Author: bharati

  • तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने शनिवार देर रात चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा कि तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित सत्ता-साझाकरण गठबंधनों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी के 40 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

    चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने इन वार्ताओं को “रचनात्मक और पार्टी को मजबूत करने पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों तरह के सत्र आयोजित किए ताकि राज्य के नेता “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सकें।”

    हालांकि गठबंधन या सत्ता-साझाकरण की मांगों के विशिष्ट विवरण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन श्री वेणुगोपाल ने पुष्टि की कि राज्य इकाई की चिंताओं को विस्तार से सुना गया है। उन्होंने कहा, “बैठक ने सर्वसम्मति से माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को चुनावी रणनीति से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

    पार्टी हाई कमान पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर निर्णय लेगा।”

    पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सार्वजनिक अटकलों को रोकने के लिए हाई कमान ने बयानों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। श्री वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सभी नेताओं को अनुशासित रहना चाहिए और सोशल मीडिया सहित किसी भी मंच पर व्यक्तिगत शिकायतों या अटकलों को साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेताओं को एक सुर में बोलने की सलाह दी गई है।”

    पुडुचेरी के संबंध में नेतृत्व ने घोषणा की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी 21 जनवरी से एक बड़ी ‘पदयात्रा’ शुरू करेगी। यह मार्च पूरे राज्य को कवर करेगा, जिसमें वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, जहां स्थानीय इकाइयां कथित तौर पर शासन और सीटों के बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं।

  • MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले

    MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले


    हरदा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के हरदा जिले (Harda district) में एकलव्य आवासीय विद्यालय (Eklavya Residential School) के 300 से अधिक स्टूडेंट खराब खाने और सुविधाओं से परेशान होकर शनिवार सुबह हॉस्टल की दीवार फांदकर कलेक्टर (Collector) से मिलने निकल पड़े। कड़ाके की ठंड में वे करीब 40 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट की ओर पैदल ही चल दिए। जब छात्र लगभग 8 से 9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब जिला प्रशासन को इसकी खबर मिली। इसके बाद जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने हाईवे पर ही छात्रों को रोका और उनकी समस्याओं को सुलझाने का भरोसा देकर उन्हें बसों से वापस स्कूल भेजा।


    डीएम ने बीच में रोका और शिकायतें सुनीं

    अधिकारियों ने बताया कि जब छात्र लगभग 8-9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब प्रशासन एक्टिव हुआ और जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने सोडलपुर के पास नेशनल हाईवे पर ही उन्हें रोक लिया। उन्होंने छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया और उन्हें बसों के जरिए वापस स्कूल भिजवाया। स्टूडेंट का आरोप है कि स्कूल में काफी समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी है खाने की क्वालिटी बहुत खराब है और वहां साफ-सफाई की हालत भी बहुत बुरी है।


    क्या की शिकायतें?

    छात्रों का आरोप है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि वहां न तो खाना अच्छा मिलता है और न ही साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। छात्रों ने यह भी कहा कि जब वे इन समस्याओं की शिकायत करते हैं तो हॉस्टल की प्रिंसिपल उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती हैं। एक छात्र ने पत्रकारों को बताया कि बार-बार शिकायत करने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्हें मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।


    डीएम ने दिया भरोसा

    स्टूडेंट ने जिलाधिकारी से बातचीत के दौरान प्राचार्य को हटाए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने स्टूडेंट को भरोसा दिया कि खाने की गुणवत्ता जांच करने के लिए एक पालक समिति बनाई जाएगी और छात्रों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक ‘संपर्क समिति’ भी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राचार्य के खिलाफ भी छात्रों की शिकायतें सामने आई हैं। बच्चों की परेशानी को देखते हुए मैं स्वयं मौके पर पहुंचा।


