Author: bharati

  • Dolly Bindra Birthday: 18 साल की उम्र में किया डॉली बिंद्रा ने डेब्यू, विवादों से रहा है गहरा नाता

    Dolly Bindra Birthday: 18 साल की उम्र में किया डॉली बिंद्रा ने डेब्यू, विवादों से रहा है गहरा नाता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड और टेलीविजन में अक्सर विलेन की भूमिका पुरुष कलाकार निभाते नजर आते हैं लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी भी हैं जिन्होंने नेगेटिव किरदारों से खास पहचान बनाई। इन्हीं में एक नाम है डॉली बिंद्रा। अपनी तेज आवाज दमदार अंदाज और बेबाक बयानों के लिए मशहूर डॉली बिंद्रा का जन्म 20 जनवरी 1970 को पंजाब में हुआ था। इस साल वह अपना 56वां जन्मदिन मना रही हैं।डॉली बिंद्रा ने महज 18 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन सीरियल्स में काम किया। भले ही उन्हें ज्यादातर साइड रोल या निगेटिव किरदार मिले लेकिन अपनी दमदार अदाकारी से उन्होंने इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली। फिल्मों और टीवी से ज्यादा डॉली अपने विवादित बयानों और झगड़ों को लेकर सुर्खियों में रहीं।

    डॉली बिंद्रा पर कई बार गाली-गलौज और बदसलूकी के आरोप लगे हैं। साल 2014 में मुंबई के मलाड इलाके में रहने के दौरान सोसाइटी के लोगों ने उन पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं एक जिम कर्मचारी को धमकाने और उसके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए थे जिसने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया।डॉली बिंद्रा का नाम राधे मां विवाद से भी जुड़ा रहा है। एक समय वह राधे मां के बेहद करीब मानी जाती थीं और उनके सत्संगों में अक्सर नजर आती थीं। लेकिन साल 2015 में डॉली ने राधे मां पर गंभीर आरोप लगाए। डॉली का कहना था कि उनसे एक अजनबी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था। उस समय डॉली ने #MeToo मूवमेंट का जिक्र करते हुए अपने अनुभव को सार्वजनिक किया था जिसने काफी हलचल मचा दी थी।

    डॉली बिंद्रा को सबसे ज्यादा पहचान मिली टेलीविजन के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 4 से। वह शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट बनकर आई थीं लेकिन थोड़े ही समय में अपनी आक्रामक भाषा और झगड़ों के कारण लाइमलाइट में आ गईं। घर के अंदर उनका कई कंटेस्टेंट्स से विवाद हुआ लेकिन सबसे बड़ा टकराव भोजपुरी अभिनेता और नेता मनोज तिवारी के साथ देखने को मिला। दोनों के बीच हुई तीखी बहस आज भी बिग बॉस के यादगार पलों में गिनी जाती है।

    डॉली बिंद्रा का करियर जितना रंगीन रहा उतना ही विवादों से भरा भी रहा। वह भले ही आज फिल्मों और टीवी से दूर हों लेकिन अपने पुराने बयानों और किस्सों की वजह से अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं।बॉलीवुड और टेलीविजन में अक्सर विलेन की भूमिका पुरुष कलाकार निभाते नजर आते हैं लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी भी हैं जिन्होंने नेगेटिव किरदारों से खास पहचान बनाई। इन्हीं में एक नाम है डॉली बिंद्रा। अपनी तेज आवाज दमदार अंदाज और बेबाक बयानों के लिए मशहूर डॉली बिंद्रा का जन्म 20 जनवरी 1970 को पंजाब में हुआ था। इस साल वह अपना 56वां जन्मदिन मना रही हैं।

    डॉली बिंद्रा ने महज 18 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने कई फिल्मों और टेलीविजन सीरियल्स में काम किया। भले ही उन्हें ज्यादातर साइड रोल या निगेटिव किरदार मिले लेकिन अपनी दमदार अदाकारी से उन्होंने इंडस्ट्री में अलग पहचान बना ली। फिल्मों और टीवी से ज्यादा डॉली अपने विवादित बयानों और झगड़ों को लेकर सुर्खियों में रहीं।डॉली बिंद्रा पर कई बार गाली-गलौज और बदसलूकी के आरोप लगे हैं। साल 2014 में मुंबई के मलाड इलाके में रहने के दौरान सोसाइटी के लोगों ने उन पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं एक जिम कर्मचारी को धमकाने और उसके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए थे जिसने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया।

