Author: bharati

  • मार्कफेड के कायाकल्प की तैयारी 10.80 लाख मीट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य डिजिटल मैपिंग पर फोकस

    मार्कफेड के कायाकल्प की तैयारी 10.80 लाख मीट्रिक टन खाद वितरण का लक्ष्य डिजिटल मैपिंग पर फोकस

    भोपाल । भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मार्कफेड की कार्यप्रणाली और गतिविधियों की गहन समीक्षा करते हुए इसे आत्मनिर्भर आधुनिक और व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया बैठक में उर्वरक वितरण व्यवस्था वित्तीय प्रबंधन परिसंपत्तियों के उपयोग और संगठनात्मक विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे लक्ष्य आधारित कार्य करते हुए किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें

    मंत्री ने विशेष रूप से कहा कि किसानों को स्थानीय स्तर पर उर्वरक की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए इसके लिए भंडारण और वितरण की पूरी व्यवस्था मजबूत की जाए बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष 10.80 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों के भंडारण का लक्ष्य रखा गया है जिसमें से 23 मार्च तक 6.70 लाख मीट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है मंत्री ने निर्देश दिए कि शेष लक्ष्य को समय पर पूरा करते हुए किसानों तक खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए

    वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी मंत्री ने गंभीरता दिखाई उन्होंने बैंकों से लिए गए ऋण और लंबित बकाया की शीघ्र वसूली के निर्देश दिए ताकि उर्वरक कंपनियों को भुगतान में कोई बाधा न आए उन्होंने कहा कि संस्था की वित्तीय मजबूती सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है

    परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए मंत्री ने सभी अचल संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग कर उनका विवरण संपदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए साथ ही इन संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया बैठक में भोपाल जबलपुर ग्वालियर सहित अन्य स्थानों पर बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को पुनः प्रारंभ करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई उज्जैन स्थित पेट्रोल पंप को तत्काल शुरू करने और प्रमुख स्थानों पर नए व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तथा पेट्रोल पंप स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए

    इसके अलावा ईईसी और एनसीडीसी योजना के अंतर्गत पुराने गोदामों के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देने और संघ के 316 गोदामों जिनकी क्षमता 7.84 लाख मीट्रिक टन है उनका शत प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया मंत्री ने कहा कि इससे न केवल भंडारण क्षमता बढ़ेगी बल्कि वितरण व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होगी

    मार्कफेड के समग्र सुधार के लिए गठित विशेष अनुसंधान समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए साथ ही को ऑपरेशन एमंग को ऑपरेटिव्स के सिद्धांत पर कार्य करते हुए कृषि विपणन आंदोलन को और मजबूत बनाने पर बल दिया गया मंत्री सारंग ने स्पष्ट किया कि मार्कफेड को राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाया जाएगा और वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक संस्था की स्थिति का सटीक आकलन भी पूरा कर लिया जाएगा

    यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार किसानों को बेहतर सुविधाएं देने और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है जिससे प्रदेश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा मिल सके

  • श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घाट निर्माण कार्यों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश

    श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घाट निर्माण कार्यों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर सरकार ने अब जमीनी स्तर पर काम तेज कर दिया है इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन पहुंचकर क्षिप्रा नदी पर निर्माणाधीन घाटों का निरीक्षण किया और स्पष्ट रूप से कहा कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखी जाएगी उनका यह दौरा न केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए था बल्कि अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने का संदेश भी था

    मुख्यमंत्री ने श्री अंगारेश्वर और श्री सिद्धवट के मध्य बन रहे नए घाटों का अवलोकन करते हुए वहां की व्यवस्थाओं को विस्तार से परखा उन्होंने निर्देश दिए कि घाटों के लगभग 200 मीटर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने की समुचित व्यवस्था की जाए साथ ही सुविधाजनक स्थानों पर स्वच्छ और पर्याप्त संख्या में टॉयलेट भी बनाए जाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने प्रमुख घाटों पर हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर विकसित करने के निर्देश दिए जिससे स्नान करने आए श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें उन्होंने यह भी कहा कि घाटों तक पहुंचने के रास्ते सुगम और सुरक्षित होने चाहिए इसके लिए लगभग 500 मीटर की दूरी पर सीढ़ियों या अन्य पहुंच मार्गों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए ताकि श्रद्धालु आसानी से मुख्य घाटों तक पहुंच सकें

