Author: bharati

  • भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने और निवेशकों का जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बढ़ने के कारण शुक्रवार को कीमती धातुओं के बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे, जिससे बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हुई तेज बिकवाली ने सोना-चांदी की कीमतों को महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे पहुंचा दिया है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की कीमतों में कारोबार की शुरुआत से ही कमजोरी का रुख दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में सोना दो प्रतिशत से अधिक टूट गया और दिन के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में मध्य पूर्व समेत कई क्षेत्रों में तनाव कम होने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला है।

    चांदी के बाजार में भी भारी दबाव बना रहा। कारोबार के दौरान चांदी में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह दिन के निचले स्तरों तक पहुंच गई। विश्लेषकों का मानना है कि चांदी पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर हुई है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में सोना और चांदी दोनों कमजोर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर अधिक केंद्रित हो गया है। इससे कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण फिलहाल कुछ कम हुआ है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को काफी हद तक मुनाफावसूली का परिणाम भी माना जा रहा है। उनका कहना है कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव, महंगाई को लेकर आशंकाएं, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने निवेशकों की रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, लीवरेज्ड ट्रेडिंग पोजीशन के कम होने से भी बाजार में बिकवाली बढ़ी है।

    हालांकि विशेषज्ञ इस गिरावट को दीर्घकालिक दृष्टि से पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानते। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितताएं अभी भी सोने के पक्ष में मजबूत आधार प्रदान करती हैं। यही कारण है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमती धातुएं अब भी आकर्षक निवेश विकल्प बनी हुई हैं।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कीमतें अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं या गिरावट का दौर कुछ और समय तक जारी रहेगा। अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, जबकि लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए यह अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी पर विचार करने का उपयुक्त समय हो सकता है।

    सोना और चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम का इन धातुओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और आर्थिक संकेतकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला शुक्रवार को थम गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में पहुंच गए। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती घंटे में गिरावट और गहरी होती गई तथा सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार करता दिखाई दिया। हाल के दिनों में बाजार में बनी मजबूत तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने को भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली के कारण संबंधित सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे और कई दिग्गज कंपनियां टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हो गईं। वैश्विक आईटी उद्योग से जुड़े संकेतों और भविष्य के कारोबारी अनुमानों में नरमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया।

    आईटी क्षेत्र के अलावा रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके बावजूद व्यापक बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा और अधिकांश सेक्टर नकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इनकी कमजोरी बड़े सूचकांकों की तुलना में सीमित रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूलना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है और मौजूदा गिरावट को बड़े रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बुनियादी संकेतक अभी भी मजबूत बने हुए हैं। महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और ऊर्जा कीमतों में नरमी जैसे कारक बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    वैश्विक स्तर पर भी मिले-जुले संकेत देखने को मिले। अधिकांश एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते रहे, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहने से भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना बनी हुई है। इससे भविष्य में महंगाई और लागत दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और सेक्टर आधारित प्रदर्शन आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • राजस्थान का रहस्यमयी बुलेट बाबा मंदिर: जहां भगवान नहीं, 350 CC की बुलेट को मानते हैं चमत्कारी देवता

    राजस्थान का रहस्यमयी बुलेट बाबा मंदिर: जहां भगवान नहीं, 350 CC की बुलेट को मानते हैं चमत्कारी देवता


    नई दिल्ली । भारत आस्था, परंपरा और रहस्यों का देश है। यहां ऐसे कई मंदिर हैं जो अपनी अनोखी मान्यताओं के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। राजस्थान के पाली जिले में स्थित बुलेट बाबा मंदिर भी ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है, जहां भगवान की मूर्ति नहीं बल्कि एक रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। हर दिन हजारों श्रद्धालु और मुसाफिर यहां पहुंचकर सुरक्षित यात्रा की कामना करते हैं।

    यह अनोखा मंदिर ओम बन्ना धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह जोधपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर पाली जिले के चोटिला गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर की कहानी करीब तीन दशक पुरानी है और एक दर्दनाक सड़क हादसे से जुड़ी हुई है।

    कहा जाता है कि ठाकुर जोग सिंह राठौड़ के पुत्र ओम सिंह राठौड़ की इसी स्थान पर सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने उनकी रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक को जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया। लेकिन अगले दिन बाइक रहस्यमयी तरीके से थाने से गायब मिली। खोजबीन करने पर वह बाइक उसी स्थान पर खड़ी मिली, जहां दुर्घटना हुई थी।

