम खाने से झनझनाहट, तो कभी मसूड़ों में सूजन या सड़न के कारण तेज दर्द होने लगता है। आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में दांत दर्द कम करने के कई असरदार घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना दवा के आराम पा सकते हैं।

    1. लौंग: प्राकृतिक दर्द निवारक

    लौंग दांत दर्द के लिए सबसे प्रभावी घरेलू उपायों में से एक है। इसमें पाया जाने वाला यूजेनॉल प्राकृतिक दर्द निवारक और एंटीबैक्टीरियल होता है।

    कैसे करें इस्तेमाल: लौंग को सीधे दांत के पास रखें या लौंग का तेल प्रभावित जगह पर लगाएं।
    फायदा: नसों को हल्का सुन्न करता है और बैक्टीरिया के विकास को रोकता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है।

    सावधानी: अधिक मात्रा में लगाने से जलन हो सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही उपयोग करें।
    2. नीम: मसूड़ों का संरक्षक

    नीम में पाए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करते हैं। नीम की दातुन से दांतों को साफ करने से मसूड़े मजबूत रहते हैं।

    वैज्ञानिक लाभ: नीम मुंह के पीएच लेवल को संतुलित रखता है, जिससे बैक्टीरिया का विकास कम होता है।

    नियमित उपयोग: दांत और मसूड़े लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
    3. हल्दी: सूजन और संक्रमण कम करें

    हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होता है।

    कैसे इस्तेमाल करें: हल्दी को पानी या नारियल तेल में मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगाएं।

    फायदा: मसूड़ों की सूजन कम होती है, दर्द में राहत मिलती है और घाव जल्दी भरते हैं।
    4. मुलेठी: प्राकृतिक क्लीनर

    मुलेठी के तत्व बैक्टीरिया से लड़ते हैं और दांतों की सड़न को रोकते हैं।

    कैसे इस्तेमाल करें: मुलेठी का पाउडर दांतों पर हल्के हाथ से रगड़ें।

    फायदा: दांतों की सतह पर जमा गंदगी साफ होती है और मसूड़ों को आराम मिलता है।
    5. नमक के पानी से गरारे

    नमक में संक्रमण को कम करने और मसूड़ों को साफ रखने की क्षमता होती है।

    कैसे करें इस्तेमाल: गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर गरारे करें।

    फायदा: मुंह के बैक्टीरिया कम होते हैं और सूजन में राहत मिलती है।

    इन प्राकृतिक उपायों से दांतों और मसूड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है और तेज दर्द में तुरंत राहत मिलती है। लौंग, नीम, हल्दी, मुलेठी और नमक का पानी दांतों के लिए असरदार घरेलू उपचार हैं। फिर भी, अगर दर्द लगातार बना रहे या मसूड़ों में अधिक सूजन और रक्तस्राव हो, तो तुरंत किसी डेंटिस्ट या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

  • स्कूल में तीन बार फेल हुए थे अक्षय कुमार, दोस्त ने खोले बचपन के राज

    स्कूल में तीन बार फेल हुए थे अक्षय कुमार, दोस्त ने खोले बचपन के राज


    नई दिल्ली।बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार Akshay Kumar एक बार फिर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर चर्चा में हैं। मशहूर निर्देशक Priyadarshan के साथ उनकी यह जोड़ी लंबे समय बाद एक बार फिर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। फिल्म का ट्रेलर हाल ही में 6 अप्रैल को रिलीज हुआ, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया और सोशल मीडिया पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    बचपन के दोस्त ने खोले अक्षय कुमार के अनसुने किस्से

    एक रियलिटी शो ‘Wheel of Fortune’ के दौरान अक्षय कुमार ने अपने बचपन के दोस्त जिनेश को स्टेज पर इंट्रोड्यूस किया और पुराने दिनों की कई यादें ताज़ा कीं। बातचीत के दौरान अक्षय ने खुद स्वीकार किया कि वे KG से 9वीं क्लास तक के दौरान तीन बार फेल हुए थे। उनका यह खुलासा सुनकर शो के दर्शक हैरान रह गए।

    अक्षय ने मजाकिया अंदाज में बताया कि बचपन में उनकी और उनके दोस्त की शरारतों के कारण पढ़ाई पर ध्यान कम रहता था। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बचपन शरारतों और मस्ती से भरा हुआ था, जिसकी वजह से अकादमिक प्रदर्शन कमजोर रहा।

    दोस्त का मजेदार जवाब और साइकिल वाली यादें

    अक्षय के दोस्त जिनेश ने भी इस बातचीत में खूब हंसी-मजाक किया। जब अक्षय ने उनसे पूछा कि वे बार-बार फेल क्यों होते थे, तो उन्होंने मजाक में कहा कि “आपके साथ ज्यादा समय बिताने की वजह से ऐसा होता था।”