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के बीच निर्माणाधीन पुल का भी जायजा लिया अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इस पुल के बन जाने से दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन और अधिक सुगम हो जाएगा और श्रद्धालुओं को एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध होगा इससे भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी और आवागमन व्यवस्थित रहेगा

    घाटों के निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्नान के लिए लगभग 5 मीटर चौड़े घाट तैयार किए जाएं जिससे श्रद्धालुओं के आने जाने के साथ बैठने की भी पर्याप्त सुविधा मिल सके उन्होंने घाटों पर बैठने की व्यवस्था छायादार स्थान और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के भी निर्देश दिए

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का यह निरीक्षण यह दर्शाता है कि सरकार सिंहस्थ 2028 को लेकर पूरी तरह गंभीर है और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने वाली साबित होगी

  • गुजरात का ‘बनास बायो-सीएनजी’ मॉडल बन रहा कचरे से कंचन और ग्रामीण समृद्धि का राष्ट्रीय मानक

    गुजरात का ‘बनास बायो-सीएनजी’ मॉडल बन रहा कचरे से कंचन और ग्रामीण समृद्धि का राष्ट्रीय मानक


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’, आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा के विज़न को जमीन पर उतारते हुए गुजरात का बनास बायो-सीएनजी प्लांट मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में विकसित इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय और केंद्रीय सहकारिता विभाग के संयुक्त प्रयासों से देश के लगभग 15 राज्य अपने यहां लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बनास डेयरी द्वारा विकसित यह मॉडल गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा और जैविक उर्वरक में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है।

    गुजरात सरकार ने इस अभिनव पहल की संभावनाओं को देखते हुए बायो-सीएनजी क्षेत्र को बजटीय प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों द्वारा नए प्लांट स्थापित करने के लिए 60 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया गया है। राज्य में चरणबद्ध तरीके से लगभग 10 बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है। बनासकांठा में 40 मीट्रिक टन प्रतिदिन गोबर प्रसंस्करण क्षमता वाला प्लांट पिछले 6 वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और इसकी सफलता से प्रेरित होकर 5 और विशाल प्लांट शुरू करने की योजना बन रही है।

    ग्रामिण रोजगार, ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण सुरक्षा का त्रिकोणीय मॉडल
    हर प्लांट प्रतिदिन लगभग 1 लाख किलो गोबर को वैज्ञानिक पद्धति से प्रोसेस करता है। 50-55 करोड़ रुपए की निवेश लागत से निर्मित यह संयंत्र यह दिखाता है कि इकोलॉजी और इकोनॉमी साथ-साथ चल सकती हैं। बनासकांठा के 20-25 गांवों के लगभग 400-450 पशुपालक परिवार नियमित रूप से गोबर आपूर्ति करते हैं और 1 रुपए प्रति किलो के हिसाब से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। गोबर संग्रहण और परिवहन के लिए लगभग 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली उपयोग में लाई जा रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।

    इस बहु-उत्पाद आधारित मॉडल में प्रतिदिन लगभग 1,800 किलोग्राम सीएनजी, 25 मीट्रिक टन ठोस जैविक उर्वरक और 75 मीट्रिक टन तरल जैविक उर्वरक का उत्पादन होता है। इन उत्पादों से प्रतिदिन लगभग 3 लाख रुपए का राजस्व अर्जित होता है, जो वार्षिक रूप से लगभग 12 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। इसके अलावा यह संयंत्र प्रतिवर्ष लगभग 6,750 टन CO2 उत्सर्जन कम करने में सक्षम है, जिससे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ गुजरात की भागीदारी स्पष्ट होती है।