    डॉली बिंद्रा का नाम राधे मां विवाद से भी जुड़ा रहा है। एक समय वह राधे मां के बेहद करीब मानी जाती थीं और उनके सत्संगों में अक्सर नजर आती थीं। लेकिन साल 2015 में डॉली ने राधे मां पर गंभीर आरोप लगाए। डॉली का कहना था कि उनसे एक अजनबी के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया था। उस समय डॉली ने #MeToo मूवमेंट का जिक्र करते हुए अपने अनुभव को सार्वजनिक किया था जिसने काफी हलचल मचा दी थी।

    डॉली बिंद्रा को सबसे ज्यादा पहचान मिली टेलीविजन के चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 4 से। वह शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट बनकर आई थीं लेकिन थोड़े ही समय में अपनी आक्रामक भाषा और झगड़ों के कारण लाइमलाइट में आ गईं। घर के अंदर उनका कई कंटेस्टेंट्स से विवाद हुआ लेकिन सबसे बड़ा टकराव भोजपुरी अभिनेता और नेता मनोज तिवारी के साथ देखने को मिला। दोनों के बीच हुई तीखी बहस आज भी बिग बॉस के यादगार पलों में गिनी जाती है।डॉली बिंद्रा का करियर जितना रंगीन रहा उतना ही विवादों से भरा भी रहा। वह भले ही आज फिल्मों और टीवी से दूर हों लेकिन अपने पुराने बयानों और किस्सों की वजह से अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं।

  • बसंत पंचमी पर इन 5 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक

    बसंत पंचमी पर इन 5 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक


    नई दिल्ली ।माँ सरस्वती के सम्मुख पूजा स्थानसबसे पहला दीपक अपने घर के मंदिर में माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने जलाएं। यह दीपक घी का होना चाहिए। दीपक जलाते समय अपनी करियर संबंधी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक स्पष्टता आती है।

    अध्ययन कक्ष या स्टडी टेबल विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी स्टडी टेबल या जिस स्थान पर आप बैठकर काम करते हैं, वहाँ एक छोटा दीपक जलाएं। वास्तु के अनुसार, इससे उस स्थान की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पढ़ाई या काम में एकाग्रताबढ़ती है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा ईशान कोणवास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं का स्थान माना गया है। बसंत पंचमी की शाम को इस कोने में एक शुद्ध घी का दीपक जलाने से करियर में नए अवसर प्राप्त होते हैं और अटके हुए काम बनने लगते हैं।

    तुलसी के पौधे के पास तुलसी को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है और माँ सरस्वती के पूजन वाले दिन तुलसी के पास दीपक जलाने से सुख-समृद्धि और ज्ञान का संगम होता है। शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाने से पारिवारिक शांति बनी रहती है और करियर में आने वाले उतार-चढ़ाव कम होते हैं मुख्य द्वार के दोनों ओर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना ‘देहरी पूजन’ का हिस्सा है। मान्यता है कि बसंत पंचमी की शाम मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी का घर में आगमन होता है। यह आपके जीवन से अंधकार और असफलता को दूर कर सफलता के मार्ग प्रशस्त करता है।

    सफलता के लिए विशेष टिप
    दीपक जलाते समय उसमें थोड़ी सी हल्दी या केसर डालना बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है और यह गुरु ग्रह बृहस्पति को मजबूत करता है, जो करियर और पद-प्रतिष्ठा का कारक है।

  • यात्रा से पहले ये नियम जानना जरूरी, भारत की इन जगहों पर बिना परमिट नहीं मिलती एंट्री

    यात्रा से पहले ये नियम जानना जरूरी, भारत की इन जगहों पर बिना परमिट नहीं मिलती एंट्री


    नई दिल्ली। भारत में घूमने की योजना बनाते समय ज्यादातर लोग ट्रैवल टिकट होटल बुकिंग और घूमने की लिस्ट तैयार कर लेते हैं  लेकिन कई बार एक जरूरी कागज पर ध्यान देना भूल जाते हैं। देश में कई ऐसी खूबसूरत और चर्चित जगहें हैं  जहां पहुंचने से पहले सरकारी अनुमति यानी परमिट लेना अनिवार्य होता है। अगर आपके पास यह परमिट नहीं हुआ  तो मौके पर ही आपकी यात्रा रोक दी जा सकती है।आमतौर पर ये स्थान अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के नजदीक स्थित होते हैं या फिर सुरक्षा और पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में यात्रा से पहले नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