    पुलिस ने बाइक को दोबारा थाने लाकर इस बार जंजीरों से बांध दिया, लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अगले दिन फिर वही चमत्कार हुआ। बाइक एक बार फिर दुर्घटना स्थल पर पहुंच गई। बताया जाता है कि कई बार ऐसा होने के बाद पुलिस और स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। इस घटना को दैवीय संकेत मानते हुए ओम सिंह राठौड़ के पिता ने दुर्घटना स्थल पर मंदिर का निर्माण करवाया।

    आज मंदिर के गर्भगृह में वही 350 CC रॉयल एनफील्ड बुलेट सुरक्षित रखी गई है। श्रद्धालु इस बाइक को फूल-मालाएं चढ़ाते हैं, नारियल अर्पित करते हैं और सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना करते हैं। खास बात यह है कि इस हाईवे से गुजरने वाले कई वाहन चालक यहां रुककर माथा टेकना शुभ मानते हैं।

    स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बुलेट बाबा का आशीर्वाद लेने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है और यात्रा सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि यह मंदिर सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस घटना की अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान अटूट विश्वास और चमत्कार का प्रतीक है। इतिहास, रहस्य और जनआस्था का यह अनूठा संगम हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

  • नीरज चोपड़ा की वापसी पर दुनिया की नजर, 92.62 मीटर फेंक चुके श्रीलंकाई स्टार रूमेश से आज होगी महामुकाबला

    नीरज चोपड़ा की वापसी पर दुनिया की नजर, 92.62 मीटर फेंक चुके श्रीलंकाई स्टार रूमेश से आज होगी महामुकाबला


    नई दिल्ली । भारतीय एथलेटिक्स प्रेमियों की निगाहें शुक्रवार को दोहा डायमंड लीग 2026 पर टिकी रहेंगी, जहां ओलंपिक और विश्व मंच पर देश का नाम रोशन कर चुके स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा लंबे अंतराल के बाद प्रतिस्पर्धी मैदान में वापसी करेंगे। पिछले साल सितंबर में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के बाद पीठ की चोट के कारण वह किसी बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाए थे। ऐसे में उनकी वापसी को लेकर खेल जगत में उत्साह के साथ-साथ उत्सुकता भी बनी हुई है।

    हालांकि नीरज की राह आसान नहीं होगी। इस बार उनके सामने पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम नहीं होंगे, लेकिन श्रीलंका के उभरते हुए स्टार रूमेश थरंगा पाथिराजे सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े हैं। रूमेश ने इस सीजन रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का शानदार थ्रो कर न केवल अपना नाम 90 मीटर क्लब में दर्ज कराया, बल्कि विश्व जैवलिन इतिहास में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

    24 वर्षीय रूमेश इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं। उनका 92.62 मीटर का थ्रो एशियाई एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उन्होंने इस सीजन कई प्रतियोगिताओं में लगातार 89 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका है और हाल ही में प्रतिष्ठित गोल्डन स्पाइक मीट का खिताब भी अपने नाम किया था।

    दूसरी ओर नीरज चोपड़ा भी दोहा के मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके हैं। मई 2025 में उन्होंने इसी ट्रैक पर पहली बार 90 मीटर की बाधा पार करते हुए 90.23 मीटर का थ्रो किया था। हालांकि उस प्रतियोगिता में जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर के साथ उन्हें पीछे छोड़ दिया था। इस बार नीरज की कोशिश न केवल शानदार वापसी करने की होगी, बल्कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब पहुंचने की भी होगी।

    मुकाबले से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीरज ने कहा कि उन्होंने वापसी को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं की। करीब डेढ़ महीने पहले उन्होंने फिर से नियमित थ्रो करना शुरू किया और अंतिम ट्रेनिंग सत्र के बाद ही दोहा में खेलने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वह खुद को पूरी तरह फिट महसूस कर रहे हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार हैं।