    बनास बायो-सीएनजी मॉडल यह सिद्ध करता है कि स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का त्रिकोणीय संगम ग्रामीण समृद्धि और पर्यावरण सुरक्षा में कैसे क्रांति ला सकता है। ‘ग्रीन बनासकांठा’ से प्रेरित यह मॉडल अब ‘ग्रीन गुजरात’ की दिशा में पूरे देश के लिए एक नया राष्ट्रीय मानक बन चुका है।

  • राज्यपाल मंगुभाई पटेल से वित्त आयोग अध्यक्ष पवैया की मुलाकात प्रदेश विकास में सक्रिय भूमिका पर जोर

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल से वित्त आयोग अध्यक्ष पवैया की मुलाकात प्रदेश विकास में सक्रिय भूमिका पर जोर


    भोपाल । भोपाल स्थित राजभवन में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण औपचारिक मुलाकात देखने को मिली जब राज्यपाल मंगुभाई पटेल से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने सौजन्य भेंट की इस दौरान आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने राज्य वित्त आयोग का कार्यभार ग्रहण करने की जानकारी राज्यपाल को दी और आगामी कार्ययोजना को लेकर चर्चा की

    ज्ञात हो कि 23 मार्च 2026 को जयभान सिंह पवैया ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था उनके साथ आयोग के सदस्य के के सिंह और सदस्य सचिव वीरेन्द्र कुमार ने भी अपने अपने दायित्व ग्रहण किए हैं इस नई जिम्मेदारी के साथ आयोग अब राज्य के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में कार्य करेगा

    मुलाकात के दौरान राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने वित्त आयोग की भूमिका कार्यप्रणाली और विभिन्न गतिविधियों को लेकर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया उन्होंने कहा कि राज्य वित्त आयोग प्रदेश के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी है और इसे अपने उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करते हुए वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए

    राज्यपाल ने यह भी अपेक्षा जताई कि आयोग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ करेगा जिससे प्रदेश के विकास को नई दिशा मिल सके उन्होंने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सौंपे गए दायित्वों का निष्ठा के साथ पालन करना ही राज्य और देश की सच्ची सेवा है

    इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने राज्यपाल को आश्वस्त किया कि आयोग को दिए गए सभी दायित्वों का निर्वहन पूरी प्रतिबद्धता के साथ किया जाएगा उन्होंने कहा कि आयोग राज्य के विकास में अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पूरी तरह तत्पर है और वित्तीय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य करेगा

    यह मुलाकात केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि राज्य के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श का एक सशक्त मंच भी रही जिसमें भविष्य की योजनाओं और प्राथमिकताओं को लेकर सकारात्मक संकेत मिले अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य वित्त आयोग अपने कार्यों के माध्यम से प्रदेश के आर्थिक और विकासात्मक लक्ष्यों को किस प्रकार गति प्रदान करता है

  • भारत की क्रिटिकल मिनरल्स खोज, स्टार्टअप माइनिंग को बढ़ावा, आयात निर्भरता कम करने पर जोर: डॉ. जितेंद्र सिंह

    भारत की क्रिटिकल मिनरल्स खोज, स्टार्टअप माइनिंग को बढ़ावा, आयात निर्भरता कम करने पर जोर: डॉ. जितेंद्र सिंह


    नई दिल्ली। केंद्रीय सरकार अब क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की खोज को तेजी से बढ़ाने और माइनिंग सेक्टर में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को दी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश में मजबूत घरेलू सप्लाई चेन तैयार करने में भी मदद करेगा। एनएमईटी (राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण और विकास ट्रस्ट) की बैठक में बोलते हुए मंत्री ने लिथियम जैसे खनिजों पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये खनिज नई तकनीकों और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम हैं।