    मामले की होगी जांच

    जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने कहा कि छात्रों को समझाकर वापस भेज दिया गया है। पूरे मामले की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, कांग्रेस के स्थानीय विधायक अभिजीत शाह ने हास्टल में बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें रसोई में रखी खाद्य सामग्रियों में कई खामियां मिलीं। जब पीने के पानी की टंकी की जांच की गई तो उसके अंदर पेड़ की जड़ें मिलीं। उन्होंने इसका एक वीडियो भी साझा किया। बता दें कि मध्य प्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

  • असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को असम के नगांव जिले में 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इस कार्यक्रम को लेकर असम में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज के समय में ‘मोदी मतलब बिजनेस’ और ‘मोदी मतलब विकास’ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का काम तेजी से हो रहा है, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प भी साकार होता है।”

    विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम को देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल करना हमारा लक्ष्य है और प्रधानमंत्री लगातार इसमें मदद कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, “पीएम मोदी ने अब तक करीब 36 बार असम का दौरा किया है और पूर्वोत्तर में लगभग 75 बार आए हैं। उनका दृष्टिकोण हमेशा दीर्घकालिक और विकासोन्मुखी होता है।”

    स्थानीय लोगों का कहना है कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल आने-जाने में सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। “यह प्रोजेक्ट असम के लिए एक नया युग लेकर आएगा और यातायात को बेहतर बनाएगा,” स्थानीय व्यवसायी ने कहा।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री का स्वागत करने पहुंचे। एक महिला ने कहा, “यह गर्व की बात है कि इतने सालों बाद पीएम मोदी असम आ रहे हैं। उनके काम और असम के प्रति उनके प्रेम के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।”

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विज़न असली विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर केंद्रित है। उनका यह कार्यक्रम न केवल असम के लोगों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी असम में 6,950 करोड़ रुपये के काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य में विकास और रोजगार को बढ़ावा देंगे।

  • उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर

    उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर


    मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव में बीजेपी और शिवसेना शिेंदे गुट की बड़ी जीत के बाद उद्धव ठाकरे को करारा झटका लगा है। हालांकि वह अब भी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि मेयर उनका ही बनेगा। उनके इस बयान के बाद शिंदे गुट के पार्षदों को रिजॉर्ट भेज दिया गया।
    देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की 89 सीटों पर अकेले बीजेपी ने ही कब्जा किया है। ऐसे में पूरी संभावना है कि मेयर बीजेपी का होगा। लेकिन उद्धव ठाकरे के दावे ने गहमा-गहमी बढ़ा दी है।

    पिछले 25 साल से बीएमसी में अविभाजित शिवसेना का कब्जा था। हालांकि शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद समीकरण बदल गए. इस बार के चुनाव में उद्धव सेना को कुल 65 सीटें मिली हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। अगर दोनों की सीटें जोड़ दी जाएं तो उनकी 94 सीटें हो जाती हैं। वहीं बीजेपी की 89 ही सीटें हैं। ऐसे में अगर शिवसेना बंटी ना होती तो बीजेपी उससे पीछे रह जाती।

    शिवसेना (UBT) नेता सुनील प्रभु ने कहा कि शिवसेना के बंटने की वजह से ही बीजेपी की जीत हो सकती है। पू्र्व कांग्रेस नेता संजय झा ने कहा कि अब भी शिवसेना की ताकत का लोहा सबको मानना चाहिए। अगर शिवसेना एक होती तो बीएमसी में बीजेपी का दांव ही ना लग पाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दोनों शिवसेना सम्मान बचाना चाहती हैं तो साथ आएं और बीजेपी को विपक्ष में बैठा दें।

    उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का मेयर अब भी बन सकता है। इसके बाद शिंदे ने अपने पार्षदों को रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया। बीजेपी और शिंदे सेना की कुल सीटें 118 हैं। वहीं 227 सीटों वाली महानगरपालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। इस बार अजित पवार ने अकेले ही चुनाव लड़ा था।

    उन्होंने कुल तीन सीटें जीती हैं। अगर उनका समर्थन मिलता है तो यह संख्या 121 हो जाएगी।

    दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की कुल सीटें 71 हैं। इसके अलावा एक सीट एनसीपी (शरद पवार) ने जीती है। कांग्रेस अगर उनके साथ आती है तो 24 सीटें और जुड़ जाएंगी। अगर बीजेपी विरोधी बाकी दल जैसे कि ऐआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी का भी साथ मिलता है तो यह संख्या 106 हो जाएगी। अब बहुमत में केवल 8 सीटों की कमी रह जाती है।

    बतादें कि दो दशकों के बाद बाल ठाकरे के बेटे उद्धव और भतीजे राज ठाकरे साथ आए थे। इसके बाद भी उनके साथ आने का फायदा नहीं मिल पाया। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह ठाकरे परिवार की बड़ी हार है। हालांकि एकनाथ शिंदे की पार्टी से तुलना करें तो उद्धव की पार्टी काफी आगे है। उद्धव ठाकरे ने 65 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में बीएमसी में उद्धव ठाकरे मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर

    ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर


    नई दिल्ली।
    फरीदाबाद (Faridabad) के अल फलाह विश्वविद्यालय (Al Falah University) ने अन्य विशेषज्ञों के साथ तीन डॉक्टरों की नियुक्ति (Appointment Three Doctors) बिना किसी पुलिस जांच या वेरिफिकेशन के की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) की जांच में यह बात सामने आई है कि इन 3 डॉक्टरों में से दो को एनआईए ने गिरफ्तार किया है जबकी तीसरा डॉक्टर उमर उन नबी नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिला के पास हुए धमाके में कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर के रूप में शामिल था।


    इन्हें बनाया मुख्य आरोपी

    विश्वविद्यालय के मालिक के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान ED ने कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों के बयानों को अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इस मामले में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और सभी संस्थानों को चलाने वाले अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन दोनों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


    जमीन और इमारत जब्त

    ईडी ने लगभग 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट पर छात्रों की फीस से अवैध तरीके से पैसा इकट्ठा करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन पर अपने संस्थानों की मान्यता और कागजों के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में केस चलाने की मांग की गई है। ईडी ने बताया कि उसने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है जिसकी कीमत लगभग 140 करोड़ रुपये है।


    नियमित शिक्षक दिखाकर ली एनएमसी से मंजूरी

    अदालत ने अभी तक ईडी की चार्जशीट का संज्ञान नहीं लिया है। अधिकारियों ने चार्जशीट के आधार पर जानकारी दी है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर केवल कागजों पर तैनात थे। उन्हें 22 दिन पंच या हफ्ते में दो दिन अटेंडेंस जैसी शर्तों पर नियमित शिक्षक दिखाकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जरूरी मंजूरी ली गई थी ताकि मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधा देखभाल इकाई बिना किसी बाधा के चलती रहे।


    बिना पुलिस सत्यापन आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति

    ईडी ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार का बयान दर्ज किया है। रजिस्ट्रार ने बयान में कहा है कि मेडिकल कॉलेज के आरोपी डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस सत्यापन के नियुक्त किया गया था। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने कहा है कि जो डॉक्टर आतंक से जुड़े मामलों में शामिल बताए जा रहे हैं वे उनके कार्यकाल में नियुक्त किए गए। इनमें अक्टूबर 2021 से डॉ. मुजम्मिल गनई, अक्टूबर 2021 से डॉ. शाहीन सईद और मई 2024 से डॉ. उमर नबी शामिल हैं।


    जवाद अहमद सिद्दीकी ने नियुक्ति को दी मंजूरी

    कुलपति और प्राचार्य ने एजेंसी को बताया कि नियुक्तियों की सिफारिश विश्वविद्यालय के मानव संसाधन प्रमुख ने की थी। इन्हें चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने मंजूरी दी थी। धमाके की साजिश के आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति के समय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया गया। चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपने बयान में कहा है कि उनका किसी आतंकवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है।