    नीरज और रूमेश के बीच अब तक दो मुकाबले हुए हैं और दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक बार एक-दूसरे को पीछे छोड़ा है। ऐसे में दोनों के बीच हेड-टू-हेड रिकॉर्ड 1-1 से बराबर है। यही वजह है कि इस भिड़ंत को इस सीजन के सबसे रोमांचक जैवलिन मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।
    दोहा डायमंड लीग में केवल नीरज और रूमेश ही नहीं, बल्कि विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, केशोर्न वॉलकॉट, जैकब वाडलेच, कर्टिस थॉम्पसन और जूलियस येगो जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी रहने वाली है।

    भारतीय समयानुसार यह मुकाबला शुक्रवार रात 11 बजे के बाद शुरू होगा। चोट के बाद नीरज की यह वापसी केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले उनकी तैयारी और फिटनेस की भी बड़ी परीक्षा होगी।

  • डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है

    डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है


    नई द‍िल्‍ली । फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की तेजी से बदलती तस्वीर और उसकी वैश्विक भूमिका को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि फ्रांस में बसे भारतीय न केवल दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं बल्कि 21वीं सदी के भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और योगदान भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है और देश ने विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हुआ है जबकि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और आज देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र बनकर उभरा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी एक बड़ी कहानी है। उन्होंने बताया कि देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हुई है और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। हाईवे निर्माण की गति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है जबकि मेट्रो नेटवर्क ने रिकॉर्ड स्तर पर विस्तार किया है। इन प्रयासों ने देश में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और विकास को नई रफ्तार दी है।

    डिजिटल इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक को जनसामान्य तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों नागरिकों को यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई गई है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मेडिकल रिकॉर्ड अब सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हैं जिससे मरीजों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि देश के दूरदराज गांवों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंच जाएगा लेकिन आज यह वास्तविकता बन चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की आकांक्षाओं का नया दौर है जहां लोगों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। अब लोग केवल मूलभूत सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं बल्कि बेहतर जीवन स्तर और विश्वस्तरीय सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। जहां बिजली पहुंची है वहां लोग स्मार्ट जीवनशैली चाहते हैं। जहां रेल पहुंची है वहां हाई स्पीड कनेक्टिविटी की मांग है और जहां इंटरनेट पहुंचा है वहां लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल नवाचार में नेतृत्व की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने नागरिकों के सपनों को साकार करने के साथ साथ भविष्य का मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया के देश विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर साझेदारी की तलाश में हैं। ऐसे समय में भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत विकास नवाचार और वैश्विक सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा और विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगा।

  • रिटायरमेंट से लौटेंगे जॉन सीना? WWE दिग्गज बोले- एलन मस्क ही बदल सकते हैं मेरा फैसला

    रिटायरमेंट से लौटेंगे जॉन सीना? WWE दिग्गज बोले- एलन मस्क ही बदल सकते हैं मेरा फैसला


    नई दिल्ली । WWE के इतिहास के सबसे लोकप्रिय सुपरस्टार्स में शामिल जॉन सीना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भले ही वह आधिकारिक तौर पर इन-रिंग करियर को अलविदा कह चुके हों, लेकिन उनके एक हालिया बयान ने रेसलिंग फैंस के बीच नई उम्मीद जगा दी है। सीना ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें रिटायरमेंट से वापस आने के लिए मना सकता है, तो वह दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क हैं।

    पिछले वर्ष अपने विदाई दौरे के बाद जॉन सीना ने WWE रिंग को अलविदा कह दिया था। उनके अंतिम मुकाबले में उन्हें गुंथर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि सीना ने अपने करियर के आखिरी मैच में टैप आउट किया था। हालांकि रिंग से दूरी बनाने के बावजूद वह WWE से पूरी तरह अलग नहीं हुए हैं और रेसलमेनिया 42 तथा बैकलैश 2026 जैसे बड़े आयोजनों में विशेष भूमिकाओं में नजर आ चुके हैं।

    हाल ही में सैन एंटोनियो में आयोजित स्पेसकॉन कार्यक्रम के दौरान जब एक प्रशंसक ने उनसे पूछा कि क्या वह भविष्य में WWE में वापसी कर सकते हैं, तो सीना ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि वह किसी भी चीज की सौ प्रतिशत गारंटी नहीं दे सकते। लेकिन फिलहाल अगर कोई उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मना सकता है तो वह एलन मस्क हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि इसके लिए मस्क को अपनी अपार संपत्ति का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ेगा। जब तक ऐसा नहीं होता, वह खुद को पूरी तरह रिटायर्ड मानते हैं।