    मंत्री ने बताया कि भारत अब स्टार्टअप-आधारित माइनिंग इकोसिस्टम तैयार करने और घरेलू वैल्यू चेन मजबूत करने पर काम कर रहा है। राजस्थान के सिवाना क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के सलाल-हैमना ब्लॉक में चल रहे प्रोजेक्ट इसका उदाहरण हैं, जिन्हें और क्षेत्रों में विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को माइनिंग सेक्टर में आने के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है। बायोटेक स्टार्टअप्स की सफलता को उदाहरण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इसी तरह संस्थागत समर्थन और प्रोत्साहन से माइनिंग सेक्टर में भी नई तकनीकों और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकार निजी एक्सप्लोरेशन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने, प्रोजेक्ट्स में देरी कम करने और मंजूरी प्रक्रिया सरल बनाने के उपाय कर रही है। खासकर वन (फॉरेस्ट) क्लियरेंस जैसी बाधाओं को दूर करना इस दिशा में प्राथमिकता है। मंत्री ने बताया कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल से काम की गति बढ़ाई जा सकती है। तेज मंजूरी, समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लीयरेंस और बेहतर खरीद प्रणाली से खनिज खोज की प्रक्रिया और तेजी से आगे बढ़ेगी।

    डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पूरी घरेलू सप्लाई चेन विकसित करना जरूरी है, जिसमें प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी शामिल हैं। उनका मानना है कि इस पहल से भारत खुद अपनी खनिज जरूरतों में आत्मनिर्भर बन सकता है और साथ ही वैश्विक मांग के अनुरूप रणनीतिक रूप से अपनी खोज गतिविधियों को ढाल सकता है।

  • RCB vs SRH में 549 रन का धमाका, 38 छक्के और 43 चौके, IPL का रोमांचक मुकाबला

    RCB vs SRH में 549 रन का धमाका, 38 छक्के और 43 चौके, IPL का रोमांचक मुकाबला


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 की शुरुआत भले ही 28 मार्च को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के मुकाबले से होगी, लेकिन क्रिकेट प्रेमियों के लिए 15 अप्रैल 2024 का वह मैच हमेशा यादगार रहेगा। इस दिन आरसीबी और एसआरएच ने कुल मिलाकर 549 रन बनाए, जिसमें 38 छक्के और 43 चौके शामिल थे। यह आईपीएल इतिहास में एक ही मैच में दोनों टीमों का सबसे बड़ा स्कोर रिकॉर्ड बन गया। विशेष रूप से, एसआरएच ने 287/3 रन बनाकर किसी टीम का आईपीएल में अब तक का सबसे बड़ा स्कोर दर्ज किया।

    एसआरएच की धमाकेदार पारी और हेड की शतक जैसी पारी
    बेंगलुरु के मैदान पर पहले बल्लेबाजी करते हुए सनराइजर्स हैदराबाद ने सिर्फ 3 विकेट गंवाकर 287 रन का विशाल स्कोर बनाया। सलामी जोड़ी अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड ने 8.1 ओवर में 108 रन जोड़कर शानदार शुरुआत दी। अभिषेक शर्मा 22 गेंदों में 34 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन ट्रेविस हेड ने हेनरिक क्लासेन के साथ 26 गेंदों में 57 रन की साझेदारी कर टीम को ऊंचा स्कोर दिलाया। हेड ने अपनी 41 गेंदों की पारी में 8 छक्के और 9 चौके जड़ते हुए 102 रन बनाए।

    इसके बाद क्लासेन ने एडेन मार्करम के साथ तीसरे विकेट के लिए 66 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। क्लासेन ने सिर्फ 31 गेंदों में 7 छक्के और 2 चौकों की मदद से 67 रन बनाए। अंत में मार्करम (नाबाद 32) और अब्दुल समद (नाबाद 37) ने चौथे विकेट के लिए 56 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम का स्कोर 287 तक पहुंचाया। लॉकी फर्ग्यूसन ने सर्वाधिक 2 विकेट लिए, जबकि रीस टॉपले ने 1 विकेट हासिल किया।