    अरुणाचल प्रदेश
    प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर अरुणाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) जरूरी है। चीन और म्यांमार की सीमा से सटे होने के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। बिना ILP के राज्य में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती।

    नागालैंड

    नागालैंड अपनी जनजातीय संस्कृति  लोक परंपराओं और खूबसूरत पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यहां भी अन्य राज्यों के यात्रियों को इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य होता है। यह नियम स्थानीय संस्कृति और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

    सिक्किम

    सिक्किम के अधिकतर पर्यटन स्थल पर्यटकों के लिए खुले हैं  लेकिन कुछ सीमावर्ती और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने के लिए विशेष परमिट जरूरी होता है। खासकर भारत-चीन सीमा से सटे इलाकों में प्रशासन पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करता है।

    लक्षद्वीप
    समंदर के बीच बसे लक्षद्वीप द्वीप समूह तक पहुंचने के लिए पहले से परमिट हासिल करना जरूरी होता है। इसकी प्रक्रिया में समय लग सकता है  इसलिए बिना पूर्व योजना के यहां यात्रा करना मुश्किल हो सकता है। पर्यावरण संरक्षण के कारण यहां सख्त नियम लागू हैं।

    लद्दाख
    लद्दाख के कुछ इलाके सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में घूमने के लिए Restricted Area Permit (RAP) लेना जरूरी होता है। यह नियम पर्यटकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।

    यात्रा से पहले रखें ये बात ध्यान
    भारत की ये जगहें जितनी खूबसूरत हैं  उतनी ही नियमों के लिए भी जानी जाती हैं। अगर आप इन स्थानों की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं  तो परमिट से जुड़ी जानकारी पहले ही जुटा लें। कई परमिट अब ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं   जिससे प्रक्रिया आसान हो गई है।सही दस्तावेजों के साथ की गई यात्रा न सिर्फ आसान और सुरक्षित होती है बल्कि किसी भी तरह की परेशानी से भी बचाती है। बेहतर यही है कि ट्रिप प्लान करते समय परमिट को भी उतनी ही अहमियत दें जितनी टिकट और होटल बुकिंग को देते हैं।

  • बेजान त्वचा में लौटेगा नेचुरल पिंक ग्लो, जानिए ड्रैगन फ्रूट लगाने के असरदार तरीके

    बेजान त्वचा में लौटेगा नेचुरल पिंक ग्लो, जानिए ड्रैगन फ्रूट लगाने के असरदार तरीके


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और बढ़ते प्रदूषण का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। चेहरा बेजान, रूखा और थका हुआ नजर आने लगता है। ऐसे में अगर आप केमिकल-फ्री और नेचुरल स्किन केयर चाहती हैं, तो ड्रैगन फ्रूट आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।ड्रैगन फ्रूट, जिसे पिताया भी कहा जाता है, विटामिन-सी एंटीऑक्सीडेंट्स और जरूरी मिनरल्स से भरपूर होता है। ये तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं डलनेस कम करते हैं और चेहरे पर नेचुरल पिंक ग्लो लाने में मदद करते हैं। यही वजह है कि आजकल स्किन केयर रूटीन में ड्रैगन फ्रूट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

    स्किन को नमी देने के लिए ड्रैगन फ्रूट जे
    ड्रैगन फ्रूट का गूदा निकालकर मिक्सी में पीस लें, जिससे जेल जैसी कंसिस्टेंसी बन जाए। इस जेल को चेहरे पर लगाकर 15 मिनट तक छोड़ दें और फिर सादे पानी से धो लें। यह उपाय त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है, रूखेपन को कम करता है और स्किन को सॉफ्ट व स्मूद बनाता है।

    एजिंग के असर कम करने वाला फेस मास्क
    एक टेबलस्पून ड्रैगन फ्रूट पल्प में एक टीस्पून दही मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फाइन लाइन्स और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं, जबकि दही का लैक्टिक एसिड त्वचा को टाइट और फ्रेश बनाता है। हफ्ते में दो बार इसका इस्तेमाल करें।

    पिंपल्स और एक्ने के लिए नेचुरल उपाय
    अगर आपको एक्ने या पिंपल्स की समस्या है, तो ड्रैगन फ्रूट का पेस्ट सीधे प्रभावित जगह पर लगाएं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण सूजन कम करते हैं और बैक्टीरिया से राहत दिलाते हैं। इसे रात में स्पॉट ट्रीटमेंट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