    सीना के इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है। कई फैंस इसे मजाक के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ प्रशंसकों को अब भी उम्मीद है कि WWE का यह दिग्गज किसी खास अवसर पर रिंग में वापसी कर सकता है।

    इस दौरान जॉन सीना ने अपने रिटायरमेंट टूर को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह विचार पूरी तरह उनका अपना था। सबसे पहले उन्होंने ही WWE अधिकारियों के सामने विदाई दौरे का प्रस्ताव रखा था। कंपनी को इस योजना को अंतिम रूप देने और लागू करने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा। सीना का मानना था कि उनके लंबे और सफल करियर का समापन एक यादगार तरीके से होना चाहिए और इसी सोच के साथ उन्होंने यह योजना बनाई।

    उन्होंने ‘द जॉन सीना क्लासिक’ टूर्नामेंट को लेकर भी दिलचस्प जानकारी साझा की। सीना ने बताया कि इस टूर्नामेंट का विचार भी उनका ही था। इसे लेकर WWE के चीफ कंटेंट ऑफिसर ट्रिपल एच के साथ कई दौर की चर्चा हुई। पिछले कई महीनों से इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है और अब इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

    फिलहाल जॉन सीना भले ही रिंग से दूर हों, लेकिन WWE यूनिवर्स में उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। उनके बयान और भविष्य की योजनाओं को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि रिटायरमेंट के बाद भी जॉन सीना WWE की सबसे चर्चित हस्तियों में शामिल हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या भविष्य में कोई ऐसा अवसर आता है जब फैंस उन्हें एक बार फिर रिंग में मुकाबला करते हुए देख सकेंगे।

  • जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में जून का महीना एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए चुनौती लेकर आया है। वर्ष 2022 में जून के महीने में ही एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था और राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था। चार साल बाद जून 2026 में एक बार फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने राजनीतिक संकट गहराता दिखाई दे रहा है। इस बार शुरुआत सांसदों की बगावत से हुई है और अब चर्चा विधायकों की संभावित टूट को लेकर हो रही है।

    हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बागी रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ विधायक भी पाला बदल सकते हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति में तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलने वाले महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान या उसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में उद्धव ठाकरे के लिए अपनी पार्टी के विधायकों और नेताओं को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

    विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं, जबकि विधान परिषद में उसके छह सदस्य हैं। महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर भी उद्धव ठाकरे की पार्टी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी मानी जाती है। कांग्रेस के पास 16 विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के पास 10 विधायक हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 57 विधायक और विधान परिषद में आठ सदस्य हैं, जिससे उनका संगठनात्मक और राजनीतिक आधार कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है।

    इसी बीच शिवसेना के विधायक कृपाल तुमाने के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 20 में से 16 विधायक शिंदे नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी में संभावित असंतोष और टूट की चर्चाओं को हवा मिली है।

    दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा है कि उनकी पार्टी कोई ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं चला रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता या जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। इस बयान को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलते समीकरणों को देखते हुए आने वाले सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि विधायकों में किसी प्रकार की टूट होती है तो इसका असर केवल शिवसेना (यूबीटी) पर ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब मानसून सत्र और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

  • ट्रंप ने युद्ध नायकों को दिया , मेडल ऑफ ऑनर सम्मान समारोह में गूंजा शौर्य

    ट्रंप ने युद्ध नायकों को दिया , मेडल ऑफ ऑनर सम्मान समारोह में गूंजा शौर्य


    नई द‍िल्‍ली । अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के भीतर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन पूर्व सैनिकों को देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान मेडल ऑफ ऑनर प्रदान किया। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया गया जिन्होंने अलग अलग युद्धों में अदम्य साहस और असाधारण कर्तव्य निष्ठा का परिचय दिया। सम्मान पाने वालों में रिटायर्ड मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर रिटायर्ड आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी तथा मरणोपरांत सम्मानित मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू रिप्ले शामिल रहे। समारोह के दौरान पूरे माहौल में शौर्य और बलिदान की गूंज महसूस की गई तथा अमेरिकी सैन्य इतिहास की गौरवशाली परंपरा को याद किया गया।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था का आधार उसके वीर सैनिक हैं जो अपने जीवन को जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मेडल ऑफ ऑनर उन चुनिंदा लोगों को मिलता है जिन्होंने युद्ध के मैदान में असाधारण बहादुरी दिखाई है। इस अवसर पर उन्होंने तीनों सैनिकों के योगदान को प्रेरणादायक बताया और कहा कि उनका साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है।