    आरसीबी की चुनौती और कार्तिक की वीरता
    आरसीबी ने निर्धारित ओवरों में 7 विकेट खोकर 262 रन ही बना सके। सलामी बल्लेबाज विराट कोहली और कप्तान फाफ डुप्लेसिस ने 6.2 ओवर में 80 रन जोड़कर टीम को शानदार शुरुआत दी। कोहली ने 20 गेंदों में 42 रन बनाए, जिसमें 2 छक्के और 6 चौके शामिल थे। इसके बाद विकेटों का पतझड़ लग गया और आरसीबी ने 122 रन तक 5 विकेट गंवा दिए। फाफ डुप्लेसिस ने 62 रन बनाकर पवेलियन लौटे।

    दिनेश कार्तिक ने 35 गेंदों में 7 छक्के और 5 चौकों की मदद से 83 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन जीत नहीं दिला सके। पैट कमिंस ने एसआरएच के लिए सर्वाधिक 3 विकेट लिए, मयंक मार्कंडे ने 2 और टी नटराजन ने 1 विकेट हासिल किया। इस तरह, यह मुकाबला सिर्फ 549 रन और 81 छक्कों–चौकों का रिकॉर्ड ही नहीं बना, बल्कि आईपीएल के इतिहास में सबसे रोमांचक बल्लेबाजी महायुद्ध के रूप में दर्ज हुआ।

  • सिलाव की मंजुला ने 'PMFME' योजना से खड़ा किया 10 लाख का मसाला उद्योग, 30 से अधिक को रोजगार

    सिलाव की मंजुला ने 'PMFME' योजना से खड़ा किया 10 लाख का मसाला उद्योग, 30 से अधिक को रोजगार


    नई दिल्ली। बिहार के सिलाव प्रखंड के सरीचक गांव की मंजुला कुमारी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से महिलाओं के लिए स्वावलंबन की नई कहानी लिखी है। कभी छोटे स्तर पर हल्दी पीसकर लोकल मार्केट में बेचने वाली मंजुला ने अब ‘पीएमएफएमई’ (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन) योजना की मदद से 10 लाख रुपए की लागत से सरीचक एंटरप्राइजेज नामक मसाला उद्योग स्थापित किया है। इस उद्योग के माध्यम से उन्होंने 30 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है और इलाके के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। मंजुला ने बाजार में उपलब्ध मसालों से अलग शुद्धता और गुणवत्ता पर खास जोर दिया है। उनकी यूनिट में हल्दी, मिर्च, धनिया और गरम मसाले पीसने के लिए अलग-अलग मशीनें लगी हैं, ताकि ग्राहकों को 100 प्रतिशत शुद्ध मसाले मिल सकें।

    मंजुला कुमारी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वह पहले से ही हल्दी का छोटा व्यवसाय करती थीं, लेकिन बढ़ती मांग पूरी करना मुश्किल था। इसी बीच, जीविका कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। मंजुला ने बड़े स्तर पर व्यवसाय शुरू करने की सोच से आवेदन किया और बड़गांव के केनरा बैंक से 7.21 लाख रुपये का लोन प्राप्त किया। अपनी जमा पूंजी के साथ उन्होंने कुल 10 लाख रुपए से अपनी यूनिट लगाई। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग एक ही मशीन में सारे मसाले पीसते हैं, लेकिन उनकी हल्दी मशीन पूरी तरह अलग है। इसके अलावा उनके पास जीरा, धनिया, मिर्च, गोलकी और विभिन्न गरम व सब्जी मसाले तैयार करने की सुविधाएं हैं।