    कई डॉक्टर अस्थायी नियुक्त

    ईडी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति पर सिद्धिकी का कंट्रोल था। कुछ को फेक एक्सपीरियंस लेटर भी दिए गए। सिद्धिकी ने जून 2025 में मेडिकल कॉलेज की अंतिम एनएमसी जांच के दौरान भी धोखा देना जारी रखा। ईडी ने निष्कर्ष निकाला कि कई डॉक्टर केवल नियामक निरीक्षण की जरूरत के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए थे। डॉक्टरों के रोजगार की शर्तें भी कई तरह से फर्जी थीं।


    फेक मरीज किए भर्ती

    आरोपपत्र में संलग्न कुछ दस्तावेज और वीडियो चैट से पता चलता है कि एनएमसी निरीक्षण से लगभग 3 हफ्ते पहले अस्पताल में मरीज, स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। रिकॉर्ड से पता चला कि निरीक्षण से पहले फेक मरीज भर्ती किए गए। सिद्धिकी ने धनशोधन मामले में प्रमुख भूमिका निभायी। इस मामले में कथित अपराध से प्राप्त राशि के 493.24 करोड़ रुपये होने का पता चला है जो छात्रों से वार्षिक ट्यूशन और परीक्षा शुल्क के रूप में वसूल की गई।

  • शहडोल में नेशनल हाईवे पर धू-धू कर जला कोयले से भरा ट्रक: टक्कर के बाद भड़की आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान

    शहडोल में नेशनल हाईवे पर धू-धू कर जला कोयले से भरा ट्रक: टक्कर के बाद भड़की आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान


    शहडोल । जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे-43 पर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। धुरवार टोल प्लाजा के पास कोयले से लदे एक ट्रक की टक्कर आगे चल रहे वाहन से हो गई, जिसके तुरंत बाद ट्रक के इंजन में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते ट्रक का अगला हिस्सा आग के गोले में तब्दील हो गया। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और ट्रक से कूदकर अपनी जान बचा ली।

    टक्कर के बाद इंजन में भड़की लपटें जानकारी के अनुसार, कोयला लोड ट्रक बुढ़ार से कटनी की ओर जा रहा था। रात करीब 12 बजे धुरवार टोल प्लाजा के समीप ट्रक अपने आगे चल रहे एक ट्रैक चेसिस वाहन से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक के इंजन में शॉर्ट सर्किट हुआ और अचानक आग लग गई। टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों ने जैसे ही ट्रक से उठती आग की लपटें देखीं, उन्होंने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचित किया।

    मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू सूचना मिलते ही सोहागपुर थाना पुलिस दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि आग ट्रक के इंजन तक ही सीमित रही और पीछे लदे कोयले तक नहीं पहुँच पाई, अन्यथा एक बड़ा धमाका या भीषण क्षति हो सकती थी। इस अग्निकांड में ट्रक का इंजन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है।

    हाइवे पर थमी रफ्तार, लगा लंबा जाम मुख्य हाईवे पर ट्रक में आग लगने और बीच सड़क पर वाहन के खड़े होने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। शहडोल-बुढ़ार हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जाम की स्थिति निर्मित हो गई। पुलिस ने आग बुझने के बाद क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त ट्रक को सड़क किनारे करवाया और यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

  • कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने ड्रैगन की धरती से ट्रंप को दिखाई आंखें

    कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने ड्रैगन की धरती से ट्रंप को दिखाई आंखें

    वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच यूरोपीय देशों के अलावा अब अमेरिका के पड़ोसी देश कनाडा ने भी आंखें दिखानी शुरू कर दी है। चीन की यात्रा पर पहुंचे कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ किया कि ओटावा किसी भी सूरत में ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान का समर्थन नहीं करता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कनाडा और चीन के बीच चर्चा हुई है। इस पर दोनों देशों के विचार एक जैसे हैं।

    बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के संबोधित करते हुए कार्नी ने अपने नाटो सहयोगी देश डेनमार्क को अपने पूर्ण समर्थन का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि नाटो का सामूहिक रक्षा सिद्धांत किसी अपरिवर्तनीय है। उन्होंने कहा, “हम डेनमार्क के साथ नाटो के साझेदार हैं।