    जेम्स कैपर्स जूनियर को 1967 में वियतनाम युद्ध के दौरान किए गए एक जोखिम भरे टोही मिशन के लिए यह सम्मान दिया गया। उस समय वे सेकंड लेफ्टिनेंट थे और उनकी टीम को दुश्मन के बड़े ठिकाने की जानकारी जुटाने का कार्य सौंपा गया था। मिशन के दौरान उनकी यूनिट पर लगातार हमले हुए और कई सैनिक घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैपर्स ने नेतृत्व संभाले रखा और अपने साथियों को सुरक्षित निकालने की रणनीति तैयार की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हवाई सहायता का समन्वय किया और अपने मिशन को पूरा करने की कोशिश जारी रखी।

    मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू रिप्ले को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया। वर्ष 1972 में उत्तरी वियतनाम के हमले के दौरान उन्होंने एक महत्वपूर्ण पुल को नष्ट करने का साहसिक निर्णय लिया ताकि आगे बढ़ रही दुश्मन सेना को रोका जा सके। भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने विस्फोटक सामग्री स्थापित की और लगातार कई घंटों तक जोखिम उठाते रहे। उनके इस कार्य ने दुश्मन की रणनीति को विफल कर दिया और कई सैनिकों की जान बचाई।

    दूसरी ओर मेजर निकोलस डॉकरी को 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में हुए संघर्ष के दौरान उनके अद्वितीय साहस के लिए सम्मानित किया गया। तालिबान के हमले के बीच उन्होंने घायल साथियों की जान बचाने के लिए स्वयं को खतरे में डाला। उन्होंने न केवल मोर्चे पर नेतृत्व किया बल्कि अपने घायल साथी को बचाने के लिए अपने शरीर से सुरक्षा कवच की तरह कार्य किया। उनकी बहादुरी ने युद्ध के मैदान में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।

    समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका अपने उन नायकों का सदैव ऋणी रहेगा जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन दांव पर लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा है तब ऐसे वीरों का सम्मान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

  • मई 2026 बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट: ‘करुप्पू’ बनी नंबर-1, साउथ फिल्मों का दबदबा, टॉप-5 में कई बड़े नाम शामिल

    मई 2026 बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट: ‘करुप्पू’ बनी नंबर-1, साउथ फिल्मों का दबदबा, टॉप-5 में कई बड़े नाम शामिल


    नई दिल्ली । मई 2026 भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बेहद शानदार साबित हुआ। इस महीने रिलीज हुई कई बड़ी फिल्मों ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी रिकॉर्डतोड़ कमाई की। अब ओरमैक्स मीडिया द्वारा जारी की गई मई 2026 की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि इस बार साउथ सिनेमा का जलवा सबसे ज्यादा देखने को मिला। टॉप-5 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में तमिल, मलयालम, हिंदी, हॉलीवुड और मराठी सिनेमा की फिल्मों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

    इस सूची में पहला स्थान तमिल सुपरस्टार सूर्या की फिल्म ‘करुप्पू’ ने हासिल किया है। 14 मई को रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 299 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार किया। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। आरजे बालाजी के निर्देशन में बनी यह फैंटेसी एक्शन ड्रामा फिल्म पुलिस व्यवस्था, भ्रष्ट न्याय प्रणाली और समाज में कमजोर वर्गों के शोषण जैसे गंभीर मुद्दों को उठाती है। फिल्म में सूर्या और तृषा कृष्णन की जोड़ी को भी काफी सराहा गया।

    दूसरे स्थान पर मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ रही। 21 मई को रिलीज हुई इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म ने 133 करोड़ रुपये की कमाई की। जीतू जोसेफ के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया। मोहनलाल के साथ मीना, अंसिबा हसन, एस्तेर अनिल और आशा शरथ जैसे कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।

    तीसरे स्थान पर बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख की ऐतिहासिक फिल्म ‘राजा शिवाजी’ रही। 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म ने भी 133 करोड़ रुपये का कारोबार किया। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और संघर्ष पर आधारित इस फिल्म में रितेश देशमुख के अलावा जेनेलिया देशमुख, सलमान खान, संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन और भाग्यश्री जैसे कई बड़े कलाकार नजर आए। फिल्म को इसके भव्य निर्माण और दमदार प्रस्तुतिकरण के लिए सराहा गया।