    शुरुआत में माल बेचने की कठिनाइयों को मंजुला ने स्मार्ट रणनीति से हल किया। हर गांव में उनका स्टाफ (जीविका से जुड़ी महिलाएं) मांग लेकर सप्लाई करती हैं। वर्तमान में 30 लोग डिस्ट्रीब्यूशन में और 3 लोग पिसाई व पैकेजिंग में काम कर रहे हैं। आज उनके मसाले सिलाव प्रखंड के स्कूलों, राजगीर के बड़े होटलों और हाल ही में खुले मॉल तक सप्लाई हो रहे हैं। इस सफलता पर मंजुला कुमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष प्रशंसक बन गई हैं और योजना के तहत उन्हें लगभग ढाई लाख रुपये की अनुदान राशि भी मिली। उनका सपना है कि जीवन में कम से कम एक बार प्रधानमंत्री से मुलाकात हो।

  • मुरैना में अवैध रेत खनन पर बड़ा एक्शन रास्ता बंद कर माफिया पर कसा शिकंजा

    मुरैना में अवैध रेत खनन पर बड़ा एक्शन रास्ता बंद कर माफिया पर कसा शिकंजा


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खनन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है टेंटरा थाना क्षेत्र स्थित चंबल नदी के रायडी घाट पर लंबे समय से चल रहे अवैध खनन और परिवहन के मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया इस वीडियो में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्रालियों के माध्यम से खुलेआम रेत का खनन और परिवहन होता हुआ दिखाई दिया

    स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बनाए गए इस वीडियो को न केवल सोशल मीडिया पर साझा किया गया बल्कि संबंधित अधिकारियों तक भी पहुंचाया गया जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू की गई जानकारी के अनुसार प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर अवैध खनन के रास्तों को अवरुद्ध कर दिया ताकि रेत माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके

    बताया जा रहा है कि रायडी घाट क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन का कारोबार फल फूल रहा था और इसमें बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्रालियां लगी हुई थीं रात के समय विशेष रूप से यह गतिविधियां तेज हो जाती थीं जिससे न केवल राजस्व को नुकसान हो रहा था बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा था चंबल नदी का पारिस्थितिक संतुलन लगातार प्रभावित हो रहा था और नदी तटों का क्षरण भी तेजी से बढ़ रहा था

    प्रशासन की इस कार्रवाई के तहत खनन में उपयोग किए जा रहे रास्तों को बंद कर दिया गया है जिससे अवैध परिवहन को रोका जा सके साथ ही संबंधित विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लगातार निगरानी रखें और इस तरह की गतिविधियों पर सख्त नजर बनाए रखें अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी

    इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और रेत माफिया के बीच भय का माहौल देखने को मिल रहा है वहीं स्थानीय लोगों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत किया है उनका कहना है कि लंबे समय से इस अवैध गतिविधि के खिलाफ शिकायतें की जा रही थीं लेकिन अब जाकर ठोस कार्रवाई हुई है

    यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जब जनभागीदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति एक साथ आती है तो अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस कार्रवाई को कितनी निरंतरता के साथ आगे बढ़ाता है और भविष्य में ऐसे मामलों को पूरी तरह समाप्त करने में कितना सफल होता है

  • एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन फ्लाइट तकनीकी खराबी के कारण वापस लौटी, सभी यात्री सुरक्षित

    एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन फ्लाइट तकनीकी खराबी के कारण वापस लौटी, सभी यात्री सुरक्षित


    नई दिल्ली। एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन हीथ्रो जाने वाली फ्लाइट एआई111 गुरुवार दोपहर तकनीकी खराबी के शक के चलते बीच रास्ते में वापस दिल्ली लौट गई। यह उड़ान सुबह करीब 6 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी और लगभग 7 घंटे हवा में रहने के बाद दोपहर 12:30 बजे सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी। एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और विमान को लौटाने का निर्णय केवल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

    तकनीकी खराबी का संदेह, यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिक

    एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि उड़ान के दौरान तकनीकी समस्या का संदेह होने पर एहतियातन विमान को वापस बुलाया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यात्रियों की सुरक्षा एयरलाइन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विमान ने सभी मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए सुरक्षित लैंडिंग की। प्रवक्ता ने बताया कि विमान की विस्तृत तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है, जो कुछ समय ले सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की उड़ानों के लिए निर्णय लिया जाएगा।