    इसी बातचीत में अक्षय ने यह भी बताया कि उनके दोस्त की एक खास आदत थी—साइकिल चलाकर शहर में लड़कियों की झलक पाने की कोशिश करना। इस पर दोस्त ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि असल में देखने वाला कौन था, यह वही बेहतर जानते हैं। इस मजेदार बहस ने पूरे स्टूडियो में हंसी का माहौल बना दिया।

    ‘भूत बंगला’ की रिलीज डेट में बदलाव

    फिल्म ‘भूत बंगला’ पहले 10 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी रिलीज डेट बदलकर 17 अप्रैल कर दी गई है। इसके साथ ही 16 अप्रैल को रात 9 बजे से फिल्म के पेड प्रीव्यू भी शुरू किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि बॉक्स ऑफिस पर प्रतिस्पर्धा और अन्य बड़ी रिलीज़ के कारण मेकर्स ने यह फैसला लिया है।

    अक्षय कुमार की पुरानी यादों ने जीता दिल

    इस पूरे एपिसोड में अक्षय कुमार का बेबाक और मजाकिया अंदाज फैंस को काफी पसंद आया। बचपन के फेलियर से लेकर शरारतों तक की कहानियों ने यह दिखाया कि बड़े स्टार बनने से पहले उनका जीवन भी सामान्य और संघर्षों से भरा रहा है।

    अक्षय कुमार ने खुलासा किया कि वे स्कूल में तीन बार फेल हुए थे और बचपन की शरारतों के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई, वहीं उनकी फिल्म ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है।

  • महाराष्ट्र का 50 हजार साल पुराना लोनार झील, जहां रहस्यमयी ढंग से बदलता है पानी का रंग!

    महाराष्ट्र का 50 हजार साल पुराना लोनार झील, जहां रहस्यमयी ढंग से बदलता है पानी का रंग!


    नई दिल्ली। प्रकृति जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। महाराष्ट्र में बुलढाणा जिले के लोनार गांव के पास स्थित लोनार क्रेटर एक ऐसा ही अनोखा प्राकृतिक चमत्कार है। यह क्रेटर लगभग 35 से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर समझा गया, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह उल्कापिंड की तेज टक्कर का परिणाम है।

    लोनार क्रेटर का वैज्ञानिक महत्व

    लोनार क्रेटर दुनिया में बेसाल्ट चट्टानों पर बने एकमात्र इम्पैक्ट क्रेटर के रूप में जाना जाता है। यह चंद्रमा और मंगल ग्रह के क्रेटरों के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण है। क्रेटर का व्यास लगभग 1,830 मीटर (1.8 किलोमीटर) और गहराई करीब 150 मीटर है। इसका किनारा आसपास की जमीन से 20 मीटर ऊंचा उठकर दिखता है।

    क्रेटर के अंदर बनी झील नमकीन और क्षारीय है। यह वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने साल 2004 में उपग्रह से इसकी तस्वीर ली थी, जिसमें झील हरी-नीली दिखाई देती है और चारों ओर वनस्पति, खेत और बस्तियां स्पष्ट नजर आती हैं।

    रंग बदलती झील का रहस्य

    लोनार झील का सबसे रोचक पहलू इसकी पानी का बदलता रंग है। जून 2020 में झील का रंग अचानक हरे से गुलाबी या लाल हो गया। वैज्ञानिकों ने सैंपल लेने पर पता लगाया कि यह परिवर्तन हेलोआर्किया जैसे नमकीन पानी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों के कारण हुआ। गर्म और सूखे मौसम में पानी का स्तर कम होने से खारापन बढ़ता है और ये जीव तेजी से बढ़कर झील को गुलाबी रंग दे देते हैं। ऐसा रंग परिवर्तन ऑस्ट्रेलिया की लेक हिलियर और ईरान की लेक उर्मिया में भी देखा गया है। झील का रंग हमेशा नहीं रहता, बल्कि मौसम और पानी की मात्रा के अनुसार बदलता रहता है।

    क्रेटर की खोज और अध्ययन

    1823 में ब्रिटिश अधिकारी सी.जे.ई. अलेक्जेंडर ने लोनार क्रेटर को पहचाना। 1970 के दशक में मास्केलिनाइट की मौजूदगी से पुष्टि हुई कि यह क्रेटर वास्तव में उल्कापिंड के टकराने से बना है। मास्केलिनाइट केवल तेज गति की टक्करों में बनती है। लोनार क्रेटर का बेसाल्ट प्लेटफॉर्म इसे चंद्रमा की सतह जैसी विशेषता देता है। इस कारण नासा और भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों ने यहां कई अध्ययन किए हैं।