    चौथे नंबर पर हॉलीवुड फिल्म ‘ऑब्सेशन’ रही, जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 102 करोड़ रुपये की कमाई की। मनोवैज्ञानिक हॉरर और थ्रिलर शैली की इस फिल्म ने अपनी रहस्यमयी कहानी और सस्पेंस से दर्शकों को बांधे रखा। फिल्म एकतरफा प्रेम और जुनून के खतरनाक परिणामों को बेहद प्रभावी तरीके से दिखाती है।

    पांचवें स्थान पर मराठी फिल्म ‘देओल बैंड 2’ रही, जिसने 90 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह फिल्म ग्रामीण महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं, आत्महत्या और आस्था-अनास्था के संघर्ष को केंद्र में रखती है। निर्देशक प्रवीण तारडे की इस फिल्म को सामाजिक संदेश और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए काफी सराहना मिली।

    मई 2026 की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि अब दर्शक केवल स्टार पावर नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और प्रभावशाली कंटेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि विभिन्न भाषाओं की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय सिनेमा की विविधता और ताकत को फिर से साबित किया है।

  • Aaj Ka Rashifal 19 June 2026: कुंभ राशि वालों को मिलेगी खुशखबरी, कन्या राशि के लोग खर्चों पर रखें नियंत्रण

    Aaj Ka Rashifal 19 June 2026: कुंभ राशि वालों को मिलेगी खुशखबरी, कन्या राशि के लोग खर्चों पर रखें नियंत्रण


    नई दिल्ली । 19 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कई राशियों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है। कुछ जातकों को करियर और कारोबार में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं, जबकि कुछ को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में भी कई राशियों को लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन नई शुरुआत और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा तथा नई खरीदारी के योग बन सकते हैं।

    वृष राशि वालों के लिए लंबित कार्यों को पूरा करने का समय है। अनुभवी लोगों की सलाह लाभकारी साबित होगी। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। कार्य संबंधी यात्राएं सफलता दिला सकती हैं।

    मिथुन राशि के जातकों को पेशेवर और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखने का अवसर मिलेगा। नई जिम्मेदारियां सफलता के साथ निभाएंगे। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात हो सकती है।

    कर्क राशि के लिए दिन शुभ संकेत लेकर आया है। घर में मांगलिक कार्यों की योजना बन सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और धन लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। करियर में भी नई संभावनाएं सामने आएंगी।

    सिंह राशि वालों का प्रभाव और सम्मान बढ़ेगा। नेतृत्व क्षमता के कारण कार्यस्थल पर विशेष पहचान मिलेगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता प्राप्त होगी और आर्थिक लाभ के योग बने रहेंगे।

    कन्या राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है। बजट से अधिक खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। विदेश, कानून या लंबी दूरी से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होगी। धैर्य और समझदारी से काम लें।

    तुला राशि वालों के लिए करियर और व्यापार में उन्नति के संकेत हैं। आत्मविश्वास से लिए गए फैसले लाभदायक साबित होंगे। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं।

    वृश्चिक राशि के लोगों को पद, प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि मिलने के योग हैं। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ पहुंचा सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।

    धनु राशि के लिए दिन भाग्यवृद्धि का संकेत दे रहा है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। धन संबंधी शुभ समाचार मिलने की संभावना है और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा।

    मकर राशि वालों को नियम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। जोखिम भरे निवेश या बड़े फैसलों से फिलहाल दूरी बनाए रखें। स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए दिन काफी अनुकूल रहेगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में आपकी उपलब्धियों की सराहना होगी। हालांकि आर्थिक लेनदेन में हड़बड़ी से बचें और सोच-समझकर निर्णय लें।

    मीन राशि वालों को मेहनत और सतर्कता के साथ आगे बढ़ना होगा। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। वाणी में संयम रखें और सहयोगात्मक रवैया अपनाएं। इससे सफलता के नए रास्ते खुलेंगे।

    कुल मिलाकर 19 जून का दिन अधिकांश राशियों के लिए प्रगति और अवसर लेकर आएगा। सही निर्णय, धैर्य और सकारात्मक सोच आपके लिए सफलता के द्वार खोल सकती है।