    सनबर्न और टैन हटाने में असरदार
    धूप से जली त्वचा के लिए ड्रैगन फ्रूट और खीरे का रस बेहतरीन उपाय है। दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगाएं। यह त्वचा को ठंडक देता है, जलन कम करता है और विटामिन-सी की मदद से स्किन रिपेयरिंग को तेज करता है।

    नेचुरल ब्राइटनिंग फेस पैक
    एक टेबलस्पून ड्रैगन फ्रूट पल्प में कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाएं। इसे 10–12 मिनट तक चेहरे पर लगाकर ठंडे पानी से धो लें। यह डार्क स्पॉट्स, टैनिंग और पिगमेंटेशन को हल्का कर त्वचा को ब्राइट बनाता है।

    ड्रैगन फ्रूट और शहद से ग्लो पैक
    ड्रैगन फ्रूट के गूदे में एक टीस्पून शहद मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट बाद धो लें। यह पैक त्वचा को गहराई से पोषण देता है और नेचुरल शाइन लाता है। शहद के एंटीबैक्टीरियल गुण स्किन को हेल्दी बनाए रखते हैं।ड्रैगन फ्रूट स्किन के लिए एक नेचुरल ब्यूटी बूस्टर की तरह काम करता है। इसके घरेलू नुस्खे न सिर्फ चेहरे की चमक बढ़ाते हैं, बल्कि एक्ने, पिगमेंटेशन और एजिंग जैसी समस्याओं को भी कम करने में मदद करते हैं। अगर आप केमिकल-फ्री स्किन केयर अपनाना चाहती हैं, तो इन आसान उपायों को अपनी रूटीन में जरूर शामिल करें।

  • Basant Panchami 2026: जानिए क्यों पहनते हैं पीला रंग और मां सरस्वती को समर्पित है यह त्योहार

    Basant Panchami 2026: जानिए क्यों पहनते हैं पीला रंग और मां सरस्वती को समर्पित है यह त्योहार


    नई दिल्ली। भारत को त्योहारों का देश कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हर मौसम और महीने में कोई न कोई पर्व आता है। बसंत पंचमी जिसे श्री पंचमी या ज्ञान पंचमी भी कहते हैं बसंत ऋतु के स्वागत का पर्व है। यह दिन विद्या बुद्धि कला और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस साल यह त्योहार 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनने की परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

    धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
    मां सरस्वती का प्रिय रंग पीला माना जाता है। यह रंग ज्ञान विवेक और सात्त्विकता का प्रतीक है। इसलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण कर देवी को प्रसन्न किया जाता है। इसके अलावा पीला रंग समृद्धि और शुभता का संकेत भी माना जाता है। यह हल्दी सोना और सरसों के फूलों से जुड़ा है जो भारतीय संस्कृति में शुभ और पवित्र माने जाते हैं। मान्यता है कि पीले वस्त्र पहनने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का वास होता है।बसंत पंचमी बसंत ऋतु का स्वागत भी है। इस ऋतु में प्रकृति पीले फूलों जैसे सरसों और अमलतास से सजी होती है। पीले कपड़े पहनकर मनुष्य प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करता है और इस ऋतु की रौनक में शामिल होता है।

    सांस्कृतिक महत्व
    भारत में रंगों का गहरा सांस्कृतिक महत्व है। बसंत पंचमी पर पीले पकवान जैसे केसरिया खीर बूंदी और हलवा बनाए जाते हैं। पीला रंग उत्साह नवीनता और रचनात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यह रंग शिक्षा और कला से सीधे जुड़ा होने के कारण विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक महत्व
    रंग विज्ञान या कलर साइकोलॉजी के अनुसार पीला रंग मस्तिष्क को सक्रिय करता है। यह एकाग्रता स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए छात्र और ज्ञानार्थी इस दिन पीले कपड़े पहनकर पढ़ाई और पूजा दोनों में लाभ महसूस कर सकते हैं।पीला रंग सूर्य से जुड़ा है और इसे देखने मात्र से खुशी आशावाद और उत्साह का संचार होता है। यह तनाव को कम करता है और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाता है। साथ ही बसंत ऋतु में मौसम बदलने के कारण अक्सर आलस्य या सुस्ती महसूस होती है पीला रंग शरीर और मन को ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है।इस प्रकार बसंत पंचमी न केवल मां सरस्वती की पूजा का पर्व है बल्कि यह प्राकृतिक सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी हमारे जीवन में ऊर्जा सकारात्मकता और सौभाग्य लाने का अवसर है।