    पर्यावरण और संरक्षण

    हाल के वर्षों में झील का पानी बढ़ने की समस्या सामने आई है। इससे पास के प्राचीन मंदिरों पर असर पड़ा है और झील का रासायनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिक इस प्राकृतिक चमत्कार के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं।

  • मुकुल चौधरी ने रचा इतिहास और बने यह कारनामा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी

    मुकुल चौधरी ने रचा इतिहास और बने यह कारनामा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी


    नई दिल्ली। क्रिकेट के सबसे बड़े मंच आईपीएल में समय-समय पर कई दिग्गजों ने अपने बल्ले से जौहर दिखाए हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने खेल जगत को एक नए सितारे से परिचित कराया है। मुकुल चौधरी ने मैदान पर वह कारनामा कर दिखाया है जिसकी कल्पना अब तक केवल किरोन पोलार्ड और एबी डी विलियर्स जैसे महान विदेशी खिलाड़ियों से की जाती थी। भारतीय क्रिकेट के इस उभरते हुए खिलाड़ी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मानसिक दृढ़ता के दम पर वह मुकाम हासिल किया है जो इससे पहले किसी भी अन्य भारतीय खिलाड़ी के नाम दर्ज नहीं था। इस उपलब्धि ने न केवल उनके करियर को एक नई दिशा दी है बल्कि इस लीग के मंच पर भारतीयों के दबदबे को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

    मैदान के चारों ओर शॉट खेलने की उनकी अद्भुत क्षमता ने विपक्षी गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए। जब मुकुल क्रीज पर आए थे तब टीम को एक ऐसी पारी की जरूरत थी जो न केवल स्कोरबोर्ड को गति दे सके बल्कि प्रतिद्वंद्वी टीम के मनोबल को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दे। मुकुल ने इस जिम्मेदारी को बखूबी समझा और बिना किसी दबाव के अपनी स्वाभाविक बल्लेबाजी जारी रखी। उनकी टाइमिंग और तकनीक का मिश्रण इतना सटीक था कि खेल के बड़े विशेषज्ञ भी उनकी सराहना करने से खुद को रोक नहीं पाए। इस वैश्विक मंच पर जहां दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज अपनी पूरी रणनीति के साथ आते हैं, वहां एक भारतीय युवा का इस तरह निडर होकर खेलना भविष्य के सुखद संकेत देता है।

    इस ऐतिहासिक प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि मुकुल ने उन रिकॉर्ड्स को चुनौती दी है जो सालों से अटूट माने जाते थे। पोलार्ड और डी विलियर्स जैसे खिलाड़ियों ने अपनी पावर हिटिंग से जो मानक स्थापित किए थे, मुकुल ने उन्हीं मानकों पर खरे उतरते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। खेल के प्रति उनका समर्पण और दबाव की स्थितियों में शांत रहने की कला उन्हें अन्य समकालीन खिलाड़ियों से अलग करती है। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों के शोर के बीच उन्होंने जिस एकाग्रता का परिचय दिया वह वाकई काबिल ए तारीफ है। इस पारी ने भविष्य की संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं और अब उन्हें क्रिकेट के अगले बड़े सितारे के रूप में देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शन प्रतिभाओं को तराशने के उद्देश्य को सिद्ध करते हैं। यह प्रतियोगिता हमेशा से नए हुनर को बड़ा मंच देने का काम करती रही है और मुकुल चौधरी इस सिलसिले की सबसे नई और चमकदार कड़ी बनकर उभरे हैं। उनकी इस उपलब्धि से खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है और देश के युवा क्रिकेटर उनसे प्रेरित हो रहे हैं। कड़ी मेहनत और लगन से निकलकर दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली लीग के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज कराना किसी सपने के सच होने जैसा है। मुकुल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत में ईमानदारी हो तो किसी भी बड़े रिकॉर्ड को तोड़ना असंभव नहीं है।

    मैच के दौरान मुकुल के फुटवर्क और हाथों की गति ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह खेल के सबसे छोटे प्रारूप के लिए पूरी तरह परिपक्व हैं। उन्होंने हर गेंद को उसकी मेरिट के आधार पर खेला और जोखिम लेने से भी पीछे नहीं हटे। उनकी इस पारी ने मैच का रुख पूरी तरह से बदल दिया और अंत में यही अंतर टीम की जीत का मुख्य आधार बना। आने वाले मैचों में मुकुल पर सभी की निगाहें टिकी होंगी और उनसे इसी तरह के निरंतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाएगी। खेल प्रेमियों के लिए यह गर्व का क्षण है कि एक स्वदेशी खिलाड़ी ने वह कीर्तिमान स्थापित किया है जो अब तक केवल विदेशी दिग्गजों के नाम के साथ जुड़ा हुआ था।