    हमारी पूर्ण साझेदारी कायम है। अनुच्छेद 5 और अनुच्छेद 2 के तहत हमारे दायित्व कायम हैं और हम उनका पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”

    कार्नी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा की थी और कहा कि संप्रभुता के मुद्दे पर उनके विचार काफी हद तक एक जैसे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने ग्रीनलैंड की स्थिति और डेनमार्क के लोगों की संप्रभुता के बारे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है। कनाडा और चीन के विचार इस मामले पर काफी हद तक एक समान हैं।” कनाडा के रुख को दोहराते हुए, कार्नी ने कहा कि डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को बाहरी दबाव के बिना अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार होना चाहिए।

    आपको बता दें, कनाडा के प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने खुले आम अन्य देशों को धमकाते हुए कहा था कि अगर कोई देश उनके ग्रीनलैंड समझौते के खिलाफ जाता है, या उसका समर्थन नहीं करता है, तो उसके ऊपर वह टैरिफ लगा सकते हैं।

    दरअसल, ट्रंप बार-बार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देते हुए ग्रीन लैंड को अमेरिकी प्रभुत्व में लाने की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में उन्होंने सैन्य शक्ति के प्रयोग का विकल्प भी खुला रखा है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और अब डेनमार्क की जमीन पर अमेरिका की नजर से यूरोपीय देश पिसते नजर आ रहे हैं।
    ग्रीनलैंड को खरीदना चाहता है अमेरिका: रुबियो

    ट्रंप के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी खुले तौर पर ग्रीनलैंड को लेकर कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र को खरीदना चाहता है। हालांकि उनके इस प्रस्ताव को ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों प्रशासनों ने सिरे से खारिज कर दिया था। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण से नाटो का अंत हो जाएगा।

    ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि अमेरिकी नियंत्रण के बिना ग्रीनलैंड रूस या चीन के प्रभाव में आ सकता है, जिसे आर्कटिक विशेषज्ञों ने निराधार बताया है। हालांकि चीन खुद को “निकट-आर्कटिक राज्य” कहता है, विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में बीजिंग की बढ़ती उपस्थिति में कनाडा के पास और अलास्का के आसपास रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं।

    रूस और अमेरिका के बीच पिसते यूरोपीय देश

    दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की गोदी में बैठे यूरोपीय देशों ने अब रूस के साथ सीधी बातचीत का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। कनाडा के पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फैड्रिक मर्त्ज ने भी रूस के साथ बातचीत करने के प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।
    कनाडा और ट्रंप का विवाद

    अमेरिका और कनाडा दोनों ही देश एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संबंध साझा करते हैं। हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार उन्होंने ऐसी बात कही है, जो कनाडाई लीडरशिप के लिए असहज करने वाली स्थिति की वजह बनी है। पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री को ट्रंप बार-बार गवर्नर कहकर संबोधित करते रहे हैं। उनका तात्पर्य कनाडा को भी अमेरिका में 51वें राज्य को रूप में समाहित करने से था।

  • सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…

    सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर फिर खोला मोर्चा, कहा- गोविंदा को कभी माफ नहीं करूंगी, सतर्क हो जा बेटा…


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित कपल सुनीता आहूजा और गोविंदा लंबे समय से अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। कई बार तलाक की अफवाहें आईं, लेकिन दोनों ने उन्हें नकार दिया। वहीं अब सुनीता ने एक बार फिर गोविंदा को लेकर शॉकिंग स्टेटमेंट दिया है, जिसमें उन्होंने गोविंदा के अफेयर और रिश्ते पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।

    सुनीता ने मिसमालिनी को दिए इंटरव्यू के प्रोमो में कहा, मैं गोविंदा को माफ नहीं करूंगी। मैं नेपाल की हूं।