  • मध्‍य प्रदेश में 22-23 जनवरी के बाद हल्की बारिश के संकेत

    मध्‍य प्रदेश में 22-23 जनवरी के बाद हल्की बारिश के संकेत

    भोपाल। मध्य प्रदेश के आसपास सक्रिय दो साइक्लोनिक
    सर्कुलेशन के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके असर से प्रदेश
    के पूर्वी जिलों में बादल छाए हुए हैं। आने वाने दिनों में प्रदेश के कुछ
    इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है।

    बीते रविवार को भोपाल,
    नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में आसमान में बादलों की मौजूदगी रही। मौसम
    विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक कड़ाके की ठंड से राहत मिलने की संभावना
    है, हालांकि इसके बाद बूंदाबांदी हो सकती है। सुबह के समय कोहरे का असर भी
    बना रहेगा। आज सोमवार सुबह ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़,
    छतरपुर, पन्ना और सतना में मध्यम स्तर का कोहरा देखा गया। वहीं भोपाल,
    इंदौर, उज्जैन समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में हल्का कोहरा छाया रहा। इस
    बीच, तापमान में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के
    मुताबिक, प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहने से तापमान में उतार-चढ़ाव
    देखा जा रहा है। रविवार को दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई। इसकी मुख्य वजह
    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से गुजर रहे दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन हैं। इसके
    अलावा पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी मौसम को प्रभावित कर रहा
    है। 19 जनवरी और 21 जनवरी की रात से दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत
    में असर दिखा सकते हैं, जिसका प्रभाव मध्य प्रदेश में भी पड़ने की संभावना
    है। इसके चलते 22 और 23 जनवरी के बाद प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की
    बारिश हो सकती है।

    प्रदेश में सबसे कम तापमान शहडोल के कल्याणपुर में
    दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री सेल्सियस रहा। खजुराहो में
    5.8 डिग्री, नौगांव और उमरिया में 6 डिग्री, रीवा में 6.4 डिग्री, पचमढ़ी
    में 6.8 डिग्री, मंडला में 7.2 डिग्री और मलाजखंड में 7.6 डिग्री सेल्सियस
    तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान 10
    डिग्री से ऊपर रहा। भोपाल में 11 डिग्री, इंदौर में 12 डिग्री, ग्वालियर
    में 10 डिग्री, उज्जैन में 13 डिग्री और जबलपुर में 10.5 डिग्री सेल्सियस
    तापमान दर्ज हुआ।

  • PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार

    PM मोदी 23 जनवरी को तमिलनाडु में NDA के चुनावी अभियान की करेंगे शुरुआत, नए दलों के जुड़ने के आसार


    नई दिल्‍ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अब चार महीने दूर हैं और इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को मदुरान्दगम में एक विशाल जनसभा के माध्यम से एनडीए (NDA) के चुनाव अभियान का बिगुल फूकेंगे। मदुरान्दगम चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। राज्य के भाजपा नेता इस जनसभा की तैयारियों में जुट गए हैं। मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस कार्यक्रम में NDA से जुड़ रहे कुछ राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठबंधन की घोषणा भी की जा सकती है।

    NDA में गठबंधन की तस्वीर 23 जनवरी को हो सकती है साफ
    तमिलनाडु में NDA का नेतृत्व AIADMK के पास है और पार्टी ने संकेत दे दिया है कि वह DMDK एक्टर विजयकांत की पार्टी) के साथ चुनावी गठबंधन को अंतिम रूप देने के करीब है। वहीं, BJP चाहती है कि O. पन्नीरसेल्वम और AMMK के नेता T.T.V. दिनकरण को भी NDA में शामिल किया जाए, लेकिन अभी तक AIADMK महासचिव E. पलनिस्वामी से इस पर सहमति नहीं बनी है।सूत्रों के अनुसार, TTV दिनकरण की पार्टी को NDA के घटक दल के रूप में शामिल किया जा सकता है और इसका ऐलान 23 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हो सकता है। हालांकि, O. पन्नीरसेल्वम के साथ निजी रंजिश के कारण पलनिस्वामी उन्हें NDA में शामिल करने के लिए तैयार नहीं हैं।