    एयरलाइन ने जताया खेद, तुरंत किए जा रहे हैं इंतजाम

    एयर इंडिया ने कहा कि इस घटना से यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद है और प्रभावित यात्रियों को जल्द से जल्द लंदन पहुंचाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। तकनीकी खराबी की असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी। एयरलाइन ने यात्रियों को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा और तकनीकी निरीक्षण को और मजबूत किया जा रहा है।

    पहले भी हुई फ्लाइट की वापसी

    यह घटना पिछले हफ्ते हुई दिल्ली-वैंकूवर फ्लाइट (एआई185) की वापसी की याद ताजा कर रही है। उस फ्लाइट को 9 घंटे बाद वापस लौटना पड़ा, क्योंकि उस रूट पर तैनात बोइंग 777-200एलआर विमान को कनाडा के एविएशन रेगुलेटर से उड़ान भरने की अनुमति नहीं थी। एयर इंडिया के पास उस मार्ग पर केवल बोइंग 777-300ईआर विमानों के लिए अनुमति थी।

    एयर इंडिया का सुरक्षा फोकस

    हाल के दोनों घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि एयर इंडिया यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। चाहे तकनीकी खराबी हो या उड़ान अनुमति का मामला, एयरलाइन हमेशा एहतियात और सावधानी बरतती है। विशेषज्ञों का कहना है कि विमान को लौटाना कोई असामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

    एयर इंडिया की दिल्ली-लंदन फ्लाइट एआई111 तकनीकी खराबी के शक में वापस दिल्ली लौट गई।
    विमान लगभग 7 घंटे हवा में रहने के बाद सुरक्षित उतरा।
    सभी यात्री सुरक्षित हैं, एयरलाइन ने असुविधा के लिए खेद जताया।
    विमान की विस्तृत तकनीकी जांच जारी है, असली वजह अभी तय नहीं हुई।
    इससे पहले, दिल्ली-वैंकूवर फ्लाइट एआई185 भी अनुमति और तकनीकी कारणों से वापस लौट चुकी है।
    एयर इंडिया का सुरक्षा और सावधानी पर विशेष ध्यान, यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता।

    एयर इंडिया की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि सुरक्षा के लिए किसी भी जोखिम को स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे इससे उड़ान में देरी या असुविधा ही क्यों न हो। यात्रियों के लिए यह भरोसा है कि उनकी सुरक्षा एयरलाइन की प्राथमिकता है और तकनीकी समस्याओं के मामलों में तुरंत सुरक्षित निर्णय लिया जाएगा।

  • PM मोदी कल राज्यों के मुख्यमंत्रियों से करेंगे चर्चा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर होगी समीक्षा

    PM मोदी कल राज्यों के मुख्यमंत्रियों से करेंगे चर्चा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर होगी समीक्षा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 27 मार्च को राज्यों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में विशेष रूप से ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण और ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करने के कदमों पर ध्यान दिया जाएगा। चर्चा का उद्देश्य देश की एकता बनाए रखना और चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करने के लिए राज्यों और केंद्र के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।

    पर्याप्‍त मात्रा में ईंधन स्टॉक

    भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में लगभग दो महीने के पर्याप्त तेल और ईंधन का भंडार मौजूद है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों में न आएं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। पीआईबी की 26 मार्च, 2026 की विज्ञप्ति में बताया गया कि तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने आयात की अग्रिम व्यवस्था कर ली है, जिससे देश में किसी भी तरह की आपूर्ति समस्या नहीं होगी।

    सरकार ने बुलाई थी सर्वदलीय बैठक

    सरकार ने मिडिल ईस्ट के हालात पर गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में विपक्ष को सूचित किया गया कि पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चार भारतीय जहाज सुरक्षित निकले हैं। सरकार ने कहा कि पैनिक की कोई जरूरत नहीं है और विपक्ष किसी भी समय जानकारी के लिए संपर्क कर सकता है।