    इसके बाद उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, खुखरी निकाल दूंगी, ना तो सबकी हालत खराब हो जाएगी। इसलिए बोलती हूं, सतर्क हो जा बेटा अभी भी।
    सुनीता ने आगे बताया कि गोविंदा के आसपास ऐसी लड़कियां अक्सर आती हैं, लेकिन उन्होंने कहा, तुम थोड़ी बेवकूफ हो। तुम 63 के हो गए हो। तुम्हें अभी टीना की शादी करवानी है, यश का करियर है।
    गोविंदा के बेटे यश के करियर में उनके कम शामिल होने पर सुनीता ने कड़ा रुख दिखाया।
    उन्होंने कहा कि गोविंदा ने बेटे की मदद नहीं की और खुद उनसे भी कोई सहयोग नहीं मांगा। उन्होंने कहा, “मैंने उसके मुंह पर बोला कि तू बाप है कि क्या है?

    पिछले साल गणेश चतुर्थी पर सुनीता ने तलाक को लेकर कहा था कि मीडिया उन्हें अलग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा था, हमको साथ में देखकर… अगर कुछ होता तो इतने नजदीक थोड़ी दिखते? हमारी दूरियां होती हैं। कोई हम दोनों को अलग नहीं कर सकता। मेरा गोविंदा सिर्फ मेरा है और किसी का नहीं।सूत्रों के मुताबिक सुनीता अपने व्लॉग और इंटरव्यू में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते और अनबन पर खुलकर बात करती हैं, लेकिन गोविंदा इस पर कभी प्रतिक्रिया नहीं देते।

  • PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि

    PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने विभाजन के दौरान मालदा (Malda) को भारत (India) में शामिल कराने में भूमिका निभाने को लेकर अनुभवी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय (Shivendu Shekhar Rai) को अपने भाषण के दौरान श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राय को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। शिवेंदु के बेटे एवं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय (Sukhendu Shekhar Roy) ने संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की है।


    शिवेंदु शेखऱ के प्रयास से बचा मालदा

    मोदी ने शनिवार को मालदा में एक जनसभा में अपने भाषण की शुरुआत शिवेंदु शेखर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने 1947 में शिवेंदु शेखर के योगदान को याद किया जब मुस्लिम लीग द्वारा जिले को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की मांगों के बीच मालदा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।’’ उनके इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित हो गये।

    इससे पूर्व दिन में, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कार्यक्रम में पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की एक फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र तृणमूल सांसद हैं।


    श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे शिवेंदु शेखर

    स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के एक प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय, राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी व्यापक लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। वह विश्वविद्यालय के दिनों से ही शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी थे और विभाजन वार्ता के दौरान उन्होंने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    उनके बेटे सुखेन्दु शेखर राय का कहना है कि जब मालदा को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना आसन्न प्रतीत हुई, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता, प्रख्यात बैरिस्टर एन सी चटर्जी से संपर्क करके इस कदम को चुनौती देने के प्रयास शुरू किए।

    सुखेन्दु शेखर राय के अनुसार चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता को सुरक्षित रखने में व्यस्त थे, इसलिए शिवेंदु शेखर राय ने फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह दी और उन्हें बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

    राज्यसभा सदस्य ने बताया कि बिधु शेखर शास्त्री और इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भी आयोग के सामने प्रस्तुत किये गये ज्ञापन तैयार करने में सहायता की।लप्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने संयमित लेकिन भावुक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘‘यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

    उन्होंने कहा कि मालदा भारत में इसलिए बना हुआ है क्योंकि उनके पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘कोई राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढालने या अस्वीकार करने की कोशिश कर सकता है, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के पुत्र के रूप में, जिन्होंने मालदा को भारत में बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, अगर प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो क्या मुझे दुखी होना चाहिए? बिल्कुल नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।’’ मोदी द्वारा भाजपा के मंच से तृणमूल सांसद के पिता का जिक्र करना राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन सुखेन्दु शेखर राय ने इसे समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर समझा। उन्होंने कहा, ‘‘यह मालदा के विभाजन काल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।’’