    इस बीचAIADMK ने पहले ही PMK के एक धड़े के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। PMK के मुखिया डॉ. रामदोस ने अपने बेटे अंबु मणि रामदोस की बगावत के बावजूद चुनावी गठबंधन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। वहीं, उनके बेटे अंबुमणि ने AIADMK के साथ मिलकर NDA का हिस्सा बनने का फैसला किया है। इस तरह तमिलनाडु में NDA के गठबंधन की पूरी तस्वीर 23 जनवरी की पीएम मोदी की जनसभा में स्पष्ट होने की संभावना है।

    मजबूत NDA गठबंधन बनाने की कोशिश
    AIADMK और BJP इस बार तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने के लिए मजबूत NDA गठबंधन बनाने में जुटी हैं। इस गठबंधन में एक्टर विजय की पार्टी DMDK TVK को भी शामिल किया जा सकता है, जिसे इस चुनाव का X फैक्टर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विजय का राजनीतिक असर रजनीकांत और कमल हासन की तुलना में ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने अपनी फिल्मी लोकप्रियता के चरम पर रहते हुए राजनीति में कदम रखा। यही वजह है कि NDA इस बार चुनावी रणनीति में उनके योगदान को अहम मान रही है। NDA के लिए यह गठबंधन न सिर्फ चुनावी ताकत बढ़ाने का मौका है, बल्कि राज्य में सत्तारूढ़ DMK-कांग्रेस गठबंधन को चुनौती देने का भी प्रमुख हथियार बन सकता है।

    तमिलनाडु चुनाव में विजय की दिशा तय नहीं
    एक्टर विजय और उनकी पार्टी TVK ने स्पष्ट किया है कि वे DMK और BJP दोनों से समान दूरी बनाकर चलेंगे। हालांकि, AIADMK के कुछ नेता उनके साथ गठबंधन को लेकर बैकडोर बातचीत में लगे हुए हैं। इस बीच राजनीतिक हलकों में यह अटकलें भी लग रही हैं कि अगर TVK और AIADMK के बीच समझौता होता है, तो BJP की स्थिति क्या होगी। तमिलनाडु में यह भी चर्चा है कि विजय की फिल्म जन नायक को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिलने और करूर भगड़ग मामले में CBI से पूछताछ को भाजपा की साजिश के रूप में पेश किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में विजय और उनकी पार्टी की दिशा NDA और DMK-कांग्रेस गठबंधन दोनों के लिए अहम हो सकती है।

    स्टालिन सरकार के खिलाफ गुस्से को भुनाने की रणनीति
    BJP का मानना है कि लॉ एंड आर्डर और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर तमिलनाडु में लोगों के मन में स्टालिन सरकार के खिलाफ नाराजगी है, जिससे उनके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण पार्टी ने अपने सबसे बड़े ट्रम्प कार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी कैंपेन की शुरूआत के लिए बुलाने का फैसला किया है। 23 जनवरी को PM मोदी मदुरान्दगम में विशाल जनसभा के साथ NDA अभियान की शुरुआत करेंगे, ताकि उनकी लोकप्रियता का लाभ पार्टी को मिल सके। विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह पीएम मोदी ने चुनाव से चार महीने पहले ही दौरा शुरू करने वाले हैं उससे लगता है कि आने वाले दिनों में उनके कई दौरे तमिलनाडु में होने की संभावना है।

  • कोहरे में सुरक्षित सफर के लिए 'लाइफ-सेविंग' टिप्स

    कोहरे में सुरक्षित सफर के लिए 'लाइफ-सेविंग' टिप्स


    नई दिल्ली ।सुनने की शक्ति का करें इस्तेमाल जब कोहरा इतना घना हो कि आँखें जवाब दे जाएं, तो अपने कान खोलें। अपनी गाड़ी का म्यूजिक सिस्टम बंद कर दें और खिड़कियों के शीशे थोड़े नीचे गिरा दें। इससे आपको दूसरी गाड़ियों के हॉर्न, सायरन या इंजन की आवाजें साफ सुनाई देंगी। विशेषकर चौराहों और मोड़ पर यह तकनीक आपको किसी भी अनचाही टक्कर से बचा सकती है। लो-बीम लाइट और फॉग लैम्प्स का प्रयोग अक्सर लोग गलती करते हैं कि कोहरे में हेडलाइट को ‘हाई-बीम’ पर कर देते हैं। हाई-बीम की रोशनी कोहरे की बूंदों से टकराकर परावर्तित (Reflect) होती है, जिससे सामने कुछ भी दिखना बंद हो जाता है। हमेशा लो-बीम का उपयोग करें और अपनी गाड़ी के फॉग लैम्प्स जलाकर रखें।

    पार्किंग लाइट और इंडिकेटर का सही उपयोग कोहरे में गाड़ी चलाते समय चारों इंडिकेटर जलाकर न चलें, क्योंकि इससे पीछे वाले ड्राइवर को यह समझ नहीं आता कि आप मुड़ने वाले हैं या खड़े हैं। इंडिकेटर का इस्तेमाल केवल मुड़ने के लिए करें। यदि कोहरा बहुत ज्यादा है, तो सड़क के किनारे सफेद पट्टी को गाइड मानकर चलें।रफ्तार पर नियंत्रण और सुरक्षित दूरी कोहरे में रफ्तार का रोमांच जानलेवा हो सकता है। अपनी गति कम रखें और आगे चल रही गाड़ी से सामान्य से दोगुनी दूरी बनाए रखें। अचानक ब्रेक लगाने से बचें, क्योंकि गीली सड़क और कोहरे के कारण टायर फिसल सकते हैं और पीछे वाली गाड़ी आपसे टकरा सकती है। डिफॉगर का करें इस्तेमाल सर्दियों में गाड़ी के अंदर और बाहर के तापमान में अंतर होने के कारण शीशों पर धुंध जम जाती है। गाड़ी के डिफॉगर को चालू रखें ताकि विंडशील्ड साफ रहे। यदि डिफॉगर नहीं है, तो एसी चलाकर हवा को शीशों की तरफ मोड़ दें।

    अगर गाड़ी खराब हो जाए या रुकना पड़े

    यदि कोहरा इतना ज्यादा है कि आगे बढ़ना संभव नहीं है, तो गाड़ी को सड़क से काफी दूर सुरक्षित स्थान पर खड़ा करें। अपनी हजार्ड लाइट्स चालू कर दें ताकि दूसरों को आपकी मौजूदगी का पता चल सके। सड़क के बिल्कुल किनारे गाड़ी खड़ी करना खतरनाक हो सकता है।

  • दिल की बात कहने के कुछ 'स्मार्ट' और रोमांटिक तरीके

    दिल की बात कहने के कुछ 'स्मार्ट' और रोमांटिक तरीके


    नई दिल्ली ।संकेतों और बॉडी लैंग्वेज का सहारा लें सीधे आई लव यू’ कहने से पहले अपनी हरकतों से उन्हें अहसास दिलाएं। उनकी छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना, उनकी पसंद-नापसंद को याद रखना और मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहना यह जता देता है कि वो आपके लिए कितने खास हैं। कई बार बिना कहे भी बहुत कुछ कह दिया जाता है।

    लिखावट का जादू आज के डिजिटल दौर में हाथ से लिखा हुआ एक छोटा सा नोट या लेटर किसी भी महंगे गिफ्ट से ज्यादा कीमती होता है। अगर आप बोलने में हिचकिचा रहे हैं, तो अपनी भावनाओं को कागज पर उतारें। एक प्यारा सा कार्ड या छोटा सा मैसेज उनके डेस्क या किताब में छोड़ देना एक बेहद ‘क्यूट’ तरीका हो सकता है।एक यादगार ‘डेट’ प्लान करें जरूरी नहीं कि वह कोई फाइव स्टार होटल हो। किसी शांत जगह पर वॉक, उनकी पसंदीदा जगह पर कॉफी या सूर्यास्त देखते हुए दिल की बात कहना माहौल को रोमांटिक बना देता है। जब माहौल खुशनुमा होता है, तो सामने वाले का जवाब सकारात्मक होने की संभावना बढ़ जाती है।

    दोस्तों की मदद लें, लेकिन संभलकर अगर आप बहुत ज्यादा शर्मीले हैं, तो अपने किसी भरोसेमंद कॉमन फ्रेंड की मदद ले सकते हैं। वे बातों-बातों में यह जान सकते हैं कि सामने वाले के मन में आपके लिए क्या चल रहा है। लेकिन ध्यान रहे, इज़हार आपको खुद ही करना चाहिए क्योंकि आपकी आँखों की सच्चाई कोई और बयां नहीं कर सकता। क्रिएटिविटी दिखाएं अगर आप संगीत, पेंटिंग या कुकिंग के शौकीन हैं, तो अपनी कला का इस्तेमाल करें। उनके लिए कोई गाना गाना या उनकी पसंद का खाना बनाकर ‘सरप्राइज’ देना आपके प्यार की गहराई को दर्शाता है।