  • बांग्लादेश में चुनाव से पहले मौलाना का भड़काऊ भाषण, बोला-हिंदुओं को वोट देना हराम, मंदिरों को तोड़ दो

    बांग्लादेश में चुनाव से पहले मौलाना का भड़काऊ भाषण, बोला-हिंदुओं को वोट देना हराम, मंदिरों को तोड़ दो


    ढाका। बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार और हिंसा जारी है। फरवरी में होने वाले इलेक्शन से पहले एक से बढ़कर एक खतरनाक भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं। मौलानाओं ने मानो हिंदुओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हुआ है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में एक मौलाना ‘हिंदुओं को वोट देना हराम’ बता रहा है तो एक वीडियो में एक नेता को “बांग्लादेश से मंदिरों को खत्म करने” की बात कहते सुना जा रहा है। बांग्लादेश में मौलाना अपनी सभाओं में हिंदुओं के खिलाफ लगातार भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं।

    जिस मौलाना का वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उससे एक सवाल पूछा जाता है कि “क्या चुनाव में किसी हिंदू उम्मीदवार को वोट दिया जा सकता है, क्या हिंदू पार्टी को वोट देना चाहिए?” इस सवाल पर मौलाना बिल्कुल है कि “नहीं ये बिल्कुल जायज नहीं है।” इस सवाल पर पहले मौलाना को व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ हंसते देखा जा रहा है और फिर वो कहता है कि ‘हिंदू को वोट देना जायज नहीं है।’ इसके बाद वो अपनी बात को फिर से दोहराता है कि ‘हिंदू को वोट देना जायज नहीं है।’ आगे वो कहता है कि ‘हिंदुओं, काफिरों को वोट देना किसी भी तरीके से जायज नहीं है।’ प्रोग्राम के दौरान वह घोषणा करता है कि किसी भी हिंदू उम्मीदवार या “काफिर” को वोट देना हराम है, यानी इस्लाम में मना है।

    बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ मुहिम
    ये वीडियो कब का है, नवभारत टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है। लेकिन एक और क्लिप में, मौलवियों को हिंदू धार्मिक स्थलों और संस्थानों के खिलाफ खुलेआम धमकियां देते हुए सुना जा सकता है। दूसरे वीडियो में एक शख्स को बांग्लादेश से हिंदुओं को मिटाने, सारे मंदिरों को नष्ट करने का आह्नान करते सुना जा सकता है। वो कहता है कि “बांग्लादेश में, मंदिर नष्ट करने के लिए हैं, उनकी मूर्तियां तोड़ देने के लिए है। कोई भी हिंदू बांग्लादेश में नहीं रह सकता, कोई भी इस्कॉन नहीं रह सकता। दिल्ली के दलालों को दिल्ली वापस चले जाना चाहिए।” ये वीडियो उस वक्त सामने आए हैं, जब 2024 के अगस्त में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसक घटनाएं शुरू हो गई। हाल के हफ्तों में दर्जनों हिंदुओं के घरों को तोड़ दिया गया है और कई घरों को बाहर से बंद कर आग लगा दिया गया है।

    बांग्लादेश में पिछले एक सवा महीने में कई हिंदुओं की भीड़ ने हत्या कर दी है। कई देशों ने बांग्लादेश में हिंदुओं से होने वाली हिंसा की आलोचना की है, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार लगातार ऐसे तत्वों का समर्थन कर रही है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी बेलगाम हो चुके हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम पांच हिंदू पुरुषों की हत्या कर दी गई है। जिसके बाद भारत ने बांग्लादेश से देश में सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती से निपटने को कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि “हम चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार होने वाले हमलों का एक परेशान करने वाला पैटर्न देख रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से “तेजी और सख्ती से” निपटा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सांप्रदायिक हमलों को निजी दुश्मनी या राजनीतिक मतभेदों से जोड़ने की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति रही है। जायसवाल ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि “ऐसी अनदेखी अपराधियों को और बढ़ावा देती है और अल्पसंख्यकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है।”