    इन बातों का रखें खास ख्याल

    जल्दबाजी न करें: इज़हार करने से पहले यह पक्का कर लें कि आप दोनों के बीच एक अच्छी समझ बन चुकी है। प्राइवेसी का सम्मान: सबके सामने इज़हार करने से बचें, इससे सामने वाला दबाव महसूस कर सकता है। एकांत में बात करना हमेशा बेहतर होता है। परिणाम के लिए तैयार रहें: प्यार में ‘हाँ’ और ‘ना’ दोनों की गुंजाइश होती है। अगर जवाब आपकी उम्मीद के मुताबिक न हो, तब भी सामने वाले की पसंद का सम्मान करें और गरिमा बनाए रखें।

  • मुंबई में बीजेपी के मेयर के लिए तैयार हो गए एकनाथ शिंदे? बोले- 'महायुति को मिले जनादेश का…'

    मुंबई में बीजेपी के मेयर के लिए तैयार हो गए एकनाथ शिंदे? बोले- 'महायुति को मिले जनादेश का…'


    नई दिल्ली।बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनावों के नतीजों के बाद मुंबई में महापौर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना बीएमसी में बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति को मिले जनादेश का पूरा सम्मान करेगी।

    हालांकि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर उछली कि शिवसेना के 29 निर्वाचित पार्षदों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दरअसल हाल ही में हुए चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मामूली बहुमत मिला और इसी के चलते इन नवनिर्वाचित पार्षदों को अस्थायी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए होटल में रखा गया था।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम किसी षड्यंत्र या नाटकीयता के बजाय पार्षदों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए उठाया गया था। इस बीच महापौर पद की सीट को लेकर चर्चा और चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और सभी की नजरें अब शिवसेना और बीजेपी के आगामी सामंजस्य पर टिकी हुई हैं।

    शिंदे ने अभी तक बीजेपी नेतृत्व से महापौर पद पर चर्चा नहीं कीबीएमसी महापौर पद को लेकर जारी अटकलों में कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे कम से कम पहले ढाई साल के लिए शिवसेना को यह पद दिलाना चाहते हैं खासकर इस साल दिवंगत बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी का वर्ष होने के कारण।हालांकि शिवसेना सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि शिंदे जानते हैं कि इस बार पार्टी को महापौर पद नहीं मिलेगा और इस मुद्दे पर उन्होंने बीजेपी नेतृत्व से अब तक कोई बातचीत नहीं की है। इसके बावजूद शिंदे यह संदेश देने से भी बच रहे हैं कि उन्होंने पीछे हटने का मन बना लिया है। उनके इस कदम से राजनीतिक हलचल और भी तेज हो गई है और सभी की नजरें अब आगामी रणनीति पर टिक गई हैं।
    महत्वपूर्ण समितियों में शिवसेना को मिलेगी हिस्सेदारी

    डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी ने कहा कि शिवसैनिक चाहते हैं कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर पार्टी का अपना महापौर हो। हालांकि शिंदे भी जानते हैं कि बीजेपी इस मांग को स्वीकार नहीं करेगी फिर भी उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा में लाने में कोई हर्ज नहीं समझा।साथ ही शिंदे यह संदेश देने से बच रहे हैं कि वह पीछे हट गए हैं। उनके मुताबिक पार्टी को कम से कम महत्वपूर्ण समितियों में हिस्सेदारी तो मिलेगी जिससे शिवसेना के निर्वाचित नेताओं की उपस्थिति और प्रभाव बरकरार रहे। इस कदम से राजनीतिक रणनीति और दबाव दोनों बनाए रखने का प्रयास नजर आता है।

    शिंदे का स्पष्ट संदेश: जनादेश का उल्लंघन नहीं होगा

    शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि मुंबई में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मिले जनादेश का उल्लंघन करने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि 29 निर्वाचित शिवसेना पार्षदों को होटल में शिफ्ट करने की चर्चा बेवजह फैलाई जा रही है और इसका उद्देश्य किसी तरह का पाला बदलने से रोकना नहीं है।सूत्रों के अनुसार यह कदम नव निर्वाचित पार्षदों के लिए एक ट्रेनिंग वर्कशॉप का हिस्सा है। शिंदे इस मौके का इस्तेमाल पार्षदों से परिचित होने और उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए कर रहे हैं कि पार्टी उनसे क्या अपेक्षा करती है ताकि आगामी जिम्मेदारियों और महापौर पद के कामकाज को समझा जा सके।